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Weather Today: दक्षिण भारत में बारिश से हाल बेहाल, केरल में बारिश से अब तक 11 लोगों की मौत, उत्तर भारत में लू की चेतावनी।

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भारत इन दिनों मौसम की मार झेल रहा है। भारत के उत्तरी इलाकों में जहां धूप और लू की मार है तो वहीं दक्षिण भारत के इलाकों में बारिश ने तबाही मचा रखी है। उत्तर भारत में मानसून के आने में अभी देरी है। मौसम विभाग ने उत्तर-पश्चिम भारत के लिए रेड अलर्ट तो केरल के कुछ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

केरल में प्री-मानसून गतिविधियों ने तबाही मचा दी है। केरल के कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश हो रही है। केरल के सात जिलों के लिए मौसम विभाग ने यलो अलर्ट जारी किया है। अंडमान निकोबार में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।

केरल के इन सभी जिलों में 6 से 11cm बारिश का अलर्ट-

  • तिरुवनंतपुरम
  • कोल्लम
  • अलपुझा
  • एर्नाकुलम
  • कोझिकोड
  • कन्नूर
  • कासरगोड

केरल में अब तक 11 की मौत
केरल के कैबिनेट मंत्री के राजन ने बताया कि 9 से 23 मई तक राज्य में बारिश संबंधित गतिविधियों में 11 लोगों की मौत हो चुकी है। इसमें 6 लोग डूबने से, एक घर गिरने से तो वहीं दो लोग बिजली गिरने से मरे हैं। शनिवार को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मछुआरों को समंदर में ना उतरने के लिए चेतावनी दी गई है। लोगों से कहा गया है कि छुट्टियों के दौरान वे अपने बच्चों को तालाब या नदियों के पास ना जाने दें। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन, दमकल, पुलिस और राजस्व विभाग आपातकाल के लिए अलर्ट पर हैं। एनडीआरएफ की दो टीमों भी तैनात हैं। शुक्रवार शाम तक राज्य में आठ राहत शिविर लगाए गए हैं।

उत्तर भारत को कब मिलेगी राहत
उत्तर भारत इन दिनों लू और गरमी से तप रहा है। लोग बेहाल हैं। आईएमडी ने उत्तर-पश्चिम भारत में अगले चार दिनों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। राजस्थान में तापमान शुक्रवार को उच्च स्तर पर था। वहीं, दिल्ली में तापमान में गिरावट दर्ज की गई है पर गर्मी अभी भी भीषण है।

मौसम विभाग का कहना है कि जम्मू-कश्मीर, पंजाब और हरियाणा में अभी लू की स्थिति रहेगी। चार दिनों तक यहां गर्म हवा चल सकती है। विभाग ने राजस्थान और गुजरात के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। पंजाब के लिए भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।  हिमाचल और जम्मू-कश्मीर के लिए भी अगले चार दिनों तक हीट वेव की चेतावनी जारी की गई है।

 

उत्तराखंड के जंगलों में बेकाबू आग का कहर, 930 घटनाओं में 5 लोगों की मौत, आग पर काबू पाने के लिए अब एनडीआरएफ भी तैयार।

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उत्तराखंड में आज बदलेगा मौसम का मिजाज, 5 जिलों में तेज आंधी-बारिश का येलो अलर्ट जारी।

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उत्तराखंड के पांच जिलों में शनिवार को तेज हवा और आंधी चलने के साथ हल्की बारिश के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले के कुछ इलाकों में झोंकेदार हवाएं चलने व हल्की बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।

इन जिलों के कुछ इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर की तेजी से झोंकेदार हवाएं चलने की संभावना है। प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम शुष्क रहेगा।

दक्षिण भारत कई इलाकों में गहराया जल संकट, जलाशयों का स्तर घटकर सिर्फ 17 प्रतिशत बचा. जानिए कौन हैं वो राज्य।

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गर्मियां शुरू होने के साथ ही देश में जल संकट गहराना शुरू हो गया है। दक्षिण भारत में स्थिति ज्यादा खराब है। दक्षिण भारत के राज्य गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं और स्थिति ये है कि जल भंडारण जलाशयों की क्षमता घटकर केवल 17 प्रतिशत रह गई है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) ने यह जानकारी मिली।

दक्षिणी राज्यों में जलसंकट की स्थिति गंभीर
दक्षिण भारत के राज्यों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु आते हैं। सीडब्ल्यूसी द्वारा भारत के विभिन्न क्षेत्रों के जलाशयों के भंडारण स्तर के संबंध में बृहस्पतिवार को जारी बुलेटिन में बताया गया कि दक्षिणी क्षेत्र में आयोग की निगरानी के तहत 42 जलाशय हैं जिनकी कुल भंडारण क्षमता 53.334 बीसीएम (अरब घन मीटर) है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, इन जलाशयों में मौजूदा कुल भंडारण 8.865 बीसीएम है, जो उनकी कुल क्षमता का केवल 17 प्रतिशत ही है।

यह आंकड़ा पिछले वर्ष की समान अवधि के दौरान भंडारण स्तर (29 प्रतिशत) और इसी अवधि के दस साल के औसत (23 प्रतिशत) की तुलना में काफी कम है। दक्षिणी क्षेत्र के जलाशयों में भंडारण का कम स्तर इन राज्यों में पानी की बढ़ती कमी और सिंचाई, पेयजल और पनबिजली के लिए संभावित चुनौतियों का संकेत है।

पूर्वी क्षेत्र में हालात थोड़े सुधरे
पूर्वी क्षेत्र, जिसमें असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्य आते हैं, में पिछले साल और दस साल के औसत की तुलना में जल भंडारण स्तर में सकारात्मक सुधार दर्ज किया गया है। आयोग ने कहा कि इस क्षेत्र में, 20.430 बीसीएम की कुल भंडारण क्षमता वाले 23 निगरानी जलाशयों में अभी 7.889 बीसीएम पानी है, जो उनकी कुल क्षमता का 39 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि (34 प्रतिशत) और दस साल के औसत (34 प्रतिशत) की तुलना में सुधार का संकेत है।
पश्चिमी क्षेत्र में गुजरात और महाराष्ट्र शामिल हैं और वहां भंडारण स्तर 11.771 बीसीएम है जो 49 निगरानी जलाशयों की कुल क्षमता का 31.7 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष के भंडारण स्तर (38 प्रतिशत) और दस साल के औसत (32.1 प्रतिशत) की तुलना में कम है। इसी तरह, उत्तरी और मध्य क्षेत्रों में भी जल भंडारण स्तर में गिरावट देखी गई है।

उत्तराखंड के इन जिलों में बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट, निचले इलाकों में बारिश, मौसम में आ रहा बड़ा बदलाव.

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उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में मार्च के महीने में जनवरी जैसा मौसम हो रहा है। इसका असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिल रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने आज और कल (शनिवार और रविवार को) प्रदेशभर में मौसम बदलने की संभावना जताई है। पर्वतीय जिलों में भारी बर्फबारी की चेतावनी जारी कर दी है।

केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले 3200 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बर्फबारी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। जबकि, इन जिलों के साथ देहरादून, हरिद्वार, टिहरी और नैनीताल जिले के कुछ इलाकों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है।


इसके अलावा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं भी चलने के आसार हैं। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बीते कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन और मौसम के बदलते चक्र के चलते मार्च में भी मौसम बदलने लगा है। इसका मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ का सक्रिय होना है जिसकी वजह से बर्फबारी और बारिश की संभावनाएं बन रही हैं। 4 मार्च के बाद प्रदेश में मौसम साफ होने लगेगा।

तापमान पर नहीं पड़ रहा कोई खास असर-

पर्वतीय इलाकों में भले ही बर्फबारी-बारिश हो रही है लेकिन तापमान पर इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है। इसलिए ठंड से लोगों को राहत मिल रही है। बृहस्पतिवार के आंकड़ों की बात करें तो दून का अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से दो डिग्री अधिक है। मुक्तेश्वर का अधिकतम तापमान तो पांच डिग्री बढ़ोतरी के साथ 19.5 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। सिर्फ नई टिहरी का अधिकतम तापमान सामान्य से चार डिग्री की गिरावट के साथ 14.4 डिग्री रहा।

Uttarakhand Weather: पहाड़ी इलाकों में आज भी बिगड़ा रहेगा मौसम का हाल, पहाड़ों में बारिश-बर्फबारी के आसार.

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उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में आज मंगलवार को भी हल्की बारिश के साथ बर्फबारी होने के आसार हैं। मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले में बिजली चमकने और गर्जन के साथ बारिश होने के आसार हैं।

जबकि, इन जिलों के तीन हजार मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि पर्वतीय जिलों में मौसम बदलने के असर मैदानी इलाकों में भी देखने को मिलेगा।

देहरादून में 27 फरवरी को आंशिक रूप से लेकर आमतौर पर बादल छाए रहेंगे। अधिकतम तापमान 24 और न्यूनतम 11 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है।

Uttarakhand Weather: DGRE ने जारी की प्रदेश के कई जिलों में हिमस्खलन की चेतावनी, जानिए आज कैसा रहेगा मौसम.

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Uttarakhand Weather: उत्तराखंड में मौसम का मिजाज बदला रहेगा डीआरडीओ के रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान ने प्रदेश के कई जिलों उत्तरकाशी सहित रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में हिमस्खलन की भी चेतावनी दी है। 

 

हालांकि देहरादून में आज हलकी धूप खिली हुई है लेकिन ऊंचाई वाले इलाकों में मौसम विभाग ने आज बर्फ़बारी के आसार बताये हैं, वहीँ मैदानी इलाकों में भी मौसम शुष्क बना रहेगा।  

जानिए आज कहां कैसा रहेगा मौसम-
  • मसूरी, धनोल्टी और कैम्पटी में मौसम साफ, चटक धूप खिली।
  • उत्तरकाशी में मौसम साफ, खिली चटक धूप।
  • बदरीनाथ धाम में बर्फबारी जारी।
  • यमुनोत्री धाम सहित यमुना घाटी में चटख धूप खिली।

Uttarakhand Weather: सफेद चादर में लिपटा औली, चारों धाम में भी  हुई बर्फबारी, मैदान में बारिश से बढ़ी ठंड.

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उत्तराखंड में आज सोमवार शाम को मौसम ने फिर करवट ली। पहाड़ में दूसरे दिन भी मौसम खराब रहा और चारों धामों में बर्फबारी हुई। वहीं हेमकुंड साहिब, फूलों की घाटी, औली, नंदा घुंघटी, रुद्रनाथ, लाल माटी, नीती व माणा घाटी में बर्फ गिरी जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। बदरीनाथ में आधा फीट, केदारनाथ में एक फीट, औली में दो इंच, गंगोत्री-यमुनोत्री में छह इंच ताजी बर्फ जमी। जबकि निचले क्षेत्रों में बारिश हुई जिससे ठंड लौट आई है।

बदरीनाथ धाम में भी हुई बर्फबारी- 

बदरीनाथ धाम में दिनभर रुक-रुककर बर्फबारी हुई जो देर शाम तक जारी रही। बर्फबारी से हनुमान चट्टी से बदरीनाथ धाम तक हाईवे फिसलन भरा हो गया है। हाईवे पर करीब आधा फीट तक बर्फ जम गई है। गोपेश्वर-मंडल-चोपता और जोशीमठ-मलारी हाईवे पर भी बर्फ जम गई है।

वहीं जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पर्यटन ग्राम रामणी, घूनी, पडेरगांव, ईराणी, पाणा, झींझी आदि गांवों में भी बर्फबारी हुई लेकिन बर्फ जल्दी पिघल गई। बाजारों में ठंड से बचने के लिए दुकानदारों व राहगीरों ने अलाव का सहारा लिया। पोखरी, नंदानगर, पीपलकोटी, नंदप्रयाग आदि क्षेत्रों में भी दिनभर रुक-रुक कर बारिश हुई।

 हर्षिल घाटी में भी खूब बर्फबारी-

गंगोत्री और यमुनोत्री धाम, हर्षिल घाटी और अन्य ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हुई। हालांकि अभी तक सभी सड़कों पर आवाजाही सुचारु है। पिछले दो दिन से जिले में गर्मी का अहसास होने लगा था।

अब बर्फबारी हुई तो ठंड लौट आई। वहीं आपदा प्रबंधन अधिकारी देवेंद्र पटवाल ने बताया कि बर्फबारी को देखते हुए सभी विभाग अलर्ट मोड पर हैं। सभी बर्फीले इलाकों में विभागों से सड़क, बिजली, पानी और राशन की आपूर्ति की जानकारी ली जा रही है।

सोमवार को केदारनाथ धाम सहित मद्महेश्वर, तुंगनाथ, चंद्रशिला आदि क्षेत्रों में बर्फबारी हुई जबकि पर्यटक स्थल चोपता दुगलविट्टा में भी हल्की बर्फ गिरी।

Uttarakhand Weather: बदला मौसम का मिजाज, गंगोत्री-यमुनोत्री में बर्फबारी, चकराता में भी सीजन की पहली बर्फबारी.

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उत्तराखंड में आज से मौसम फिर बदल गया है। तड़के गंगोत्री व यमुनोत्री धाम सहित आस-पास बर्फबारी हुई तो बड़कोट तहसील क्षेत्र में बारिश। वहीं, मैदानी इलाकों में कई जगह हल्का कोहरा छाया हुआ है। राजधानी देहरादून समेत पहाड़ों की रानी मसूरी, धनोल्टी और कैम्पटी में हल्की धूप है, लेकिन ठंडी हवाएं चलने से तापमान में गिरावट दर्ज की गई। उधर, चकराता के लोखंडी में सीजन की पहली बर्फबारी हुई। वहीं, बर्फबारी से बागवानों ने भी राहत की सांस। अब बर्फबारी के चलते पर्यटकों के उमड़ने की भी उम्मीद है।

पहाड़ों की रानी मसूरी में बदला मौसम। शहर में शाम होते ही छाया घना कोहरा। ठंड बढ़ने से अलाव तापते दिखे लोग। 31 जनवरी और एक फरवरी को बारिश-बर्फबारी के आसार। मौसम विज्ञान केंद्र ने जारी किया येलो अलर्ट।
वहीं, आज प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है। इसके लिए मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विज्ञान केंद्र की ओर से 2500 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश और बर्फबारी होने की संभावना जताई है। तापमान की बात करें तो दून का अधिकतम तापमान 17 और न्यूनतम तापमान आठ डिग्री रहने के आसार हैं।

उत्तराखंड-हिमाचल के पहाड़ों से बर्फ हो रही है गायब, हसीन वादियों में सात गुना बढ़ीं आग की घटनाएं.

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सर्दियों में बर्फ से ढकी रहने वाली हिमाचल की हसीन वादियों से बर्फ गायब है और वहां इन दिनों आग की लपटें और धुंआ दिखाई दे रहा है। यही हाल उत्तराखंड के पहाड़ों का भी है। पिछले तीन महीनों से हिमाचल में इस बार न ही तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी देखने को मिली है। जंगलों में नमी न होने से इस बार प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली है।

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में आग की घटनाएं हुईं। पिछले तीन सप्ताह में किन्नौर, मनाली, कुल्लू, चंबा और शिमला जिला में आग की बड़ी घटनाओं में हजारों हैक्टेयर वन भूमि को नुकसान पहुंचा है और रिहायशी मकान भी आग की चपेट में आए हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में देश में वनाग्नि की बड़ी घटनाओं में शीर्ष पांच राज्यों में हिमाचल पहले स्थान पर है। हिमाचल में पिछले एक सप्ताह में 36 बड़ी आग की घटनाएं देखने को मिली हैं। वर्ष 2022-23 में बड़ी आग की घटनाओं में शीर्ष में रहने वाले पांच राज्यों में हिमाचल 123 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर था और उत्तराखंड दूसरे, आंध्र प्रदेश तीसरे और जम्मू एवं कश्मीर चौथे स्थान पर था। वहीं 2023-24 में फायर अलर्ट के मामलों में शीर्ष के पांच राज्यों में हिमाचल दूसरे स्थान पर और उत्तराखंड पहले स्थान पर है।

अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में आग की कुल 369 घटनाएं हुईं। इनमें 275 वनाग्नि की घटनाएं थीं। इन घटनाओं में 10 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ। 1 से 12 जनवरी तक प्रदेश में 149 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

अभी तक सामान्य से 100 फीसदी कम बारिश हुई-


मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में जनवरी माह में अभी तक सामान्य से 100 फीसदी कम बारिश हुई है। वनाग्नि की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में से 8 जिले संवेदनशील माने जाते हैं। यहां का सबसे अधिक संवेदनशील समय अप्रैल के दूसरे सप्ताह से जून तक है, लेकिन इस बार आग की घटनाएं सर्दियों के दिनों में भी अधिक देखने को मिल रही हैं। इसकी मुख्य वजह बारिश और बर्फबारी न होने की वजह से जंगलों की नमी गायब हो गई है।

प्रदेश के चीड़ वन आग के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील-


अधिकृत आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में 37,033 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इनमें से 15 प्रतिशत पर चीड़ वन हैं जो आग के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। प्रदेश में वन विभाग की कुल 2026 बीटें हैं, इनमें से 339 अति संवेदनशील श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा 667 मघ्यम और 1020 बीटें कम संवेदनशील की श्रेणी में आती हैं।

मौसमी चुनौतियों से घिरे उत्तराखंड के पहाड़-


9 से 16 जनवरी के बीच उत्तराखंड में 600 से अधिक वनाग्नि के अलर्ट जारी किए जा चुके हैं। देशभर में सबसे ज्यादा फायर अलर्ट उत्तराखंड में आए। 400 से अधिक फायर अलर्ट के साथ हिमाचल प्रदेश दूसरे और तकरीबन 250 अलर्ट के साथ जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर है। अरुणाचल प्रदेश में भी 200 के आसपास अलर्ट जारी किए गए हैं। वनअधिकारियों के अनुसार बारिश न होने से सर्दियों में वनों में जगह-जगह आग लगने की सूचनाएं मिल रही हैं। वन विभाग भी इस समय कंट्रोल बर्निंग कर रहा है। मॉनसून के बाद बारिश न होने से जंगल में सूखी पत्तियों का ढेर जमा है जिससे गर्मियों में आग भड़क जाती है। इसलिए विभाग नियंत्रित आग के जरिये जंगल की सफाई करता है। इससे भी लोगों को धुआं दिख रहा है। ग्रामीणों को आग के प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। वे इस समय खेतों की सफाई या जंगल में आग लगाकर न छोड़ें।

उत्तराखंड में 1 से 16 जनवरी के बीच बारिश और बर्फबारी नहीं-


मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष 1 से 16 जनवरी के बीच उत्तराखंड में बारिश बर्फबारी देखने को नहीं मिली। नैनीताल में नाममात्र 0.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्यतः इस दौरान 14 मिमी. तक बारिश होती है। इसी तरह अल्मोड़ा, बागेश्वर में 15 मिमी से अधिक, चमोली में 20 मिमी और रुद्रप्रयाग उत्तरकाशी में इस समय तक 28 और 26 मिमी तक बारिश होनी चाहिए लेकिन चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ समेत सभी पर्वतीय जिलों में सामान्य से 100 प्रतिशत कम यानी कोई बारिश नहीं हुई। दिसंबर-2023 भी तकरीबन सूखा गया। तीन हिमालयी राज्यों जम्मू कश्मीर और लद्दाख (-79), हिमाचल प्रदेश (-85) और उत्तराखंड (-75) में सामान्य से बेहद कम बारिश दर्ज हुई।

पिछले कुछ वर्षों में बारिश और बर्फवारी में लगातार कमी-


पिछले कुछ वर्षों में मॉनसून के बाद बारिश और बर्फबारी में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। नवंबर और दिसंबर में तकरीबन न के बराबर बारिश और बर्फबारी हुई। इससे पहले 2006, 2007, 2008 और 2009 में भी मानसून के बाद काफी कम बारिश हुई थी। तकरीबन 4 साल सूखी सर्दियां रहीं। मानसून के बाद सर्दियों की जलवायु में इस तरह केउतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल रहे हैं।

खेती, किसानी और पर्यटन सब कुछ प्रभावित हो रहा है-


जानकारों का कहना है कि बारिश न होने का असर खेती और बागवानी में भी दिखाई दे रहा है। सर्दियों में लगाए जाने वाले फलदार पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सेब, आडू, प्लम, खुबानी और कीवी समेत सभी फसलें प्रभावित हो रही हैं। बारिश पर निर्भर खेतों में अब तक गेहूं और जौ के बीज भी बाहर नहीं निकले हैं। बर्फबारी न होने के कारण पर्यटन व्यवसाय पर भी इसका खासा असर पड़ा है। पर्यटन व्यवसाय 20 प्रतिशत के आसपास भी नहीं पहुंच पाया।एक तरह से पूरा विंटर टूरिज्म ठप हो गया। बद्रीनाथ में बेहद हलकी बर्फ गिरी है। जलते जंगल से लेकर पेयजल संकट तक पहाड़ मौसमी चुनौतियों से घिरे हैं।