हल्द्वानी में हुई हिंसा और कर्फ्यू का असर नैनीताल के पर्यटन पर पड़ा है। होटल और रिजॉर्ट में सप्ताहांत और वैलेंटाइन वीक के लिए जिन सैलानियों ने एडवांस बुकिंग कराई थी वे उसे कैंसिल करने लगे हैं। होटल संचालकों के अनुसार करीब 50 फीसदी एडवांस बुकिंग कैंसिल हो गई है।
उत्तराखंड से बाहर के सैलानी होटल कारोबारियों से हिंसा और कर्फ्यू का अपटेड भी ले रहे हैं। शुक्रवार को शहर और यहां के पिकनिक स्पॉटों में सैलानियों की आवाजाही कम रही। ऐसे में इस सप्ताहांत (शनिवार व रविवार) के साथ-साथ वैलेंटाइन वीक का पर्यटक सीजन प्रभावित होने के आसार हैं। पर्यटन कारोबारियों का कहना है कि अब नहीं लगता कि सप्ताहांत और वैलेंटाइन के मौके पर सैलानी नैनीताल पहुंचेंगे।
बाहरी इलाकों से कर्फ्यू हटाया गया-
उत्तराखंड के हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में कर्फ्यू जारी है। हालांकि बाहरी इलाकों से कर्फ्यू हटा दिया गया है। बनभूलपुरा में ही धार्मिक स्थल तोड़ने पर भीड़ ने गुरुवार को आगजनी और तोड़फोड़ की थी। हल्द्वानी के बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने एसओ मुखानी, सहायक नगर आयुक्त और एसओ बनभूलपुरा की तहरीर पर 18 नामजद समेत पांच हजार उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। घटनास्थल और आसपास के इलाके से पांच शव बरामद कर लिए गए हैं। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग कब्जे में ले ली है।
हल्द्वानी हिंसा के बाद कम आए सैलानी
हल्द्वानी में हुई हिंसा की खबर सुर्खियों में रही है। जिसका असर यह हुआ कि वीकेंड पर नैनीताल आने वाले सैलानी इस बार नहीं आए। बृहस्पतिवार को चुंगी से दो से ढाई सौ गाड़ियां पास हुई थी जबकि शुक्रवार को यह संख्या बमुश्किल सौ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई।
कैंसिल हो रही है बुकिंग- हल्द्वानी की हिंसा ने वीकेंड और वैलेंटाइन वीक का पर्यटन कारोबार ठप कर दिया है। चौबीस घंटे में नैनीताल के होटलों में 50 फीसदी एडवांस बुकिंग कैंसिल हो चुकी है।
कुछ दिनों से पर्यटन कारोबार मंदा चल रहा था लेकिन बीते एक दो दिन से सैलानियों की आवाजाही बढ़ने लगी थी। हिंसा और कर्फ्यू की खबर मिलने के बाद जो सैलानी नैनीताल पहुंचे भी थे वे शुक्रवार की सुबह से ही लौटने लगे हैं। कई सैलानियों ने होटलों में एडवांस बुकिंग भी कैंसिल करा दी है।
भारी हिंसा के बाद शुक्रवार को शांत रहा शहर-
बृहस्पतिवार को हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके में हुई भारी हिंसा के बाद शुक्रवार को शहर शांत रहा। कर्फ्यू का संबंधित क्षेत्र में सख्ती से पालन कराया गया जबकि शेष शहर में वाहनों की आवाजाही होती रही और दुकानें बंद रहीं। दोपहर करीब 12 बजे मुख्य सचिव राधा रतूड़ी और डीजीपी अभिनव कुमार बनभूलपुरा पहुंचे और थाने का जायजा लिया।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में हुए बवाल के बाद सुरक्षा के दृष्टिगत शहर में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई। इससे लोगों का आमजीवन काफी प्रभावित रहा। कर्फ्यू लगने से घरों में कैद लोग बिना इंटरनेट के काफी परेशान रहे। बता दें कि, बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने 18 नामजद समेत पांच हजार उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया।
शहर में बृहस्पतिवार रात करीब दस बजे से इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई थी। बीएसएनएल, वोडाफोन, एयरटेल, जियो समेत अन्य नेटवर्क पर इंटरनेट सेवा संचालित नहीं हो पाई। ऐसे में सैकड़ों यूजर्स सूचना न मिल पाने के कारण परेशान रहे। इंटरनेट सेवा बंद होने से वर्क फ्राॅम होम से जुड़े लोगों का काम प्रभावित रहा वहीं परीक्षा की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को भी खासी दिक्कत हुई।
बीएसएनएल के डीजीएम भीम बहादुर ने बताया कि पुलिस प्रशासन की ओर से जब तक अनुमति नहीं दी जाएगी तब तक संचार सेवा सुचारु नहीं होगी। बताया कि शहर के बाहरी क्षेत्र में भी इंटरनेट को बंद किया जा रहा है, जिस कारण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से शहर में अराजकता का माहौल न बने।
बता दें कि, बनभूलपुरा हिंसा मामले में पुलिस ने 18 नामजद समेत पांच हजार उपद्रवियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। घटनास्थल और आसपास के इलाके से पांच शव बरामद कर लिए गए हैं। एक व्यक्ति की मौत बरेली ले जाते समय हो गई, हालांकि प्रशासन ने इसकी पुष्टि नहीं की है। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लेकर सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग कब्जे में ले ली है। पुलिस ने कई डीबीआर की हार्ड डिस्क कब्जे में ली है।
हल्द्वानी शहर में जब अचानक पत्थर बरसने लगे और महिला पुलिसकर्मी शहर की गलियों में फंस गईं। आस- पास के घरों की छत से बरसते पत्थरों की बारिश से किसी तरह महिला पुलिसकर्मी बचती रहीं लेकिन जब फोर्स तितर-बितर हुई तो स्थानीय लोगों ने 4 महिला पुलिसकर्मियों को घर के अंदर रुकने के लिए जगह दी। इससे उन सभी महिला पुलिसकर्मियों की जान बच सकी जिन पर पथराव हो रहा था। रात में पुलिस फोर्स पहुंचने पर उन महिला पुलिसकर्मियों के कपड़े बदलवाकर तब उन्हें घर से भेजा गया।
बनभूलपुरा में अतिक्रमण हटाने गई पुलिस टीम के साथ पुलिस फोर्स में महिला जवान भी शामिल थीं। विरोध कर रही महिलाओं को रोकने के लिए महिला पुलिस जवान भी मोर्चे पर डटी रही। तभी उपद्रवियों ने पथराव करना शुरू कर दिया। इसमें कई महिला पुलिसकर्मी भी घायल हो गईं। वहीं 5 महिला पुलिसकर्मी सहित करीब 30 से ज्यादा पुलिसकर्मी गलियों में फंस गईं।
उन महिला पुलिसकर्मियों को किसी तरह इलाके की महिलाओं ने अपने घरों में छिपाया। इस दौरान पथराव और उपद्रव करने वाले लोग क्षेत्र में फंसे पुलिसकर्मियों को ढूंढते रहे। इसके साथ ही उपद्रवियों ने कई घरों के दरवाजे भी खटखटाए। इस बीच फंसी महिला पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए एक परिवार की महिलाओं ने उनका पूरा हुलिया बदलवा दिया।
एक घर में 3 और एक घर में 1 महिला पुलिसकर्मी को सहारा दिया गया। कर्फ्यू लगने के बाद अपने जवानों को खोजते हुए पहुंची पुलिस फोर्स के जवानों को देखकर उन परिवारों ने पुलिसकर्मियों को सुरक्षित उन्हें सौंपा।
पथराव के दौरान नई बस्ती में एक परिवार को भी उपद्रवियों ने अपना निशाना बनाया। दरअसल परिवार ने पथराव में फंसी एक महिला और एक पुरुष पुलिसकर्मी को उस परिवार के लोगों ने अपने घर में रहने के लिए शरण दी थी। इसकी जानकारी मिलते ही उपद्रवी उस घर के पास पहुंच गए और उन्होंने घर पर पथराव कर दिया। इसके बाद उन्होंने घर में आग लगा दी।
वहीँ हिंसा की घटना के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी हल्द्वानी पहुंचे और यहां घायलों व पीड़ितों से उनके हालातों के बारे में जानकारी ली। साथ ही सभी पुलिस अधिकारियों से इस मामले की जानकारी भी ली। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने का काम कोर्ट के आदेश पर पहले से हो रहा था। लेकिन ये हमला सुनियोजित था। जिस तरह से हमारी पुलिस पर हमला हुआ है। यह बहुत ही दुख की बात है।
यह देवभूमि है। इन लोगों ने कानून तोड़ा है और देवभूमि की छवि को खराब करने का काम किया है। कई पत्रकारों को भी बुरी तरह से पीटा गया है। जिस तरह से उनकी हत्या का प्रयास हुआ है। जिन लोगों ने संपत्ति जलाई है। वीडियो फुटेज के आधार पर उनकी पहचान हो रही है। उन पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। वहां जो भी सामान एकत्रित किया गया था उस पर कार्रवाई होगी।
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में गुरुवार को बवाल हो गया। मलिक के बगीचे में अवैध कब्जे तोड़ने गई नगर निगम और पुलिस की टीम पर स्थानीय लोगों ने पथराव किया । इस दौरान 20 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। पथराव के बाद शुरू हुई हिंसा आसपास के कई इलाकों में फैल गई। जिसके बाद दंगाइयों ने बनभूलपुरा थाना फूंक दिया है। मामले का संज्ञान लेते हुए सीएम धामी ने उच्च स्तरीय बैठक बुलाई. दिए. जिसमें सीएम ने अराजक तत्वों से सख्ती से निपटने के निर्देश दिए
वहीं, नैनीताल डीएम ने शहर में कर्फ्यू लगा दिया है। दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिए गए है।
सीएम ने दिए सख़्ती से निपटने के निर्देश-
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी के बनभूलपुरा में अवैध निर्माण को हटाये जाने के दौरान पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारियों एवं कर्मियों पर हुए हमले तथा क्षेत्र में अशांति फैलाने की घटना को गंभीरता से लिया है। सीएम ने सभी संबंधित अधिकारियों को क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित किये जाने के सख्त निर्देश भी दिये है।
CM धामी ने की स्थिति की समीक्षा-सीएम ने इस संबंध में गुरुवार शाम मुख्यमंत्री आवास में मुख्य सचिव राधा रतूड़ी, पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार और अन्य उच्चाधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से शान्ति बनाये रखने की अपील करते हुए अराजक तत्वों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही के निर्देश दिये है। सीएम ने कहा कि इस घटना के दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्यवाही कर क्षेत्र में शांति व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिये कि प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए।
दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के दिए निर्देश-
सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिये कि प्रदेश में किसी को भी कानून व्यवस्था से खिलवाड करने की छूट नहीं दी जानी चाहिए। प्रशासनिक अधिकारी निरंतर क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिये प्रयासरत रहे। डीएम वंदना ने फ़ोन पर सीएम धामी को अवगत कराया कि अशान्ति वाले क्षेत्र बनभूलपुरा में कर्फ्यू लगाया गया है तथा स्थिति को सामान्य बनाये रखने के लिये दंगाइयों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिये गये है।
शासन की ओर से होमगार्डों को अब बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है। शासन ने होमगार्ड विभाग से प्रदेश के सभी हेलीपैड की सुरक्षा के लिए होमगार्ड उपलब्ध कराने की बात कही है। शासन के निर्देश पर आईजी-कमांडेंट जनरल होमगार्ड ने प्रदेश के सभी जिला कमांडेंट से नौ-नौ होमगार्डों के नामों की सूची मांगी है।
सूची मिलने के बाद होमगार्डों की हेलीपैड पर तैनाती की जाएगी। प्रदेश मेें लगातार होमगार्डों के लिए नई पहल शुरू करने के साथ ही नई सुविधाओं से भी लैस किया जा रहा है। हाल ही में सूबे के महिला और पुरुष होमगार्डों को पिस्तौल से लेकर एसएलआर चलाने का प्रशिक्षण दिया गया है। इससे इतर, होमगार्डों के ऊपर अब तक वीआईपी, वीवीआई, अपराध और यातायात की कमान संभालने की जिम्मेदारी थी लेकिन अब होमगार्डों को एक और बड़ी जिम्मेदारी देने की तैयारी की जा रही है।
जल्द ही होमगार्डों के हाथों में प्रदेश के सभी 13 हेलीपैड की सुरक्षा की कमान होगी। शासन की ओर से हर होमगार्ड विभाग से नौ-नौ होमगार्डों के नाम की सूची मांगी गई है। सूची में वही होमगार्ड शामिल होंगे जिन्होंने एसएलआर की ट्रेनिंग ली हुई है। इनमें महिला और पुरुष होमगार्ड शामिल होंगे। सूची में भेजे जाने वाले नामों पर आईजी केवल खुराना की मुहर लगते ही होमगार्डों की हेलीपैड पर ड्यूटी लगाई जाएगी।
13 में से छह हेलीपैड वर्तमान में संचालित-
प्रदेश में अलग-अलग स्थानों पर 13 हेलीपैड बने हुए हैं। इनमें से केवल छह ही हेलिपैड संचालित हैं। अन्य सात हेलीपैड को बनाने का काम प्रगतिशील है। फिलहाल छह हेलीपैड पर ही तैनाती की जाएगी। जब अन्य हेलीपैड बनकर पूरी तैयार हो जाएंगे। तब इन पर भी तैनाती होगी।
शासन की ओर से हेलीपैड की सुरक्षा के लिए होमगार्डों की ड्यूटी लगाने की बाबत कहा गया है। इसके लिए कितना खर्च आएगा, यह भी जानकारी मांगी गई है। विभाग की ओर से सभी जिलों से नौ-नौ होमगार्डों की सूची मांगी गई है। सूची मिलने के बाद इन होमगार्डों की ड्यूटी निर्धारित की जाएगी।-केवल खुराना, आईजी-कमांडेंट
उत्तराखंड में भी प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की एंट्री हो गई है ईडी ने पूर्व कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के नेता हरक सिंह रावत के 10 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी शुरू कर दी है. उत्तराखंड से लेकर दिल्ली और चंडीगढ़ में छापा मारा है। तीन राज्यों के 15 से अधिक ठिकानों पर ईडी का तलाशी अभियान चल रहा है।
उत्तराखंड के कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में 6000 पेड़ों के अवैध कटान और इसके आसपास अवैध रूप से निर्माण के मामले में जांच चल रही है सीबीआई इस पूरे प्रकरण पर पहले ही नैनीताल हाई कोर्ट के निर्देश पर जांच कर रही है जबकि कई गड़बड़ियां पकड़े जाने के बाद उत्तराखंड वन विभाग के कई IFS अधिकारियों को ED ने रडार पर ले लिया था और अब हरक सिंह रावत के ठिकानों पर छापेमारी की गई है हालाँकि ये अभी साफ़ नहीं है कि हरक सिंह रावत के घर किस मामले की जांच में ED ने दबिश दी है लेकिन इस छापेमारी में एक शख्स का बयान सामने आया है इस शख्स का दावा था कि उसे किसी अलमारी की चाबी बनाने के लीये हरक सिंह के आवास पर बुलाया गया जिसमें कई फाइलें मौजूद थी जिस समय ED ने हरक सिंह के आवास पर छापा मारा उस समय उनकी पत्नी ही घर पर मौजूद रही।
हरक सिंह की छापेमारी की खबर के बाद उत्तराखंड में तहलका मच गया इस मामले में पूरी कांग्रेस हरक सिंह रावत के साथ एकजुट दिखाई दी सभी कांग्रेसी विधायक उनसे मिलने उनके आवास पहुंचे सभी ने इस कार्रवाई को बदले की कार्रवाई बताया।
पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत के अलावा वन विभाग के वरिष्ठ आइएफएस अधिकारी सुशांत पटनायक के घर पर भी ED की रेड की खबर है सुशांत पटनायक एक युवती से छेड़छाड़ के मामले में चर्चाओं में आए थे कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में अवैध निर्माण और पेड़ कटान के मामले में भी डीजी फॉरेस्ट की जांच में सुशांत पटनायक का नाम है सुशांत पटनायक उत्तराखंड में ताकतवर अधिकारी के रूप में जाने जाते हैं हालांकि अभी तक ED की उनके घर पर छापेमारी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
दिल्ली, उत्तराखंड, चंडीगढ़ समेत 16 जगहों पर ED की छापेमारी चल रही है हरक सिंह रावत के बिधौली स्थित हॉस्टल, और श्रीनगर में उनके होटल, गहेड गांव स्थित उनके पैतृक घर और सहसपुर में उनके आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज में भी ईडी की टीम गई है हरक सिंह के बाद ईडी ने पूर्व आएफएस अधिकारी किशन चंद के आवास पर छापा मारा,,मामले में पूर्व डीएफओ किशनचंद की संपत्ति को भी पहले अटैच किया जा चुका है।
हरक सिंह रावत 2022 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में शामिल हो गए थे. इसके बाद से ही ऐसा लगता है कि उनकी मुश्किल बढ़ गई हैं. हरक सिंह रावत अभी लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में भी जुटे हुए हैं. हरिद्वार सीट से उनकी तैयारी चल रही हैं।
उत्तराखंड देश का पहला वो राज्य बन सकता है जो सबसे पहले समान नागरिक संहिता यानी (यूसीसी) लागू कर सकता है। चार फरवरी को उत्तराखंड कैबिनेट से यूसीसी विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद उसे आज विधानसभा में पेश किया गया। अब राज्यपाल से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक कानून बन जाएगा।
आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश किया। समान नागरिक संहिता उत्तराखंड 2024 विधेयक पेश करने के बाद राज्य विधानसभा में विधायकों ने वंदे मातरम और जय श्री राम के खूब नारे लगाए। जानिए उत्तराखंड में UCC लागू होने से क्या कुछ बदलेगा।
मसौदे में 400 से अधिक धाराएं-
समान नागरिक संहिता विधेयक पास होने के बाद ये कानून बन जाएगा। इसके साथ ही उत्तराखंड देश में यूसीसी लागू करने वाला आजादी के बाद पहला राज्य होगा। सूत्रों के अनुसार, मसौदे में 400 से ज्यादा धाराएं हैं, जिसका लक्ष्य पारंपरिक रीति-रिवाजों से पैदा होने वाली विसंगतियों को दूर करना है।
इन समस्याओं के कारण हो रही UCC की वकालत-
समान नागरिक संहिता के प्रबल हिमायती एडवोकेट अश्वनी उपाध्याय के मुताबिक, समान नागरिक संहिता लागू नहीं होने से कई समस्याएं हैं। जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं।
UCC लागू होने के बाद बहुविवाह पर लगेगी रोक-
कुछ कानून में बहुविवाह करने की छूट है। चूंकि हिंदू, ईसाई और पारसी के लिए दूसरा विवाह अपराध है और सात वर्ष की सजा का प्रावधान है। इसलिए कुछ लोग दूसरा विवाह करने के लिए धर्म बदल लेते हैं। समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने के बाद बहुविवाह पर पूरी तरह से रोक लग जाएगी।
शादी के लिए अब कानूनी उम्र 21 साल होगी तय-
विवाह की न्यूनतम उम्र कहीं तय तो कहीं तय नहीं है। एक धर्म में छोटी उम्र में भी लड़कियों की शादी हो जाती है। वे शारीरिक व मानसिक रूप से परिपक्व नहीं होतीं। जबकि अन्य धर्मों में लड़कियों के 18 और लड़कों के लिए 21 वर्ष की उम्र लागू है। कानून बनने के बाद युवतियों की शादी की कानूनी उम्र 21 साल तय हो जाएगी।
बिना रजिस्ट्रेशन के लिव इन रिलेशन में रहने पर अब होगी जेल-
इसके साथ ही लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वालों के लिए रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद उत्तराखंड में लिव इन रिलेशनशिप का वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। रजिस्ट्रेशन न कराने पर युगल को छह महीने का कारावास और 25 हजार का दंड या दोनों हो सकते हैं। रजिस्ट्रेशन के तौर पर जो रसीद युगल को मिलेगी उसी के आधार पर उन्हें किराए पर घर, हॉस्टल या पीजी मिल सकेगा। यूसीसी में लिव इन रिलेशनशिप को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। इसके मुताबिक, सिर्फ एक व्यस्क पुरुष व वयस्क महिला ही लिव इन रिलेशनशिप में रह सकेंगे। वे पहले से विवाहित या किसी अन्य के साथ लिव इन रिलेशनशिप या प्रोहिबिटेड डिग्रीस ऑफ रिलेशनशिप में नहीं होने चाहिए। पंजीकरण कराने वाले युगल की सूचना रजिस्ट्रार को उनके माता-पिता या अभिभावक को देनी होगी।
विवाह पंजीकरण कराना होगा जरूरी-
कानून लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण कराना होगा। अगर ऐसा नहीं कराया तो किसी भी सरकारी सुविधा से वंचित होना पड़ सकता है।
UCC लागू होने के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया होगी सरल-
एक कानून में मौखिक वसीयत व दान मान्य है। जबकि दूसरे कानूनों में शत प्रतिशत संपत्ति का वसीयत किया जा सकता है। यह धार्मिक यह मजहबी विषय नहीं बल्कि सिविल राइट या मानवाधिकार का मामला है। एक कानून में उत्तराधिकार की व्यवस्था अत्यधिक जटिल है। पैतृक संपत्ति में पुत्र व पुत्रियों के मध्य अत्यधिक भेदभाव है। कई धर्मों में विवाहोपरांत अर्जित संपत्ति में पत्नी के अधिकार परिभाषित नहीं हैं। विवाह के बाद बेटियों के पैतृक संपत्ति में अधिकार सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। ये अपरिभाषित हैं। इस कानून के लागू होने के बाद उत्तराधिकार की प्रक्रिया सरल बन जाएगी।
बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होगी पत्नी पर –
कानून लागू होने के बाद नौकरीपेशा बेटे की मौत की स्थिति में बुजुर्ग मां-बाप के भरण-पोषण की पत्नी पर जिम्मेदारी होगी। उसे मुआवजा भी मिलेगा। पति की मौत की स्थिति में यदि पत्नी दोबारा विवाह करती है तो उसे मिला हुआ मुआवजा मां-बाप के साथ साझा किया जाएगा।
गोद लेने का बदलेगा नियम –
कानून लागू होने के बाद राज्य में मुस्लिम महिलाओं को भी गोद लेने का अधिकार मिलेगा। गोद लेने की प्रक्रिया आसान होगी। इसके साथ ही अनाथ बच्चों के लिए संरक्षकता की प्रक्रिया सरल होगी। कानून लागू होने के बाद दंपति के बीच झगड़े के मामलों में उनके बच्चों की कस्टडी उनके दादा-दादी को दी जा सकती है।
UCC में होगी तलाक लेने की प्रक्रिया-
पति-पत्नी दोनों को तलाक के समान आधार उपलब्ध होंगे। तलाक का जो ग्राउंड पति के लिए लागू होगा, वही पत्नी के लिए भी लागू होगा। फिलहाल पर्सनल लॉ के तहत पति और पत्नी के पास तलाक के अलग-अलग ग्राउंड हैं।
UCC से पहले की तलाक लेने की प्रक्रिया-
अगर इस्लाम के तीनों तलाक प्रक्रिया की तुलना करें तो ये काफी अलग हैं। तीन तलाक झटके में किसी भी माध्यम से तीन बार तलाक बोलकर दिया जा सकता है। इसमें तो कई बार लोग फोन पर मैसेज या कॉल के माध्यम से तलाक दे दिया करते थे। तलाक-ए-हसन और तलाक-ए-अहसन में तलाक की एक प्रक्रिया और निश्चित अवधि होती है। इन दोनों प्रक्रियाओं में पति पत्नी को फैसला लेने के लिए वक्त मिलता है। इसके अलावा मुस्लिम समाज में महिलाओं के तलाक लेने के लिए भी विकल्प है। महिलाएं खुला तलाक ले सकती हैं। कोर्ट के हस्तक्षेप के बिना कोई महिला खुला तलाक के तहत पति से तलाक लेने की बात कर सकती है। हालांकि इस तरह के तलाक में महिला को मेहर यानी निकाह के समय पति की तरफ से दिए गए पैसे चुकाने होते हैं। साथ ही खुला तलाक में पति की रजामंदी भी जरूरी होती है।
मई 2022 में UCC पर समिति का हुआ था गठन-
दरअसल, उत्तराखंड सरकार ने मई 2022 में सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक समिति गठित की थी। सरकार ने एक अधिसूचना 27 मई 2022 को जारी की गई थी और शर्तें 10 जून 202 को अधिसूचित की गई थीं। समिति ने बैठकों, परामर्शों, क्षेत्र के दौरे और विशेषज्ञों और जनता के साथ बातचीत के बाद मसौदा तैयार किया। इस प्रक्रिया में 13 महीने से अधिक का समय लगा। जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने अपनी पहली बैठक 4 जुलाई 2022 को दिल्ली में की थी। मसौदे के महत्वपूर्ण पहलुओं पर जुलाई 2023 में एक मैराथन बैठक में विचार-विमर्श किया गया और इसे अंतिम रूप दिया गया। कमेटी को समान नागरिक संहिता पर ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से करीब 20 लाख सुझाव मिले हैं। इनमें से कमेटी ने लगभग ढाई लाख लोगों से सीधे मिलकर इस मुद्दे पर उनकी राय जानी है।
जानिए क्या है समान नागरिक संहिता ?
समान नागरिक संहिता का अर्थ होता है भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो। समान नागरिक संहिता लागू होने से सभी धर्मों का एक कानून होगा। शादी, तलाक, गोद लेने और जमीन-जायदाद के बंटवारे में सभी धर्मों के लिए एक ही कानून लागू होगा।
यह मुद्दा कई दशकों से राजनीतिक बहस के केंद्र में रहा है। UCC केंद्र की मौजूदा सत्ताधारी भाजपा के लिए जनसंघ के जमाने से प्राथमिकता वाला एजेंडा रहा है। भाजपा सत्ता में आने पर UCC को लागू करने का वादा करने वाली पहली पार्टी थी और यह मुद्दा उसके 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणा पत्र का भी हिस्सा था।
हल्द्वानी में देर शाम सात बजे एक युवती का अपहरण हो जाता है। उसे कार में हल्द्वानी की सड़कों पर तीन घंटे घुमाया जाता है। तीन घंटे उसके साथ गैंगरेप होता है। उधर पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगती है। इस पर पुलिस की गश्त और हल्द्वानी क्षेत्र में लगे सैकड़ों सीसीटीवी की मॉनिटरिंग पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
हल्द्वानी की शांत गलियों में इससे पहले सड़क से अपहरण और कार में तीन घंटे तक गैंगरेप का मामला सामने नहीं आया है। एसएसपी प्रहलाद नारायण मीणा ने हाल ही में क्राइम मीटिंग ली थी। क्राइम मीटिंग में अधीनस्थों को रात में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए थे। एसएसपी के आदेशों का अधीनस्थों में कोई असर नहीं दिखा।हाल ही में एसपी सिटी हरबंस सिंह ने लामाचौड़ चौकी में छापा मारा था। छापे में सभी पुलिसकर्मी जुआ खेलते मिले थे। एसपी सिटी की रिपोर्ट पर एसएसपी ने पूरी चौकी लाइन हाजिर कर दी। इसके बाद भी पुलिस कर्मियों में खौफ नहीं दिखा।
शनिवार देर शाम एक युवती का अपहरण हो जाता है। हल्द्वानी की गलियों में उसके साथ चलती कार में गैंगरेप किया जाता है। पीड़िता की तहरीर के अनुसार उसे शराब पिलाई जाती है। उसे हल्द्वानी शहर की कई सड़कों पर तीन घंटे कर दौड़ती रहती है। कार की स्पीड 20 किलोमीटर प्रति घंटा भी मान ली जाए तो शहर में कार तीन घंटे में 60 किलोमीटर चली होगी। इस दौरान युवती भी चिल्लाई होगी। कई बार ये कार कई चौराहे से गुजरी होगी। मुखानी चौराहे पर युवती को उतार दिया जाता है। तो उसके कपड़े भी तितर-बितर हुए होंगे। इसके बाद भी पुलिस और लोगों की नजर उस युवती पर क्यों नहीं पड़ी। कोई उसकी मदद को क्यों नहीं आया।
यहां पर लड़की बदहवास हालत में अपने दोस्त को फोन करती है। उसका दोस्त आता है और उसे लेकर जाता है। जबकि मुखानी चौराहे पर पुलिस का कैमरा लगा हुआ है। ये कैमरा ऐसा है कि इस पर नंबर प्लेट तक साफ दिख जाती है। नियमानुसार इस चौराहे पर पुलिस होनी चाहिए। लेकिन यहां पुलिस नहीं थी। कैमरों की निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं कि इतनी बड़ी घटना हो गई। सीसीटीवी की निगरानी करने वालों को ये घटना क्यों नहीं दिखी। क्यों उस समय पुलिस नहीं दौड़ाई गई। चौराहे में पुलिस तो दूर गश्ती वाहन तक को यह नहीं पता चला।
युवती सिडकुल में करती है काम-
पुलिस सूत्रों की माने तो युवती सिडकुल रुद्रपुर में एक कंपनी में काम करती है। वह एक शादी समारोह में जाने के लिए घर से आई थी।
ढाई साल में 271 दुष्कर्म के मामले आए सामने-
हल्द्वानी में ढाई साल की बात करें तो नाबालिग से दुष्कर्म के 271 मामले सामने आए। इन घटनाओं में पुलिस ने 375 लोगों पर मुकदमा कर जेल भेजा है। मानवता और मर्यादा को शर्मसार करने वाली इन घटनाओं पर लगाम लगाने में सिस्टम की नाकामी साफ झलकती है। महिला अपराध लगातार बढ़ने से नैनीताल जिला असुरक्षित होता जा रहा है। किशोरियों से दुष्कर्म के बढ़ते मामले पुलिस के साथ समाज की चिंता बढ़ा रहे हैं। यह हम नहीं बल्कि पिछले सालों के महिला अपराध के आंकड़े बताते हैं। जिले में बीते ढाई साल में पॉक्सो से जुड़े 271 मामलों में 375 आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है।
महिला सुरक्षा को लेकर सरकार से लेकर पुलिस-प्रशासन की ओर से तमाम दावे किए जाते हैं लेकिन जमीनी हकीकत रोंगटे खड़े करने वाली है। हाल ही में दृष्टिबाधित बच्चों के संस्थान में बच्ची से यौन शोषण के मामले ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। पुलिस विभाग के आंकड़ों की माने तो हर साल नाबालिग से दुष्कर्म के मामले बढ़ रहे हैं। हालांकि पुलिस कार्रवाई भी कर रही है लेकिन बच्चियों से दरिंदगी के बढ़ते मामले कम न होना चिंताजनक है।
पुलिस मुख्यालय के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में वर्ष 2020 में पॉक्सो के 573 मुकदमे दर्ज हुए थे। 2021 में संख्या 25 फीसदी बढ़कर 712 हो गई। 2022 में प्रदेश के सभी थानों में 19 फीसदी बढ़ोत्तरी के साथ 851 मुकदमे दर्ज हुए। सभी प्रकार के यौन अपराधों में मुकदमों के निस्तारण की दर 78.4 फीसदी है। यौन अपराध के निस्तारण के मामले में उत्तराखंड देश में चौथे नंबर पर है। क्राइम इन इंडिया-2021 की रिपोर्ट के अनुसार नाबालिगों से यौन उत्पीड़न के मामलों में 93.35 फीसदी मामलों में आरोपी परिचित होते हैं।
उत्तराखंड में आज से मौसम फिर बदल गया है। तड़के गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित आस-पास बर्फबारी हुई तो बड़कोट तहसील क्षेत्र में बारिश। वहीं, मैदानी इलाकों में कई जगह हल्का कोहरा छाया हुआ है। राजधानी देहरादून समेत पहाड़ों की रानी मसूरी, धनोल्टी और कैम्पटी में हल्की धूप है, लेकिन ठंडी हवाएं चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उधर, चकराता के लोखंडी में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। वहीं, बर्फबारी से बागवानों ने भी राहत की सांस। अब बर्फबारी के चलते पर्यटकों के उमड़ने की भी उम्मीद है।
पहाड़ों की रानी मसूरी में बदला मौसम। शहर में शाम होते ही छाया घना कोहरा। ठंड बढ़ने से अलाव तापते दिखे लोग। 31 जनवरी और एक फरवरी को बारिश-बर्फबारी के आसार। मौसम विज्ञान केंद्र ने जारी किया येलो अलर्ट।
वहीं, आज प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके लिए मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी होने की संभावना जताई है। तापमान की बात करें तो दून का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहने के आसार हैं।
प्रदेश में बिजली की मांग के सापेक्ष उपलब्धता कम होने से रोजाना कटौती हो रही है। सोमवार को भी ग्रामीण क्षेत्रों में दो से चार घंटे तक कटौती की गई। वहीं, छोटे कस्बों में भी एक से डेढ़ घंटे की कटौती हुई।
यूपीसीएल ने किल्लत को नियंत्रित करने के लिए काशीपुर स्थित गैस प्लांट भी चला दिया है। हालांकि, अभी भी यूपीसीएल रोजाना 50 से 70 लाख यूनिट बाजार से खरीदने को मजबूर है। ठंड में बिजली की मांग 4.8 करोड़ यूनिट पार हो रही है। यूजेवीएनएल से करीब 80 लाख यूनिट ही मिल पा रही है। अब यूपीसीएल ने गैस पावर प्लांट चलाया है, जिससे रोजाना करीब 40 से 45 लाख यूनिट मिल रही है।
कुल मांग के सापेक्ष बाजार से महंगी बिजली खरीद में यूपीसीएल का दम फूल रहा है। उधर, इस किल्लत को नियंत्रित करने के लिए ग्रामीण इलाकों में चार घंटे तक कटौती की जा रही, जबकि छोटे कस्बों में डेढ़ घंटे तक, फर्नेश इंडस्ट्री में भी औसत पांच घंटे कटौती करनी पड़ रही है। हालांकि, यूपीसीएल ने जनवरी माह की रिपोर्ट में महीनेभर में औसत 24 घंटे कटौती तक ही दावा किया है।
यूपीसीएल के निदेशक परियोजना अजय अग्रवाल का कहना है कि फिलहाल मांग के हिसाब से ग्रामीण इलाकों में कुछ देर कटौती करनी पड़ रही है। रोजाना बाजार से बिजली खरीदने के अलावा उन्होंने काशीपुर स्थित गैस पावर प्लांट भी चला दिया है।
यूजेवीएनएल का उत्पादन कम-
वैसे तो सर्दियों में यूजेवीएनएल का बिजली उत्पादन कम हो जाता है, लेकिन इस साल अभी तक बारिश या बर्फबारी न होने से उत्पादन गिरा हुआ है। रोजाना करीब 80 लाख यूनिट तक ही विद्युत उत्पादन हो पा रहा है। यूजेवीएनएल की एक-दो परियोजनाओं से उत्पादन बाधित भी चल रहा है।
पांच साल में जनवरी भारी, बिजली मांग 4.8 करोड़ पार-
यूपीसीएल के लिए पिछले पांच साल में इस साल जनवरी माह में बिजली की मांग भारी पड़ी है। 2020 में जनवरी माह में औसत मांग चार करोड़ यूनिट, 2021 में 4.2 करोड़ यूनिट, 2022 में 4.4 करोड़ यूनिट, 2023 में 4.6 करोड़ यूनिट और इस साल जनवरी माह में 4.8 करोड़ यूनिट से ऊपर मांग पहुंची है। यूपीसीएल प्रबंधन के लिए ऐसे हालात में बाजार पर निर्भरता बढ़ती जा रही है।