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उर्मिला सनावर के मामलों की जांच के लिए एसआईटी गठित,जनता आगे आये- उर्मिला

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उर्मिला सनावर के खिलाफ जनपद के विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों की निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने एसआईटी गठन का निर्णय लिया है।
एसएसपी के आदेश पर सभी मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है।

उधर, उर्मिला सनावर ने वीडियो बयान जारी कर कहा कि वपुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापे मार रही है। जबकि वो सबूत दे चुकी है। उर्मिला ने प्रदेश की जनता से अंकिता को न्याय दिलवाने के लिए आगे आने को कहा है।इस बीच, पुलिस प्रशासन का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावी बनाते हुए किसी भी प्रकार के संदेह या पक्षपात की संभावना को समाप्त करना है। एसएसपी ने स्पष्ट किया है कि सभी मामलों की गहन जांच साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी और कानून के दायरे में रहकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, ताकि मामलों का जल्द एवं न्यायसंगत निस्तारण हो सके।

 

एसपी सिटी को सौंपी गई एसआईटी की कमान

गठित एसआईटी की जिम्मेदारी पुलिस अधीक्षक नगर (एसपी सिटी) अभय कुमार सिंह को सौंपी गई है। टीम को निर्देश दिए हैं कि उर्मिला सनावर से जुड़े सभी प्रकरणों की बारीकी से जांच की जाए और प्रत्येक बिंदु पर निष्पक्ष आकलन के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। एसएसपी ने यह भी कहा है कि जांच में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

चार थानों में दर्ज हैं कुल चार मुकदमे

जानकारी के अनुसार उर्मिला सनावर के खिलाफ कोतवाली ज्वालापुर, कोतवाली रानीपुर, थाना बहादराबाद और थाना झबरेड़ा में कुल चार मुकदमे दर्ज हैं। अब इन सभी मामलों की जांच एक ही विशेष जांच टीम द्वारा की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि एकीकृत जांच से मामलों में पारदर्शिता बनी रहेगी और जांच की दिशा स्पष्ट रहेगी, जिससे भ्रम या विरोधाभास की स्थिति उत्पन्न नहीं होगी।

एसआईटी में शामिल अधिकारी
गठित विशेष जांच टीम में कुल सात सदस्य शामिल किए गए हैं। टीम में निरीक्षक शांति कुमार गंगवार (प्रभारी कोतवाली रानीपुर), निरीक्षक कुंदन सिंह राणा (प्रभारी कोतवाली ज्वालापुर), उप निरीक्षक अंकुर शर्मा (प्रभारी थाना बहादराबाद), उप निरीक्षक रविन्द्र सिंह (थाना झबरेड़ा), अपर उप निरीक्षक रणजीत सिंह बिष्ट (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर), कांस्टेबल विनय (कार्यालय पुलिस अधीक्षक नगर) और कांस्टेबल वसीम (सीआईयू हरिद्वार) शामिल हैं।

 

कई स्थानों पर प्रदर्शन

वीआईपी के मुद्दे पर प्रदेश के हल्द्वानी में ज्योति अधिकारी के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन जारी है।
देहरादून में महिला कांग्रेस ने स्पीकर के आवास का घेराव कर आंदोलन को धार दी।

प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सीबीआई जॉच व वीआईपी के खुलासे को लेकर भाजपा के विरोध में आंदोलन जोर पकड़ता जा रहा है।

प्रदेश भाजपा संगठन के लचर व आत्मघाती बयानों से स्थिति और भी बिगड़ गयी है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के जातिगत बयान का आम जनता ने भारी विरोध कर दिया है।

विधायक उमेश कुमार से जुड़े दल-बदल मसले पर विस सचिवालय कठघरे में,मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा, विस सचिव जांच करें, एक माह के अंदर दे सूचना

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उत्तराखण्ड सूचना आयोग ने विधानसभा सचिवालय में आरटीआई से जुड़े पत्रों के रखरखाव और कार्रवाई में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने निर्दलीय विधायक उमेश कुमार के दल बदल कानून के उल्लंघन से जुड़ी अपील (संख्या 42977/2025-26) की सुनवाई करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय अपीलीय अधिकारी (उप सचिव, विधानसभा सचिवालय) एक माह के भीतर अपीलार्थी को पूर्ण सूचना उपलब्ध कराएं और प्रथम अपील का विधिवत निस्तारण करें।

मामला जन संघर्ष मोर्चा से जुड़े जयपाल सिंह की अपील से जुड़ा था। जिन्होंने निर्दलीय विधायक के दल बदल कानून के उल्लंघन सम्बन्धी याचिका पर विधानसभा सचिवालय से सूचना मांगी थी।

अपीलार्थी ने बताया कि उनका पत्र पंजीकृत डाक से भेजा गया था, लेकिन सचिवालय की ओर से दावा किया गया कि पत्र प्राप्त ही नहीं हुआ। आयोग ने इसे गंभीर व आपत्तिजनक मानते हुए कहा कि सचिवालय में आरटीआई आवेदनों और प्रथम अपीलों का समुचित रखरखाव नहीं हो रहा है।

मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूडी ने सचिव, विधानसभा सचिवालय को निर्देशित किया है कि प्रकरण की जांच करें और भविष्य में आरटीआई से संबंधित आवेदनों एवं प्रथम अपीलों के निस्तारण के लिए सुदृढ़ नियमावली तैयार कर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों को स्पष्ट निर्देश दें। साथ ही की गई कार्रवाई की सूचना आयोग को भी भेजी जाए।

स्पीकर की रहस्यमय चुप्पी- मोर्चा

जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष एवं जीएमवीएन के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी ने आरोप लगाया कि खानपुर विधायक उमेश कुमार के दल-बदल मामले में विधानसभाध्यक्ष ऋतु खंडूरी ने बचाव की भूमिका निभाई। इस प्रकरण का खुलासा मुख्य सूचना आयुक्त राधा रतूड़ी ने जन संघर्ष मोर्चा के जयपाल सिंह की अपील पर हुई सुनवाई के दौरान भी हुआ।

नेगी ने बताया कि ढाई से तीन वर्ष तक याचिका पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने पंजीकृत डाक से विधानसभा अध्यक्ष एवं सचिव को कार्रवाई हेतु पत्र भेजे, लेकिन विधानसभा सचिवालय ने मौखिक निर्देशों और दबाव में आकर पत्रों के सचिवालय तक न पहुंचने का हवाला दिया। यह दर्शाता है कि पूरा मामला दबाने की कोशिश की गई।

मुख्य सूचना आयुक्त ने सुनवाई में विधानसभा सचिवालय की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उपसचिव और सचिव को समुचित जांच तथा अनुरोध पत्रों/अपीलों के निस्तारण के निर्देश दिए।

नेगी ने कहा कि हैरानी की बात है कि जिस विधायक पर ब्लैकमेलिंग, जालसाजी, यौन शोषण और संपत्ति हड़पने जैसे गंभीर आरोप हों, ऐसे विधायक का बचाव विधानसभाध्यक्ष क्यों कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले ने विधानसभाध्यक्ष की मिलीभगत की पोल खोल दी है।

गौरतलब है कि अप्रैल 2022 में खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया था। मई में विधानसभा में दल बदल कानून के उल्लंघन सम्बन्धी याचिका दाखिल की गई थी। लेकिन विधानसभा भर्ती घोटाले में तुरत फुरत 200 से अधिक तदर्थ कर्मियों को नौकरी से हटाने वालीं स्पीकर ऋतु खण्डूडी उमेश कुमार के मुद्दे पर कोई निर्णय नहीं ले पायीं।
तीन साल से अधिक समय बीतने के बाद भी विधायक उमेश कुमार की सदस्यता पर फैसला नहीं होने पर कई सवाल उठ रहे हैं।

पूर्व के सालों में भी विधानसभा स्पीकर दल बदल कानून के उल्लंघन के मामले में कई विधायकों से इस्तीफा के चुके हैं। लेकिन स्पीकर ऋतु खंडूड़ी किस दबाव में उमेश कुमार की विधायकी पर निर्णय नहीं ले पा रही है। यह भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।
यहां यह भी अहम बात है कि बीते मई महीने में विस सचिवालय ने याचिकाकर्ता और विधायक को नोटिस जारी किया था। लेकिन उसके बाद क्या फैसला लिया गया। यह किसी को पता नहीं।

इधऱ, मोर्चा सदस्य जयपाल की आरटीआई पर मांगी गई सूचना पर भी विधानसभा सचिवालय ने कह दिया कि उन्हें यह पत्र मिला ही नहीं। जबकि पंजीकृत डाक से पत्र भेजा गया था।
इधऱ, जन संघर्ष मोर्चा अध्यक्ष रघुनाथ नेगी ने कहा कि दल बदल कानून के उल्लंघन पर चुप्पी ओढ़ने वालीं स्पीकर ऋतु खंडूरी के इस्तीफे तक मोर्चा चुप बैठने वाला नहीं है।

स्पीकर नहीं लें समय पर फैसला तो लोकतंत्र को होगा नुकसान” – सुप्रीम कोर्ट

देश की सर्वोच्च अदालत ने विधायकों और सांसदों की अयोग्यता याचिकाओं में समय-बद्धता न बरतने वाले स्पीकरों की प्रक्रिया पर कड़ी नाराज़गी जताई है। जुलाई 2025 के इस आदेश से हलचल मच गई ।

चीफ जस्टिस बी.आर. गवई एवं जस्टिस ए.जी. मसीह की बेंच की तल्ख टिप्पणी और स्पीकर को तीन महीने में निर्णय लेने के आदेश के बाद हलचल मच गई

सुप्रीम कोर्ट ने ये तीखी टिप्पणी गुरुवार 31 जुलाई 2025 को की। सर्वोच्च न्यायालय ने तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर को दस BRS विधायकों की अयोग्यता याचिकाओं का निर्णय तीन महीने के भीतर लेने का निर्देश देते हुए, गम्भीर विलंब और लोकतंत्र पर संभावित खतरों को लेकर स्पष्ट टिप्पणी कर सिस्टम को कठघरे में खड़ा कर दिया।

 

दल-बदल कानून के उल्लंघन का एक चर्चित मसला उत्तराखण्ड से भी जुड़ा है। इस मुद्दे पर स्पीकर ने तीन महीने ही नहीं बल्कि तीन साल से ज्यादा निकाल दिए। लेकिन कोई फैसला नहीं दिया।

 

लिव-इन पार्टनर की रॉड से हमला कर हत्या, आरोपी ड्राइवर ने कोतवाली पहुंचकर किया सरेंडर

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रानीपुर कोतवाली क्षेत्र के भभूतावाला बाग में शुक्रवार तड़के जिला अस्पताल के ड्राइवर ने अपनी लिव-इन पार्टनर की लोहे की रॉड से हमला कर हत्या कर दी। इसके बाद आरोपी ने खुद को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।जानकारी के अनुसार, मुकेश पुजारी पिछले करीब 11 साल से शिवलोक कॉलोनी में रहने वाली पिंकी के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। पिंकी स्थानीय स्तर पर ब्यूटी पार्लर चलाती थी। दोनों की आठ साल की एक बेटी भी है। मुकेश की पहली शादी भी हो चुकी है और उसकी पहली पत्नी से दो जवान बेटे हैं, जो अलग रहते हैं।

 

पुलिस के अनुसार, शुक्रवार की सुबह करीब तीन बजे मुकेश पिंकी के घर पहुंचा और किसी बात को लेकर दोनों के बीच बहस हो गई। बहस के दौरान उसने लोहे की रॉड से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल होने के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मुकेश सीधे रानीपुर कोतवाली पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने आरोपी को तुरंत हिरासत में ले लिया और हत्या के आरोप में केस दर्ज कर लिया है।

एसपी सिटी पंकज गैरोला और एएसपी सदर निशा यादव ने मौके पर पहुंचकर घटना की जानकारी ली और आरोपी से पूछताछ की। अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि मुकेश को पिंकी के चरित्र पर शक था।

इसी शक के चलते दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था, और आशंका जताई जा रही है कि इसी शक ने हत्या जैसी गंभीर वारदात को जन्म दिया। फिलहाल पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया है और आरोपी से पूछताछ के साथ-साथ घटना की गहन जांच शुरू कर दी है।

गौवंश मौत मामले में खानपुर विधायक उमेश कुमार समेत 101 लोगों पर मुकदमा दर्ज

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लक्सर। हरिद्वार जिले के लक्सर में बीते सोमवार को रायसी-बालावाली मार्ग पर पिकअप वाहन की टक्कर से गौवंश की मौत के बाद हुए हंगामे के मामले में पुलिस ने खानपुर विधायक उमेश कुमार सहित 101 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। इसमें 11 लोग नामजद हैं जबकि 90 अज्ञात हैं।

जानकारी के अनुसार, गौवंश की मौत से गुस्साए स्थानीय लोगों ने सड़क जाम कर हंगामा किया और पिकअप वाहन में तोडफ़ोड़ करते हुए उसमें आग लगा दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जाम खुलवाने का प्रयास किया, लेकिन भीड़ ने पुलिस पर पथराव किया, जिससे दो सिपाही घायल हो गए। घटना के समय क्षेत्रीय विधायक उमेश कुमार भी मौके पर पहुंचे थे। खानपुर एसओ धर्मेंद्र राठी ने बताया कि भीड़ ने सरकारी काम में बाधा डालने और बलवा करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया है। नामजद लोगों में विधायक उमेश कुमार, शुभम, विनोद, अरुण, सुनील, दीपक, जगपाल, सब्जपाल, अंकुश, गौरव शामिल हैं। अन्य अज्ञात आरोपी भी शामिल हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

पिकअप वाहन में था मांस, भीड़ ने आग लगाई
मामले के समय पिकअप वाहन में मांस लदा था। भीड़ ने वाहन में तोडफ़ोड़ के साथ आग लगा दी। फायर ब्रिगेड टीम को बुलाकर आग पर काबू पाया गया।

विधायक भी पहुंचे थे मौके पर
हंगामे की जानकारी मिलने पर क्षेत्रीय विधायक उमेश कुमार भी घटनास्थल पर पहुंचे। कुछ घंटों के प्रयास के बाद पुलिस ने स्थिति को शांत किया।

कांवड़ियों के चरण धोकर मुख्यमंत्री ने किया सम्मान

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ओम पुल के निकट गंगा घाट पर आयोजित कार्यक्रम में देशभर से आए शिव भक्त कांवड़ियों के पांव धोकर उनका स्वागत और सम्मान किया। उन्होंने भजन संध्या में भी भाग लिया और कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें शिव भक्तों का चरण प्रक्षालन कर आशीर्वाद लेने का अवसर मिला। इस दौरान हरिद्वार पहुंचे कांवड़ियों और शिव भक्तों पर हेलीकॉप्टर से पुष्पवर्षा भी कराई गई।

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि हरिद्वार में गंगा तट पर गंगा सभा और भारतीय नदी परिषद के तत्वावधान में दुनिया का सबसे ऊंचा, 251 फीट का भगवा ध्वज स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल भक्ति नहीं, बल्कि सेवा, अनुशासन और सनातन संस्कृति का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस बार अब तक एक करोड़ से ज्यादा शिव भक्त अपनी यात्रा पूरी कर चुके हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में हो रहे धार्मिक स्थलों के पुनरोद्धार कार्यों — जैसे काशी कॉरिडोर, राम मंदिर, महाकाल लोक, केदारनाथ पुनर्निर्माण — का भी उल्लेख किया और कहा कि हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर का निर्माण भी प्रस्तावित है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रियों के लिए स्वास्थ्य केंद्र, शौचालय, पार्किंग, विश्राम स्थल, वाटर एंबुलेंस, सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों के जरिये सुरक्षा व सुविधा सुनिश्चित की गई है। उन्होंने अपील की कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालु अनुशासन और मर्यादा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यात्रा के उद्देश्य को भुलाकर अशांति फैलाने का प्रयास करते हैं, जो अनुचित है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नकल विरोधी कानून, धर्मांतरण विरोधी कानून, दंगा विरोधी कानून और समान नागरिक संहिता लागू की गई है। ‘ऑपरेशन कालनेमि’ के जरिए सनातन धर्म के नाम पर धोखा देने वालों पर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री ने सभी श्रद्धालुओं, संतों, स्वयंसेवी संगठनों और प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया और अपील की कि यात्रा को सफल बनाने के लिए नियमों का पालन करें।

इस दौरान अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी,राज्यसभा सासंद कल्पना सैनी,राज्यमंत्री ओमप्रकाश जमदग्नि,शोभाराम प्रजापति,देशराज कर्णवाल, हरिद्वार मेयर किरण जैसल,रुड़की मेयर अनीता देवी,जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी ,विधायक प्रदीप बत्रा ,आदेश चौहान, मदन कौशिक,जिलाध्यक्ष हरिद्वार आशुतोष शर्मा, जिलाध्यक्ष रुड़की मधु,श्रीगंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम,महामंत्री तन्मय वशिष्ठ,सभापति कृष्ण कुमार ठेकेदार,पूर्व विधायक संजय गुप्ता,प्रणव सिंह चैंपियन, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,आईजी राजीव स्वरूप,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, महामंडलेश्वर ललितानंद गिरि  आदि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे |

 

 

‘यह सिर्फ एक सीन था’ कहकर फंसे राठौर, कांग्रेस ने पूछा– कारवां लुटा कैसे?

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 उत्तराखंड की सियासत इन दिनों एक अनोखे ‘प्रेम प्रसंग’ को लेकर गर्म है, जिसमें अभिनय, सियासत, महिला सम्मान और नैतिकता के तमाम आयाम एक साथ उलझे हुए हैं। चर्चित भाजपा नेता और हरिद्वार जिले के ज्वालापुर से पूर्व विधायक सुरेश राठौर हाल ही में उर्मिला सनावर (फिल्म अभिनेत्री) के साथ मंच साझा करते हुए उसे “अपने जीवन की साथी” बता बैठे। कैमरे और माइक के सामने रिश्तों का यह सार्वजनिक ऐलान कुछ ही घंटों में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

लेकिन हंगामा बढ़ते ही राठौर पलट गए। सफाई दी कि “यह तो बस एक फिल्म का सीन था”। इस सफाई ने आग में घी डालने का काम किया। सवाल उठने लगे कि क्या अब भाजपा नेताओं की सार्वजनिक घोषणाएं भी किसी स्क्रिप्ट का हिस्सा हैं? और अगर यह अभिनय था तो मंच, माला और सार्वजनिक संवाद किसलिए?

 

 

प्रकरण गरमाया तो भाजपा ने भी पैंतरा बदला। पहले चुप्पी साधे रही, फिर जनदबाव बढ़ने पर राठौर को पार्टी की छवि धूमिल करने और अनुशासनहीनता के आरोप में नोटिस थमा दिया गया। राठौर ने प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट से भेंट कर अपना पक्ष रखा है, जिस पर पार्टी विचार कर रही है।

लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कांग्रेस को हमलावर होने का मौका दे दिया।
पार्टी की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा, “नाटक, झूठ और पाखंड की शैली से जनता को भ्रमित नहीं किया जा सकता।” उन्होंने तंज कसते हुए पूछा, “तू इधर-उधर की बात न कर, ये बता कारवां लुटा कैसे?”

गरिमा ने भाजपा से पूछा कि क्या यह पहला मामला है जब पार्टी के नेता महिलाओं से जुड़े विवादों में फंसे हों? क्या हर बार कार्रवाई तब होती है जब जनता का गुस्सा उबाल पर आ जाता है? और क्या UCC जैसे कानूनों का हवाला सिर्फ जनता को उलझाने के लिए दिया जाता है?

भाजपा की ओर से प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान ने स्पष्ट किया कि पार्टी किसी भी प्रकार के अमर्यादित आचरण को स्वीकार नहीं करती। उन्होंने बताया कि अनुशासन समिति में राठौर के मामले पर गंभीरता से विचार किया जाएगा।

सियासत और व्यक्तिगत जीवन की यह जटिल गाथा एक ओर राजनीति के चरित्र पर सवाल खड़े कर रही है, तो दूसरी ओर दर्शा रही है कि अब जनता केवल भाषणों से नहीं, आचरण से भी जवाब मांगती है।

जमीन घोटाला…पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के कार्यकाल की जांच के लिए ऑडिट समिति गठित

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जमीन घोटाले में फंसे हरिद्वार नगर निगम के पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी के 16 माह के कार्यकाल का विशेष ऑडिट होगा। इसके लिए ऑडिट निदेशालय ने दो पर्यवेक्षक अधिकारी और विशेष लेखा परीक्षा दल का गठन कर दिया है। इस टीम को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है।

हरिद्वार में नगर निगम पर कूड़े के ढ़ेर के पास स्थित अनुपयुक्त और सस्ती 35 बीघा कृषि भूमि को बिना आवश्यकता 54 करोड़ रुपये में खरीदने के मामले में निलंबित चल रहे आईएएस वरुण चौधरी की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर बृहस्पतिवार को निदेशालय लेखा परीक्षा ने वरुण चौधरी के 25 नवंबर 2023 से 20 मार्च 2025 तक के बतौर नगर आयुक्त कार्यकाल का विशेष ऑडिट करने के लिए समिति का गठन कर दिया। इसके लिए उप निदेशक विजय प्रताप सिंह को पर्यवेक्षक अधिकारी और सहायक निदेशक रजत मेहरा को सहायक पर्यवेक्षक अधिकारी नियुक्त किया गया है।

 

वहीं, विशेष ऑडिट समिति लेखा परीक्षा अधिकारी किशन सिंह बिष्ट के नेतृत्व में गठित की गई है, जिसमें लेखा परीक्षा अधिकारी संजय गुप्ता, ओम प्रकाश, सहायक लेखा परीक्षा अधिकारी भूपेंद्र सिंह और वरिष्ठ लेखा परीक्षक विमल मित्तल को शामिल किया गया है। इस समिति को 15 दिन के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी है। इस दौरान समिति से जुड़े सभी अधिकारी अन्य कार्यों से मुक्त रहेंगे। उन्हें नगर निगम की ओर से अलग से कार्यालय उपलब्ध कराया जाएगा। दोनों पर्यवेक्षक अधिकारियों की निगरानी में ऑडिट होगा।

हरिद्वार जमीन घोटाला; धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, दो IAS और एक PCS अफसर समेत 12 लोग सस्पेंड

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हरिद्वार जमीन घोटाले में धामी सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। मामले में दो आईएस और एक पीसीएस अफसर समेत कुल 12 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में डीएम, एसडीएम और पूर्व नगर आयुक्त पर भी गाज गिरी। अब विजिलेन्स जमीन घोटाले की जांच करेगी।

मामला 15 करोड़ की जमीन को 54 करोड़ में खरीदने का है, जिसमें हरिद्वार नगर निगम ने एक अनुपयुक्त और बेकार भूमि को अत्यधिक दाम में खरीदा। न भूमि की कोई तात्कालिक आवश्यकता थी, न ही खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती गई। शासन के नियमों को दरकिनार कर यह घोटाला अंजाम दिया गया।

 

15 करोड़ की ज़मीन 54 करोड़ में खरीदी
जांच के बाद रिपोर्ट मिलते ही बड़ी कार्रवाई करते हुए हरिद्वार के जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी और एसडीएम अजयवीर सिंह को सस्पेंड कर दिया। साथ ही वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, कानूनगों राजेश कुमार, तहसील प्रशासनिक अधिकारी कमलदास, और वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की को भी निलंबित किया गया।

उत्तराखंड में पहली बार ऐसा हुआ है कि सत्ता में बैठी सरकार ने अपने ही सिस्टम में बैठे शीर्ष अधिकारियों पर सीधा और कड़ा प्रहार किया है। हरिद्वार ज़मीन घोटाले में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा लिए गए निर्णय केवल एक घोटाले के पर्दाफाश की कार्रवाई नहीं, बल्कि उत्तराखंड की प्रशासनिक और राजनीतिक संस्कृति में एक निर्णायक बदलाव का संकेत हैं।

पहले चरण में नगर निगम के प्रभारी सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण, कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और अवर अभियंता दिनेश चंद्र कांडपाल को भी सस्पेंड किया गया था। संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया है और उनके खिलाफ अनुशासनिक कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।

हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाला-बड़ों से पूछताछ, लैंड यूज के पीछे कौन है मास्टरमाइंड !

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बड़े अधिकारियों की नाक के नीचे हुए करोड़ों की जमीन घोटाले की जांच ने दो कदम आगे बढ़ा दिए हैं। कई स्तर पर हुई खुली लापरवाही की खबरों के बीच हरिद्वार डीएम कर्मेन्द्र सिंह व पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी ने अपने बयान दर्ज करवा दिए हैं।

हरिद्वार नगर निगम की बिना किसी ठोस परियोजना के कूड़े के ढेर के बगल वाली 33 बीघा भूमि खरीद की फ़ाइल का तेजी से दौड़ना भी कई सवाल खड़े कर गया। इस अहम फाइल को किस का ‘बाहरी व मजबूत’ बल लग रहा था ,यह भी सत्ता के गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। आखिरकार, कृषि भूमि का लैंड यूज चेंज कर चार गुना अधिक मूल्य पर जमीन की खरीद में पीछे किस मास्टरमाइंड का हाथ था, यह भी कौतूहल का विषय बना हुआ है।

गौरतलब है कि नगर निगम का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 2024 में आईएएस वरुण चौधरी को नगर निगम का प्रशासक तैनात किया गया था।भूमि खरीद में नगर निगम एक्ट का पालन किया जाना था। जमीन खरीद से जुड़े शासन के नियम व निर्देश भी अपनी जगह मौजूद थे। बावजूद इसके एक कॄषि योग्य भूमि का लैंड यूज परिवर्तित कर कामर्शियल कर दिया। और सिर्फ कुछ करोड़ की जमीन आधे अरब से अधिक दाम में खरीद ली गयी। इस मामले में हवा के माफिक दौड़ी फाइल का पेट भी नियमबद्ध दस्तावेजों से नहीं भरा गया।

 

निकाय विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि
नगर निगम ने किस परियोजना या योजना के लिए कूड़े के ढेर के बगल वाली जमीन खरीदी। जमीन खरीद का क्या प्रयोजन था? यह भी साफ नहीं किया गया। चूंकि, कामर्शियल रेट पर करोड़ों की खरीदी गई जमीन पर निगम की कोई फ्लैट बनाने की योजना थी? या फिर मॉल आदि कोई अन्य कामर्शियल गतिविधि को अंजाम देना था ? यह भी सार्वजनिक नहीं किया गया। अलबत्ता गोदाम बनाने की बात अवश्य कही गयी।

हरिद्वार नगर निगम भूमि घोटाले में एक बात यह भी सामने आ रही है कि सम्बंधित जिम्मेदार अधिकारियों ने भूमि खरीद की तय प्रक्रिया का पालन नहीं किया।

जांच अभी जारी है। जांच अधिकारी रणवीर चौहान का साफ कहना है कि वे जांच पूरी होने के बाद ही कुछ कह पाएंगे। चौहान का कहना है कि जॉच पूरी होते ही रिपोर्ट शासन को सौंप दी जाएगी। जॉच अधिकारी नियुक्त होते ही आईएएस रणवीर सिंह नगर निगम भूमि घोटाले की जॉच के लिए हरिद्वार में मौका मुआयना कर चुके हैं।

इधर, चार अधिकारियों के निलंबन के बाद सम्बंधित अधिकारियों व कर्मियों से पूछताछ के सिलसिला जारी है।

हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले में 1 मई को चार अधिकारियों के निलंबन के बाद जांच अधिकारी आईएएस रणवीर सिंह ने हरिद्वार के डीएम कर्मेन्द्र सिंह व पूर्व नगर प्रशासक हरिद्वार वरुण चौधरी से पूछताछ की। मौजूदा समय में आईएएस वरुण चौधरी सचिवालय में अपर सचिव स्वास्थ्य की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

नियमों को ताक पर रखकर करोड़ों की बंदरबांट के इस हैरतअंगेज कारनामे में तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह के स्टेनो और डाटा एंट्री ऑपरेटर से भी पूछताछ की गई। कुछ समय पूर्व अजयवीर सिंह का हरिद्वार से अन्यत्र तबादला किया गया।

अब बड़े अधिकारियों से पूछताछ के बाद उम्मीद जगी है कि कुछ घोटालेबाज शातिर अधिकारियों पर भी गाज गिरेगी। नियमों का उल्लंघन कर व भू उपयोग परिवर्तन से करोड़ों का खेल करने वाले मास्टरमाइंड का चेहरा कब बेनकाब होगा। इसका भी सभी को इंतजार है।

गौरतलब है कि हरिद्वार से जुड़े अधिकारियों ने यह कारनामा नगर निगम भंग होने के समय अंजाम दिया था। बाद में हरिद्वार की मेयर निर्वाचित होने पर किरण जैसल ने इस भूमि खरीद घोटाले की शिकायत सीएम धामी से की। सीएम धामी ने जांच आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह को सौंपी।

हालांकि, खबर यह भी है कि दोषियों को बचाने के लिए एक लॉबी ने ऐड़ी चोटी का जोर लगाया हुआ है।
इसी के तहत पहले जांच अधिकारी किसी अन्य अफसर को बनाने का दांव चला गया था लेकिन सीएम ने अन्य नामों को दरकिनार करते हुए आईएएस चौहान को जांच अधिकारी नियुक्त कर मंसूबे पूरे नहीं होने दिए।

गौरतलब है कि कई सौ करोड़ के NH 74 भूमि घोटाले में कई अधिकारी व कर्मी जेल गए थे लेकिन कुछ अहम किरदार साफ बच निकले थे। कहीं हरिद्वार नगर निगम के आधे अरब से अधिक मूल्य के फ्रॉड में बड़ी मछलियां साफ बच न जाएं, यह जांच की समग्रता पर निर्भर करेगा…

अब तक हुई निलंबन की कार्रवाई

निलंबित सहायक नगर आयुक्त रविंद्र कुमार दयाल, अधिशासी अभियंता आनंद सिंह मिश्रवाण , कर एवं राजस्व अधीक्षक लक्ष्मीकांत भट्ट और जेई दिनेश चंद्र कांडपाल शामिल हैं। ये चारों जमीन खरीद मामले के लिए बनाए गई समिति में शामिल थे।

इस प्रकरण में सेवा विस्तार पर कार्यरत सेवानिवृत्त सम्पत्ति लिपिक वेदपाल की संलिप्तता पायी गयी है। उनका सेवा विस्तार समाप्त करते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश देने के साथ ही सुश्री निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वित्त अधिकारी,नगर निगम, हरिद्वार का स्पष्टीकरण तलब किया गया है।

ऐसे हुई 15 से 54 करोड़ रुपए कीमत

भूमि का लैंड यूज कृषि था। तब उसका सर्किल रेट छह हजार रुपये के आस पास था। यदि भूमि को कृषि भूमि के तौर पर खरीदा जाता, तब उसकी कुल कीमत पंद्रह करोड़ के आस पास होती। लेकिन लैंड यूज चेंज कर खेले गए खेल के बाद भूमि की कीमत 54 करोड़ के आस पास हो गई। खास बात ये है कि अक्टूबर में एसडीएम अजयवीर सिंह ने लैंड यूज बदला और चंद दिनों में ही निगम निगम हरिद्वार ने एग्रीमेंट कर दिया और नवंबर में रजिस्ट्री कर दी।

नगर निगम हरिद्वार ने नवंबर 2024 में सराय कूड़ा निस्तारण केंद्र से सटी 33 बीघा भूमि का क्रय किया था। ये भूमि 54 करोड़ रुपए में खरीदी थी जबकि छह करोड़ रुपए स्टाप ड्यूटी के तौर पर सरकारी खजाने में जमा हुए थे। 2024 में तब नगर प्रशासक आईएएस वरुण चौधरी थे। जमीन खरीद मामले में मेयर किरण जैसल ने सवाल खड़े किए थे। जिसके बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने इस मामले की जांच सीनियर आईएएस अफसर रणवीर सिंह को सौंपी थी। अब इस मामले में जमीन को बेचने वाले किसान के खातों को फ्रीज करने के आदेश कर दिए गए हैं।

लैंड यूज में खेल-

अक्टूबर 2024 में एसडीएम अजयवीर सिंह ने जमीन का लैंड यूज बदला। और चंद दिनों में ही नगर निगम ने खरीद का एग्रीमेंट कर लिया। नवंबर में रजिस्ट्री पूरी हो गई। यह तेजी संदेहास्पद है और प्रक्रियागत नियमों की अनदेखी को दर्शाती है।

पारदर्शिता का अभाव-

जमीन खरीद के लिए कोई पारदर्शी बोली प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, जो सरकारी खरीद नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है। साथ ही, नगर निगम ने इस खरीद के लिए शासन से कोई पूर्व अनुमति नहीं ली।

सशर्त अनुमति का दुरुपयोग

जमीन को गोदाम बनाने के लिए धारा 143 के तहत सशर्त अनुमति दी गई थी, जिसमें शर्त थी कि यदि भूमि का उपयोग निर्धारित प्रयोजन से अलग किया गया, तो अनुमति स्वतः निरस्त हो जाएगी। आरोप है कि इस जमीन का उपयोग कूड़ा डंपिंग के लिए किया गया, जो अनुमति का उल्लंघन हो सकता है।

घोटाले में पूर्व नगर प्रशासक (एमएनए) वरुण चौधरी पर सर्किल रेट का दुरुपयोग कर सौदा करने का आरोप है। जिलाधिकारी कर्मेन्द्र सिंह और नगर निगम आयुक्त भी जांच के घेरे में हैं।

इस तरह के बड़े सौदों में तहसील और नगर निगम की संयुक्त जांच अनिवार्य होती है, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। यह प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट उदाहरण है। साथ ही, सर्किल रेट और लैंड यूज में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव रहा।

यह घोटाला न केवल वित्तीय अनियमितताओं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है।

भूमि घोटाला जांच के लिए हरिद्वार पहुंचे आईएएस अधिकारी, किया निरीक्षण, खुलेंगे राज!

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नगर निगम हरिद्वार की ओर से भूमि खरीद में किए गए करोड़ों के घोटाले की परतें अब खुलने लगी हैं। शासन स्तर पर गंभीरता से लिए गए इस प्रकरण की जांच के लिए नियुक्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी रणवीर सिंह चौहान मंगलवार को जांच के सिलसिले में हरिद्वार पहुंचे।

उन्होंने जिला प्रशासन, एचआरडीए और नगर निगम के अधिकारियों के साथ सराय क्षेत्र में उस 33 बीघा भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया, जिसे नगर निगम ने 54 करोड़ रुपये में खरीदा था। यह राशि नगर निगम को रिंग रोड परियोजना के तहत अधिग्रहित भूमि के बदले मुआवजे के रूप में मिली थी।

निगम निगम की ओर से क्रय की गई भूमि की वास्तविक कीमत मात्र 15 करोड़ रुपये थी, लेकिन लैंड यूज परिवर्तन और सर्किल रेट का अनुचित लाभ उठाकर इसे चार गुना अधिक मूल्य पर खरीदा गया। प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों के संकेत मिलने पर एक मई को नगर निगम के चार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई हो चुकी है, जबकि इस पूरे प्रकरण में कई बड़े नाम भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। मंगलवार को सराय क्षेत्र में स्थलीय निरीक्षण के लिए पहुंचे जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने मौके पर भूमि के राजस्व अभिलेखों का अवलोकन भी किया।

इस मौके पर उनके साथ एचआरडीए सचिव मनीष सिंह और एसडीएम जितेंद्र कुमार सहित राजस्व के अधिकारी मौजूद रहे। जिसके बाद रणवीर सिंह चौहान डामकोठी पहुंचे, जहां इस जमीन से संबंधित पत्रावलियों की जांच की। निगम के कुछ अधिकारी कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए। जांच अधिकारी रणवीर सिंह चौहान ने स्पष्ट किया कि आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। शासन की ओर से इस जांच को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश हैं।

गौरतलब है कि यह पूरा मामला उस समय संदेह के घेरे में आया, जब भूमि की खरीद में सर्किल रेट और बाजार मूल्य के बीच भारी अंतर पर विशेषज्ञों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए। खास बात यह भी है कि जिस समय यह भूमि खरीदी गई, नगर निगम प्रत्यक्ष रूप से प्रशासनिक नियंत्रण में था और आईएएस अधिकारी वरुण चौधरी निगम नगर आयुक्त के पद पर कार्यरत थे।