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Lok Sabha Election: जल्द उत्तराखंड दौरे पर आ सकते हैं नड्डा, 2 सीटों पर इस दिन उम्मीदवार घोषित करेगी भाजपा।

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 10 मार्च के बाद उत्तराखंड का राजनीतिक दौरा कर सकते हैं। उनके नौ या 10 मार्च तक आने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन उनकी राजनीतिक व्यस्तता के चलते समय तय नहीं हो पाया है।
माना जा रहा कि केंद्रीय चुनाव समिति 10 मार्च तक लोस चुनाव के प्रत्याशियों के चयन की प्रक्रिया में व्यस्त रहेगी, इसलिए नड्डा प्रत्याशियों की सूची फाइनल करने के बाद उत्तराखंड आएंगे। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी चाहती है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष लोस चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले एक दौरा कर लें।

प्रदेश में पार्टी ने नड्डा के तीन कार्यक्रम तय किए हैं। पहला कार्यक्रम हल्द्वानी में होना है, जहां बूथ स्तर तक के पदाधिकारियों का सम्मेलन होगा। इसके बाद दूसरा कार्यक्रम हरिद्वार में होगा, जहां चुनाव प्रबंधन समिति की बैठक रखी गई है। तीसरा कार्यक्रम देहरादून में प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलन के तौर पर होगा।

10 मार्च तक उम्मीदवार घोषित होने की संभावना-

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, भाजपा हरिद्वार और गढ़वाल लोस सीट पर 10 मार्च तक उम्मीदवार घोषित कर सकती है। इस बीच केंद्रीय नेतृत्व ने प्रदेश नेतृत्व से फीड बैक लिया है। साथ ही एक एजेंसी भी दावेदारों का दमखम टटोल रही है।

गढ़वाल और हरिद्वार लोकसभा सीट पर अभी पेच फंसा-

गढ़वाल और हरिद्वार लोकसभा सीट पर अभी पेच फंसा है। इन दोनों सीटों पर उम्मीदवार बदले जा सकते हैं। केंद्रीय नेतृत्व ने टिहरी लोस सीट पर राजशाही परिवार पर भरोसा जताते हुए माला राज्य लक्ष्मी शाह पर फिर से भरोसा जताया है। हालांकि, प्रत्याशियों की घोषणा से पहले तक माला राज्य लक्ष्मी शाह के टिकट को लेकर तमाम तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं।

इस सीट पर कई दावेदारों के नाम भी सामने आ रहे थे, लेकिन अंततः माला राज्य लक्ष्मी को पार्टी ने लगातार तीसरे चुनाव अपना उम्मीदवार बनाया है। अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ लोकसभा सीट पर पार्टी ने अजय टम्टा पर फिर से विश्वास जताया है। इस सीट को लेकर अटकलों का बाजार खासा गर्म था

Lok Sabha Chunav 2024: उत्तराखंड में गठबंधन के बीच हरिद्वार लोस सीट पर सपा की निगाहें, जानिए कैसा है वोटों का गणित।

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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन के बीच अब समाजवादी पार्टी उत्तराखंड की टीम को हरिद्वार सीट पर टिकट का इंतजार है। इस सीट पर लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रत्याशी एक बार जीत दर्ज कर चुका है। वहीं, एक बार विधानसभा चुनाव में भी प्रत्याशी ने यहां जीत दर्ज की थी। आलाकमान ने अभी 10 मार्च तक का समय दिया है।

वोटों के गणित के हिसाब से समाजवादी पार्टी अपने लिए हरिद्वार सीट को मुफीद मानती है। 1996 के विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रत्याशी अमरीश कुमार और 2004 लोकसभा चुनाव में उनके प्रत्याशी राजेंद्र कुमार के चुनाव जीतने के बाद से हर चुनाव में सपा इस सीट पर अपनी जीत की जुगत भिड़ाती आई है। इस बार भी राज्य के सपा नेताओं की निगाहें इस सीट पर हैं, जिसकी तैयारी भी अंदरखाने चल रही है।

हरिद्वार सीट पर ही दावा पेश किया-

इस बीच यूपी में सपा और कांग्रेस का गठबंधन हो गया है। ऐसे में मुश्किल ये है कि कांग्रेस के हाथों से उत्तराखंड की पांचों लोकसभा सीटों में से कोई सपा के हाथ आएगी या नहीं, इस पर पार्टी आलाकमान को निर्णय लेना है। सपा के प्रदेश अध्यक्ष शंभूनाथ पोखरियाल का कहना है कि आलाकमान ने अभी 10 मार्च तक इंतजार करने को कहा है।

इसके बाद तय होगा कि उनका प्रत्याशी उत्तराखंड के चुनावी मैदान में दम दिखाएगा या नहीं। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डॉ. सत्यनारायण सचान का कहना है कि अभी आलाकमान को इस पर निर्णय लेना है। बताया, राज्य की ओर से हरिद्वार सीट पर ही दावा पेश किया गया है।

सीट न मिली तो कांग्रेस को समर्थन-

यूपी के गठबंधन के हिसाब से देखें तो अगर सपा को उत्तराखंड में कोई सीट नहीं मिली तो पार्टी पांचों सीटों पर कांग्रेस को समर्थन दे सकती है। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस पर निर्णय लेना है।

चुनाव आयोग: सरकार ने बदला नियम, अब 80 के बजाय 85 वर्ष से अधिक आयु वालों को घर से ही मतदान करने की मिलेगी सुविधा।

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लोकसभा चुनाव में इस बार 80 के बजाए 85 से अधिक आयु वाले मतदाताओं को घर से वोट डालने की सुविधा मिली है। चुनाव आयोग ने नियम में बदलाव कर दिया है। अब निर्वाचन कार्यालय की ओर से 85 से अधिक आयु वर्ग के मतदाताओं का चिन्हीकरण किया जा रहा है।

इसी हिसाब से उन्हें घर से वोट की सुविधा दी जाएगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया, प्रदेश में 80 से अधिक आयु वर्ग के एक लाख 54 हजार 259 मतदाता हैं। इनमें से उन्हीं मतदाताओं को घर से वोट डालने की सुविधा मिलेगी, जिनकी आयु 85 वर्ष से अधिक है। ऐसे मतदाताओं को निर्वाचन कार्यालय तक अपना अनुरोध भेजना पड़ता है।

ऐसे वोटरों को बीएलओ से 12-डी फार्म भरना होता है। अनुमति मिलने पर मतदानकर्मी उनके घर जाकर मतदान कराते हैं। मतदान दल में करीब सात लोग होते हैं, जिसमें एक सेक्टर अधिकारी, दो मतदान अधिकारी, एक माइक्रो ऑब्जर्वर, एक पुलिसकर्मी, एक वाहन चालक शामिल है। खास बात ये है कि घर से होने वाले मतदान की जानकारी संबंधित क्षेत्र के राजनीतिक दलों को भी दी जाती है, ताकि मतदान प्रक्रिया को देख सकें।

मतदाता और मतदेय स्थल बढ़े

प्रदेश में विधानसभा चुनाव के मुकाबले लोकसभा चुनाव के मतदेय स्थल बढ़ गए हैं। 2022 के विस चुनाव में प्रदेश में कुल 11,697 मतदेय स्थल थे, जिनकी संख्या लोकसभा चुनाव में बढ़कर 11,729 हो गई है। इसी प्रकार, विस चुनाव में प्रदेश में 81 लाख 72 हजार 173 मतदाता थे, जिनकी संख्या लोकसभा चुनाव में अब तक 82 लाख 43 हजार 423 पर पहुंच चुकी है।

 

BJP Candidates List: लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा का शंखनाद, पहली सूची जारी; इन दिग्गजों को चुनावी रण में उतारा, वाराणसी से पीएम मोदी लड़ेंगे चुनाव।

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भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 का शंखनाद कर दिया है। पार्टी ने शनिवार को अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने बताया कि 16 राज्य और दो केंद्र शासित प्रदेशों की 195 सीटों के उम्मीदवार तय कर दिए गए हैं। बाकी सीटों पर मंथन चल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ेंगे। 34 केंद्रीय एवं राज्य मंत्रियों के नाम भी इस सूची में हैं।

भाजपा की पहली सूची में क्या खास? 

  • 195 नामों की पहली सूची
  • 34 केंद्रीय मंत्रियों के नाम पहली सूची में
  • 28 महिलाओं को मौका
  • 47 युवा उम्मीदवार, जिनकी उम्र 50 साल से कम है
  • 27 नाम अनुसूचित जाति से
  • 18 प्रत्याशी अनुसूचित वर्ग से
  • 57 नाम अन्य पिछड़ वर्ग से

किस राज्य से कितनी सीटों पर प्रत्याशियों का एलान-
विनोद तावड़े ने बताया कि उत्तर प्रदेश की 51, पश्चिम बंगाल की 26, मध्य प्रदेश की 24, गुजरात की 15, राजस्थान की 15, केरल से 12, तेलंगाना से नौ, असम से 11, झारखंड से 11, छत्तीसगढ़ की 11, दिल्ली की पांच, जम्मू-कश्मीर की दाे, उत्तराखंड की तीन और अरुणाचल, गोवा, त्रिपुरा, अंडमान-निकोबार और दमन और दीव की एक-एक सीट पर प्रत्याशी तय किए गए हैं।

29 फरवरी को हुई थी अहम बैठक-
इससे पहले गुरुवार को पार्टी ने देर रात तक मंथन किया था। केंद्रीय चुनाव कमेटी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित अन्य सदस्यों ने कई नामों को अंतिम रूप दिया था।

बैठक के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि पार्टी की ओर से लोकसभा चुनाव के लिए 100 से 125 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए जा सकते हैं। बैठक में 2014-2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की हारी हुई सीटों पर चर्चा भी हुई थी। पार्टी लोकसभा चुनाव में सबसे ज्यादा महिला प्रत्याशी उतारने की तैयारी भी कर रही है। 2019 के चुनाव में 53 महिलाएं भाजपा के टिकट पर लोकसभा चुनाव में उतरी थीं। 33 फीसदी के हिसाब से इस बार 70 महिलाओं को टिकट मिल सकता है।
2019 में भाजपा का प्रदर्शन-
भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव यानी 2019 में 543 सीटों में से 436 पर उम्मीदवार उतारे थे। बाकी सीटें पार्टी ने सहयोगी दलों को दी थीं। जिन 436 सीटों पर भाजपा ने चुनाव लड़ा था, उनमें से पार्टी को 303 पर जीत मिली थी। यह आंकड़ा लोकसभा में बहुमत के आंकड़े 272 से भी ज्यादा था। इसके अलावा 72 सीटों पर भाजपा दूसरे नंबर, 31 सीटों पर तीसरे नंबर और 30 सीटों पर इससे भी नीचे रही थी, जबकि 51 सीटों पर पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत भी जब्त हो गई थी।
2019 में किस गठबंधन का कैसा था प्रदर्शन?  
पिछले लोकसभा चुनाव में भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को 351, कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) को 90 और सपा-बसपा के गठबंधन को 15 सीटें मिली थीं।
भाजपा को अकेले मिला था बहुमत-
2019 में भाजपा 303 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और अकेले ही उसने बहुमत के जादुई आंकड़े (272) को पार कर लिया था। इसके बाद कांग्रेस 52 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही थी। डीएमके को 24, तृणमूल कांग्रेस को 22 और वाईएसआरसीपी को 22 सीटें मिली थीं।

सियासी संकट: ‘जल्द गिर सकती है हिमाचल सरकार, कांग्रेस के कई विधायक संपर्क में, बागी राजिंदर राणा ने किया ये दावा।

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हिमाचल प्रदेश के बागी विधायक राजिंदर राणा ने राज्य की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सवा साल हो गए हैं। हमने कई बार हाईकमान को अवगत कराया कि प्रदेश में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। सीएम सुक्खू विधायकों को जलील और अपमानित करते हैं। यहां तक की विधायकों के काम नहीं करते हैं। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की कोई सरकार नहीं थी। यह सिर्फ सुक्खू के मित्रों की सरकार है। कई बार बोलने के बाद भी कोई असर नहीं हुआ। राणा ने दावा किया है कि कांग्रेस के कई विधायक संपर्क में हैं। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार जल्द ही गिरने वाली है। 

राजिंदर राणा ने कहा कि हम सब ने राज्यसभा चुनाव में हिमाचल प्रदेश से प्रत्याशी बनाने की मांग की थी। अब नौ विधायकों ने हिमाचल प्रदेश के स्वाभिमान की रक्षा की और हिमाचल प्रदेश के व्यक्ति को राज्यसभा भेजा है।

राजिंदर राणा ने किया सीएम सुक्खू पर पलटवार-

सीएम के काले नाग बोलने पर राजिंदर राणा ने पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पिछले सवा साल से प्रदेश की हालत क्या हो गई है? नौजवान परीक्षा देकर सड़कों पर बैठे हैं, उनके परिणाम जारी नहीं हो रहे हैं। प्रदेश की जनता को दी गई गारंटियां पूरी नहीं हो रही हैं। सिर्फ मित्रों के काम हो रहे हैं। विधायकों को जलील किया जा रहा है।

राणा ने कहा कि सभी नौ विधायक सीएम सुक्खू से परेशान हैं। इससे पहले भी हमने हाईकमान से कहा था कि अगर हिमाचल प्रदेश को बचाना है तो इस व्यक्ति को सीएम पद से हटाना होगा। मगर हाईकमान ने कोई सुनवाई नहीं की। पूरी देश की तरह हिमाचल प्रदेश में भी कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई है। राणा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के मौजूदा सीएम लगता है कि हिंदुस्तान में सबसे झूठ बोलने वाले मुख्यमंत्री हैं।

राजिंदर राणा ने बताया कि सीएम ने मीडिया में यह कहा कि बागी विधायक हमसे संपर्क कर रहे हैं और वह वापस आना चाहते हैं। मगर यह बिल्कुल झूठ है। कोई नहीं आना चाहता है। सभी विधायकों ने लंबे समय से सोच समझकर फैसला लिया है। सीएम ने काले नाग की संज्ञा दी है। इसका फैसला जनता की अदालत करेगी। हम हिमाचल की अस्मिता, जनता और हितों के साथ हैं।

 

राणा ने कहा कि पूरा देश जानता है कि विक्रमादित्य राजा वीरभद्र सिंह के पुत्र हैं। वीरभद्र सिंह के परिवार और समर्थकों को सीएम सुक्खू ने अपमानित किया है। यह पूरा प्रदेश जानता है। उन्होंने कहा कि कल विक्रमादित्य ने सभी विधायकों से मुलाकात की थी। वह इस सरकार से बहुत परेशान हैं। आने वाले समय में बहुत कुछ होने वाला है। कांग्रेस के कई विधायक संपर्क में हैं और आना चाहते हैं। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार जल्द ही गिरने वाली है।

Uttarakhand News: राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा जरूरी… सरकार ने दी चेतावनी।

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आयुष्मान कार्ड पर मुफ्त इलाज कराने से बच रहे निजी अस्पतालों को लेकर सरकार सख्त है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा। अस्पताल प्रबंधकों के साथ बैठक हो चुकी है। जल्द ही विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे।

कांग्रेस विधायक ममता राकेश के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में चल रहे सभी छोटे-बड़े अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज सुविधा देनी होगी।

कई बड़े अस्पताल कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा नहीं दे रहे हैं। इस पर सरकार ने साफ निर्देश दिए कि राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा।

 

 

अब तक 4.87 लाख कर्मचारियों के कार्ड बन चुके हैं। इसमें 1.15 लाख कर्मचारियों ने विभिन्न बीमारियों का कैशलेस इलाज कराया। इस पर 349 करोड़ राशि खर्च हुई है। कर्मचारियों को ओपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं है। इसका कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जाती है। भर्ती होने पर असीमित व्यय पर कैशलेस इलाज किया जा रहा है।

Sandeshkhali Case: संदेशखाली केस का आरोपी शाहजहां शेख गिरफ्तार, जानिए कौन है ये TMC नेता शाहजहां शेख.

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लंबे समय से सुर्खियों में रहे तृणमूल कांग्रेस के नेता और संदेशखाली कांड का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख गिरफ्तार हो गया है. शाहजहां की गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के 24 उत्तर परगना जिले के मिनाखां से हुई है. शाहजहां शेख को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा. बता दें कि शाहजहां पर संदेशखाली में कई महिलाओं के साथ उत्पीड़न का आरोप है. साथ ही कई लोगों के जमीन पर कब्जा करने का भी आरोप है.

यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख की गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं है. विशेष रूप से, संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों को लेकर पिछले एक महीने से उबाल है.

जानिए कौन है शाहजहां शेख ?

शाहजहां शेख (42 वर्षीय) को ‘भाई’ के नाम से जाना जाता है। उसने बांग्लादेश सीमा के पास उत्तर 24 परगना के संदेशखाली ब्लॉक में मत्स्य पालन में एक छोटे से श्रमिक के रूप में काम की शुरुआत की थी। वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। उसने संदेशखाली में मत्स्य पालन और ईंट भट्टों में एक श्रमिक के काम की शुरुआत की थी।

साल 2004 में शेख ने ईंट भट्टों के यूनियन नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। बाद में वह अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की स्थानीय इकाई में शामिल हो गया। जोशीले भाषणों और संगठन कौशल के लिए पहचाने जाने वाले शेख ने 2012 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।

तब से सत्ता के गलियों में शेख का कद बढ़ा है। 2018 में शेख ने सरबेरिया अग्रहटी ग्राम पंचायत के उप प्रमुख के रूप में प्रसिद्धि हासिल की। शेख को उत्तर 24 परगना के लिए ‘मत्सा कर्माध्यक्ष’ (मत्स्य पालन के प्रभारी) के रूप में जाना जाता था, जिले के मत्स्य विकास की देखरेख करता था। जो राजनीतिक और आर्थिक दोनों क्षेत्रों में उनकी प्रभावशाली स्थिति को दिखाता है।

गौरतलब है कि उत्तरी 24 परगना जिले में शाहजहां शेख और उनके समर्थकों के खिलाफ जमीन हड़पने और स्थानीय महिलाओं के यौन शोषण के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. पिछले महीने कथित राशन घोटाले के सिलसिले में उसके घर पर छापा मारने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद से शाहजहां शेख फरार था.

 

संकट में हिमाचल की कांग्रेस सरकार, क्या महाराष्ट्र की तरह अब हिमाचल में भी गिरेगी सुक्खू सरकार !

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तीन राज्यों की 15 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार को मतदान कराए गए जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं। प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार थे। इसके कारण यहां मतदान कराना पड़ा। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा ने हर्ष महाजन को टिकट दिया। नामांकन के साथ ही राज्य में क्रॉस वोटिंग की आशंकाएं जाहिर की जाने लगी थीं जो सच हुईं। 

इस दौरान सत्ताधारी कांग्रेस के कम से कम कम छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले। इसके बाद फैसला पर्ची से हुआ। इसमें हर्ष महाजन जीत गए। तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस्तीफे के मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अल्पमत में है। ऐसे में अब राज्य में सियासी संकट खड़ा हो गया है। जून 2022 में महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कुछ स्थितियां उत्पन्न हुई थीं जब एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।

हिमाचल प्रदेश में कितनी सीट के लिए मतदान हुए और क्यों? 

दरअसल, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नड्डा इस बार गुजरात से निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। हिमाचल में इस वक्त कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया। सिंघवी के सामने भाजपा ने हर्ष महाजन को उतारा। हर्ष कांग्रेस से ही भाजपा में आए हैं। 68 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 40 विधायक हैं। भाजपा के 25 विधायक हैं। वहीं, तीन निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को समर्थन दे रखा है।राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की जीत के लिए 35 वोट की जरूरत थी। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के लिए यह लड़ाई बहुत आसान दिख रही थी। इसके बाद भी भाजपा ने यहां पास पलट दिया। मतदान के नतीजे आए तो दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले हैं। यानी कांग्रेस और निर्दलीय समेत कुल नौ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों का क्या होगा?

क्रॉस वोटिंग के दावे को लेकर राज्य में सियासी उठापटक शुरू हो चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के अल्पमत में होने का दावा करने वाली भाजपा क्या सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। दूसरी ओर नजर कांग्रेस पर भी होगी जिसने कहा है कि राज्यसभा चुनाव से पहले उसने व्हिप जारी किया था।हिमाचल सरकार का सियासी भविष्य क्या है? इस पर हमने लोकसभा के पूर्व महासचिव पीटीडी अचारी से बात की। अचारी ने कहा, ‘राज्यसभा चुनाव के लिए कोई व्हिप नहीं होती है। व्हिप से कोई फायदा नहीं होता। कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा के लिए मतदान किया है तो यह मुसीबत है। यदि कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ चले गए और उसके लिए मतदान किया है तो कांग्रेस का बहुमत कम हो रहा है। यदि ये विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो अयोग्य हो जाएंगे। ऐसे में अभी तो स्थिति अस्थिर है।’

 

क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक अयोग्य हो सकते हैं?

अचारी ने कहा, ‘यदि नमूने के तौर पर दो-तीन विधायकों को अयोग्य करते हैं तो उसके लिए आधार अलग होता है। जैसे कि विधायक ने अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ दी है। इस आधार पर विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। दूसरी स्थिति में यदि सभी विधायकों के खिलाफ याचिका दाखिल करें तो ऐसा होगा कि कांग्रेस खुद कह रही है कि उसका बहुमत नहीं है। ऐसा कोई भी दल नहीं करेगा। लेकिन अभी मुसीबत है। उप-चुनाव बाद की बात है।’

 

 क्या हिमाचल में सरकार गिर सकती है?

2022 में हुए एमएलसी चुनाव के दौरान कुछ इसी तरह की स्थिति महाराष्ट्र में बनी थी। दरअसल, जून 2022 में महाराष्ट्र में एमएलसी की 10 सीटों पर चुनाव हुए। इसके लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) यानी शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन ने छह उम्मीदवार उतारे थे तो भाजपा ने पांच। खास बात ये है कि शिवसेना गठबंधन के पास सभी छह उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल था, लेकिन वह एक सीट हार गई। इन पांच में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली और एनसीपी-शिवसेना के खाते में दो-दो सीटें आईं।वहीं, भाजपा के पास केवल चार सीटें जीतने भर की संख्या बल थी, लेकिन पांचवीं सीट भी निकालने में पार्टी सफल रही। एमएलसी चुनाव में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई है। इसके बाद महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई विधायक पहले गुजरात फिर असम चले गए। कई दिन चले सियासी ड्रामे के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए। अब यह देखना होगा कि हिमाचल के बागी विधायक क्या करते हैं।

 

UP Police Bharti: सीएम योगी आदित्यनाथ का बड़ा फैसला, यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 हुई रद्द ।

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युवाओं के हित में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बड़ा निर्णय लिया है। यूपी पुलिस सिपाही भर्ती परीक्षा-2023 को मुख्यमंत्री ने निरस्त कर दिया है। सीएम ने कहा कि 6 माह के भीतर ही पूर्ण शुचिता के साथ परीक्षा आयोजित की जाएगी । कहा, परीक्षा की गोपनीयता भंग करने वाले एसटीएफ की रडार में हैं कई बड़ी गिरफ्तारियां हो भी चुकी हैं।

परीक्षा के बाद हुआ था खूब प्रदर्शन-

यूपी आरक्षी भर्ती परीक्षा को निरस्त कर दिया गया। परीक्षा निरस्त करने की मांग को लेकर प्रदेश के कई जिलों के अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। आरोप लगाया कि प्रश्न पत्र लीक होने के साथ ही परीक्षा में बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। हाल ही में प्रयागराज में सैकड़ों की संख्या में सिपाही भर्ती परीक्षा देने वाले अभ्यर्थी हाथ में तख्तियां लेकर परीक्षा निरस्त कराने की मांग को लेकर सड़क पर उतरे थे।

RO/ARO परीक्षा की शिकायतों की होगी जांच, शासन ने मांगे साक्ष्य-

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग द्वारा बीते 11 फरवरी को आयोजित की गई समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 से जुड़ी शिकायतों की भी जांच कराने का निर्णय लिया है।

  • अपर मुख्य सचिव, नियुक्ति एवं कार्मिक ने आदेश जारी किया।
  • समीक्षा अधिकारी/ सहायक समीक्षा अधिकारी (प्रारम्भिक) परीक्षा – 2023 की शुचिता व पारदर्शिता के उद्देश्य में निर्णय लिया गया है कि परीक्षा के संबंध में प्राप्त शिकायतों का शासन स्तर पर परीक्षण किया जाए।
  • इस परीक्षा के संबंध में किसी भी प्रकार की शिकायत अथवा इसकी शुचिता को प्रभावित करने वाले तथ्यों को संज्ञान में लाना चाहे तो वह अपना नाम तथा पूरा पता तथा साक्ष्यों सहित कार्मिक तथा नियुक्ति विभाग के ई-मेल आई.डी. – secyappoint@nic.in पर 27 फरवरी 2024 तक उपलब्ध करा सकते हैं।

इतने थे अभ्यर्थी-

सिपाही भर्ती की लिखित परीक्षा निर्धारित तिथि 17 व 18 फरवरी को सभी जिलों में दो पालियों में हुई थी। प्रदेश में 2,385 परीक्षा केंद्रों पर परीक्षा के दौरान बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के बाद ही अभ्यर्थी को प्रवेश दिया गया था। आरक्षी नागरिक पुलिस के 60,244 पदों पर भर्ती के लिए कुल 48,17,441 अभ्यर्थियों में 15,48,969 महिला अभ्यर्थी भी थे। प्रत्येक पाली में 12,04,360 अभ्यर्थी शामिल हुए थे।

AAP और कांग्रेस में हो गई डील, पंजाब में नहीं हुआ पैचअप, दिल्ली-हरियाणा और गुजरात में इन सीटों पर चुनाव लड़ेंगे दोनों दल;।

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लोकसभा चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पांच राज्यों के लिए सीट बंटवारे का एलान किया गया है। AAP और कांग्रेस के बीच दिल्ली, हरियाणा, गोवा, गुजरात और चंडीगढ़ की सीटों को लेकर आपसी सहमति बन गई है।

जानिए कौन कहां से लड़ेगा चुनाव?

आपको बता दें कि दिल्ली की 7 लोकसभा सीटों में से 4 पर आम आदमी पार्टी चुनाव लड़ेगी और तीन सीटों पर कांग्रेस प्रत्याशी अपनी किस्मत को आजमाएंगे।

दिल्ली में लोकसभा की हैं 7 सीटें-

दिल्ली में AAP चार पर लड़ेगी

  • नई दिल्ली
  • वेस्ट दिल्ली
  • साउथ दिल्ली
  • ईस्ट दिल्ली

कांग्रेस तीन सीटों पर लड़ेगी चुनाव-

  • चांदनी चौक
  • नॉर्थ ईस्ट
  • नॉर्थ वेस्ट

गुजरात में 26 लोकसभा सीटें

कांग्रेस की हैं – 24

AAP की हैं – 2 (भरूच और भावनगर)

हरियाणा में 10 लोकसभा सीटें

9 सीटें पर कांग्रेस लड़ेगी चुनाव

AAP लड़ेगी एक सीट (कुरुक्षेत्र) पर चुनाव

चंडीगढ़ और गोवा की सीटों पर हुआ ये फैसला-

चंडीगढ़ में कांग्रेस का प्रत्याशी चुनाव लड़ेगा।

गोवा में दोनों सीटों पर कांग्रेस चुनाव लड़ेगी।

पंजाब में नहीं बन पाई बात-

इसके अलावा AAP और कांग्रेस ने पंजाब में अलग-अलग चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। कांग्रेस महासचिव और सांसद मुकुल वासनिक ने बताया कि कांग्रेस और AAP के बीच आगामी लोकसभा चुनाव 2024 के लिए सीट बंटवारे पर सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ पर लंबी चर्चा के बाद अंत में यह निर्णय लिया गया कि कांग्रेस का उम्मीदवार वहां से चुनाव लड़ेगा।

‘देश को जिताने के लिए हुआ INDI गठबंधन का जन्म’

AAP सांसद संदीप पाठक ने कहा कि हर राज्य की अपनी राजनीतिक परिस्थिति है और उन्हीं परिस्थितियों को देखकर चुनाव जीतने के उद्देश्य से ये फॉर्मूला बनाया गया है। INDI गठबंधन का जन्म देश को जिताने के लिए हुआ है, देश की जनता को जिताने के लिए हुआ है किसी को हराने के लिए नहीं हुआ है।’