Category Archive : देहरादून

2027 चुनाव- कांग्रेस की टीम से भाजपा में हलचल,गणेश-हरक-प्रीतम की त्रिवेणी ने बढ़ाया राजनीतिक तापमान

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काफी सोच विचार के बाद कांग्रेस ने  भाजपा के आकाश में  अपने फाइटर  उतार दिए। बीते तीन साल से आधी अधूरी धामी सरकार पर कांग्रेस के नए लेकिन अनुभवी फाइटर बमबारी के लिए पूरी तरह तैयार है। टीम कांग्रेस की तैयार हुई और भाजपा चुनौती कई गुना बढ़ गयी।

मंगलवार की देर रात कांग्रेस आलाकमान ने लोकसभा चुनाव में हार के बावजूद भाजपा की छांछ छोल (परेशान व बेचैन कर देना) चुके गणेश गोदियाल को एक बार फिर संगठन की बागडोर सौंपी है।

मौजूदा अध्यक्ष करण माहरा को हटाते हुए गोदियाल को आगे लाकर कांग्रेस ने अपने इरादे जता दिए। हालांकि, 2022 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद इसी आलाकमान ने गोदियाल को संगठन अध्यक्ष पद से हटा दिए थे । लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में गोदियाल ने जबर्दस्त ढंग से चुनाव लड़ते हुए भाजपा को अतिरिक्त मेहनत के लिए मजबूर कर दिया था।

गोदियाल के कड़े चुनावी सँघर्ष को  कांग्रेस आलाकमान ने भी सराहा था। बहरहाल, 11 नवंबर को कांग्रेस ने गणेश गोदियाल, प्रीतम सिंह रावत व हरक सिंह रावत को चुनाव की बागडोर देकर भाजपा के रणनीतिकारों को भी नये सिरे से सोचने पर मजबूर कर दिया।

Ganesh Godiyal (@UKGaneshGodiyal) / Posts / X

बीते कुछ समय से राजनीतिक जिम्मेदारी से मुक्त चल रहे हरक सिंह रावत को चुनाव प्रबंधन कमेटी का अध्यक्ष बनाकर चुनावी माहौल बनाने की कोशिश की है। 2022 में चुनाव नहीं लड़ने वाले हरक सिंह इन दिनों सीबीआई व ईडी का सामना भी कर रहे हैं।

बावजूद इसके हरक सिंह भाजपा पर कड़े प्रहार करने से नहीं चूक रहे हैं।  चुनावी माहौल बनाने में हरक सिंह की विशिष्ट शैली पार्टी के बहुत काम आएगी। हालांकि, अब केंद्रीय जांच एजेंसी हरक सिंह पर ज्यादा कड़ा शिकंजा कस सकती है।

कांग्रेस आलाकमान ने चकराता से पार्टी विधायक प्रीतम सिंह को 2027 के लिए चुनाव प्रचार कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। प्रीतम सिंह का विधानसभा के अंदर और बाहर आक्रामक प्रदर्शन रहता है। बीते दिनों प्रीतम सिंह ने देहरादून की जिला पंचायत अध्यक्ष सीट जीतकर भाजपा को करारी हार दी थी।

कांग्रेस ने गढ़वाल से गोदियाल, हरक व प्रीतम का चयन कर चुनावी जंग का ऐलान कर दिया है। साथ ही संगठन के जिलों में भी अध्यक्षों की नियुक्ति कर मुकम्मल टीम मैदान में उतार दी है।

जमीन पर भाजपा से भिड़ने की जिम्मेदारी गढ़वाल के कंधों पर है तो विधानसभा में मोर्चा संभालने का अहम कार्य नेता विपक्ष यशपाल आर्य और उपनेता भुवन कापड़ी सम्भाल रहे हैं।

कांग्रेस की नई टीम के गठन में पूर्व सीएम हरीश रावत के बीते दिनों खेले गए ब्राह्मण कार्ड की भी अहम भूमिका मानी जा रही है। जिलाध्यक्षों में भी इसकी झलक मिल रही है। हालांकि, करण माहरा के करीबी हरक सिंह को चुनाव प्रबन्धन की जिम्मेदारी देते हुए पार्टी के अंदर संतुलन बनाने की भी कोशिश की गई है। अब हरक की नई भूमिका को हरीश रावत कैम्प किस हिसाब से लेता है, यह देखना भी दिलचस्प रहेगा।

कांग्रेस हाईकमान ने सक्रिय हरदा को सीधे तौर पर कोई चुनावी जिम्मेदारी तो नहीं दी है लेकिन नयी टीम में उनके पसन्दीदा गोदियाल और प्रीतम सिंह को भारी भरकम जिम्मेदारी अवश्य दी।

कांग्रेस की नई टीम का ऐलान होते ही पार्टी के अंदर करंट दौड़ता दिखाई दे रहा है। उधर, टूटी फूटी कैबिनेट लिए सीएम धामी और भाजपा आलाकमान को कांग्रेस के इन नए फाइटर्स के हमलों को नाकाम करने के लिए भगीरथ प्रयास करने होंगे । चुनावी जंग रोचक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। आने वाले कल में राजनीतिक उठापटक का दौर चलने की पूरी उम्मीद है।

 

प्रदेश में हड़ताल पर गए 22 हजार उपनल कर्मचारी

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लंबित मांगों पर अमल न होने से नाराज प्रदेश के उपनल कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों ने परेड ग्राउंड में धरना दिया। वहीं, कर्मचारियों की शासन में हुई वार्ता भी बेनतीजा रही। कर्मचारियों का कहना है, जब तक मांगों पर अमल नहीं होगा आंदोलन जारी रहेगा।

उपनल कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के प्रदेश संयोजक विनोद गोदियाल ने कहा, प्रदेश में कर्मचारी हितों की अनदेखी की जा रही है। हाईकोर्ट के वर्ष 2018 के आदेश के बाद भी कर्मचारियों को न तो नियमित किया गया न ही उन्हें समान कार्य के लिए समान वेतन दिया जा रहा है। उपनल के माध्यम से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों की सेवाएं भी प्रभावित की गईं। इससे नाराज कर्मचारियों ने आवश्यक सेवाएं भी ठप कर दी। महासंघ के महामंत्री विनय प्रसाद के मुताबिक कर्मचारियों को गृह सचिव शैलेश बगौली ने वार्ता के लिए बुलाया था। वार्ता के दौरान आश्वासन दिया गया कि कर्मचारियों को समान काम के लिए समान वेतन का जल्द आदेश जारी किया जाएगा।

वहीं, कर्मचारियों के नियमितीकरण के मामले में भी शीघ्र कार्रवाई होगी, लेकिन कर्मचारियों का स्पष्ट कहना है कि बिना लिखित आश्वासन व आदेश के कर्मचारी आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगे। परेड ग्राउंड में धरना देने वालों में महासंघ के प्रदेश संयोजक हरीश कोठारी, कार्यकारी अध्यक्ष महेश भट्ट, संगठन मंत्री भूपेश नेगी, महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष मीना रौठाण आदि शामिल रहे।

Uttarakhand 22,000 UPNL employees went on strike in state essential services were also disrupted

देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे कर्मचारी
प्रदेशभर से देहरादून पहुंचे उपनल कर्मचारी देर रात भी परेड ग्राउंड में धरने पर रहे। कर्मचारियों का कहना है कि शासन ने आज भी वार्ता के लिए बुलाया है।

राज्य के 25 साल – विकास की रफ्तार या व्यवस्था की विकृति

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लेखक-  स्वतंत्र पत्रकार हरीश खखरियाल की कलम से….. 

“9 नवम्बर  2000…जब उत्तराखंड ने अलग राज्य बनने का सपना देखा था,तो उस सपने में शामिल  था – विकास, पारदर्शिता, रोजगार और ईमानदारी। आज, जब राज्य अपनी रजत जयंती मना रहा है,सवाल  उठता है —इन 25 सालों में उत्तराखंड ने क्या पाया, और क्या खो दिया ?”
सपना और सच्चाई का अंतर

“राज्य आंदोलन के दौरान नारा था —‘अपना राज, अपने लोग, अपनी पहचान।उम्मीद थी कि  शासन गावों तक पहुंचेगा और भ्रष्टाचार से मुक्त व्यवस्था  बनेगी, लेकिन  दो दशक बाद हकीकत कुछ  और ही बयान कर रही है।बेरोज़गारी, पलायन और भ्रष्टाचार की जडें अब हर विभाग में फैल चुकी हैं।
Claim Thousands of unemployed will be seen on the streets today, walking march up to 7 km | “बेरोजगार युवा बोले - GO बेरोजगारी GO”: सड़क पर उतरे सैकड़ों बेरोजगार, 7 Km

Uttarakhand News: 22 वर्ष के उत्तराखंड में पलायन ऐसा विषय, जिसका अभी तक नहीं हो पाया है समाधान - uttarakhand foundation day migration problem not solved in 22 years at uttarakhand

बढ़ता भ्रष्टाचार – सिस्टम में सडांध
 
राज्य गठन के साथ उम्मीद थी कि ‘छोटा राज्य, पारदर्शी शासन’ का सपना साकार होगा,मगर 25 साल बाद भ्रष्टाचार की जडें इतनी गहरी हैं कि  अब न्यायालयों को बार-बार दखल देना पड रहा है।​
Uttarakhand High Court Recruitment 2025 (eCourts.gov.in) New Notification
 
 विभागीय भ्रष्टाचार हो या भर्तियों  में धांधली —हाईकोर्ट  तक को कई बार CBI जााँच के आदेश देने पडे। बागवानी विभाग को किसानों  की आत्मा कहा जाता है,वहां तक भ्र्ष्टाचार की गंध पहुंच चुकी है,किसानों  के लिए  बनी योजनाएं , सब्सिडी  और ग्रांट्स फाइलों में अटककर अफसरशाही की भेंट चढ़ गईं।हालात इतने बिगड़े कि हाईकोर्ट को खुद  बागवानी  विभाग के भ्रष्टाचार की जााँच CBI से कराने के आदेश देने पडे।
CBI to question bank officials under scanner in 8.5 lakh mule accounts case - The Economic Times
और यह कहानी सिर्फ  एक विभाग की नहीं —सडक निर्माण  से लेकर खनन, शिक्षा और भर्ती परीक्षाओं तक,हर जगह ‘सिस्टम सवालों  के घेरे में है।

पेपर लीक और बेरोज़गारों की हताशा

पेपर लीक कांड ने युवाओं के भरोसे को तोड़ दिया  है। जिस युवा शक्ति को राज्य की रीड बनना था,,वही  आज  आज सडकों पर है,अपने हक़ और मेहनत की कीमत मांगते  हुए हर कुछ  महीनों में भर्ती  परीक्षाओं की जााँच, रद्दीकरण,और आंदोलनों की आवाज बनकर  सुनाई  देती है।
उत्तराखंड बेरोजगार संघ ने 10 फरवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया है – दिप्रिंट – एएनआईफ़ीड
पलायन रुकने के बजाय और बढ़ा है —आज पहाडों से हर रोज़ सैकडों युवा  रोज़गार की तलाश में मैदान की ओर उतर रहे हैं।​
अपराध और असुरक्षा – बदलता उत्तराखंड

कभी शांत प्रदेश कहा जाने वाला  उत्तराखंड अब अपराध की खबरों से भी अछूता नहीं रहा। हत्या, लूट और दुष्कर्म जैसी वारदातें अब यहां की सुर्ख़ियों में शामिल हैं,सवाल  उठता है — क्या हम वाकई  उस उत्तराखंड में हैं,जिसका  सपना 2000 में देखा गया था?”
 

विकास की रफ्तार – उप्लभ्धियाँ भी कम नहीं 

इन सबके बीच, उत्तराखंड ने विकास की राह पर भी कई कदम बढ़ाए हैं। चारधाम यात्रा के तलए ऑल वेदर  रोड प्रोजेक्ट,हवाई सेवाओं  का विस्तार,और शिक्षा स्वास्थ्य  के नए संस्थान — ये उप्लभ्धियाँ राज्य की प्रगति की तस्वीर दिखाती  हैं। पर्यटन , योग, और जैविक खेती के क्षेत्र में भी उत्तराखंड ने नई पहचान बनाई है। आज राज्य का GDP 3 लाख करोड के करीब पहुंच  रहा है,और प्रति व्यक्ति  आय में भी बढ़ोतरी हुई है।लेकिन सवाल वही  —क्या विकास का लाभ हर पहाडी गावं तक पहुंचा ?जनता का सवाल – जवाबदेहि कहां है?

जब हर कुछ  सालों में एक नया घोटाला सामने आता है,जब हर भर्ती  पर संदेह हो,जब युवाओं  की आाँखों में विश्वास की जगह निराशा  हो —तब रजत जयंती के जश्न पर ताली बजाना मुश्किल  हो जाता है। सवाल है  — क्या ये 25 साल जनता के लिए बदलाव  लाए या सिर्फ कुर्सियों के लिए ?

निष्कर्ष  – उम्मीद अब भी बाकी है

उत्तराखंड की कहानी संघर्ष से शुरू हुई थी,और उम्मीदों पर अटकी हुई है।ये राज्य युवाओं  की मेहनत और पहाडों की ईमानदारी से बना है।अगर राराजनीतिक इइच्छाशक्ति  ईमानदार हो,तो अगला अध्याय भरोसे और पारदर्शिता  का लिखा  जा सकता है। राज्य का सवाल अब भी वही  है —‘क्या खोया, क्या पाया?’ जवाब आने वाले सालों में तय करेगा कि पहाड़ों का सपना अधूरा रहेगा या पूरा होगा।”
“25 साल बाद भी सवाल वही  — भ्रष्टाचार बनाम विकास | उत्तराखंड @ 25”
 
ये लेखक के अपने स्वतंत्र विचार हैं… 

Dehradun: उत्तराखंड विधानसभा में राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन की बड़ी बातें.

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 उत्तराखंड के तीन दिवसीय दौरे के दूसरे दिन यानी आज राष्ट्रपति द्राैपदी मुर्मू ने राज्य विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया। सुबह 11 बजे राष्ट्रपति विधानसभा कक्ष में पहुंचीं। विधानसभा अध्यक्ष ने राष्ट्रपति के आगमन पर स्वागत अभिवादन किया। उन्होंने कहा कि ये उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है। मंच पर सीएम धामी भी मौजूद रहे।

राष्ट्रपति मुर्मू ने महिलाओं, राज्य आंदोलनकारियों व प्रदेश भर के लोगों का आभार जताया। कहा कि आपके आगमन से नई ऊर्जा मिली। अब तक 500 विधेयक पास हुए। महत्वपूर्ण अवसर पर दलगत राजनीति से ऊपर उठकर संसदीय लोकतंत्र की स्थापाना की। उन्होंने यूसीसी की सराहना की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यब राज्य के लिए गौरवशाली समय है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का सम्पूर्ण जीवन संकल्प व संघर्षरत रहा है। निजी जीवन में लगातार संघर्ष किया है।

नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने विशेष सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि मेरा सौभाग्य है कि यहां राष्ट्रपति का सम्बोधन हुआ।उत्तराखंड भौगोलिक परिस्थितियों के चलते विभिन्न है हमारे पड़ोसी चीन व नेपाल है। गंगा व जमुना हमारी सभ्यता से जुड़ी हैं।

नेता प्रतिपक्ष नेता ने प्राकृतिक आपदा को सामने रखते हुए कहा कि हमें इन आपदाओं से निपटने के समुचित प्रबंध करना होगा। उन्होंने उत्तराखंड के जल,जंगल व जमीन को बचाने के उपाय सुझाए। उन्होंने प्लेन्स रोजगार, स्वास्थ्य व शिक्षा का विस्तार व सुदृढ़ करने पर बल दिया।

 

उत्तराखण्ड में लागू होगा “ग्रीन सेस” CM धामी ने दे दिए निर्देश; रेवेन्यू में आएगा उछाल.

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राज्य सरकार को करोड़ों का ग्रीन सेस मिलने की उम्मीद

 

Dehradun- उत्तराखण्ड राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर राज्य सरकार ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए “ग्रीन सेस” लागू करने की घोषणा की है।
यह सेस अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों पर वसूला जाएगा, जिससे प्राप्त धनराशि वायु प्रदूषण नियंत्रण, हरित अवसंरचना और स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन पर खर्च की जाएगी।
ग्रीन सेस फ़ास्ट टैग से कटेगा। राज्य सरकार को 100 करोड़ की आमदनी होने की उम्मीद है।

 

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि “उत्तराखण्ड के 25 वर्ष पूरे होने पर यह हमारी प्रतिबद्धता है कि हम राज्य को स्वच्छ, हरित और प्रदूषण-मुक्त बनाएँ। ‘ग्रीन सेस’ से प्राप्त राजस्व का उपयोग वायु गुणवत्ता सुधार, हरित अवसंरचना और स्मार्ट यातायात प्रबंधन में किया जाएगा।”

 

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UKPCB) के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. पराग मधुकर धकाते ने बताया कि बोर्ड के अध्ययन के अनुसार देहरादून में वायु प्रदूषण का सबसे बड़ा स्रोत सड़क की धूल (55%) है, जबकि वाहन उत्सर्जन (7%) भी एक प्रमुख कारण है।
ग्रीन सेस के माध्यम से सड़क धूल नियंत्रण और स्वच्छ वाहन नीति अपनाना शहर की वायु गुणवत्ता सुधारने का सबसे प्रभावी कदम होगा।

 

भारत सरकार के “स्वच्छ वायु सर्वेक्षण –

2024” में उत्तराखण्ड के शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया है — ऋषिकेश को 14वाँ और देहरादून को 19वाँ स्थान प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार इस उपलब्धि को और सुदृढ़ करने के लिए ग्रीन सेस से मिलने वाली आय का उपयोग करेगी।

मुख्य उद्देश्य
• वायु प्रदूषण में कमी और एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) में सुधार
• पुराने प्रदूषणकारी वाहनों पर नियंत्रण
• स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को प्रोत्साहन
• सड़क धूल, वृक्षारोपण और वायु निगरानी नेटवर्क में सुधार

 

मुख्य विशेषताएँ

•   बाहरी राज्यों से आने वाले वाहनों से “ग्रीन सेस” वसूला जाएगा
•   इलेक्ट्रिक, हाइड्रोजन, सोलर और बैटरी वाहनों को छूट दी जाएगी
•   इससे राज्य को लगभग ₹100 करोड़ प्रतिवर्ष की आय होने का अनुमान
•   यह राशि वायु निगरानी, रोड डस्ट नियंत्रण, हरित क्षेत्र विस्तार और स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम पर व्यय होगी

राज्य सरकार ने कहा कि यह पहल उत्तराखण्ड को “स्वच्छ वायु – स्वस्थ जीवन” की दिशा में एक नई पहचान देगी।

Uttarakhand: प्रदेश में होगा सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन, CM धामी बोले-नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, प्रदेश के सीमांत क्षेत्रों में सुविधाओं व सेवाओं के लिए विस्तार के लिए सीमांत क्षेत्र विकास परिषद का गठन किया जाएगा। इसके अलावा सीमांत जिलों में आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य व शिक्षा क्षेत्र में प्रशिक्षण के लिए नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे।

बुधवार को रुद्रप्रयाग जिले के गुप्तकाशी में उत्तराखंड राज्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की ओर से चतुर्थ सीमांत पर्वतीय जनपद बाल विज्ञान महोत्सव के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री ने यह घोषणा की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की सीमांत क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं व सेवाएं देना प्राथमिकता है।

पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि-
इसके लिए जल्द ही प्रदेश में सीमांत विकास परिषद का गठन किया जाएगा। जो सीमांत क्षेत्रों के विकास व सेवाओं में सुधार के लिए काम करेगा। प्रदेश के सीमांत जिलों में नवाचार केंद्र बनाए जाएंगे। जहां पर आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य व शिक्षा से संबंधित जानकारी हासिल करने व प्रशिक्षण की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभिन्न जनपदों से आए बाल वैज्ञानिकों के साथ जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक जल संसाधन एवं संरक्षण, आपदा प्रबंधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा ऊर्जा संरक्षण आदि विषयों पर चर्चा की। कहा, इस महोत्सव से सीमांत जनपदों के प्रतिभावान बाल वैज्ञानिकों को नई दिशा और अवसर प्राप्त होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज भारत नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू रहा है। नए भारत की गति और दिशा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के नवाचारों पर निर्भर करेगी। विज्ञान की नई तकनीकों के बल पर आज भारत अंतरिक्ष समेत विभिन्न क्षेत्रों में अपना परचम लहरा रहा है। देहरादून में देश की पांचवीं साइंस सिटी बनाई जा रही है, जो पर्वतीय राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

Uttarakhand: राज्य की डेमोग्राफी बचाने पर CM धामी का जोर, अधिकारियों को चेतावनी; दिए ये निर्देश.

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य की डेमोग्राफी और सांस्कृतिक मूल्यों को किसी भी कीमत पर खराब नहीं होने दिया जाएगा। यहां का मूल बचा रहना चाहिए। डेमोग्राफी चेंज मामले में पहले ही राज्य के सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। जिन अफसरों के कालखंड में डेमोग्राफी चेंज जैसी गतिविधियां हुई हैं। राशन कार्ड बने हों, आधार कार्ड बने हों या फिर बिजली का कनेक्शन दे दिया गया हो वे भी इसके लिए जिम्मेदार होंगे।

मुख्यमंत्री धामी ने पत्रकारों से संक्षिप्त वार्ता की। कहा कि पहले के समय में राज्य की डेमोग्राफी में अंतर हुआ है। काफी चीजें ऐसी हुई हैं जिसमें पहले ध्यान नहीं दिया गया।

 

अब ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। सीएम ने किच्छा के खुरपिया में औद्योगिक फार्म की स्थापना का काम तेजी से करने और वहां 1000 करोड़ की लागत से आधारभूत सुविधाएं जुटाने की बात कही है। दावा किया कि औद्योगिक फार्म की स्थापना प्रदेश में रोजगार सृजन के क्षेत्र में महत्वपूर्ण साबित होगी। यहां कई बड़े समूह अपने उद्योग स्थापित करेंगे। इससे प्रदेश के युवाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

हेली सेवाओं से जुड़े एक सवाल के जवाब में सीएम ने कहा कि पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का काम तेजी से शुरू कराया जा रहा है। इसके लिए वह स्वयं केंद्रीय उड्डयन मंत्री से मिल चुके हैं। पंतनगर में अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक हवाई अड्डा तैयार किया जाएगा, जहां से देश के विभिन्न हिस्सों के लिए हवाई सेवाएं शुरू होंगी। इसका लाभ उत्तराखंड के लोगों के अलावा यहां आने वाले सैलानियों को भी मिलेगा।

वन अधिनियम के कारण खेल विश्वविद्यालय की स्थापना पर लगे अड़ंगे के सवाल पर धामी ने कहा कि इस संबंध में केंद्रीय वन मंत्री से वार्ता हुई है। जल्द ही वन भूमि से संबंधित समस्याओं को हल करा दिया जाएगा। वन भूमि का मुद्दा सुलझने के तुरंत बाद खेल विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में तेजी से काम होगा।

Uttarakhand: कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, दीपावली का मिला तोहफा, बोनस और महंगाई भत्ता हुआ जारी.

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प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले 2.50 लाख से अधिक कर्मचारियों को 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता जारी करने के आदेश जारी कर दिए। कर्मचारियों को एक जुलाई से 31 अक्तूबर तक डीए का नकद भुगतान किया जाएगा।

इसके अलावा अराजपत्रित कर्मचारियों को बोनस का लाभ दिया जाएगा। इस संबंध में वित्त विभाग ने आदेश जारी किए। प्रदेश सरकार ने दीपावली से पहले कर्मचारियों को बोनस व महंगाई भत्ता का तोहफा दे दिया। कर्मचारियों का इंतजार भी खत्म हुआ। केंद्र सरकार ने कर्मचारियों को तीन प्रतिशत डीए देने का निर्णय लिया है, जिसमें एक जुलाई 2025 से महंगाई भत्ते की दर को संशोधित कर 55 प्रतिशत के स्थान पर 58 प्रतिशत किया।दीपावली से पहले कर्मचारियों को बोनस व डीए जारी करने का फैसला लिया गया।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से दीपावली से पहले बोनस व डीए जारी करने की मांग की थी। अपर सचिव वित्त डॉ. अहमद इकबाल ने बताया कि बोनस व डीए के लिए शासन स्तर पर प्रक्रिया जारी थी। इसके बाद आज बोनस और महंगाई भत्ता जारी करने का एलान कर दिया गया।

 

Uttarakhand: प्रतिबंधित कफ सिरप और घटिया दवाओं के खिलाफ अभियान हुआ जारी. 

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अब तक 370 से अधिक सैंपल जांच के दायरे में

Dehradun- राज्यभर में औषधि विभाग द्वारा प्रतिबंधित कफ सिरप और निम्न गुणवत्ता की औषधियों के विरुद्ध सघन औचक निरीक्षण अभियान संचालित किया जा रहा है अभियान का नेतृत्व अपर आयुक्त (एफडीए) एवं ड्रग कंट्रोलर ताजबर सिंह जग्गी कर रहे हैं। उनके निर्देशन में सभी जिलों में औषधि निरीक्षकों की टीमें लगातार फील्ड पर सक्रिय हैं। अब तक 370 से अधिक सैंपल जांच हेतु संकलित किए जा चुके हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रामनगर, देहरादून और रुड़की में छापेमारी-

जनपद नैनीताल में 14 अक्टूबर 2025 को खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने रामनगर के खताड़ी क्षेत्र में औचक निरीक्षण किया।
बच्चों की सुरक्षा और कफ सिरप की गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए की गई इस कार्रवाई में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर एक मेडिकल स्टोर को तत्काल प्रभाव से बंद कराया गया, जबकि दो स्टोरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए और दो स्टोर मौके पर बंद मिले।

संयुक्त टीम ने एक क्लीनिक का भी निरीक्षण किया, जहां से पांच औषधीय नमूने जांच हेतु संकलित किए गए।

इस निरीक्षण में वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मीनाक्षी बिष्ट, नीरज कुमार, औषधि निरीक्षक अर्चना, निधि शर्मा और शुभम कोटनाला शामिल रहे।

सेलाकुई की औषधि इकाइयों का निरीक्षण-

देहरादून में औषधि निरीक्षक मानेंद्र सिंह राणा के नेतृत्व में टीम ने दून मेडिकल कॉलेज के समीप स्थित मेडिकल स्टोर्स और थोक विक्रेता फर्मों का औचक निरीक्षण किया। जांच में बच्चों के लिए प्रयुक्त खांसी और सर्दी-जुकाम की दवाएं अलग कर रखी मिलीं, जिनके विक्रय पर रोक थी। टीम ने इन दवाओं को सील कर अग्रिम आदेशों तक विक्रय न करने के निर्देश दिए। साथ ही, सेलाकुई स्थित औषधि विनिर्माण इकाइयों से चार नमूने गुणवत्ता जांच हेतु संकलित किए गए।

रुड़की में सरकारी दवाओं का अवैध भंडारण पकड़ा गया-

जनपद हरिद्वार के रुड़की क्षेत्र में औषधि निरीक्षक हरीश सिंह और मेघा ने गुप्त सूचना पर ग्राम सलीयर स्थित एक प्रतिष्ठान पर छापेमारी की। यहां बिना लाइसेंस के सरकारी दवाओं का अवैध भंडारण और बिक्री करते हुए पाया गया। टीम ने मौके से 12 प्रकार की एलोपैथिक दवाएं जब्त कीं, जिनमें राजस्थान और मध्यप्रदेश सरकार की सप्लाई की गई औषधियां भी शामिल थीं। सभी दवाएं सील कर जांच हेतु भेजी गईं। आगे की कार्रवाई Drugs and Cosmetics Act, 1940 के अंतर्गत की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि बच्चों की सुरक्षा और जनस्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि दो वर्ष से कम आयु के बच्चों को किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित सिरप न दिए जाएं।

स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि विभाग की कार्रवाई सतत और प्रभावी रहेगी। बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर. राजेश कुमार ने बताया कि औषधि निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

अपर आयुक्त ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य और जनसुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अनधिकृत बिक्री, भंडारण या मिलावट में लिप्त पाए जाने वालों पर कठोरतम कार्रवाई की जाएगी ताकि नागरिकों को केवल सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण औषधियां ही मिल सकें।

Uttarakhand: समूह-ग परीक्षाओं का होगा लाइव टेलीकास्ट, गेट पर ही होगी हाजिरी, मास्टर प्लान किया गया तैयार.

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यूकेएसएसएससी अपनी आगामी भर्ती परीक्षाओं में अब किसी स्तर पर कोई कमी नहीं चाहता। लिहाजा, जो मास्टर प्लान तैयार किया गया है, उसमें परीक्षा केंद्र से लेकर आयोग तक के हर पहलू को शामिल किया गया है। इसी कड़ी में जैमर की कमियों को लेकर अहम बैठक इसी महीने होगी।

यूकेएसएसएससी की स्नातक स्तरीय परीक्षा में जैमर के काम न करने का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। अमर उजाला ने इसका खुलासा किया था कि परीक्षा केंद्रों पर 4-जी जैमर थे जो 5-जी नेटवर्क को जाम नहीं कर सकते। आयोग ने अपने आगामी प्लान में जैमर को पूरी तवज्जो दी है। इसके लिए इसी महीने की 27-28 तारीख को जैमर सप्लाई करने वाली सरकारी कंपनी ईसीआईएल और बायोमीट्रिक मशीन उपलब्ध कराने वाली कंपनी के अफसरों के साथ आयोग की बैठक होगी। बैठक में सभी कमियों पर चर्चा होगी।

परीक्षा केंद्र पर परीक्षा से एक रात पहले भी सुरक्षाकर्मी होंगे तैनात-

परीक्षा केंद्रों का निर्धारण करने के बाद पुलिस और मजिस्ट्रेट के संयुक्त निरीक्षण में देखा जाएगा कि उस केंद्र की दीवारें कितनी ऊंची हैं। वहां का प्रवेश और निकास द्वार कितना सुरक्षित है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया कि परीक्षा केंद्र पर परीक्षा से एक रात पहले भी सुरक्षाकर्मी तैनात होंगे। जैमर का ट्रायल एक दिन पहले होगा। जहां कमी होगी, उस जैमर को तुरंत बदला जाएगा। इसकी जिम्मेदारी सेक्टर मजिस्ट्रेट, परीक्षा केंद्र समन्वयक और पर्यवेक्षक की होगी, जिनकी रिपोर्ट जरूरी होगी।

केंद्र के प्रवेश द्वार पर ही सभी औपचारिकताएं-

अब परीक्षा केंद्र के प्रवेश द्वार पर ही चेकिंग से लेकर बायोमीट्रिक हाजिरी तक की सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। अभ्यर्थी और केंद्र पर्यवेक्षक के अलावा कोई अन्य व्यक्ति भीतर नहीं जा सकेगा। अगर किसी को जाने की जरूरत होगी तो आते-जाते उसकी कड़ी चेकिंग होगी।

परीक्षा का लाइव टेलीकास्ट होगा-

समूह-ग भर्ती परीक्षा का आयोग लाइव टेलीकास्ट करेगा। इसका कंट्रोल रूम आयोग कार्यालय में बनाया जाएगा। हर केंद्र की सभी परीक्षा संबंधी गतिविधियों पर आयोग यहां से भी नजर रखेगा।

एक ही पाली में होगी परीक्षाएं-

आयोग ने उन खबरों का भी खंडन किया, जिनमें परीक्षाएं दो पालियों में कराने का दावा किया जा रहा है। आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने कहा कि केवल एक ही पाली में परीक्षाएं होंगी।