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Uniform Civil Code: यूसीसी को मंजूरी के बाद उत्तराखंड में बढ़ी विवाह पंजीकरण की रफ्तार, आंकड़ों में आया 30% का उछाल।

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यूनिफॉर्म सिविल कोड बिल (यूसीसी`) को मंजूरी के बाद से दून कलेक्ट्रेट में सब रजिस्ट्रार कार्यालय का नजारा बदला हुआ है। जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों की भीड़ के साथ ही नवविवाहित जोड़े सब रजिस्ट्रार कार्यालय में बड़ी संख्या में पहुंचने पहुंचने लगे हैं। यूसीसी बिल विधानसभा में पास होने के बाद से ही विवाह पंजीकरण के आंकड़ों में 30 प्रतिशत का उछाल दर्ज किया गया है।
सब रजिस्ट्रार कार्यालयों में विवाह पंजीकरण के लिए बेहतर व्यवस्था कर पृथक डेस्क बनवाई जा रही है। फरवरी में उत्तराखंड विधानसभा में समान नागरिक संहिता बिल को मंजूरी दी गई। विवाह, तलाक और उत्तराधिकार को लेकर समान नागरिक संहिता वाले इस विधेयक में सभी वर्ग के लोगों के लिए एक समान प्रावधान किया जा रहा है। इस बिल के कानून बनते ही उत्तराखंड में रहने वाले सभी लोगों के लिए विवाह पंजीकरण अनिवार्य होगा।26 मार्च 2010 के बाद हुए विवाहों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।

6 महीने के भीतर सभी को करना होगा पंजीकरण- 


यूसीसी लागू होने के बाद छह महीने के भीतर ऐसे सभी जोड़ों को पंजीकरण कराना होगा, जिनकी शादी 26 मार्च 2010 के बाद हुई है। वहीं 2010 से पूर्व हुए विवाह में भी दंपती चाहे तो अपना पंजीकरण करा सकेंगे। यूसीसी का बिल अभी बेशक कानून नहीं बना हो, लेकिन इसके प्रावधानों को देखते हुए लोगों में पहले से जागरूकता आ गई है। धार्मिक रीति-रिवाज से शादी के बाद जोड़े विवाह पंजीकृत कराने के लिए खुद पहुंच रहे हैं। 

एक महीने में ही बढ़ गए 130 जोड़े-

देहरादून कलेक्ट्रेट में सब रजिस्ट्रार-2, सब रजिस्ट्रार-3, सब रजिस्ट्रार-4 के कार्यालय में विवाहों का पंजीकरण होता है। प्राप्त आंकड़ों के अनुसार यूसीसी बिल पास होने से पहले प्रत्येक महीने 446 जोड़े अपने विवाह पंजीकृत कराने के लिए सब रजिस्ट्रार के यहां पहुंचते थे। यूसीसी बिल पास होने के बाद फरवरी में ही यह आंकड़ा 576 पर पहुंच चुका है, जो कि गत वर्ष की तुलना में करीब 30 फीसदी अधिक है।

एक तस्वीर ये भी- 

वैशाली की शादी आदित्य के साथ विधिवित धार्मिक रीति-रिवाज से हो चुकी है। लेकिन समान नागरिक संहिता बिल में विवाह पंजीकरण की अनिवार्यता के चलते वह विवाह का पंजीकरण कराना चाह रहे हैं। सब रजिस्ट्रार कार्यालय में यह लोग विवाह पंजीकरण की औपचारिकताओं की जानकारी करने पहुंचे।

दूसरी तस्वीर- 

रीना और प्रकाश के विवाह को पांच साल हो चुके हैं। लेकिन यूनिफॉर्म सिविल कोड में मार्च 2010 के बाद हुए सभी विवाहों के पंजीकरण को अनिवार्य किया गया है, इसलिए यह दंपती भी विवाह पंजीकरण कराने पहुंचा। सभी औपचारिकताओं के बारे में इन्हें कार्यालय स्टाफ ने बताया। यूसीसी कानून बनने के बाद होने वाली भीड़ की संभावना के चलते यह पहले ही अपना पंजीकरण कराने के लिए पहुंचे।

तलाक का नहीं है रजिस्ट्रेशन, ले रहे जानकारी- 

यूसीसी में लागू होने के बाद तलाक आदेशों का भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। लेकिन अभी तलाक के रजिस्ट्रेशन के लिए कोई नहीं पहुंच रहा है। इसके बारे में जानकारी अवश्य लोग कर रहे हैं।

विवाह पंजीकरण की प्रक्रिया में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। बढ़ती संख्या को देखते हुए व्यवस्था बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। आवेदकों को किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं हो, इसके लिए सभी सब रजिस्ट्रार को व्यवस्था बनाने के लिए कहा है। विवाह पंजीकरण के लिए अलग डेस्क बनाई जाएगी, ताकि आवेदक आसानी से कम समय में पंजीकरण करा सकें।-सोनिका, डीएम, देहरादून

Uttarakhand Education: उत्तराखंड में ऐसा विकास, पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10 हजार से अधिक पद खाली, शिक्षक नहीं चढ़ रहे पहाड़।

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उत्तराखंड  प्रदेश के भाग्य निर्माण की जिम्मेदारी सबसे अधिक इस प्रदेश की सरकार की होती है सरकार की नीति ही प्रदेश का भविष्य तय करती है लेकिन जब इस पहाडी प्रदेश की दो मूलभूत सुविधाएं ही यहां से गायब दिखाई दें तो फिर किस विकास की आशा हम रख सकते हैं. प्रदेश के पर्वतीय जिलों में स्थायी शिक्षकों के 10,946 पद खाली हैं। इसमें 6,632 पद माध्यमिक और 4,314 बेसिक शिक्षा के हैं। पारदर्शी तबादलों के लिए तबादला एक्ट बनने के बाद भी शिक्षकों के पहाड़ न चढ़ने और राज्य लोक सेवा एवं अधीनस्थ सेवा चयन आयोग से भर्ती में देरी इसकी वजह बताई जा रही है।

विधानसभा में प्रश्नकाल में विधायक संजय डोभाल के प्रदेश के पर्वतीय जिलों में शिक्षकों की कमी के सवाल पर शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने बताया, पर्वतीय जिलों में प्रवक्ताओं के 4,253 और सहायक अध्यापक एलटी के 2,379 पद खाली हैं। इन खाली पदों के विपरीत प्रवक्ता पद पर 2,594 और सहायक अध्यापक एलटी के पद पर 1,123 अतिथि शिक्षक कार्यरत हैं।

45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक ही नहीं- 


बेसिक शिक्षा में 516 प्राथमिक विद्यालयों और 45 उच्च प्राथमिक विद्यालयों में प्रधानाध्यापक नहीं हैं। प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 3,253 और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के 500 पद खाली हैं। शिक्षा मंत्री डाॅ. धन सिंह रावत ने कहा, जिलों में शिक्षकों की समय-समय पर सेवानिवृत्ति, पदोन्नति, तबादले आदि से शिक्षकों के खाली पदों की संख्या बदलती रहती है।

कहा, सभी खाली पदों पर शिक्षकों की उपलब्धता की आदर्श स्थिति कभी संभव नहीं है। खाली पदों को स्थानांतरण, समायोजन, पदोन्नति और सीधी भर्ती आदि के माध्यम से भरे जाने का यथासंभव लगातार प्रयास किया जाता रहा, ताकि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित न हो।

 

सीआरपी, बीआरपी भर्ती में एससी को मिलेगा 19 प्रतिशत आरक्षण-

विधानसभा में विधायक ममता राकेश की ओर से पूछे गए प्रश्न के जवाब में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा, सीआरपी, बीआरपी के पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से तैनाती की जाएगी। अनुसूचित जाति के लिए 19, अनुसूचित जनजाति के लिए चार और अन्य पिछड़ा वर्ग में 14 प्रतिशत के आरक्षण की व्यवस्था है। मंत्री ने यह भी बताया कि इन पदों को भरने के लिए आउटसोर्सिंग एजेंसी का चयन कौशल विकास एवं सेवायोजन विभाग के शासनादेश के अनुसार किया जाएगा।

डायटों के लिए अलग से होगी शिक्षकों की भर्ती-

प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की एक वजह राज्य के जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों में विद्यालयों से शिक्षकों को तैनात किया जाना है। शिक्षा मंत्री ने अमर उजाला से बातचीत में बताया, प्रदेश में जो डायट हैं, उनका अलग कैडर व नियमावली नहीं है। सरकार इसके लिए अलग कैडर व नियमावली बनाने जा रही है। वर्तमान में विद्यालयों से डायटों में शिक्षकों की तैनाती की जा रही, जिससे स्कूल खाली हो रहे हैं। इनके लिए कैडर व नियमावली बनने से इनमें अलग से नए शिक्षकों की भर्ती की जाएगी, जबकि इनमें तैनात शिक्षक मूल तैनाती पर जाएंगे।

 

Uttarakhand News: राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा जरूरी… सरकार ने दी चेतावनी।

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आयुष्मान कार्ड पर मुफ्त इलाज कराने से बच रहे निजी अस्पतालों को लेकर सरकार सख्त है। स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा। अस्पताल प्रबंधकों के साथ बैठक हो चुकी है। जल्द ही विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी किए जाएंगे।

कांग्रेस विधायक ममता राकेश के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि प्रदेश में चल रहे सभी छोटे-बड़े अस्पतालों को आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज सुविधा देनी होगी।

कई बड़े अस्पताल कार्ड धारकों को इलाज की सुविधा नहीं दे रहे हैं। इस पर सरकार ने साफ निर्देश दिए कि राज्य में अस्पताल चलाना है तो आयुष्मान में इलाज करना होगा।

 

 

अब तक 4.87 लाख कर्मचारियों के कार्ड बन चुके हैं। इसमें 1.15 लाख कर्मचारियों ने विभिन्न बीमारियों का कैशलेस इलाज कराया। इस पर 349 करोड़ राशि खर्च हुई है। कर्मचारियों को ओपीडी में कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं है। इसका कर्मचारियों को चिकित्सा प्रतिपूर्ति की जाती है। भर्ती होने पर असीमित व्यय पर कैशलेस इलाज किया जा रहा है।

Sandeshkhali Case: संदेशखाली केस का आरोपी शाहजहां शेख गिरफ्तार, जानिए कौन है ये TMC नेता शाहजहां शेख.

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लंबे समय से सुर्खियों में रहे तृणमूल कांग्रेस के नेता और संदेशखाली कांड का मुख्य आरोपी शाहजहां शेख गिरफ्तार हो गया है. शाहजहां की गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल के 24 उत्तर परगना जिले के मिनाखां से हुई है. शाहजहां शेख को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा. बता दें कि शाहजहां पर संदेशखाली में कई महिलाओं के साथ उत्पीड़न का आरोप है. साथ ही कई लोगों के जमीन पर कब्जा करने का भी आरोप है.

यह गिरफ्तारी पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले के बाद की गई है, जिसमें स्पष्ट किया गया था कि तृणमूल कांग्रेस नेता शाहजहां शेख की गिरफ्तारी पर कोई रोक नहीं है. विशेष रूप से, संदेशखाली में महिलाओं के खिलाफ यौन उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों को लेकर पिछले एक महीने से उबाल है.

जानिए कौन है शाहजहां शेख ?

शाहजहां शेख (42 वर्षीय) को ‘भाई’ के नाम से जाना जाता है। उसने बांग्लादेश सीमा के पास उत्तर 24 परगना के संदेशखाली ब्लॉक में मत्स्य पालन में एक छोटे से श्रमिक के रूप में काम की शुरुआत की थी। वह चार भाई-बहनों में सबसे बड़ा है। उसने संदेशखाली में मत्स्य पालन और ईंट भट्टों में एक श्रमिक के काम की शुरुआत की थी।

साल 2004 में शेख ने ईंट भट्टों के यूनियन नेता के रूप में राजनीति में प्रवेश किया। बाद में वह अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाए रखते हुए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की स्थानीय इकाई में शामिल हो गया। जोशीले भाषणों और संगठन कौशल के लिए पहचाने जाने वाले शेख ने 2012 में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व का ध्यान अपनी ओर खींचा।

तब से सत्ता के गलियों में शेख का कद बढ़ा है। 2018 में शेख ने सरबेरिया अग्रहटी ग्राम पंचायत के उप प्रमुख के रूप में प्रसिद्धि हासिल की। शेख को उत्तर 24 परगना के लिए ‘मत्सा कर्माध्यक्ष’ (मत्स्य पालन के प्रभारी) के रूप में जाना जाता था, जिले के मत्स्य विकास की देखरेख करता था। जो राजनीतिक और आर्थिक दोनों क्षेत्रों में उनकी प्रभावशाली स्थिति को दिखाता है।

गौरतलब है कि उत्तरी 24 परगना जिले में शाहजहां शेख और उनके समर्थकों के खिलाफ जमीन हड़पने और स्थानीय महिलाओं के यौन शोषण के आरोपों को लेकर विरोध प्रदर्शन चल रहा है. पिछले महीने कथित राशन घोटाले के सिलसिले में उसके घर पर छापा मारने गई प्रवर्तन निदेशालय की टीम पर भीड़ द्वारा हमला किए जाने के बाद से शाहजहां शेख फरार था.

 

Uttarakhand: गरीबों को साल में 3 गैस सिलेंडर मुफ्त, सस्ती दरों पर मिलेगा नमक, जानिए बजट में और क्या है खास.

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गरीबों को साल में तीन गैस सिलेंडर मुफ्त मिलते रहेंगे तो सस्ती दरों पर नमक भी मिलेगा। बजट में गरीबों के कल्याण से जुड़ी इन योजनाओं के लिए सरकार ने 5658 करोड़ का प्रावधान किया है। इसमें से समाज कल्याण के लिए 2756 करोड़, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 2184 करोड़ और जनजाति कल्याण के लिए 718 करोड़ का प्रावधान शामिल है।

समाज कल्याण के अंतर्गत आठ लाख वृद्धजन, निराश्रित विधवा, दिव्यांग, परित्यक्त निराश्रित महिलाओं आदि की विभिन्न पेंशन योजनाओं के लिए 1783 करोड़ 28 लाख, अन्नपूर्णा योजना के लिए 600 करोड़, ईडब्ल्यूएस आवासों के लिए 93 करोड़, 1,83,419 अंत्योदय कार्डधारकों को साल में तीन गैस सिलेंडर निशुल्क देने के लिए सरकार 55 करोड़ खर्च करेगी।

राज्य आंदोलनकारियों की पेंशन के लिए कार्पस फंड की स्थापना की गई है, जिसके लिए 48 करोड़ का प्रावधान किया गया है। खाद्य सुरक्षा योजना के तहत प्राथमिक व अंत्योदय राशन कार्ड धारकों को सस्ती दरों पर नमक उपलब्ध कराने के लिए सरकार 34 करोड़ 36 लाख खर्च करेगी। राज्य खाद्यान्न योजना के लिए 20 करोड़ का प्रावधान किया गया है।

स्मार्ट सिटी को 46 करोड़-

स्मार्ट सिटी योजना में 50 प्रतिशत बजट केंद्र और 50 प्रतिशत राज्य खर्च कर रहा है। सरकार ने बजट में स्मार्ट सिटी के लिए 46 करोड़ पांच लाख रुपये का प्रावधान किया है।

योजनाओं की सब्सिडी के लिए 679 करोड़-

सरकार ने विभिन्न विभागों की उन योजनाओं के लिए भी बजट प्रावधान किए हैं, जिन पर सब्सिडी दी जा रही है। सब्सिडी के इस खर्च पर सरकार ने 679 करोड़ 34 लाख का प्रावधान किया है।

 

संकट में हिमाचल की कांग्रेस सरकार, क्या महाराष्ट्र की तरह अब हिमाचल में भी गिरेगी सुक्खू सरकार !

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तीन राज्यों की 15 राज्यसभा सीटों के लिए मंगलवार को मतदान कराए गए जिसमें हिमाचल प्रदेश भी शामिल हैं। प्रदेश की एक सीट के लिए दो उम्मीदवार थे। इसके कारण यहां मतदान कराना पड़ा। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को उम्मीदवार बनाया तो भाजपा ने हर्ष महाजन को टिकट दिया। नामांकन के साथ ही राज्य में क्रॉस वोटिंग की आशंकाएं जाहिर की जाने लगी थीं जो सच हुईं। 

इस दौरान सत्ताधारी कांग्रेस के कम से कम कम छह विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की। दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले। इसके बाद फैसला पर्ची से हुआ। इसमें हर्ष महाजन जीत गए। तीन निर्दलीय विधायकों ने भी भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के इस्तीफे के मांग की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अल्पमत में है। ऐसे में अब राज्य में सियासी संकट खड़ा हो गया है। जून 2022 में महाराष्ट्र में भी ऐसे ही कुछ स्थितियां उत्पन्न हुई थीं जब एमएलसी चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास आघाडी सरकार गिर गई थी।

हिमाचल प्रदेश में कितनी सीट के लिए मतदान हुए और क्यों? 

दरअसल, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल खत्म हो रहा है। नड्डा इस बार गुजरात से निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। हिमाचल में इस वक्त कांग्रेस सत्ता में है। कांग्रेस ने अभिषेक मनु सिंघवी को अपना उम्मीदवार बनाया। सिंघवी के सामने भाजपा ने हर्ष महाजन को उतारा। हर्ष कांग्रेस से ही भाजपा में आए हैं। 68 सदस्यों वाली राज्य विधानसभा में कांग्रेस के 40 विधायक हैं। भाजपा के 25 विधायक हैं। वहीं, तीन निर्दलीय विधायकों का भी सरकार को समर्थन दे रखा है।राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार की जीत के लिए 35 वोट की जरूरत थी। संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के लिए यह लड़ाई बहुत आसान दिख रही थी। इसके बाद भी भाजपा ने यहां पास पलट दिया। मतदान के नतीजे आए तो दोनों उम्मीदवारों को 34-34 वोट मिले हैं। यानी कांग्रेस और निर्दलीय समेत कुल नौ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।

क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों का क्या होगा?

क्रॉस वोटिंग के दावे को लेकर राज्य में सियासी उठापटक शुरू हो चुकी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार के अल्पमत में होने का दावा करने वाली भाजपा क्या सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाएगी। दूसरी ओर नजर कांग्रेस पर भी होगी जिसने कहा है कि राज्यसभा चुनाव से पहले उसने व्हिप जारी किया था।हिमाचल सरकार का सियासी भविष्य क्या है? इस पर हमने लोकसभा के पूर्व महासचिव पीटीडी अचारी से बात की। अचारी ने कहा, ‘राज्यसभा चुनाव के लिए कोई व्हिप नहीं होती है। व्हिप से कोई फायदा नहीं होता। कांग्रेस के विधायकों ने भाजपा के लिए मतदान किया है तो यह मुसीबत है। यदि कांग्रेस के विधायक भाजपा की तरफ चले गए और उसके लिए मतदान किया है तो कांग्रेस का बहुमत कम हो रहा है। यदि ये विधायक भाजपा में शामिल होते हैं तो अयोग्य हो जाएंगे। ऐसे में अभी तो स्थिति अस्थिर है।’

 

क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायक अयोग्य हो सकते हैं?

अचारी ने कहा, ‘यदि नमूने के तौर पर दो-तीन विधायकों को अयोग्य करते हैं तो उसके लिए आधार अलग होता है। जैसे कि विधायक ने अपनी इच्छा से पार्टी छोड़ दी है। इस आधार पर विधायकों को अयोग्य घोषित किया जा सकता है। दूसरी स्थिति में यदि सभी विधायकों के खिलाफ याचिका दाखिल करें तो ऐसा होगा कि कांग्रेस खुद कह रही है कि उसका बहुमत नहीं है। ऐसा कोई भी दल नहीं करेगा। लेकिन अभी मुसीबत है। उप-चुनाव बाद की बात है।’

 

 क्या हिमाचल में सरकार गिर सकती है?

2022 में हुए एमएलसी चुनाव के दौरान कुछ इसी तरह की स्थिति महाराष्ट्र में बनी थी। दरअसल, जून 2022 में महाराष्ट्र में एमएलसी की 10 सीटों पर चुनाव हुए। इसके लिए 11 उम्मीदवार मैदान में थे। महाराष्ट्र विकास अघाड़ी (एमवीए) यानी शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी के गठबंधन ने छह उम्मीदवार उतारे थे तो भाजपा ने पांच। खास बात ये है कि शिवसेना गठबंधन के पास सभी छह उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त संख्या बल था, लेकिन वह एक सीट हार गई। इन पांच में कांग्रेस को केवल एक सीट मिली और एनसीपी-शिवसेना के खाते में दो-दो सीटें आईं।वहीं, भाजपा के पास केवल चार सीटें जीतने भर की संख्या बल थी, लेकिन पांचवीं सीट भी निकालने में पार्टी सफल रही। एमएलसी चुनाव में बड़े पैमाने पर क्रॉस वोटिंग हुई है। इसके बाद महाराष्ट्र के कैबिनेट मंत्री एकनाथ शिंदे के साथ कई विधायक पहले गुजरात फिर असम चले गए। कई दिन चले सियासी ड्रामे के बाद उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। बागी विधायकों के नेता एकनाथ शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बन गए। अब यह देखना होगा कि हिमाचल के बागी विधायक क्या करते हैं।

 

Uttarakhand: अब जेल में मृतक बंदियों के आश्रितों को मिलेगा मुआवजा, 1 करोड़ रुपये का बजट हुआ मंजूर। 

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जेल में बंदियों की मौत के बाद उनके आश्रितों को अब मुआवजा दिया जाएगा। इसके लिए बजट में नए मद के तहत एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रदेश में यह व्यवस्था पहली बार की गई है। पिछले दिनों इस संबंध में नीति बनाई गई थी। मृतक बंदियों के आश्रितों को नियमानुसार श्रेणीवार मुआवजे की धनराशि दी जाएगी।

बता दें कि जेल में तमाम कारणों से हर साल बंदियों की मौत हो जाती है। इसमें कुछ आपराधिक घटनाओं के कारण और कुछ सामान्य व बीमारियों के कारण होने वाली मौतें शामिल हैं। लेकिन, अभी तक प्रदेश में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी कि इन बंदियों के आश्रितों को किसी प्रकार का मुआवजा दिया जाए। मसलन, यदि जेल में बंद कैदी घर में अकेला कमाने वाला था और उसकी जेल में मौत हो जाती है तो उसके आश्रितों के प्रतिपूर्ति की व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में पिछले दिनों सरकार ने इसके लिए नई नीति बनाई थी।

अब बजट में नई मदों में इस मद को भी शामिल किया गया है। जेलों में इस प्रकार की मौत होने पर उनके आश्रितों को मुआवजे के लिए एक करोड़ रुपये का बजट दिया गया है। इस बजट को कैदी की श्रेणी के आधार पर नियमानुसार दिया जाएगा। यानी विचाराधीन कैदी, सजायाफ्ता कैदी, आपराधिक मौत, सामान्य मौत, बीमारी के कारण हुई मौत आदि को अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा। इसके आधार पर ही उन्हें एक लाख रुपये से लेकर पांच या उससे अधिक दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले मौत किस कारण से और किन परिस्थितियों में हुई इस बात की जांच की जाएगी।

Leopard Terror: देहरादून के किमाड़ी क्षेत्र में बच्चे को मारने वाला गुलदार आदमखोर घोषित, तुरंत गोली मारने के दिए आदेश। 

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किमाड़ी क्षेत्र में बच्चे को मारने वाले गुलदार को आदमखोर घोषित कर करते हुए गोली मारने के आदेश दिए गए हैं। घटना के अगले दिन सोमवार को मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा की ओर से आदेश जारी किए गए हैं। इसके साथ ही क्षेत्र में गुलदार को पकड़ने के लिए आठ पिंजरे और 12 कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। गुलदार दिखने पर पहले उसे ट्रेंकुलाइज किया जाएगा और फिर आवश्यकता पड़ने पर गोली मार दी जाएगी।

बता दें कि रविवार शाम करीब आठ बजे गलज्वाड़ी वन बीट से सटी मराड़ी गुर्जर बस्ती में गुलदार ने मीर हमजा के 10 वर्षीय बेटा डेरे से बाहर लघुशंका करने के लिए गया था। इस दौरान झाड़ियों में घात लगाकर बैठे गुलदार ने उस पर हमला कर दिया। चीखने पर बच्चे के पिता मीर हमजा अन्य ग्रामीण बाहर आए और गुलदार के जबड़े से बच्चे को छुड़ाने का प्रयास किया। भीड़ के पहुंचने पर गुलदार बच्चे को छोड़कर जंगल की ओर भाग गया। बुरी तरह घायल बच्चे को जब तक अस्पताल ले जाया जाता उसने दम तोड़ दिया। सूचना मिलने पर वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची, जिन्हें स्थानीय निवासियों के विरोध का सामना करना पड़ा।

 

स्थानीय निवासियों ने वन विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। साथ ही पुलिस को शव ले जाने से भी रोका। हालांकि, बाद में पुलिस ने बस्तीवासियों को शांत कराया और शव को पोस्टमार्टम के लिए ले जाया गया। इधर, वन विभाग और पुलिस की टीम भी देर रात तक क्षेत्र के आसपास कांबिंग की। प्रभागीय वनाधिकारी देहरादून नितीशमणि त्रिपाठी ने बताया कि सोमवार को भी क्षेत्र में सुबह से ही गश्त की जा रही है। तीन शिफ्ट में वन विभाग की तीन टीमें गुलदार की तलाश में जुटी हैं। इसके बाद मुख्य वन्य जीव प्रतिपालक समीर सिन्हा ने गुलदार को आदमखोर घोषित करते हुए गोली मारने के आदेश दिए हैं।

मलेथा में गुलदार को मारने के मामले की जांच के आदेश-

टिहरी जिले के कीर्ति नगर ब्लॉक के मलेथा गांव में गुलदार को मारने के मामले में प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव डा. समीर सिन्हा ने चीफ गढ़वाल को जांच के आदेश दिए हैं। कहा, गुलदार ने किन परिस्थितियों में ग्रामीणों पर हमला किया। इन सभी पहलुओं की जांच की जाए।

वन विभाग की टीम ने 23 फरवरी को गुलदार को मार गिराया था। वन विभाग की ओर से बताया गया कि यह गुलदार दो दिन में नौ लोगों पर हमला कर चुका था। इनमें पांच महिलाएं और चार वनकर्मी शामिल थे। वन विभाग की ओर से कहा गया कि गुलदार को आत्मरक्षा में मारा गया, जबकि सोशल मीडिया में गुलदार को मारने का जो वीडियो वायरल हो रहा, उसमें आत्म रक्षा वाली बात सामने नहीं आ रही है।

ऐसे में कुछ लोगों का कहना है कि गुलदार को मारने के बजाए उसे ट्रेंकुलाइज किया जा सकता था। उधर, विधायक विनोद कंडारी का कहना है कि गुलदार को जनहित में मारा गया। गुलदार क्षेत्र में कई लोगों को घायल कर चुका था।

 

 

Uttarakhand Weather: पहाड़ी इलाकों में आज भी बिगड़ा रहेगा मौसम का हाल, पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी के आसार.

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उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज मंगलवार को भी हल्की बारिश के साथ बर्फबारी होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में बिजली चमकने और गर्जन के साथ बारिश होने के आसार हैं।

जबकि, इन जिलों के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय जिलों में मौसम बदलने के असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा।

देहरादून में 27 फरवरी को आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

पहाड़ की ठण्ड से कांपते उत्तराखंड के ये 36 विधायक, जानिये क्यों नहीं हुआ गैरसैण में विधानसभा का शीतकालीन सत्र।

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उत्तराखंड की राजनीति में गैरसैंण हमेशा एक बड़ा मुद्दा रहा है बावजूद इसके लिए धामी सरकार ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण को लेकर काफी उदासीन दिखाई दे रही है ये बात ऐसे ही नहीं कही जा रही बल्कि इसके पीछे की बड़ी वजह भी है. जिन पहाड़ों की जनता वहां के विधायकों को जीताकर सदन भेजती है वही  विधायक चुनाव जीतने के बाद देहरादून छोड़कर पहाड़ नहीं चढ़ना चाहते। क्योंकि उनको वहां ठंड लगती है.

उत्तराखंड सरकार का बजट सत्र देहरादून में शुरू हो चुका है. बजट सत्र शुरू होने से पहले  इसके लिए सरकार ने विधायकों से राय मांगी थी कि बजट सत्र गैरसैंण में होना चाहिए या फिर देहरादून में इसी विषय को लेकर लगभग 36 विधायकों ने एक पत्र सरकार को सौंपा है विधायकों ने सत्र देहरादून में कराए जाने की बात कही. विधायकों का तर्क था कि गैरसैंण में काफी सर्दी है ऐसे में वहां सत्र करने में काफी मुश्किल होगी इसके बाद सरकार ने अपनी कैबिनेट में यह फैसला लिया कि सत्र इस बार देहरादून में होगा।

क्या कहा हरीश रावत ने- 

वहीं सत्र देहरादून में कराए जाने को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत का कहना है कि ऐसे विधायकों को हिमालय राज्यों से चले जाना चाहिए जिन्हें यहां पर ठंड लगती है खास बात यह है कि चिट्ठी लिखने वाले विधायकों में छह विधायक कांग्रेस के भी शामिल है तो वहीं एक बसपा और दो निर्दलीय विधायक भी शामिल है, इन विधायकों के पत्र के आधार पर ही सत्र देहरादून में कराया जा रहा है वरना ये सत्र इस बार उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में होना था इसको लेकर पूर्व सीएम और कांग्रेस के नेता हरीश रावत ने साफ कहा है कि विधायकों की चिट्ठी  से क्या लेना देना सरकार को खुद फैसला करना चाहिए और सत्र गैरसैंण में करना चाहिए ये सरकार की विफलता है।

गांधी पार्क में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक घंटे का सांकेतिक मौन व्रत रखा- 
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ गांधी पार्क में एक घंटे का सांकेतिक मौन व्रत रखा. मौन व्रत के समापन पर उपस्थित सभी कार्यकर्ताओं ने रघुपति राघव राजा राम भजन गाकर धामी सरकार की सद्बुद्धि के लिए प्रार्थना की उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्य की अवधारणा के साथ बने राज्य की सरकार को गैरसैंण में ठंड लग रही है.
रावत ने कहा कि यह उत्तराखंड का दुर्भाग्य ही है की यहां के जनप्रतिनिधियों को कुछ ज्यादा ही ठंड लगती है उन्होंने बजट सत्र की अवधि को लेकर भी सवाल उठाए और कहा की प्रचंड बहुमत और डबल इंजन के 7 साल बाद भी प्रदेश सरकार यदि गैरसैंण में कर्मचारियों, पुलिस कर्मियों एवं पत्रकारों के लिए मूलभूत व्यवस्थाएं तक जुटा पाने में समर्थ नहीं रही तो दोष किसको दिया जाए. आम आदमी पार्टी के नेता ने भी अर्धनग्न होकर सरकार के इस फैसले के खिलाफ देहरादून विधानसभा के बाहर प्रदर्शन किया। और कहा कि पहाड़ियों को ठंड नहीं लगती मगर उत्तराखंड के विधायकों ने गैरसैण को लगभग पूरी तरह से गैर बना दिया है।
गैरसैंण में विधानसभा भवन बनाने के लिए करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया गया है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर वहां सब कुछ जीरो है यही कारण है कि सत्र के अलावा कोई विधायक या मंत्री गैरसैंण की तरफ जाने को भी तैयार नहीं होता है गैरसैंण को लेकर वैसे तो सत्ताधारी दल कई दावे करता रहता है, लेकिन सत्र कराने तक में परहेज करने वाली सरकार से इसको लेकर बहुत उम्मीद करना बेमानी है ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित होने के बावजूद गैरसैंण से भराड़ीसैंण तक सिर्फ ठंड के सिवाय कोई सरगर्मी नहीं है सैकड़ों करोड़ के भव्य विधानमंडल भवन और आलीशान आवासीय परिसरों के निर्माण से आगे वहां सब कुछ ठहर सा गया है। 12 महीनों में सिर्फ चंद दिनों के लिए गर्मियों की यह राजधानी तभी गुलजार दिखती है जब सरकार यहां सत्र कराने पहुंचती है। सरकार के जाते ही फिर लंबा सन्नाटा पसर जाता है,,ऐसा लगता है मानो उत्तराखंड के माननीय विधायक यहां सिर्फ गर्मियों की छुटियाँ बिताने जाते हैं।
भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र का आयोजन होते कई वर्ष हो चुके हैं, लेकिन सरकारें वहां कभी व्यवस्थाएं नहीं बना पाईं। इन्हीं बदइंतजामी के बहाने अब विधायकों से लेकर अफसर तक वहां जाने से परहेज कर रहे हैं सिर्फ चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियां गैरसैंण को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती रही हैं 2020 में त्रिवेंद्र सरकार ने गैरसैंण को प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया. राजधानी बने हुए तीन वर्ष का वक्त हो गया लेकिन इन तीन सालों में गैरसैंण में विकास के नाम पर कितने बदलाव हुए यह सवाल आज भी बना है, लेकिन जब हमारे माननीयों को ही गैरसैण में ठंड लग रही हो तो इसके विकास की उम्मीद भी करना बेमानी है।