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UKPSC: खुशखबरी… युवा हो जाएं तैयार, सब इंस्पेक्टर समेत 222 पदों पर निकली भर्तियां, आज से करें आवेदन

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राज्य लोक सेवा आयोग ने प्रदेश में 222 पदों पर सब इंस्पेक्टर भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया है। इसके लिए बुधवार से ऑनलाइन आवेदन शुरू होने जा रहे हैं। आयोग की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, सब इंस्पेक्टर पुलिस के 65 पद, सब इंस्पेक्टर इंटेलीजेंस के 43 पद, पीएसी, आईआरबी में गुल्मनायक पुरुष के 89 पदों पर ये भर्ती की जाएगी।

इसके लिए 22 फरवरी तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सब इंस्पेक्टर व गुल्मनायक के लिए आवेदक की आयु 21 से 28 वर्ष के बीच होनी चाहिए। मान्यता प्राप्त विवि से ग्रेजुएशन पास होना चाहिए। शारीरिक मानक अलग से दिए गए हैं।

भर्ती के लिए हल्द्वानी, हरिद्वार, देहरादून, अल्मोड़ा, चंपावत, बागेश्वर, चमोली, टिहरी, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, ऊधमसिंह नगर और पिथौरागढ़ में परीक्षा केंद्र बनाए जाएंगे। ऑनलाइन आवेदन में आने वाली किसी भी समस्या के लिए अभ्यर्थी ukpschelpline@gmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं।

पुराने अभ्यर्थियों को दी आयोग ने राहत-

यह भर्ती पूर्व में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने तीन जनवरी 2022 को निकाली थी। तब हजारों अभ्यर्थियों ने इस भर्ती के लिए आवेदन किया था। उन सभी अभ्यर्थियों के लिए आयु एक जुलाई 2021 को न्यूनतम 21 वर्ष और अधिकतम 29 वर्ष होनी चाहिए। पेपर लीक प्रकरण के बीच ये भर्ती अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से राज्य लोक सेवा आयोग को ट्रांसफर हो गई थी, जिस पर अब आयोग ने विज्ञापन जारी किया है।



Uttarakhand Weather: बदला मौसम का मिजाज, गंगोत्री-यमुनोत्री में बर्फबारी, चकराता में भी सीजन की पहली बर्फबारी.

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उत्तराखंड में आज से मौसम फिर बदल गया है। तड़के गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित आस-पास बर्फबारी हुई तो बड़कोट तहसील क्षेत्र में बारिश। वहीं, मैदानी इलाकों में कई जगह हल्का कोहरा छाया हुआ है। राजधानी देहरादून समेत पहाड़ों की रानी मसूरी, धनोल्टी और कैम्पटी में हल्की धूप है, लेकिन ठंडी हवाएं चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उधर, चकराता के लोखंडी में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। वहीं, बर्फबारी से बागवानों ने भी राहत की सांस। अब बर्फबारी के चलते पर्यटकों के उमड़ने की भी उम्मीद है।

पहाड़ों की रानी मसूरी में बदला मौसम। शहर में शाम होते ही छाया घना कोहरा। ठंड बढ़ने से अलाव तापते दिखे लोग। 31 जनवरी और एक फरवरी को बारिश-बर्फबारी के आसार। मौसम विज्ञान केंद्र ने जारी किया येलो अलर्ट।
वहीं, आज प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके लिए मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी होने की संभावना जताई है। तापमान की बात करें तो दून का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहने के आसार हैं।

Jharkhand: हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन बनेंगी झारखंड की मुख्यमंत्री !

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झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कि कथित लैंड स्कैम से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं जमीन घोटाले में पूछताछ के लिए ईडी हेमंत सोरेन को कई बार समन जारी कर चुकी है हालांकि कई समन जारी होने के बाद भी हेमंत सोरेन ईडी के सामने पेश नहीं हुए बीते दिनों ईडी की टीम ने हेमंत सोरेन से रांची स्थित उनके सरकारी आवास पर कई घंटे पूछताछ की थी इसके बाद ईडी ने फिर से समन जारी कर 29 या 30 जनवरी को पूछताछ के लिए पेश होने को कहा था शनिवार को हेमंत सोरेन के दिल्ली पहुंचने की जानकारी सामने आयी जिसके बाद ईडी की टीम दिल्ली स्थित हेमंत सोरेन के आवास पर उनसे पूछताछ के लिए पहुंची थी लेकिन हेमंत सोरेन वहां भी नहीं मिले लेकिन ईडी की टीम ने उनके दिल्ली आवास को पूरा खंगाला इतना ही नहीं प्रवर्तन निदेशालय  की टीम ने सोमवार को सोरेन के दिल्ली के शांति निकेतन में स्थित घर सहित 3 ठिकानों पर छापेमारी की टीम ने तलाशी के दौरान दो BMW कार से कुछ आपत्तिजनक दस्तावेज और 36 लाख रुपये नगद जब्त किए हैं मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हेमंत सोरेन ने ईडी को बताया है कि वह बुधवार को रांची स्थित आवास पर मिलेंगे।

सीएम सोरेन के बारे में जानकारी देने वाले को बीजेपी देगी 11 हजार रुपये-

अब माना जा रहा है कि मुख़्यमंत्री हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी कभी भी हो सकती है इसके लिए उनकी पार्टी में भी सरगर्मी बढ़ गयी है पार्टी  ने अपने सभी विधायकों को रांची नहीं छोड़ने को कहा है साथ ही JMM ने राज्य के मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर चर्चा के लिए  रांची में अहम बैठक भी बुलाई है,,झारखंड के राज्यपाल CP राधा कृष्ण का कहना है कि वह भी दूसरों की तरह सीएम का इंतजार कर रहे हैं. साथ ही जानकारी आ रही है कि डीजीपी, सेक्रेटरी और गृह सचिव को राज्यपाल में राजभवन बुलाया गया है साथ ही बीजेपी ने दावा किया है कि सीएम हेमंत सोरेन 30 घंटों से ज्यादा वक्त से लापता हैं ।

भाजपा ने झारखंड सीएम हेमंत सोरेन को भगोड़ा बता दिया है और सीएम के बारे में जानकारी देने वाले को 11 हजार रुपये इनाम देने का भी ऐलान कर दिया है भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर एक पोस्टर शेयर किया हैं, जिसमें उन्होंने सीएम के लापता होने का दावा किया है बता दें कि कुछ दिनों पहले ईडी ने उन्हें 10वां समन भेजा था और 29 जनवरी से 31 जनवरी के बीच पेश होने के लिए कहा था. अगर वह ED के सामने पेश नहीं होते हैं तो एजेंसी उनके आवास पर जाकर पूछताछ करेगी।

क्या कल्पना सोरेन बनेंगी झारखण्ड की नयी मुख्यमंत्री-

मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगने और ईडी के शिकंजे के बाद  हेमंत के सियासी भविष्य को लेकर कयासबाजी चल रही है दावा किया जा रहा है कि हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन को झारखंड का नया मुख्यमंत्री बनाए जाने की तैयारी चल रही है  बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने सोमवार को दावा किया कि हेमंत ने अपने सभी सहयोगी विधायकों को सामान और बैग के साथ रांची बुलाया है हेमंत सड़क मार्ग के जरिए रांची पहुंचेंगे और कल्पना के नाम की घोषणा करेंगे बीजेपी के इस दावे के बाद झारखंड की सियासत गरमा गई है इन दावों ने 27 साल पुराने बिहार की राजनीतिक ताजपोशी को याद दिला दिया है तब आरजेडी प्रमुख लालू यादव की गिरफ्तारी पर तलवार लटकी थी और उन्होंने सीएम की कुर्सी बचाने के लिए अपनी पत्नी राबड़ी देवी को नया सीएम बनाकर चौंका दिया था बीजेपी लगातार हेमंत सोरेन को घेर रही है और गिरफ्तारी की आशंका के चलते अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को राज्य की कमान सौंपने की तैयारी का दावा कर रही है।

हालांकि, कल्पना सोरेन को झारखंड का नया सीएम बनाने के दावे काफी समय से किए जा रहे हैं लेकिन हेमंत की पत्नी और झारखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख शिबू सोरेन की बहू कल्पना सोरेन राजनीतिक सुर्खियों से दूर रहती हैं वे एक स्कूल का संचालन करती है कई लोगों का मानना है कि राजनीतिक परिवार में शादी होने के कारण अगर उन्हें नेतृत्व करने का मौका मिलता है तो वे झारखंड के राजनीतिक हालात को संभालने में सक्षम हो सकती हैं एक व्यवसायी महिला के रूप में कल्पना तब सुर्खियों में आईं थीं, जब पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी नेता रघुवर दास ने आरोप लगाया था कि हेमंत सोरेन ने अपनी पत्नी के व्यवसाय के लिए एक प्लॉट आवंटित करने के लिए अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया है ।

सीएम सोरेन को लेकर एयरपोर्ट पर भी अलर्ट- 

सवाल उठता है कि आखिर हेमंत सोरेन कहां हैं और क्यों सामने नहीं आ रहे मनी लॉन्ड्रिंग और खनन घोटाले में हेमंत सोरेन से पूछताछ के लिए ईडी की टीम समन कर रही है लेकिन सोरेन पेश नहीं हो रहे हैं वैसे जानकारी मिली है कि हेमंत सोरेन के दफ्तर से ईडी को मेल किया गया है कि वो 31 जनवरी को रांची में अपने आवास पर ईडी के सवालों का जवाब देंगे एहतियात बरतते हुए ED की टीम ने हेमंत सोरेन को लेकर एयरपोर्ट पर भी अलर्ट भेज दिया है।

Uttarakhand: बिजली की मांग के सापेक्ष उपलब्धता कम होने से रोजाना कटौती, गैस प्लांट चलाया फिर भी नहीं है राहत.

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प्रदेश में बिजली की मांग के सापेक्ष उपलब्धता कम होने से रोजाना कटौती हो रही है। सोमवार को भी ग्रामीण क्षेत्रों में दो से चार घंटे तक कटौती की गई। वहीं, छोटे कस्बों में भी एक से डेढ़ घंटे की कटौती हुई।

यूपीसीएल ने किल्लत को नियंत्रित करने के लिए काशीपुर स्थित गैस प्लांट भी चला दिया है। हालांकि, अभी भी यूपीसीएल रोजाना 50 से 70 लाख यूनिट बाजार से खरीदने को मजबूर है। ठंड में बिजली की मांग 4.8 करोड़ यूनिट पार हो रही है। यूजेवीएनएल से करीब 80 लाख यूनिट ही मिल पा रही है। अब यूपीसीएल ने गैस पावर प्लांट चलाया है, जिससे रोजाना करीब 40 से 45 लाख यूनिट मिल रही है।

कुल मांग के सापेक्ष बाजार से महंगी बिजली खरीद में यूपीसीएल का दम फूल रहा है। उधर, इस किल्लत को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण इलाकों में चार घंटे तक कटौती की जा रही, जबकि छोटे कस्बों में डेढ़ घंटे तक, फर्नेश इंडस्ट्री में भी औसत पांच घंटे कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि, यूपीसीएल ने जनवरी माह की रिपोर्ट में महीनेभर में औसत 24 घंटे कटौती तक ही दावा किया है।

यूपीसीएल के निदेशक परियोजना अजय अग्रवाल का कहना है कि फिलहाल मांग के हिसाब से ग्रामीण इलाकों में कुछ देर कटौती करनी पड़ रही है। रोजाना बाजार से बिजली खरीदने के अलावा उन्होंने काशीपुर स्थित गैस पावर प्लांट भी चला दिया है।

यूजेवीएनएल का उत्पादन कम-

वैसे तो सर्दियों में यूजेवीएनएल का बिजली उत्पादन कम हो जाता है, लेकिन इस साल अभी तक बारिश या बर्फबारी न होने से उत्पादन गिरा हुआ है। रोजाना करीब 80 लाख यूनिट तक ही विद्युत उत्पादन हो पा रहा है। यूजेवीएनएल की एक-दो परियोजनाओं से उत्पादन बाधित भी चल रहा है।

पांच साल में जनवरी भारी, बिजली मांग 4.8 करोड़ पार-

यूपीसीएल के लिए पिछले पांच साल में इस साल जनवरी माह में बिजली की मांग भारी पड़ी है। 2020 में जनवरी माह में औसत मांग चार करोड़ यूनिट, 2021 में 4.2 करोड़ यूनिट, 2022 में 4.4 करोड़ यूनिट, 2023 में 4.6 करोड़ यूनिट और इस साल जनवरी माह में 4.8 करोड़ यूनिट से ऊपर मांग पहुंची है। यूपीसीएल प्रबंधन के लिए ऐसे हालात में बाजार पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।

TB: जल्द शुरू होगा टीबी वैक्सीन का बड़े पैमाने पर ट्रायल, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन करेगी पूरी फंडिंग

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टीबी की नई वैक्सीन के बड़े पैमाने पर ट्रायल जल्द शुरू होंगे। बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन इस ट्रायल की फंडिंग करेगी। फाउंडेशन के सीईओ मार्क सुजमैन ने इसकी पुष्टि की है। बीते 100 सालों में नई टीबी वैक्सीन का बड़े पैमाने पर यह पहला ट्रायल होगा। मार्क सुजमैन ने बताया कि उनके फाउंडेशन ने इस ट्रायल के लिए फंडिंग देने का फैसला किया है क्योंकि निजी कंपनियों इसके लिए निवेश नहीं कर रही हैं।

 
 
अरबों डॉलर खर्च करेगी गेट्स फाउंडेशन-

मार्क सुजमैन ने कहा कि ‘हम ट्रायल पर सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेंगे। जिन लोगों को टीबी की बीमारी है, वह अधिकतर गरीब लोग हैं और वह इलाज के लिए पैसे खर्च नहीं कर सकते।’ सुजमैन ने कहा कि ‘अगर यह ट्रायल सफल रहता है तो इसका सबसे ज्यादा फायदा भारत को मिलेगा। भारत में टीबी के सबसे ज्यादा मरीज हैं।’ जून 2023 में वेलकम फाउंडेशन और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन ने टीबी की वैक्सीन एम72 को विकसित करने के लिए फंडिंग करने का एलान किया था। बीते 100 सालों में यह टीबी की पहली वैक्सीन हो सकती है। अभी टीबी की एकमात्र वैक्सीन बीसीजी है, जिसे पहली बार साल 1921 में लगाया गया था। उसके बाद अब टीबी वैक्सीन के ट्रायल शुरू हो रहे हैं। ट्रायल पर गेट्स फाउंडेशन, वेलकम फाउंडेशन के साथ मिलकर करीब 550 मिलियन डॉलर खर्च करेगी। सैंकड़ों करोड़ डॉलर खर्च करेगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में टीबी से मरने वाले लोगों की संख्या कोविड-19 के बाद सबसे ज्यादा है। टीबी की बीमारी सभी उम्र के लोगों को हो सकती है और इससे बचाव भी संभव है। टीबी में मरीज के फेफड़ों में बैक्टीरिया का संक्रमण हो जाता है। टीबी मरीज के संपर्क में आने से यह संक्रमण होने का खतरा होता है। केंद्र सरकार भी टीबी उन्मूलन के लिए कार्यक्रम चला रही है। सरकार ने साल 2025 तक भारत को टीबी मुक्त करने का लक्ष्य रखा है।
सरकार भी TB उन्मूलन के खिलाफ चला रही योजना-

सरकार ने साल 2022 में सरकार ने नि-क्षय मित्र कार्यक्रम की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत सरकार टीबी मरीजों की जांच, उन्हें पोषण और वॉकेशनल सपोर्ट देने का काम कर रही है। इसके लिए सरकार कई एनजीओ के साथ मिलकर काम कर रही है। इस योजना का असर दिख भी रहा है और साल 2014 में जहां भारत में टीबी के 15.5 लाख मरीज रजिस्टर हुए थे। साल 2022 में यह आंकड़ा बढ़कर 24.22 लाख हो गया था।

Corona: कोरोना संक्रमितों की संख्या में हुआ इजाफा, बीते दिन 159 लोगों की रिपोर्ट आई पॉजिटिव; जानें देश का हाल

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कोविड-19 का दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। 2020 में तेजी से फैंले कोविड महामारी ने दुनिया को चारदीवारी तक कैद कर दिया था। इसी बीच, कोविड-19 के केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भारत में एक्टिव नए आंकड़ों को जारी किया है। जिसमें कहा गया कि भारत में एक दिन में संक्रमित कोविड के 159 नए मामले दर्ज किए गए हैं। इसी के साथ ही पूरे देश भर में सक्रिय मामलों की संख्या 1623 हो गई है।

फिर बढ़ रहे कोविड के मामले- केंद्रीय मंत्रालय

केंद्रीय मंत्रालय की सुबह आठ बजे की रिपोर्ट में दर्ज आकंड़ों के मुताबिक, केरल में 24 घंटे में एक संक्रमित व्यक्ति ने दम तोड़ा है। गौरतलब है कि कि कोविड के दैनिक मामलों में पांच दिसंबर तक गिरावट दर्ज की गई थी। संक्रमित आंकड़ों अब दोहरे अंक को पार कर चुके हैं। लेकिन ठंड के मौसम की स्थिति के बाद से ही नए संस्करण के फैलने का सिलसिला शुरू हो गया है। 31 दिसंबर को एक दिन में सबसे ज्यादा 841 नए मामले समाने आए।

आधिकारिक सू्त्रों की मानें तो मौजूदा आंकड़ों से पता चलता है कि जेएन.1 वैरिएंट न तो नए मामलों में वृद्धि कर रहा है और न ही अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु दर में वृद्धि कर रहा है। गौरतलब है कि भारत ने कोविड-19 की तीन लहरों को झेला था। अप्रैल-जून 2021 के दौरान डेल्टा लहर, इस दौरान दैनिक नए मामलों और मौतों की चरम घटनाएं दर्ज की गई थी। 7 मई, 2021 को 4,14,188 मामले और 3,915 मौतें दर्ज की गई थी।

लगभग 220 करोड़ खुराकें दी जा चुकी है-

मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक, इस बीमार से ठीक होने वाले लोगों की संख्या 4.4 करोड़ से अधिक है, जिसकी रिकवरी दर 98.81 प्रतिशत है। मंत्रालय ने कहा कि देश में अब तक कोविड टीकों की 220.67 करोड़ खुराकें दी जा चुकी हैं।

बिहार में तेज हुई सियासी हलचल, BJP के साथ सरकार बना सकते हैं नीतीश कुमार, सुशील मोदी बनेंगे डिप्टी CM?

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Bihar Politics: बिहार में इस वक्त सियासी भूकंप आया हुआ है। बिहार में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल (यूनाइटेड) के तनाव के बीच सूत्रों के हवाले से कई ख़बरें निकलकर सामने आ रही है. ख़बर ये निकलकर आ रही है कि नीतीश कुमार (Nitish Kumar) का भाजपा के साथ जाना लगभग पूरी तरह से तय माना जा रहा है. 

अगले 48 घंटे बिहार की राजनीति में काफी अहम माने जा रहे हैं।  सूत्रों के अनुसार, 28 जनवरी नीतीश का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। सूत्रों से मिली जानकारी की माने तो नीतीश कुमार ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, जबकि उपमुख्यमंत्री बीजेपी से सुशील मोदी होंगे।

ये तो सूत्रों के हवाले से निकलकर सामने आया है. जैसे ही ख़बर मीडिया में आई, बयानबाजी का दौर शुरू हो गया. इस पूरे मसले पर नीतीश कुमार ने कोई बयान नहीं दिया लेकिन लेकिन सुशील मोदी, जिनके कहीं न कहीं फिर से डिप्टी सीएम बनने के योग हैं – उन्होंने कहा, कि  जो दरवाजे बंद हैं, वे खुल सकते हैं. राजनीति संभावनाओं का खेल है. इससे ज्यादा कोई टिप्पणी नहीं कर सकता.दूसरी तरफ,पटना और दिल्ली में बैठकों का दौर जारी है। राजधानी पटना में भाजपा ने अपने सभी विधायकों को मौजूद रहने को कहा है।

कथित तौर पर नीतीश कुमार अपने दोनों सहयोगियों यानी लालू प्रसाद यादव की राजद और इंडिया ब्लॉक की कांग्रेस से नाराज़ हैं. कांग्रेस सीट शेयरिंग लगातार टाल रही थी. सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय हो पाए, इससे पहले ही भारत जोड़ो न्याय यात्रा शुरू कर दी.

नीतीश कुमार INDIA ब्लॉक के पहले नेता नहीं हैं, जो सीट बंटवारे पर नाराज़ हैं. बल्कि हाल ही में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो ममता बनर्जी ने ये ऐलान किया  कि सीट बंटवारे से असंतुष्ट होकर वो राज्य में अकेले ही चुनाव लड़ेंगी.

लालू कैंप भी हुआ एक्टिव

सूत्रों के अनुसार, नीतीश बीजेपी के साथ जा सकते हैं, इसलिए अब लालू कैंप एक्टिव हो चुका है। नीतीश कुमार को हटाकर महागठबंधन के 114 विधायक हैं। बहुमत के लिए 122 विधायक चाहिए। एआईएमआईएम के इकलौते विधायक और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान, निर्दलीय विधायक सुमित सिंह (मंत्री) से संपर्क साधे जाने की संभावना है। साथ ही आरजेडी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के असंतुष्टों से भी संपर्क कर सकती है।

पहली बार तीनों सेनाओं की महिला टुकड़ी, झांकियों में भी नारी शक्ति; जानिए परेड में क्या कुछ रहा खास.

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समूचा राष्ट्र इस वर्ष 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस साल के समारोह के मुख्य अतिथि हैं। यह गणतंत्र दिवस हमारे लिए कई मायनों में खास है। इस बार झांकियों से लेकर परेड और थीम तक के केंद्र में महिलाएं हैं।

गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम क्या है?
शुक्रवार को देश अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस वर्ष की थीम ‘विकसित भारत और भारत-लोकतंत्र की मातृका’ है। गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ (पहले राजपथ कहा जाता था) पर ध्वजारोहण किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि दी।

इस समारोह के मुख्य आकर्षण यानी परेड का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच है। परेड का रुट विजय चौक से नेशनल स्टेडियम के बीच है जो पांच किमी है। मुख्य कार्यक्रम दिल्ली स्थित कर्त्तव्य पथ पर है।

समारोह में मेहमान कौन हैं?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि हैं। परेड में फ्रांस की 95 सदस्यीय मार्चिंग टीम और 33 सदस्यीय बैंड दल ने भी शिरकत किया। भारतीय वायु सेना के विमानों के साथ एक मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (एमआरटीटी) विमान और फ्रांसीसी वायुसेना के दो राफेल लड़ाकू जेट ने भी फ्लाई-पास्ट में हिस्सा लिया।

इस साल परेड में शामिल होने के लिए लगभग 13 हजार विशेष मेहमान आमंत्रित हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने सरकार की करीब 30 अहम योजनाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा पेटेंट हासिल करने वाले विशेषज्ञों, इसरो की महिला वैज्ञानिकों, स्वतंत्रता सेनानियों, किसानों और आदिवासी समुदाय के लोगों को भी निमंत्रण मिला।
इस बार कितनी झाकियां निकलीं?

परेड में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां दिखाई गईं। ये राज्य उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, लद्दाख, तमिलनाडु, गुजरात, मेघालय, झारखंड और तेलंगाना हैं।

इसके अलावा नौ केंद्र सरकार के नौ मंत्रालयों की झांकिया भी कर्तव्य पथ पर चलीं। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के रंगशाला में इन्हें अंतिम रूप दिया गया था।

किस राज्य की झाकी में क्या विशेष?

इस गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड काफी हद तक महिला केंद्रित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए तमाम राज्यों ने अपनी झाकियों को महिला आधारित थीम पर तैयार किया।

  • परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी का अंदाज खास रहा। इस झांकी की थीम ‘अयोध्या: विकसित भारत-समृद्ध विरासत’ पर आधारित है। झांकी के अगले भाग में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का प्रतीक दिखाई दिया, जो उनके बचपन के स्वरूप को प्रदर्शित करता है।
  • लद्दाख की झांकी में आइस हॉकी खिलाड़ियों को जगह दी गई है। वहीं महिला कलाकार यहां के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति देते हुए दिखाई गई हैं। झांकी में कई महिलाएं पेराक पहने दिखाई दे रही हैं जो लद्दाख में परंपरागत रूप से महिलाओं के लिए एक शाही टोपी मानी जाती है।
  • हरियाणा की झांकी में राज्य सरकार की ‘मेरा परिवार मेरी पहचान’ योजना को स्थान मिला है। झांकी में हरियाणवी महिलाओं को डिजिटल उपकरण के साथ दिखाया गया है। इससे यह बताने की कोशिश की गई है कि कैसे डिजिटल इंडिया पहल ने महिलाओं को सिर्फ एक क्लिक के जरिए सरकार की योजनाओं तक पहुंच बनाई है।
  • राजस्थान की झांकी में यहां की संस्कृति के साथ-साथ महिला हस्तशिल्प उद्योगों के विकास का प्रदर्शन किया गया। झांकी में राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर नृत्य की झलकी दिखी।
  • मध्य प्रदेश की झांकी में महिलाओं की आधुनिक सेवा क्षेत्र से लेकर लघु उद्योग और पारंपरिक क्षेत्रों तक में सक्रिय भागीदारी दिखाई गई है। झांकी में भारतीय वायु सेना में मध्य प्रदेश की पहली महिला फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी भी दिखीं।
  • मणिपुर की झांकी में महिलाओं को कमल के तने के नाजुक रेशों से काम करते और पारंपरिक चरखे का इस्तेमाल करके धागा बनाते हुए दिखाया गया। झांकी में एक महिला को यहां की प्रसिद्ध लोकटक झील से कमल की डंठले इकट्ठा करते हुए दिखाया गया। झांकी में राज्य के पारम्परिक इमा बाजार को जगह मिली है। यह बाजार सदियों पुराना है और इसे पूरी तरह से महिलाएं चलाती हैं।
  • ओडिशा की झांकी में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी दिखाई गई है।
  • छत्तीसगढ़ की झांकी में बस्तर से आने वाले आदिवासी समुदायों में महिला प्रधानता को प्रदर्शित किया गया।

OPS: पुरानी पेंशन बहाल होगी या जारी रहेगा NPS, जल्द ही 6 दिन में साफ होगी तस्वीर ?

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केंद्र सरकार, पुरानी पेंशन को लेकर बहुत जल्द अंतिम फैसला लेने जा रही है। जानकारों की मानें, तो छह दिन बाद ही यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि सरकारी कर्मी, पुरानी पेंशन के दायरे में आएंगे या एनपीएस ही जारी रहेगा। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने कर्मियों के साथ टकराव से बचने का रास्ता निकाल लिया है। एक फरवरी को लोकसभा में पेश होने वाले अंतरिम बजट में ओपीएस/एनपीएस को लेकर, सरकार अपनी स्थिति को स्पष्ट कर सकती है। ये तय है कि केंद्र सरकार, ओपीएस बहाली नहीं करेगी, लेकिन एनपीएस को ज्यादा से ज्यादा आकर्षक बनाने का मसौदा सामने आ सकता है। एनपीएस में जमा हो रहा कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही पुरानी पेंशन में जिस तरह से ‘गारंटीकृत’ शब्द, कर्मियों को एक भरोसा देता है, कुछ वैसा ही एनपीएस में भी जोड़ा जा सकता है। डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होने पर एनपीएस में उसका आंशिक फायदा, कर्मियों को कैसे मिले, इस पर कुछ नया देखने को मिल सकता है।

रिले हंगर स्ट्राइक’ के बाद भी सरकार मौन-

देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकारी कर्मियों ने राष्ट्रव्यापी अनिश्चिकालीन हड़ताल करने की चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठनों का धैर्य अब जवाब देता हुआ दिखाई पड़ रहा है। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ की है। इसका मकसद, सरकार को चेताना था। नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा ने ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ के अंतिम दिन सरकार को चेतावनी दे दी थी कि ओपीएस बहाली के लिए अब कोई धरना प्रदर्शन नहीं होगा। सरकार हमें, अनिश्चिकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। देश में अगर 1974 की रेल हड़ताल जैसा माहौल बना, तो उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। जल्द ही सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में देश भर में होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि तय होगी। हड़ताल की स्थिति में ट्रेनों व बसों का संचालन बंद हो जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों के दफ्तरों में कामकाज नहीं होगा।

देश में 1974 के दौरान हुई थी रेल हड़ताल-

1974 में जॉर्ज फर्नांडीस की अगुआई में रेल हड़ताल हुई थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा करती, तो उस पर मुश्किल से दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन सरकार को हड़ताल तोड़ने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इसके बाद रेल कर्मियों में असंतोष फैल गया था। वह हड़ताल 8 मई 1974 को प्रारंभ होकर 27 मई 1974 तक चली थी। इस दौरान रेलवे में सारा कामकाज ठप हो गया था। हजारों लोगों को जेल जाना पड़ा था। अनेक लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। शिवगोपाल मिश्रा का कहना था, हमने सरकार के समक्ष कई बार आग्रह किया है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए। सरकारी कर्मियों को बिना गारंटी वाली ‘एनपीएस’ योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली ‘पुरानी पेंशन योजना’ की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके लिए समय-समय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया गया है।

दिल्ली में सरकारी कर्मियों की कई रैलियां हो चुकी हैं। इनमें केंद्र और राज्यों के लाखों सरकारी कर्मियों ने हिस्सा लिया था। इतना कुछ होने पर भी केंद्र सरकार ने कर्मियों की इस मांग की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार, अड़ियल रवैया अख्तियार कर रही है। कर्मियों को स्ट्राइक करने के लिए मजबूर कर रही है। मिश्रा ने कहा, कोविड में हमने 11 हजार गाड़ियां चलाई थीं। हमारे 3000 कर्मी शहीद हुए थे। हर साल चार सौ से अधिक रेल कर्मी मारे जा रहे हैं। क्या कोविड में कोई मंत्री/एमपी/एमएलए शहीद हुआ। अब धरना खत्म है, हम हड़ताल पर जाएंगे। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि 1974 की रेल हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। उसके बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। मौजूदा सरकार, ऐसी नौबत सरकार न लाए।

डस्टबीन है एनपीएस, मंजूर नहीं संशोधन-

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है, केंद्र सरकार एनपीएस में संशोधन करने जा रही है। हम ऐसे किसी भी संशोधन के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। कर्मियों को गारंटीकृत पुरानी पेंशन ही चाहिए। अगर कोई भी कर्मचारी नेता या संगठन, सरकार के एनपीएस में संशोधन प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो ‘2004’ वाली गलतियां, ‘2024’ में भी दोहराई जाएंगी। एनपीएस एक डस्टबीन है। करोड़ों कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, डस्टबीन में जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली तक, कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। वित्त मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। यह रिपोर्ट पेश हो या न हो। इससे कर्मियों को कोई मतलब नहीं है। वजह, यह कमेटी ओपीएस लागू करने के लिए नहीं, बल्कि एनपीएस में सुधार के लिए गठित की गई थी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए सहमति-

एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, लोकसभा चुनाव से पहले ‘पुरानी पेंशन’ लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन, अब विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क कर रहे हैं। अगर वे कर्मचारियों की मांग मान लेते हैं, तो दस करोड़ वोटों का समर्थन संबंधित राजनीतिक दल के पक्ष में जा सकता है। देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए अपनी सहमति दे दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। केंद्र सरकार एनपीएस में ही ओपीएस जैसे कुछ प्रावधानों को शामिल कर सकती है। जैसे, रिटायरमेंट पर मिली बेसिक सेलरी का, एनपीएस में 40 से 45 फीसदी भुगतान बतौर पेंशन देने पर विचार हो रहा है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बातें केवल ‘ओपीएस’ से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

Uttarakhand: अब होमगार्डों के बच्चों को भी मिलेगी ‘हाईटेक कोचिंग’, अब मुफ्त में कर सकेंगे UPSC और UKPSC की तैयारी.

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अब होमगार्डों के बच्चों को यूपीएससी और यूकेपीएससी की कोचिंग के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश में पहली बार होमगार्ड विभाग ऐसे बच्चों को तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराएगा। इसके लिए कमांडेंट जनरल होमगार्ड आईजी केवल खुराना ने सूबे के होमगार्डों से बच्चों व अन्य अभिभावकों के नाम उपलब्ध कराने के लिए आवेदन मांगे हैं।

प्रदेश में पुलिस व्यवस्था में होमगार्डों का काफी हद तक योगदान रहता है। इनके बूते ही थानों और यातायात समेत अन्य व्यवस्थाएं चलती हैं लेकिन इस महंगाई के दौर में होमगार्डों के कई होनहार बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। आईजी केवल खुराना ने देश में ही नहीं बल्कि प्रदेश में भी पहली बार होमगार्डों के बच्चों को निशुल्क कोचिंग दिलाए जाने की पहल शुरू की है।

विभाग होमगार्डों के होनहार बच्चों के लिए देहरादून मुख्यालय में कोचिंग सेंटर खोलने जा रहा है। इसमें सभी विषयों के विशेषज्ञ और विभागीय अधिकारी भी बच्चों को कोचिंग देंगे। कोचिंग के लिए बच्चों का एक मानक भी तय किया गया है। मानक के अनुसार जो बच्चे स्नातक कर रहे हैं या स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। 

आवेदन दून मुख्यालय भेजे जाएंगे-

वह यूपीएससी और यूकेपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं तो उन्हें कोचिंग दी जाएगी। इसके लिए आईजी केवल खुराना की ओर से सूबे के सभी जिला कमांडेंट को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में अपने-अपने जिले में तैनात इच्छुक होमगार्डों से बच्चों के नाम मांगे गए हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय से आवेदन दून मुख्यालय भेजे जाएंगे।

आवेदन के हिसाब से दी जाएगी कोचिंग-

जो बच्चे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की तैयारी करना चाहते हैं। उनके आवेदनों की संख्या कितनी होगी। इस हिसाब से दून मुख्यालय में कोचिंग सेंटर तैयार किया जाएगा और विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। माना जा रहा है कि फरवरी माह में कोचिंग शुरू हो जाएगी।

होमगार्डों के जो बच्चे या अन्य आश्रित यूपीएससी और यूकेपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं। उन्हें विभाग की ओर से निशुल्क कोचिंग दिलाई जाएगी। देहरादून में रहने वालों को कोचिंग सेंटर और अन्य जिलों में रहने वालों को दो-दो घंटे ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। -केवल खुराना, कमांडेंट जनरल होमगार्ड, आईजी, देहरादून