Category Archive : राष्ट्रीय खबर

Kedarnath By-Election: प्रत्याशियों को लेकर 24 तारीख को कांग्रेस की दिल्ली में होगी बैठक, चुनावी रणनीति पर भी चर्चा संभव।

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केदारनाथ उपचुनाव की रणनीति और प्रत्याशी को लेकर कांग्रेस की 24 अक्तूबर को दिल्ली में बैठक होगी। मंगलवार को प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा ने वर्चुअल बैठक में प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं से चुनावी तैयारियों पर चर्चा कर सुझाव भी लिए।

प्रदेश प्रभारी ने कहा, केदारनाथ उपचुनाव में सभी नेताओं को एकजुट होकर काम करना है। इसके लिए बूथ स्तर पर चुनाव की रणनीति बना कर चलना है। बैठक में प्रदेश सहप्रभारी परगट सिंह, सुरेंद्र शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, पूर्व सीएम हरीश रावत, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मंत्री नवप्रभात, विधायक प्रीतम सिंह, भुवन कापड़ी, वीरेंद्र जाती, लखपत बुटोला, प्रदेश उपाध्यक्ष संगठन मथुरादत्त जोशी शामिल हुए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा, 24 अक्तूबर को दिल्ली में प्रदेश प्रभारी ने बैठक रखी है, जिसमें नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, विधायक प्रीतम सिंह के अलावा चारों पर्यवेक्षक भी मौजूद रहेंगे। बैठक में चुनावी रणनीति के साथ प्रत्याशी को लेकर विस्तार से चर्चा की जाएगी।

उत्तराखंड में जल्द लागू होगा यूनिफार्म सिविल कोड, समिति ने CM धामी को सौंपा नियमावली का फाइनल ड्राफ्ट।

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उत्तराखंड में अब जल्द ही  समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू होने जा रहा है। आज शुक्रवार(18 अक्तूबर) को विशेषज्ञ समिति ने यूसीसी नियमावली का ड्राफ्ट मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को सौंप दिया है। सीएम धामी ने कहा कि सभी को समान न्याय और  समान अवसर मिले इसके लिए यूसीसी लागू किया जा रहा है।

9 नवंबर को यूसीसी लागू करने की तैयारी-

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में घोषणा की थी कि सरकार नौ नवंबर को उत्तराखंड स्थापना दिवस पर यूसीसी लागू करना चाहती है। ऐसे में अब समीति के फाइनल नियमावली का ड्राफ्ट साैंपने के बाद पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि यूसीसी उत्तराखंड में 9 नवंबर को लागू हो जाएगा।

 

यूसीसी में ये है खास-

नियमावली में मुख्य रूप से चार भाग हैं। जिसमें विवाह एवं विवाह-विच्छेद लिव-इन रिलेशनशिप, जन्म एवं मृत्य पंजीकरण तथा उत्तराधिकार संबंधी नियमों के पंजीकरण संबंधी प्रक्रियाएं हैं।

ऑनलाइन मिल सकेगी सारी जानकारी-

जन सामान्य की सुलभता को देखते हुए यूसीसी के लिए एक पोर्टल और मोबाइल एप भी तैयार की गई है, इसमें पंजीकरण और अपील आदि की समस्त सुविधाएं जन सामान्य को ऑनलाईन माध्यम से सुलभ हो सके।

यूसीसी लागू होगा तो यह आएंगे बदलाव-

  • सभी धर्म-समुदायों में विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता और विरासत के लिए एक ही कानून।
  • 26 मार्च 2010 के बाद से हर दंपती के लिए तलाक व शादी का पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • ग्राम पंचायत, नगर पंचायत, नगर पालिका, नगर निगम, महानगर पालिका स्तर पर पंजीकरण की सुविधा।
  • पंजीकरण न कराने पर अधिकतम 25,000 रुपये का जुर्माना।
  • पंजीकरण नहीं कराने वाले सरकारी सुविधाओं के लाभ से भी वंचित रहेंगे।
  • विवाह के लिए लड़के की न्यूनतम आयु 21 और लड़की की 18 वर्ष होगी।
  • महिलाएं भी पुरुषों के समान कारणों और अधिकारों को तलाक का आधार बना सकती हैं।
  • हलाला और इद्दत जैसी प्रथा खत्म होगी। महिला का दोबारा विवाह करने की किसी भी तरह की शर्तों पर रोक होगी।
  • कोई बिना सहमति के धर्म परिवर्तन करता है तो दूसरे व्यक्ति को उस व्यक्ति से तलाक लेने व गुजारा भत्ता लेने का अधिकार होगा।
  • एक पति और पत्नी के जीवित होने पर दूसरा विवाह करना पूरी तरह से प्रतिबंधित होगा।
  • पति-पत्नी के तलाक या घरेलू झगड़े के समय पांच वर्ष तक के बच्चे की कस्टडी उसकी माता के पास रहेगी।
  • संपत्ति में बेटा और बेटी को बराबर अधिकार होंगे।
  • जायज और नाजायज बच्चों में कोई भेद नहीं होगा।
  • नाजायज बच्चों को भी उस दंपती की जैविक संतान माना जाएगा।
  • गोद लिए, सरगोसी से असिस्टेड री प्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी से जन्मे बच्चे जैविक संतान होंगे।
  • किसी महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे के संपत्ति में अधिकार संरक्षित रहेंगे।
  • कोई व्यक्ति किसी भी व्यक्ति को वसीयत से अपनी संपत्ति दे सकता है।
  • लिव इन में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति के लिए वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा।
  • युगल पंजीकरण रसीद से ही किराया पर घर, हॉस्टल या पीजी ले सकेंगे।
  • लिव इन में पैदा होने वाले बच्चों को जायज संतान माना जाएगा और जैविक संतान के सभी अधिकार मिलेंगे।
  • लिव इन में रहने वालों के लिए संबंध विच्छेद का भी पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा।
  • अनिवार्य पंजीकरण न कराने पर छह माह के कारावास या 25 हजार जुर्माना या दोनों का प्रावधान होंगे।

Haryana New Government: हरियाणा में अब नायब सरकार, भाजपा विधायक दल की बैठक में लगी सैनी के नाम पर मुहर।

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Haryana New CM Biography: नायब सिंह सैनी हरियाणा के नए सीएम होंगे। प्रदेश के इतिहास में पहली बार भाजपा ने हैट्रिक लगाकर जीत हासिल की है। इस नायाब जीत के नायक बने नायब सिंह सैनी अब सीएम की कुर्सी संभालेंगे।

नायब सैनी लोकसभा चुनाव से पहले सीएम की कुर्सी पर बैठाए गए थे। पार्टी ने नायब सैनी को सीएम प्रोजेक्ट कर चुनाव लड़ा था।

आरएसएस से जुड़े हैं सैनी-

नायब सैनी 25 जनवरी 1970 को अंबाला के गांव मिर्जापुर माजरा में सैनी परिवार में जन्मे थे। वे बीए और एलएलबी हैं। सैनी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं। सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं। उन्हें संगठन में काम करने का लंबा अनुभव है।

मनोहर लाल के है करीबी-

वे साल 2002 में युवा मोर्चा बीजेपी अंबाला से जिला महामंत्री बने। इसके बाद साल 2005 में युवा मोर्चा भाजपा अंबाला में जिला अध्यक्ष रहे। सैनी 2009 में किसान मोर्चा भाजपा हरियाणा के प्रदेश महामंत्री भी रहे। 2012 में वे अंबाला भाजपा के जिला अध्यक्ष बने। आरएसएस के समय से सैनी को मनोहर लाल का करीबी माना जाता है। सूत्र बताते हैं कि सीएम ने ही उन्हें कुरुक्षेत्र से टिकट देने की पैरवी की थी।

नारायणगढ़ से हारे थे चुनाव-

नायब सिंह ने 2009 में अंबाला के नारायणगढ़ निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन कुल 1,16,039 वोटों में से 3,028 वोट हासिल कर रामकिशन गुर्जर से हार गए थे। 2014 में उन्होंने 24,361 वोटों से इसी क्षेत्र से चुनाव जीता था, जिसके बाद वे प्रदेश सरकार में 24 जुलाई 2015 से तीन जून 2019 तक राज्यमंत्री भी रहे। उन्होंने प्रदेश में श्रम एवं रोजगार मंत्री स्वतंत्र प्रभार के अलावा खान एवं भू विज्ञान मंत्री व नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री के तौर पर भी कार्यभार संभाला।

Amit Shah: उत्‍तराखंड दौरे पर आने वाले हैं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, तैयारियों में जुटे सभी विभाग।

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 13 अक्टूबर को उत्तराखंड के दौरे पर आ रहे हैं। उनका प्रस्तावित कार्यक्रम शासन को मिल गया है। इसे देखते हुए तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं।

तमाम विभाग भी कसरत में जुटे-

माना जा रहा है कि वह देहरादून में पुलिस में लागू तीन नए कानूनों व साइबर अपराधों की चुनौतियों पर चर्चा के अलावा अन्य विभागों के साथ भी बैठक कर सकते हैं। इसे देखते हुए तमाम विभाग भी कसरत में जुटे हैं।   गृह मंत्री शाह 13 अक्टूबर को सुबह जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगे और फिर उत्तरकाशी जिले के हर्षिल के लिए रवाना होंगे।

 

अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों के बीच भी बिता सकते हैं समय-

वह हर्षिल में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत संचालित योजनाओं की जानकारी लेंगे। साथ ही अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों के बीच भी कुछ समय बिता सकते हैं। इसके बाद वह देहरादून में एफआरआइ में तीन नए कानून और साइबर अपराध की चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ विमर्श करेंगे।

अन्य विभागों के साथ भी कर सकते हैं बैठकें-

माना जा रहा है कि अमित शाह अन्य विभागों के साथ भी बैठकें कर सकते हैं। इसे देखते हुए विभाग अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं। गृह मंत्री इसी दिन शाम को दिल्ली रवाना होंगे।

अभिनेता परेश रावल से महानिदेशक सूचना ने की मुलाकात-

प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता परेश रावल इन दिनों अपनी नई फिल्म पास्ट टेंस की शूटिंग के लिए देहरादून आए हुए हैं। इस फिल्म का निर्देश अनंत नारायण महादेवन कर रहे हैं। महानिदेशक सूचना और उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान अभिनेता परेश रावल ने उत्तराखंड में लागू हुई नई फिल्म नीति की सराहना की।

देहरादून-मसूरी रोड पर फिल्म के सेट पर हुई मुलाकात के दौरान अभिनेता परेश रावल ने महानिदेशक सूचना को बताया कि उन्होंने अपनी दो बालीवुड फिल्मों की शूटिंग कुछ समय पहले ही उत्तराखंड में पूरी की है। इनके पोस्ट प्रोडक्शन का कार्य चल रह है। ये जल्द रिलीज होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सभी फिल्मों की शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया सरल होने के कारण उत्तराखंड बालीवुड और देश के अन्य राज्यों के लिए संपूर्ण फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।

महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि सरकार ने नई नीति में फिल्मों के लिए पहले से अधिक अनुदान राशि को शामिल किया है। ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज को भी अनुदान के लिए शामिल किया गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सरकार फिल्म निर्माण से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र में रोजगार की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही है। फिल्म के बारे में बताया गया कि इस फिल्म में आदित्य रावल, आदिल हुसैन, शरीब हाशमी, तनिष्ठा चटर्जी, गगन देव, स्मिता तांबे, सतीश शर्मा व श्रद्धा भट्ट प्रमुख भूमिका में हैं। इस दौरान संयुक्त निदेशक सूचना डा नितिन उपाध्याय भी उपस्थित थे।

Chamoli: 56 साल बाद सैनिक की पार्थिव देह पहुंचेगी गांव, बर्फ में था शव सुरक्षित, कई साल राह देखती रहीं पत्नी।

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चमोली जिले के थराली तहसील के गांव कोलपुड़ी के लापता सैनिक की पार्थिव देह 56 साल बाद अपने गांव पहुंचेगी। गांव के नारायण सिंह वर्ष 1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता हो गए थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

कोलपुड़ी गांव के प्रधान और नारायण सिंह के भतीजे जयवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सूचना दी उनकी पहचान हो जाने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि जेब में मिले पर्स में एक कागज में नारायण सिंह ग्राम कोलपुड़ी और बसंती देवी नाम दर्ज था। साथ ही उनकी वर्दी के नेम प्लेट पर भी उनका नाम लिखा था।

 

सेना के अधिकारियों ने जयवीर सिंह को बताया कि बर्फ में शव सुरक्षित था, लेकिन बर्फ से बाहर निकालने के बाद शव गलने लगा है, जिससे उसे सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रिकार्ड के अनुसार नारायण सिंह सेना के मेडिकल कोर में तैनात थे। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार तक गांव पहुंचने की संभावना जताई जा रही है

42 साल राह देखते रहीं पत्नी-

पुरानी यादों में खोये जयवीर सिंह बोले कि माता बसंती देवी ने बताया था कि पति नारायण सिंह सेना में तैनात थे। वह साल में एक बार घर आते थे, अक्सर पत्रों से ही हाल पता लगता था। एक बार एक टेलीग्राम आया जिसमें अंग्रेजी में विमान के लापता होने और उसमें नारायण सिंह के लापता होने की बात लिखी थी। उसके बाद परिवारीजन इंतजार करते रहे लेकिन कोई खबर नहीं आई। मां जब तक जिंदा थी नारायण सिंह का इंतजार करती रहीं। वर्ष 2011 में बसंती देवी की मृत्यु हो गई।

सौम्य स्वभाव के थे नारायण सिंह-

नारायण सिंह के साथी रहे कोलपुड़ी के सूबेदार गोविंद सिंह, सूबेदार हीरा सिंह बिष्ट और भवान सिंह नेगी बताते हैं कि नारायण सिंह बहुत सौम्य स्वभाव के थे। बचपन से ही सेना के प्रति उनका जुनून था। 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे एएमसी में नियुक्त थे।

Uttarakhand Land Law : धामी सरकार का एक और बड़ा फैसला, जानिये कब और क्यों उठी उत्तराखंड में भू-कानून की मांग ?

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प्रदेश में लगातार चल रही मांग के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एलान किया है कि उनकी सरकार वृहद भू-कानून लाने जा रही है। अगले साल बजट सत्र में कानून का प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 250 वर्ग मीटर आवासीय और 12.50 एकड़ अन्य भूमि के नियम तोड़ने वालों की भूमि जांच के बाद सरकार में निहित की जाएगी. उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू करने की मांग तेजी से हो रही है। इसके लिए लगातार रैलियां और प्रदर्शन भी राजधानी देहरादून से लेकर पहाड़ों तक हो रहे हैं। लोग उत्तराखंड में जल्द से जल्द एक सशक्त भू-कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।

 

कब और क्यों उठी उत्तराखंड में भू-कानून की मांग ?

उत्तराखंड में सबसे पहले एनडी तिवारी सरकार में भू-कानून बना था। इस कानून में दो बार बदलाव किया गया। जिसके बाद से ही लोगों में आक्रोश है और इसी के साथ प्रदेश में एक सशक्त भू-कानून की मांग उठी। बता दें कि एनडी तिवारी सरकार में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था सुधार अधिनियम, 1950 (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001) अधिनियम की धारा-154 में संशोधन कर बाहरी प्रदेशों के व्यक्ति लिए नियम बनाया गया था। जिसके मुताबिक बाहरी प्रदेशों के लोग उत्तराखंड में 500 वर्ग मीटर कृषि योग्य भूमि खरीद सकते थे।

जबकि उद्योगों के लिए भी एनडी तिवारी सरकार में 12 एकड़ जमीन खरीदने का नियम तय हुआ था। लेकिन एनडी तिवारी सरकार में बनाए गए इस भू-कानून में साल 2007 में खंडूरी सरकार में बदलाव किया गया। जनरल बीसी खंडूरी की सरकार ने भू-कानून में संशोधन कर उसे और भी सख्त बना दिया। इसके तहत कृषि योग्य जमीन का दायरा 500 वर्ग मीटर से कम कर 250 वर्ग मीटर कर दिया गया था।

 

त्रिवेंद्र सरकार में भू-कानून में हुए थे बड़े बदलाव-

खंडूरी सरकार में बदलाव के बाद एक बार फिर से त्रिवेंद्र रावत सरकार में फिर से बड़े बदलाव किए गए। उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में भी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ये बदलाव किए गए थे। इसमें 12 एकड़ उद्योगों की जमीन खरीदने को असीमित किया गया। त्रिवेंद्र सरकार में लागू हुए भू-कानून के बाद से लोगों में सबसे ज्यादा आक्रोश है। इसी के बाद से प्रदेश में एक सशक्त भू-कानून की मांग की जा रही है। अब ये मांग इतनी तेज हो गई है।

बता दें कि उत्तराखंड में वर्तमान समय में उद्योगों के लिए जहां असीमित जमीन खरीदने का प्रावधान है। तो वहीं कृषि योग्य भूमि पर 250 वर्ग मीटर जमीन बाहरी प्रदेशों के लोग खरीद सकते हैं। शहरी क्षेत्र में जो जमीन कृषि योग्य भूमि के अंतर्गत नहीं आती है वहां पर भी असीमित जमीन खरीदने का प्रावधान जानकार बताते हैं।

उत्तराखंड में भी हिमाचल जैसे भू-कानून की मांग-

उत्तराखंड में बीते कुछ सालों में भू-कानून की मांग तेज हो गई है। प्रदेश में लोग हिमाचल प्रदेश जैसा सख्त भू-कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में में जमीन खरीद का टेनेंसी एक्ट लागू है। इस एक्ट की धारा-118 के तहत हिमाचल प्रदेश में कोई भी गैर हिमाचली व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की इजाजत के बाद ही कोई गैर हिमाचली यहां गैर कृषि जमीन खरीद सकते हैं। लेकिन जमीन खरीदने का मकसद भी बताना होगा।

उत्तराखंड उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत राज्य से बाहर का व्यक्ति बिना अनुमति के उत्तराखंड में 250 वर्गमीटर जमीन खरीद सकता है। लेकिन राज्य का स्थायी निवासी के लिए जमीन खरीदने की कोई सीमा नहीं है। वर्तमान में लागू भू-कानून उत्तराखंड वासियों पर लागू नहीं है। यह कानून केवल बाहरी राज्यों के लोगाें पर लागू है। उत्तराखंड के स्थायी निवासी कितनी भी जमीन खरीद सकते हैं।

Uttarkashi News: यात्रा का दूसरा चरण; 22 दिन में गंगोत्री और यमुनोत्री धाम पहुंचे 1.45 लाख श्रद्धालु।

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सीजन के दूसरे चरण में चारधाम यात्रा धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। इस माह के 22 दिन में ही गंगोत्री व यमुनोत्री धामों में 1.45 लाख से अधिक श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। वहीं, इस साल यमुनोत्री धाम पहुंचने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा छह लाख के पार पहुंच चुका है। जबकि गंगोत्री धाम में भी 6.80 लाख श्रद्धालु पहुंच चुके हैं।

मानसून सीजन में अतिवृष्टि के चलते श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई थी। लेकिन अब बरसात थमते ही यह धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रही है। इस माह 22 सितंबर तक दोनों धामों में अच्छी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन श्रद्धालुओं की संख्या और बढ़ने की संभावना जता रहा है। जानकीचट्टी व फूलचट्टी के मध्य में भूस्खलन के कारण क्षतिग्रस्त सड़क के स्थान पर नवनिर्मित वैकल्पिक मार्ग पर यातायात शुरू कर दिया गया है।

बढ़ती संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है –
जिला प्रशासन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार 10 मई को कपाट खुलने के बाद 136 दिन की यात्रा में यमुनोत्री धाम में कुल 602364 श्रद्धालु पहुंच चुके हैं। वहीं, गंगोत्री धाम में यह संख्या 680950 हो गई है। अभी यात्रा काल के लिए डेढ़ माह का समय शेष है, ऐसे में दोनों धामों में श्रद्धालुओं की दिन-प्रतिदिन बढ़ती संख्या नया रिकॉर्ड बना सकती है।

डीएम डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट ने चारधाम यात्रा से जुड़े सभी विभागों को यात्रियों की सुविधाओं के लिए व्यवस्थाएं चुस्त-दुरुस्त रखने एवं यमुनोत्री पैदल मार्ग पर तय एसओपी के अनुसार ही आवागमन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं।

 

Kedarnath: केदारनाथ पैदल मार्ग जंगल चट्टी के पास हुआ क्षतिग्रस्त, प्रशासन ने की अपील, यात्री जहां है वहीं रुकें।

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केदारनाथ पैदल मार्ग जंगल चट्टी के पास क्षतिग्रस्त हो गया है। जिस कारण दोनों ओर श्रद्धालुओं को रोक दिया गया है। प्रशासन ने तीर्थयात्रियों ले अपील की है कि वो जहां पर हैं वहीं पर रूके रहें। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ डीडीआरएफ के जवान वैकल्पिक मार्ग तैयार कर रहे हैं।

 

जंगल चट्टी के पास क्षतिग्रस्त हुआ केदारनाथ पैदल मार्ग-

मिली जानकारी के मुताबिक केदारनाथ पैदल मार्ग पर एक बार फिर भूस्खलन हुआ है। जिस कारण जंगल चट्टी के पास करीब 15 मीटर पैदल मार्ग क्षतिग्रस्त हो गया है। प्रशासन ने फिलहाल यात्रियों से यात्रा ना करने की अपील की है। इसके साथ ही घोड़े-खच्चर के संचालन पर भी रोक लगा दी गई है। बता दें कि एनडीआरएफ, एसडीआरएफ के साथ डीडीआरएफ के जवान वैकल्पिक मार्ग से रास्ता आर-पार करवा रहे हैं।

 

प्रशासन ने की यात्रियों से ये अपील

प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील कि वे जिस स्थान पर हैं वहीं पर सुरक्षित रहकर इंतजार करें। मार्ग सुचारु होने पर केदारनाथ से जंगलचट्टी के बीच दर्शन कर वापस आ रहे श्रद्धालुओं को प्राथमिकता के आधार पर निकाला जाएगा। केदारनाथ धाम के लिए पैदल आने वाले श्रद्धालुओं से फिलहाल यात्रा ना करें.

 

 

Delhi CM: आतिशी के साथ ये 5 नेता भी लेंगे मंत्री पद की शपथ, मंत्रिमंडल में होगा एक नया चेहरा शामिल।

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दिल्ली की भावी मुख्यमंत्री आतिशी और उनका मंत्रिमंडल 21 सितंबर को शपथ लेंगे। आतिशी मार्लेना अरविंद केजरीवाल की जगह लेंगी। कहा जा रहा है कि आतिशी के साथ 5 मंत्री शपथ ले सकते हैं।

कैबिनेट में शामिल होने वाले संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा जोरों पर है। इन नामों में गोपाल राय (Gopal Rai), कैलाश गहलोत (Kailash Gehlot), सौरभ भारद्वाज (Saurabh Bhardwaj), इमरान हुसैन और मुकेश अहलावत (Mukesh Ahlawat) शपथ ले सकते हैं।

फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे केजरीवाल- आतिशी

दिल्ली (Delhi News) के अगले मुख्यमंत्री बनने का दावा पेश करने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) की नेता आतिशी ने इससे पहले मंगलवार को कहा था कि वह निवर्तमान सीएम अरविंद केजरीवाल द्वारा उन पर जताए गए भरोसे से खुश हैं, लेकिन इस बात से भी दुखी हैं कि भ्रष्टाचार के झूठे आरोपों के चलते उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। आगामी विधानसभा चुनाव में जनता फिर से केजरीवाल को सीएम चुनेगी।

दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी आतिशी-

43 साल की आतिशी दिल्ली की तीसरी महिला मुख्यमंत्री होंगी। इससे पहले सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित दिल्ली की सीएम रह चुकी हैं। आतिशी, मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के शिक्षा मंत्री रहते हुए उनकी सलाहकार के रूप में काम कर चुकी हैं।

Uttarakhand : ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट में हुआ खुलासा।

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उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 80% विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है। पहाड़ों में 80 हजार की आबादी पर एक सीएचसी होना चाहिए। इसके अनुसार पहाड़ में 44 सीएचसी की कमी है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से हाल ही में जारी हेल्थ डायनमिक्स (इंफ्रास्ट्रक्चर एंड ह्यमून रिसोर्स) रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में 31 मार्च 2023 तक उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का विश्लेषण किया गया। इंडियन पब्लिक हेल्थ स्टैंडर्ड (आईपीएचएस) के मानकों के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की 80% कमी है।

पर्वतीय क्षेत्रों के सीएचसी में सर्जन, बाल रोग, ग्यानाक्लोजिस्ट, फिजिशियन, एनेस्थेटिस्ट के 245 विशेषज्ञ डॉक्टरों की जरूरत है। इनमें 48 ही कार्यरत हंै, जबकि 197 पद खाली चल रहे हैं। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पर्वतीय क्षेत्रों के अधिकतर सीएचसी में ग्यानाक्लोजिस्ट डॉक्टर कार्यरत नहीं है। 2005 में राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में कुल 44 सीएचसी थे, जो बढ़कर 49 हो गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों को नहीं मिल रहा पीजी डॉक्टरों का लाभ-
प्रदेश में चार राजकीय मेडिकल कॉलेज संचालित हैं। एमबीबीएस डॉक्टरों को पीजी कराने की सुविधा है, लेकिन पीजी करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों का लाभ ग्रामीण उत्तराखंड को नहीं मिल रहा है। प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों के 1,240 पद सृजित हैं। इसमें लगभग पांच सौ ही विशेषज्ञ डॉक्टर कार्यरत हैं।

उत्तराखंड ही नहीं पूरे देश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी चल रही है। प्रदेश सरकार की ओर से इस कमी को दूर करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। 2027 तक प्रदेश में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर हो जाएगी। -डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री