CBSE 10th-12th Result 2024:सीबीएसई बोर्ड 10वीं और 12वीं का रिजल्ट घोषित हो गया है। छात्र आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना रिजल्ट देख सकते हैं।
इस बार कक्षा 12वीं में 87.98% बच्चे पास हुए हैं। छात्र सीबीएसई बोर्ड रिजल्ट्स की आधिकारिक वेबसाइटresults.cbse.nic.in पर जाकर अपना रिजल्ट चेक कर सकतें हैं। 12वीं देशभर के 17 रीजन में देहरादून रीजन 11वें स्थान पर रहा है। देहरादून रीजन का परिणाम 83.83 प्रतिशत रहा जो बीते वर्ष के मुकाबले तीन प्रतिशत तक बढ़ा है।
सीबीएसई के देहरादून रीजन में उत्तराखंड के सभी 13 जिलों के अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आठ जिले बदायूं, बिजनौर, ज्योतिबा फूले नगर, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, रामपुर, सहारनपुर व संभल शामिल हैं। बोर्ड के अधीन कई अटल उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने भी दूसरी बार बोर्ड परीक्षा दी है।
सीबीएसई बोर्ड 12वीं में लड़कियों का पास प्रतिशत 91.52 रहा। जबकि लड़कों का पास प्रतिशत 85.12 फीसदी रहा। लड़कों के मुकाबले 6.40 फीसदी ज्यादा लड़कियां पास हुई हैं। देश भर में त्रिवेंद्रम सबसे आगे है। यहां का पास प्रतिशत 99.91 है।
बदरीनाथ धाम में वीआईपी व्यवस्था और बामनी गांव को जाने वाले आम रास्ता बंद करने के विरोध तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और स्थानीय लोग विरोध में उतरे। बदरीनाथ मंदिर परिसर के समीप सभी लोग विरोध प्रदर्शन करने के एकत्रित हुए हैं।
रविवार 12 मई को बारिश की फुहारों के बीच सुबह छह बजे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ बद्रीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए थे। इस दौरान जय बदरीनाथ के जयघोष से संपूर्ण बदरीशपुरी गुंजायमान हो उठी।
भगवान बदरीनाथ के दर्शन के लिए देर रात से ही तीर्थयात्री लाइन में खड़े हो गए थे। सुबह तक लाइन करीब दो किमी तक पहुंच गई थी। कपाटोद्घाटन के बाद से देर सायं तक करीब 20 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। तीर्थयात्रियों ने बदरीनाथ धाम में अखंड ज्योति के भी दर्शन किए। बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने की प्रक्रिया तड़के चार बजे से शुरू हो गई थी।
विगत वर्षों में लाखों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम की यात्रा कर चुके हैं। पिछले आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2016 में 6,54,355, वर्ष 2017 में 9,20,466, वर्ष 2018 में 10,48,051, वर्ष 2019 में 12,44,993 और वर्ष 2020 कोरोना संकट के कारण 1,55,055 श्रद्धालु बदरीनाथ के दर्शनों को पहुंचे, जबकि वर्ष 2021 में इसी के चलते 1,97,997 श्रद्धालु ही धाम पहुंचे थे, जबकि कोरोना महामारी पर नियंत्रण के बाद विगत वर्ष 2022 में 17,63,549 और 2023 में रिकॉर्ड 18,39,591 श्रद्धालुओं ने बदरीनाथ के दर्शन किए। इस वर्ष भी रिकॉर्ड पंजीकरण होने से तीर्थयात्रियों की संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा पूर्ण रूप से शुरू हो गई है, लेकिन मौसम और व्यवस्थाएं भी तीर्थयात्रियों की आस्था की परीक्षा ले रही हैं। इसके बावजूद आस्था चुनौतियों पर भारी पड़ रही है।
चार धामों में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ उमड़ रही है। दर्शन के लिए लंबी कतार लग रही है। 10 मई को केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुले। रविवार को विधि विधान से बद्रीनाथ धाम के कपाट खोले गए। यात्रा के तीन दिन में चारों धामों में डेढ़ लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। इसके लिए सबसे अधिक केदारनाथ धाम में 75 हजार से अधिक यात्रियों ने दर्शन किए।
ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन पंजीकरण करने के लिए मारामारी है। यात्रा में आ रही चुनौतियों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन ने यात्रियों से कुछ दिनों के लिए यात्रा स्थगित करने का आग्रह किया, लेकिन तीर्थयात्रियों की आस्था चुनौतियों पर भारी पड़ रही है।
चारधाम यात्रा शुरू होने के साथ ही पंजीकरण का आंकड़ा 23 लाख के पार हो गया है। केदारनाथ धाम के लिए आठ लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं ने पंजीकरण कराया है। पर्यटन विभाग की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार शाम चार बजे तक चारधाम यात्रा के लिए 23 लाख 57 हजार 393 पंजीकरण हुए थे।
इनमें केदारनाथ के लिए सर्वाधिक आठ लाख सात हजार 90, बदरीनाथ धाम के लिए सात लाख 10 हजार 192, यमुनोत्री के लिए तीन लाख 68 हजार 302 और गंगोत्री के लिए चार लाख 21 हजार 205 पंजीकरण शामिल हैं। वहीं, हेमकुंड साहिब के लिए भी इस बार अभी तक 50 हजार 604 पंजीकरण हो चुके हैं। पंजीकरण का सिलसिला जारी है।
तीन धामों के खुले कपाट
केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चारधाम यात्रा का आगाज हो गया। शुक्रवार को हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के जयकारों के बीच तीनों धाम के कपाट विधि विधान के साथ खोले गए। पहले दिन करीब 45 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन किए। केदारनाथ धाम में 30 हजार श्रद्धालुओं ने दर्शन कर नया रिकॉर्ड बनाया है। केदारनाथ धाम पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से देशवासियों की सुख समृद्धि के लिए पूजा अर्चना की। वहीं, अब 12 मई को बदरीनाथ धाम के कपाट खोले जाएंगे।
केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ चारधाम यात्रा का श्रीगणेश हो गया है। आज विधि-विधान से सुबह सात बजे पहले केदारनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए खोले गए। इस दौरान हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई। हजारों श्रद्धालुओं के जयकारों के साथ बाबा केदार की पंचमुखी डोली केदारनाथ पहुंची है। इसके बाद यमुनोत्री और फिर गंगोत्री धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए दर्शन के लिए खोल दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा -देवभूमि उत्तराखंड के पवित्र चार धाम यात्रा के शुभारंभ की बहुत-बहुत बधाई। बाबा केदारनाथ धाम समेत चारों धामों की यह यात्रा श्रद्धालुओं के लिए एक ऐसी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक यात्रा है, जिससे उनकी आस्था और भक्ति को नई स्फूर्ति मिलती है। इस यात्रा पर निकले सभी भक्तों और श्रद्धालुओं को मेरी ढेरों शुभकामनाएं। जय बाबा भोलेनाथ!
गुरुवार देर शाम तक 16 हजार से अधिक श्रद्धालु भी पहले दिन बाबा केदार के दर्शन के लिए केदारपुरी पहुंच गए थे। आज सुबह केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के बाद यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 10.29 बजे और फिर गंगोत्री धाम के कपाट 12.25 बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। अब बदरीनाथ धाम के कपाट 12 मई को सुबह छह बजे खुलेंगे।
बृहस्पतिवार सुबह बाबा केदार की पंचमुखी डोली गौरीकुंड से केदारनाथ धाम के लिए रवाना हुई थी। अपराह्न तीन बजे केदारनाथ धाम पहुंची। बाबा केदार की डोली के साथ हजारों श्रद्धालु भी केदारपुरी पहुंचे। इस दौरान श्रद्धालुओं के जयकारों और सेना के बैंड की धुन से केदारनाथ धाम गूंज उठा।
बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने पंचमुखी डोली के केदारनाथ धाम में पहुंचने पर अगवानी की। वहीं मां गंगा की डोली मुखबा से गंगोत्री धाम के रवाना हुई। शुक्रवार सुबह डोली धाम पहुंची। वहीं, मां यमुना की डोली शुक्रवार सुबह खरशाली गांव से धाम के लिए रवाना हुई थी।
भव्य रूप से सजाए गए सभी मंदिर-
केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम को फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है। केदारनाथ मंदिर को 20 क्विंटल से अधिक फूलों से सजाया गया है। धाम में दर्शन के लिए इस बार श्रद्धालु आस्था पथ से जाएंगे। आस्था पथ पर बैठने के लिए बेंच की व्यवस्था है। साथ ही बारिश व बर्फबारी से बचने के लिए रेन शेल्टर बनाया गया।
22 लाख से अधिक श्रद्धालु कर चुके पंजीकरण चारधाम यात्रा के लिए अब तक 22 लाख से अधिक श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं। पंजीकरण के आंकड़े को देखते हुए इस बार भी प्रदेश सरकार को चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं का नया रिकॉर्ड बनने की उम्मीद है।
उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने समूह-ग की नौ भर्तियों का कैलेंडर जारी कर दिया है। इस साल मई से अगस्त के बीच में ये भर्ती परीक्षाएं कराई जाएंगी। आयोग के सचिव सुरेंद्र सिंह रावत की ओर से जारी कैलेंडर में बताया गया है कि वन विभाग स्केलर भर्ती के लिए शारीरिक नाप जोख परीक्षा 15 मई को होगी।
हवलदार प्रशिक्षक की शारीरिक नाप जोख परीक्षा एक जून को, आबकारी सिपाही, परिवहन आरक्षी, उप आबकारी निरीक्षक, हॉस्टल मैनेजर ग्रेड-3, गृह माता भर्ती की परीक्षा नौ जून को, अनुदेशक विद्युतकार, फिटर व अन्य की परीक्षा 26 से 29 जून को, सहायक अध्यापक एलटी भर्ती परीक्षा 30 जून को, वाहन चालक भर्ती परीक्षा सात जुलाई को, सहायक भंडारी भर्ती परीक्षा 14 जुलाई को, स्केलर भर्ती की परीक्षा चार अगस्त को और हवलदार प्रशिक्षक भर्ती की परीक्षा 11 अगस्त को होगी।
उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग से काबू पाने के लिए सरकार ने (एनडीआरएफ) को उतार दिया है। गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले और कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में जंगलों में ज्यादा आग सुलग रही हैं। सोमवार को प्रदेश में 20 जगह जंगल धधके। पौड़ी में सोमवार को आग बुझाने के लिए वायुसेना के हेलीकॉप्टर से पानी का छिड़काव किया गया।
वहीं, जंगलों की आग से राज्य में अब तक 930 घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे 1,196 हेक्टेयर से अधिक जंगल जल चुका है। सबसे अधिक 491 घटनाएं कुमाऊं और 365 घटनाएं गढ़वाल में हुईं, जबकि 74 मामले वन्य जीव क्षेत्र के हैं। बेकाबू हो चुकी आग से अब तक पांच लोगों की मौत और चार लोग झुलस चुके हैं।
सरकार का दावा है कि वनाग्नि से अभी तक किसी वन्यजीव के मारे जाने की सूचना नहीं है। इस बीच सरकार जानबूझकर और लापरवाही से आग लगाने के मामले में बेहद सख्त हो गई है। बार-बार आग लगाने वालों पर गैंगस्टर के तहत कार्रवाई होगी। उत्तराखंड लोक व निजी संपत्ति क्षति वसूली अधिनियम के तहत वन संपदा के नुकसान की भरपाई आग लगाने वालों से होगी।
वनाग्नि की स्थिति की समीक्षा बैठक के बाद मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने कहा, वनाग्नि पर काबू पाने के लिए एक्शन प्लान बना लिया गया है। जंगल में आग बुझाने के काम में अब पीएसी, होमगार्ड, पीआरडी, युवक व महिला मंगल दल, सभी स्थानीय संगठनों और लोगों को लगाया जाएगा।
पौड़ी और अल्मोड़ा में एनडीआरएफ तैनात हो गई है। बताया, सरकार को आईआईटी रुड़की से कृत्रिम बारिश (क्लाउड सिडिंग) का प्रस्ताव मिला है। इस प्रस्ताव को लेकर सभी पहलुओं पर विचार के बाद निर्णय लिया जाएगा। मौसम विभाग से चर्चा की जाएगी कि इससे मौसम पर कोई प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ेगा।
भगवान केदारनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली ने आज सोमवार को अपने हिमालय स्थित केदारनाथ धाम के लिए प्रस्थान किया। सोमवार सुबह पूजा अर्चना के बाद डोली को मंदिर के गर्भ गृह से बाहर सभा मंडप में विराजमान किया गया। जिसमें हक हकूकधारियों की ओर से भगवान की चल उत्सवह विग्रह डोली का श्रृंगार किया गया।
इसके बाद मंदिर की तीन परिक्रमा कर डोली ने अपने अगले गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। सोमवार को डोली गुप्तकाशी स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर में रात्रित विश्राम करेगी। इस बार छह मई को फाटा, सात को गुप्तकाशी और नौ मई को डोली केदारनाथ धाम पहुंचेगी। जबकि 10 मई को भगवान केदारनाथ धाम के कपाट आम श्रद्धालुओं के दर्शनाथ के लिए खोले जाएंगे।
वहीं इससे पहले रविवार को ग्यारहवें ज्योर्तिलिंग भगवान केदारनाथ की यात्रा को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए केदारनाथ के अग्रणी क्षेत्रपाल के रुप में पूजे जाने वाले भगवान भैरवनाथ की पूजा अर्चना की गई। ऊखीमठ में देर सांय तक चली पूजा अर्चना में भैरवनाथ की अष्टादश आरती उतारी गई। भैरवनाथ की विशेष पूजा अर्चना के साथ ही केदारनाथ धाम के कपाट खुलने की पक्रिया शुरू हो गई है।
पंचकेदार गद्दी स्थल ओंकारेश्व मंदिर ऊखीमठ से भगवान केदारनाथ की डोली के धाम के लिए प्रस्थान करने पूर्व संध्या पर ओंकारेश्वर मंदिर स्थित भैरवनाथ मंदिर में भैंरवनाथ की विशेष पूजा अर्चना संपन्न हुई।
केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग जी महाराज की मौजूदगी में धाम के लिए नियुक्त मुख्य पुजारी शिवं शंकर लिंग ने भगवान भैरवनाथ का अभिषेक किया। साथ ही पंचामृत अभिषेख, रुद्राभिषेख के साथ पूरी पकोड़ी से माला से भैंरवनाथ का श्रृंगार किया गया।
उत्तराखंड के पांच जिलों में शनिवार को तेज हवा और आंधी चलने के साथ हल्की बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों में झोंकेदार हवाएं चलने व हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।
इन जिलों के कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर की तेजी से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।
उत्तराखंड में गर्मी से राहत मिली है, लेकिन जंगलों के धधकने का सिलसिला थम नहींरहा है। बुधवार को 24 घंटे के भीतर प्रदेश में आग की 40 नई घटनाएं हुईं, जिनमें कुल 46 हेक्टेयर वन क्षेत्र को क्षति पहुंची है। वन विभाग की ओर से जंगल में आग लगाने वालों की गिरफ्तारी और मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी जारी है।
अब तक जंगल में आग लगाने पर वन अपराध के तहत कुल 315 मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं और 52 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, फायर सीजन में अब तक कुल 761 घटनाओं में 949 हेक्टेयर वन क्षेत्र जल चुका है। उत्तराखंड में जंगलों के झुलसने का सिलसिला जारी है। वन विभाग सेना के सहयोग से लगातार आग पर काबू पाने का प्रयास कर रहा है।
केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग आदि में जंगल धधक रहे-
टिहरी बांध प्रथम वन प्रभाग, नैनीताल वन प्रभाग, भूमि संरक्षण रानीखेत वन प्रभाग, अल्मोड़ा वन प्रभाग, सिविल सोयम अल्मोड़ा वन प्रभाग, तराई पूर्वी वन प्रभाग, रामनगर वन प्रभाग, मसूरी वन प्रभाग, लैंसडौन भूमि संरक्षण वन प्रभाग, सिविल सोयम पौड़ी वन प्रभाग, केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग आदि में जंगल धधक रहे हैं। अब तक दो फायर वाचर समेत चार लोग आग से झुलस चुके हैं।
52 व्यक्तियों को जंगल में आग लगाने पर गिरफ्तार किया-
अब तक इस सीजन में जंगल में आग लगाने पर वन संरक्षण अधिनियम और वन अपराध के तहत 315 मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। जिनमें 267 मुकदमे अज्ञात और 48 मुकदमे ज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध कराए गए हैं। साथ ही अब तक कुल 52 व्यक्तियों को जंगल में आग लगाने पर गिरफ्तार किया जा चुका है। वन विभाग की ओर से मुख्यालय में कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है। साथ ही जंगल की आग की सूचना देने के लिए नंबर भी जारी किए गए हैं।
इन नंबरों पर करें शिकायत-
18001804141, 01352744558 पर काल कर कोई भी विभाग को जंगल की आग की सूचना दे सकता है। साथ ही 9389337488 व 7668304788 पर व्हाट्सएप के माध्यम से भी सूचित कर सकते हैं। इसके अलावा राज्य आपदा कंट्रोल रूम देहरादून को भी 9557444486 और हेल्पलाइन 112 पर भी आग की घटना के बारे में जानकारी दी जा सकती है।
जंगलों की आग पर मानव अधिकार आयोग हुआ सख्त-
उत्तराखंड के जंगलों में लगातार आग लगने का मामला उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग देहरादून पहुंच चुका है। आयोग ने जंगलों में लग रही आग पर सख्त रूप अपनाते हुए वन अग्निकांड पर प्रमुख सचिव वन और प्रमुख मुख्य वन संरक्षक से छह बिंदुओं पर आख्या मांगी है।
उत्तराखंड मानव अधिकार आयोग ने ग्रीष्म ऋतु में लगने वाले इस अग्निकांड को वन संपदा, पर्यावरण, वन्य जीवों और मानव जीवन के लिए घातक बताया है और प्रथम दृष्टतया वृहद रूप से मानवाधिकारों को विपरीत रूप से प्रभावित करने वाला बताया है।
इस ज्वलंत समस्या पर मानव अधिकार आयोग सदस्य पूर्व जज गिरधर सिंह धर्मशक्तू के समक्ष आयोग ने स्वतः इसका संज्ञान लेकर एक आदेश जारी करते हुए वन अग्निकांड पर प्रमुख सचिव वन एवं प्रमुख मुख्य वन संरक्षक उत्तराखंड को छह बिंदुओं पर आख्या मांगी है।
इस साल बद्रीनाथ धाम की यात्रा 12 मई से शुरू हो रही है। ऐसे में बद्रीनाथ धाम में मास्टर प्लान के कार्य तेजी से चल रहे हैं। यहां आस्था पथ में भी बदलाव किया गया है। बदरीनाथ धाम तक पहुंचने वाला पुराना आस्था पथ ध्वस्त होने के कारण अब साकेत तिराहे से अलकनंदा किनारे से होते हुए करीब 100 मीटर का नया रास्ता बनाया जा रहा है।
इस मार्ग को नगर पंचायत बदरीनाथ की ओर से अंतिम रूप दिया जा रहा है। वहीं, बामणी गांव से बदरीनाथ मंदिर तक पहुंचने के लिए भी करीब 300 मीटर नए रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। यहां रीवर फ्रंट के कार्यों से पुराना रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया है।
बदरीनाथ धाम परिसर के इर्द-गिर्द होटल, धर्मशाला और आवासीय मकान थे। अब उन्हें हटा दिया गया है। इन दिनों लोक निर्माण विभाग पीआईयू की ओर से मलबे का निस्तारण भी कर रहा है।
साथ ही नगर पंचायत के 45 पर्यावरण मित्र बदरीनाथ धाम पहुंच गए हैं। नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी सुनील पुरोहित ने बताया कि धाम में नए आंतरिक मार्गों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। साकेत तिराहा से नए मार्ग का निर्माण अंतिम चरण में है।
उधर, बदरीनाथ धाम की यात्रा को लेकर इन दिनों तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। जहां प्रशासन की ओर से व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया जा रहा है। वहीं बीकेटीसी की ओर से मंदिर की साज सज्जा, सफाई व अन्य कार्य शुरू कर दिए गए हैं।
इसी के तहत समिति की ओर से इन दिनों बदरीनाथ धाम में साफ सफाई के साथ नक्काशीदार लकड़ियों पर रंगरोगन कार्य कराया जा रहा है।