Category Archive : स्वास्थ्य

Uttarakhand Cabinet: कैशलैस इलाज के लिए बढ़ेगा अशंदान, कैबिनेट में आए 11 प्रस्ताव, इन पर लगी मुहर.

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उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक आज संपन्न हुई। इस दौरान बैठक में 11 प्रस्ताव पर मुहर लगी। वहीं, उपनल कर्मचारियों को समान कार्य के लिए समान वेतन का मामला मंत्रिमंडल उपसमिति को सौंपा गया है।

ये फैसले हुए-

वित्त: नेचुरल गैस पर वैट की दर 20 से घटाकर 5% करने पर के प्रस्ताव पर मुहर।

कृषि:धराली व आसपास के आपदाग्रस्त क्षेत्र में रॉयल डिलिशियस सेब का 51रुपये, दूसरे रेड डेलिशियस सेब का 45 रुपये प्रति किलो मुल्य।

संस्कृति:  कलाकार व लेखकों को मासिक पेंशन 3000 से बढ़ाकर 6000 रुपये करने का निर्णय लिया गया।

आवास: इज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत केंद्र के निर्देश के तहत निम्न जोखिम वाले भवन या छोटे व्यावसायिक भवन को एम्पनल्ड आर्किटेक्ट द्वारा नक्शा पास करा सकते हैं। पहले ये विचलन से आया था, आज कैबिनेट ने मुहर लगाई है।

औद्योगिक विकास: ग्राउंड कवरेज एमएसएमई यूनिट और इंडस्ट्री यूनिट का बढ़ाया गया। बांस एवं रेशा विकास परिषद के ढांचे में परिवर्तन किया गया है। तकनीकी प्रकृति के स्टाफ को उपनल के बजाय आउटसोर्सिंग से रखने की व्यवस्था। 13 पदों को कॉन्ट्रैक्ट या आउटसोर्सिंग से होंगे।

  • आयुष्मान और अटल आयुष्मान 100% इन्श्योरेंस मोड में संचालित होगा। गोल्डन कार्ड हाइब्रिड मोङ में चलेगा। पांच लाख से कम के क्लेम इन्श्योरेंस से भुगतान होगा। पांच लाख से यूजर वाले क्लेम ट्रस्ट मोड से मिलेंगे। महंगाई दर के हिसाब से कर्मचारियों से लिये जाने वाला अंशदान करीब 250 रुपये से 450 रुपये तक बढ़ेगा।
  • सिंचाई व लोक निर्माण विभाग के वर्क चार्ज एम्प्लाइज को पेंशन मिलेगी।
  • उत्तराखंड चिकित्सा शिक्षा सेवा संशोधन नियमावली को मंजूरी। प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की उम्र 50 से बढ़ाकर 62 वर्ष, सुपर स्पेशलिटी सर्विसेज के लिए भी विभाग बनाये गए हैं। स्वामी राम कैंसर इंस्टीट्यूट हल्द्वानी के लिए 4 पदों के सृजन को मंजूरी।
  • श्रीनगर मेडिकल कॉलेज में समान कार्य, समान वेतन मामला…277 कर्मचारियों को मिलना है लाभ। कैबिनेट उपसमिति को भेजा गया।
  •  दुर्गम व अति दुर्गम इलाकों में काम करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों को 50% अतिरिक्त भत्ता मिलेगा। करीब 300 डॉक्टरों को मिलेगा लाभ।

Uttarakhand: राफ्टिंग गाइडों के लिए प्राथमिक चिकित्सा का प्रशिक्षण अनिवार्य, आयु सीमा बढ़ाने पर भी सहमति.

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जनवरी से शुरू होगा राफ्टिंग गाइडों का विशेष प्रशिक्षण-

 

Dehradun: राज्य में राफ्टिंग की संभावनाओं को सुदृढ़, सुरक्षित एवं व्यवस्थित करने के उद्देश्य से 22 दिसंबर 2025 को पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी धीराज सिंह गब्र्याल की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में राफ्टिंग एसोसिएशन, राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन, राफ्टिंग तकनीकी एवं विनियामक समिति, गंगा नदी राफ्टिंग समिति सहित संबंधित हितधारकों ने प्रतिभाग किया।

बैठक में वर्तमान में कार्यरत राफ्टिंग गाइडों की फर्स्ट एड एवं सीपीआर से संबंधित तकनीकी दक्षता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। इस क्रम में मोंटाना (यूएसए) से संबद्ध संस्था Hanifl Centre, जो पर्यटन मंत्रालय, भारत सरकार के साथ कार्यरत है, के माध्यम से प्रथम चरण में तीन दिवसीय Wilderness First Aid (WFA) प्रशिक्षण आयोजित करने का निर्णय लिया गया। यह प्रशिक्षण जनवरी 2026 के प्रथम सप्ताह से प्रारंभ होगा। इसके माध्यम से जनवरी–फरवरी 2026 के दौरान राफ्टिंग व्यवसाय से जुड़े लगभग 900 गाइडों को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

 

बैठक के दौरान राफ्टिंग एसोसिएशन द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों—नदी तटों पर राफ्टिंग कैंपों की पुनः स्थापना, गंगा नदी की वहन क्षमता का पुनः आकलन, मुख्य मार्ग से राफ्टिंग पिकअप प्वाइंट में सुधार तथा राफ्टिंग पर्यटकों की सुरक्षा के लिए एम्बुलेंस व्यवस्था—पर पर्यटन सचिव द्वारा शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया गया।

इसके साथ ही राफ्टिंग गाइड एसोसिएशन के प्रस्ताव पर राफ्टिंग गाइडों की अधिकतम आयु सीमा 50 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष किए जाने पर सहमति व्यक्त की गई। गंगा नदी राफ्टिंग समिति द्वारा लिए जाने वाले शुल्क में वृद्धि पर भी राफ्टिंग एवं गाइड एसोसिएशन की सहमति बनी।

अंत में पर्यटन सचिव एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने गंगा नदी राफ्टिंग समिति के सचिव, संबंधित अधिकारियों एवं हितधारकों को प्रशिक्षण कार्यक्रम शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए तथा उत्तराखंड के राफ्टिंग व्यवसाय को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त पहचान दिलाने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया।

बैठक में उप निदेशक पर्यटन अमित लोहनी, वरिष्ठ साहसिक खेल अधिकारी एवं सचिव गंगा नदी राफ्टिंग समिति जसपाल सिंह चौहान, साहसिक खेल अधिकारी सीमा नौटियाल, थल क्रीड़ा विशेषज्ञ भूपेन्द्र सिंह, राफ्टिंग समिति अध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह नेगी, उपाध्यक्ष रामपाल सिंह, तकनीकी समिति सदस्य अरविन्द भारद्वाज, विनियामक समिति सदस्य मंजूल रावत, ध्रुवनाथ राणा सहित अन्य अधिकारी एवं हितधारक उपस्थित रहे।

Dehradun: बेरोजगार नर्सिंग का प्रदर्शन, सचिवालय कूच करने पहुंचे, समर्थन में पहुंचे कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत

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नर्सिंग एकता मंच के नेतृत्व में सैकड़ों बेराजगार मुख्यमंत्री आवास कूच करने पहुंचे। प्रदर्शन कर रहे बेराजगारों को समर्थन देने कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत भी पहुंचे। कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत ने कहा कि आप प्रदर्शन कर रहे थे उस दिन भी आपको गिरफ्तार किया गया। आप अपनी उम्मीद अपनी मांग को लेकर जिस तरह संघर्ष कर रहे है। लोकतंत्र में जब-जब संघर्ष होता है और एकता होती है उसका नतीजा हमेशा सकारात्मक होता है।

हरक सिंह रावत ने कहा कि आवास घेराव करने से पहले मैंने स्वास्थ्य मंत्री को फ़ोन किया तो उन्होंने अपने पश्चिम बंगाल में होने की जानकारी दी। मंच के प्रदेश अध्यक्ष नवल पुंडीर ने कहा कि संगठन पिछले कई दिनों से वर्षवार भर्ती निकालने और आयु सीमा में छूट देने समेत कई मांगों को लेकर धरना दे रहा है। सोमवार को संगठन के सभी बेरोजगारों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया।

इससे पहले भी सैकड़ों बेराजगारों ने मुख्यमंत्री आवास कूच किया। इस दौरान हाथीबड़कला में बेरोजगारों और पुलिस के बीच करीब दो घंटे तक झड़प हुई। एक महिला पुलिसकर्मी पर कूच में शामिल एक महिला के साथ मारपीट करने का भी आरोप लगा है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। बेरोजगारों के इस व्यहार पर प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की।

राज्य के 25 साल – विकास की रफ्तार या व्यवस्था की विकृति

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लेखक-  स्वतंत्र पत्रकार हरीश खखरियाल की कलम से….. 

“9 नवम्बर  2000…जब उत्तराखंड ने अलग राज्य बनने का सपना देखा था,तो उस सपने में शामिल  था – विकास, पारदर्शिता, रोजगार और ईमानदारी। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है,सवाल  उठता है —इन 25 सालों में उत्तराखंड ने क्या पाया, और क्या खो दिया ?”
सपना और सच्चाई का अंतर

“राज्य आंदोलन के दौरान नारा था —‘अपना राज, अपने लोग, अपनी पहचान।उम्मीद थी कि  शासन गावों तक पहुंचेगा और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था  बनेगी, लेकिन  दो दशक बाद हकीकत कुछ  और ही बयान कर रही है।बेरोज़गारी, पलायन और भ्रष्टाचार की जडें अब हर विभाग में फैल चुकी हैं।
Claim Thousands of unemployed will be seen on the streets today, walking march up to 7 km | “बेरोजगार युवा बोले - GO बेरोजगारी GO”: सड़क पर उतरे सैकड़ों बेरोजगार, 7 Km

Uttarakhand News: 22 वर्ष के उत्तराखंड में पलायन ऐसा विषय, जिसका अभी तक नहीं हो पाया है समाधान - uttarakhand foundation day migration problem not solved in 22 years at uttarakhand

बढ़ता भ्रष्टाचार – सिस्टम में सडांध
 
राज्य गठन के साथ उम्मीद थी कि ‘छोटा राज्य, पारदर्शी शासन’ का सपना साकार होगा,मगर 25 साल बाद भ्रष्टाचार की जडें इतनी गहरी हैं कि  अब न्यायालयों को बार-बार दखल देना पड रहा है।​
Uttarakhand High Court Recruitment 2025 (eCourts.gov.in) New Notification
 
 विभागीय भ्रष्टाचार हो या भर्तियों  में धांधली —हाईकोर्ट  तक को कई बार CBI जााँच के आदेश देने पडे। बागवानी विभाग को किसानों  की आत्मा कहा जाता है,वहां तक भ्र्ष्टाचार की गंध पहुंच चुकी है,किसानों  के लिए  बनी योजनाएं , सब्सिडी  और ग्रांट्स फाइलों में अटककर अफसरशाही की भेंट चढ़ गईं।हालात इतने बिगड़े कि हाईकोर्ट को खुद  बागवानी  विभाग के भ्रष्टाचार की जााँच CBI से कराने के आदेश देने पडे।
CBI to question bank officials under scanner in 8.5 lakh mule accounts case - The Economic Times
और यह कहानी सिर्फ  एक विभाग की नहीं —सडक निर्माण  से लेकर खनन, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं तक,हर जगह ‘सिस्टम सवालों  के घेरे में है।

पेपर लीक और बेरोज़गारों की हताशा

पेपर लीक कांड ने युवाओं के भरोसे को तोड़ दिया  है। जिस युवा शक्ति को राज्य की रीड बनना था,,वही  आज  आज सडकों पर है,अपने हक़ और मेहनत की कीमत मांगते  हुए हर कुछ  महीनों में भर्ती  परीक्षाओं की जााँच, रद्दीकरण,और आंदोलनों की आवाज बनकर  सुनाई  देती है।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने 10 फरवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है – दिप्रिंट – एएनआईफ़ीड
पलायन रुकने के बजाय और बढ़ा है —आज पहाडों से हर रोज़ सैकडों युवा  रोज़गार की तलाश में मैदान की ओर उतर रहे हैं।​
अपराध और असुरक्षा – बदलता उत्तराखंड

कभी शांत प्रदेश कहा जाने वाला  उत्तराखंड अब अपराध की खबरों से भी अछूता नहीं रहा। हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी वारदातें अब यहां की सुर्ख़ियों में शामिल हैं,सवाल  उठता है — क्या हम वाकई  उस उत्तराखंड में हैं,जिसका  सपना 2000 में देखा गया था?”
 

विकास की रफ्तार – उप्लभ्धियाँ भी कम नहीं 

इन सबके बीच, उत्तराखंड ने विकास की राह पर भी कई कदम बढ़ाए हैं। चारधाम यात्रा के तलए ऑल वेदर  रोड प्रोजेक्ट,हवाई सेवाओं  का विस्तार,और शिक्षा स्वास्थ्य  के नए संस्थान — ये उप्लभ्धियाँ राज्य की प्रगति की तस्वीर दिखाती  हैं। पर्यटन , योग, और जैविक खेती के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है। आज राज्य का GDP 3 लाख करोड के करीब पहुंच  रहा है,और प्रति व्यक्ति  आय में भी बढ़ोतरी हुई है।लेकिन सवाल वही  —क्या विकास का लाभ हर पहाडी गावं तक पहुंचा ?जनता का सवाल – जवाबदेहि कहां है?

जब हर कुछ  सालों में एक नया घोटाला सामने आता है,जब हर भर्ती  पर संदेह हो,जब युवाओं  की आाँखों में विश्वास की जगह निराशा  हो —तब रजत जयंती के जश्न पर ताली बजाना मुश्किल  हो जाता है। सवाल है  — क्या ये 25 साल जनता के लिए बदलाव  लाए या सिर्फ कुर्सियों के लिए ?

निष्कर्ष  – उम्मीद अब भी बाकी है

उत्तराखंड की कहानी संघर्ष से शुरू हुई थी,और उम्मीदों पर अटकी हुई है।ये राज्य युवाओं  की मेहनत और पहाडों की ईमानदारी से बना है।अगर राराजनीतिक इइच्छाशक्ति  ईमानदार हो,तो अगला अध्याय भरोसे और पारदर्शिता  का लिखा  जा सकता है। राज्य का सवाल अब भी वही  है —‘क्या खोया, क्या पाया?’ जवाब आने वाले सालों में तय करेगा कि पहाड़ों का सपना अधूरा रहेगा या पूरा होगा।”
“25 साल बाद भी सवाल वही  — भ्रष्टाचार बनाम विकास | उत्तराखंड @ 25”
 
ये लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं… 

Uttarakhand: प्रतिबंधित कफ सिरप और घटिया दवाओं के खिलाफ अभियान हुआ जारी. 

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अब तक 370 से अधिक सैंपल जांच के दायरे में

Dehradun- राज्यभर में औषधि विभाग द्वारा प्रतिबंधित कफ सिरप और निम्न गुणवत्ता की औषधियों के विरुद्ध सघन औचक निरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त (एफडीए) एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी कर रहे हैं। उनके निर्देशन में सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों की टीमें लगातार फील्ड पर सक्रिय हैं। अब तक 370 से अधिक सैंपल जांच हेतु संकलित किए जा चुके हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रामनगर, देहरादून और रुड़की में छापेमारी-

जनपद नैनीताल में 14 अक्टूबर 2025 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने रामनगर के खताड़ी क्षेत्र में औचक निरीक्षण किया।
बच्चों की सुरक्षा और कफ सिरप की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए की गई इस कार्रवाई में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर एक मेडिकल स्टोर को तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया, जबकि दो स्टोरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और दो स्टोर मौके पर बंद मिले।

संयुक्त टीम ने एक क्लीनिक का भी निरीक्षण किया, जहां से पांच औषधीय नमूने जांच हेतु संकलित किए गए।

इस निरीक्षण में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट, नीरज कुमार, औषधि निरीक्षक अर्चना, निधि शर्मा और शुभम कोटनाला शामिल रहे।

सेलाकुई की औषधि इकाइयों का निरीक्षण-

देहरादून में औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने दून मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेता फर्मों का औचक निरीक्षण किया। जांच में बच्चों के लिए प्रयुक्त खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाएं अलग कर रखी मिलीं, जिनके विक्रय पर रोक थी। टीम ने इन दवाओं को सील कर अग्रिम आदेशों तक विक्रय न करने के निर्देश दिए। साथ ही, सेलाकुई स्थित औषधि विनिर्माण इकाइयों से चार नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।

रुड़की में सरकारी दवाओं का अवैध भंडारण पकड़ा गया-

जनपद हरिद्वार के रुड़की क्षेत्र में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह और मेघा ने गुप्त सूचना पर ग्राम सलीयर स्थित एक प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। यहां बिना लाइसेंस के सरकारी दवाओं का अवैध भंडारण और बिक्री करते हुए पाया गया। टीम ने मौके से 12 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं जब्त कीं, जिनमें राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार की सप्लाई की गई औषधियां भी शामिल थीं। सभी दवाएं सील कर जांच हेतु भेजी गईं। आगे की कार्रवाई Drugs and Cosmetics Act, 1940 के अंतर्गत की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न दिए जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि विभाग की कार्रवाई सतत और प्रभावी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि औषधि निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अनधिकृत बिक्री, भंडारण या मिलावट में लिप्त पाए जाने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी ताकि नागरिकों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां ही मिल सकें।

धामी सरकार का सख्त कदम, बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रदेशभर में कफ सिरप पर बड़ी कार्रवाई

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यभर में अवैध, असुरक्षित और निम्न गुणवत्ता वाली कफ सिरप दवाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की टीमें प्रदेश के हर जिले में सक्रिय हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के मार्गदर्शन में शुरू यह अभियान अब तक की सबसे व्यापक कार्रवाई के रूप में सामने आया है। स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार और अपर आयुक्त व ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी की देखरेख में पूरे प्रदेश में दवा विक्रेताओं, थोक आपूर्तिकर्ताओं और मेडिकल स्टोरों पर औचक निरीक्षण चल रहा है।

 

देहरादून में सबसे बड़ी छापेमारी

आज एफडीए की टीम ने देहरादून में बड़े पैमाने पर छापेमारी की। आयुक्त, खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन के निर्देश पर औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने चकराता रोड, किशननगर चौक, बल्लूपुर चौक, कांवली रोड, बल्लीपुर चौक और प्रेमनगर क्षेत्रों में मेडिकल स्टोरों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण में बच्चों को दी जाने वाली खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाओं के क्रय-विक्रय पर तत्काल रोक लगाई गई। जिन दुकानों में यह दवाएं भंडारित थीं, उन्हें मौके पर सील कर दिया गया। विक्रेताओं को निर्देशित किया गया कि इन औषधियों का विक्रय अगली सूचना तक न करें। निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कई विक्रेताओं ने स्वयं संज्ञान लेकर इन दवाओं को पहले ही दुकान से हटा दिया था। टीम ने मौके पर 11 सिरप के नमूने जांच के लिए लिए। जांच में Coldrif, Respifresh-TR और Relife जैसे सिरप किसी भी मेडिकल स्टोर में उपलब्ध नहीं पाए गए।

 

उधम सिंह नगर में 40 नमूनों की जांच हेतु भेजे

प्रदेश में बच्चों के लिए बनाए गए खांसी के सिरप पर कार्रवाई के तहत उधम सिंह नगर जनपद में औषधि विभाग की टीम ने अभियान तेज कर दिया है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक नीरज कुमार और औषधि निरीक्षक निधि शर्मा के नेतृत्व में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से कुल 10 पेडियाट्रिक कफ सिरप के नमूने जांच हेतु लिए गए हैं। इन सिरप में Dextromethorphan Hydrobromide, Chlorpheniramine Maleate और Phenylepherine Hydrochloride जैसे तत्व पाए गए हैं। अब तक जिले से कुल 40 कफ सिरप नमूने फॉर्म-17 में लेकर विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेजे जा चुके हैं।

 

हरिद्वार व रुड़की में भी सख्त कार्रवाई, 15 नमूने जांच हेतु भेजे

इसी क्रम में हरिद्वार जनपद में भी औषधि विभाग ने अभियान को और तेज किया है। अपर आयुक्त के निर्देशों पर रुड़की के एयरन हॉस्पिटल, विनय विशाल हॉस्पिटल तथा हरिद्वार के मेट्रो हॉस्पिटल से कुल 15 कफ सिरप के नमूने परीक्षण हेतु लिए गए हैं। औषधि निरीक्षक अनीता भारती के नेतृत्व में हुई इस कार्रवाई के दौरान संबंधित प्रतिष्ठानों से लिए गए नमूनों को विश्लेषण के लिए भेज दिया गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, हरिद्वार जिले से अब तक कुल 39 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं।

 

हल्द्वानी में सरकारी अस्पताल से लिए गए नमूने

नैनीताल जनपद के हल्द्वानी में भी एफडीए की कार्रवाई जारी रही। Soban Singh Jeena Base Hospital की ड्रग स्टोर से तीन कफ सिरप के नमूने जांच के लिए लिए गए। सभी नमूनों को गुणवत्ता परीक्षण हेतु औषधि विश्लेषणशाला, देहरादून भेजा गया है।

 

कोटद्वार में ‘Respifresh TR’ सिरप का स्टॉक सीज

पौड़ी जिले के कोटद्वार में एफडीए टीम ने कल रात से छापेमारी अभियान चलाया, जो आज भी जारी रहा। कार्रवाई के दौरान जानलेवा घोषित Respifresh TR कफ सिरप का स्टॉक कई मेडिकल स्टोरों से सीज किया गया। आज भी टीम ने विभिन्न प्रतिष्ठानों से तीन नए नमूने परीक्षण के लिए लिए हैं।

 

चौखुटिया-चांदीखेत में भी सख्त कार्रवाई

अल्मोड़ा जिले के चौखुटिया और चांदीखेत में आज एफडीए की टीम ने छह मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी की। निरीक्षण के दौरान Respifresh TR सिरप (Batch No. R01GL2523) की 12 बोतलें जब्त की गईं। यह सिरप पहले ही एनएसक्यू (Non-Suitable Quality) घोषित किया जा चुका है। टीम ने चार कफ सिरप के नमूने जांच हेतु एकत्र किए।

 

रुद्रप्रयाग में 4 नमूने लिए गए, सैंपल  जांच को भेजे

रुद्रप्रयाग जनपद के तिलवाड़ा क्षेत्र में औषधि निरीक्षकों की टीम ने रिटेल और थोक प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर चार नमूने कफ सिरप के लिए संकलित किए। दवाओं की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

 

उत्तरकाशी में चार सिरपों पर प्रतिबंध

जनपद उत्तरकाशी में औषधि निरीक्षक मोहम्मद ताजिम के नेतृत्व में छापेमारी की गई। टीम ने बच्चों में प्रयुक्त चार प्रकार के कफ सिरपों के नमूने लिए और देहरादून की प्रयोगशाला को भेजे। औषधि निरीक्षक ने सभी मेडिकल स्टोर संचालकों को चेतावनी दी कि निम्नलिखित सिरप किसी भी हालत में न रखें और न बेचें — Dextromethorphan Hydrobromide Syrup (KL-25/148), Coldrif (SR-13), Respifresh TR (R01GL2523) और Relife (LSL25160)। साथ ही निर्देश दिए गए कि 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप बिल्कुल न दिया जाए और वयस्कों को भी केवल डॉक्टर की सलाह पर ही दवाएं दी जाएं।

 

अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गए

प्रदेशभर में जारी छापेमारी के दौरान अब तक 148 नमूने जांच के लिए भेजे गये। इसके साथ ही आज देहरादून में 11, कोटद्वार में 3, हल्द्वानी में 3, अल्मोड़ा में 4, रुद्रप्रयाग में 4 और उत्तरकाशी में 4 नमूने लिए गए हैं। अभियान के दौरान दर्जनों प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किया गया है और कई स्थानों पर संदिग्ध स्टॉक जब्त कर सीलिंग की कार्रवाई की गई है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हमारी सरकार हर उस तत्व के खिलाफ सख्त है जो बच्चों की जान से खिलवाड़ करने की कोशिश करेगा। दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा पर किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। यह कार्रवाई बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

 

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत का बयान

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा एफडीए की कार्रवाई यह संदेश दे रही है कि उत्तराखंड में बच्चों की सेहत सर्वोच्च प्राथमिकता है। जनता से अपील है कि बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी सिरप या दवा बच्चों को न दें। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि केवल प्रमाणित और सुरक्षित औषधियां ही जनता तक पहुंचें।

 

स्वास्थ्य सचिव व आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार का बयान

स्वास्थ्य सचिव एवं आयुक्त डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा राज्यभर में एफडीए की टीमें सक्रिय हैं। जिन सिरपों को जांच के लिए भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सभी जिलों में मेडिकल स्टोरों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संदिग्ध बैच नंबर की औषधियां तुरंत हटाई जाएं।

 

ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी का बयान

अपर आयुक्त और ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी ने कहा एफडीए का अभियान निरंतर जारी रहेगा। पिछले चार दिनों में 27 नमूने जांच हेतु लिए जा चुके हैं और कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए गए हैं। विभाग की टीमें दिन-रात फील्ड में सक्रिय हैं। हमारा लक्ष्य है कि किसी भी असुरक्षित औषधि को बाजार से पूरी तरह समाप्त किया जाए।

एफडीए की जनता से अपील

एफडीए ने प्रदेशवासियों से अपील की है कि यदि किसी मेडिकल स्टोर या वितरक के पास उपरोक्त प्रतिबंधित सिरप पाया जाए तो तुरंत स्थानीय औषधि निरीक्षक या एफडीए कार्यालय को सूचित करें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ लाइसेंस निरस्तीकरण, जुर्माना और अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर जो निर्णायक कदम उठाया है, वह प्रदेश में स्वास्थ्य सुरक्षा की नई मिसाल है। औषधि विभाग की यह मुहिम न सिर्फ संदिग्ध औषधियों पर रोक लगाने में अहम भूमिका निभा रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि धामी सरकार बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

मिलावट खोरों के खिलाफ अभियान का दूसरा दौर शुरू,मुख़्यमंत्री का FDA को साफ़ निर्देश

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त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं की सेहत से किसी भी प्रकार का समझौता न हो, इसके लिए खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग (FDA) उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देश पर विशेष अभियान चलाया हुआ है। नवरात्रों में अभियान के पहले चरण की सफलता के बाद अब दशहरा और दीपावली को देखते हुए इसका दूसरा चरण शुरू कर दिया गया है।इस अभियान के तहत राज्यभर में मिठाई प्रतिष्ठानों, डेयरी उत्पाद विक्रेताओं, मिष्ठान भंडारों, नमकीन और अन्य खाद्य पदार्थों के निर्माण एवं विक्रय स्थलों पर सघन सैंपलिंग और निरीक्षण किए जा रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान

मुख्यमंत्री धामी ने कहा, त्योहार खुशियों और मिलन का समय होते हैं। मेरी प्राथमिकता यह है कि हर घर की थाली शुद्ध रहे और हर परिवार की खुशियाँ सुरक्षित रहें। जनता के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं होगा। मैंने विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मिलावटखोरों के खिलाफ बिना किसी रियायत के कठोर कार्रवाई की जाए। त्योहारों की खुशियाँ मिलावट से मुक्त हों, यही हमारी सरकार की जिम्मेदारी है।

 

FDA का अभियान लगातार जारी

गढ़वाल और कुमाऊँ मंडल के सभी जनपदों में गठित टीमें लगातार कार्रवाई कर रही हैं। यात्रा मार्गों पर विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं और मोबाइल वैनों के माध्यम से सैंपलिंग की जा रही है। मुख्यालय स्तर से अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी स्वयं पूरी स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं और समय-समय पर आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं।

 

उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

आयुक्त FDA डॉ. आर. राजेश कुमार ने कहा, “त्योहारी सीजन में उपभोक्ताओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मिठाई और दूध-डेयरी उत्पादों में मिलावट की शिकायतें इस मौसम में अक्सर सामने आती हैं, जिन्हें किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमारा संकल्प है कि हर उपभोक्ता को शुद्ध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य सामग्री उपलब्ध हो।”

 

दोषियों पर सख्त कार्रवाई

त्योहारों के दौरान मिलावटखोरों की सक्रियता को देखते हुए विभाग ने पहले से ही विशेष रणनीति बनाई है। प्रत्येक जनपद स्तर पर गठित टीमें मिठाई, दूध, खोया, घी, तेल, मसाले और अन्य लोकप्रिय खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर लैब में जांच हेतु भेज रही हैं। दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जा रही है। अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि मुख्यालय स्तर से अभियान की निरंतर मॉनिटरिंग की जा रही है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

रेबीज संक्रमित युवक की निजी अस्पताल में हुई मौत, कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे थे लक्षण

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रेबीज संक्रमित मरीज की सोमवार सुबह करीब सात बजे मौत हो गई। युवक को एम्स में भी राहत नहीं मिली थी। लिहाजा उसके परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए थे। वहां पर उसने दम तोड़ दिया। दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले युवक को लाया गया था। करीब तीन घंटे तक उसे दून अस्पताल में उपचार दिया गया था। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया था।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि व्यक्ति को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। उसके अंदर तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे। मृतक की मां शशि शर्मा ने बताया कि उसे दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश लेकर गई थीं जहां पर उसको प्राथमिक उपचार दिया गया था। स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गईं, जहां पर सुबह उसकी मौत हो गई।

 

कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे रेबीज के गंभीर लक्षण, युवक एम्स रेफर

दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले एक 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया। करीब चार घंटे बाद हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। युवक को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। साथ ही तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे।

चिकित्सकों समेत वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो गए। काफी देर तक चिकित्सक समझ ही नहीं पाए कि युवक को क्या परेशानी है। परिजनों ने जब छह महीने पूर्व युवक को कुत्ते के काटने की बात बताई तो चिकित्सकों को रेबीज होने का संदेह हुआ।

एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई
इसके बाद क्लीनिकल जांच की तो यह बात काफी हद तक पुख्ता भी हो गई। चिकित्सक के अनुसार युवक देहरादून का ही रहने वाला है। परिजनों ने यह बात भी बताई कि युवक को कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई।

रेबीज का नहीं है कोई उपचार 
डॉ. आरएस बिष्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रेबीज की चपेट में आ जाए तो उसका कोई उपचार नहीं है। ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। अगर किसी को गली या फिर पालतू कुत्ता काटता है तो उसे जरूरी तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।

दून अस्पताल में हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 35 लोग 
दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने हर रोज करीब 35 लोग पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 लोग गंभीर घायल होते हैं जिनको एंटी रेबीज के साथ ही सीरम भी लगाना पड़ता है। इन दिनों कुत्ते काटने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चिकित्सकों को बड़ी सौगात, चिकित्सकों को मिलेगा एसडी एसीपी (SD ACP) का लाभ

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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के चिकित्सकों को बड़ी राहत और सौगात दी है। प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को अब एसडी एसीपी (SD ACP) का लाभ प्रदान किया जाएगा। इस संबंध में स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने आदेश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ हमारे डॉक्टर हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पहाड़ की कठिन परिस्थितियों में भी चिकित्सक पूरी निष्ठा से कार्य कर रहे हैं। उनके हितों का ध्यान रखना हमारी प्राथमिकता है। एसीपी का लाभ मिलने से चिकित्सकों को न केवल आर्थिक मजबूती मिलेगी बल्कि सेवा के प्रति और अधिक समर्पण की भावना भी बढ़ेगी। सरकार हमेशा अपने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ खड़ी है।

 

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि सरकार के आदेशानुसार प्रांतीय चिकित्सा सेवा संवर्ग के चिकित्साधिकारियों को एसीपी का लाभ शासनादेश संख्या 654 (दिनांक 14.07.2016) तथा शासनादेश संख्या 154 (दिनांक 04.02.2019) में निहित प्रावधानों के तहत प्रदान किया जाएगा। स्क्रीनिंग कमेटी की संस्तुति के आधार पर इस लाभ की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। कुल 196 पदों का विवरण इस प्रकार है। लेवल 11 में 70 पद स्वीकृत हैं जिनका ग्रेड पे ₹5400 है। लेवल 12 में 56 पद हैं जिनका ग्रेड पे ₹6600 निर्धारित है। लेवल 13 में दो श्रेणियाँ हैं, जिनमें 27 पद ₹7600 ग्रेड पे तथा 43 पद ₹8700 ग्रेड पे वाले हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर सभी स्तरों को मिलाकर 196 पद बनते हैं।

इस फैसले से बड़ी संख्या में चिकित्साधिकारियों को लाभ मिलेगा और स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

उत्तरकाशी आपदा: आंखों से नींद और मन का छिन गया सुकून, मानसिक घाव के बाद लोग घबराहट और बेचैनी से परेशान

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पांच अगस्त को खीर गंगा के रौद्र रूप ने धराली और हर्षिल घाटी में सिर्फ घरों और संपत्तियों को ही नुकसान नहीं पहुंचाया बल्कि लोगों के मन पर भी गहरा असर डाला है। लापता अपनों की चिंता और तबाही के खौफ से कई लोग घबराहट, बेचैनी और नींद न आने जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

इस मानसिक पीड़ा को समझने के लिए स्टेट मेंटल हेल्थ अस्पताल सेलाकुई देहरादून के मनोचिकित्सक डॉ. रोहित गोदवाल और उनकी टीम ने धराली का दौरा किया। पहले दिन की जांच में करीब 150 लोगों में से 10 लोग गंभीर मानसिक समस्याओं से ग्रस्त मिले। डॉ. रोहित ने बताया कि ये लोग ज्यादातर वे हैं जिन्होंने अपनी आंखों से तबाही का मंजर देखा और जिनके परिजन अब भी लापता हैं।

डॉ. रोहित गोदवाल का कहना है कि यह पीटीएसडी (पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर) की स्थिति है। इस स्थिति में व्यक्ति को बार-बार घटना याद आती है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है और वह छोटी-सी आहट से भी घबरा जाता है। दूसरे दिन के परीक्षण में भी 70 में से 10 लोग चिड़चिड़ापन और घबराहट से ग्रस्त पाए गए। सबसे अधिक प्रभावित बुजुर्ग और युवा थे। महिलाएं और बच्चों की संख्या बेहद कम है।

 

आठ दिन तक की काउंसलिंग
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों गंगोत्री, धराली, गंगनानी, डबरानी, भटवाड़ी और हीना में शिविर लगाए हैं। डॉ. गोदवाल ने आठ दिन तक धराली और हर्षिल अस्पताल में लोगों की काउंसलिंग की। उन्होंने लोगों को सलाह दी है कि वे खुद को अकेला न रखें, घटना के बारे में बार-बार चर्चा करने से बचें और परिवार के साथ समय बिताकर माहौल को सकारात्मक बनाएं। यदि कोई मानसिक समस्या से जूझ रहा है तो वह हेल्पलाइन नंबर 144166 पर कॉल करके 24 घंटे काउंसलिंग और मार्गदर्शन ले सकता है।

कम्युनिटी हेल्थ सेंटर सहसपुर देहरादून के सीएमएस डॉ. मोहन डोगरा ने बताया कि कई लोगों ने थकान और कमजोरी की शिकायत की लेकिन दवा लेने और आराम करने के बाद अब उनकी हालत सामान्य है। वहीं धराली आपदा के नोडल अधिकारी डॉ. सीपी त्रिपाठी ने कहा कि आपदा के माहौल में गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को जितना हो सके खुशनुमा माहौल में रखना चाहिए।