Day: December 12, 2023

राजस्थान में सरकार की तस्वीर साफ, भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए मुख्यमंत्री, दिया और बैरवा बनेंगे डिप्टी सीएम.

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राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है। भजन लाल शर्मा के हाथों में अब राज्य की सत्ता की कमान होगी। भाजपा विधायक दल की बैठक में भजन लाल शर्मा के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। वे सांगानेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। इनके नाम का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रखा। इसके साथ ही पार्टी ने तय किया है कि राजस्थान में दो डिप्टी सीएम भी होंगे। इसके लिए प्रेम चंद बैरवा और दीया कुमारी के नाम पर मुहर लगी है। स्पीकर के लिए वासुदेव देवनानी का नाम फाइनल किया गया है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। वसुंधरा ने चुनावी नजीतों के बाद पार्टी के कई विधायकों को डिनर पार्टी दी थी, जिसे दबाव की राजनीति के तौर पर देखा गया था। हालांकि, नड्डा से मुलाकात के बाद वसुंधरा के सुर बदले-बदले नजर आए थे और उन्होंने खुद को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताया था।

 

 

विधायक दल की बैठक में चुना गया नेता 
इसके बाद पार्टी ने राज्य के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी थी। उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंस पर विराम लगाने और विधायक दल का नेता चुनने के लिए सभी की सहमति बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठक में भजन लाल शर्मा को चुना गया। 

विधायक बने सांसदों के इस्तीफे ने बढ़ा दी थी सरगर्मी 
इससे पहले राजस्थान के राजसमंद की सांसद दीया कुमारी, जयपुर के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा और अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि पार्टी वसुंधरा के अलावा किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेल सकती है। 

21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था 
भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में कुल 21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था। इनमें से 12 ने जीत दर्ज की है। भाजपा ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में सात-सात, छत्तीसगढ़ में चार और तेलंगाना में तीन सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा था। 

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में चौंकाया 
इससे पहले भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन यादव के नाम पर मुहर लगाकर सभी चौंका दिया था। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक हैं। यह भी तय किया गया कि मध्य प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनके लिए जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला का चुना गया। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं। इसके अलावा स्पीकर पद के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का एलान किया गया था। 

वहीं, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री के लिए चुनकर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी थी। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य में दो डिप्टी सीएम होंगे और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह स्पीकर हो सकते हैं।  

25 नवंबर को मतदान, तीन दिसंबर को आए थे नतीजे 
राजस्थान में करणपुर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी 199 सीटों पर 25 नवंबर को चुनाव कराए गए थे।इसके नतीजे 3 दिसंबर को आए। राजस्थान विधानसभा चुनाव के सियासी घमासान में कांग्रेस को पछाड़ कर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस को 69 सीटें ही मिल सकीं। इसके अलावा 15 सीटें अन्य के खाते में गईं।

Dhiraj Sahu: कांग्रेस नेता धीरज साहू के घर से भारी नगदी बरामद, करोड़ों कैश के बीच 5 लाख का पैकेट, इंस्पेक्टर तिवारी का नाम. 

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कांग्रेसी नेता और कारोबारी धीरज साहू के घर मिली अकूत संपत्ति इन दिनों सुर्खियों में हैं. आयकर विभाग ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी करके अरबों की नकदी बरामद की है. बताया जा रहा है कि पांच दिन तक चली छापेमारी के दौरान कुल 351 करोड़ रुपए जब्त किए गए है. छापेमारी की कार्रवाई ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में स्थित साहू ग्रुप की कंपनियों में हुई है. इस दौरान एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 300 करोड़ रुपए मिले थे. इन पैसों को 176 बैग में भरकर रखा गया था. यहां से बरामद किए गए पैसों की गिनती के लिए 80 अफसरों की 9 टीमें लगाई गई थीं, जिन्होंने 24 घंटे की शिफ्ट में काम किया है.

जानकारी के मुताबिक, उड़ीसा के बलांगीर के सुदापाड़ा में शराब कंपनी के कार्यालय में एक लोहे के लॉकर को काटकर भारी नकदी बरामद की गई. इसमें एक पैकेट में अलग से पांच लाख रुपए रखे मिले. इस पैकेट के ऊपर ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ लिखा हुआ था. इसको देखकर आयकर अधिकारी भी हैरान रह गए. सबके जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि आखिर ये ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ कौन है, जिसके लिए अलग से पैसे रखे हैं. फिलहाल आयकर अधिकारी ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ की सच्चाई पता करने की कोशिश में हैं. आशंका जताई जा रही है कि यह शख्स पुलिस, उत्पाद शुल्क या आबकारी विभाग से जुड़ा कोई इंस्पेक्टर हो सकता है. हो सकता है कि काली कमाई को छिपाने के लिए उसे हर महीने पांच लाख रुपए दिए जाते हों. ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ के रहस्य ने इस छापेमारी में नया ट्विस्ट ला दिया है.

ओडिशा से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य संबलपुर के बड़ा बाजार स्थित मेसर्स बलदेव साहू एंड संस की शराब भट्ठी के दफ्तर से भी नोटों से भरे कई बैग जब्त किए गए. माना जा रहा है कि किसी भी एक मामले में आयकर विभाग की छापेमारी में बरामद यह सबसे बड़ी रकम है.बरामद नकदी में ज्यादातर 500 रुपए के हैं. 100 और 200 रुपए मूल्य के नोटों की भी काफी संख्या है. इससे पहले आयकर विभाग ने उसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और बलदेव साहू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तरों से 10 से ज्यादा अलमारियों में रखे गए नोटों के बंडल बरामद किए.

कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होने की वजह से उनके पुश्तैनी मकान को लोहरदगा का ‘व्हाइट हाउस’ भी कहा जाता है. इनके यहां फिल्म स्टार और क्रिकेटर भी आते रहते हैं. रांची से सांसद रहे शिव प्रसाद साहू को इंदिरा गांधी का काफी करीबी माना जाता था. देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी लोहरदगा मे इनके घर आ चुके हैं. राजेंद्र बाबू आजादी के पहले और आजादी के बाद उनके घर आए थे. ऐसा कहा जाता है कि साल 1947 में देश की आजादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इनके पिता ने 47 लाख रुपए और 47 किलो सोना दान में दिया था. इनका परिवार मुख्य रुप से शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ है.

साहू परिवार राजनीति और व्यापार दोनों में ही सक्रिय भूमिका निभा रहा है. इनका परिवार शुरू से ही कांग्रेस से जुड़ा रहा है. किसी जमाने में चुनाव प्रचार के दौरान देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इनके यहां रुकती थीं. देश के पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी धीरज साहू के घर आ चुके हैं.धीरज साहू के भाई के जमाने में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के टिकट से लेकर मंत्री पद तक के लिए इस परिवार से सिफारिश कराई जाती थी.चुनावी राजनीति और वित्तीय पोषण में साहू परिवार की अहम भूमिका हमेशा से रही है.

कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, 50 विधायक बीजेपी में जाने को तैयार, कुमारस्वामी ने किया सनसनीखेज खुलासा.

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पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आने के बाद जिस तरह कांग्रेस के लिए नतीजे निराश करने वाले रहे हैं उससे कहीं न कहीं कांग्रेस में चिंता बनी हुई है,इन नतीजों ने उनके 2024 के मिशन को भी झटका लगा है. लेकिन अब दक्षिण से भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगने की तैयारी है पांच राज्यों से पहले हुए चुनावों में कांग्रेस हिमाचल और कर्नाटक में जीत से काफी उत्साहित थी, लेकिन हाल ही में आये इन  चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है इन झटकों से कांग्रेस उबर पाती उससे पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगने का दावा किया जा रहा है,,कहा जा रहा है कि जिस कर्नाटक जीत से कांग्रेस में उत्साह था वो कर्नाटक अब उनके हाथ से निकल सकता है क्योंकि यहां के 50 से 60 कांग्रेसी विधायक पार्टी का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं. मतलब जो खेला महाराष्ट्र में हुआ वो अब कर्नाटक में होने जा रहा है.

जनता दल S  के नेता एचडी कुमारस्वामी के रविवार को एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार कभी भी गिर सकती है। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र द्वारा शुरू की गई कानूनी परेशानियों से बचने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक प्रभावशाली मंत्री भाजपा में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंत्री ‘50 से 60 विधायकों’ के साथ कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए वह भाजपा के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं।

जेडीएस नेता ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्हें नहीं पता कि यह सरकार कब गिर जाएगी। एक मंत्री अपने खिलाफ दर्ज मामलों से बचने के लिए बेताब हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र ने उनके खिलाफ ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिनसे बच निकलने की कोई संभावना नहीं है। जब पत्रकारों ने नेता का नाम पूछा तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल प्रभावशाली लोग ही ऐसा कर सकते हैं।

जनता दल एस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय महाराष्ट्र जैसा कुछ हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए, कुछ भी हो सकता है।कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे  ने कहा कि चुनाव के बाद कर्नाटक में जेडीएस का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। अस्तित्व बचाने के लिए पार्टी संघर्ष कर रही है।जब कुमारस्वामी से नेता का नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे ‘निर्भीक’ कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती उन्होंने कहा कि केवल ‘प्रभावशाली लोग’ ही ऐसा कर सकते हैं. जनता दल एस  के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय ‘महाराष्ट्र जैसा कुछ’ हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए कुछ भी हो सकता है.’

खरगे ने आगे कहा कि बीआरएस ने भाजपा के साथ गठबंधन किया। एक पार्टी के रूप में बने रहें इसे सुनिश्चित करने के लिए जो कर सकते हैं वह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का सफाया होने की बात भूल जाइए। चुनाव से पहले न तो जेडीएस और न ही भाजपा रहेगी।

कुल मिलाकर कर्नाटक में कांग्रेस के साथ खेला हो सकता है अगर कुमार स्वामी का दावा सही है तो फिर 2024 से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है और दक्षिण में कमजोर पड़ती भाजपा के लिए ये बड़ा फायदा हो सकता है. कुमारस्वामी के दावे में कितना दम है ये तो आने वाले वक्त में पता चल जायेगा। लेकिन अगर ये दावा सही है तो कांग्रेस के लिए कर्नाटक में बड़ी चुनौती होगी अपने विधायकों को जोड़े रखने की क्योंकि जरा सी चूक और बीजेपी को मौका,, और कांग्रेस जानती है कि इस तरह के मौके बीजेपी को देना कितनी बड़ी भूल साबित हो सकती है.

भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए सीएम, विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला

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दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद सांगानेर से विधायक भजनलाल शर्मा का नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री के लिए तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था, राजस्थान में नए सीएम को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो गया है. सांगानेर सीट से विधायक बने भजनलाल शर्मा ही राजस्थान के नए मुख्यमंत्री होंगे. दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद भजनलाल शर्मा का नाम तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था. आज दोपहर तीनों नेता जयपुर पहुंचे, विधायकों संग बैठक की. आज दोपहर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने वसुंधरा राजे से वन टू वन मीटिंग की थी. उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राजनाथ सिंह से फोन पर बात की थी.
बताते चलें कि राजस्थान का रण जीतने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि सीएम किसे चुना जाए. लेकिन सीएम पद की यह रेस अब थम गई है. इस रेस में कई नाम चल रहे थे. इस लिस्ट में सबसे पहला नाम वसुंधरा राजे का चल रहा था. वो पहले भी राजस्थान की कमान संभाल चुकी हैं. इसके अलावा राजस्थान में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बन गए बाबा बालकनाथ के नाम पर भी चर्चा थी वहीं गजेंद्र शेखावत, सीपी जोशी, दीया कुमारी और राजवर्धन राठौड़ जैसे नाम भी रेस में थे.