Category Archive : उत्तराखंड

सीएम धामी चमोली दौरे पर, राहत बचाव कार्यों का किया स्थलीय निरीक्षण, प्रभावितों से मिलेंगे

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मुख्यमंत्री पुष्कर धामी आज चमोली आपदा प्रभावित क्षेत्र नंदानगर पहुंचे। यहां वह आपदा, राहत बचाव कार्यों का स्थलीय निरीक्षण कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्र फाली, कुंतरी, अन्य में सीएम सर्वे करेंगे। इसके अलावा सीएम आपदा प्रभावित सभी लोगों से भी मिलेंगे।

शुक्रवार को फाली लगा कुंतरी क्षेत्र से मलबे से पांच शव और बरामद हुए हैं। अब तक इस आपदा में लापता हुए 10 लोगों में से एक व्यक्ति को सुरक्षित निकाल लिया गया है जबकि सात लोगों के शव बरामद हो चुके हैं। धुर्मा गांव में अभी भी दो लोग लापता हैं जिनकी तलाश जारी है। बरामद किए गए सभी सात शव उनके परिजनों को सौंप दिए गए हैं।आपदा में जान गंवाने वाले लोगों का शुक्रवार को नम आंखों से अंतिम संस्कार किया गया। नंदानगर में नंदाकिनी और चुफला नदी के संगम पर यह प्रक्रिया पूरी की गई जहां सुबह से एक के बाद एक जलती चिताएं देखकर हर किसी की आंखें भर आईं। पूरा क्षेत्र शोक में डूबा हुआ है।
बृहस्पतिवार को नरेंद्र सिंह और जगदंबा प्रसाद के शव बरामद हुए थे। सुबह सबसे पहले नरेंद्र सिंह का अंतिम संस्कार किया गया। जगदंबा प्रसाद के रिश्तेदार के न आने के कारण उनके शव को सुरक्षित रखा गया था। बाद में जब उनकी पत्नी भागा देवी का शव भी बरामद हो गया और रिश्तेदार पहुंचे तो दोनों पति-पत्नी का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके बाद आपदा में मारे गए अन्य लोगों के शवों का भी संगम स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया।

चमत्कार! 16 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला व्यक्ति,देखें वीडियो

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चमत्कार! 16 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकला व्यक्ति।

चमोली के कुन्तरी लगा फाली में रेस्क्यू टीमों का बड़ा अभियान।

एनडीआरएफ-एसडीआरएफ और स्थानीय लोगों ने मिलकर किया रेस्क्यू।

कुंवर सिंह को सुरक्षित बाहर निकाला गया, हालत स्थिर बताई जा रही।

आपदा में दबे अन्य लोगों की खोजबीन तेज, रेस्क्यू ऑपरेशन जारी।

प्रशासन का दावा राहत-बचाव में कोई ढिलाई नहीं, सभी को निकालने का प्रयास।

दून रिस्पना नदी पर अतिक्रमण का पर्दाफाश, सैटेलाइट तस्वीरों से खुली पोल

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यह बात कोई नई नहीं है कि प्राकृतिक आपदाओं को रोका नहीं जा सकता है, लेकिन उससे जानमाल के नुकसान को कम जरूर किया जा सकता है। यह कैसे करना है, इस बात को भी हमारे विज्ञानी और नियोजन के विशेषज्ञ चीख-चीख कर लंबे समय से कहते आ रहे हैं कि प्रकृति के रास्ते में नहीं आना है। लेकिन, लगता है कि राजधानी दून में ही आपदा से बचे रहने का सबसे बड़ा सबक हम भूल गए हैं।

सोमवार रात को हुई अतिवृष्टि और सहस्त्रधारा क्षेत्र में दो जगह फटे बाद के जो हालात पैदा हुए, उससे साफ हो गया कि नदियों का गला घोंटने का अंजाम कितना खतरनाक हो सकता है। दून में नदी क्षेत्रों में धड़ल्ले से किए गए अतिक्रमण की खतरनाक स्थिति सेटेलाइट चित्रों में भी समाने आई है। जिसमें दिख रहा है कि काठबंगला क्षेत्र में रिस्पना नदी की भूमि वर्ष 2003 से 2018 के बीच में किस कदर जमकर अतिक्रमण किए गए।

वरिष्ठ भूविज्ञानी और एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय में भूविज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. एमपीएस बिष्ट ने राज्य गठन के महज तीन साल बाद और इसके 15 साल बाद 2018 के चित्रों का अध्ययन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो काठबंगला क्षेत्र वर्तमान में अतिक्रमण से पूरी तरह भर चुका है, वहां वर्ष 2003 में रिस्पना नदी के दोनों किनारे पूरी तरह खाली थे।

इसके साथ ही दोनों किनारों पर जंगलनुमा एक पूरा क्षेत्र था। वहीं, महज 15 साल बाद 2018 में सेटेलाइट चित्र में रिस्पना नदी बमुश्किल नजर आ रही है। सेटेलाइट चित्र में दोनों छोर पर घनी बस्तियां और भवन नजर आ रहे हैं। इसके अलावा 15 साल पहले का जंगलनुमा भाग 95 प्रतिशत तक गायब हो चुका है।

देहरादून में रिस्पना और बिंदाल नदी क्षेत्रों में अतिक्रमण की बाढ़ पर मनमोहन लखेड़ा बनाम राज्य में नैनीताल हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था। अतिक्रमण पर कार्रवाई करने के आदेश के बाद सरकारी मशीनरी हरकत में भी आई थी। तब उत्तराखंड अंतरिक्ष उपयोग केंद्र (यूसैक) ने इसरो के माध्यम से अमेरिकी कंपनी मैक्सर से शहर के सभी 60 वार्डों (अब बढ़कर संख्या 100) के सेटेलाइट चित्र मंगाए थे।

यह चित्र प्रत्येक छह माह के अंतर में अतिक्रमण की स्थिति को बयां करने वाले थे। उस समय कुल 2100 सेटेलाइट चित्र मंगाए गए थे। हालांकि, अतिक्रमण पर न तो कार्रवाई की गई और न ही चित्रों के आधार पर अतिक्रमण की भयानक स्थिति को बाहर आने दिया गया। यह चित्र वर्तमान में भी यूसैक कार्यालय में डंप पड़े हैं।

मलबे की चपेट में आने से बाल-बाल बचे सांसद अनिल बलूनी और विधायक, प्रभावितों से मिलने थे पहुंचे

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सांसद अनिल बलूनी व विधायक विनोद कंडारी के वाहन के देवप्रयाग डिग्री कॉलेज के निकट पहाड़ी से अचानक हुए भूस्खलन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गए। दोनों वाहन से देवप्रयाग में आपदा से हुए नुकसान का जायजा लेने आ रहे थे। इसी दौरान डिग्री काॅलेज के निकट पहाड़ी से अचानक भूस्खलन हो गया। जिससे उनका वाहन मलबे मेें फंस गया।

गनीमत रही कि पहाड़ी से गिरे मलबे से कोई चोटिल नहीं हुआ। इसके बाद सांसद बलूनी तहसीलदार के वाहन से देवप्रयाग तक पहुंचे। यहां सभी कार्यक्रमों में भाग लेने के बाद वह प्राइवेट वाहन से देहरादून के लिए रवाना हुए। उनके सरकारी वाहन को निकालने के लिए एनएच की ओर से मलबा हटाने का कार्य शुरू कर दिया गया था।
भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा उत्तराखंड
सांसद अनिल बलूनी ने कहा कि उत्तराखंड में इस वर्ष आई भीषण अतिवृष्टि और भूस्खलन ने इतने गहरे घाव दिए हैं, जिन्हें भरने में बहुत समय लगेगा। कल शाम आपदा प्रभावित क्षेत्र में भूस्खलन का एक भयावह दृश्य आप सभी के साथ साझा कर रहा हूं। यह दृश्य स्वयं बता रहा है कि हमारा उत्तराखंड इस समय कितनी भीषण प्राकृतिक आपदा से गुजर रहा है।
उन्होंने कहा कि ‘मैं बाबा केदारनाथ से सभी लोगों के सुरक्षित जीवन, अच्छे स्वास्थ्य एवं खुशहाली की मंगलकामना करता हूं। आपदा की इस घड़ी में जन जन की सेवा में लगे सभी अधिकारियों, एनडीआरएफ-एसडीआरएफ के जवानों, प्रशासन और कठिन परिस्थितियों में भी सड़कों से मलबा हटाने वाले कर्मचारियों के सेवाभाव की सराहना करता हूं।’

कुदरत का कहर; घर बहे, लोग लापता, आंखों में खौफ, 10 तस्वीरों में नंदानगर की तबाही का मंजर

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उत्तराखंड के चमोली जिले के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी तबाही मच गई। एक ही रात में तीन गांवों में घर, गौशालाएं, और ज़िंदगियां मलबे में समा गईं। अब तक 12 लोगों के लापता होने की पुष्टि हो चुकी है, जबकि करीब 30 से अधिक भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। रेस्क्यू टीमें मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं।

200 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। घाट तहसील के नंदानगर क्षेत्र में बुधवार देर रात बादल फटने से भारी नुकसान हुआ है। आपदा में अब तक 12 लोगों के लापता होने की सूचना है। इसमें सबसे अधिक प्रभावित ग्राम कुंतरी लगा फाली है, जहां 8 लोग लापता हैं और 15 से 20 भवन व गौशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। रात तीन बजे के करीब भारी बारिश के बीच लोगों के घरों पर मलबा आ गिरा।

दो महिलाओं और एक बच्चे को मलबे से निकाला
दो महिलाओं और एक बच्चे को पुलिस व डीडीआरएफ की टीमों ने मलबे से सुरक्षित बाहर निकाला। इन घायलों को नंदानगर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया है। करीब 200 ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। वहीं, ग्राम कुंतरी लगा सरपाणी में भी दो लोग लापता हैं और दो भवन ध्वस्त हुए हैं। यहां भी रेस्क्यू टीमों ने 100 ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला। ग्राम धुर्मा में मोक्ष नदी उफान पर आ गई, जिससे दो लोग लापता हैं और करीब 10 मकानों को नुकसान पहुंचा है।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

बचाव कार्यों में एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी (गौचर 8वीं वाहिनी), डीडीआरएफ और राजस्व विभाग की टीमें जुटी हैं। लेकिन सड़कों के जगह-जगह बंद होने और भूस्खलन के कारण टीमों को घटनास्थल पर पहुंचने में देरी हो रही है। अधिकतर टीमें अब पैदल मार्ग से मौके पर पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सचिव आपदा प्रबंधन से चमोली की स्थिति की जानकारी ली और निर्देश दिए कि लापता लोगों की खोज में कोई कोताही न हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है और सभी राहत शिविरों में रहने, खाने, इलाज और सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

घटना की सूचना मिलते ही सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी डीआईजी राजकुमार नेगी, और यूएसडीएमए के विशेषज्ञों ने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से निगरानी शुरू कर दी है। सभी बचाव टीमें सक्रिय कर मौके पर भेजी गई हैं। कंट्रोल रूम से हर गतिविधि पर निगरानी रखी जा रही है।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

उत्तराखंड के पर्वतीय इलाकों में आज भी तेज बारिश के आसार हैं। हालांकि मैदानी इलाकों में राहत रहेगी। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार नैनीताल, बागेश्वर, पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों में तेज बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos
इसके अलावा देहरादून, उत्तरकाशी, चंपावत और ऊधमसिंह नगर जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना है।
Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos
आने वाले दिनों की बात करें तो 23 सितंबर तक प्रदेशभर में हल्की बारिश के आसार हैं।
Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदले पैटर्न के चलते इस बार मानसून में तेज दौर की अधिक बारिश हो रही है।

Chamoli Cloudburst in Nandanagar causes massive destruction many missing rescue operations underway photos

वहीं दून घाटी में आई आपदा में दूसरा सबसे बड़ा हादसा मालदेवता क्षेत्र के फुलेत गांव में हुआ है। यहां पर एक मकान के मलबे में सहारनपुर के छह लोगों के दबे होने की आशंका है।

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सीमांत चमोली की नंदानगर तहसील में फिर फटा बादल

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आपदा से पहले से कराह रहे जिले के नंदानगर प्रखंड में 17 सितम्बर की रात फिर कहर बन कर टूटी। नंदानगर में पांच लोगों के लापता होने की सूचना मिली है जबकि दो लोग घायल बताए जा रहे हैं।

आपदा परिचालन केंद्र से गुरुवार की सुबह 6 बजे से 6 बजकर 18 मिनट पर जारी प्रारंभिक सूचना के अनुसार नगर पंचायत नंदानगर के वार्ड कुन्तरि लगाफाली में भारी वर्षा के कारण मलबा आने से 06 भवन क्षतिग्रस्त हुए हैं। घटना में 05 लोगों के लापता होने की सूचना है। 02 को बचा लिया गया है।

 

नंदानगर तहसील के धुर्मा गांव में भी भारी वर्षा के कारण 4-5 भवनों की क्षति की सूचना प्राप्त हुई है।  प्रारंभिक सूचना के अनुसार जनहानि नहीं है। मोक्ष नदी का जलस्तर बढ़ा है।

प्रशासनिक स्तर पर इन खबरों की पुष्टि के प्रयास किए जा रहे हैं।

दूसरी ओर बांजबगड़, मोख धुर्मा आदि क्षेत्रों में बादल फटने से हर तरह तबाही का खौफनाक मंजर पसरा हुआ है। पीड़ित ग्रामीणों ने जिलाधिकारी संदीप तिवारी तक किसी तरह सूचना पहुंचा कर अपने स्तर से स्थिति का आकलन कर राहत पहुंचाने की अपील की है।
प्रारंभिक खबरों में बताया गया है कि पूरे इलाके में भारी तबाही हुई है।

मोक्ष नदी के किनारे बसे सेरा गांव में सर्वाधिक नुकसान की खबर है। सेरा गांव में बीती 8 जुलाई को भी भारी तबाही हुई थी। तब से किसी तरह जीवन पटरी पर लौट रहा था लेकिन 17 सितम्बर को दोबारा आई भीषण आपदा ने सब कुछ तबाह कर दिया। सेरा के लोगों पर प्रकृति की मार के बाद यह महामार पड़ी है

लापता ग्रामीणों का विवरण

 

 

उधर, नंदानगर में बादल फटने से पांच लोगों के लापता होने की खबर है।  इस आपदा में वहां दो लोगों के घायल होने की जानकारी मिली है।
शुरुआती खबरों के मुताबिक सेरा में महिपाल सिंह, अवतार सिंह, पुष्कर के आवासीय भवन खतरे की जद में हैं। खेत खलिहान को भी भारी नुकसान पहुंचा है।

सेरा में सबसे पहले महिपाल सिंह का बाथरूम बहा। यह घर के कोने में बना था। उसके बाद मोक्ष नदी का जल घर में घुस गया। इस कारण घर पूरी तरह खतरे की जद में है। उसके बगल के अवतार सिंह और पुष्कर सिंह के घर भी खतरे में आ गए। रात को किसी तरह भाग कर लोगों ने जान बचाई। सेरा से ऊपर पहाड़ी पर बसे धुर्मा गांव में भी बादल फटने से की आवासीय भवन असुरक्षित हो गए हैं जबकि गांव के ही बागड़ टॉप में कई दुकानें और मकान बह गए हैं।

बताया जा रहा है कि बागड़ बस्ती के ऊपर से बादल पटने के कारण भारी मलबा आने से नदी ने रास्ता बदला से सेरा गांव में घरों को नुकसान पहुंचाया। उधर नंदानगर के कुंतरी, फफाली बांजबगड़ में भी भारी तबाही की खबर है। वहां कई घर मलबा आने से दब से गए हैं। बादल फटते ही लोग जंगलों की ओर भागे। अभी तक जनहानि के बारे में कोई जानकारी नहीं है किंतु तबाही के मंजर ने लोगों को बदहवास कर दिया है। नंदानगर की शुरुआती खबरों में बताया जा रहा है कि बलबीर सिंह, विनोद सिंह, प्रकाश सिंह, अवतार सिंह, सिबर सिंह, महिपाल सिंह बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

आपदा के बाद पूरे इलाके का संपर्क कट गया है। बादल फटने के साथ ही इलाके में बिजली आपूर्ति ठप हो गई थी। सड़कों को भी भारी नुकसान पहुंचा है, इस कारण आवाजाही भी ठप है। सेरा में सड़क पर बने पेट्रोल पंप में भी मलबा भर गया है। बिजली न होने से मोबाइल भी वहां काम नहीं कर पा रहे हैं।

प्रशासन को किसी तरह सूचना पहुंचा दी गई है किंतु प्रशासन के लिए भी इस आपदा प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाना आसान नहीं है। लोग सहमे हुए हैं और नियति को कोस रहे हैं। पीड़ितों के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ गए हैं कि उन्हें रोने के अलावा कुछ नहीं सूझ रहा है।

दून की आपदा लील गयी 13 लोगों को, 16 लापता

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अतिवृष्टि के कारण देहरादून में 13 व्यक्तियों की मृत्यु हुई। तीन व्यक्ति घायल और 16 लापता हैं।

जिला आपदा परिचालन केंद्र से मिली जानकारी के अनुसार देहरादून में अतिवृष्टि के कारण 13 व्यक्तियों की मृत्यु, 03 व्यक्ति घायल और 16 व्यक्ति लापता हुए है। वहीं सरकारी एवं निजी परिसंपत्तियों का भी भारी नुकसान हुआ है। देहरादून जनपद के सभी विकासखंडो में 13 पुल, 10 पुलिया, 02 मकान, 31 दीवार, 02 अमृत सरोवर, 12 खेत, 12 नहर, 21 सड़के, 7 पेयजल योजना, 08 हॉज, 24 पुस्ता आदि परिसंपत्तियों का भारी नुकसान हुआ है।

देखें सूची

मजयाडा में तीन लोग मलबे में दबे होने और एक व्यक्ति लापता होना बताया गया। यहां पर कुछ आवासीय भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, पंचायत भवन, सामुदायिक केंद्र, 13 दुकान, 08 होटल, 03 रेस्टोरेंट सहित सहस्रधारा-कार्लीगाड मोटर मार्ग भूस्खलन के कारण 09 से अधिक स्थानों पर क्षतिग्रस्त हुआ है। रा.पूर्व.मा.वि. चामासारी में बनाए गए राहत शिविर में कुछ प्रभावित लोगों को ठहराया गया है। शिविर में प्रभावित लोगों से मिलते हुए जिलाधिकारी ने उन्हें हर संभव मदद का भरोसा दिलाया।

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की मदद से कार्लीगाड में फंसे 70 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाओं को जल्द बहाल करने का प्रयास जारी है।

मंगलवार की सुबह सीएम धामी ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया।

जिलाधिकार सविन बंसल  ने देहरादून शहर के मालदेवता, सहस्रधारा, मजयाडा, कार्लीगाड आदि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में ग्राउंड जीरो पर पहुंच कर मौजूदा स्थिति और क्षति का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने पीड़ित परिवारों से भेंट करते हुए उन्हें हर संभव मदद पहुंचाने का भरोसा दिलाया। निरीक्षण के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय सिंह और सीडीओ अभिनव शाह भी उनके साथ मौजूद रहे।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्याे में तेजी लाए। लोनिवि एवं पीएमजीएसवाई पर्याप्त संख्या में मैनपावर और मशीनरी लगाते हुए अवरूद्व सड़क एवं संपर्क मार्गाे को शीघ्र सुचारू करें।
प्रभावित क्षेत्रों में ड्राई राशन, राहत शिविर में ठहराए गए लोगों तक फूड पैकेट वितरण सुनिश्चित करते हुए उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध की जाए। जिलाधिकारी ने प्रभावित क्षेत्रों में बिजली, पानी एवं अन्य मूलभूत सुविधाओं को तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए।

सोमवार की रात्रि को अतिवृष्टि के कारण देहरादून के विभिन्न क्षेत्रों में जनहानि, पशु हानि, सरकारी एवं निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा है। सड़क, संपर्क मार्ग, पुल, पुलिया क्षतिग्रस्त होने से जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। जिलाधिकारी ने कहा कि आपदा की इस कठिन घडी में जिला प्रशासन प्रभावित परिवारों के साथ खडा है। प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने में कोई कोर कसर नही छोड़ी जाएगी। आपदा प्रभावित सभी क्षेत्रों में पुलिस, प्रशासन, एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के साथ क्विक रिस्पांस टीमें तैनात की गई है। रेस्क्यू कार्य के लिए जो भी आवश्यकता पड रही है, उस पर तत्काल कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

जिलाधिकारी ने कहा कि प्रभावित परिवार यदि सुरक्षित स्थानों पर किराए में शिफ्ट होना चाहते है तो उनको प्रति परिवार तीन माह तक 4-4 हजार किराया भी दिया जाएगा।

राहत-बचाव कार्यों में नहीं छोड़ी जाएगी कोई कसर,मुख्यमंत्री ने दिए युद्धस्तर पर कार्रवाई के निर्देश

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देहरादून सहित प्रदेशभर में लगातार हो रही अतिवृष्टि के कारण उत्पन्न स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी मंगलवार देर रात्रि को राज्य आपदा परिचालन केंद्र (SEOC) पहुँचे। इस दौरान उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग, SDRF, जिला प्रशासन और अन्य संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक कर राहत एवं बचाव कार्यों की प्रगति की समीक्षा की।

मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने आपदा कंट्रोल रूम में राजधानी देहरादून तथा प्रदेश के अन्य जनपदों में मंगलवार रात अतिवृष्टि से हुए नुकसान की जानकारी ली तथा युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव कार्य संचालित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अतिवृष्टि के कारण जो लोग भी प्रभावित हुए हैं, उन्हें तत्काल हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए। जो लोग लापता हुए हैं, उनकी तलाश के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जाएं। उन्होंने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार सभी प्रभावित परिवारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए की राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं होनी चाहिए। अधिकारी प्रभावित क्षेत्र का दौरा करें और लोगों की समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने आने वाले दिनों में भी मौसम विभाग द्वारा जारी अलर्ट को देखते हुए सभी जनपदों में विशेष सतर्कता बरते जाने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से प्रदेश में अतिवृष्टि से उत्पन्न स्थिति पर नजर रखने तथा जनपदों व विभिन्न विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सहायता पहुंचाई जाए तथा सभी आवश्यक संसाधनों को सक्रिय किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके। उन्होंने यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि बचाव कार्यों में तेजी लाते हुए प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। मुख्यमंत्री ने मौसम पूर्वानुमान को और अधिक सुदृढ़ करने के निर्देश दिए है | उन्होंने आपदा बचाव में साहसिक कार्य करने वाले नागरिकों को भी किया जाए सम्मानित करने की बात कही | सीएम ने पेयजल विभाग को प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की जल्द से जल्द आपूर्ति के साथ ही पेयजल की गुणवत्ता की निरंतर जांच करने के निर्देश दिए है | मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य विभाग को विशेष हिदायत देते हुए कहा कि विभाग को आपदा के बाद फैलने वाली संभावित बीमारियों के प्रति सचेत रहने की आवश्यकता है | इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग अपनी तैयारियां पूरी कर ले |

मुख्यमंत्री  धामी ने कहा कि शासन और प्रशासन पूर्ण रूप से अलर्ट मोड में है और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी जाए तथा राहत शिविरों में आवश्यक व्यवस्थाएं जैसे भोजन, पेयजल, चिकित्सा सुविधा और बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फील्ड पर कार्य कर रही टीमें, विशेषकर SDRF, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के कर्मचारियों की कार्यशैली की सराहना करते हुए कहा कि सभी टीमें समन्वित रूप से कार्य करें और जनता को हर संभव सहायता प्रदान करें।

मुख्यमंत्री ने आमजन से भी अपील की कि वे प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार हर नागरिक के साथ है और संकट की इस घड़ी में हरसंभव मदद प्रदान की जाएगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने आज दूरभाष पर मुख्यमंत्री से उत्तराखंड में अतिवृष्टि से उत्पन्न स्थिति की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने प्रदेश को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया और कहा कि केंद्र सरकार आपदा की इस घड़ी में राज्य के साथ मजबूती से खड़ी है।

बैठक में मुख्यमंत्री  पुष्कर सिंह धामी ने प्रभावित जनपदों के जिलाधिकारियों से राहत कार्यों की आदतन जानकारी ली |

विधायकों की सीएम आवास दौड़ से राजनीति का पारा चढ़ा

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रविवार को सीएम आवास की ओर एक के बाद एक कई विधायकों का काफिला कूच करते देखा गया।एकाएक विधायकों की सीएम से मुलाकात के बाद राजनीतिक उमस ने मौसम की उमस को पीछे छोड़ दिया।

सीएम धामी शनिवार की शाम ही दिल्ली से लौटे थे। और रविवार सुबह से ही लगभग आधा दर्जन विधायक सिलसिलेवार सीएम से मिलने पहुंचे। इनमें निर्दलीय विधायक संजय डोभाल भी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से रविवार को विधायक सहदेव पुंडीर, खजान दास, सुरेश चौहान, भरत चौधरी, संजय डोभाल, अनिल नौटियाल, प्रीतम पंवार एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने शिष्टाचार भेंट की। और अकेले-अकेले भी गुफ्तगू की।
इस दौरान जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों की विभिन्न विकासपरक मांगों एवं स्थानीय समस्याओं से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। लेकिन चर्चा कैबिनेट विस्तार को लेकर ज्यादा हुई।

मुख्यमंत्री ने सभी मांगों के शीघ्र समाधान हेतु सम्बन्धित विभागों को आवश्यक निर्देश देने का आश्वासन दिया। साथ ही उचित समय पर मंत्रिमंडल विस्तार के भी संकेत दिए।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य जनता को त्वरित और पारदर्शी सेवाएँ उपलब्ध कराना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी से समस्याओं का समाधान और विकास कार्य अधिक प्रभावी होंगे।

प्रदेश में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदाओं का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने विधायकगणों से आग्रह किया कि वे प्रभावित क्षेत्रों का स्वयं भ्रमण कर जरूरतमंद परिवारों तक समयबद्ध सहायता पहुँचाने में सहयोग करें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सड़क संपर्क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, पेयजल एवं ऊर्जा जैसे बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड का संतुलित और सर्वांगीण विकास तभी संभव है जब जनप्रतिनिधि जनता की अपेक्षाओं को सरकार तक पहुँचाकर प्रदेश की प्रगति में सक्रिय भागीदारी निभाएँ।

भाजपा के सूत्रों ने विधायकों की सीएम आवास दौड़ पर कुछ तो नहीं कहा। अलबत्ता कुछ नये विधायकों को मौका देने और पुरानों की छुट्टी के संकेत अवश्य दिए। पार्टी का एक वर्ग श्राद्ध पक्ष के बाद फुल कैबिनेट फेरबदल को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है।

जॉर्ज एवरेस्ट पार्क घोटाले पर कांग्रेस का प्रदेशव्यापी प्रदर्शन

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मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट पार्क को उत्तराखंड पर्यटन विभाग द्वारा आचार्य बालकृष्ण से जुड़ी कंपनी को मात्र एक करोड़ रुपये वार्षिक दर पर 15 साल के लिए लीज पर देने के खिलाफ कांग्रेस ने प्रदेशभर में प्रदर्शन कर राज्य सरकार का पुतला दहन किया। कांग्रेस ने ऐलान किया कि जब तक घोटाले की उच्च स्तरीय जांच की घोषणा नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

राजधानी देहरादून में प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष संगठन सूर्यकांत धस्माना और महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी के नेतृत्व में कांग्रेसजन मुख्यालय से रैली निकाल कर क्वालिटी चौक पहुंचे और सरकार का पुतला फूंका।

धस्माना ने कहा कि यह घोटाला तीस से पचास हजार करोड़ रुपये तक का है, जिसने अब तक के भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। उन्होंने मांग की कि जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में हो। धस्माना ने आरोप लगाया कि टेंडर प्रक्रिया में भारी अनियमितताएँ हुईं, न तो ग्लोबल टेंडर हुआ और न ही प्रमुख समाचार पत्रों में विज्ञापन प्रकाशित किया गया। बालकृष्ण से जुड़ी कई कंपनियों ने सांठगांठ कर यह महाघोटाला किया।

महानगर अध्यक्ष डॉ. जसविंदर सिंह गोगी ने कहा कि पेपर लीक, भर्ती, खनन और शराब घोटाले के बाद अब यह नया महाघोटाला साबित करता है कि सरकार आकंठ भ्रष्टाचार में डूबी है। कांग्रेस जनता को इस भ्रष्टाचारी सरकार से मुक्ति दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।

प्रदर्शन व पुतला दहन कार्यक्रम में प्रदेश श्रम प्रकोष्ठ अध्यक्ष दिनेश कौशल, प्रदेश महामंत्री जगदीश धीमान, मनीष नागपाल, आलोक मेहता, विपुल नौटियाल, अमर मेहता, कर्नल राम रतन नेगी, कैप्टेन सुबन सिंह सजवान समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।