Category Archive : उत्तराखंड

सीएम धामी ने पूरा किया वायदा, अग्निवीर आरक्षण नियमावली जारी

196 Minutes Read -

सीएम धामी ने सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने एक और वायदे को पूरा करते हुए, सेवामुक्त होने वाले अग्निवीरों को विभिन्न विभागों की वर्दीधारी सेवाओं में दस प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान कर दिया है।

इस संबंध में सोमवार को कार्मिक एवं सर्तकता विभाग की ओर से विधिवित तौर पर उत्तराखंड राज्याधीन सेवाओं में समूह ग के सीधी भर्ती के वर्दीधारी पदों पर सेवायोजन हेतु सेवामुक्त अग्निवीरों को क्षैतिज आरक्षण नियमावली – 2025 जारी कर दी है।


सैन्य बहुल प्रदेश होने के कारण उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय को मास्टर स्ट्रोक माना जा रहा है। इसी नियमावली के जरिए अब सेवामुक्त हुए अग्निवीरों को विभिन्न विभागों के वर्दीधारी पदों पर 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण प्रदान किया जाएगा।

इसमें पुलिस आरक्षी (नागरिक/पीएसी), उप निरीक्षक, प्लाटून कमांडर पीएसी, अग्निशामक, अग्निशमन द्वितीय अधिकारी, बंदी रक्षक, उप कारापाल, वन आरक्षी, वन दरोगा, आबकारी सिपाही, प्रवर्तन सिपाही और सचिवालय रक्षक जैसे महत्वपूर्ण वर्दीधारी पद शामिल हैं।

“देश की सेवा कर लौटे पूर्व अग्निवीर प्रदेश का गौरव हैं। उन्हें सम्मान और रोजगार का अवसर देना हमारी जिम्मेदारी है। यह निर्णय सेवामुक्त हुए अग्निवीरों के भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और अग्निवीरों को हर तरह से सेवायोजन का प्रयास कर रही है”।
पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

लगातार हो रही भारी बारिश के चलते चारधाम यात्रा 5 सितंबर तक स्थगित

168 Minutes Read -

उत्तराखंड प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते सरकार ने जनहित को लेकर चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब यात्रा को आने वाली 5 सितंबर तक स्थगित किया गया है .

भारी बारिश और भूस्खलन से मार्ग बाधित –

प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश की वजह से जगह जगह न केवल मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं बल्कि भूस्खलन से जानमाल का ख़तरा भी बरकरार है ,
प्रशाशन लगातार अवरुद्ध मार्गों को खोलने के लिए प्रयासरत है ,

यात्रियों और स्थानीय निवासियों को सुरक्षा –

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे से बात कर ये जानकारी मिली कि सुरक्षा को देखते हुए ही ये यात्रा स्थगित करने का फैसला जनहित में लिया गया है ,
मौसम के सामान्य होते ही यात्रा पूर्ण रूप से सुचारू कर दी जाएगी .

प्रदेश में जारी है भारी बारिश का अलर्ट –

गौरतलब है कि लगातार होती बारिश की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों और जिलों में हालात सामान्य नहीं हैं ,
सुरक्षा और राहत बचाव कार्य के लिए प्रदेश में सरकारी तंत्र के साथ ही प्रदेश की SDRF और NDRF के साथ ही उत्तराखंड पुलिस लगातार जुटी है ,जिसमें स्थानीय निवासियों से भी भरपूर सहयोग मिल रहा है ,

आपदा राहत केंद्र रखे हुए है हर स्थिति पर नजर –

आपदा प्रबंधन सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि विभाग 24 घंटे हर स्थिति पर नजर बनाए हुए है,

खुद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हर घटना पर नजर बनाए हुए हैं , प्राथमिकता यही है कि आम जनमानस को मुश्किल हालात उत्पन्न होने पर तुरंत सहायता मिले

 

Disaster Management Secy orders round the clock vigilance amid rainfall  warning | Garhwal Post

Garhwal Divisional Commissioner Vinay Shankar Pandey

उत्तराखंड में लगातार जारी बारिश को देखते हुए, सरकार ने चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा पांच सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी है। गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडेय ने बताया कि भारी बारिश से प्रदेश में कई जगह भूस्खलन या मलबा आने से मार्ग बाधित हो रहे हैं। जिन्हें सरकार प्राथमिकता पर खोल रही है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा ओर सुविधा को देखते हुए, फिलहाल चारधाम एवं हेमकुंड साहिब यात्रा को 05 सितम्बर 2025 तक स्थगित किए जाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने यात्रियों से अपील की है कि वे प्रतिकूल मौसम की स्थिति को देखते हुए फिलहाल यात्रा मार्गों पर प्रस्थान न करें तथा प्रशासन द्वारा जारी परामर्श का पालन करें। मौसम सामान्य होने एवं मार्ग पूरी तरह सुरक्षित पाए जाने के उपरांत यात्राओं को पुनः प्रारम्भ किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा सड़क मार्गों की निगरानी, सफाई तथा यात्रियों की सुरक्षा हेतु सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। यात्रियों से अनुरोध है कि धैर्य एवं संयम बनाए रखें तथा यात्रा संबंधी अद्यतन जानकारी के लिए प्रशासनिक नियंत्रण कक्ष से सम्पर्क करते रहें।

चमोली जिले में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी, कर्णप्रयाग, ज्योतिर्मठ के बाद अब नंदानगर

121 Minutes Read -

चमोली जनपद में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं बढ़ी हैं। सबसे पहले कर्णप्रयाग के बहुगुणा नगर में भूधंसाव की घटना सामने आई। यह क्षेत्र घाटी में होने के बावजूद भूधंसाव हो रहा है। उसके बाद ज्योतिर्मठ के भूधंसाव ने सबको विचलित कर दिया था। यहां सैकड़ों मकान और होटल भूधंसाव की जद में आ गए थे।

Land Subsidence Incidents Increased In Chamoli In Last Three Years After Karnaprayag  Jyotirmath Now Nandanagar - Amar Ujala Hindi News Live - Uttarakhand:चमोली  जिले में पिछले तीन साल में भूधंसाव की घटनाएं

अब नंदानगर के भूधंसाव ने फिर से लोगों को चिंता में डाल दिया है। ज्योतिर्मठ की तरह ही नंदानगर में भी जमीन से पानी का रिसाव हो रहा है। यहां कई घरों से पानी निकलने के बाद लोगों ने मकान छोड़ दिए हैं। भूधंसाव भी लगातार बढ़ रहा है। चमोली जनपद आपदा की दृष्टि से अति संवेदनशील है। यहां बादल फटना, भूस्खलन, भूधंसाव, अतिवृष्टि की आपदाएं चमोलीवासी कई वर्षों से झेल रहे हैं।

Chamoli News Nandanagar Band Bazaar Hit By Landslide 25 Shops In Danger 34  Families Shifted - Amar Ujala Hindi News Live - Chamoli:भूधंसाव की चपेट में  आया नंदानगर का बैंड बाजार, खतरे

पिछले तीन वर्षों में भूधंसाव जैसी आपदा का नया पैटर्न देखने को मिल रहा है। नंदानगर के व्यापार संघ अध्यक्ष नंदन सिंह और कथावाचक शंभू प्रसाद पांडे का कहना है कि भूधंसाव का व्यापार रुप से वैज्ञानिक सर्वे होना चाहिए। नंदानगर क्षेत्र आपदा की दृष्टि से संवेदनशील है। यहां का वैज्ञानिक सर्वेक्षण के बाद यहां की बसावट के लिए योजना तैयार होनी चाहिए।

Chamoli News Nandanagar Band Bazaar Hit By Landslide 25 Shops In Danger 34  Families Shifted - Amar Ujala Hindi News Live - Chamoli:भूधंसाव की चपेट में  आया नंदानगर का बैंड बाजार, खतरे

नंदानगर में हो रहे भूधंसाव से प्रवासी लोग भी चिंतित हैं। वे लगातार अपने परिजनों, रिश्तेदारों और दोस्तों को फोन कर वहां की स्थिति के बारे में जानकारी ले रहे हैं। जो लोग नंदानगर में हैं, वे भी प्रभावित क्षेत्र को देखकर चिंतित हैं। रविवार को बैंड बाजार के अलावा संपूर्ण नंदानगर बाजार बंद रहा। नगर के व्यापारियों ने भी प्रभावितों की दुकानों को खाली करवाने में मदद की।

मुख्यमंत्री बदलने की भ्रामक सूचना पर पुलिस की सख्ती

109 Minutes Read -

देश के कई हिस्सों में मानसून ने कहर बरपाया हुआ है ,जिससे हिमालयी राज्य उत्तराखंड भी अछूता नहीं है ,

पहले उत्तरकाशी के धराली , पौड़ी और फिर चमोली के थराली में जो सैलाब लगातार मुश्किल पैदा कर रहा है वो रुकने का नाम नहीं ले रहा है ,
ऐसे में प्रदेश में कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रदेश के मुख्यमंत्री को बदलने की कई वीडियो / विभिन्न सोशल मीडिया माध्यम के जरिए अपुष्ट आधार पर दिखाई गई हैं , जिसको लेकर उत्तराखंड पुलिस ने कठोर क़दम उठा कर कुछ सोशल मीडिया पेज पर मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही प्रारंभ की है .

भ्रम पैदा करने वालों की वजह से प्रभावित होते हैं राहत बचाव कार्य –

पुलिस से बातचीत कर ये जानकारी मिली कि इस तरह की भ्रामक सूचनाओं से आपदा के इस कठिन समय में राहत कार्य करने में रुकावट का सामना करना पड़ता है ..

आमजनमानस में भ्रम की स्थिति न बने इसलिए इस तरह की कार्यवाही अमल में लाई गई है .

उत्तराखंड के चार जिले भारी बारिश की चपेट में –

गौरतलब है कि इस मानसूनी दौर में बागेश्वर, चमोली , रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जनपद काफी हद तक प्रभावित हैं जहां तमाम सरकारी एजेंसी के साथ ही SDRF और NDRF निरंतर आपदा बचाव राहत कार्य में जुटी हैं ,
झूठी ख़बर फैलाने से न केवल व्यवधान उत्पन्न होता है बल्कि सरकारी कामकाज पर भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न होने की वजह से प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित होता है .

उत्तराखंड पुलिस की आमजनता से अपील, अफवाहों पर न दें ध्यान –

इसी के मद्देनजर , उत्तराखंड पुलिस के डीजीपी दीपम सेठ की तरफ से भी ये अपील जारी की गई है कि भ्रामक सूचनाओं और अफवाहों पर ध्यान न दें ,

प्रदेश के सभी जिलों की एजेंसीज को भी निर्देश दिए गए हैं कि अफवाह फैलाने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर नजर रखें ..

भारी बारिश से उत्तराखंड के साथ ही हिमाचल में भी मुश्किल हालात –

यहां ये भी महत्वपूर्ण है कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड , इस समय दोनों भी हिमालयी राज्य भीषण आपदा से गुजर रहे हैं ,

आपदा प्रभावितों की हर संभव मदद के लिए न केवल सरकार, बल्कि विपक्ष भी आपदा की इस कठिन घड़ी में पीड़ितों तक पहुंच कर राहत देने की भरपूर कोशिश में है ..

उत्तराखंड में इस साल समूह-ग के 1098 पदों पर होगी भर्ती, आयोग ने जारी किया कैलेंडर

142 Minutes Read -

उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने वर्ष 2025-26 के लिए समूह-ग भर्ती परीक्षाओं का वार्षिक कार्यक्रम घोषित कर दिया है। आयोग ने विभिन्न विभागों में होने वाली सीधी भर्तियों के लिए विज्ञापन और परीक्षाओं की संभावित तिथियां तय कर दी हैं।

कार्यक्रम के अनुसार वन दरोगा के 124 पदों के लिए विज्ञापन 28 अक्तूबर 2025 को जारी होगा और इसकी परीक्षा पांच अप्रैल 2026 से होगी। सहायक समीक्षाधिकारी व वैयक्तिक सहायक की टंकण एवं आशुलेखन परीक्षा 17 नवम्बर 2025 से प्रस्तावित है। उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के सदस्य के 20 पद के लिए साक्षात्कार 15 दिसम्बर 2025 से आयोजित होंगे।

माध्यमिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापक एलटी (विशेष शिक्षा शिक्षक) के 128 पदों हेतु विज्ञापन 12 सितम्बर 2025 को प्रकाशित होगा और परीक्षा 18 जनवरी 2026 से कराई जाएगी। विशेष तकनीकी योग्यता वाले 62 पदों के लिए विज्ञापन 26 सितम्बर 2025 को निकलेगा तथा परीक्षा एक फरवरी 2026 से होगी।

 

वाहन चालक परीक्षण सात अप्रैल 2026 से प्रस्तावित
विभिन्न विभागों में वाहन चालक के 37 पदों के लिए विज्ञापन 15 अक्तूबर 2025 को आएगा और परीक्षा 22 फरवरी 2026 से होगी। कृषि इंटरमीडिएट एवं स्नातक योग्यता वाले 212 पदों के लिए विज्ञापन 31 अक्तूबर 2025 को प्रकाशित होगा और परीक्षा 15 मार्च 2026 से होगी। सहायक लेखाकार के 36 पदों के लिए विज्ञापन 14 नवम्बर 2025 को जारी होगा और परीक्षा 29 मार्च 2026 से होगी। वाहन चालक परीक्षण सात अप्रैल 2026 से प्रस्तावित है।

सामान्य ग्रुप-सी के अंतर्गत कनिष्ठ सहायक, वैयक्तिक सहायक एवं अन्य पदों की भर्ती के लिए 386 पदों पर विज्ञापन पांच दिसम्बर 2025 को आएगा और परीक्षा 10 मई 2026 से होगी। आईटीआई, डिप्लोमा एवं डिग्री स्तर की योग्यता वाले 41 पदों के लिए विज्ञापन 24 दिसम्बर 2025 को प्रकाशित होगा तथा परीक्षा 31 मई 2026 से आयोजित होगी।

इसके अलावा विज्ञान विषय (इंटरमीडिएट,स्नातक) योग्यता वाले चार पदों के लिए विज्ञापन सात जनवरी 2026 को निकलेगा और परीक्षा सात जून 2026 से होगी। विभिन्न विभागों में स्नातक स्तर की योग्यता वाले 48 पदों का विज्ञापन 21 जनवरी 2026 को आएगा तथा परीक्षा 21 जून 2026 से कराई जाएगी।

टंकण एवं आशुलेखन परीक्षा 30 जून 2026 से शुरू होगी। आयोग के सचिव डॉ. शिव कुमार बरनवाल ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा कार्यक्रम केवल प्रस्तावित है और अपरिहार्य परिस्थितियों में रिक्तियों की संख्या एवं परीक्षा तिथियों में बदलाव किया जा सकता है।

आपदा का असर…अब केवल केदारनाथ-बदरीनाथ पर टिकी चारधाम यात्रा, लेकिन भूस्खलन बड़ी चुनौती

117 Minutes Read -

आपदा के कारण चारधाम यात्रा केदारनाथ व बदरीनाथ धाम पर टिकी है लेकिन दोनों की यात्रा की राह में भूस्खलन बड़ी चुनौती है। उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा पूरी तरह से बंद है। इस बार भारी बारिश से चारधाम यात्रा के संचालन पर ज्यादा असर पड़ा है।आमतौर पर मानसून सीजन चारधाम यात्रा में आने वाले तीर्थ यात्रियों की संख्या में कमी आती है। सितंबर माह में फिर से यात्रा की रफ्तार बढ़ जाती है लेकिन इस बार उत्तरकाशी जिले में आई आपदा से गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद पड़ी है। श्रद्धालुओं के जयकारों से गूंजने वाले दोनों धामों में इन दिनों सन्नाटा पसरा है।

 

पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 30 अप्रैल से चारधाम यात्रा शुरू हुई थी। अब तक चारधाम में 42.54 लाख से अधिक तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। गंगोत्री व यमुनोत्री धाम की यात्रा बंद है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में प्रतिदिन तीन से पांच हजार श्रद्धालु दर्शन कर रहे हैं। बदरीनाथ धाम मार्ग पर कमेड़ा, लामबगड़ भूस्खलन के कारण भूस्खलन से यात्रा बाधित हो रही है। जबकि केदारनाथ धाम जाने के लिए सोनप्रयाग व गौरीकुंड के बीच भूस्खलन एक बड़ी चुनौती है।

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि आपदा के कारण चारधाम यात्रा में रफ्तार थमी है। मौसम बदलने के बाद फिर से यात्रा गति पकड़ेगी। इस बार बारिश के कारण जगह-जगह भूस्खलन की संभावना अधिक रहती है। इसे देखते हुए तीर्थयात्रियों को मौसम की जानकारी प्राप्त करने के बाद यात्रा करनी चाहिए।

 

चारधाम यात्रा व हेमकुंड साहिब में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या
       धाम                                    दर्शन कर चुके तीर्थयात्री

 

  • केदारनाथ                                          14.80 लाख
  • बदरीनाथ                                           12.78 लाख
  • गंगोत्री                                                6.69 लाख
  • यमुनोत्री                                              5.86 लाख
  • हेमकुंड साहिब                                    2.49 लाख

मातृशक्ति ने लिलियम की खुशबू से गढ़ी नई पहचान,प्रति वर्ष 10 लाख आय का लक्ष्य रखा गया है निर्धारित

122 Minutes Read -

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार का आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का संकल्प अब धरातल पर खिलता नज़र आ रहा है। जनपद पौड़ी गढ़वाल के कोट ब्लॉक की महिलाएं लिलियम फूलों की खेती से आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रही हैं। इन फूलों की खुशबू अब न केवल खेतों में, बल्कि महिलाओं के जीवन में भी उम्मीद और समृद्धि की महक भर रही है।

उद्यान विभाग, ग्रामोत्थान परियोजना एवं एनएचएलएम के संयुक्त प्रयासों से कोट ब्लॉक में 22 पॉली हाउस बनाए गए हैं। पहले चरण में आठ पॉली हाउसों में महिला समूहों ने हॉलैंड से आयातित ओरिएंटल और डासिंग स्टार वैरायटी के बल्ब लगाए हैं।

महिलाओं को जिला योजना से 50 प्रतिशत अनुदान

उत्पादन से लेकर विपणन तक हर स्तर पर सहयोग और बाज़ार उपलब्ध कराने की गारंटी सरकार द्वारा दी जा रही है। ए-ग्रेड लिलियम की कीमत 80 रुपये, बी-ग्रेड 70 रुपये और सी-ग्रेड 60 रुपये तक तय की गई है। इससे यहां की महिलाएं प्रति वर्ष 10 लाख रुपये तक की आय का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रही हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा –
“उत्तराखण्ड की मातृशक्ति हमारे राज्य का वास्तविक बल है। कोट ब्लॉक की महिलाओं ने यह सिद्ध कर दिया है कि संकल्प और परिश्रम से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। यह सिर्फ फूलों की खेती नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, नवाचार और महिला सशक्तिकरण की जीवंत मिसाल है। हमारी सरकार हर बेटी और हर महिला को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड के सपने को साकार करने में हमारी मातृशक्ति सबसे बड़ी सहभागी बनेगी।”

यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर रही है, बल्कि प्रदेश सरकार की महिला सशक्तिकरण, नवाचार आधारित खेती और आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की परिकल्पना को नई दिशा दे रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का विज़न

“हमारा संकल्प है कि उत्तराखण्ड की हर बेटी और हर महिला अपने सपनों को पंख दे सके।आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड का मार्ग हमारी मातृशक्ति के साहस और मेहनत से ही प्रकाशित होगा। आज पौड़ी की धरती से जो खुशबू उठ रही है, वही कल पूरे उत्तराखण्ड की पहचान बनेगी।”

नाराजगी की अटकलों पर पूर्व CM त्रिवेंद्र रावत ने किया खारिज, सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी बताया हवा-हवाई

100 Minutes Read -

सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम

बोले, नीति और नीलामी से खनन पट्टे दिए जा रहे, इसमें कोई बुराई नहीं

पूर्व मंत्री हरक सिंह बताएं कि जो पैसा दिया, क्या है उसका स्रोत

अधिकारियों को दी नसीहत, जनता के प्रति बनें जवाबदेह

 

देहरादून। दिल्ली में भाजपा के प्रदेश प्रभारी दुष्यंत कुमार से हुई मुलाकात के बाद देहरादून लौटने पर हरिद्वार सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सुर नरम दिख रहे हैं। माना जा रहा है कि पार्टी हाईकमान ने त्रिवेंद्र समेत अन्य नेताओं को पार्टी लाइन पर चलने की ताकीद की है।डिफेंस कालोनी स्थित आवास पर पत्रकारों से बातचीत में त्रिवेंद्र ने उन अटकलों पर विराम लगाया, जिसमें दिल्ली में सांसदों के साथ हुई पार्टी संगठन की बैठक से तुरंत चले जाने को उनकी नाराजगी से जोड़कर देखा जा रहा था। उन्होंने कहा कि नाराजगी जैसी कोई बात नहीं थी। उन्हें कहीं जाना था, इसलिए तुरंत ही बैठक से चले गए थे।

 

उन्होंने राज्य सरकार में नेतृत्व में बदलाव की चर्चा को भी हवा-हवाई करार दिया और कहा कि धामी सरकार पूरे पांच साल चलेगी। बार-बार मुख्यमंत्री बदलना या इसकी चर्चा करना गलत है। उन्होंने विपक्ष कांग्रेस को भी आड़े हाथ लिया।

 

सांसद व पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात सामान्य प्रक्रिया है। इसमें हर जगह छेद ढूंढते रहें, यह ठीक नहीं है। खनन से जुड़े प्रश्न पर उन्होंने कहा कि सरकार नीति के तहत नीलामी के जरिये खनन पट्टे दे रही है तो इसमें बुराई क्या है। एक अन्य प्रश्न पर उन्होंने कहा कि गैरसैंण को भाजपा ने ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया। यह स्थायी राजधानी कब बनेगी, इसका जवाब सरकार बेहतर दे सकती है।

 

पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत के आरोपों पर उन्होंने कहा कि वह उनका पूरा इतिहास जानते हैं। पांच-छह दिन से हरक सिंह काफी जोश में हैं। हो सकता है ये उनकी आंतरिक राजनीति का हिस्सा हो या कुछ और कारण हैं अथवा वह स्वयं को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पूर्व में भाजपा ने संगठन चलाने के लिए पूरी पारदर्शिता के साथ चेक से चंदा लिया। हरक सिंह ने चंदे को लेकर बढ़ा चढ़ाकर बोला, लेकिन जो पैसा लिया गया वह चेक से आया। अब हरक बताएं कि इस पैसे का स्रोत क्या है।

विपक्ष कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा के मानसून सत्र में कांग्रेस ने सदन में जो व्यवहार किया, वह उचित नहीं है। उनकी जानकारी में आया है कि कार्यमंत्रणा समिति में पहले दिन आपदा का विषय विपक्ष की ओर से लाने पर सहमति बनी थी, लेकिन वह कानून व्यवस्था का मुद्दा लेकर आया। सरकार इस पर जवाब देती, लेकिन यह सब नियमों के तहत लाया जाना चाहिए था।पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत के भांजे के प्रकरण पर उन्होंने कहा कि पुलिस का जो काम है, उसे करना चाहिए। यह गंभीर प्रकरण है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि इस मामले में लापरवाह अधिकारियों को आड़े हाथ लेने की जरूरत है। उन्होंने नौकरशाही को भी नसीहत दी। उन्होंने कहा कि नीतियों व निर्णयों का क्रियान्वयन शासन की जिम्मेदारी है। इसके लिए अधिकारियों को ठीक से काम करना चाहिए। जनता के प्रति उनकी जवाबदेही होनी चाहिए।

रेबीज संक्रमित युवक की निजी अस्पताल में हुई मौत, कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे थे लक्षण

105 Minutes Read -

रेबीज संक्रमित मरीज की सोमवार सुबह करीब सात बजे मौत हो गई। युवक को एम्स में भी राहत नहीं मिली थी। लिहाजा उसके परिजन उसे एक निजी अस्पताल ले गए थे। वहां पर उसने दम तोड़ दिया। दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले युवक को लाया गया था। करीब तीन घंटे तक उसे दून अस्पताल में उपचार दिया गया था। बाद में हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया था।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर रविंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि व्यक्ति को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। उसके अंदर तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे। मृतक की मां शशि शर्मा ने बताया कि उसे दून अस्पताल से एम्स ऋषिकेश लेकर गई थीं जहां पर उसको प्राथमिक उपचार दिया गया था। स्थिति में सुधार नहीं होने पर उसे दूसरे अस्पताल में लेकर गईं, जहां पर सुबह उसकी मौत हो गई।

 

कुत्ते के काटने के छह माह बाद दिखे रेबीज के गंभीर लक्षण, युवक एम्स रेफर

दून अस्पताल में रविवार को रेबीज के गंभीर लक्षण दिखने वाले एक 30 वर्षीय युवक को भर्ती किया गया। करीब चार घंटे बाद हालत बिगड़ने पर उसे एम्स ऋषिकेश रेफर कर दिया गया। युवक को पानी और उजाले से डर लगने के साथ ही उसके मुंह से लगातार लार गिर रही थी। साथ ही तीव्र आक्रामकता के लक्षण भी दिख रहे थे।

चिकित्सकों समेत वहां मौजूद सभी लोग हैरान हो गए। काफी देर तक चिकित्सक समझ ही नहीं पाए कि युवक को क्या परेशानी है। परिजनों ने जब छह महीने पूर्व युवक को कुत्ते के काटने की बात बताई तो चिकित्सकों को रेबीज होने का संदेह हुआ।

एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई
इसके बाद क्लीनिकल जांच की तो यह बात काफी हद तक पुख्ता भी हो गई। चिकित्सक के अनुसार युवक देहरादून का ही रहने वाला है। परिजनों ने यह बात भी बताई कि युवक को कुत्ते के काटने के बाद एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाई गई।

रेबीज का नहीं है कोई उपचार 
डॉ. आरएस बिष्ट के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति रेबीज की चपेट में आ जाए तो उसका कोई उपचार नहीं है। ऐसे में लोगों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। अगर किसी को गली या फिर पालतू कुत्ता काटता है तो उसे जरूरी तौर पर एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाना चाहिए।

दून अस्पताल में हर रोज वैक्सीन लगवाने पहुंच रहे 35 लोग 
दून अस्पताल के आपात चिकित्सा अधिकारी डॉ. अमित अरुण ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन लगवाने हर रोज करीब 35 लोग पहुंच रहे हैं। इनमें से 10 से 12 लोग गंभीर घायल होते हैं जिनको एंटी रेबीज के साथ ही सीरम भी लगाना पड़ता है। इन दिनों कुत्ते काटने के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिली है।

सीएम ने थराली आपदा प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया

201 Minutes Read -

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रविवार को चमोली जिले के आपदा प्रभावित थराली क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना। उन्होंने अधिकारियों को राहत एवं पुनर्वास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कुलसारी राहत शिविर का दौरा कर प्रभावितों से फीडबैक लिया और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। इस दौरान उन्होंने पूर्णतः क्षतिग्रस्त मकानों एवं मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की तत्काल सहायता राशि के चेक प्रदान किए। साथ ही बेघर हुए परिवारों के पुनर्वास की उचित व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए।

सीएम ने कहा कि राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं और राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावितों के साथ खड़ी है। उन्होंने जिला प्रशासन द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना भी की।

जिलाधिकारी संदीप तिवारी ने बताया कि प्रभावितों को सुरक्षित राहत शिविरों में ठहराया गया है तथा भोजन, चिकित्सा और रहने की उचित व्यवस्था की गई है। क्षतिग्रस्त सड़क मार्गों को सुचारू कर दिया गया है और शीघ्र ही बिजली व पेयजल आपूर्ति भी बहाल कर दी जाएगी।

मुख्यमंत्री के साथ विधायक भूपाल राम टम्टा, जिला पंचायत अध्यक्ष दौलत सिंह बिष्ट, पुलिस अधीक्षक सर्वेश पंवार समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।