Category Archive : राष्ट्रीय खबर

लगातार हो रही भारी बारिश के चलते चारधाम यात्रा 5 सितंबर तक स्थगित

170 Minutes Read -

उत्तराखंड प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते सरकार ने जनहित को लेकर चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब यात्रा को आने वाली 5 सितंबर तक स्थगित किया गया है .

भारी बारिश और भूस्खलन से मार्ग बाधित –

प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से जगह जगह न केवल मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं बल्कि भूस्खलन से जानमाल का ख़तरा भी बरकरार है ,
प्रशाशन लगातार अवरुद्ध मार्गों को खोलने के लिए प्रयासरत है ,

यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षा –

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे से बात कर ये जानकारी मिली कि सुरक्षा को देखते हुए ही ये यात्रा स्थगित करने का फैसला जनहित में लिया गया है ,
मौसम के सामान्य होते ही यात्रा पूर्ण रूप से सुचारू कर दी जाएगी .

प्रदेश में जारी है भारी बारिश का अलर्ट –

गौरतलब है कि लगातार होती बारिश की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों और जिलों में हालात सामान्य नहीं हैं ,
सुरक्षा और राहत बचाव कार्य के लिए प्रदेश में सरकारी तंत्र के साथ ही प्रदेश की SDRF और NDRF के साथ ही उत्तराखंड पुलिस लगातार जुटी है ,जिसमें स्थानीय निवासियों से भी भरपूर सहयोग मिल रहा है ,

आपदा राहत केंद्र रखे हुए है हर स्थिति पर नजर –

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभाग 24 घंटे हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है,

खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर घटना पर नजर बनाए हुए हैं , प्राथमिकता यही है कि आम जनमानस को मुश्किल हालात उत्पन्न होने पर तुरंत सहायता मिले

 

Disaster Management Secy orders round the clock vigilance amid rainfall  warning | Garhwal Post

Garhwal Divisional Commissioner Vinay Shankar Pandey

उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश को देखते हुए, सरकार ने चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पांच सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय ने बताया कि भारी बारिश से प्रदेश में कई जगह भूस्खलन या मलबा आने से मार्ग बाधित हो रहे हैं। जिन्हें सरकार प्राथमिकता पर खोल रही है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा ओर सुविधा को देखते हुए, फिलहाल चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा को 05 सितम्बर 2025 तक स्थगित किए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे प्रतिकूल मौसम की स्थिति को देखते हुए फिलहाल यात्रा मार्गों पर प्रस्थान न करें तथा प्रशासन द्वारा जारी परामर्श का पालन करें। मौसम सामान्य होने एवं मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के उपरांत यात्राओं को पुनः प्रारम्भ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा सड़क मार्गों की निगरानी, सफाई तथा यात्रियों की सुरक्षा हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि धैर्य एवं संयम बनाए रखें तथा यात्रा संबंधी अद्यतन जानकारी के लिए प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क करते रहें।

चमोली जिले में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी, कर्णप्रयाग, ज्योतिर्मठ के बाद अब नंदानगर

121 Minutes Read -

चमोली जनपद में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी हैं। सबसे पहले कर्णप्रयाग के बहुगुणा नगर में भूधंसाव की घटना सामने आई। यह क्षेत्र घाटी में होने के बावजूद भूधंसाव हो रहा है। उसके बाद ज्योतिर्मठ के भूधंसाव ने सबको विचलित कर दिया था। यहां सैकड़ों मकान और होटल भूधंसाव की जद में आ गए थे।

Land Subsidence Incidents Increased In Chamoli In Last Three Years After Karnaprayag  Jyotirmath Now Nandanagar - Amar Ujala Hindi News Live - Uttarakhand:चमोली  जिले में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं

अब नंदानगर के भूधंसाव ने फिर से लोगों को चिंता में डाल दिया है। ज्योतिर्मठ की तरह ही नंदानगर में भी जमीन से पानी का रिसाव हो रहा है। यहां कई घरों से पानी निकलने के बाद लोगों ने मकान छोड़ दिए हैं। भूधंसाव भी लगातार बढ़ रहा है। चमोली जनपद आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां बादल फटना, भूस्खलन, भूधंसाव, अतिवृष्टि की आपदाएं चमोलीवासी कई वर्षों से झेल रहे हैं।

Chamoli News Nandanagar Band Bazaar Hit By Landslide 25 Shops In Danger 34  Families Shifted - Amar Ujala Hindi News Live - Chamoli:भूधंसाव की चपेट में  आया नंदानगर का बैंड बाजार, खतरे

पिछले तीन वर्षों में भूधंसाव जैसी आपदा का नया पैटर्न देखने को मिल रहा है। नंदानगर के व्यापार संघ अध्यक्ष नंदन सिंह और कथावाचक शंभू प्रसाद पांडे का कहना है कि भूधंसाव का व्यापार रुप से वैज्ञानिक सर्वे होना चाहिए। नंदानगर क्षेत्र आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है। यहां का वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद यहां की बसावट के लिए योजना तैयार होनी चाहिए।

Chamoli News Nandanagar Band Bazaar Hit By Landslide 25 Shops In Danger 34  Families Shifted - Amar Ujala Hindi News Live - Chamoli:भूधंसाव की चपेट में  आया नंदानगर का बैंड बाजार, खतरे

नंदानगर में हो रहे भूधंसाव से प्रवासी लोग भी चिंतित हैं। वे लगातार अपने परिजनों, रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन कर वहां की स्थिति के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जो लोग नंदानगर में हैं, वे भी प्रभावित क्षेत्र को देखकर चिंतित हैं। रविवार को बैंड बाजार के अलावा संपूर्ण नंदानगर बाजार बंद रहा। नगर के व्यापारियों ने भी प्रभावितों की दुकानों को खाली करवाने में मदद की।

उत्तरकाशी: स्यानाचट्टी में कृत्रिम झील मचा सकती है तबाही, होटल- स्कूल सब डूबे; अब कैसे होगी पंक्चर? लोगों ने पानी में उतर जताया विरोध

224 Minutes Read -

उत्तरकाशी में धराली आपदा के बाद हर्षिल घाटी में बनी कृत्रिम झील  बड़ी तबाही मचा सकती है. दरअसल यमुना नदी में स्यानाचट्टी के पास बनी कृत्रिम झील ने विकराल रूप ले लिया है. यह झील वॉटर बम’ बनती जा रही है. क्या होटल और क्या घर, सब पानी में डूब गए हैं. चार मंजिला कालिंदी होटल की तीन मंजिलें पानी में डूब गई है. पास में बनी पुलिस चौकी का एक मंजिल भी पानी में डूब गया है. पहले यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालु भी यहां बने पुल से होकर गुजरते थे. लेकिन कत्रिम झील की वजह से पुल भी पानी में पूरी तरह से डूब चुका है

हालांकि यमुना में बनी झील का जलस्तर देर रात से  एक मीटर घटा है. लेकिन खतरा टला नहीं है. यमुना नदी की मूल धारा में लगातार गढ़ गाड़ बाधा बन रहा है. गढ़ गाड़ में लगातार मलवा और बोल्डर अपना रुख बदल रहा है. स्यानाचट्टी में बड़ी पार्किंग भी पानी में डूब चुकी है.

इतना ही नहीं स्यानाचट्टी सरकारी स्कूल की एक मंजिल पानी में पूरी डूब गई है.सभी सरकारी कागज भी पानी में नष्ट हो गए हैं. कुपड़ा गाड़ के मलवे ने यमुना नदी के मुहाना को ब्लॉक कर दिया है. झील से पानी निकाले जाना बहुत जरूरी है. लेकिन अगर झील टूटी तो यमुना नदी के पानी का वेग बढ़ जाएगा, जिससे तटीय क्षेत्रों में बड़ी तबाही मच सकती है.

Latest and Breaking News on NDTV

कृत्रिम झील से अब तक हुआ कितना नुकसान?

  • यमुनोत्री नेशनल हाइवे का मोटर पुल और सड़क जलस्तर से डूबा
  • चार मंजिला होटल कालिंदी का दो मंजिल होटल पानी में डूबा
  • पुलिस चौकी स्यानाचट्टी का एक मंजिला भवन पानी में डूबा
  • GMVN गेस्ट हाउस पानी में डूबा
  • स्यानाचट्टी बड़ी पार्किंग के पास पहुंचा यमुना नदी का पानी
  • जूनियर हाईस्कूल के मैदान तक पहुंचा झील का पानी

झील को पंक्चर करना बड़ी चुनौती

रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए NDRF-SDRF पहले से मौजूद है. झील को पंक्चर करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. क्यों कि पानी लगातार बढ़ रहा है. पिछले चौबीस घंटे में पुल पूरा डूब चुका है, जो पहले साफ दिखाई दे रहा था. क्रत्रिम झील में पानी इतना ज्यादा है कि 25 फीट तक होटल इसमें डूब चुका है. पहले 10-15 फीट नीचे नदी बहती थी. झील को पंक्टर करने और आसपास के लोगों के रेस्क्यू के लिए टीम मौके पर मौजूद है. ताकि लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सके.

Latest and Breaking News on NDTV

वहीं पानी को निकालने की कोशिश की जा रही है. लेकिन यहां पर एक और फ्लड आया है.हालांकि उसने अपना रास्ता बदल लिया है. राहत की बात यह है कि रास्ता दूसरी तरफ गया है. कोशिश यही है कि पानी को किसी तरह से झील से निकाला जा सके.स्यानाचट्टी में आक्रोशित लोगों ने झील उतरकर  प्रशाशन के विरुद्ध नारेबाजी की।

हालांकि प्रशासन ने एहतियातन स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है। शुक्रवार को जिलाधिकारी प्रशांत आर्य और क्षेत्रीय विधायक संजय डोभाल ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

                                            Uttarkashi DM-प्रशांत आर्य

देहरादून में पहली बार होगा एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी

140 Minutes Read -

भारत पहली बार शीतकालीन खेलों का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन करने जा रहा है। एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2025 का आयोजन 20 से 23 अगस्त तक राजधानी देहरादून में होगा। इस ऐतिहासिक प्रतियोगिता में एशिया के 11 से अधिक देश चीन, जापान, हांगकांग, इंडोनेशिया, सिंगापुर, थाईलैंड, चीनी ताइपे, वियतनाम, मलेशिया, फिलीपींस और भारत हिस्सा लेंगे। खिलाड़ी 222 मीटर स्प्रिंट से लेकर 5000 मीटर रिले तक की 9 अलग-अलग प्रतिस्पर्धाओं में दमखम दिखाएंगे।

 

देहरादून का हिमाद्री आइस रिंक, जो देश की इकलौती ओलंपिक साइज आइस रिंक है, इस आयोजन का केंद्र होगा। लंबे समय से बंद रही यह रिंक अब पूरी तरह तैयार है और हाल ही में राष्ट्रीय चैंपियनशिप की मेज़बानी भी कर चुकी है। इस टूर्नामेंट में 190 से अधिक स्केटर्स उतरेंगे, जिनमें भारत की ओर से 90 स्केटर्स की टीम भी शामिल होगी। खास बात यह है कि राष्ट्रीय चैंपियन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीत चुके खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेंगे। खिलाड़ियों को कोरिया से आए अंतरराष्ट्रीय कोच प्रशिक्षण देंगे। यह आयोजन भारत में शीतकालीन खेलों की तस्वीर बदलने जा रहा है। आइस स्केटिंग अब पहाड़ी इलाकों से निकलकर महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक तक पहुँच चुकी है। इस साल हार्बिन (चीन) में हुए एशियन विंटर गेम्स में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके खिलाड़ी एकलव्य जगल, सोहन टरकर, साई सहाना, सुयोग तापकीर, डेशियल कॉन्सेसाओ, नॉयल सी. चेरियन और अन्य भी इस भव्य आयोजन का हिस्सा होंगे। यानी, देहरादून में होने वाला यह टूर्नामेंट सिर्फ मेडल की जंग नहीं, बल्कि भारत में विंटर स्पोर्ट्स के नए युग की शुरुआत है।यह आयोजन भारत के लिए शीतकालीन खेलों में एक नया अध्याय खोलेगा और इस देश में स्केटिंग खेलों को राष्ट्रीय मान्यता दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. 

 

हिमाद्री आइस रिंक, जिसे 2011 के दक्षिण एशियाई शीतकालीन खेलों के बाद उच्च रखरखाव लागत के कारण बंद कर दिया गया था, हाल ही में फिर से खोला गया है। इसी स्थान पर जून के महीने में 20वीं राष्ट्रीय स्पीड और फिगर स्केटिंग चैंपियनशिप का आयोजन किया गया था।

हालांकि यह पहली बार है कि भारत में किसी अंतर्राष्ट्रीय आइस स्केटिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया जा रहा है, लेकिन इससे आने वाले वर्षों में इसी खेल की और अधिक चैंपियनशिप के लिए भी द्वार खुल गए हैं।

आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसएआई) द्वारा आयोजित और अंतर्राष्ट्रीय स्केटिंग संघ (आईएसयू) द्वारा अनुमोदित, इस प्रतियोगिता में 15 से ज़्यादा एशियाई देश भाग लेंगे। ओपन ट्रॉफी में व्यक्तिगत और रिले आयु वर्गों में 222 मीटर से 5000 मीटर तक की कुल नौ दूरियाँ होंगी।

                                एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2025

एशियन ओपन शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग ट्रॉफी 2025

आइस स्केटिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएसएआई) के अध्यक्ष अमिताभ शर्मा ने कहा- यह टूर्नामेंट भारतीय स्केटर्स के लिए एक बड़ी छलांग होगी। इस आयोजन की मेज़बानी से भविष्य में और भी कई आयोजन करने का हमारा आत्मविश्वास बढ़ेगा,हमारा मानना है कि यह भारत में बर्फ पर खेले जाने वाले खेलों के भविष्य को आकार देने के लिए हमारी नियति से भेंट है।शर्मा ने कहा कि इस स्तर के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन की मेजबानी के लिए देश में एकमात्र ओलंपिक आकार का आइस रिंक ही पर्याप्त है। हमारा लक्ष्य अधिक बुनियादी ढांचे का विकास करना और  2027 तक जूनियर विश्व कप सहित अधिक अंतर्राष्ट्रीय आइस स्केटिंग प्रतियोगिताएं आयोजित करना है।”

 

भारत विभिन्न आयु वर्गों और खेलों के 90 स्केटर्स के साथ एक दल तैयार कर रहा है, जो वर्तमान में हिमाद्री आइस रिंक में प्रशिक्षण शिविर में हैं। कई बार की अंतरराष्ट्रीय पदक विजेता और शॉर्ट ट्रैक स्पीड स्केटिंग में राष्ट्रीय चैंपियन नयना श्री तल्लूरी इस  एशियन  ओपन में पदक जीतने पर नज़र गड़ाए हुए हैं। उन्होंने कहा, “देहरादून में हमारी ट्रेनिंग काफ़ी कड़ी मेहनत से चल रही है। आईएसएआई ने एशियन ओपन ट्रॉफी से पहले हमारा मार्गदर्शन करने के लिए कोरिया से एक अंतरराष्ट्रीय कोच को बुलाया है.

आपदाग्रस्‍त धराली में देशभक्ति की अनूठी मिसाल, सादगी से मनाया स्‍वतंत्रता दिवस; फहराया तिरंगा

173 Minutes Read -

विगत 5 अगस्त की आपदा के बाद से धराली व आसपास के क्षेत्रों में खोज, बचाव और राहत कार्यों में जुटी टीमें राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस पर भी अपने कर्तव्य से नहीं डिगी।एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, आपदा प्रबंधन विभाग और विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने राहत कार्यों के बीच ही स्वतंत्रता दिवस का पर्व शालीनता और सादगी के साथ मनाया।आईजी अरुण मोहन जोशी ने ध्वजारोहण किया।

धराली में सोमेश्वर देवता मंदिर परिसर में सुबह निर्धारित समय पर सभी ने एकत्र होकर ध्वजारोहण किया, राष्ट्रगान गाया और बलिदानी को नमन किया। इसके बाद बिना समय गंवाए सभी दल दोबारा खोज-बचाव और राहत कार्यों में जुट गए। धराली में खोज बचाओ टीमों के अलावा ग्रामीण भी शामिल हुए।

धराली के साथ-साथ हर्षिल में भी भारतीय सेना और आईटीबीपी के जवानों ने स्वतंत्रता दिवस समारोह आयोजित किया। जवानों ने तिरंगा फहराकर देश की सेवा और आपदा प्रभावित लोगों की मदद के संकल्प को दोहराया। ध्वजारोहण के तुरंत बाद वे भी प्रभावित इलाकों में राहत और खोज-बचाव कार्यों में सक्रिय हो गए।

धराली (उत्तरकाशी) में भीषण तबाही — तथ्य, कारण और ग्राउंड-रिपोर्ट के क्या कहती हैं !

221 Minutes Read -

5–6 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धाराली (Dharali / Kheer Gad / Harsil के पास) में अचानक हुई भयंकर जल-प्रलय / भूस्खलन-मंडी (flash flood / debris flow / mudslide) ने गांव के कई हिस्से और पर्यटन-व्यवसाय तहस-नहस कर दिए। कई मकान, होटल, दुकानें, एप्पल-ओरचार्ड और सड़क-इन्फ्रास्ट्रक्चर बह गए; दर्जनों लोग घायल या लापता हैं, कुछ की मृत्यु की पुष्टि हुई और बड़ी राहत-और-रेस्क्यू कार्रवाई चल रही है। स्थानीय और केंद्रीय बचाव दलों (आर्मी, NDRF, SDRF, ITBP) ने बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और राज्य सरकार ने राहत घोषणाएँ कीं

 

क्या हुआ — ताज़ा तथ्य (फैक्ट्स)

  • घटना का समय और जगह: घटना 5 अगस्त 2025 की दोपहर के आसपास (लगभग 13:30–13:45 स्थानीय समय) खरग (Kheer / Kheer Gad) जल-जल और धाराली गांव के पास हुई।

  • प्रभावित लोग और क्षति: कई घर, होटेल/होमस्टे, दुकानें और बाग (विशेषकर एप्पल-बाग) भारी मलबे में दब गए; शुरुआती रिपोर्टों में कम-से-कम 4 मौतें और दर्जनों (कुछ रिपोर्टों में 40+ या 50+) लापता बताये गए हैं, जबकि सैकड़ों लोग प्रभावित या संतप्त हुए और कई अनेकों का बेघर होना रिपोर्ट हुआ। सरकार और प्रशासन ने कई लोगों को बचाया; आधिकारिक खोज-बचाव और बचाव संख्या समय-समय पर अपडेट हो रही है।

  • बचाव-प्रक्रिया: इंडियन आर्मी (Ibex ब्रिगेड), NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस व स्वास्थ्य दल मौके पर हैं; भारी मशीनरी, हेली-लिफ्ट और मैनपावर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए वित्तीय राहत घोषणाएँ की हैं (प्रारम्भिक पैकेज, ब्यौरे स्थानीय घोषणा पर निर्भर)

  • कारण — वैज्ञानिक और मानवीय तीसरे-आयाम

  • (A) तत्काल कारण — क्लाउडबर्स्ट / अचानक तेज वर्षा

    मीडिया और मौसम विभाग (IMD) की पड़ताल के अनुसार घटना की शुरुआत एक तीव्र-वर्षा (cloudburst) / अचानक अत्यधिक स्थानीय downpour से हुई, जिससे Kheer Gad में पानी की अचानक मात्रा बढ़ी और बहाव-ऊर्जा जमीनी मलबे के साथ नीचे उतरते हुए धावा-बोलकर गांव में प्रवेश कर गई। IMD व स्थानीय रिपोर्टों ने कुछ स्थानों पर अल्प-समय में असाधारण बारिश दर्ज़ की — क्लाउडबर्स्ट की परिभाषा से मेल खाती तीव्रता    
  • (B) जियो-हाइड्रोलॉजिक गठन — भू-खण्ड, ग्लेशियल लिंक, डिब्रिस-फ्लो

    वैज्ञानिक और उपग्रह-विश्लेषण (ISRO समेत) ने सुझाव दिया है कि यह केवल बारिश का साधारण प्ले नहीं था — इसमें ग्लेशियर-सम्बन्धी विस्फोट (GLOF), किसी चट्टान/हिमखंड के टूटने से उत्पन्न ढेर या पहले से जमा ढेर का अचानक खुलना, तथा मलबे-भरे फ्लो (debris flow) की भूमिका हो सकती है। ऐसे घटनाओं में पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर, मिट्टी और बढ़ा-चढ़ा मलबा झटके में बहुत दूर तक और तेज़ रफ्तार से आ जाता है। इस पर आगे की तकनीकी जांच जारी है।

  • (C) मानवीय/नियोजन कारण (anthropogenic factors)

    • बस्तियों का नदी-तट/फ़्लड-प्लेन पर बनना: विशेषज्ञों ने कहा कि धाराली और आसपास के कई निर्माण नदी की तरफ़/फ्लड-plain पर हुए हैं — जिनमें कई होटेल, होमस्टे और दुकानें भी शामिल हैं — जो जीवनदायिनी भू-अवसरो में बने हुए थे और रन-ऑफ के मार्ग में आ गए।

    • पर्यटन-बूम और अगणित निर्माण: पर्यटन के बढ़ते दबाव ने खड़ी ढलानों व नदी के किनारे अस्थायी व स्थायी संरचनाओं का निर्माण बढ़ा दिया, जिनमें पर्यावरण नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।

    • जलवायु परिवर्तन का योगदान: हिमालयी क्षेत्र में तापमान व वायुमंडलीय नमी के बदलाव से तीव्र वर्षा-इवेंट्स (extreme precipitation), ग्लेशियर अस्थिरता और अनपेक्षित डिब्रिस-फ्लो के जोखिम बढ़ रहे हैं — इसलिए केवल “एकल घटना” नहीं, बल्कि जोखिम बढ़ने का ढांचा दिखाई देता है।

      3) ग्राउंड-रिपोर्ट — पीड़ितों के अनुभव और स्थानीय हालात

      (नीचे के विवरण विभिन्न स्थानीय अखबारों, स्थानीय फार्म और तस्वीर-वीडियो रिपोर्ट्स और राहत-कर्मियों के बयानों पर आधारित हैं।)

      • स्थानीय किसानों और होस्टल-मालिकों का कहना है कि झट-पटक 30–60 सेकण्ड में मलबा और पानी ने जगह को तबाह कर दिया; कई लोगों ने बस समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। कुछ पर्यटक और मजदूर ऐसे थे जो कुछ मिनट पहले ही सुरक्षित स्थान की तरफ़ चले गए और वे लोगों ने लंबी पैदल यात्रा कर कर-कर के बचाव-कहानियाँ सुनाईं।

      • कई छोटे व्यापारी और किसान बड़े आर्थिक घाटे में हैं — एप्पल-बाग, राजमा और सब्ज़ी की फसलों का बड़ा नुकसान बताया जा रहा है; स्थानीय हवाले से लाखों रुपये का प्रारम्भिक आंकलन आ चुका है।

      • मोबाइल नेटवर्क व सड़कों का टूटना बचाव को कठिन बना रहा है; कई इलाकों में भारी मशीनों और हेलीकॉप्टर-सहायता के जरिए ही लोग पहुँच रहे हैं।

        4) बचाव-कार्यों का आकलन और चुनौतियाँ

        • तत्काल-उपलब्धता: आर्मी-ब्रिगेड, NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हैं — शुरुआती दिनों में 100+ लोगों के रेस्क्यू का दावा और लगातार सर्वे चल रहे हैं। पर मौसम की पुनरावृत्ति, भूस्खलन का जोखिम और सड़कों की क्षति बचाव को सीमित कर रहे हैं।

        • खोज-बचाव-तकनीक: मलबे के नीचे लोगों का पता लगाने के लिए कट्टर-मशीनरी, कुत्ते-टीम, थर्मल स्कैन जैसे साधन इस्तेमाल हो रहे हैं; पर कठिन भू-रचना में हर घंटा महत्वपूर्ण है।


        5) विस्तृत मूल्यांकन — यह घटना अकेली नहीं

        विशेषज्ञों का कहना है कि धाराली जैसी घटनाएँ हिमालय में बढ़ती जा रही अनुक्रमिक आपदाओं का हिस्सा हैं — जहां छोटे-छोटे घाटों, नदी-हेल्थ का बिगड़ना, अनियोजित बस्तियाँ और बढ़ती वर्षा के साथ जोखिमों में वृद्धि हो रही है। धाराली में दिख रहा पैटर्न — नदी-तट पर विकास + अचानक उथल-पुथल करने वाली बारिश/ग्लेशियर-इवेंट — पहले भी अन्य जगहों पर समान रूप से विनाशकारी रहा है। नीति-स्तर पर जमीन की मैपिंग, रिस्क-जोन निर्धारण और निर्माण नियंत्रण की व्यवस्था को मज़बूत करने की तत्काल ज़रूरत बताई जा रही है।

        6) क्या किया जाना चाहिए — नीतिगत और तकनीकी सुझाव

        1. तुरंत (short term): प्रभावितों को पारदर्शी आर्थिक सहायता, अस्थायी आवास, मनो-सामाजिक सहायता और कृषि पुनरुत्थान-पैकेज (बीज, लगातार इनकम सहायता) उपलब्ध कराना। राज्य के द्वारा घोषित सहायता पैकेज का फास्ट-ट्रैक क्रियान्वयन जरूरी है।

        2. मिड-टर्म: प्रभावित इलाकों की विज्ञान आधारित रि-ज़ोनिंग — खतरनाक फ्लड-प्लेन व चैनल-मार्गों पर पुनर्निर्माण प्रतिबंध और वैकल्पिक आजीविका/रिलोकेशन-पैकज। स्थानीय समुदायों के साथ सहमति से कम्पेन्सेशन और स्थायी पुनर्वास।

        3. लॉन्ग-टर्म (सिस्टमिक): हिमालयी जल-विज्ञान पर निगरानी (GIS/सैटेलाइट), ग्लेशियर/डिब्रिस-डैम पर रिसर्च, ग्रामीण और पर्यटन-निर्माण के लिए कठोर पर्यावरणीय नियम, तथा दक्षिणी-नैशनल डेटा-बेस जहाँ हर नया निर्माण की पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक हो। ISRO जैसे संस्थानों के सैटेलाइट-डेटा से जोखिम मानचित्र नियमित अपडेट किए जाने चाहिए।

        4. अर्ली वार्निंग और कम्युनिटी-रिजिलिएन्स: स्थानीय-स्तर पर सतर्कता-सिस्टम (रबर-बेल/सार्वजनिक सायरन/वीएचएफ), बाढ़-रन-वे के बारे में नियमित जागरूकता, और पर्यटन/मकान मालिकों के लिए आपदा-तैयारी आवश्यक।


        7) राजनीतिक-प्रशासनिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता

        घटना ने सवाल उठाये हैं कि क्यों संवेदनशील नदी-किनारे/फ्लड-प्लेन पर बिखरे निर्माणों पर पैनी निगरानी नहीं थी; स्थानीय नियमन, पर्यावरण स्वीकृति और पर्यटन-पॉलिसी में भ्रष्ट-लापरवाही के संकेत भी जाँच के विषय हैं। राहत और पुनर्वास में पारदर्शिता, कम्पेन्सेशन की तात्कालिकता और भूमि-रिहैबिलिटेशन योजनाओं में जनता की भागीदारी जरूरी होगी। विशेषज्ञों ने कहा है कि सिर्फ राहत बाँटना पर्याप्त नहीं — पुनरावृत्ति रोके जाने वाले कदम लेना अनिवार्य है।

        निष्कर्ष — धराली एक चेतावनी है

        धराली-आपदा केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं है — यह हिमालयी इलाकों में बढ़ते खतरों, अनियोजित विकास, और बदलते मौसम पैटर्न का मिलाजुला नतीजा है। तत्काल राहत-कार्रवाइयों के साथ-साथ शासन-स्तर पर दीर्घकालिक, विज्ञान-आधारित नीति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों-आधार पर पुनर्विकास ही भविष्य में इसी तरह की त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोक सकता है। पीड़ितों के लिए त्वरित और मानवीय सहायता, प्रभावित कृषि व आजीविका का बहाल करना तथा भविष्य के लिए जोखिम-कम करने वाले अनुशासनात्मक कदम अब न सिर्फ़ जरुरी बल्कि अनिवार्य हैं।

आपदा प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीने का राशन उपलब्ध कराएगी राज्य सरकार, 5 लाख की अर्थिक मदद

209 Minutes Read -

मुख्यमंत्री   धामी ने धराली रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने की थी। खराब मौसम के बावजूद अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ देश भर से आए तीर्थ यात्री भी शामिल हैं। घायलों को जिला अस्पताल, एम्स में भर्ती किया गया है। सभी को अच्छा इलाज मिले इसकी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया हर्षिल व धराली क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, दूध, राशन, कपड़े पहुंचाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया हर्षिल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए उरेडा का पावर हाउस चालू किया गया है। यूपीसीएल द्वारा बिजली तारों की मरम्मत की जा रही है। मोबाइल कनेक्टीविटी को सुधार लिया गया है साथ ही 125 KV के दो जनरेटर सेट भी आपदा क्षेत्र में पहुंच गए हैं। हर्षिल क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविट को ठीक किया जा रहा है। गंगनानी में बेली ब्रिज का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। भूस्खलन की चपेट में आई सड़कों को भी जल्द ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया मंगलवार तक हर्षिल तक सड़क मार्ग को पूरी तरह ठीक करने की संभावन है। जिसके बाद अन्य कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

 

6 माह देंगे मुफ्त राशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के स्तर से प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने बताया प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीने का राशन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।

 

5 लाख की अर्थिक मदद 

आपदा से जिन लोगों के मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उनके पुनर्वास/विस्थापन हेतु ₹ 5.00 लाख की तत्काल सहायता राशि जारी की जाएगी। उन्होंने बताया ग्राम वासियों के पुनर्वास के लिए सचिव, राजस्व की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जो प्रभावित हुए लोगो के पुनर्वास, विस्थापन एवं हानि का आंकलन करेगी। उन्होंने कहा आपदा से सेब के बगीचों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धराली के साथ ही प्रदेश के अन्य स्थानों में भी आपदा से तबाही हुई है। उन्होंने कहा पौड़ी के सैंजी और बांकुड़ा गांव में भी जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी राज्य सरकार के स्तर से ₹ 5 लाख तक भी सहायता राशि दी जाएगी। राज्य में जहां भी आपदा से हानि हुई है, उन्हें सरकार द्वारा हर संभव मदद दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उनके ही नेतृत्व में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

आपदा- धराली के मलबे में जिंदगी तलाशने की कोशिश जारी

200 Minutes Read -

मंगलवार को धराली व हर्षिल इलाके में मची तबाही के 24 घण्टे बाद भी मृत लोगों का आंकड़ा पता नहीं चल पाया। धराली तक जाने वाले गंगोत्री हाईवे के कई जगह से टूटने की वजह से राहत व बचाव कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार को उत्तरकाशी जनपद के धराली क्षेत्र का दौरा कर आपदा प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने प्रभावितों का हालचाल लिया और उन्हें हरसंभव सरकारी सहायता का भरोसा दिलाया।उधर, मंगलवार को गंगोत्री हाईवे के भटवाड़ी के निकट क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्ग तैयार करने की कोशिश हो रही है। इस मार्ग पर वाहन फंसे हुए हैं। आवागमन बन्द होने से राहत व बचाव दल भी धराली तक पहुंचने के लिए मशक्कत कर रहे हैं।

इलाके में बिजली व दूर संचार का संकट भी देखने में आ रहा है।

गंगोत्री हाईवे पर गंगनानी के पास बना पुल भो बाढ़ में बह गया। इस पुल के टूटने व जगह-जगह रास्ते टूटने से धराली तक पहुंचना काफी कठिन हो गया है।

मलबे से अटे धराली में राहत व बचाव दल जिंदगी तलाश रहे हैं। इस आपदा में चार लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि लगभग 100 लोग इस आपदा के शिकार हुए हैं। हर्षिल के आर्मी कैम्प को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

इधऱ,मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि “कोई भी प्रभावित परिवार सहायता से वंचित न रहे और सभी को समयबद्ध तरीके से राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए।”

राहत कार्यों को गति देने के लिए दो हेलीकॉप्टरों के माध्यम से खाद्य सामग्री एवं आवश्यक वस्तुएं धराली पहुंचाई गईं। इसके अलावा, भारतीय वायुसेना के चिनूक हेलीकॉप्टर से भारी मशीनरी भी भेजी जा रही है, जिससे मार्ग मरम्मत, मलबा हटाने और अन्य आवश्यक कार्य तेजी से पूरे हो सकें।

ताश के पत्तों की तरह ढह गये होटल-होमस्टे, अब तक 70 से ज्‍यादा लोगों को बचाया; तस्‍वीरों में दूसरे दिन के हालात

161 Minutes Read -

उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में खीरगंगा के किनारे बसे गंगोत्री धाम के प्रमुख पड़ाव धराली गांव में बादल फटने से मंगलवार को भारी तबाही हुई।बताया जा रहा है कि यह बादल खीरगंगा नदी के ऊपरी क्षेत्र में कहीं फटा, जिससे दोपहर करीब डेढ़ बजे अचानक खीरगंगा नदी में पानी व मलबे के साथ सैलाब आया और इस सैलाब में धराली बाजार समेत आसपास के होटल, होमस्टे ताश की पत्तों की तरह ढह गये।

अभी तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। अब तक 70 से ज़्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। अधिकारिक तौर पर 19 लोगों के लापता होने की सूचना है।

सूचना पर हर्षिल में तैनात सेना की आइबैक्स रेजीमेंट समेत एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, राजस्व, पुलिस, आपदा प्रबंधन आदि की टीमों ने राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हुए हैं।

गंगोत्री और धराली में दो अतिरिक्त बचाव और राहत टुकड़ियां तैनात की गई हैं। हर्षिल से धराली तक सड़क मार्ग खोलने के लिए ज़मीन हटाने वाले उपकरण तैनात किए गए हैं।फंसे हुए नागरिकों का पता लगाने के लिए ड्रोन और बचाव कुत्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। निकाले गए लोगों को चिकित्सा सहायता और भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।भारतीय सेना प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। खोज और बचाव अभियान जारी है, और हर प्रभावित व्यक्ति तक पहुंचने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

 

उत्तरकाशी में बादल फटने से तबाही, सीएम धामी ने कहा- सभी को बचाना हमारी प्राथम‍िकता

160 Minutes Read -

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में बादल फटने से भारी तबाही मची है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी में बादल फटने की घटना पर कहा क‍ि बादल फटने की सूचना आई है। पानी के साथ बहुत तेज गति से मलबा आया है। उन्‍होंने कहा क‍ि हमारा प्रयास है कि जल्द से जल्द राहत और बचाव का कार्य किया जाए। सेना के लोग, जिसमें एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और आपदा प्रबंधन विभाग कोशिश कर रहा है। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि सभी को बचाया जाए।

 

उत्तरकाशी पुलिस ने कहा, “उत्तरकाशी, हर्षिल क्षेत्र में खीर गाड़ का जलस्तर बढने से धराली में नुकसान होने की सूचना पर पुलिस, SDRF, आर्मी आदि आपदा दल मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटे हैं।

 

उत्तरकाशी में हर्षिल के समीप खीरगाड़ क्षेत्र स्थित धाराली गांव में भीषण भूस्खलन हुआ। मलबे और पानी का तेज बहाव गांव तक पहुंच गया, जिससे हड़कंप मच गया। जानकारी मिलते ही सेना की आइबेक्स ब्रिगेड के जवानों को मौके पर रवाना किया गया। जनसंपर्क अधिकारी ले. कर्नल मनीष श्रीवास्तव के अनुसार सेना की टुकड़ी ने प्रभावित क्षेत्र में पहुंचकर राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है। अब तक हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और सेना की टीमें मौके पर डटी हुई हैं। संकट की इस घड़ी में सेना हरसंभव मदद को तैयार है।

उत्तरकाशी जनपद के हर्षिल क्षेत्र के धराली गांव में बादल फटने की घटना से हुए जन-धन के नुकसान की सूचना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुःख व्यक्त करते हुए प्रभावितों के प्रति संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर संचालित करने के निर्देश दिए हैं। सेना, SDRF, NDRF, जिला प्रशासन एवं अन्य संबंधित टीमें मौके पर राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं तथा स्थिति की नियमित जानकारी ले रहे हैं । मुख्यमंत्री ने ईश्वर से सभी के सकुशल होने की प्रार्थना करते हुए प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया है।