प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच शुक्रवार को बिजली की मांग और बढ़ गई। वहीं, हरिद्वार जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती से लोग बेहाल रहे। हालांकि यूपीसीएल का दावा है कि मांग के सापेक्ष पूरी उपलब्धता होने के चलते कहीं भी घोषित कटौती नहीं की जा रही है।
राज्य में गर्मी बढ़ने के साथ ही बिजली की मांग रिकॉर्ड 6.2 करोड़ से भी ऊपर पहुंच गई। यूपीसीएल प्रबंधन के मुताबिक, इसके सापेक्ष पांच करोड़ यूनिट बिजली उपलब्ध है। बाकी 1.2 करोड़ यूनिट बिजली बाजार से खरीदी जा रही है। वहीं, बिजली की भारी मांग, विद्युत लाइनों के ओवरलोड के बीच प्रदेशभर में कई जगहों पर कटौती से लोग बेहाल रहे।
हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण इलाकों में भी कटौती से लोग परेशान रहे। हालांकि यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमआर आर्य का कहना है कि फिलहाल मांग के सापेक्ष बिजली की उपलब्धता पूरी है। लिहाजा, कहीं भी घोषित विद्युत कटौती नहीं की जा रही है।
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में आज शनिवार सुबह एक बड़ा हादसा हो गया। दिल्ली नोएडा के यात्रियों को टेंपो ट्रैवलर अलकनंदा नदी में जा गिरा। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई है। जबकि 13 घायल है। छह गंभीर घायलों को पांच हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर ऋषिकेश एम्स लाया गया है, जहां एक घायल ने दम तोड़ दिया। जबकि सात अस्पताल में भर्ती है।
दिल्ली नोएडा से 26 यात्रियों को लेकर रात को वाहन निकला था। जानकारी के अनुसार रुद्रप्रयाग शहर से पांच किलोमीटर आगे बदरीनाथ हाईवे पर रैतोली के पास एक टेंपो ट्रैवलर पैरापिट को तोड़ते हुए अलकनंदा नदी में गिर गया। हादसे का कारण ड्राइवर को नींद की झपकी आना बताया जा रहा है।
सूचना पर पुलिस प्रशासन जिला आपदा प्रबंधन, एसडीआरएफ समेत अन्य टीम मौके पर रेस्क्यू के लिए पहुंची। वाहन के नदी में गिरने पर यहां रेलवे लाइन पर काम कर रहे तीन लोग भी यात्रियों को बचाने के लिए कूदे, जिनमें से एक की मौत हो गई।
सीएम धामी ने हादसे पर की संवेदना व्यक्त-
हादसे के खबर पर दुख जताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि टेंपो ट्रैवलर के दुर्घटनाग्रस्त होने का अत्यंत पीड़ादायक समाचार प्राप्त हुआ। स्थानीय प्रशासन व एसडीआरएफ की टीमें राहत एवं बचाव कार्यों में जुटी हुई है। घायलों को नजदीकी चिकित्सा केंद्र पर उपचार के लिए भेज दिया गया है। जिलाधिकारी को घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं।
ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगतों की आत्मा को श्रीचरणों में स्थान एवं शोक संतप्त परिजनों को यह असीम कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करें। बाबा केदार से घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।
गृह मंत्री अमित शाह ने जताया दुख-
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग में हुई सड़क दुर्घटना पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दुख जताया। उन्होंने एक्स पर पोस्ट साझा कर कहा कि मेरी संवेदनाएं इस हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के साथ हैं। स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं और घायलों को हर सम्भव सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। ईश्वर से घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूँ।
हरीश रावत ने जताया दुःख-
रुद्रप्रयाग घटना पर उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता हरीश रावत ने कहा कि मृतकों की शांति के लिए भगवान से प्रार्थना करता हूं और जो घायल हैं उनके स्वास्थ्य के लिए कामना करता हूं। उनको बेहतर से बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए राज्य सरकार से याचना करता हूं। इस समय पर्वतीय क्षेत्रों में दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। इस पर चिंता करने की आवश्यकता है।
गुरुवार को अल्मोड़ा के बिनसर अभयारण्य में भीषण आग से चार कर्मिकों की दर्दनाक मौत हुई है, जबकि चार लोग गंभीर रूप से झुलस गए थे। सभी घायलों को हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, वहीं, घायलों की हालत गंभीर देखते हुए सीएम धामी ने उनको एम्स दिल्ली एयरलिफ्ट करने के निर्देश दिए थे।
सीएम के निर्देश के बाद शुक्रवार को वनाग्नि में झुलसे सभी वन कर्मियों को एयरलिफ्ट करके दिल्ली भेजा गया है। सबसे पहले गंभीर रूप से झुलसे कृष्ण कुमार (44) और पीआरडी जवान कुंदन सिंह को एयरलिफ्ट करके दिल्ली एम्स भेजा गया। इसके बाद कैलाश भट्ट और भगवत सिंह को भेजा गया। बता दें कि, कृष्ण कुमार फायर वाचर निवासी भेटुली अल्मोड़ा 82 प्रतिशत जले हैं। इनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। उधर कैलाश भट्ट उम्र (45) दैनिक श्रमिक निवासी घनेली अल्मोड़ा 42% प्रतिशत, कुंदन सिंह (42) पीआरडी जवान निवासी खाखरी 40% जबकि भगवत सिंह (36) चालक निवासी भेटुली आयरपानी 50% प्रतिशत जले हैं।
बता दें कि, अल्मोड़ा बिनसर अभयारण्य वनाग्नि में झुलसे हुए वन कर्मियों को शुक्रवार को एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स भेजा गया है। इस दौरान हल्द्वानी के सिटी मजिस्ट्रेट एबी वाजपेयी और एसडीएम रुद्रपुर मनीष बिष्ट मौजूद रहे।
सीटी मजिस्ट्रेट एबी बाजपेई ने बताया की गुरुवार हादसे में चार वन कर्मियों की मौत हो गई थी जबकि चार वनकर्मी आग की चपेट में आने से झुलस गए थे। सरकार के निर्णय के बाद झुलसे हुए चारों वनकर्मियों को एयरलिफ्ट कर दिल्ली एम्स भेजा जा रहा है।
वहीं, उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जंगल की आग की चपेट में आकर चार वन कर्मियों की माैत के मामले में सीएम धामी ने सख्त रुख अपनाया है। कुमाऊं के तीन अधिकारियों पर गाज गिरी है। चीफ कंजरवेटर नॉर्थ और डीएफओ अल्मोड़ा को निलंबित कर दिया है। वहीं, सीसीएफ कुमाऊं को अटैच किया है। सीएम धामी के निर्देश के बाद अब विभाग इनपर कार्रवाई करने जा रहा है।
राज्य में विधानसभा उप चुनाव के लिए आज से नामांकन शुरू होने जा रहे हैं। 21 जून तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, शुक्रवार को बदरीनाथ और मंगलौर विधानसभा उप चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही नामांकन पत्रों की बिक्री, नामांकन भी शुरू हो जाएगा जो 21 जून तक चलेगा। 24 जून तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो प्रत्याशी नाम वापस लेना चाहेंगे, उनके लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि 26 जून तक होगी।
दोनों विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को मतदान होगा और 13 जुलाई को मतगणना होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया, विस उप चुनाव के लिए बदरीनाथ में 210 पोलिंग बूथ पर एक लाख दो हजार 145 मतदाता, 2,566 सर्विस मतदाता हैं। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में 132 पोलिंग बूथ और एक लाख 19 हजार 930 मतदाता व 255 सर्विस मतदाता होंगे।
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मौसम बिगड़ा रहेगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार पहाड़ी जिलों में आज गर्जना के साथ बारिश और ओलावृष्टि होने के आसार हैं। साथ ही 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं।
वहीं, राजधानी दून में अगले दो दिन तक बारिश का अनुमान है। मौसम विभाग की ओर से इसको लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। बृहस्पतिवार को दून का अधिकतम तापमान 37 डिग्री और न्यूनतम 22 डिग्री सेल्सियस रहा सकता है।
बारिश ने दी गर्मी से राहत-
वहीं, बुधवार देर शाम को चली ठंडी हवाओं के बाद जमकर बारिश हुई। इससे मौसम सुहाना हो गया। ऐसे में गर्मी झेल रहे प्रदेशवासियों ने राहत महसूस की। जिससे तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई।
उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक पर गए 22 सदस्यीय दल में से नौ ट्रैकर्स की मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। वर्ष 2022 में हुए निम के द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन हादसे के बाद यह दूसरा बड़ा हादसा है।
चार अक्तूबर 2022 को निम के इतिहास में वह तारीख है जिसने निम प्रबंधन को कभी न भूलने वाला गम दिया। हादसे में निम के 34 प्रशिक्षुओं का दल द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आ गया था जिसमें कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दो लोग अब भी लापता चल रहे हैं।
इनमें उत्तराखंड से नौसेना में नाविक विनय पंवार व हिमाचल निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक वशिष्ट शामिल थे। हालांकि उस दौरान निम के साथ एसडीआरएफ की टीम ने दोनों लापता लोगों की खोजबीन के लिए माइनस 25 डिग्री तापमान में भी विशेष अभियान चलाया।
अब एक और हादसे के खबर उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक से आई।
कल मंगलवार को चार ट्रैकर की ठंड लगने से मौत हो गई। वहीं आज पांच ट्रैकर्स की और मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित लाया जा चुका है। मौसम खराब होने के कारण ट्रैकर्स रास्ता भटक गए थे। जिले की ट्रैकिंग एजेंसियों के माध्यम से जिला आपदा प्रबंधन को इसकी सूचना मिली। जिससे विभाग ने रेस्क्यू के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
29 मई को एक 22 सदस्यीय दल मल्ला-सिल्ला से कुश कुल्याण बुग्याल होते हुए सहस्त्रताल की ट्रैकिंग के लिए निकला था। दो जून को यह दल सहस्त्रताल के कोखली टॉप बेस कैंप पहुंचा।
तीन जून को वह सहस्त्रताल के लिए रवाना हुए। वहां अचानक मौसम खराब होने, घने कोहरे और बर्फबारी के बीच ट्रैकर फंस गतए। पूरी रात उन्हें ठंड में बितानी पड़ी। ट्रैकर्स में से किसी ने इसकी सूचना दल को ले जाने वाली गढ़वाल माउंटनेरिंग एवं ट्रैकिंग एजेंसी के मालिक को दी। बताया कि ठंड लगने से चार ट्रैकर की मौत हो गई है जबकि सात की तबीयत खराब है और 11 वहां फंसे हुए हैं।
चारधाम यात्रा को 24 दिन का समय पूरा हो गया है। लेकिन धामों में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ कम नहीं हुई है। चारधाम यात्रा प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार अब तक 15.67 लाख श्रद्धालु चार धामों व हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं। यात्रा के शुरुआती 10 दिन में जहां दर्शन करने वालों की संख्या 5.69 लाख से अधिक थी।
वहीं 14 दिन में 9.97 लाख से ज्यादा ने दर्शन किए हैं। इस बार चारधाम यात्रा 10 मई और हेमकुंड साहिब की यात्रा 25 मई से शुरू हुई। चारधाम यात्रा के शुरुआती 10 दिन में केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम में 5.69 लाख अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए।
धामों में दर्शन के लिए भीड़ बढ़ने और यात्रा मार्गों पर घंटों जाम लगने से सरकार व प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। भीड़ नियंत्रित करने के लिए सरकार ने ऑफलाइन पंजीकरण पर भी रोक लगाई थी। एक जून से फिर से आफलाइन पंजीकरण खोल दिए गए। यात्रा मार्गों में अब जाम की पहली जैसी स्थिति नहीं है। लेकिन धामों में दर्शन के लिए काफी भीड़ है।
चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में काउंटर पर ऑफलाइन पंजीकरण आज एक जून से शुरू हो गए हैं। हरिद्वार में चार धाम यात्रा के पंजीकरण केंद्र पर 12 बजे से पहले ही स्लॉट खत्म होते ही सुबह से खड़े यात्रियों ने जमकर हंगामा कर दिया। हंगामा इस कदर बढ़ गया कि यात्रियों को समझाने के लिए पुलिस को मौके पर आना पड़ा।
धामों में भीड़ बढ़ने से प्रशासन ने 13 मई को ट्रांजिट कैंप में ऑफलाइन पंजीकरण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 15-16 मई को पंजीकरण पर रोक जारी रही। बाद में यह तिथि 19 मई फिर 31 मई तक बढ़ा दी गई। इससे तीर्थयात्रियों को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में पंजीकरण के लिए 12-12 दिन इंतजार करना पड़ा। कई तीर्थयात्री अपने घरों को लौट गए थे।
23 मई से प्रशासन ने अस्थायी पंजीकरण की व्यवस्था की है। अस्थायी पंजीकरण का कोटा 1,000 से कई बार में बढ़ाकर वर्तमान में 4,500 है। शुक्रवार को भी तीर्थयात्रियों से अस्थायी पंजीकरण के फॉर्म जमा करवाए गए। उधर, चार धाम यात्रा प्रशासन के ओएसडी नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बताया, शनिवार से ट्रांजिट कैंप में चारधाम की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों का काउंटर पर ऑफलाइन पंजीकरण किया जाएगा।
प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन खोल दिए हैं। शनिवार से एक दिन में 3000 श्रद्धालुओं के ऑफलाइन पंजीकरण होंगे। सरकार ने यह निर्णय गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल के स्थलीय निरीक्षण के बाद लिया है।
शुरुआत में ऋषिकेश में 1000 और हरिद्वार में 500 श्रद्धालुओं के ऑफलाइन पंजीकरण किए गए। लेकिन धामों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने से सरकार को ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन पर रोक लगानी पड़ी। रोक की अवधि को 31 मई तक बढ़ाया गया। साथ ही गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को निर्देश दिए गए कि वे वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के बाद बताएं कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन खोले जाएं या नहीं।
अब केदारनाथ पहुंचने वाले VVIP के साथ ही बुजुर्ग श्रद्धालु एसयूवी की सवारी का आनंद ले सकेंगे। इस वाहन का उपयोग मेडिकल इमरजेंसी में भी किया जाएगा। बीते वर्ष पर्यटन विभाग ने यात्रा काल में केदारनाथ के लिए दो एसयूवी खरीद का प्रस्ताव शासन को भेजा था।
वायुसेना के चिनूक हेलिकॉप्टर से शुक्रवार को यह एसयूवी धाम पहुंचाई गई। हेलीपैड पर लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता विनय झिंक्वाण, सेक्टर मजिस्ट्रेट व अन्य अधिकारी मौजूद थे। हेलीपैड पर उतरने के बाद चालक गाड़ी को लेकर सरस्वती नदी किनारे बने आस्था पथ से वीआईपी हेलीपैड मार्ग के रास्ते मंदर के समीप तक लाया।
ढोल-दमाऊ और फूलों से हुआ एसयूवी का स्वागत-
यहां पर यात्रा ड्यूटी पर तैनात कार्मिकों, तीर्थ पुरोहित व अन्य ने ढोल-दमाऊ व फूलों से एसयूवी का स्वागत किया गया। विनय झिंक्वाण ने बताया, केदारनाथ के लिए बीते वर्ष पर्यटन विभाग ने दो एसयूवी का प्रस्ताव शासन को भेजा था। अब वाहनों की स्वीकृति मिलने के साथ पहला वाहन चिनूक से धाम पहुंच चुका है। दूसरा वाहन भी जल्द धाम पहुंचा दिया जाएगा।
बताया, यात्रा काल में धाम पहुंचने वाले वीआईपी इस वाहन से केदारपुरी का भ्रमण कर सकेंगे। साथ ही हेलीपैड से बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं को मंदिर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। यात्रा काल में किसी यात्री या अन्य के बीमार या घायल होने पर उसे हेलीपैड तक पहुंचाने में भी एसयूवी का उपयोग किया जाएगा।
उत्तराखंड प्रदेश में जुलाई के माह में बिजली का बिल महंगा आएगा। फ्यूल और पावर परचेज कॉस्ट एडजस्टमेंट (एफपीपीसीए) के तहत उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने उपभोक्ताओं से 14 करोड़ 21 लाख रुपये वसूली की अनुमति दे दी है।
दरअसल, केंद्र के नियमों के तहत अब यूपीसीएल निर्धारित मूल्य के सापेक्ष जिस दर पर बिजली खरीदता है, उसकी वसूली उपभोक्ताओं से की जाती है। यूपीसीएल ने नियामक आयोग में एक याचिका दायर की थी, जिसमें बताया गया था कि दिसंबर, जनवरी और फरवरी की तिमाही में यूपीसीएल ने जो बिजली खरीदी है, उसका 14 करोड़ 21 लाख रुपये बकाया है।
यूपीसीएल ने आयोग से इस रकम की वसूली की मांग की थी। आयोग अध्यक्ष एमएल प्रसाद ने एफपीपीसीए नियमों के तहत इस रकम को जुलाई माह के बिल में वसूली करने की अनुमति दे दी है। साथ ही ये भी निर्देश दिए कि इसका रिकॉर्ड अलग से मेंटेन रखा जाए। इस रकम के हिसाब से प्रति उपभोक्ता जुलाई के बिल में चार पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हो जाएगी।
बिजली की मांग ने तोड़े रिकॉर्ड, 6.2 करोड़ पहुंची-
प्रदेश में बिजली की मांग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बृहस्पतिवार को मांग 6.2 करोड़ यूनिट पर पहुंच गई। यूपीसीएल के निदेशक परिचालन एमआर आर्य ने बताया, इतनी मांग के सापेक्ष पूरी उपलब्धता है। कहीं भी बिजली की किल्लत की वजह से कटौती नहीं की जा रही है। बताया, चारधाम यात्रा के मद्देनजर सुचारू विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि प्रदेश हित में वे बिजली बचाएं।