Category Archive : राष्ट्रीय खबर

Modi Cabinet: किसानों के लिए सरकार ने किए 7 बड़े ऐलान, 13966 करोड़ रुपये की योजनाओं को मिली मंजूरी।

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मोदी कैबिनेट ने आज किसानों के लिए बड़ी घोषणा करते हुए 13,966 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 7 योजनाओं को मंजूरी दी। सरकार ने कहा कि किसानों के जीवन को बेहतर बनाने और उनकी आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह फैसले लिए गए हैं।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बैठक में कृषि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने और देश भर में खाद्य सुरक्षा बढ़ाने के लिए सात महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सरकार के इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि ये उपाय कृषि क्षेत्र को समर्थन देने, सतत विकास को बढ़ावा देने और सभी नागरिकों के लिए भोजन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

इन योजनाओं की दी गई मंजूरी-

  • डिजिटल कृषि मिशन: अश्विनी वैष्णव ने फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि पहला अहम निर्णय है डिजिटल कृषि मिशन। इसे कृषि के लिए डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की संरचना की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। कुछ अच्छे पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं और हमने सफलता हासिल की है, कुल 20,817 करोड़ रुपये के निवेश के साथ, डिजिटल कृषि मिशन स्थापित किया जाएगा।
  • खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के लिए फसल विज्ञान: दूसरा अहम निर्णय है खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए फसल विज्ञान को बढ़ावा देना। इसके तहत 3979 करोड़ रुपये की लागत से किसानों को जलवायु परिवर्तन के हिसाब से फसल उगाने करने के लिए तैयार किया जाएगा और 2047 तक खाद्य सुरक्षा मिलेगी।
  • कृषि शिक्षा, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान को सुदृढ़ बनाना: केंद्र सरकार ने कृषि शिक्षा, प्रबंधन और सामाजिक विज्ञान को मजबूत करने के लिए भी 2,291 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है। इसके तहत कृषि छात्रों और शोधकर्ताओं को वर्तमान चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा।
  • सतत पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पशुधन और डेयरी से किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से सतत पशुधन स्वास्थ्य और उत्पादन के लिए 1,702 करोड़ रुपये की योजना मंजूर की है। इसके तहत पशु स्वास्थ्य प्रबंधन और पशु चिकित्सा शिक्षा एवं डेयरी उत्पादन और प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • बागवानी का सतत विकास: केंद्र ने बागवानी पौधों से किसानों की आय में वृद्धि करने के लिए बागवानी का सतत विकास करने के उद्देश्य से 860 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
  • कृषि विज्ञान केंद्र का सुदृढ़ीकरण: केंद्र सरकार ने कृषि विज्ञान केंद्र के सुदृढ़ीकरण के लिए 1,202 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
  • प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन: प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन के लिए भी 1,115 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।

 

Fake Registry Scam: उत्तराखंड समेत इन 5 राज्यों में ED की छापेमारी, इस बड़े घोटाले से जुड़े हैं तार, भू-माफिया समेत कई के ठिकानों पर पहुंची टीम.

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उत्तराखंड में हुए अब तक के सबसे बड़े ‘फर्जी रजिस्ट्री घोटाला’ मामले में उत्तराखंड समेत देश के पांच राज्यों में ईडी की कार्रवाई जारी है। ईडी सभी जगह सर्च ऑपरेशन चला रही है। देहरादून में भी ED की छापेमारी जारी है। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसी द्वारा दिल्ली, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, असम, पंजाब के लुधियाना सहित कुल डेढ़ दर्जन लोकेशन पर सर्च ऑपरेशन चला रही है।

यह कार्रवाई कई भू माफिया, रजिस्ट्री कार्यालय में कार्यरत सरकारी कर्मचारी -अधिकारी, सरकारी वकील सहित कुछ बिल्डर के लोकेशन पर चल रही है।

ये था मामला-

बता दें कि जुलाई 2022 में देहरादून फर्जी रजिस्ट्री घोटाला सामने आया था। इस मामले में पुलिस 18 मुकदमे दर्ज कर चुकी है। वहीं, 20 से ज्यादा आरोपी जेल में बंद हैं। वहीं, दो बड़े अधिवक्ता भी इस मामले में आरोपी हैं।

रजिस्ट्री घोटाले से जुड़े हैं तार-

बताया जा रहा है कि इस छापेमारी के तार देहरादून में हुए रजिस्ट्री घोटाले से जुड़े हुए हैं। राज्य के सबसे बड़े रजिस्ट्री घोटाले में कई बड़े भूमाफिया शामिल हैं। कई अन्य राज्यों के भूमाफियाओं की भी इस केस में मिलीभगत की आशंका है। ऐसे में ईडी ने इस मामले में पुख्ता इनपुट के बाद कार्रवाई की है।

 

 

Uttarakhand: महिला अपराध का नया अड्डा बना उत्तराखंड ! एक हप्ते में निर्भया और कोलकाता डाक्टर जैसा केस।

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कोलकाता में महिला डॉ से हुई दरिन्दगी के खिलाफ पुरे देश में आक्रोश है खूब प्रदर्शन हो रहे हैं, मोमबत्तियां जलाई जा रही है अपराधियों को फांसी की सजा की मांग हो रही है,
राजनैतिक दल अपने अपने हिसाब से खूब राजनीती कर रहे हैं लेकिन यही सब देवभूमि उत्तराखंड में क्यों नहीं हो रहा है, जहां हर दिन एक ऐसा ही केस सामने आ रहा है. जहां निर्भया जैसा केस पुलिस चौकी के बगल में हो जाता है और कोई आवाज नहीं उठती। एक नर्स की दुष्कर्म करने के बाद हत्या कर दी जाती है और कोई केंडिल मार्च नहीं होता। कोलकाता डाक्टर केस में हर अपडेट को दिन भर दिखाने वाला राष्ट्रिय मीडिया उत्तराखंड की खबर पर मौन हो जाता है, क्यों यहां की घटना राष्ट्रिय मीडिया के लिए एक मुद्दा नहीं बनती।

उत्तराखंड में भी एक और मामला-

निर्भया केस ने जहां भारत की पूरी जनता को झकझोर कर रख दिया था,,,अब एक बार ऐसा ही केस उत्तराखंड में देखने को मिला लेकिन इसकी कोई आवाज हमें सुनाई नहीं देगी, हालाँकि इसके अपराधियों को पुलिस पकड़ चुकी है लेकिन फिर भी क्या इसको लेकर चिंता नहीं की जानी चाहिए। देवभूमि जो महिलाओं की सुरक्षा के मामले में सबसे सुरक्षित मानी जाती थी अचानक उसकी फिजा क्यों बदलने लगी है, जब एक लड़की बस स्टेशन जैसी जगह पर सेफ नहीं है तो फिर कहां सुरक्षित होगी।

उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून के बस अड्डे पर जो कुछ हुआ वो महिला सुरक्षा के दावों का मजाक उड़ाता है. देहरादून की सबसे व्यस्त रहने वाले आईएसबीटी में किशोरी को तनिक भी आभास नहीं था कि जिस ड्राइवर अंकल से उसने मदद ली वह ही हैवान बन जाएगा। दिल्ली से देहरादून का सफर तय कर वह आईएसबीटी पहुंची तो आधी रात को पांच हैवानों ने बस में ही दुष्कर्म किया। किशोरी चिल्लाई लेकिन अंधेरी रात में उसकी चीख कोई सुन न सका,,,इसमें बस ड्राइवर और कंडक्टर सहित बस अड्डे पर टिकट काउंटर वाला तक शामिल रहा.

15 अगस्त को एक और मामला हुआ था दर्ज-

कोलकत्ता में जिस तरह महिला डाक्टर के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या कर दी गयी उसी तरह का केस उत्तराखंड के उधमसिंह नगर में 15 अगस्त के दिन ही एक ऐसे ही मामले का खुलासा उधमसिंह नगर पुलिस ने किया है. यहां पर कार्यरत एक नर्स के साथ उत्तर प्रदेश के बिलासपुर में एक निर्मम कृत्य किया गया. पहले तो नर्स को बलात्कार किया गया, उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई.

एक हप्ते में उत्तराखंड में दो इतनी बड़ी घटनाएं हो गयी और इस पर कोई नेता बोला नहीं न ही उतनी आवाज विरोध स्वरूप उठी जो उठनी चाहिए थी, न राष्ट्रिय मिडिया ने इनको तवज्जो देना उचित समझा।

ऐसा नहीं है कि ये पहली बार हुआ है,,,उत्तराखंड के अस्पतालों में कई बार इस तरह की घटनाएं सामने आयी है एम्स ऋषिकेश में ड्यूटी कर रही महिला डॉक्टर के साथ यह छेड़छाड़ उस वक्त हुई थी, जब वह पुरुष नर्सिंग ऑफिसर के साथ मिलकर एक ऑपरेशन कर रही थी. आरोप था कि इसी दौरान पुरुष नर्सिंग ऑफिसर ने महिला डॉक्टर के साथ छेड़छाड़ और अभद्रता की. इसके बाद मामला एक तरफा लग रहा था. लेकिन मामले ने तूल तब पकड़ा जब महिला डॉक्टर ने कुछ व्हाट्सएप के चैट दिखाए और यह बताया कि कैसे पुरुष नर्सिंग ऑफिसर उसको लगातार अश्लील मैसेज भेज रहा है.

इस घटना ने यह बता दिया था कि एम्स जैसे नामचीन और बड़े अस्पताल में भी इस तरह की घटना हो सकती है. अस्पताल कितने सुरक्षित हैं इसका पता एक और घटना से हमें लगता है. इसी साल 4 जुलाई के दिन उधमसिंह नगर के सितारगंज क्षेत्र में एक निजी अस्पताल में एक युवती अपने इलाज के लिए जाती है. तभी एक विवाद खड़ा हो जाता है. युवती ने अस्पताल के अटेंडेंट पर आरोप लगाया था कि उसके साथ अस्पताल के अंदर छेड़छाड़ की गई है.

15 जून को हरिद्वार में भी हुआ था मामला दर्ज-

एक और घटना हरिद्वार में इसी साल 15 जून 2024 को घटित हुई थी. साल 2023 से तैनात एक इंटर्न जब शाम 7:30 पर वहां पहुंची, तो अस्पताल का ही डॉक्टर ड्यूटी के बहाने उसे एक कमरे में लेकर चला गया. फिर दरवाजा बंद कर लिया. इसके बाद डॉक्टर, इंटर्न के साथ बदतमीजी और अश्लील हरकतें करने लगा. जब इंटर्न ने इसका विरोध किया तो उसे डराया और धमकाया गया. किसी तरह से इंटर्न उस कमरे से बाहर निकली और अपनी पूरी आपबीती स्टाफ और अपने परिवार के सदस्यों को बताई. इस घटना के बाद अस्पताल में हड़कंप मच गया था.

हरिद्वार के बाद हल्द्वानी में भी इसी साल 23 जुलाई 2024 के दिन प्रतिष्ठित न्यूरोसर्जन पर एक महिला ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया था. महिला का आरोप था कि हल्द्वानी में एक बड़ा अस्पताल चला रहे डॉक्टर और अस्पताल के मालिक ने उसके साथ पहले अभद्रता की और उसे जान से मारने की धमकी दी. यह घटना तब हुई, जब महिला अपने इलाज के लिए गई थी.

अगर बात पूरे उत्तराखंड में महिला अपराध की करें, तो हर साल उत्तराखंड में महिला अपराध की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. नेशनल क्राइम ब्यूरो की साल 2023 की रिपोर्ट बताती है कि उत्तराखंड महिला अपराध के मामले में छठे नंबर पर है.देहरादून जिला इस मामले में नंबर 1 पर हैं जहां इस साल सबसे ज्यादा महिला अपराध के मामले सामने आये हैं,,,,उत्तराखंड  में महिला अपराध के मामले  एक वर्ष में 26 प्रतिशत बढ़े हैं,,,जिसमें  905 महिलाओं से दुष्कर्म व 778 का अपहरण हुआ है. सवाल ये है कि बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा सिर्फ नारा बनकर रह गया है, न तो बेटियां बच पा रही है और पढ़ गयी तो भी उनकी सुरक्षा नहीं हो पा रही है. महिलाओं की आवाज उठाने वाले राजैनतिक दल भी अपनी सहूलियत और राज्य देखकर ही आवाज उठाते हैं. ये आंकड़े बताते हैं उत्तराखंड में महिलाएं कितनी सुरक्षित रह गयी हैं लेकिन इन आंकड़ों की कोई परवाह नहीं करता न सरकार और न जनता।

 

Kolkata Case: कोलकाता मामले को लेकर दुनियाभर में उठी आवाजें, न्यूयॉर्क से लेकर लंदन तक सड़कों पर उतरे लोग।

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कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में बीते दिनों एक महिला डॉक्टर की दुष्कर्म के बाद हत्या की घटना से पूरे देश में गुस्सा है। इसे लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। खासकर डॉक्टर्स और मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग लगातार कोलकाता मामले में न्याय की मांग उठा रहे हैं। अब यह विरोध प्रदर्शन वैश्विक स्तर पर पहुंच गया है। दुनियाभर में फैले भारतीय मूल के लोग इस मुद्दे पर अपनी आवाज उठा रहे हैं और दोषियों को सख्त सजा देने की मांग कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कवायर पर हुआ प्रदर्शन-
कोलकाता की घटना के विरोध में 14 अगस्त की रात को न्यूयॉर्क के टाइम्स स्कवायर पर एक धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया। इस दौरान करीब 40 लोग इकट्ठा हुए और बंगाल में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और डॉक्टर्स के प्रति अपना समर्थन जाहिर किया। अमेरिका के लॉस एंजेल्स में लेक हॉलीवुड पार्क में भी प्रदर्शनकारी इकट्ठा हुए और कोलकाता की घटना को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान करीब 250 भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने अपने हाथों में प्लेकार्ड और बैनर पकड़े हुए थे।

इसी तरह ह्यूस्टन में रहने वाले भारतीय समुदाय ने भी आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को लेकर अपना विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने एक महिला डॉक्टर की मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी पर दुष्कर्म और हत्या को सिस्टम की असफलता करार दिया और सख्त कार्रवाई की मांग की। शिकागो में बंगाली समुदाय के लोगों ने गुरुवार को एक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया। साथ ही अटलांटा में भी कोलकाता की घटना को लेकर लोगों ने प्रदर्शन किया।

जर्मनी, पौलेंड और कनाडा में भी प्रदर्शन-
जर्मनी के कोलोग्ने में भी भारतीय मूल के लोग इकट्ठा हुए और डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या की घटना पर नाराजगी जाहिर की। ब्रिटेन के लीड्स में भी बीती 14 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज की घटना को लेकर लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान लोगों ने कहा कि वह घटना को लेकर दुखी और गुस्से में हैं। लोगों ने इस दौरान अपनी बांह पर विरोध स्वरूप काली पट्टी बांध रखी थी और पीड़िता की याद में एक मिनट का मौन धारण किया। लीड्स के साथ ही मैनचेस्टर में भी लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। साथ ही लंदन के ट्रिनिटी चर्च, एडिनबर्ग की प्रिंसेस स्ट्रीट, पौलेंड के कराकोव, कनाडा के ऑस्टिन में भी लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया।

Kolkata Doctor Rape-Murder Case: आज उत्‍तराखंड में भी 24 घंटे के कार्य बहिष्कार पर डॉक्‍टर, देखें तस्वीरें।

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8 अगस्त को कोलकाता के आर जी कर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर साथ बलात्कार और हत्या की घटना से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। उत्तराखंड में भी आज डॉक्टर 24 घंटे का कार्य बहिष्कार करेंगे। आज पूरे प्रदेश में अस्पतालों में ओपीडी की सेवाएं ठप रहेंगी।

आज उत्तराखंड में भी डॉक्टरों की हड़ताल-

कोलकाता में रेजिडेंट महिला डॉक्टर के साथ दुष्कर्म व हत्या की घटना से पूरे देश में आक्रोश देखने को मिल रहा है। डॉक्टर्स और नर्स हड़ताल कर रहे हैं।

आज उत्तराखंड में भी डॉक्टरों की हड़ताल है। 24 घंटे तक प्रदेश में ओपीडी की सेवाएं ठप रहेंगी। हालांकि इमरजेंसी, पोस्टमार्टम और वीआईपी ड्यूटी के लिए सेवाएं यथावत रहेंगी।

ऋषिकेश एम्स में आज भी चिकित्सकों की हड़ताल-

आपको बता दें कि बीते चार दिनों से ऋषिकेश एम्स में डॉक्टरों की हड़ताल जारी है। आज पांचवे दिन भी ऋषिकेश एम्स में डॉक्टरों की हड़ताल जारी है।वहीं, आज आईएमए ऋषिकेश के बैनर तले निजी अस्पतालों में भी चिकित्सक सामूहिक हड़ताल पर हैं। हिमालयन विश्वविद्यालय जौली ग्रांट के चिकित्सकों व मेडिकल स्टूडेंट की ओर से कोलकाता प्रकरण को लेकर विरोध मार्च निकाला गया।

कोलकाता पुलिस और राज्य सरकार ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। जिससे देश-प्रदेश के चिकित्सकों में आक्रोश है। उन्होंने मांग की है कि केंद्र सरकार इस मामले में हस्तक्षेप करें। अपराधियों व अराजक तत्वों को तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाए।चिकित्सालयों में चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा के लिए जो एक्ट बना हुआ है, उसका सख्ती से पालन किया जाए। ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें।

Independence Day 2024: वन नेशन वन इलेक्‍शन, UCC और कृषि व्यवस्था में ट्रांसफॉर्म; लाल किले से PM मोदी का विजन।

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15th August Updates: स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर 11वीं बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से 2047 में विकसित भारत के सपने का खाका पेश किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते एक दशक में कई ऐसे सुधार किए गए हैं, जिनका असर अब दिखने लगा है और पूरी दुनिया में भारत की छवि सुधरी है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में यूनिफॉर्म सिविल कोड, बांग्लादेश के हालात, बुनियादी ढांचे के विकास, सामान्य मानविकी की समस्याओं के निदान, निवेश आदि मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस दौरान प्रधानमंत्री ने लोगों को आगाह करते हुए ये भी कहा कि कुछ लोग देश को निराशा के गर्त में डुबोना चाहते हैं, लेकिन हमें उनसे सावधान रहना होगा।

यूनिफॉर्म सिविल कोड पर ये बोले पीएम मोदी-

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लालकिले की प्राचीर से कहा ‘हमारे देश में यूनिफॉर्म सिविल कोड की चर्चा चल रही है। देश की सुप्रीम कोर्ट भी हमें यूनिफॉर्म सिविल कोड के लिए कह रही है और देश के संविधान निर्माताओं का भी ये सपना था। जो कानून धर्म के आधार पर देश को बांटते हैं, जो ऊंच नीच का कारण बनते हैं। वैसे कानूनों के लिए देश में कोई जगह नहीं हो सकती। हमने सांप्रदायिक सिविल कोड में 75 साल बिताए हैं, अब हमें सेक्यूलर सिविल कोड की तरफ जाना होगा।’

बांग्लादेश के हालात पर जताई चिंता-

‘बांग्लादेश में जो कुछ हुआ है। पड़ोस देश होने के नाते हम हालात को लेकर चिंतित हैं। हम उम्मीद करते हैं कि वहा हालात जल्द सामान्य होंगे। साथ ही वहां के हिंदू, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित हो। हमारे पड़ोसी देश सुख और शांति के मार्ग पर चलें। शांति के प्रति हम समर्पित हैं। हम आने वाले दिनों में बांग्लादेश की विकास यात्रा में हमेशा शुभचिंतक रहेंगे। हम मानव जाति के लिए सोचने वाले लोग हैं।’

पीएम मोदी ने डिजाइनिंग इंडिया का दिया मंत्र-

प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘मैं राज्य सरकारों से अपील करता हूं कि निवेशकों को अपने राज्यों में बुलाएं। इसके लिए कानून व्यवस्था बेहतर बनाएं और अन्य नीतियों में सुधार करें, जिससे निवेशक आएं। इससे युवाओं को रोजगार मिलेगा। सिर्फ भारत सरकार से काम होता नहीं है। राज्य सरकारों को आगे आना होगा।’

‘साथियों भारत अपनी बेस्ट क्वालिटी के लिए जाना जाएगा। इसके लिए हमने डिजाइनिंग इंडिया पर बल देना है। हमें कोशिश करनी है कि अब इंडियन स्टैंडर्ड, इंटरनेशनल स्टैंडर्ड बनेंगे, ये हमारा लक्ष्य होना चाहिए। डिजाइनिंग इंडिया और डिजाइनिंग फॉर वर्ल्ड पर हमारा फोकस होना चाहिए। गेमिंग की दुनिया आज तेजी से उभर रही है। हम गेमिंग की दुनिया में नया टैलेंट लेकर आ सकते हैं। मैं चाहता हूं कि भारत के बच्चे, भारत के नौजवान, आईटी, एआई प्रोफेशनल्स गेमिंग की दुनिया में अपना नाम करें और गेम विकसित करें।’

स्किल डेवलेपमेंट पर सरकार का फोकस-

‘देशवासियों, जिस तरह से विश्व का बदलाव नजर आ रहा है। अब स्किल का महत्व बढ़ गया है इसलिए हम स्किल डेवलेपमेंट पर ध्यान दे रहे हैं। बाजार में युवाओं की ताकत दिखाई दे तो उस लिहाज से हम देश के युवाओं को स्किल्ड बनाना चाहते हैं। देश का युवा ग्लोबल जॉब मार्केट में अपनी धमक बनाए। हम उस सपने को लेकर आगे बढ़ रहा है। आज दुनिया जिस तेजी से बढ़ रहा है तो हमें विज्ञान पर ध्यान देना चाहिए। हम रिसर्च पर फोकस कर रहे हैं। रिसर्च के लिए एक लाख करोड़ रुपये देने का फैसला किया गया है। जिससे नए अविष्कार हो। आज देश के युवा मेडिकल की पढ़ाई के लिए बाहर जा रहे हैं। इसलिए हमने पिछले दस साल में मेडिकल सीटों को एक लाख कर दिया है। करीब 25 हजार युवा मेडिकल एजुकेशन के लिए विदेश जा रहे हैं। इसलिए हमने तय किया है कि अगले पांच साल में मेडिकल लाइन में 75 हजार नई सीटें बनाई जाएंगी।’

 वन नेशन वन इलेक्‍शन के सपने को साकार करना होगा-

पीएम ने कहा कि हमें वन नेशन वन इलेक्‍शन के सपने को साकार करना होगा। इससे देश का भला होगा।

Kedarnath Update: केदारनाथ पैदल मार्ग 29 जगहों पर क्षतिग्रस्त, 16 जगह पूरी तरह से बहे…230 मजदूर रस्सी के सहारे मार्ग को कर रहे हैं ठीक।

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केदारनाथ पैदल मार्ग 29 जगहों पर क्षतिग्रस्त जबकि 16 स्थानों पर पूरी तरह से बह गया है। लोक निर्माण विभाग ने रास्ते की मरम्मत के लिए 230 मजदूर लगाए हैं। संवेदनशील स्थानों पर मजदूर खाई में उतरकर खुदाई कर रहे हैं।

वहीं, रस्सों को पकड़कर पुश्ता निर्माण के लिए बुनियाद रख रहे हैं। पूरे मार्ग को दुरस्त करने में लगभग एक माह का समय लग सकता है। आने वाले दिनों में लोनिवि द्वारा मजदूरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी।

बता दें कि 31 जुलाई की देर शाम को अतिवृष्टि से केदारनाथ पैदल मार्ग गौरीकुंड से लिनचोली तक व्यापक रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था। यहां 11 किमी के दायरे में रास्ता 16 स्थानों पर दो मीटर से 25 मीटर तक पूरी तरह से वॉशआउट हो रखा है। इसके अलावा अन्य स्थानों पर पुश्ता ढहने, मिट्टी कटान व भूस्खलन से मार्ग को क्षति पहुंची है।

लोक निर्माण विभाग पैदल मार्ग को दुरस्त करने में जुट गया है। जहां पर रास्ता पूरी तरह से वॉशआउट हुआ है, वहां पर मजदूर खाई में उतरकर पुश्ता निर्माण के लिए खुदाई कर रस्सों के सहारे बुनियाद रख रहे हैं। इन स्थानों पर हल्की सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है।
यही नहीं, मार्ग को दुरस्त करने के लिए प्रभावित स्थानों पर पत्थर, सिमेंट व अन्य सामग्री पहुंचाने में भी अन्य मजदूरों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी तरफ क्षेत्र में आए दिन हो रही बारिश से मरम्मत व पुनर्निर्माण कार्य में दिक्कत आ रही हैं।
अधिकारियों के अनुसार, अति संवेदनशील स्थानों पर आरसीसी पुश्तों का निर्माण किया जाना है। साथ ही जहां पर वॉशआउट हुआ है, वहां ऊपरी तरफ कटान के साथ ही निचली तरफ से सुरक्षा दीवार भी बनाई जानी है। इधर, सोनप्रयाग के समीप भूस्खलन जोन में भूस्खलन जोन में मरम्मत कार्य शुरू हो गया है।
गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग को दुरस्त करने के लिए 230 मजदूर लगाए गए हैं। आने वाले दिनों में मजदूरों की संख्या और बढ़ाई जाएगी। जहां पर रास्ता वॉशआउट हो रखा है, वहां पर पुनर्निर्माण के लिए मजदूरों को काम करने में दिक्कतें हो रही हैं। सभी साइट पर स्वयं सहित सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता द्वारा किए जा रहे कार्य की मॉनीटरिंग की जा रही है।
-विनय झिक्वांण, अधिशासी अभियंता लोनिवि गुप्तकाशी

Kedarnath Rescue: पांचवें दिन भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, सेना ने संभाला मोर्चा; चिनूक से यात्रियों को किया जा रहा एयरलिफ्ट।

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केदारनाथ धाम व पैदल मार्ग से अब तक दस हजार से अधिक तीर्थयात्रियों व स्थानीय लोगों का रेस्क्यू किया जा चुका है। सोमवार को केदार घाटी का मौसम साफ होने के साथ ही एमआई 17 और चिनूक से एयर लिफ्ट रेस्क्यू का कार्य शुरू हो गया है। एमआई चारधाम हेलीपैड पर यात्रियों को उतार रहा है। जबकि चिनूक गौचर हवाई पट्टी पर यात्रियों को उतरेगा। सुबह 9 बजे तक 133 लोगों को केदारनाथ से एमआई एवं चिनूक एवं छोटे हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित एयर लिफ्ट कर रेस्क्यू किए जा चुके हैं।

31 जुलाई को हुई अतिवृष्टि से केदारनाथ मार्ग को भारी नुकसान पहुंचा है। गौरीकुंड से केदारनाथ मंदिर तक 16 किमी का मार्ग है, इसमें 10 जगह मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। लोक निर्माण विभाग की टीम मार्ग को खोलने में जुटी है। लोनिवि की रिपोर्ट के अनुसार जो स्थितियां हैं उनमें मार्ग को पूर्व की दशा में लाने में करीब एक महीने का समय लग सकता है।

वहीं, सेना ने मोर्चा संभालते हुए मंदाकिनी नदी पर अस्थायी ट्राली स्थापित कर दी है। साथ ही वैकल्पिक पुल का निर्माण भी शुरू कर दिया है। गौरीकुंड में घोड़ा पड़ाव के पास लगभग 15 मीटर लंबाई में रास्ता पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यहां पर लो.नि.वि श्रमिक वैकल्पिक मार्ग स्थापित करने में जुटे हैं।

सोमवार सुबह 100 लोगों को सुरक्षा बलों की देखरेख में श्री केदारनाथ धाम से लिनचोली हेलीपैड के लिए रवाना कर दिया गया है। इन यात्रियों को लिनचोली से एयर लिफ्ट कर शेरसी हैलीपैड पर उतारा जाएगा। इसके अलावा एनडीआरएफ की टीमें जंगल एव मंदाकिनी नदी के आसपास भी लगातार सर्च अभियान चला रहे हैं।

रविवार को लगभग 1100 लोगों का सफलता पूर्वक रेस्क्यू किया गया। वहीं सेना ने भी अब कमान संभाल ली है। पैदल मार्ग पर आम लोगों को खोजने के लिए स्निफर डाँग भेजे गए हैं, सेना क्षतिग्रस्त् पैदल मार्ग को आवाजाही के लिए खोजे जाने में भी मदद करेगी।

वहीं गौरीकुंड व सोनप्रयाग के बीच वाशआउट हुए हाइवे कपर ट्राली लाकर बुजर्ग व घायलों को निकालने का कार्य भी सेना ने शुरू कर दिया है। रेस्क्यू आपरेशन के चौथे दिन रविवार को कुल 1155 का रेस्क्यू किया गया, जिसमें हेलीकाप्टर से 628 व पैदल मार्ग से 527 लोगों को रेस्क्यू किया गया।

हेली से लिनचोली, चीरबासा व केदारनाथ से रेस्क्यू किया गया, वहीं चौमास पैदल मार्ग से भी रविवार को 210 लोगों को रेस्क्यू किया गया। केदारनाथ पैदल मार्ग में फंसे यात्रियों का रेस्क्यू भी जारी है। सोनप्रयाग में मैन्युल रेस्क्यू के लिए अब सेना, डीडीआरएफ, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस के जवानों संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं।

रविवार को चलने में असमर्थ लोगों के 25 बुजर्ग व घायलों का रेस्क्यू किया गया। वहीं स्निफर डाँग की टीम भी भेजी गई है, जो जंगल में भटक गए लोगों की खोजबीन करेगी, साथ ही भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में भी सर्च अभियान करेगी।

 

 

 

 

Wayanad Landslide: वायनाड भूस्खलन में मृतकों का आंकड़ा 300 पार, शवों को दफनाने के लिए दिशा-निर्देश किए गए जारी।

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Kerala Wayanad Landslide: केरल के वायनाड में हुए भूस्खलन के बाद राहत और बचाव कार्यों का आज पांचवां दिन है। अब तक मृतकों का आंकड़ा 308 हो चुका है। अभी भी शवों की तलाश जारी है। भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल विकास राणा ने बताया कि आज भी कल की ही तरह विभिन्न जोन्स के लिए अलग-अलग टीमें बनाई जाएंगी। टीमों के साथ वैज्ञानिक और स्निफर डॉग्स भी मौजूद रहेंगे। सेना के अधिकारी ने बताया कि स्थानीय लोग भी राहत और बचाव कार्य में मदद कर रहे हैं।

 

एडीजीपी बोले- हेलीकॉप्टर और ड्रोन्स से किया जा रहा सर्वेक्षण

केरल के ADGP(कानून व्यवस्था) एम. आर. अजीत कुमार ने वायनाड भूस्खलन पर बताया, ‘राहत और बचाव अभियान जारी है, हम सर्च ऑपरेशन में लगे हुए हैं, पूरे इलाके को 6 जोन में बांटा गया है, 5 भूमि क्षेत्र और 1 नदी क्षेत्र है। पिछले दो दिनों से हम नदी क्षेत्र पर केंद्रित हैं। पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ वन, अग्निशमन और तट रक्षक अपना काम कर रहे हैं। हमारे पुलिस हेलीकॉप्टर और ड्रोन का इस्तेमाल सर्वेक्षण करने के लिए किया जा रहा है। आज हमें उस सर्च में एक शव मिला है। अभी तक जिला प्रशासन के अनुसार, उन्हें करीब 400 लोगों के लापता होने की सूचना मिली है, हमारे पास ज्यादा डेटा नहीं है।’

 

केरल सरकार ने शवों और अवशेषों को दफनाने के लिए जारी किए दिशा-निर्देश

केरल के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक शव या शरीर के अंग को एक पहचान संख्या दी जाएगी। निर्देशों में कहा गया है कि अवशेषों के सभी नमूने, तस्वीरों या वीडियो और शरीर से जुड़ी भौतिक वस्तुओं का भी रिकॉर्ड में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया जाएगा।

84 लोगों का अस्पताल में चल रहा इलाज

भूस्खलन में घायल हुए 84 लोगों का वायनाड, कोझिकोड और मलाप्पुरम के विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 187 लोग अस्पतालों से डिस्चार्ज भी हो चुके हैं।

 

Kanwad Yatra 2024: हरिद्वार पहुंचे 4.4 करोड़ कांवड़िये, गंगाजल लेकर आज कर रहे जलाभिषेक।

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कल यानी बृहस्पतिवार को कांवड़ मेले का आखिरी दिन था और आज कावड़ियों ने शिवालयों में जलाभिषेक किया। आखिरी दिन पूरी रात डाक कांवड़ यात्री हरिद्वार से जलभर बाइकों और बड़े वाहनों से दौड़ते रहे। इस बार मेले में चार करोड़ चार लाख 40 हजार कांवड़ यात्री पहुंचे हैं।

प्रशासन ने बृहस्पतिवार की शाम छह बजे तक का यह आंकड़ा जारी किया है। पिछले साल चार करोड़ सात लाख कांवड़ यात्री हरिद्वार पहुंचे थे। 22 जुलाई से कांवड़ मेले का आगाज हुआ था। आज शुक्रवार को जलाभिषेक होगा। बृहस्पतिवार की शाम तक छह बजे धर्मनगरी में 77 लाख कांवड़ यात्रियों ने गंगाजल भरा और अपने गंतव्य की तरफ रवाना हो गए।

इस बार डाक कांवड़ यात्रियों का हुजूम अंतिम दिन ही उमड़ा। इससे पहले पैदल कांवड़ यात्री रवाना होते रहे। बृहस्पतिवार की रात से आसपास के जनपदों के यात्री गंगाजल भरकर रवाना होते रहे।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने बताया कि कांवड़ मेले में अब तक 4 करोड़ 4 लाख, 40 हजार कांवड़ी यात्री पहुंचे हैं। कांवड़ियों के तीन लाख 38 हजार 277 छोटे-बड़े वाहन गुरुवार को पहुंचे हैं। छह कांवड़ियों को डूबने से बचाया गया है जबकि तीन की मौत हुई है।

इन सालों में इतने कांवड़िये पहुंचे-

2015-1 करोड़ 95 लाख

2016-2 करोड़ 20 लाख

2017-3 करोड़ 70 लाख

2018-3 करोड़ 77 लाख

2019-3 करोड़ 30 लाख

2020-कोरोना के कारण स्थगित

2021-कोरोना के कारण स्थगित

2022-3 करोड़ 79 लाख

2023-4 करोड़ 07 लाख