Category Archive : अपराध

जी20 सम्मेलन के दौरान हर 60 सेकेंड में हुए 16 लाख साइबर अटैक, देश में 1 दिन में रोजाना मिल रही हजारों कॉल

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देश में साइबर अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं। वे रोजाना ही साइबर अटैक की कोई न कोई तकनीक इस्तेमाल करते रहते हैं। साइबर हमलों का शिकार केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि सरकारें और विभिन्न वित्तीय संस्थान भी बनते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में साइबर क्राइम से निपटने के लिए स्थापित किए गए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) के सीईओ राजेश कुमार ने बुधवार को यह खुलासा किया है। 

सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि देश में रोजाना साइबर अपराध के चलते 50000 कॉल मिल रही हैं। एक लाख लोगों पर 129 शिकायतें दर्ज हो रही हैं। कुमार ने बताया, अगर एक घंटे के भीतर साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत मिलती है तो पैसे के नुकसान से बचाव हो सकता है। साल 2023 में सेक्सटॉर्शन फ्रॉड के 19000 केस सामने आए हैं।

जानिए क्या कहा सीईओ ने – 
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) के सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हर 60 सेकेंड में 16 लाख साइबर अटैक हुए थे। केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी त्वरित कार्रवाई के जरिए साइबर अपराधियों को उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया। अभी तक साइबर क्राइम को लेकर 46229 डिवाइस भी ब्लॉक किए गए हैं। पहले सिम कार्ड, वेबसाइट या ऐप को ही ब्लॉक किया जाता था।  

इस साल ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह रहेगी कि आई4सी के साथ देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी बैंक जुड़ जाएंगे। इससे साइबर अपराध से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी। केंद्रीय एजेंसियों और बैंकों के बीच समन्वय पुख्ता हो जाएगा। इसके माध्यम से समय रहते साइबर अपराध की घटना को काउंटर किया जा सकेगा।

मौजूदा समय में कुछ ही बैंक आई4सी के साथ जुड़े हैं। क्रिप्टों करेंसी के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम विभिन्न राज्यों में जाकर, विभिन्न एजेंसियों को ट्रेनिंग दे रही है। साइबर अपराध के जरिए जो वित्तीय चपत लगती है, उसकी त्वरित भरपाई के लिए एक ठोस मेकेनिज्म पर काम हो रहा है। गुजरात में लोक अदालत और कर्नाटक में कोर्ट द्वारा इस दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अभी वित्तीय फ्रॉड के मामले में बैंक से जब नुकसान की भरपाई की मांग की जाती है या संबंधित पीड़ित की राशि वापस देने की बात होती है तो बैंक द्वारा अदालत का आदेश मांगा जाता है।  

इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता है। इससे पीड़ित व्यक्ति की परेशानी बढ़ जाती है। इस समस्या का हल करने की दिशा में आई4सी द्वारा विशेष प्लानिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कानूनी सलाह ली जा रही है। उम्मीद है कि कुछ माह के बाद नई व्यवस्था अमल में आ जाएगी। इसके बाद पीड़ित को अपनी राशि के लिए बैंकों के यहां चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।  

साइबर को अंजाम देने में विदेशी लोगों का भी हाथ- 

राजेश कुमार के मुताबिक, साइबर अपराध की घटनाओं को अंजाम देने में विदेशी लोगों का भी बड़ा हाथ है। चीन व कंबोडिया सहित कई देशों में बैठे साइबर अपराधी, ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। साइबर अपराध की कुल घटनाओं में 40 से 50 प्रतिशत मामलों को विदेशों में बैठे गैंग अंजाम दे रहे हैं। इसके लिए संबंधित देशों की सरकारों के साथ बातचीत होती है। साइबर अपराध के चलते जो राशि ब्लॉक की गई है, वह 1127 करोड़ रुपये है। इसमें से लगभग 10 प्रतिशत रिक्वरी हुई है। बतौर राजेश कुमार, रिक्वरी का यह प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। देश में हर व्यक्ति को साइबर अपराध की शिकायत के लिए ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर याद रखना चाहिए। इस नंबर के जरिए रोजाना 50000 कॉल दर्ज हो रही है। यानी इतनी बड़ी संख्या में लोग इस हेल्पलाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

साइबर अपराध के चलते 295461 सिम कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के तहत 2810 वेबसाइट ब्लॉक हुई हैं। 46229 आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए हैं। एनसीआरपी पर साइबर अपराध की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। 2019 में 26049 शिकायतें मिली थीं। 2020 में 257777, 2021 में 452414, 2022 में 966790 और 2023 में 1556176 शिकायतें दर्ज हुई हैं। साल 2022 के मुकाबले 2023 में शिकायतों का ग्राफ 60.9 प्रतिशत बढ़ा है।

Uttarakhand: 88 छात्रों को कराया फर्जी पैरामेडिकल कोर्स, कई लोगों को बांटी डिग्री, लाखों में वसूली फीस.

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पैरामेडिकल और मैनेजमेंट का फर्जी डिप्लोमा देने के आरोपी डीपीएमआई काठगोदाम के प्रबंध निदेशक को काठगोदाम पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। उसने 88 छात्र-छात्राओं से 88 लाख रुपये फीस वसूली थी जिनमें 58 को डिप्लोमा दिया गया जो फर्जी था।

पुलिस बहुउद्देश्यीय भवन हल्द्वानी में एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने फर्जीवाड़े का खुलासा किया। बताया कि 11 अक्टूबर को मुखानी निवासी हिमांशु नेगी पुत्र गोपाल सिंह नेगी ने दिल्ली पैरामेडिकल एंड मेडिकल इंस्टीट्यूट काठगोदाम के एमडी डॉ. प्रकाश सिंह मेहरा और प्रधानाचार्य डा. पल्लवी मेहरा के खिलाफ काठगोदाम थाने में तहरीर दी थी।

कहा था कि 2018 में इंस्टीट्यूट में एडमिशन लिया था तब प्रबंधक ने कहा था कि यह संस्थान दिल्ली पैरामेडिकल एंड मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट की शाखा है। दो साल के कोर्स की फीस एक लाख रुपये ली गई थी। संस्थान में उनके साथ 38 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया। कोर्स के बाद सभी मार्कशीट और डिप्लोमा दिया गया। जब एक छात्र ने अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में नौकरी के लिए आवेदन किया तो डिप्लोमा फर्जी बताते हुए आवेदन निरस्त कर दिया गया।
जांच में डीपीएमआई काठगोदाम के संचालक ने बताया कि 2018 में डीपीएमआई दिल्ली से फ्रेंचाइजी ली थी और पूर्वी खेड़ा गौलापार में संस्थान खोला था। 2018 में आठ, 2019 में 37 और 2020 में 21 छात्र-छात्राओं को पैरामेडिकल कोर्स का डिप्लोमा दिया गया था जबकि 2021 के 30 छात्रों को अभी डिप्लोमा नहीं मिला है। उनसे भी फीस वसूल ली गई है।

जब डीपीएमआई दिल्ली जाकर जानकारी मांगी गई तो पता चला कि 2018 में 8 छात्रों को डिप्लोमा दिया गया और 2019 में 37 छात्र-छात्राओं की प्रथम वर्ष की परीक्षा कर मार्कशीट दी गई थी। उसके बाद डीपीएमआई काठगोदाम के संचालक प्रकाश मेहरा ने फीस जमा नहीं की तो डीपीएमआई दिल्ली ने काठगोदाम शाखा को फीस डिफॉल्टर घोषित कर कार्यक्रम बंद कर दिया था। मगर इसके बावजूद 2019 में कोर्स बंद होने पर भी आरोपी छात्र-छात्राओं से लाखों रुपये फीस लेता रहा। मुकदमा दर्ज कर प्रकाश मेहरा को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले में उससे पूछताछ की जा रही है।
हर विद्यार्थी से वसूले 1 लाख रुपये-


पुलिस जांच में कुल 58 छात्र-छात्राओं को फर्जी डिप्लोमा कराने का मामला सामने आया। डिप्लोमा कोर्स के लिए हर छात्र से एक लाख रुपये फीस ली गई। जांच में साल 2019 के 37 और 2020 के 21 छात्र-छात्राओं को फर्जी डिप्लोमा दिए गए थे जिनसे कुल 58 लाख रुपये आरोपी ने वसूले। 2021 के 30 विद्यार्थियों से भी फीस वसूल ली गई।

 

कतर में 8 भारतीयों की फांसी की सजा पर लगी रोक; विदेश मंत्रालय ने दी जानकारी.

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खाड़ी देश कतर की एक अदालत द्वारा भारतीय नौसेना के आठ पूर्व कर्मियों को मौत की सजा देने के फैसले पर रोक लगा दी गई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने दहरा ग्लोबल मामले में कतर की अपील अदालत के आज के फैसले पर गौर किया है, जिसमें सजाएं कम कर दी गई हैं। हम विस्तृत फैसले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। आज अपीलीय अदालत में कतर में हमारे राजदूत और अन्य अधिकारी उपस्थित थे। पीड़ितों के परिवार के सदस्य भी थे। हम मामले की शुरुआत से ही उनके साथ खड़े हैं और हम सभी कांसुलर और कानूनी सहायता देना जारी रखेंगे। हम इस मामले को कतरी अधिकारियों के साथ भी उठाना जारी रखेंगे।

क्या है मामला?  

मामला पहली बार 30 अगस्त को सामने आया जब कतर की खुफिया एजेंसी ‘राष्ट्रीय सुरक्षा ब्यूरो’ ने आठ पूर्व नौसेना अधिकारियों को गिरफ्तार किया। उन्हें बिना किसी आरोप के हिरासत में लिया गया और एकांत कारावास में भेज दिया गया था। हालांकि, मीडिया रिपोर्ट में कहा गया था कि उन पर जासूसी का आरोप लगाया गया था। जिसके बाद इसी साल अक्टूबर माह में कतर के कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टांस द्वारा मौत की सजा वाला फैसला सुनाया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेवानिवृत होने के बाद ये सभी नौसैनिक कतर की निजी कंपनी दहरा ग्लोबल टेक्नोलॉजी एवं कंसल्टेंसीज सर्विसेज में काम कर रहे थे। यह कंपनी कतरी एमिरी नौसेना को ट्रेनिंग और अन्य सेवाएं प्रदान करती है। कंपनी खुद को कतर रक्षा, सुरक्षा एवं अन्य सरकारी एजेंसी की स्थानीय भागीदार बताती है।

Uttarakhand: हिमालयी राज्यों को पछाड़ उत्तराखंड बना नंबर-1, NCRB की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा.

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उत्तराखंड तरक्की कर रहा है या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन कुछ चीजें ऐसी है जिसमें प्रदेश का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और अब तो उत्तराखंड हिमालयी राज्यों में टॉप पर पहुंच चुका है. पर इसमें खुश होने की नहीं बल्कि शर्म करने की जरूरत है क्योकि जिसमें उत्तराखंड नंबर 1 बना है उसमें कोई भी राज्य नंबर 1 नहीं बनना चाहता। अभी हाल ही NCRB की रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है जिसने कानून व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है और पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है।

 

उत्तराखंड में महिलाओं और बच्चों के साथ बलात्कार के सबसे अधिक मामले दर्ज किए गए। इसमें हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा और दो केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर, लद्दाख सहित 9 राज्य शामिल हैं। इसके तहत वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपराध का ग्राफ वर्ष 2021 के मुकाबले 26 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया है ।

NCRB की रिपोर्ट में खुलासा-

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की ताजा रिपोर्ट तो यही बता रही है। इसके तहत वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपराध का ग्राफ वर्ष 2021 के मुकाबले 26 प्रतिशत ऊपर पहुंच गया। एनसीआरबी की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 में महिला अपराध के 3431 मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2022 में ये संख्या बढ़कर 4 हजार 337 पहुंच गई, यानी एक वर्ष में 906 मामलों की बढ़ोतरी हुई है। इससे पहले वर्ष 2020 में 2 हजार 846 मामले सामने आए थे। इतना ही नहीं महिला अपराध में बढ़ोतरी को लेकर देशभर में स्थिति की बात करें तो उत्तराखंड छठे पायदान पर है। इस मामले में आंध्र प्रदेश सबसे ऊपर है, जहां महिला अपराध में 43.66 प्रतिशत का उछाल आया है।उत्तराखंड प्रदेश में बड़ी संख्या में विवाहित महिलाओं को घर के भीतर प्रताड़ना झेलनी पड़ी है हालांकि, कई राज्य ऐसे भी हैं जहां महिला अपराध में कमी आई है। सबसे अधिक 51 प्रतिशत की कमी असम में आई है।साल दर साल प्रदेश में मामले बढ़ रहे हैं बात करें तो साल  2020 में  2 हजार 446 जबकि साल 2021 में  3 हजार 431 जबकि यही आंकड़ा साल  2022 में बढ़कर 4 हजार 337 हो गयी है।

वर्ष 2022 में पुलिस के समक्ष 956 ऐसे मामले पहुंचे। इनमें महिलाओं को पति या उसके रिश्तेदार ने पीटा या अन्य प्रकार से प्रताड़ित किया। यही नहीं, उत्पीड़न से तंग आकर या अन्य कारणों से वर्षभर में 24 महिलाओं ने आत्महत्या जैसा कदम भी उठाया। तो वहीं अपहरण के मामले भी बढ़े, वर्ष 2022 में प्रदेश में महिला अपहरण के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2021 में 696 अपहरण के मामले सामने आए थे, जबकि वर्ष 2022 में 778 महिलाओं का अपहरण हुआ वहीं दुष्कर्म की कोशिश के भी 18 मामले सामने आए हैं।

उत्तराखंड जिसे देवभूमि कहा जाता है और अमूमन इसको एक अपराध मुक्त और शांत प्रदेश कहा जाता है,,लेकिन जिस तरह से प्रदेश में अपराध बढ़ रहे हैं उसने कही न कहीं चिंता जरूर पैदा कर दी है,,वो भी खासकर महिला अपराध जिस तरह से प्रदेश में बढ़ा है वो काफी चिंताजनक है जिस तरह अब ये अपराध मैदानों से लेकर पहाड़ की शांत वादियों तक पहुंच चुके हैं उससे प्रदेश की चिंताएं जरूर बढ़ रही है,,,साथ ही एक सवालिया निशान प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी खड़े हो रहे हैं सरकार या उसका क़ानूनी तंत्र पूरी तरह से इन अपराधों के आगे बेबस नजर आ रहा है पिछले साल ही जिस तरह से अंकिता भंडारी केस हुआ था उसके बाद उम्मीद लगाई जा रही थी कि प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाया जायेगा लेकिन ऐसा कुछ होता दिखाई नहीं दे रहा है उल्टा सरकार अंकिता के दोषियों को अभी तक सजा नहीं दिला पाई है।इस तरह की हीलाहवाली भी कहीं  न कहीं अपराधियों का हौसला बढ़ाने जैसा है।

Rishikesh: हाईवे से लगे जंगल में मिला 13 दिन से लापता युवती का जला हुआ शव, पुलिस ने प्रेमी को किया गिरफ्तार.

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करीब 13 दिनों से घर से लापता चल रही युवती का जंगल में जला हुआ शव मिला है। पुलिस ने युवती के प्रेमी को गिरफ्तार कर लिया है। उस पर आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया गया है। ढालवाला निवासी विनीता भंडारी (21) चार दिसंबर से लापता थी।

पिता ने थाना मुनि की रेती में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। सीसीटीवी फुटेज की जांच के दौरान विनीता चार दिसंबर को 11 बजकर आठ मिनट पर नटराज चौक के पास अकेले देहरादून की ओर जाती देखी गई थी। उसके हाथ में थैला भी था। उसके बाद करीब 11 बजकर 32 मिनट पर विनीता का मोबाइल बंद हो गया था। अंतिम लोकेशन और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस विनीता को इसी क्षेत्र में ढूंढ रही थी। 

पुलिस को नटराज चौक से करीब एक किमी आगे देहरादून रोड पर हाईवे से लगे जंगल में 200 मीटर अंदर अधजला शव मिला। उसकी शिनाख्त के बाद उसके प्रेमी मानीवाला निवासी अर्जुन रावत को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।

संसद सुरक्षा मामला: मास्टरमाइंड ललित झा का परिवार हैरान, जानिए बड़े भाई ने उसकी गिरफ्तारी पर क्या कहा.

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संसद में चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा सदन में बुधवार को एक घटना ने सुरक्षा एजेंसियों पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। लोकसभा कार्यवाही के दौरान सुरक्षा में चूक का मामला सामने आया है। दर्शक दीर्घा में बैठे दो व्यक्ति ने सभी को उस वक्त चौंका दिया, जब वे अचानक वहां से कूदकर सांसदों के बीच जा पहुंचे थे। इस दौरान आरोपियों ने जमकर हंगामा किया।
बुधवार सदन के भीतर मौजूद दो आरोपियों में से एक आरोपी सांसदों की सीट पर जा पहुंचा। इस घटना को देखकर वहां पर मौजूद सांसदों और सुरक्षाकर्मियों के हाथ पांव फूल गए थे। हालांकि दो आरोपियों में से एक आरोपी को वहां मौजूद सांसदों और सुरक्षा कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद पकड़ लिया और जमकर धुनाई की थी।

संसद की सुरक्षा में चूक के मास्टरमाइंड ललित मोहन झा के आत्मसमर्पण के बाद उसके परिवार को विश्वास नहीं हो रहा है। आरोपी के बड़े भाई शंभू झा ने संसद की सुरक्षा में चूक मामले पर अपने भाई के शामिल होने पर हैरानी जताई है। बता दें गुरुवार को नई दिल्ली में गिरफ्तारी देने के बाद आरोपी ललित को विशेष सेल को सौंप दिया गया है।

क्या कहा आरोपी के बड़े भाई ने-


समाचार चैनलों पर भाई की तस्वीरों को देख आरोपी के बड़े भाई शंभू झा हैरान हो गए हैं। उन्होंने कहा कि हमें नहीं पता कि वह इस तरह के कृत्यों में कैसे शामिल हुआ। वह बचपन से ही शांत स्वभाव का बच्चा था। हम इतना जानते हैं कि वह एक निजी शिक्षक होने के साथ-साथ एक गैर सरकारी संगठन के साथ जुड़ा था। पूरा परिवार को इस बात पर हैरानी हो रही है। आरोपी ललित के बड़े भाई ने कहा कि आखिरी बार दस दिसंबर को ललित से मुलाकात हुई थी। वह सियालदह स्टेशन पर हमें छोड़ने के लिए आया था। अगले दिन भाई ने सिर्फ इतना कहा था कि वह निजी काम से दिल्ली जा रहा है। जिसके बाद कभी उससे बात नहीं हो पाई।  

न्यूज़ चैनलों पर तस्वीरें देख पड़ोसी भी हैरान-

ललित की तस्वीरें वायरल होने के बाद उसके पड़ोसी भी हैरान है। उन्होंने कहा कि कोलकाता के बड़ा बाजार में समुदाय के साथ शायद ही कभी जुड़ा था। बाद में परिवार उत्तर चौबीस परगना जिले के बागुईआटी में स्थानांतरित हो गया। शहर में स्थित एक चाय की दुकान के मालिक पापोन शॉ ने कहा, वह एक शिक्षक के रूप में जाने जाते थे, स्थानीय छात्रों को पढ़ाते थे। उसने बताया वह स्थानीय लोगों के साथ कम ही बातचीत करते थे। हां इतना जरूर है कि वह मेरी दुकान पर चाय पीते थे। दो साल पहले ही वहां यहां से चला गया, फिर उसके बाद उसे कभी नहीं देखा गया।  

आरोपियों के खिलाफ यूएपीए के तहत मामला दर्ज-


संसद की सुरक्षा में चूक मामले में गिरफ्तार चार आरोपियों पर आईपीसी की धाराओं के अलावा आतंकवाद विरोधी कानून (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। साथ ही फरार चल रहे ललित झा को पकड़ने के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की जा रही है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी। बता दें इस अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध गैर जमानती हैं। एक अधिकारी ने कहा कि हालांकि अभी तक की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को किसी आतंकी समूह से संबंध होने का सबूत नहीं मिला है। जांच में दो अन्य लोगों के कृत्य में शामिल होने की जानकारी मिली है।

किशोरी से दुष्कर्म मामले में दोषी भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को 25 साल की कैद, दस लाख रुपये का जुर्माना

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उत्तर प्रदेश के सोनभद्र में दुद्धी सीट से भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को किशोरी से दुष्कर्म मामले में सजा का एलान हो गया है। भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को कोर्ट ने 25 साल की कैद तथा 10 लाख रूपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड की धनराशि पीड़िता को मिलेगी।किशोरी से दुष्कर्म के मामले में सोनभद्र की एमपी-एमएलए कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है। नवंबर 2014 में म्योरपुर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था और आठ सालों की लंबी सुनवाई के बाद फैसला आया है।

 

एमपी-एमएलए कोर्ट ने भाजपा विधायक रामदुलार गोंड के 25 वर्ष कैद और दस लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। विधायक को किशोरी के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया है। आठ साल तक चली लंबी कानूनी लड़ाई के बाद बृहस्पतिवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया। एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश एहसानुल्लाह खां ने अर्थदंड की समूची राशि पीड़िता को देने का आदेश दिया है। कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और विधायक समर्थकों को तगड़ा झटका लगा है। आदेश के बाद रामदुलार गोंड की विधायकी जानी तय मानी जा रही है। विधायक के अधिवक्ता ने फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की बात कही है।

बता दें कि किशोरी से दुष्कर्म के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 12 दिसंबर को भाजपा विधायक रामदुलार गोंड को दोषी करार दिया था। मंगलवार को सुनवाई के बाद एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश एहसानुल्लाह खान ने सजा सुनाने के लिए 15 दिसंबर की तिथि निर्धारित की थी।

 

पीड़िता के भाई ने जाहिर की खुशी, कहा नौ साल बाद न्याय मिला
एमपी-एमएलए कोर्ट से विधायक रामदुलार गोंड को सजा होने पर पीड़िता के भाई ने खुशी जाहिर की। सुनवाई के दौरान मंगलवार को आए पीड़िता के भाई जब इस संबंध में वार्ता की गई तो उनका कहना था कि अदालत के फैसले वे वह बेहद खुश है। नौ साल के संघर्ष के बाद आज उसे न्याय मिला है। बता दें कि पीड़िता के भाई की शिकायत पर ही नौ साल पहले रामदुलार गोंड के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज हुआ था।

Parliament Security Breach: लोकसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक! विजिटर गैलरी से चैंबर में कूदे 2 लोग, बेंच पर चढ़ कर छिड़की गैस.

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Parliament Security Breach: संसद भवन की सुरक्षा में उस वक्त बड़ी चूक देखने को मिली है, एक ओर जहां 2 युवकों ने लोकसभा के अंदर सांसदों के बीच में विजिटर गैलरी से उस वक्त छलांग लगा दी जब सदन की कार्यवाही जारी थी। जब सुरक्षा घेरा तोड़कर लोकसभा में विजिटर गैलरी से 2 संदिग्ध कूद पड़े. बुधवार को संसद की कार्यवाही के दौरान 2 शख्स सुरक्षा घेरा तोड़कर जैसे ही लोकसभा में घुसे और बेंच पर चढ़कर कूदने लगे, तभी हड़कंप मच गया. आनन-फानन में सुरक्षाकर्मी दौड़े और दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया. संसद की सुरक्षा में चूक का मामला ऐसे वक्त में आया है, जब आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर को संसद भवन पर आतंकी हमला हुआ था और 9 जवान शहीद हुए थे. बताया जा रहा है कि लोकसभा में घुसने के दौरान आरोपी शख्स ने स्प्रे भी किया है. उनके हाथ में टियर गैस कनस्तर  भी था. 


दरअसल, संसद में चल रहे शीतकालीन सत्र की कार्यवाही के दौरान बुधवार को विजिटर गैलरी से अचानक 2 युवक कूद गए और लोकसभा में सांसदों तक पहुंच गए. इतना ही नहीं, स्पीकर की ओर बेंच पर चढ़कर दौड़ने लगे. इसके चलते सदन में अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, समय रहते सुरक्षाकर्मियों ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया. बताया जा रहा है कि इस दौरान युवकों ने स्प्रे का भी इस्तेमाल किया और युवकों ने नारेबाजी भी की. हालांकि, इस घटना के बाद लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया.

इस घटना ने एक बार फिर से 22 साल पुराने आतंकी घटना की याद ताजा कर दी है, जब पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद परिसर पर हमला किया था और गोलियों की तड़तड़ाहट से देश सहम उठा था. इस आतंकी हमले में दिल्ली पुलिस के कई जवान समेत नौ लोग शहीद हुए थे. हालांकि, सुरक्षाबलों ने पांचों आतंकवादियों को मार गिराया था.

बता दें कि कुछ दिन पहले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर अपने खिलाफ एक असफल हत्या की साजिश के जवाब में 13 दिसंबर को नए संसद भवन पर हमला करने की धमकी दी थी. संसद में प्रवेश द्वार पर तीन स्तरीय सुरक्षा जांच की व्यवस्था है, जिसमें मेटल डिटेक्टर और हाथ से पकड़े जाने वाले मेटल डिटेक्टर से जांच शामिल हैं. संसद भवन के प्रवेश द्वार पर भी यही कवायद दोहराई जाती है. विभिन्न आगंतुक दीर्घाओं की ओर जाने वाले गलियारे पर भी सुरक्षा मौजूद है. इन स्थानों पर आगंतुकों को मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है.

सामने आई आरोपियों की पहचान-
संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर बुधवार को दो मामले सामने आए। एक मामले में सदन के बाहर दो लोगों ने तानाशाही नहीं चलेगी का नारा लगाते हुए प्रदर्शन शुरू किया। इनके प्रदर्शन शुरू करते ही पुलिस के जवानों ने हिरासत में ले लिया। इन दो प्रदर्शनकारियों में एक महिला भी थी। इनकी पहचान नीलम (42) निवासी हिसार के रूप में हुई है। वहीं दूसरे प्रदर्शनकारी की पहचान अनमोल शिंदे (25) निवासी लातूर, महाराष्ट्र के रूप में हुई है।
एजेंसियां कर रहीं पूछताछ-
ये चारों कब और कैसे दिल्ली पहुंचे इस बारे में अलग-अलग एजेंसी इनसे पूछताछ कर रही है। चारों के खिलाफ किन धाराओं में किस थाने में मुकदमा दर्ज किया जाए, इस पर फैसला भी जल्द लिया जाएगा। फिलहाल संसद भवन थाने के बाहर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा होने के कारण मुख्य द्वार पर बैरिकेड लगाकर एंट्री बंद कर दी गई. लोकसभा के अंदर कलर क्रैकर लेकर पहुंचे शख्स का नाम सागर शर्मा बताया जा रहा है। हालांकि यह अभी पता नहीं चल सका है कि सागर कहां का रहने वाला है और किस उद्देश्य उसने इस घटना को अंजाम दिया। आशंका है कि चोरों लोग एक ही ग्रुप के हो सकते हैं। 

कौन हैं वो 8 भारतीय नेवी अफसर जिन्हे कतर ने सुनाई मौत की सजा, आखिर क्या हैं आरोप.

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कतर के साथ भारत के रिश्ते अच्छे माने जाते हैं. हालांकि, इसके बाद भी कतर ने आठों भारतीयों को मौत की सजा सुना दी है. कतर की अदालत ने भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई है। इन आठों भारतीयों को पिछले साल जासूसी के कथित आरोप में गिरफ्तार किया गया था. भारत सरकार ने इस फैसले पर हैरानी जताई है। हालांकि, भारत सरकार ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में सभी कानूनी विकल्पों पर विचार कर रहा है। तो आईये जानते हैं क्या है वो मामला और कौन हैं ये आठों नेवी अफसर?

कौन हैं ये 8 नेवी अफसर ?

नौसेना के जिन आठ पूर्व अफसरों को मौत की सजा सुनाई गई है, उनके नाम – कैप्टन सौरभ वशिष्ठ, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी, कैप्टन बीरेंद्र कुमार वर्मा, कमांडर सुगुणाकर पकाला, कमांडर संजीव गुप्ता, कमांडर अमित नागपाल और राजेश हैं।

इन सभी पूर्व अफसरों ने भारतीय नौसेना में 20 साल तक सेवा दी थी। नौसेना में रहते हुए उनका कार्यकाल बेदाग रहा है और अहम पदों पर रहे हैं। साल 2019 में, कमांडर पूर्णेंदु तिवारी को प्रवासी भारतीय सम्मान से सम्मानित किया गया था, जो प्रवासी भारतीयों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।

कतर में कर क्या रहे थे ये सभी अफसर ?

नौसेना से रिटायर्ड ये सभी अफसर दोहा स्थित अल-दहरा कंपनी में काम करते थे। ये कंपनी टेक्नोलॉजी और कंसल्टेंसी सर्विस प्रोवाइड करती थी। साथ ही कतर की नौसेना को ट्रेनिंग और सामान भी मुहैया कराती थी। इस कंपनी को ओमान की वायुसेना से रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर खमीस अल आजमी चलाते थे। पिछले साल उन्हें भी इन भारतीयों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था। हालांकि, नवंबर में उन्हें रिहा कर दिया गया था। ये कंपनी इस साल 31 मई को बंद हो गई है। इस कंपनी में लगभग 75 भारतीय नागरिक काम करते थे, जिनमें ज्यादातर नौसेना के पूर्व अफसर थे। कंपनी बंद होने के बाद इन सभी भारतीयों को नौकरी से निकाल दिया गया।

पूरा मामला क्या है?

ये सभी आठ भारतीयों को पिछले साल जासूसी के कथित मामले में हिरासत में ले लिया गया था। हालांकि कतर प्रशासन की ओर से इन लोगों के खिलाफ आरोपों को सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन माना गया कि गिरफ्तारियां सुरक्षा संबंधी मामले में की गई थीं। वहीं पिछले साल 25 अक्टूबर को मीतू भार्गव नाम की महिला ने ट्वीट कर बताया था कि भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अफसर 57 दिन से कतर की राजधानी दोहा में गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में हैं। मीतू भार्गव कमांडर पूर्णेदु तिवारी की बहन हैं।उन्होंने भारत सरकार से इस मसले पर जल्द कार्रवाई की मांग की थी।

कब हुआ था ट्रायल?

आठों पूर्व अधिकारियों को पिछले साल 30 अगस्त की रात हिरासत में ले लिया गया था। इन सभी का ट्रायल इसी साल 29 मार्च को शुरू हुआ था। विदेश मंत्रालय ने 6 अप्रैल को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए इस बात जानकारी दी थी कि इन सब लोगों को भारत की ओर से कानूनी मदद मिलनी शुरू हो गई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि इस मामले की सबसे पहली सुनवाई 29 मार्च को हुई थी। ये सुनवाई उस वकील ने भी अटेंड की थी जिन्हें केस के लिए नियुक्त किया गया है। तीन अक्टूबर को मामले में सातवीं सुनवाई हुई थी और कोर्ट ऑफ फर्स्ट इंस्टेंस ने गुरुवार को उनके खिलाफ फैसला सुनाया।

क्या कर रही है भारत सरकार ?

भारत के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को कहा कि वह इस फैसले से स्तब्ध है और फैसले के विस्तृत ब्योरे की प्रतीक्षा कर रहे हैं। हम हर परिवार के सदस्यों और कानूनी टीम के संपर्क में हैं।‌भारतीय नागरिकों की रिहाई के लिए सभी कानूनी विकल्पों की तलाश की जा रही है। विदेश मंत्रालय ने ये भी कहा कि कतर की जेल में बंद भारतीय नागरिकों को कॉन्सुलर एक्सेस और कानूनी मदद दी जाती रहेगी और फैसले को कतर के अधिकारियों के समक्ष भी उठाएंगे।

Uttarakhand Police: साइबर अपराधियों ने किया उत्तराखंड पुलिस का फेसबुक पेज हैक, मचा हड़कंप, फोटो वायरल.

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साइबर अपराधियों ने उत्तराखंड पुलिस का ऑफिशियल फेसबुक पेज हैक कर चुनौती दे डाली। फेसबुक पेज पर पुलिस के लोगो वाली तस्वीर को हटाकर वहां महिला की अश्लील तस्वीर लगा दी। मामला संज्ञान में आने के बाद पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया टीम के सदस्य की ओर से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। इसमें एसटीएफ और साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

उत्तराखंड पुलिस का फेसबुक पेज दोपहर को अचानक बदला हुआ नजर आया। शुरुआत में कोई समझ ही नहीं पाया कि ये पुलिस का ऑफिशियल पेज ही है या फिर किसी ने दूसरा पेज बनाया है। इस पर एक महिला की अश्लील तस्वीर लगी हुई थी। देखते ही देखते इस पर कमेंट की बाढ़ आ गई।

लोगों ने इसे उत्तराखंड पुलिस को साइबर अपराधियों की खुली चुनौती के रूप में बताया। इससे पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया टीम ने इस पेज पर कंट्रोल लिया और डिस्प्ले पिक्चर के स्थान पर फिर से पुलिस का लोगो वाली तस्वीर लगा दी।

 

कुछ लोगों ने इसे साइबर सुरक्षा के लिए भी खतरा बताया। लोगों का कहना था कि जब पुलिस के सोशल मीडिया अकाउंट ही सुरक्षित नहीं तो आम लोगों की साइबर सुरक्षा किस तरह की जा सकती है। इस मामले में सोशल मीडिया टीम के कांस्टेबल हिमांशु डंगवाल की ओर से साइबर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। पुलिस के अनुसार किसी ने इस पेज की एक्सेस हासिल कर यह काम किया है।

डीजीपी अशोक कुमार ने बताया कि इस मामले में साइबर थाना पुलिस को तत्काल टीम गठित कर गंभीरता से जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। जल्द ही आरोपियों को पकड़ा जाएगा।