लोकसभा के चुनावी महाभारत के लिए भाजपा ने अपना चक्रव्यूह तैयार कर दिया है। कांग्रेस और विपक्षी दलों के प्रत्याशियों के कड़ी चुनौती पेश करने के लिए पार्टी ने रणनीति के तहत उन चेहरों पार्टी में शामिल कराया, जिन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर ताल ठोकी थी और अच्छे-खासे वोट हासिल किए थे।
लोकसभा चुनाव से ठीक पूर्व विधानसभा चुनाव के दूसरे या तीसरे स्थान पर रहे इन चेहरों के दम पर पार्टी अपनी चुनावी राह को आसान बनाने की कोशिश कर रही है। पार्टी के ज्वाइनिंग अभियान की गति बेशक अभी कुछ धीमी दिखाई दे रही है, लेकिन इसे भी सुनियोजित रणनीति का हिस्सा बताया जा रहा है।
भाजपा ने करीब 12,500 नए लोगों को पार्टी की सदस्यता-
सियासी हलकों में ये चर्चाएं अब खासी गरमा रहीं कि कांग्रेस के कुछ और बड़े चेहरे जिनमें विधायक भी बताए जा रहे हैं, कभी भी भाजपा का दामन थाम सकते हैं। भाजपा का शीर्ष नेतृत्व इस संभावना से इन्कार भी नहीं कर रहा है। गढ़वाल मंडल की तीन लोकसभा सीटों में से दो में सबसे अधिक राजनीतिक चेहरे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए। कुछ ने घर वापसी की है। लोस चुनाव से पूर्व भाजपा ने करीब 12,500 नए लोगों को पार्टी की सदस्यता दिलाई।
विरोधी पार्टी से तोड़ने और अपने संग जोड़ने की यह कवायद इसलिए भी अहम मानी जा रही कि बदरीनाथ सीट पर कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़े राजेंद्र भंडारी को पार्टी में शामिल करा दिया। भंडारी ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर भाजपा की सदस्यता ले ली।
गढ़वाल लोस सीट से कुछ चेहरे भाजपा में आए-
बदरीनाथ ही नहीं गढ़वाल लोस क्षेत्र के अंतर्गत कुछ और विधानसभा क्षेत्रों से भी कुछ चेहरे भाजपा में शामिल हुए। इनमें केदारनाथ विस से 2022 का चुनाव लड़े कुलदीप रावत ने भाजपा की सदस्यता ली। वह चुनाव में दूसरे स्थान पर थे और उन्होंने 12,323 वोट हासिल किए थे। इसी तरह चौबट्टाखाल से कांग्रेस के प्रत्याशी रहे केसर सिंह नेगी भाजपा में चले गए। उन्हें 1,3497 वोट मिले थे। पौड़ी विस सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे नवल किशोर ने भी भाजपा का दामन थाम लिया। उन्होंने 20,127 वोट हासिल किए थे। यमकेश्वर सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े शैलेंद्र सिंह रावत की भी भाजपा में वापसी हो गई। शैलेंद्र ने 17,980 वोट लिए थे। श्रीनगर गढ़वाल सीट से यूकेडी छोड़ कर आए मोहन काला भी भाजपा के हो गए। काला को विस चुनाव में 4271 वोट मिले थे
टिहरी लोकसभा सीट में भी लगी कांग्रेस में सेंध
कांग्रेस में सबसे बड़ी सेंध टिहरी लोकसभा क्षेत्र में लगी। यहां पुरोला सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी रहे मालचंद ने भाजपा में वापसी कर ली। मालचंद ने विस में 21,560 वोट लिए थे। गंगोत्री में खांटी कांग्रेसी रहे पूर्व विधायक विजय पाल सजवाण भी भाजपा में शामिल हो गए। गंगोत्री सीट पर दूसरे स्थान पर थे और उन्होंने 21,590 वोट हासिल किए थे। टिहरी लोस सीट पर दूसरे स्थान पर रहे दिनेश धनै भी भाजपा में शामिल हो गए। उन्हें 18,851 वोट मिले थे। इसके अलावा इसी सीट पर कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े धन सिंह नेगी ने भी भाजपा में वापसी कर ली। उन्होंने 6,385 वोट मिले थे। धनोल्टी सीट पर चुनाव लड़े जोत सिंह बिष्ट भी आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। बिष्ट ने 2022 का चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था और 18,143 वोट लेकर वह दूसरे स्थान पर थे। इस सीट पर नंबर तीन रहे महावीर सिंह रांगड ने भी भाजपा में घर वापसी कर ली। रांगण ने भी 12,644 वोट हासिल किए थे।
हरिद्वार लोस में कुछ ही प्रत्याशी भाजपा में आए
हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में बड़ी संख्या में पंचायत जनप्रतिनिधियों ने भाजपा का दामन थामा, लेकिन विस चुनाव के पूर्व प्रत्याशियों की संख्या गढ़वाल और टिहरी सीट से कम रही। टिहरी से पिता दिनेश धनै के भाजपा में शामिल होने के साथ ऋषिकेश से चुनाव लड़े कनक धनै भी भाजपा के हो गए। कनक ने 2022 के विस चुनाव में 13,080 वोट हासिल किए थे। भगवानपुर सीट पर अपनी भाभी कांग्रेस की ममता राकेश से हारे सुबोध राकेश ने बसपा छोड़कर भाजपा में वापसी कर ली। सुबोध राकेश को 39,997 वोट मिले थे। खानपुर सीट के पूर्व प्रत्याशी सुभाष चौधरी ने भाजपा में जा चुके हैं। उन्हें छह हजार से अधिक वोट मिले थे।
कुमाऊं में बेअसर रहा भाजपा के ज्वाइनिंग अभियान
गढ़वाल मंडल तुलना में भाजपा का ज्वाइनिंग अभियान कुमाऊं मंडल में प्रभावी नहीं रहा। नैनीताल लोस क्षेत्र में कालाढूंगी विस से महेश चंद्र शर्मा ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा। महेश चंद्र को 2022 के चुनाव में 43 हजार से अधिक वोट मिले थे। भीमताल विस सीट पर कांग्रेस से चुनाव लड़े दान सिंह भंडारी ने भी भाजपा में वापसी कर ली। भंडारी को 15 हजार से अधिक वोट मिले थे। किच्छा से प्रत्याशी रहे अजय तिवारी ने भी भाजपा की सदस्यता ली। उन्हें 6,000 से अधिक वोट मिले थे। इनके अलावा कुमाऊं मंडल से कांग्रेस का कोई बड़ा चेहरा भाजपा में शामिल नहीं हुआ।
उत्तराखंड बोर्ड का 10वीं और 12वीं का परीक्षा का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ, लेकिन 10वीं की परीक्षा दे चुके हजारों छात्र-छात्राओं को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले 11वीं कक्षा में दाखिला मिलेगा।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट ने इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी किया है। उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा के बाद इन दिनों छात्र-छात्राओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन का काम चल रहा है। विभाग की ओर से इसके लिए 29 मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। जिसमें 16 मूल्यांकन केंद्र गढ़वाल और 13 कुमाऊं मंडल में हैं।
30 अप्रैलकोहोगाबोर्डपरीक्षापरिणामघोषित-
विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, 27 मार्च से शुरू हुआ मूल्यांकन का काम 10 अप्रैल तक पूरा कर लिया जाएगा। इसके लिए 3574 शिक्षकों की डयूटी लगाई गई है। उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के बाद 30 अप्रैल को बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किया जाना है, जिसे घोषित होने में अभी समय है।
इस बीच छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए 10वीं की परीक्षा दे चुके छात्र-छात्राओं को परीक्षा परिणाम घोषित होने से पहले 11वीं में दाखिला दिया जाएगा। शिक्षा निदेशक महावीर सिंह बिष्ट के मुताबिक, 11वीं में दाखिले के बाद यदि कोई छात्र 10वीं में अधिकतम दो विषय में फेल होता है तो अंक सुधार परीक्षा के माध्यम से उसे पास होने का मौका दिया जाएगा। पिछले साल 47 हजार से अधिक छात्र हुए थे फेल-
उत्तराखंड बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में पिछले साल 47 हजार से अधिक छात्र फेल हो गए थे। इसमें 12वीं में 19 हजार और 10वीं में 28 हजार छात्र-छात्राएं शामिल थे।
छात्र-छात्राओं की पढ़ाई का नुकसान न हो, इसके लिए छात्रहित में निर्णय लिया गया कि 10वीं के छात्र-छात्राओं का रिजल्ट आने से पहले उन्हें 11वीं कक्षा में दाखिला दिया जाए। इस संबंध में सभी सीईओ को निर्देश जारी कर दिया गया है। –महावीर सिंह बिष्ट, निदेशक माध्यमिक शिक्षा
उत्तराखंड के रुद्रपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी जनसभा की। पीएम मोदी ने देसी अंदाज में हाल चाल लिया। पीएम मोदी ने कहा कि भीड़ को देखकर यह तय नहीं हो पा रहा कि यह प्रचार सभा या विजय रैली।
मैदान में बैठे लोगों को धूप लगने पर पीएम मोदी ने कहा कि भीड़ के लिए पंडाल छोटा पड़ गया है। जितने लोग अंदर बैठे हैं उससे ज्यादा लोग बाहर धूप में तप रहे हैं। हमारी व्यवस्था में कुछ कमी रही इसके लिए मैं क्षमा मांगता हूं। आपको विश्वास दिलाता हूं कि धूप में तपने की आपकी तपस्या को बेकार नहीं जाने दूंगा। मैं इसे विकास कर करके लौटा दूंगा।
आपके प्यार के लिए मैं आपका बहुत आभारी हूं। कहा कि यह चुनावी सभा भी ऐसे क्षेत्र में हो रही है जिसे मिनी इंडिया कहा जाता है। कहा कि यह देवभूमि और मिनी इंडिया का ही आशीर्वाद है कि वह उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आए हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के प्रति भाजपा का जो प्रेम जग जाहिर है।
हमें उत्तराखंड को विकसित राज्य बनाकर सबसे आगे लेकर जाना है। इसके लिए केंद्र की भाजपा सरकार कोई कोर कसर नहीं छोड़ रही है। पिछले दस वर्षों में जितना विकास उत्तराखंड का हुआ है उतना आजादी के बाद के 60-65 साल में भी नहीं हुआ।
‘दस साल में जितना विकास हुआ आज तक नहीं-
पीएम मोदी ने कहा कि हमें उत्तराखंड को विकसित बनाना है, केंद्र सरकार कोई कसर नहीं छोड़ रही। दस साल में जितना विकास हुआ आज तक नहीं हुआ। 12 लाख घरों को पानी कनेक्शन दिया। तीन लाख को स्वामित्व योजना का लाभ मिला। 35 लाख लोगों को बैंक खाते खोले गए। छोटे किसानों के खाते में किसान निधि दी। नियत सही होती है तो काम ऐसे ही होते हैं। नियत सही तो नतीजे भी सही।
पीएम मोदी ने कहा कि आज उत्तराखंड हर प्रकार की आधुनिक कनेक्टिविटी से जुड़ रहा है। भाजपा ने प्रदेश के गरीबों को 85000 घर बनाकर दिए हैं। 12 लाख घरों तक पानी का कनेक्शन पहुंचाया है। इसके अलावा भाजपा सरकार ने साढे पांच लाख से ज्यादा शौचालयों का निर्माण कराया है। इसके अलावा यहां की पांच लाख से ज्यादा महिलाओं को उज्जवला गैस मुक्त कनेक्शन दिया गया है। करीब 3 लाख लोगों को स्वामित्व योजना के तहत उनकी प्रॉपर्टी के कार्ड दिए गए हैं। उत्तराखंड के 35 लाख लोगों के पास पहले बैंक में खाता तक नहीं थे। भाजपा सरकार ने 35 लाख लोगों के बैंक खाते खुलवाए और उन्हें बैंकों से जोड़ा। कहा कि इतने सारे काम तब होते हैं जब नीयत सही होती है। इसलिए मैं कहता हूं नियत सही तो नतीजे भी।
‘मोदी की गारंटी ने उत्तराखंड के घर-घर में सुविधा पहुंचाई‘–
पीएम ने कहा कि मोदी की गारंटी यानी पूरा होने की गारंटी है। मोदी की गारंटी ने उत्तराखंड के घर-घर में सुविधा पहुंचाई है, लोगों का स्वाभिमान बढ़ाया है। अब तीसरे टर्म में आपका ये बेटा एक और बड़ा काम करने जा रहा है। आपको 24 घंटे बिजली मिले, बिजली का बिल जीरो हो और बिजली से कमाई भी हो। इसके लिए मोदी ने ‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ शुरू की है।
‘भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की गारंटी दी‘–
पीएम ने कहा कि मोदी ने भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बनाने की गारंटी दी है। तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक ताकत का मतलब है, लोगों की कमाई बढ़ेगी। नौकरी के अवसर बढ़ेंगे। गांव-शहर में सुविधा बढ़ेगी। इसका बड़ा फायदा उत्तराखंड को भी होगा। ‘उत्तराखंड की पवित्र धरती पर खुद को बहुत धन्य महसूस करता हूं‘–
पीएम मोदी ने कहा कि मैं जब भी उत्तराखंड की पवित्र धरती पर आता हूं, खुद को बहुत धन्य महसूस करता हूं। इसलिए मेरे दिल की गहराई से एक बात निकली थी- देवभूमि के ध्यान से ही मैं सदा धन्य हो जाता हूं, है भाग्य मेरा सौभाग्य मेरा, मैं तुमको शीश नवाता हूं।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर बोला हमला-
पीएम मोदी ने कहा कि कांग्रेस ने मां भारती के टुकड़े किए। उत्तराखंड वीर संतान को जन्म देती है, कांग्रेस ने तमिलनाडु के पास समुंद्र में द्वीप भारत का हिस्सा श्रीलंका को दिया। कोई मछुआरे जाता है तो वो वाह जेल में है। लोगों से पूछा क्या कांग्रेस भारत की रक्षा कर सकती है, मोदी ने सैनिक परिवारों को वन रैंक वन पेंशन दी। नियत सही तो नतीजे सही।
तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर तेज प्रहार होगा- PM
पीएम मोदी ने कहा कि इस चुनाव में दो खेमे हैं। हम लोग ईमानदारी दूसरी तरफ भ्रष्टाचारी, धमकी और गाली दे रहे हैं। हम कह रहे भ्रष्टाचार हटाओ, वो कह रहे भष्टाचारी बचाओ। मोदी देश की आवाज सुनता है। मोदी को कितनी गलियां और धमकी दी जाए, मैं डरने वाला नहीं। पीएम मोदी ने कहा कि तीसरे कार्यकाल में भ्रष्टाचार पर तेज प्रहार होगा। आगे आना वाला पांच साल देश हित में बड़े फैसलों के होंगे।
इस बार लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी मैदानी प्रभाव वाली हरिद्वार और नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा सीटों पर सबसे ज्यादा स्टार प्रचारक उतारेगी। 2017 के मुकाबले 2022 के विधानसभा चुनाव में प्रदर्शन गिरने के बाद पार्टी ने ये रणनीति बनाई है। दोनों सीटों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक को लाने की तैयारी है।
हरिद्वार लोकसभा सीट में कुल 14 विधानसभा सीटें हैं, जिनमें से 2017 के विस चुनाव में भाजपा के पास 11 व कांग्रेस के पास तीन थीं। 2022 के विस चुनाव में लोकसभा में छह सीटें भाजपा के पास रह गई थीं। पांच सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया था। दो पर बसपा और एक निर्दलीय प्रत्याशी ने जीत दर्ज की थी। इसी प्रकार, नैनीताल-ऊधमसिंह नगर लोकसभा में कुल 14 विधानसभा सीटें हैं।
इनमें से 2017 के विस चुनाव में भाजपा के पास 11, कांग्रेस के पास दो और एक निर्दलीय विधायक था, लेकिन 2022 के विस चुनाव में इस लोकसभा के अंतर्गत आने वालीं 14 सीटों में से भाजपा के पास आठ रह गईं और कांग्रेस की दो से बढ़कर छह हो गई थीं। लिहाजा, लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने इन दोनों जिलों के लिए खास प्लान तैयार किया है।
पार्टी जल्द ही जारी करेगी शेड्यूल
हरिद्वार में कार्यकर्ताओं के बीच प्रचार करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा अप्रैल के पहले सप्ताह में रोड शो करेंगे। इसके बाद यहां भगवानपुर में गृह मंत्री अमित शाह और रुड़की में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को बतौर स्टार प्रचारक लाने की तैयारी हो रही है। वहीं, ऊधमसिंह नगर जिले में पार्टी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रुद्रपुर, अमित शाह, राजनाथ सिंह को लाने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी जल्द ही इसका शेड्यूल जारी करेगी।
2022 विस चुनाव में गढ़वाल-कुमाऊं में भाजपा-कांग्रेस
गढ़वाल मंडल
कुल सीटें- 41
भाजपा- 28
कांग्रेस-8 (एक विधायक के भाजपा में जाने से सीट खाली)
कांग्रेस के गढ़वाल सीट से लोकसभा प्रत्याशी गणेश गोदियाल ने बुधवार को नामांकन किया। इसके बाद उन्होंने रामलीला मैदान में जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि हमें स्टार प्रचारकों की जरूरत नहीं है। उत्तराखंड की जनता व संगठन के लोग ही उनके स्टार प्रचारक है।
कहा कि बीजेपी की सरकार 10 साल से है लेकिन इस कार्यकाल में अच्छे दिन क्या हुआ। इसके साथ उन्होंने काला धन पर भी भाजपा को आड़े हाथों लिया। कहा कि पीएम मोदी ने विदेशों से काला धन लाने की बात कही थी, साथ ही लोगों के खाते में 15- 15 लाख रुपये आने का वादा किया था, लेकिन आज तक न तो काला धन वापस आया, ना ही लोगों के खाते में 15 लाख रुपये आए।
इसके अलावा उन्होंने भू कानून, मूल निवास समेत तमाम मुद्दों पर बात कही। साथ ही प्रथम सीडीएस बिपिन रावत की मौत की जांच पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि उनकी मौत कैसे हुई। इसका खुलासा नहीं हो पाया। इस दौरान पूर्व मंत्री शूरवीर सिंह सजवाण, सुरेंद्र सिंह नेगी, नरेंद्र नगर से पूर्व विधायक ओम गोपाल रावत ,रणजीत रावत, प्रो. जीतराम, मनोज रावत आदि ने जनता को संबोधित किया।
टिहरी लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह लक्ष्मी नामांकन कराने पहुंचीं। इस दौरान उनके साथ नामांकन रैली में सीएम धामी, वरिष्ठ नेता सहित भारी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। लोकसभा चुनाव में उतरे भाजपा व कांग्रेस के तीन प्रत्याशी आज 26 मार्च को नामांकन करेंगे।
टिहरी से माला राज्यलक्ष्मी शाह के अलावा गढ़वाल सीट से भाजपा प्रत्याशी अनिल बलूनी और कांग्रेस प्रत्याशी जोत सिंह गुनसोला पर्चा भरेंगे। दोनों दलों से पार्टी प्रत्याशियों के नामांकन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। माला राज्यलक्ष्मी शाह के नामांकन में मुख्यमंत्री धामी, प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट समेत कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे जबकि कांग्रेस प्रत्याशी गुनसोला के नामांकन में प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा समेत कई नेता भी रहेंगे।
कांग्रेस के प्रत्याशियों को स्टार प्रचारकों का इंतजार-
लोकसभा चुनाव में उतरे कांग्रेस प्रत्याशियों को स्टार प्रचारकों का इंतजार है। प्रत्याशी अपने स्तर पर चुनाव मैदान में डटे हैं। पार्टी केंद्रीय नेतृत्व की ओर से अभी तक कोई बड़ा नेता उत्तराखंड दौरे पर नहीं आया। भाजपा ने पांचों सीटों पर चुनाव प्रचार के लिए स्टार प्रचारकों की लंबी फेहरिस्त बनाई है। वहीं, कांग्रेस ने अभी तक स्टार प्रचारकों की सूची तैयार नहीं की है।
प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरा दत्त जोशी ने बताया, चुनाव प्रचार में स्टार प्रचारकों की सूची बनाई जा रही है। राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी, राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, मुकुल वासनिक, सलमान खुर्शीद समेत कई बड़े नेताओं की पांचों सीटों पर रैली निकालने की रणनीति तैयार की जा रही है। होली पर्व के बाद स्टार प्रचारकों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेजी जाएगी।
Holi: आस्था और पर्यटन का संगम कही जाने वाली बाबा भोलेनाथ की नगरी उत्तरकाशी होली के रंग में रंग चुकी है। उत्तरकाशी में आज छोटी होली की सुबह बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर में भस्म की होली के साथ होली के त्योहार का शुभारंभ हुआ।
उत्तरकाशी में बाबा काशी विश्वनाथ प्रांगण से भस्म की होली के साथ पूरे जनपद में होली शुरू होती है। रविवार सुबह भोलेनाथ के भक्त मंदिर में एकत्रित हुए। जहां मंदिर के महंत अजय पुरी ने पहले स्वयंभू शिवलिंग पर भस्म लगाकर उनका आशीर्वाद लिया। उसके बाद सभी भक्तों पर भस्म लगाकर होली शुरू हुई।
सभी भक्तों ने आपस में भस्म लगाकर एक दूसरे को होली की शुभकामनाएं दी। उसके बाद बाबा काशी विश्वनाथ मंडली की और से होली और बसंत के गीत गाए गए। वहीं, भस्म लगाकर शिव भक्त जमकर झूमे।
महंत अजय पुरी ने बताया कि जहां आज के समय में रसायनिक होली का प्रचलन बढ़ गया है। ऐसे समय में भोलेनाथ के दरबार से भस्म की होली खेलकर यह संदेश दिया जा रहा है कि हम रसायनिक रंग छोड़ प्राकृतिक रंगो का प्रयोग करें।
भस्म होली के बाद मंदिर में प्रसाद वितरण का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वहीं इस मौके पर देश के विभिन्न प्रदेशो से आए श्रद्धालु भी भस्म होली के गवाह बने। कहा कि उत्तरकाशी कलयुग की काशी कही जाती है।
कलयुग में बाबा काशी विश्वनाथ अस्सी वरुणा नदी के बीच वरुणावत पर्वत की तलहटी में निवास करेंगे। वहीं, भस्म होली के गवाह बने दिल्ली के पर्यटकों का कहना है कि उन्होंने भस्म की होली पहली बार देखी है। यह उनके जीवन का अनमोल अनुभव है। उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ से देश मे खुशहाली की कामना की।
उत्तराखंड में पटरी से उतर रही शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के भले हमेशा से दावे किए जाते रहे हो, लेकिन हालात सुधरने के बजाए बिगड़ते जा रहे हैं। विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के सरकारी स्कूल लगातार छात्रविहीन हो रहे हैं। हाल यह है कि 1,671 सरकारी विद्यालयों में ताला लटक गया है, जबकि अन्य 3573 बंद होने की कगार पर हैं।
हैरानी की बात यह है कि 102 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें हर स्कूल में मात्र एक-एक छात्र अध्ययनरत हैं। प्रदेश में एक अप्रैल 2024 से नया शिक्षा सत्र शुरू हो रहा है, लेकिन इस सत्र के शुरू होने से पहले राज्य के कई विद्यालयों में ताला लटक गया है। शिक्षा महानिदेशालय ने हाल ही में राज्य के सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों से जिलों में बंद हो चुके विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी थी।
जिलों से मिली रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी विद्यालय छात्र विहीन होने से लगातार बंद हो रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 3,573 विद्यालयों में छात्र संख्या 10 या फिर इससे भी कम रह गई है। इसमें सबसे अधिक 785 स्कूल पौड़ी जिले के हैं, जबकि सबसे कम तीन स्कूल हरिद्वार जिले के हैं।
पौड़ी जिले में सबसे अधिक 315 स्कूल बंद-
राज्य में पौड़ी एकमात्र ऐसा जिला है, जिसमें सबसे अधिक 315 स्कूलों में ताला लटक चुका है, जबकि ऊधमसिंह नगर जिले में सबसे कम मात्र 21 स्कूल बंद हुए हैं। छात्र न होने की वजह से राज्यभर में 1,671 स्कूल बंद हो चुके हैं।
इतने सरकारी स्कूलों में लटका ताला
राज्य में अल्मोड़ा जिले में 197, बागेश्वर में 53, चमोली में 133, चंपावत में 55, देहरादून में 124, हरिद्वार में 24, नैनीताल में 82, पौड़ी में 315, पिथौरागढ़ में 224, रुद्रप्रयाग में 53, टिहरी गढ़वाल में 268, ऊधमसिंह नगर में 21 और उत्तरकाशी जिले में 122 स्कूलों में ताला लटक चुका है।
शिक्षा में फिनलैंड मॉडल अपनाने के दावे
प्रदेश की बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग के लिए प्रयोगशाला बनी हैं। पूर्व में अटल उत्कृष्ट विद्यालय, मॉडल विद्यालय, क्लस्टर विद्यालय आदि के रूप में कई प्रयोग किए जा चुके हैं, जबकि अब शिक्षा में फिनलैंड मॉडल अपनाने का दावा किया जा रहा है। इसे लेकर मंत्री के साथ विभागीय अधिकारियों की एक टीम चार दिन फिनलैंड और स्विट्जरलैंड का दौरा कर चुकी है।
राज्य के सभी जिलों से बंद हो चुके सरकारी विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी गई थी। बंद हो चुके विद्यालयों का इस्तेमाल आंगनबाड़ी केंद्र, होम स्टे, एएनएम सेंटर एवं पंचायतघर के रूप में किया जाएगा, जिससे उपलब्ध भवन का इस्तेमाल होने से जनता को फायदा हो।
उत्तराखंड में 19 अप्रैल को पहले चरण में पांचों लोस सीटों पर मतदान है। आम चुनाव में एक-एक वोट का महत्व है। चुनाव आयोग से लेकर राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि हर वर्ग, धर्म, जाति और उम्र के वोटरों को मतदान के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जागरूकता अभियान चला रहे हैं। लोकतंत्र के इस महापर्व में अगर कहीं किसी वोटर की चर्चा नहीं हो रही है, तो वह ट्रांसजेंडर (किन्नर) मतदाता हैं। किन्नर का वोट भी सामान्य वोटर की तरह सरकार बनाने में भूमिका निभाता है। उत्तराखंड में 297 किन्नर मतदाता हैं। किन्नर सरकार से क्या चाहते हैं? किन्नर अखाड़ा परिषद की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी से अमर उजाला की खास बातचीत।
समाज में किन्नरों की क्या भूमिका है ?
किन्नर भी इंसान हैं। सामाजिक भेदभाव से किन्नर हाशिये पर हैं। उनको तिरस्कार झेलना पड़ता है। बदलते वक्त के साथ कुछ लोगों का नजरिया उनके प्रति बदला है। खासकर 2021 में हरिद्वार कुंभ मेले में किन्नर अखाड़ा के शाही स्नान और पेशवाई में लोगों ने किन्नरों को बहुत करीब से देखा और समझा है। इससे लोगों में किन्नरों के प्रति भ्रांतियां कम हुई हैं। अधिकतर लोगों की सोच अभी बदलनी बाकी है।
सरकार और राजनीतिक दलों का किन्नरों के प्रति क्या नजरिया है?
सुप्रीम कोर्ट ने किन्नरों को थर्ड जेंडर के रूप में मान्यता दी है। लोकतंत्र में एक आम वोटर की तरह मतदान का अधिकार मिला है। किन्नर सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाते हैं। कोई भी दल वोट मांगने उनके पास नहीं आता है। किन्नर सजग नागरिक की भूमिका निभाते खुद वोट डालने जाते हैं। सरकारों की नजर में किन्नर उपेक्षित हैं। हालांकि, सरकार ने किन्नरों को कुछ अधिकार जरूर दिए हैं, लेकिन धरातल में उनको लागू नहीं किया जाता है।
वोट के बदले नई सरकार से किन्नरों को क्या उम्मीदें हैं?
बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ की तरह सरकार को किन्नर बचाओ-किन्नर पढ़ाओ जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। किन्नर बच्चे भी पढ़ना चाहते हैं, लेकिन उनके लिए माहौल नहीं होता। स्कूलों में शिक्षक से लेकर बाकी छात्रों के बीच भेदभाव झेलना पड़ता है। जिसके चलते किन्नर के बच्चे स्कूल छोड़ देते हैं। अशिक्षा से समाज की मुख्य धारा से कट जाते हैं। किन्नर बच्चों के लिए अलग से योजना बनाने की जरूरत है।क्या नाच-गाना ही किन्नरों का पेशा है या मजबूरी ?
कई किन्नर पढ़े-लिखे हैं। कॉरपोरेट जगत ने उनके लिए नौकरी के दरवाजे खोले हैं। कई शहरों में किन्नर नौकरी कर आम इंसान की तरह जीवन यापन कर रहे हैं। सरकार को भी चाहिए कि किन्नरों के लिए हर विभाग में नौकरी के दरवाजे खोले। उनके लिए अल्पसंख्यक कोटे का आरक्षण लागू किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने अल्पसंख्यक का दर्जा देने के आदेश दिए भी हैं। कोई भी किन्नर अपनी मर्जी से नाच-गाना या ताली बजाकर मांगकर खाना नहीं चाहता है। वह भी सिर उठाकर समाज में जीना चाहता है।
किन्नरों की आबादी अधिक और वोटर संख्या कम क्यों है और क्या वजह है ?
किन्नरों की वास्तविक संख्या आयोग की मतदाता सूची की तुलना में काफी अधिक है। कुछ किन्नर जागरूकता के अभाव में अपना नाम वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं करा पाते हैं। आयोग की ओर से किन्नरों को वोटर आईडी बनाने के लिए जागरूक भी नहीं किया जाता है, जबकि काफी संख्या में किन्नर महिला और पुरुष वोटर के रूप में दर्ज हैं।क्या किन्नर बीमार नहीं पड़ते, कहां इलाज करवाते हैं?
किन्नर भी हाड़-मांस के बने हैं और उनके शरीर में भी खून दौड़ता है। आम इंसान की तरह उनको भी बीपी, शुगर और अन्य बीमारियां होती हैं। अस्पताल में उनके साथ भेदभाव होता है। अपमानजनक शब्दों से पुकारते हैं। किन्नरों के इलाज के लिए अस्पताल में अलग व्यवस्था होनी चाहिए।
किन्नर मतदाताओं के लिए कोई पैगाम देना चाहें तो क्या कहेंगी?
मैं खुद हर चुनाव में मतदान करती हूं। अखाड़ों से जुड़े किन्नरों को इसके लिए प्रेरित करती हूं। लोस चुनाव से किन्नरों से निवेदन करूंगी कि वह मताधिकार जरूर करें। अपने अधिकार पाने के लिए वोट ही उनका सबसे बड़ा हथियार है। उम्मीद करूंगी कि आयोग भी किन्नरों की बस्ती में जाकर उनको मताधिकार का लिए जागरूक कराए।
भरतनाट्यम पोस्ट ग्रेजुएट हैं लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी-
लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ब्राह्मण परिवार से हैं। महाराष्ट्र के ठाणे में 13 दिसंबर 1978 को जन्मी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी भरतनाट्यम में पोस्ट ग्रेजुएट हैं। पहली बार टीवी शो बिग बॉस के पांचवें सीजन में कंटेस्टेंट रहने के बाद चर्चाओं में आई। उनकी लिखी किताब ”मी हिजड़ा, मी लक्ष्मी” ने उनको देशभर में सुर्खियां दिलाई। 2021 में किन्नर अखाड़ा की आचार्य महामंडलेश्वर की पदवी पर बैठने से देश-दुनिया उनसे रूबरू हुई। लक्ष्मी नारायण 2008 में संयुक्त राष्ट्र के एशिया पैसिफिक सम्मेलन में प्रतिनिधित्व करने वाली पहली ट्रांसजेंडर हैं। वो कोरियोग्राफर और मॉडल के रूप में कार्य भी कर चुकी हैं। हिंदी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, अंग्रेजी, जर्मन और फ्रेंच जैसी भाषा बोलती हैं।
भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा की पांच वर्ष में चल संपत्ति में चार गुना तो अचल संपत्ति दो गुना से ज्यादा बढ़ गई है। वर्ष 2019 में अजय टम्टा ने नामांकन के समय जो शपथ पत्र प्रस्तुत किए उसके अनुसार उनके पास 6,49,744 रुपये की चल संपत्ति थी जो सिर्फ पांच साल में चार गुना बढ़कर 26,58,611 पहुंच गई है। उनकी अचल संपत्ति में भी करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है।
राज्य गठन के बाद अल्मोड़ा संसदीय सीट वर्ष 2009 में पहली बार आरक्षित हुई। कांग्रेस ने प्रदीप टम्टा तो भाजपा ने अजय टम्टा को मैदान में उतारा। कड़े मुकाबले में प्रदीप टम्टा ने अजय टम्टा को हराकर संसद का सफर तय किया। इसके ठीक पांच वर्ष बाद 2014 हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने फिर से अजय टम्टा पर भरोसा जताते हुए उन्हें मैदान में उतारा, जिस पर वह खरे उतरे और अपने पुराने प्रतिद्वंद्वी को हरा दिया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और लगातार दूसरी बार 2019 में भी जीत दर्ज की। इस चुनाव में नामांकन पत्र दाखिल करते समय उन्होंने संपत्ति का ब्योरा भी प्रस्तुत किया। इसके तहत तब उनके पास 6,49,744 और 37,31,375 रुपये कीमत की अचल संपत्ति थी। इस बार के लोकसभा चुनाव में उनकी चल संपत्ति 26,58,611 रुपये है जबकि अचल संपत्ति दो गुना से ज्यादा बढ़कर 75,40,000 रुपये हो गई है।
स्नातक भी बने अजय-
अल्मोड़ा संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा ने पांच सालों में संपत्ति के साथ ही शैक्षिक योग्यता भी बढ़ाई है। उन्होंने पांच सालों के बीच स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय मेरठ से स्नातक की डिग्री भी हासिल की है। 2019 के लोकसभा चुनाव तक उनकी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट थी। 1993 में सक्रिय राजनीति में उतरने के चलते वह आगे की पढ़ाई नहीं कर सके। उन्होंने 2019 के लोकसभा चुनाव में भरे शपथ पत्र में अपनी शैक्षिक योग्यता इंटरमीडिएट दर्ज की थी। इस बार स्नातक की डिग्री के साथ वह मैदान में हैं।
संपत्ति का ब्योरा-
नकदी 10,50,000 रुपये
वाहन : मारुति स्विफ्ट डिजायर, टोयोटा फार्चूनर
जेवरात-
सोना : सात तोला
चांदी : 20 ग्राम
पत्नी की संपत्ति
सोना : 10 तोला
चांदी : 50 ग्राम
कुल चल संपत्ति की कीमत
26,58,611 रुपये,
पत्नी के नाम-10,51,877,
पुत्री के नाम-11,31,173 रुपये
अचल संपत्ति
75,40000 रुपये बैंक ऋण-19,09,642 रुपये
अजय टम्टा ने किया नामांकन पत्र दाखिल-
अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भाजपा प्रत्याशी अजय टम्टा ने नामांकन पत्र दाखिल किया। सादगी के साथ वह नामांकन पत्र दाखिल करने कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिला निर्वाचन अधिकारी विनीत तोमर को नामांकन पत्र सौंपा। इस दौरान उनकी पत्नी सोनम टम्टा भी मौजूद रहीं। अल्मोड़ा संसदीय सीट पर भाजपा नामांकन पत्र दाखिल करने में अव्वल रही।
पार्टी प्रत्याशी अजय टम्टा ने शुक्रवार को विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचकर नामांकन पत्र दाखिल किया। उनके साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट, कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या, डीडीहाट विधायक विशन सिंह चुफाल, कपकोट विधायक सुरेश गढ़िया, रानीखेत विधायक डॉ. प्रमोद नैनवाल, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष कैलाश शर्मा भी कलेक्ट्रेट पहुंचे। उनके नामांकन पत्र दाखिल करने पर सभी नेताओं के साथ ही पार्टी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं ने उन्हें बधाई दी।