Category Archive : उत्तराखंड

ऊधमसिंह नगर जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव परिणाम पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

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नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से जिला पंचायतों के अध्यक्ष पद का आरक्षण नियमावली के तहत न किए जाने के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद 27 अगस्त की तिथि नियत करते हुए कहा है कि चुनाव की समस्त प्रक्रिया जारी रहेगी लेकिन ऊधमसिंह नगर जिले का चुनाव परिमाण घोषित नहीं होगा जो कि याचिका के निर्णय के अधीन रहेगा।

 

मुख्य न्यायाधीश जी नरेन्दर एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। ऊधमसिंह नगर के जिला पंचायत अध्यक्ष पद के उम्मीदवार जीतेंद्र शर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने प्रदेश में जो त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए हैं। वह 2011 की जनगणना के आधार पर कराए हैं। तब से कई जिलों में जनसंख्या का अनुपात घटा बढ़ा है जबकि प्रदेश में वर्तमान समय में ओबीसी की सबसे अधिक जनसंख्या जिला हरिद्वार प्रथम स्थान पर, उत्तरकाशी द्वितीय पर, तीसरे पर ऊधमसिंह नगर व चौथे स्थान पर देहरादून है।

अगर सरकार इसे जारी शासनदेशों के अनुरूप आरक्षण तय करती है तो यह आरक्षण की सीट हरिद्वार व उत्तरकाशी को जाती। सरकार ने 13 जिलों के आरक्षण का आंकलन तो किया लेकिन हरिद्वार में चुनाव नहीं कराए। याचिका में कहा कि किस आधार पर सरकार ने आरक्षण का आकलन कर दिया। जहां ओबीसी की जनसंख्या सबसे अधिक है वहां चुनाव नहीं कराए और जहां यह संख्या कम थी उन जिलों में आरक्षण नियमों को ताक में रखकर आरक्षण निर्धारित कर दिया। इसलिए इस पर रोक लगाई जाए और फिर से आरक्षण का रोस्टर जारी किया जाए। मांग की कि आरक्षण नियमों के तहत किया जाए ना कि 2011 की जनगणना के आधार पर।

धराली (उत्तरकाशी) में भीषण तबाही — तथ्य, कारण और ग्राउंड-रिपोर्ट के क्या कहती हैं !

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5–6 अगस्त 2025 को उत्तरकाशी के धाराली (Dharali / Kheer Gad / Harsil के पास) में अचानक हुई भयंकर जल-प्रलय / भूस्खलन-मंडी (flash flood / debris flow / mudslide) ने गांव के कई हिस्से और पर्यटन-व्यवसाय तहस-नहस कर दिए। कई मकान, होटल, दुकानें, एप्पल-ओरचार्ड और सड़क-इन्फ्रास्ट्रक्चर बह गए; दर्जनों लोग घायल या लापता हैं, कुछ की मृत्यु की पुष्टि हुई और बड़ी राहत-और-रेस्क्यू कार्रवाई चल रही है। स्थानीय और केंद्रीय बचाव दलों (आर्मी, NDRF, SDRF, ITBP) ने बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और राज्य सरकार ने राहत घोषणाएँ कीं

 

क्या हुआ — ताज़ा तथ्य (फैक्ट्स)

  • घटना का समय और जगह: घटना 5 अगस्त 2025 की दोपहर के आसपास (लगभग 13:30–13:45 स्थानीय समय) खरग (Kheer / Kheer Gad) जल-जल और धाराली गांव के पास हुई।

  • प्रभावित लोग और क्षति: कई घर, होटेल/होमस्टे, दुकानें और बाग (विशेषकर एप्पल-बाग) भारी मलबे में दब गए; शुरुआती रिपोर्टों में कम-से-कम 4 मौतें और दर्जनों (कुछ रिपोर्टों में 40+ या 50+) लापता बताये गए हैं, जबकि सैकड़ों लोग प्रभावित या संतप्त हुए और कई अनेकों का बेघर होना रिपोर्ट हुआ। सरकार और प्रशासन ने कई लोगों को बचाया; आधिकारिक खोज-बचाव और बचाव संख्या समय-समय पर अपडेट हो रही है।

  • बचाव-प्रक्रिया: इंडियन आर्मी (Ibex ब्रिगेड), NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय पुलिस व स्वास्थ्य दल मौके पर हैं; भारी मशीनरी, हेली-लिफ्ट और मैनपावर से रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए वित्तीय राहत घोषणाएँ की हैं (प्रारम्भिक पैकेज, ब्यौरे स्थानीय घोषणा पर निर्भर)

  • कारण — वैज्ञानिक और मानवीय तीसरे-आयाम

  • (A) तत्काल कारण — क्लाउडबर्स्ट / अचानक तेज वर्षा

    मीडिया और मौसम विभाग (IMD) की पड़ताल के अनुसार घटना की शुरुआत एक तीव्र-वर्षा (cloudburst) / अचानक अत्यधिक स्थानीय downpour से हुई, जिससे Kheer Gad में पानी की अचानक मात्रा बढ़ी और बहाव-ऊर्जा जमीनी मलबे के साथ नीचे उतरते हुए धावा-बोलकर गांव में प्रवेश कर गई। IMD व स्थानीय रिपोर्टों ने कुछ स्थानों पर अल्प-समय में असाधारण बारिश दर्ज़ की — क्लाउडबर्स्ट की परिभाषा से मेल खाती तीव्रता    
  • (B) जियो-हाइड्रोलॉजिक गठन — भू-खण्ड, ग्लेशियल लिंक, डिब्रिस-फ्लो

    वैज्ञानिक और उपग्रह-विश्लेषण (ISRO समेत) ने सुझाव दिया है कि यह केवल बारिश का साधारण प्ले नहीं था — इसमें ग्लेशियर-सम्बन्धी विस्फोट (GLOF), किसी चट्टान/हिमखंड के टूटने से उत्पन्न ढेर या पहले से जमा ढेर का अचानक खुलना, तथा मलबे-भरे फ्लो (debris flow) की भूमिका हो सकती है। ऐसे घटनाओं में पानी के साथ बड़े-बड़े पत्थर, मिट्टी और बढ़ा-चढ़ा मलबा झटके में बहुत दूर तक और तेज़ रफ्तार से आ जाता है। इस पर आगे की तकनीकी जांच जारी है।

  • (C) मानवीय/नियोजन कारण (anthropogenic factors)

    • बस्तियों का नदी-तट/फ़्लड-प्लेन पर बनना: विशेषज्ञों ने कहा कि धाराली और आसपास के कई निर्माण नदी की तरफ़/फ्लड-plain पर हुए हैं — जिनमें कई होटेल, होमस्टे और दुकानें भी शामिल हैं — जो जीवनदायिनी भू-अवसरो में बने हुए थे और रन-ऑफ के मार्ग में आ गए।

    • पर्यटन-बूम और अगणित निर्माण: पर्यटन के बढ़ते दबाव ने खड़ी ढलानों व नदी के किनारे अस्थायी व स्थायी संरचनाओं का निर्माण बढ़ा दिया, जिनमें पर्यावरण नियमों का उल्लंघन भी हो सकता है।

    • जलवायु परिवर्तन का योगदान: हिमालयी क्षेत्र में तापमान व वायुमंडलीय नमी के बदलाव से तीव्र वर्षा-इवेंट्स (extreme precipitation), ग्लेशियर अस्थिरता और अनपेक्षित डिब्रिस-फ्लो के जोखिम बढ़ रहे हैं — इसलिए केवल “एकल घटना” नहीं, बल्कि जोखिम बढ़ने का ढांचा दिखाई देता है।

      3) ग्राउंड-रिपोर्ट — पीड़ितों के अनुभव और स्थानीय हालात

      (नीचे के विवरण विभिन्न स्थानीय अखबारों, स्थानीय फार्म और तस्वीर-वीडियो रिपोर्ट्स और राहत-कर्मियों के बयानों पर आधारित हैं।)

      • स्थानीय किसानों और होस्टल-मालिकों का कहना है कि झट-पटक 30–60 सेकण्ड में मलबा और पानी ने जगह को तबाह कर दिया; कई लोगों ने बस समय रहते भागकर अपनी जान बचाई। कुछ पर्यटक और मजदूर ऐसे थे जो कुछ मिनट पहले ही सुरक्षित स्थान की तरफ़ चले गए और वे लोगों ने लंबी पैदल यात्रा कर कर-कर के बचाव-कहानियाँ सुनाईं।

      • कई छोटे व्यापारी और किसान बड़े आर्थिक घाटे में हैं — एप्पल-बाग, राजमा और सब्ज़ी की फसलों का बड़ा नुकसान बताया जा रहा है; स्थानीय हवाले से लाखों रुपये का प्रारम्भिक आंकलन आ चुका है।

      • मोबाइल नेटवर्क व सड़कों का टूटना बचाव को कठिन बना रहा है; कई इलाकों में भारी मशीनों और हेलीकॉप्टर-सहायता के जरिए ही लोग पहुँच रहे हैं।

        4) बचाव-कार्यों का आकलन और चुनौतियाँ

        • तत्काल-उपलब्धता: आर्मी-ब्रिगेड, NDRF, SDRF, ITBP और स्थानीय प्रशासन सक्रिय हैं — शुरुआती दिनों में 100+ लोगों के रेस्क्यू का दावा और लगातार सर्वे चल रहे हैं। पर मौसम की पुनरावृत्ति, भूस्खलन का जोखिम और सड़कों की क्षति बचाव को सीमित कर रहे हैं।

        • खोज-बचाव-तकनीक: मलबे के नीचे लोगों का पता लगाने के लिए कट्टर-मशीनरी, कुत्ते-टीम, थर्मल स्कैन जैसे साधन इस्तेमाल हो रहे हैं; पर कठिन भू-रचना में हर घंटा महत्वपूर्ण है।


        5) विस्तृत मूल्यांकन — यह घटना अकेली नहीं

        विशेषज्ञों का कहना है कि धाराली जैसी घटनाएँ हिमालय में बढ़ती जा रही अनुक्रमिक आपदाओं का हिस्सा हैं — जहां छोटे-छोटे घाटों, नदी-हेल्थ का बिगड़ना, अनियोजित बस्तियाँ और बढ़ती वर्षा के साथ जोखिमों में वृद्धि हो रही है। धाराली में दिख रहा पैटर्न — नदी-तट पर विकास + अचानक उथल-पुथल करने वाली बारिश/ग्लेशियर-इवेंट — पहले भी अन्य जगहों पर समान रूप से विनाशकारी रहा है। नीति-स्तर पर जमीन की मैपिंग, रिस्क-जोन निर्धारण और निर्माण नियंत्रण की व्यवस्था को मज़बूत करने की तत्काल ज़रूरत बताई जा रही है।

        6) क्या किया जाना चाहिए — नीतिगत और तकनीकी सुझाव

        1. तुरंत (short term): प्रभावितों को पारदर्शी आर्थिक सहायता, अस्थायी आवास, मनो-सामाजिक सहायता और कृषि पुनरुत्थान-पैकेज (बीज, लगातार इनकम सहायता) उपलब्ध कराना। राज्य के द्वारा घोषित सहायता पैकेज का फास्ट-ट्रैक क्रियान्वयन जरूरी है।

        2. मिड-टर्म: प्रभावित इलाकों की विज्ञान आधारित रि-ज़ोनिंग — खतरनाक फ्लड-प्लेन व चैनल-मार्गों पर पुनर्निर्माण प्रतिबंध और वैकल्पिक आजीविका/रिलोकेशन-पैकज। स्थानीय समुदायों के साथ सहमति से कम्पेन्सेशन और स्थायी पुनर्वास।

        3. लॉन्ग-टर्म (सिस्टमिक): हिमालयी जल-विज्ञान पर निगरानी (GIS/सैटेलाइट), ग्लेशियर/डिब्रिस-डैम पर रिसर्च, ग्रामीण और पर्यटन-निर्माण के लिए कठोर पर्यावरणीय नियम, तथा दक्षिणी-नैशनल डेटा-बेस जहाँ हर नया निर्माण की पर्यावरणीय स्वीकृति सार्वजनिक हो। ISRO जैसे संस्थानों के सैटेलाइट-डेटा से जोखिम मानचित्र नियमित अपडेट किए जाने चाहिए।

        4. अर्ली वार्निंग और कम्युनिटी-रिजिलिएन्स: स्थानीय-स्तर पर सतर्कता-सिस्टम (रबर-बेल/सार्वजनिक सायरन/वीएचएफ), बाढ़-रन-वे के बारे में नियमित जागरूकता, और पर्यटन/मकान मालिकों के लिए आपदा-तैयारी आवश्यक।


        7) राजनीतिक-प्रशासनिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता

        घटना ने सवाल उठाये हैं कि क्यों संवेदनशील नदी-किनारे/फ्लड-प्लेन पर बिखरे निर्माणों पर पैनी निगरानी नहीं थी; स्थानीय नियमन, पर्यावरण स्वीकृति और पर्यटन-पॉलिसी में भ्रष्ट-लापरवाही के संकेत भी जाँच के विषय हैं। राहत और पुनर्वास में पारदर्शिता, कम्पेन्सेशन की तात्कालिकता और भूमि-रिहैबिलिटेशन योजनाओं में जनता की भागीदारी जरूरी होगी। विशेषज्ञों ने कहा है कि सिर्फ राहत बाँटना पर्याप्त नहीं — पुनरावृत्ति रोके जाने वाले कदम लेना अनिवार्य है।

        निष्कर्ष — धराली एक चेतावनी है

        धराली-आपदा केवल एक स्थानीय दुर्घटना नहीं है — यह हिमालयी इलाकों में बढ़ते खतरों, अनियोजित विकास, और बदलते मौसम पैटर्न का मिलाजुला नतीजा है। तत्काल राहत-कार्रवाइयों के साथ-साथ शासन-स्तर पर दीर्घकालिक, विज्ञान-आधारित नीति और स्थानीय समुदायों के अधिकारों-आधार पर पुनर्विकास ही भविष्य में इसी तरह की त्रासदियों की पुनरावृत्ति रोक सकता है। पीड़ितों के लिए त्वरित और मानवीय सहायता, प्रभावित कृषि व आजीविका का बहाल करना तथा भविष्य के लिए जोखिम-कम करने वाले अनुशासनात्मक कदम अब न सिर्फ़ जरुरी बल्कि अनिवार्य हैं।

भाजपा के 4 जिला पंचायत अध्यक्ष और 11 ब्लॉक प्रमुख निर्विरोध विजयी

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उत्तराखंड के जिला पंचायत चुनावों में भाजपा ने नामांकन के आखिरी दिन लीड ले ली है।प्रदेश में भाजपा के 4 जिला पंचायत अध्यक्ष और 11 ब्लॉक प्रमुख निर्विरोध चुने गए।जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर उत्तरकाशी से रमेश चौहान, पिथौरागढ़ से जितेंद्र प्रसाद, उधम सिंह नगर से अजय मौर्या और चंपावत से आनंद सिंह अधिकारी निर्विरोध विजयी हुए। वहीं ब्लॉक प्रमुख पदों पर चंपावत से अंचला बोरा, काशीपुर से चंद्रप्रभा, सितारगंज से उपकार सिंह, खटीमा से सरिता राणा, भटवाड़ी से ममता पंवार, डुंडा से राजदीप परमार, जाखणीधार से राजेश नौटियाल, चंबा से सुमन सजवाण, विकासनगर से नारायण ठाकुर, पाबौ से लता देवी और ताकुला से मीनाक्षी आर्य बिना मुकाबले जीत गईं। 14 अगस्त को जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लाक प्रमुख व अन्य पदों पर मतदान होगा।

उधर, कांग्रेस के पूर्व विधायक रणजीत रावत के पुत्र व पुत्रवधु सल्ट विकासखण्ड से निर्विरोध निर्वाचित हुए। उनकी पुत्र वधु निर्विरोध ब्लाक प्रमुख चुनीं गयी। जबकि पुत्र विक्रम रैयत ज्येष्ठ प्रमुख पर निर्विरोध चुने गए। कनिष्क प्रमुख पद पर कंचना देवी भी निर्विरोध चुनीं गईं। पूर्व विधायक रणजीत रावत ने इसे कांग्रेस की नीतियों की जीत बताते हुए जनता का आभार जताया।

 

सोमवार को नामांकन का अंतिम दिन था और माहौल पूरी तरह भाजपा के पक्ष में रहा। अभी तक प्रदेश में भाजपा के 4 जिला पंचायत अध्यक्ष निर्विरोध निर्वाचित हुए, जबकि 11 ब्लॉक प्रमुख पदों पर भी भाजपा प्रत्याशी बिना मुकाबले जीत गए।यह नतीजा केवल संयोग नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री धामी व संगठन की महीनों पहले से तैयार की गई रणनीति, बूथ स्तर तक की सूक्ष्म मैनेजमेंट और संगठन के सामंजस्य का नतीजा मानी जा रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा की जीत में प्रत्याशी चयन में सामाजिक व भौगोलिक संतुलन, बूथ स्तर तक की सक्रियता और संगठनात्मक तालमेल की अहम भूमिका रही।

 

दूसरी ओर, कांग्रेस कई सीटों पर नामांकन दाखिल तक नहीं कर पाई, जिससे उसकी कमजोर तैयारी और अंदरूनी गुटबाज़ी उजागर हो गई। इन नतीजों ने यह भी संकेत दे दिया है कि भाजपा ने 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से शुरू कर दी हैं।

 

भाजपा प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि

जिला पंचायत चुनावों में उत्तराखंड की राजनीति ने एक बार फिर साफ़ कर दिया कि अगर रणनीति सटीक हो, टीम मज़बूत हो और नेतृत्व दृढ़ इच्छाशक्ति से लैस हो, तो जीत केवल संभावनाओं में नहीं, बल्कि हकीकत में बदल जाती है।

मुख्यमंत्री धामी व संगठन की अगुवाई में भाजपा ने जिला पंचायत चुनावों में ऐसा चौका मारा कि कांग्रेस पस्त होकर मैदान से बाहर हो गई।

भाजपा प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि
विपक्ष को मैदान में उतरने का अवसर ही न दिया जाए। स्थानीय समीकरणों को साधते हुए, हर जिले और ब्लॉक में भाजपा के पक्ष में माहौल तैयार किया गया। भाजपा प्रत्याशियों के चयन में जातीय, भौगोलिक और सामाजिक संतुलन का बारीकी से ध्यान रखा गया, जिससे कांग्रेस अंदर ही अंदर बिखरती चली गई।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सतीश लखेड़ा ने कहा कि
मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस कई स्थानों पर तो नामांकन करने तक की स्थिति में नहीं रही। पार्टी के भीतर गुटबाज़ी, नेतृत्वहीनता और संगठनात्मक ढील ने स्थिति इतनी खराब कर दी कि धामी की रणनीति के सामने वह पूरी तरह बेबस नज़र आई।

 

धराली-हर्षिल आपदा के लापता लोगों की सूची जारी,सबसे अधिक नेपाल के लोग

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धराली हर्षिल आपदा के एक हफ्ते बाद प्रदेश सरकार ने 68 लापता लोगों की सूची जारी की है। लापता लोगों में 24 नेपाल के निवासी हैं। उत्तरकाशी के आपदा परिचालन केंद्र की ओर से जारी सूची में नेपाल के 24 लोग लापता हैं। उत्तराखण्ड, बिहार,उत्तर प्रदेश ,हरियाणा ,राजस्थान के 44 लोग आपदा के बाद से गायब है।

इनमें 9 सेना के जवान, धराली व आसपास के 13 स्थानीय लोग, टिहरी का 1, बिहार के 13, उत्तर प्रदेश के 6 व्यक्ति और 24 नेपाली मजदूर शामिल हैं। नेपाली मजदूरों में से 5 से संपर्क हो चुका है, शेष की तलाश जारी है। गौरतलब है कि 5 अगस्त की आपदा के बाद दो शव मिले थे। एक हफ्ते से जारी कवायद के बाद भी धराली व हर्षिल क्षेत्र में मलबे में दबे लोगों को नहीं निकाला जा सका है। इतने दिन बीत जाने के बाद किसी चमत्कार से ही किसी के जीवित मिलने की संभावना है।

गढ़वाल आयुक्त ने बताया कि युद्धस्तर पर चलाए गए रेस्क्यू अभियान में अब तक 1,278 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। सभी बाहरी व जरूरतमंद स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दिया गया है। मलवे में दबे लोगों की खोज के लिए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और भूवैज्ञानिकों की टीमें लगातार काम कर रही हैं।

इस बीच, लापता लोगों के परिजन आपदाग्रस्त इलाके में डेरा डाले हुए हैं। धराली के मलबे में दबे लोगों की खोज के लिए बचाव दल डॉग्स व उपकरणों की मदद से तलाश में जुटे हैं । लेकिन सात दिन बाद भी कोई सफलता नहीं मिली है।

मलबे में लापता लोगों की तलाश शुरू…सेना और एसडीआरएफ समेत कई टीमें जुटीं

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धराली आपदा में जिंदगी की तलाश जारी है। आपदा को एक हफ्ता हो गया है। वहीं, मौसम की चुनौती के बीच आज रेस्क्यू के लिए सेना, आईटीबीपी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ व जिला प्रशासन ड्रोन और अन्य अत्याधुनिक उपकरणों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटी हैं.

 

Uttarkashi Dharali Cloudburst Live news Rescue and Search Operation 7th day bad Weather All Update In Hindi

घोड़े खच्चरों से पहुंचाई जा रही खाद्य सामग्री

ग्रामीणों के लिए घोड़े खच्चरों के माध्यम से राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है। वहीं आपदा प्रभावित ग्रामीणों के लिए समेश्वर देवता मंदिर में सामूहिक भोजन बनाया जा रहा है।

मलबे के बीच लापता लोगों की तलाश शुरू

धराली आपदा के छह दिन बाद वहां पर मलबे में सेना, आईटीबीपी सहित एनडीआरफ, एसडीआरएफ की ओर से खोज बचाव शुरू कर दिया गया है। मलबे के बीच खुदाई कर लापता लोगों को ढूढा जा रहा है। वहीं, निम और सेना रेको डिडेकटर मशीन से वहां पर सर्च अभियान चला रही है।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने सीएम राहत कोष में दी एक करोड़ की राशि

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात कर बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधियों ने उत्तरकाशी जिले के धराली में आई आपदा में राहत कार्यों के लिए सीएम राहत कोष में एक करोड़ की राशि दी। रविवार को सीएम आवास में बैंक ऑफ बड़ौदा के प्रतिनिधिमंडल ने धराली व हर्षिल क्षेत्र में आई आपदा के राहत कार्यों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ की धनराशि का योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने बैंक प्रबंधन का आभार व्यक्त किया।

आज प्रभावितों को राहत राशि वितरित की जाएगी- गंगोत्री विधायक

गंगोत्री विधायक सुरेश चौहान ने कहा, “फिलहाल 50 लापता लोगों की सूची तैयार की गई है। बिहार और उत्तर प्रदेश से कई लापता लोग जो काम के लिए यहां आए थे, उनकी भी तलाश की गई है। टीम सक्रिय रूप से बचाव कार्य कर रही है, खोजी कुत्ते उनके स्थान की खोज कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वयं एक शिविर स्थापित किया और दो दिनों तक  कार्य की निगरानी की। मैं 3-4 दिनों से यहां हूं। प्रभावित लोगों के लिए आवश्यक धन और अन्य आपूर्ति भी यहां पहुंच गई है। सड़कें खोलना और धराली को फिर से बसाना हमारे लिए एक चुनौती है। मुख्यमंत्री इसके लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। प्रधानमंत्री भी मुख्यमंत्री से बात कर रहे हैं।  मुख्यमंत्री ने तुरंत उन मृतकों के परिजनों के लिए 5-5 लाख रुपये की घोषणा की है। आज, सभी प्रभावितों को राशि वितरित की जाएगी।”

43 लोग लापता- गढ़वाल कमिश्नर

गढ़वाल कमिश्नर विनय शंकर पांडे ने बताया कि धराली आपदा में 43 लोग अब तक मिसिंग चल रहे हैं। आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और राहत पैकेज देने के लिए राजस्व परिषद के सचिव की अध्यक्षता में जो कमेटी गठित की गई है। वह आज उत्तरकाशी पहुंच जाएगी। टीम प्रभावित क्षेत्र में जाकर वहां हुए नुकसान कार्यों का जायजा लेगी और प्रत्येक व्यक्ति से संवाद कर उनके हित में जो भी अच्छा राहत पैकेज हो सकता है, वह दिया जाएगा।

धराली आपदा में ध्वस्त कल्प केदार देवता के मंदिर का पुनर्निर्माण होगा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने डीएम सहित संबंधित विभागों के सचिवों को धराली आपदाग्रस्त क्षेत्र में क्षतिग्रस्त हुए निजी, सार्वजनिक संपत्ति के आकलन को सात दिन में तैयार करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को आकलन तैयार होते ही केंद्र सरकार को भेजने को कहा। उन्होंने कहा कि धराली आपदा में ध्वस्त हुए कल्प केदार देवता के मंदिर का पुर्निर्माण किया जाएगासीएम धामी ने यह निर्देश आपदा कंट्रोल रूम में रेस्क्यू अभियान की समीक्षा के दौरान दिए। उन्होंने राज्य के सभी आपदाग्रस्त क्षेत्रों में सरकार की ओर से दी जा रही तात्कालिक सहायता वितरण कार्य जल्द से जल्द पूरा करने को कहा। उन्होंने कहा कि प्रभावित परिवारों को सहायता राशि फौरी रूप में दी जा रही है। इस किसी भी प्रकार की नकारात्मकता नहीं फैलाई जानी चाहिए। ज्योर्तिमठ के लिए तैयार राहत पैकेज का समिति करेगी अध्ययन : धराली आपदा प्रभावितों के पुनर्वास और आजीविका के लिए शासन ने सचिव राजस्व की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। यह समिति जोशीमठ के लिए तैयार किए राहत पैकेज का भी अध्ययन करेगी।

हर्षिल में बनी झील से पानी निकासी का काम मैनुअल करने की तैयारी

सिंचाई विभाग हर्षिल में बनी कृत्रिम झील से पानी की निकासी रास्ता बनाने का काम मैनुअल करने की तैयारी में है। सिंचाई विभाग के अधिकारी और श्रमिक आज हेलिकाप्टर के माध्यम से हर्षिल जाएंगे। अधिकारियों को वहीं पर कैंप करने का भी निर्देश दिया गया है। वहीं झील पर जल निकासी का कार्य करने के लिए यूजेवीएनएल की टीम भी हर्षिल पहुंच गई है।

उत्तरकाशी को हर्षिल से जोड़ने वाला पुल बना

उत्तरकाशी को हर्षिल से जोड़ने वाले पुल का पुनर्निर्माण किया गया है। इससे पांच अगस्त को उत्तरकाशी जिले के धराली और हर्षिल में बादल फटने और अचानक आई बाढ़ के बाद मशीनरी और राहत सामग्री की आसान आवाजाही हो सकेगी।

खोज और बचाव अभियान का दूसरा चरण शुरू

आपदाग्रस्त धराली में पुलिस ने खोज और बचाव अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। इसके लिए आईजी एसडीआरएफ अरुण मोहन जोशी को इंसीडेंट कमांडर और कमांडेंट एसडीआरएफ अर्पण यदुवंशी को डिप्टी कमांडर बनाया गया है। धराली में फंसे लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। अब लापता लोगों की तलाश की जाएगी।

जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लाक प्रमुख पद के लिए नामांकन आज, 14 को होगा मतदान

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आपदा प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीने का राशन उपलब्ध कराएगी राज्य सरकार, 5 लाख की अर्थिक मदद

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मुख्यमंत्री   धामी ने धराली रेस्क्यू ऑपरेशन के बारे में बताते हुए कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता लोगों को सुरक्षित स्थानों में पहुंचाने की थी। खराब मौसम के बावजूद अब तक 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू किया जा चुका है। जिसमें स्थानीय लोगों के साथ देश भर से आए तीर्थ यात्री भी शामिल हैं। घायलों को जिला अस्पताल, एम्स में भर्ती किया गया है। सभी को अच्छा इलाज मिले इसकी व्यवस्था की गई है। उन्होंने बताया हर्षिल व धराली क्षेत्र में पर्याप्त मात्रा में दवाइयां, दूध, राशन, कपड़े पहुंचाए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने बताया हर्षिल क्षेत्र में बिजली आपूर्ति के लिए उरेडा का पावर हाउस चालू किया गया है। यूपीसीएल द्वारा बिजली तारों की मरम्मत की जा रही है। मोबाइल कनेक्टीविटी को सुधार लिया गया है साथ ही 125 KV के दो जनरेटर सेट भी आपदा क्षेत्र में पहुंच गए हैं। हर्षिल क्षेत्र में सड़क कनेक्टिविट को ठीक किया जा रहा है। गंगनानी में बेली ब्रिज का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। भूस्खलन की चपेट में आई सड़कों को भी जल्द ठीक कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया मंगलवार तक हर्षिल तक सड़क मार्ग को पूरी तरह ठीक करने की संभावन है। जिसके बाद अन्य कामों को भी तेजी से पूरा किया जा सकेगा।

 

6 माह देंगे मुफ्त राशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार के स्तर से प्रभावित परिवारों को हर संभव मदद की जा रही है। उन्होंने बताया प्रभावित परिवारों को अगले 6 महीने का राशन राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध करवाया जाएगा।

 

5 लाख की अर्थिक मदद 

आपदा से जिन लोगों के मकान पूर्णतः क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए हैं, उनके पुनर्वास/विस्थापन हेतु ₹ 5.00 लाख की तत्काल सहायता राशि जारी की जाएगी। उन्होंने बताया ग्राम वासियों के पुनर्वास के लिए सचिव, राजस्व की अध्यक्षता में एक तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया है। जो प्रभावित हुए लोगो के पुनर्वास, विस्थापन एवं हानि का आंकलन करेगी। उन्होंने कहा आपदा से सेब के बगीचों को हुए नुकसान का भी आकलन किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धराली के साथ ही प्रदेश के अन्य स्थानों में भी आपदा से तबाही हुई है। उन्होंने कहा पौड़ी के सैंजी और बांकुड़ा गांव में भी जिन लोगों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें भी राज्य सरकार के स्तर से ₹ 5 लाख तक भी सहायता राशि दी जाएगी। राज्य में जहां भी आपदा से हानि हुई है, उन्हें सरकार द्वारा हर संभव मदद दी जाएगी।मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने राज्य सरकार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है। उनके ही नेतृत्व में केंद्र सरकार का भरपूर सहयोग मिल रहा है।

सीएम ने आपदा राहत के साथ उत्तरकाशी से ही कैबिनेट बैठक कर लिये कई अहम निर्णय

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आपदा के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी लगातार तीन दिन से मोर्चे पर डटे हैं।ग्राउंड जीरो से रेस्क्यू ऑपरेशन की निगरानी, राहत दलों को दिशा-निर्देश और प्रभावित परिवारों को भरोसा देने के साथ उन्होंने विकास कार्यों की रफ्तार भी बरकरार रखी है। इसी क्रम में उन्होंने आज उत्तरकाशी से ही राज्य मंत्रिमंडल की बैठक की अध्यक्षता कर प्रदेश हित में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये।

रेस्क्यू और राहत कार्य में तेजी के निर्देश

मुख्यमंत्री ने DG ITBP, DG NDRF और DGP उत्तराखंड पुलिस के साथ उच्च स्तरीय बैठक में राहत व बचाव कार्यों की समीक्षा की।
उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों तक शीघ्र पहुंच, फंसे लोगों का त्वरित रेस्क्यू, दुर्गम इलाकों में पर्याप्त टीम तैनाती, हेली लिफ्टिंग तेज करने और आवश्यक संसाधनों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिये। संचार, बिजली और सड़क संपर्क बहाली तथा राहत सामग्री की निर्बाध आपूर्ति पर भी विशेष जोर दिया।

लोगों में भरोसा, राहत दलों का बढ़ा मनोबल

धराली और आसपास के क्षेत्रों में लगातार मौजूद रहकर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार संकट की घड़ी में हर नागरिक के साथ है। कमिश्नर विनय शंकर पाण्डे का कहना है कि सीएम सर का सक्रिय और संवेदनशील रुख न केवल प्रभावित परिवारों के लिये संबल साबित हुआ है बल्कि राहत कार्य में जुटे जवानों का मनोबल भी बढ़ा है।

कोई खुद को अकेला न समझे, राज्य सरकार साथ है- धामी

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को पौड़ी जनपद के आपदाग्रस्त सैंजी क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया।
इस दौरान उन्होंने आपदा प्रभावित ग्रामीणों से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और आपदा से हुई क्षति की जानकारी ली। उन्होंने आश्वस्त किया कि राज्य सरकार हर परिस्थिति में प्रभावितों के साथ खड़ी है। जिलाधिकारी को निर्देश दिए गए कि राहत कार्यों में कोई कमी न रहने पाए।

निरीक्षण से पूर्व मुख्यमंत्री ने थलीसैंण तहसील के बांकुड़ा सहित अन्य आपदा प्रभावित क्षेत्रों का हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण किया।

सैंजी गांव में मुख्यमंत्री क्षतिग्रस्त रास्तों से गुजरते हुए सीधे प्रभावित परिवारों के घर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को अपनी समस्याएं बताईं और राहत कार्यों में तेजी लाने पर आभार जताया।

मुख्यमंत्री ने नौठा के बुराँसी गांव में आपदा प्रभावितों से भी भेंट की और पांच प्रभावितों को राहत राशि के चेक सौंपे। उन्होंने कहा कि इस आपदा की घड़ी में कोई भी खुद को अकेला न समझे—राज्य सरकार पूर्ण रूप से उनके साथ खड़ी है। उन्होंने पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया त्वरित गति से आरंभ करने तथा अतिवृष्टि से हुई क्षति का व्यापक आकलन कराने के निर्देश भी दिए।

मुख्यमंत्री ने राहत केंद्रों में बिजली, पानी, शौचालय, दवाइयों और राशन जैसी मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। साथ ही वाडिया इंस्टीट्यूट से भूगर्भीय सर्वेक्षण कराने के निर्देश भी दिए।

स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में उन्होंने निर्देश दिए कि प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य विभाग की मोबाइल मेडिकल यूनिट्स तैनात की जाएं, ताकि बीमार, वृद्ध, गर्भवती महिलाएं, बच्चे और अन्य जरूरतमंदों को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सके। दवाएं, प्राथमिक उपचार किट और चिकित्सकीय स्टाफ की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।

कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि प्रभावितों के पुनर्वास हेतु एक समिति गठित की जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि जिनकी दुकानें और मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सहायता दी जाए।

जिलाधिकारी ने अवगत कराया कि प्रभावित परिवारों की सूची तैयार कर ली गई है और राहत सामग्री तथा धनराशि का वितरण किया जा रहा है। प्रशासन की टीमें लगातार हर गांव तक पहुंच रही हैं ताकि कोई भी परिवार राहत से वंचित न रहे।

आपदा प्रभावितों को आर्थिक सहायता

मुख्यमंत्री ने आपदाग्रस्त क्षेत्र के भ्रमण के दौरान आपदा के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त ग्राम सैंजी के 15 परिवारों/भवन स्वामियों – प्रभा देवी, नीलम सिंह भण्डारी, भगत सिंह भण्डारी, पवन सिंह भण्डारी, विमला देवी, शाखा देवी, पवेली देवी, विमल सिंह, दीवान सिंह, रविन्द्र सिंह, जसवंत सिंह, गोपाल सिंह, मनोज सिंह, कृपाल सिंह एवं हेमराज सिंह कोराज्य आपदा मोचन निधि से प्रति भवन स्वामी ₹1,30,000 की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई, जिसे संबंधित परिवारों को चेक के माध्यम से प्रदान किया गया।

वहीं ग्राम बुरांसी में आपदा के कारण जान गंवाने वाली महिला आशा देवी पत्नी प्रेम सिंह के परिजनों/वारिसों – अनिल सिंह एवं शुगम सिंह, तथा विमला देवी पत्नी बलवन्त सिंह के परिजनों – विक्रम सिंह एवं दीपक सिंह को ₹2 लाख प्रति मृतक के अनुसार मुख्यमंत्री राहत कोष से आर्थिक सहायता प्रदान की गई। साथ ही बुरांसी गांव के केशर सिंह पुत्र अमर सिंह के आवासीय भवन के पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त होने पर ₹1,30,000 की सहायता राशि चेक के माध्यम से उपलब्ध कराई गई।

उत्तरकाशी में प्राकृतिक आपदा के बाद नये राजनीतिक ‘संकट’ से भाजपा में उबाल

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भारी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे सीमांत उत्तरकाशी में अब राजनीतिक आपदा ने भी पैर पसार लिए हैं। इस राजनीतिक आपदा की भनक लगते ही भाजपा के दो विधायक, पूर्व विधायक व जिला संगठन एक मंच पर खड़े हो गए हैं।इन सभी नेताओं ने सीएम व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट को कड़ा पत्र लिख कर निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण को भाजपा में शामिल करने की कोशिश का प्रखर विरोध किया है।
विरोध पत्र भाजपा जिलाध्यक्ष नागेंद्र चौहान ने लिखा है। यह पत्र ऐसे समय पर आया जब सीएम धामी स्वंय बीते तीन दिन से उत्तरकाशी जिले में ही मौजूद हैं।

गौरतलब है कि प्रदेश के 12 जिपं अध्यक्ष व 89 ब्लाक प्रमुख का चुनाव 14 अगस्त को होना है। और उत्तरकाशी के निवर्तमान जिपं अध्यक्ष दीपक बिजल्वाण जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीते हैं। और इस समय अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार हैं।

अपने कार्यकाल में कई वित्तीय गड़बड़ियों को लेकर दीपक बिजल्वाण के मसले हाईकोर्ट की भी सुर्खियां बने हैं। उनके ही भाजपा में शामिल होने की चर्चाएं तेज हैं। बिजल्वाण 2022 कस विधानसभा चुनाव यमुनोत्री से लड़कर हार चुके हैं। इसके बाद दीपक बिजल्वाण कांग्रेस में सक्रिय नहीं दिखे। निकाय व पंचायत चुनाव में अपने हिसाब से राजनीति करते रहे।

इधऱ, अंदरखाने पक रही खिचड़ी की महक बाहर आने के बाद उत्तरकाशी भाजपा के नेता एकजुट हो गए हैं।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेन्द्र भट्ट और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को भेजे गए एक ज्ञापन में आरोप लगाया है कि दीपक बिजल्वाण जनपद ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में व्यापक भ्रष्टाचार के मामलों में कुख्यात हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि यदि उन्हें पार्टी में शामिल किया गया तो आम जनमानस और पार्टी कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल जाएगा और संगठन की छवि धूमिल होगी।
विरोधियों ने दावा किया है कि पंचायत चुनाव में निर्वाचित सदस्यों ने पार्टी के जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख पद के प्रत्याशियों को समर्थन इस शर्त पर दिया था कि दीपक बिजल्वाण के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच कराई जाएगी।

ज्ञापन में सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का हवाला देते हुए मांग की गई है कि उनके खिलाफ कठोर दण्डात्मक कार्रवाई की जाए और पार्टी संगठन में ऐसे व्यक्तियों को कोई स्थान न दिया जाए।

पत्र में दुर्गेश्वर लाल विधायक पुरोला, नागेन्द्र चौहान,
सुरेश चौहान विधायक गंगोत्री, रमेश चौहान पूर्व जिलाध्यक्ष, सतीन्द्र सिंह राणा ,राम सुन्दर नौटियाल , मनवीर चौहान, जगत सिंह चौहान, प्रताप पंवार,स्वराज विद्वान (वाष्ट्रीय मैत्री
केदार सिंह रावत पूर्व विधायक व विजयपाल सजवाण सजवाण पूर्व विधायक का नाम शामिल हैं।

दीपक बिजल्वाण को लेकर भाजपा की राजनीति गरमाने से पार्टी संगठन के सामने नयी चुनौती खड़ी हो गयी