Category Archive : पुलिस

नाराजगी की अटकलों पर पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत ने किया खारिज, सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी बताया हवा-हवाई

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सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम

बोले, नीति और नीलामी से खनन पट्टे दिए जा रहे, इसमें कोई बुराई नहीं

पूर्व मंत्री हरक सिंह बताएं कि जो पैसा दिया, क्या है उसका स्रोत

अधिकारियों को दी नसीहत, जनता के प्रति बनें जवाबदेह

 

देहरादून। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार से हुई मुलाकात के बाद देहरादून लौटने पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने त्रिवेंद्र समेत अन्य नेताओं को पार्टी लाइन पर चलने की ताकीद की है।डिफेंस कालोनी स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में त्रिवेंद्र ने उन अटकलों पर विराम लगाया, जिसमें दिल्ली में सांसदों के साथ हुई पार्टी संगठन की बैठक से तुरंत चले जाने को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था। उन्होंने कहा कि नाराजगी जैसी कोई बात नहीं थी। उन्हें कहीं जाना था, इसलिए तुरंत ही बैठक से चले गए थे।

 

उन्होंने राज्य सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी हवा-हवाई करार दिया और कहा कि धामी सरकार पूरे पांच साल चलेगी। बार-बार मुख्यमंत्री बदलना या इसकी चर्चा करना गलत है। उन्होंने विपक्ष कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया।

 

सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात सामान्य प्रक्रिया है। इसमें हर जगह छेद ढूंढते रहें, यह ठीक नहीं है। खनन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार नीति के तहत नीलामी के जरिये खनन पट्टे दे रही है तो इसमें बुराई क्या है। एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि गैरसैंण को भाजपा ने ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। यह स्थायी राजधानी कब बनेगी, इसका जवाब सरकार बेहतर दे सकती है।

 

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वह उनका पूरा इतिहास जानते हैं। पांच-छह दिन से हरक सिंह काफी जोश में हैं। हो सकता है ये उनकी आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो या कुछ और कारण हैं अथवा वह स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा ने संगठन चलाने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ चेक से चंदा लिया। हरक सिंह ने चंदे को लेकर बढ़ा चढ़ाकर बोला, लेकिन जो पैसा लिया गया वह चेक से आया। अब हरक बताएं कि इस पैसे का स्रोत क्या है।

विपक्ष कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस ने सदन में जो व्यवहार किया, वह उचित नहीं है। उनकी जानकारी में आया है कि कार्यमंत्रणा समिति में पहले दिन आपदा का विषय विपक्ष की ओर से लाने पर सहमति बनी थी, लेकिन वह कानून व्यवस्था का मुद्दा लेकर आया। सरकार इस पर जवाब देती, लेकिन यह सब नियमों के तहत लाया जाना चाहिए था।पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के भांजे के प्रकरण पर उन्होंने कहा कि पुलिस का जो काम है, उसे करना चाहिए। यह गंभीर प्रकरण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में लापरवाह अधिकारियों को आड़े हाथ लेने की जरूरत है। उन्होंने नौकरशाही को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नीतियों व निर्णयों का क्रियान्वयन शासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए अधिकारियों को ठीक से काम करना चाहिए। जनता के प्रति उनकी जवाबदेही होनी चाहिए।

नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष की मतगणना पूरी, परिणाम की घोषणा नहीं

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जिला पंचायत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष पद के लिए मतदान से पहले हाईवोल्टेज ड्रामा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा निर्देश के बाद मतगणना पूरी कर ली गई है, अलबत्ता परिणाम की घोषणा स्थगित की गई है। मतगणना से संबंधित अन्य जरूरी दस्तावेज को ट्रेजरी में सील बंद कर रख दिया गया। 18 अगस्त को हाई कोर्ट के निर्देश पर इस मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बीती पूरी रात जिला पंचायत चुनाव परिणाम को लेकर असमंजस बरकरार रहा, तड़के 5 बजे चुनाव आयोग के पर्यवेक्षक, जिलाधिकारी वंदना की उपस्थिति में मत पेटी पर पड़े मतों की गणना करते हुए सील कर दिया गया। पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी की गई।

दरअसल जिला पंचायत के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष के लिए मतदान से पहले कांग्रेस समर्थित पांच सदस्यों के कथित अपहरण के बाद सियासी बवाल खड़ा हो गया। कांग्रेस की ओर से नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य सहित अन्य कांग्रेसजन हाईकोर्ट पहुंचे और अर्जेंट सुनवाई की मांग की। कोर्ट के आदेश पर एसएसपी व जिलाधिकारी कोर्ट में पेश हुए।

हाई कोर्ट की ओर से सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणियों के बीच आधिकारिक आदेश में जिलाधिकारी की ओर से दुबारा मतदान से संबंधित बयान का उल्लेख नहीं होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को मामला रेफर किया गया। आयोग व जिला स्तर तक का पत्राचार आधी रात के बाद तक चलता रहा।

गुरुवार रात तक निर्वाचन आयोग की ओर से जिला निर्वाचन अधिकारी को मतगणना करने या मौजूदा चुनाव को रद कर दुबारा मतदान को लेकर स्पष्ट निर्देश जारी नही किए गए।

आयोग के पत्र मिलने के बाद स्थिति साफ करने को फिर से रिमाइंडर भेजा गया जिसके बाद आयोग की ओर मामले में अपने स्तर से निर्णय लेने को कहा गया। इसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारी की ओर से फिर से स्पष्ट दिशा निर्देश मांगे गए।

रात करीब डेढ़ बजे एकाएक मतगणना की तैयारी की गई। तड़के फिर जिला पंचायत चुनाव नियमावली सहित हाई कोर्ट के 2019 में एक मामले में पारित दिशा निर्देश के अध्ययन के बाद तय हुआ कि मतगणना की जाए लेकिन परिणाम को रिजर्व कर दस्तावेज सील कर दिये गए। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी वंदना ने प्रेस वार्ता कर जानकारी दी कि मतगणना पूरी की जा चुकी है, लेकिन परिणाम घोषित नहीं करते हुए रिजर्व किया गया।

इस मामले को हाई कोर्ट के समक्ष रखा जाएगा, अग्रिम कार्रवाई कोर्ट के आदेश के अनुसार होगी। उल्लेखनीय है कि जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर भाजपा ने दीपा दरमवाल, कांग्रेस ने पुष्पा नेगी, उपाध्यक्ष में भाजपा ने बहादुर नगदली व कांग्रेस ने देवकी बिष्ट प्रत्याशी हैं।

ईडी कार्रवाई पर बोले हरक, दोषी साबित हुआ तो राजनीति छोड़ दूंगा, निर्दोष निकला तो करूंगा मुकदमा

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कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने ईडी की कार्रवाई पर जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने साफ कहा कि अगर कोर्ट में उन पर लगे आरोप साबित हो जाते हैं तो वे राजनीति से हमेशा के लिए संन्यास ले लेंगे। लेकिन अगर अदालत में निर्दोष साबित हुए तो इस “साजिश” में शामिल लोगों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा करेंगे।

कांग्रेस मुख्यालय में प्रेस वार्ता के दौरान हरक सिंह ने अपने विरोधियों को चेताते हुए कहा, “मैं न दबने वाला हूं, न झुकने वाला। जितनी भी साजिशें कर लो, मैं लड़ता रहूंगा।”

हरक सिंह ने कहा कि वो दूध के धुले नहीं है। लेकिन सहसपुर मामले में उनकी कोई गलती नहीं है। ईडी ने गलत मुद्दे।पर छेड़ दिया जैसे सीबीआई ने 2003 के जेनी प्रकरण में मुझे फंसाया था। बाद में मुझे क्लीन चिट मिली थी।

उन्होंने ईडी की कार्रवाई को बदले की भावना से प्रेरित बताते हुए कहा कि सहसपुर की विवादित जमीन उन्होंने 2002 में पूरी तरह कानूनी तरीके से खरीदी थी। इस जमीन का रिकॉर्ड 1962 से पूर्व मालिक के नाम पर दर्ज था और सारे दस्तावेज उनके पास मौजूद हैं।

हरक सिंह ने याद दिलाया कि इस मामले की जांच पहले भाजपा सरकार में और फिर कांग्रेस की सरकार में हो चुकी है, लेकिन किसी भी जांच में कोई ठोस सबूत नहीं मिला। अब मामला कोर्ट के सामने है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि न्याय मिलेगा।

उन्होंने ईडी को खुली चुनौती देते हुए कहा कि अगर एजेंसी आरोप साबित कर दे, तो वे तुरंत राजनीति से संन्यास ले लेंगे। लेकिन अगर निर्दोष निकले तो कानूनी लड़ाई लड़कर साजिश रचने वालों को बेनकाब करेंगे।

भाजपा पर हमला करते हुए हरक सिंह ने कहा कि पार्टी अब अपने आदर्शों से भटक चुकी है और विरोधियों के खिलाफ केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा छोड़ने का उन्हें कोई मलाल नहीं है।

गौरतलब है कि शुक्रवार को ईडी ने मनी लांड्रिंग के केस में पूर्व मंत्री हरक सिंह समेत पांच लोगों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है।

 

ईडी की कार्रवाई भाजपा की राजनीतिक साजिश का हिस्सा- धस्माना

देहरादून । उत्तराखंड कांग्रेस के उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस नेता हरक सिंह रावत पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा दायर आरोप पत्र को राजनीतिक साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि भाजपा पूरे देश में ईडी, सीबीआई और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है ताकि विपक्ष की आवाज को दबाया जा सके।

धस्माना ने सवाल किया कि हरक सिंह रावत जब लंबे समय तक भाजपा में मंत्री थे, तब उनके खिलाफ कोई जांच या कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा, “अगर आज भी हरक सिंह भाजपा में होते, तो क्या उनके खिलाफ यह कार्रवाई होती? निश्चित रूप से नहीं।”

कांग्रेस नेता ने विश्वास जताया कि अदालत में हरक सिंह रावत को न्याय मिलेगा। “उन्होंने कोई अपराध नहीं किया है। वे इस मामले में साफ निकल कर आएंगे,” धस्माना ने कहा।

उन्होंने केंद्र सरकार पर केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग कर राजनीतिक बदले की भावना से कार्रवाई करने का आरोप लगाया और कहा कि कांग्रेस इसका पुरज़ोर विरोध करेगी।

उत्तराखण्ड पेयजल निगम के अधीक्षण अभियंता सुजीत कुमार सस्पेंड

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उत्तराखण्ड पेयजल निगम के अध्यक्ष शैलेश बगोली ने कर्मचारी आचरण नियमावली के उल्लंघन पर सुजीत कुमार विकास (प्रभारी मुख्य अभियंता (कु0) मूल पद अधीक्षण अभियंता उत्तराखण्ड़ पेयजल निगम हल्द्वानी) को तत्काल प्रभाव से निलम्बित कर दिया।

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निलंबन आदेश में स्पष्ट किया गया है कि  सुजीत कुमार विकास के विरूद्ध  संजय कुमार पुत्र  चन्द्रपाल सिंह ने अपने शिकायती-पत्र में उल्लेख किया है कि वह पानी की योजनाओं में पेटी पर कार्य करता है। वर्ष 2022 में   सुजीत कुमार विकास, तत्कालीन अधीक्षण अभियन्ता, निर्माण मण्डल, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, देहरादून ने संजय कुमार की फर्म मै० हर्ष इन्टरप्राईजेज का उत्तराखण्ड पेयजल निगम में पंजीकरण करवाने एवं विभाग में कार्य दिलाने का आश्वासन दिया।

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इसके एवज में  सुजीत कुमार विकास के कहने पर संजय कुमार ने अपनी प्रोपराइटरशिप फर्म मै० हर्ष इन्टरप्राइजेज के माध्यम से बैंक ऑफ बडौदा, फॉयर स्टेशन के पास बाजपुर रोड, काशीपुर के बैंक खाता सं० 53930200001457 से मै० कुचु-पुचु इंटरप्राइजेज के कोटक महिन्द्रा बैंक खाते में दिनांक 06.07.2022. दिनांक 06.07.2022. दिनांक 07.07.2022, दिनांक 07.07.2022 एवं दिनांक 08.06.2022 को रू0 2.00 लाख की पांच किस्तों में कुल रू0 10.00 लाख, स्थानान्तरित किये गये।
विभाग में उपलब्ध अभिलेखों के अवलोकन से ज्ञात होता है कि मै० कुचु-पुचु इन्टरप्राइजेज, वह फर्म है, जिसकी पार्टनर  सुजीत कुमार विकास की पत्नी श्रीमती रंजु कुमारी हैं।  सुजीत कुमार विकास को स्पष्टीकरण हेतु 15 दिनों का समय दिया गया था, परन्तु  सुजीत कुमार विकास द्वारा आतिथि तक कोई प्रत्युत्तर प्रस्तुत नहीं किया गया है।

अध्यक्ष उत्तराखण्ड पेयजल निगम द्वारा स्पष्ट किया गया है कि  सुजीत कुमार विकास के विरुद्ध उपरोक्त आरोप बेहद गम्भीर प्रकृति के हैं तथा  सुजीत कुमार विकास द्वारा किया गया उपरोक्त कृत्य उत्तराखण्ड पेयजल निगम कर्मचारी आचरण विनियमावली का स्पष्ट उल्लंघन होना दर्शाता है।  सुजीत कुमार विकास के प्रभारी मुख्य अभियन्ता (कु०), हल्द्वानी के पद पर बने रहने से विभाग के अन्य अधिकारियों/कर्मचारियों के कार्यों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।

अतः उत्तराखण्ड पेयजल निगम कार्मिक (अनुशासन एवं अपील) विनियमावली में निहित प्राविधानों के तहत  सुजीत कुमार विकास, अधीक्षण अभियंता को तत्काल प्रभाव से निलम्बित किया जाता है।
निलम्बन की अवधि में  सुजीत कुमार विकास, कार्यालय महाप्रबंधक (प्रशिक्षण), मानव संसाधन प्रकोष्ठ, उत्तराखण्ड पेयजल निगम, रूडकी में सम्बद्ध रहेंगे।

सीएम ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ विजिलेंस को दी खुली छूट

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विजिलेंस को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्यवाही के लिए खुली छूट प्रदान की हुई है। इसका असर, साल दर साल बढ़ते विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों की संख्या में रूप में नजर आ रहा है। यही नहीं मजबूत साक्ष्य के आधार विजिलेंस गत साढ़े चार साल में 71 प्रतिशत मामलों में आरोपियों को कोर्ट से सजा दिलाने में कामयाब रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य का पदभार संभालते ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टालरेंस पर रुख साफ कर दिया था।

बीते चार साल में बडे से बड़े आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। आंकड़ों पर गौर करें तो राज्य में साल दर साल विजिलेंस ट्रैप और गिरफ्तारियों के साथ ही सजा के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इस दौरान विजिलेंस ने कुल 82 ट्रैप में 94 गिरफ्तारियों को अंजाम दिया, जिसमें 13 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। बीते साढ़े चार साल से विजिलेंस के पास कुल 125 शिकायतें प्राप्त हुई, जिसमें 18 में सामान्य जांच, 25 में खुली जांच के बाद 82 ट्रैप किए गए। गिरफ्तारी के बाद विजिलेंस ठोस साक्ष्य और मजबूत पैरवी से कोर्ट में सजा की दर को भी 71 प्रतिशत तक ले जान में कामयाब रही है। इससे साफ है कि सरकार भ्रष्टाचार की समस्या को जड़ से खत्म करने के मिशन पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर सतर्कता विभाग ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल फ्री नम्बर 1064 भी जारी किया है। यही नहीं मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को अंतिम फैसला आने तक आरोपियों को पूर्व के दायित्व या अहम जिम्मेदारी नहीं देने के साथ ही ट्रैप के मामलों में अभियोजन की प्रक्रिया में तेजी जाने के निर्देश दिए हैं।

भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार जारी

वर्ष गिरफ्तारी निर्णय सजा
2021 07 02 02
2022 15 03 01
2023 20 18 16
2024 38 13 07
2025 14 03 02
(नोट साल 2025 के आंकड़े जुलाई 15 तक के हैं)

बड़े बड़ों को किया गिरफ्तार

01 – लोनिवि एई
नैनीताल जिले में लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता को ठेकेदार से ₹10 हजार रिश्वत मांगने पर रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया ।

02 – यूपीसीएल जेई
देहरादून के हरबर्टपुर सब स्टेशन के एक जेई को विजिलेंस ने ₹15000 की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया।

03 – एलआईयू कर्मी
नैनीताल जिले के रामनगर में विजिलेंस की टीम ने एलआईयू के उप निरीक्षक और मुख्य आरक्षी को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

04 -रोडवेज एजीएम
काशीपुर में रोडवेज सहायक महाप्रबंधक को अनुबंधित बस संचालन के बदले 90 हजार रुपए रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

05 – खंड शिक्षा अधिकारी
हरिद्वार के खानपुर ब्लॉक में खंड शिक्षा अधिकारी को ₹10 हजार की घूस लेते गिरफ्तार किया गया।

06 – जीएसटी सहायक आयुक्त
देहरादून में कार्यरत जीएसटी सहायक आयुक्त को 75 हजार की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

07 – जिला आबकारी अधिकारी
रुद्रपुर में तैनात जिला आबकारी अधिकारी को शराब कारोबारी से 10 लाख रुपए के माल के एवज में 10 फीसदी रिश्वत लेते गिरफ्तार किया गया।

हम देवभूमि उत्तराखंड को भ्रष्टाचार मुक्त करते हुए, सुशासन की कार्य संस्कृति विकसित करना चाहते हैं। इसी क्रम में मुख्य सेवक के रूप में कार्यभार संभालने के दिन से ही विजिलेंस को भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने के निर्देश दिए, जिसका असर अब नजर आ रहा है। भ्रष्टाचारियों को अंतिम अदालत सजा दिलाए जाने के लिए भी मजबूत पैरवी की जा रही है।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

ऑपरेशन कालनेमि- पुलिस ने 25 ढोंगी बाबा किये गिरफ्तार

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देहरादून। मुख्यमंत्री के निर्देश पर चलाए जा रहे “ऑपरेशन कालनेमि” के तहत दून पुलिस ने शुक्रवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए साधु-संतों का भेष धरकर लोगों को ठगने वाले 25 ढोंगी बाबाओं को गिरफ्तार किया। इनमें एक बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल है, जिस पर विदेशी अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

एसएसपी खुद नेहरू कॉलोनी क्षेत्र में पहुंचे और सड़क किनारे बैठे बाबाओं से पूछताछ की। ज्योतिष विद्या और साधु परंपरा का कोई प्रमाण न देने पर उन्होंने मौके पर ही पुलिस को कार्यवाही के निर्देश दिए।
विभिन्न थाना क्षेत्रों में पुलिस ने फर्जी बाबाओं को गिरफ्तार किया, जिनमें 20 से अधिक अन्य राज्यों के हैं।

गिरफ्तारियां:

बांग्लादेशी नागरिक रूकन रकम उर्फ शाह आलम (26), प्रदीप (सहारनपुर), अजय चौहान (सहारनपुर), अनिल गिरी (हिमाचल), मंगल सिंह और रोझा सिंह (देहरादून), कोमल कुमार व अश्वनी कुमार (हाथरस), राजानाथ (देहरादून), रामकृष्ण और शौकीनाथ (यमुनानगर), मदन सिंह (चंपावत/हरिद्वार), राहुल जोशी (बिजनौर/देहरादून), मोहम्मद सलीम (हरिद्वार), और अन्य राजस्थान, असम, उत्तर प्रदेश व हरिद्वार के निवासी शामिल हैं।

एसएसपी ने बताया कि ऐसे फर्जी बाबाओं के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी ताकि देवभूमि में धर्म के नाम पर ठगी और आस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त शिकंजा कसा जा सके।

जमीन घोटाला…पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल की जांच के लिए ऑडिट समिति गठित

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जमीन घोटाले में फंसे हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के 16 माह के कार्यकाल का विशेष ऑडिट होगा। इसके लिए ऑडिट निदेशालय ने दो पर्यवेक्षक अधिकारी और विशेष लेखा परीक्षा दल का गठन कर दिया है। इस टीम को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।

हरिद्वार में नगर निगम पर कूड़े के ढ़ेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती 35 बीघा कृषि भूमि को बिना आवश्यकता 54 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले में निलंबित चल रहे आईएएस वरुण चौधरी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बृहस्पतिवार को निदेशालय लेखा परीक्षा ने वरुण चौधरी के 25 नवंबर 2023 से 20 मार्च 2025 तक के बतौर नगर आयुक्त कार्यकाल का विशेष ऑडिट करने के लिए समिति का गठन कर दिया। इसके लिए उप निदेशक विजय प्रताप सिंह को पर्यवेक्षक अधिकारी और सहायक निदेशक रजत मेहरा को सहायक पर्यवेक्षक अधिकारी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं, विशेष ऑडिट समिति लेखा परीक्षा अधिकारी किशन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित की गई है, जिसमें लेखा परीक्षा अधिकारी संजय गुप्ता, ओम प्रकाश, सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह और वरिष्ठ लेखा परीक्षक विमल मित्तल को शामिल किया गया है। इस समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। इस दौरान समिति से जुड़े सभी अधिकारी अन्य कार्यों से मुक्त रहेंगे। उन्हें नगर निगम की ओर से अलग से कार्यालय उपलब्ध कराया जाएगा। दोनों पर्यवेक्षक अधिकारियों की निगरानी में ऑडिट होगा।

क्यों घिरते जा रहे उत्तराखंड भाजपा के मंत्री ?

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उत्तराखंड भाजपा की डबल इंजन की सरकार लगभग चार साल पुरे करने वाली है,,,अभी वर्तमान में भाजपा के कई मंत्री पद खाली हैं,,,पूर्व में वित्त मंत्री रहे प्रेमचंद अग्रवाल विवाद के चलते अपना पद गवां चुके हैं,,,कई और मंत्री हैं जिनके विभागों के कामकाज को लेकर सवाल उठ रहे हैं,,,  ऐसे में पहले से ही मंत्रियों का टोटा झेल रही भाजपा सरकार के एक और मंत्री गणेश जोशी फिर से चर्चाओं में आ गए हैं,,,अभी उनके विभाग की  टेंडर प्रक्रिया में भी उन पर सवाल उठे हैं ,,जिस पर काफी बवाल हुआ ही है ,,,लेकिन जिस मुद्दे ने उनकी मुश्किलें सबसे ज्यादा बढ़ा दी हैं पहले उस पर बात कर लेते हैं.

 

 

अब चूँकि पहले से ही भाजपा की डबल इंजन की सरकार के कई मंत्री सवालों के घेरे में हैं,,,और उस पर गणेश जोशी जो भाजपा सरकार में कई अहम मंत्रालय संभाल रहे हैं,, उनकी मुश्किलों में इजाफा होना तो चिंता का विषय सरकार के लिए है ही ,,,और इस बार तो किसी विपक्षी ने नहीं बल्कि माननीय कोर्ट ने उनकी मुश्किलों को बढ़ा दिया है,,,,दरअसल भाजपा मंत्री आय से अधिक सम्पति के मामले में घिरे हुए हैं,,,,और अब कोर्ट के आदेश ने उनकी मुश्किलें बढ़ा दी हैं.

 

 

दरअसल कुछ समय पूर्व देहरादून के आरटीआई कार्यकर्ता और पेशे से वकील ,,विकेश सिंह नेगी ने नैनीताल हाई कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया था कि मंत्री गणेश जोशी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने शपथ पत्र में 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। नेगी का आरोप है कि यह संपत्ति जोशी की आय के ज्ञात स्रोतों से मेल नहीं खाती,,,,याचिकाकर्ता ने मंत्री गणेश जोशी की संपत्ति की विजिलेंस जांच की मांग की,,,, तत्पश्चात विशेष विजिलेंस कोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को 8 अक्टूबर 2024 तक इस पर निर्णय लेने का निर्देश दिया था,,,,, हालांकि, सरकार ने इस समय सीमा का पालन नहीं किया,,,, जिसके बाद मामला फिर से हाई कोर्ट पहुंचा,,,नैनीताल हाई कोर्ट ने गणेश जोशी को 23 जुलाई 2025 तक जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है,,,, कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछा है कि क्या उनकी संपत्ति की जांच विजिलेंस को सौंपी जाएगी ?

ऐसे में गणेश जोशी का मामला न केवल उनके लिए बल्कि सरकार के लिए भी एक बड़ी उलझन बन गया है,,,,अब एक सवाल ये भी खड़ा हो गया है कि  क्या मुख़्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस मामले में कोई ठोस फैसला लेकर विजिलेंस जांच की संस्तुति देंगे,,,जैसा की कोर्ट ने भी पूछा है,,,,दरअसल ये धामी सरकार की जीरो टोरलेंस निति की भी परीक्षा होगी,,,क्योंकि जिस तरह का एक्शन सरकार ने हरिद्वार नगर निगम घोटाले में लिया उससे धामी सरकार से उम्मीदें बढ़ी हैं,,,लेकिन सवाल इस बार मुख्यम्नत्री पुष्कर सिहं धामी के खुद के ही मंत्री के खिलाफ निर्णय लेने का है ,,,,,,सवाल ये भी है कि कोर्ट में सरकार क्या जवाब दाखिल करेगी ,,,,? दोस्तों अगर आपको भी लगता है की जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाते हुए क्या जवाब दाखिल करना चाहिए माननीय कोर्ट के समक्ष तो कमेंट बॉक्स में अपनी राय  जरूर रखें

 

मंत्री गणेश जोशी पर याचिकाकर्ता विकेश नेगी ने आरोप लगाया है कि जोशी ने बागवानी, जैविक खेती, विदेशी दौरों और निर्माणाधीन सैन्य धाम के निर्माण में गड़बड़ी और अनियमितताएं कीं, जिससे उनकी संपत्ति में असामान्य वृद्धि हुई,,, गणेश जोशी ने 2022 के विधानसभा चुनाव में अपने शपथ पत्र में लगभग 9 करोड़ रुपये की संपत्ति घोषित की थी। इसमें चल और अचल संपत्ति दोनों शामिल हैं। 2018 में उनकी घोषित संपत्ति 3.19 करोड़ रुपये थी, जो 2022 में 9 करोड़ रुपये हो गई। यह वृद्धि आय से अधिक संपत्ति के आरोपों का आधार बनी,,,याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि जोशी ने बागवानी विभाग, जैविक खेती, और सैन्य धाम जैसे क्षेत्रों में सरकारी धन का दुरुपयोग कर संपत्ति अर्जित की है.

 

याचिका के समर्थन में विकेश नेगी ने कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी और उनके परिवार की संपत्तियों के ब्योरे उपलब्ध कराये हैं ,, इन आंकड़ों का आधार याचिकाकर्ता ने 2022 के चुनावी हलफनामे को बनाया है ,, एक्टिविस्ट विकेश नेगी की माने तो 15 वर्ष में मंत्री गणेश जोशी की कुल कमाई 35 लाख होनी चाहिए ,, क्यूंकि उन्होंने न तो अपना व्यवसाय है और न ही खेती है .

 

वैसे इस मामले में माननीय जोशी जी को अपने सहयोगी मंत्रिओं से कुछ सीख लेना चाहिए था ,, जो मंत्री विधायक होने के साथ साथ उत्तराखंड के किसान भी हैं ,, मतलब ऐसा उन्होंने अपनी आय के स्रोतों में ज़ाहिर किया है ,, व्यक्तिगत रूप से हम उन सभी मंत्रिओं से भी दरख्वास्त करेंगे की वो अपने सहयोगी मंत्री को खेती का ज्ञान दें ,, और इसी ज्ञान की गंगा को उत्तराखंड के किसानों तक भी पहुंचाएं ताकि उत्तराखंड का हर किसान इन सभी मंत्रिओं की तरह ही करोड़ों में खेल सके

 

नैनीताल हाई कोर्ट ने जोशी को 23 जुलाई 2025 तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं । कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी प्रति उत्तर मांगा है,,,इन सभी मामलों पर मंत्री गणेश जोशी ने इन आरोपों को “राजनीतिक साजिश” करार दिया और कहा कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है,,,,वैसे सिर्फ ऐसा नहीं है कि गणेश जोशी आय से अधिक सम्पति के मामले में विवादों में रहे हैं,,,बल्कि कई अन्य विवाद भी उनसे जुड़े हुए हैं,,,जोशी पर कई बार विवादास्पद बयान देने का आरोप लगा है। उदाहरण के लिए, 2022 में उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर अमर्यादित टिप्पणी की थी ,,,,जिस पर उनका खूब विरोध हुआ,,,इसके आलावा 2022 में चारधाम यात्रा के लिए आरटीपीसीआर टेस्ट अनिवार्य करने का उनका बयान विवादों में रहा, जिसे बाद में सीएम पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर खारिज कर दिया गया था ,,,

 

एक और मामला है जो गणेश जोशी को विवादों में लेकर जाता है ,, वो है उद्यान विभाग का घोटाला  जो मुख्य रूप से 15 लाख पौधों की खरीद से जुड़ा है , इस मामले में आरोप है कि  इन पौधों के खरीद करते समय कीमत से ज्यादा रकम अदा की गयी है ,,जो की 70 करोड़ बताई जाती है ,, करोड़ों रुपए के भुगतान में सीधे तौर पर फर्जीवाड़ा पकड़ा गया है.  इस घोटाले में शासन की जांच के साथ ही हाई कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में घोटाले से संबंधित तमाम आरोपों को पुष्ट किया जा चुका है. हाईकोर्ट ने ही इस घोटाले की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे .वर्ष 2023 में चर्चित फल पौध खरीद घोटाले में सीबीआई ने जिस नर्सरी के खिलाफ एफआईआर कराई है।विभाग ने उसी नर्सरी को दोबारा फल पौध आवंटन का काम दिया।

 

 

इसके अलावा 2023 में जोशी के सामने एक युवक की पिटाई का वीडियो वायरल हुआ, जिसके बाद कांग्रेस ने उन पर कानून व्यवस्था बनाए रखने में निष्क्रियता का आरोप लगाया। 2024 में चुनाव प्रचार के दौरान जोशी को पूर्व सैनिकों और ग्रामीणों ने घेर लिया था , जिन्होंने उन पर पेयजल किल्लत जैसे स्थानीय मुद्दों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया,,,और वर्तमान में हाल ही में उन पर आरोप लगा कि जोशी के कृषि विभाग में टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता हुई, जहां टेंडर खुलने से पहले ही एक ठेकेदार ने एग्री मित्र मेला का काम शुरू कर दिया था,,,,हालाँकि जब इस मामले ने तूल  पकड़ा तो सरकार ने ये मेला ही रद्द करवा दिया,,,,मेला रद्द होने से गड़बड़ी के आरोप को और बल मिला,,, जिस पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने गणेश जोशी का स्टैंड लेते हुए कहा कि ऐसे मेले रद्द या एक्सटेंड होते रहते हैं ,, पर भाजपा अध्यक्ष से न तो किसी सम्मानित मिडिया ने ये सवाल पूछा की आखिर कैसे जिस काम को लेकर टेंडर निकलने में दो दिन बाकी हैं उस पर आखिर क्यों किसी ठेकेदार की तरफ से पहले ही काम शुरू हो गया ,, यक़ीनन उनके पास जवाब होता नहीं ,,, वैसे अक्सर ही ये देखा गया है की अध्यक्ष महेंद्र भट्ट मंत्रिओं के बचाव के लिए ही जाने जाते हैं ,, खासकर उन मंत्रिओं के मामलों में ,,जिन मामलों में विवाद रहा है ,, खैर पहले मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल थे और इस बार मंत्री गणेश जोशी हैं ,,

 

 

सवाल यही है कि भाजपा के एक के बाद एक मंत्री लगातार सवालों के घेरे में घिरते दिखाई दे रहे हैं,,,जिससे डबल इंजन की सरकार पर दबाव बढ़ रहा है,,,,2027 से पहले इस तरह के आरोप भाजपा सरकार को असहज कर रहे हैं,,,अगर समय रहते भाजपा सरकार इन सभी का जवाब नहीं दे पायी तो 2027 में कई नेताओं के साथ पार्टी की डगर जरूर मुश्किल हो सकती है,,,इसलिए अब ये मुख़्यमंत्री की जवाब देहि भी बन गयी है कि वो अपने मंत्रियों पर लग रहे आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाएं ताकि सच सामने आये,,,,और अगर कोई इसमें लिप्त है तो उस पर कार्यवाही भी होनी चाहिए,,,बहरहाल  अब गणेश जोशी मामले में कोर्ट में क्या होने वाला है इस पर देहरादून से लेकर दिल्ली तक सबकी नजरें हैं,, और उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण उत्तराखंड की जनता की नज़रें भी हैं ,, क्यूंकि संसाधन और पैसा आखिर हैं तो उत्तराखंड का ही…..

Chardham Yatra: तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम, दस स्थानों पर तैनात रहेगा आतंकवाद निरोधक दस्ता.

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तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर आतंकवाद निरोधक दस्ता, अर्धसैनिक बल और पुलिस के जवानों की नजर रहेगी। यात्रियों की सुरक्षा के लिए 10 कंपनी पैरामिलिट्री, 17 कंपनी पीएसी के साथ ही 10 स्थानों पर आतंकवाद निरोधक दस्ता तैनात रहेगा। 65 स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमें तैनात रहेंगी।

ट्रांजिट कैंप में सुबह 11 बजे डीजीपी दीपम सेठ ने मीडिया को चारधाम यात्रा को लेकर जानकारी दी। डीजीपी ने कहा कि 30 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुल रहे हैं। पिछले साल के अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार उन पर काम किया गया है।

इस बार जनपद स्तर पर पुलिस मुख्यालयों में चारधाम यात्रा सेल का गठन किया गया है। साथ ही आईजी गढ़वाल के कार्यालय में चारधाम यात्रा का कंट्रोल रूम बनाया गया है। यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम की घटना के बाद यात्रा को सुरक्षित करने के लिए उसी दिन से उस पर काम किया गया।

आपदा से निपटने के लिए 65 स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमें तैनात-

यात्रियों की सुरक्षा के लिए केंद्र सरकार की ओर से 10 कंपनी पैरामिलिट्री फोर्स उपलब्ध कराई जा रही है जो जल्द ही मिल जाएंगी। वहीं पीएसी की 17 कंपनी और छह हजार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी चारधाम यात्रा में लगाई गई है। पूरे यात्रा रूट को ड्रोन से कवर किया जाएगा। 2000 सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से यात्रा रूट पर सुरक्षा और यातायात की निगरानी की जाएगी। अलग-अलग क्षेत्रों से कंट्रोल रूम में फीड आ रहा है।

आपदा से निपटने के लिए 65 स्थानों पर एसडीआरएफ की टीमें तैनात की जाएंगी। इसके अलावा आतंकवाद निरोधक दस्ते को 10 स्थानों पर तैनात किया जाएगा। जो स्वचालित हथियारों से लैस रहेंगे।
पूरे यात्रा को 15 सुपर जोन और अन्य सेक्टर में बांटा गया है। यातायात को लेकर 156 पार्किंग स्थल और 56 होल्डिंग एरिया विकसित किए गए हैं।

चारधाम यात्रियों को सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी जाएगी। सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। पहलगाम की घटना के बाद पूरे राज्य में रेड अलर्ट है। पुलिस किसी भी हालत से निपटने को तैयार है।

Pahalgam Attack: उत्तराखंड में पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर बढ़ी सतर्कता, चारधाम यात्रा को लेकर खुफिया तंत्र सक्रिय.

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पहलगाम आतंकी हमले के बाद राज्य में सतर्कता बढ़ा दी गई है। पुलिस ने रातभर चेकिंग के बाद दिन में भी बॉर्डर क्षेत्रों में चेकिंग जारी रखी। इसी बीच सरकार की ओर से पर्यटन और धार्मिक स्थलों को लेकर भी सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

इसके अलावा यात्रा मार्ग पर विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करने के लिए कहा गया है। इसके लिए खुफिया तंत्र को अति सक्रियता से काम करने के निर्देश भी दिए गए हैं। हर छोटी बड़ी सूचना को गंभीरता से लिया जाए, ताकि भविष्य में कोई अप्रिय घटना न हो। 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू होने जा रही है। इसके लिए सारी तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है।

हर साल चारधाम यात्रा और धार्मिक आयोजनों को लेकर विभिन्न माध्यमों से धमकियों की बात भी सामने आती है। लिहाजा, पुलिस और खुफिया तंत्र यहां पर अतिरिक्त सतर्कता बरतती है।ऐसे में अब पहलगाम की घटना के बाद पुलिस और खुफिया तंत्र पहले से भी अधिक सतर्क हुआ है। इंटेलीजेंस सूत्रों के मुताबिक सभी पर्यटन स्थलों पर भी अतिरिक्त सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।

बॉर्डर क्षेत्रों में भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात-

सोशल मीडिया व अन्य माध्यमों से जो जानकारी मिलती है उसे गंभीरता से लेकर इनपुट जुटाने के लिए कहा गया है। बॉर्डर क्षेत्रों में भी अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहेगा। इसके अलावा सीमावर्ती राज्यों से भी सूचनाओं के आदान प्रदान को लगातार करने के निर्देश दिए गए हैं।बता दें कि चारधाम के अलावा देहरादून, मसूरी, टिहरी, नैनीताल आदि जगहों पर लाखों की तादाद में सैलानी आते हैं। इनकी सुरक्षा में भी कोई चूक न हो इसके लिए भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। इंटेलीजेंस को राष्ट्रीय एजेंसियों के लगातार संपर्क में रहने के लिए भी कहा गया है। ताकि, हर प्रकार की सूचनाओं का आदान प्रदान हो सके।

 

इसी के मद्देनजर राज्य में भी सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता की जाएगी। बता दें कि समय-समय पर हरिद्वार रेलवे स्टेशन, देहरादून के विभिन्न सैन्य संस्थान, टिहरी बांध आदि पर हमले की धमकियां मिलती हैं। इन्हें गंभीरता से लेते हुए पुलिस कार्रवाई भी करती है। इनमें कुछ असामाजिक तत्वों की संलिप्तता की बात भी सामने आती है।