इसी के साथ मई 2025 से नियुक्ति की बाट जोह रहे अभ्यर्थियों के विद्यालयों में तैनाती का रास्ता साफ हो गया है। अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जा चुका है जबकि अब केवल विभागीय स्तर पर प्रमाणपत्रों के सत्यापन के बाद उनके नियुक्ति पत्र निर्गत करने की प्रक्रिया शेष है।
कोर्ट के आदेश के बाद चयनित अभ्यर्थियों को दीपावली से पहले बड़ा तोहफा मिल गया है। कोर्ट ने ओबीसी अभ्यर्थी से संबंधित क्षैतिज आरक्षण से संबंधी एक मामले को खारिज कर दिया है जबकि चार अन्य मामलों में चयनित अभ्यर्थियों को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने चार पदों को रिक्त रखने के भी निर्देश भी दिए हैं।
मंगलवार को न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी की एकलपीठ में अभ्यर्थी अरशद अली व अन्य की याचिका पर सुनवाई हुई। जिसमें ओबीसी चयनित अभ्यर्थियों को अधिक अंक होने पर सामान्य में चयन नहीं करने को चुनौती दी गई थी। इस मामले में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से कहा गया कि चयनित अभ्यर्थियों के टीईटी में अंक कम थे।
दरअसल उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से 18 अगस्त 2024 को एलटी सहायक अध्यापक पदों के लिए लिखित परीक्षा आयोजित की गई। इसके बाद आयोग की ओर से चयनित अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की 13 जनवरी से 28 जनवरी तक जांच की गई।
आयोग की ओर से कुल 1544 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया था। इस मामले में उत्तर कुंजी में दिए गए जवाबों का मामला भी कोर्ट पहुंचा था, जो निस्तारित हो गया है। इसके बाद ओबीसी व क्षैतिज आरक्षण से संबंधित मामला विचाराधीन था।
महाधिवक्ता ने रखा था कोर्ट के समक्ष प्रस्ताव-
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर ने कोर्ट के समक्ष प्रस्ताव रखा कि विवादित मामलों को छोड़कर अन्य अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने पर लगी रोक हटाई जाए। महाधिवक्ता ने कहा शिक्षकों की कमी से पठन-पाठन प्रभावित हो रहा है। एकलपीठ के समक्ष महाधिवक्ता के साथ ही उप महाधिवक्ता गणेश कांडपाल व अन्य सरकारी अधिवक्ताओं ने बहस की।