चारधाम यात्रा में इस बार भी तीर्थयात्रियों की संख्या नया रिकॉर्ड बनाने की तरफ आगे बढ़ रही है। इस बार 50 दिन में 30 लाख तीर्थयात्री चारधामों व हेमकुंड साहिब में दर्शन कर चुके हैं। जबकि पिछले साल 68 दिन में इतने यात्रियों ने दर्शन किए थे। केदारनाथ धाम में दर्शन करने वालों का आंकड़ा 10 लाख पार हो चुका है।
10 मई से शुरू हुई चारधाम यात्रा में आस्था का सैलाब उमड़ रहा है। पर्यटन विभाग के आंकड़ों के अनुसार अब तक 30 लाख श्रद्धालु चारधामों में दर्शन कर चुके हैं। पिछले साल 22 अप्रैल से यात्रा शुरू हुई थी। 30 जून तक यानी 68 दिनों में 30 लाख यात्रियों ने दर्शन किए थे। इस बार 18 दिन पहले 30 लाख ने दर्शन किए।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत ई-केवाईसी न करने और आधार नंबर, बैंक खाता और जमीन के रिकॉर्ड में जानकारी समान होने के कारण प्रदेश के एक लाख से अधिक किसानों को सम्मान निधि नहीं मिल रही है। वर्तमान में प्रदेश के 771567 किसान ही योजना में मिलने वाली रकम पा रहे हैं। अब किसानों को जागरूक करने के लिए प्रदेश भर में शिविर लगाए जाएंगे।
किसानों की जरूरतों को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 में पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू की थी। इस योजना में प्रदेश के नौ लाख पंजीकृत हैं। योजना के शुरूआत में सभी किसानों को बैंक खातों में सम्मान निधि के रूप में दो हजार रुपये की राशि आई। लेकिन कई अपात्र किसान भी योजना का लाभ रहे थे।
इस पर केंद्र सरकार ने दस्तावेजों का सत्यापन के लिए ई-केवाईसी शुरू किया। जिसमें किसान का आधार नंबर, बैंक खाता संख्या, जमीन से संबंधित खाता खतौनी व खसरा नंबर का सत्यापन किया। लेकिन प्रदेश में एक लाख से अधिक किसान ऐसे हैं। जिनकी ई-केवाईसी नहीं हो पाई या उनके दस्तावेजों में भिन्नता है। जिस कारण उन्हें योजना में मिलने वाली सम्मान निधि नहीं मिल रही है।
कृषि एवं उद्यान मंत्री गणेश जोशी ने विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी पात्र किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि का लाभ मिले। जिन किसानों की ई-केवाईसी नहीं हो पाई है। इसके लिए प्रदेश भर में जागरूकता शिविर लगाए जाएं।
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी। कोर्ट ने शुक्रवार को सोरेन को कथित भूमि घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में जमानत दे दी। कोर्ट ने सोरेन की जमानत याचिका पर अपना फैसला 13 जून को सुरक्षित रख लिया था। सोरेन के वरिष्ठ वकील अरुणाभ चौधरी ने बताया कि सोरेन को जमानत दे दी गई है। आज कोर्ट के आदेश की कॉपी चली जाएगी कल वे बाहर आ सकते हैं। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया, वह दोषी नहीं हैं और जमानत पर रिहा किए जाने दौरान याचिकाकर्ता द्वारा कोई अपराध किए जाने की कोई आशंका नहीं है।
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के कार्यकारी अध्यक्ष सोरेन को प्रवर्तन निदेशालय ने धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में 31 जनवरी को गिरफ्तार किया था। सोरेन (48) वर्तमान में बिरसा मुंडा जेल में हैं। सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय के वकील एस वी राजू ने दलील दी कि अगर सोरेन को जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह इसी तरह का अपराध फिर करेंगे।
रांची में जमीन से जुड़ी है जांच-
सोरेन के खिलाफ जांच रांची में 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ी है। ईडी का आरोप है कि इसे अवैध रूप से कब्जे में लिया गया था। एजेंसी ने सोरेन, प्रसाद और सोरेन के कथित ‘फ्रंटमैन’ राज कुमार पाहन और हिलारियास कच्छप तथा पूर्व मुख्यमंत्री के कथित सहयोगी बिनोद सिंह के खिलाफ 30 मार्च को यहां विशेष पीएमएलए अदालत में आरोपपत्र दायर किया था। सोरेन ने रांची की एक विशेष अदालत के समक्ष जमानत याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने यह आरोप लगाया कि उनकी गिरफ्तारी राजनीति से प्रेरित और उन्हें भाजपा में शामिल होने के लिए मजबूर करने की एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संसद की संयुक्त बैठक में अपने संबोधन में कहा कि सरकार पेपर लीक की हालिया घटनाओं की जांच करने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है कि दोषियों को सजा मिले।
18वीं लोकसभा को पहली बार संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनकी सरकार देश के युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें हासिल करने में सक्षम बनाने के लिए एक माहौल बनाने के लिए काम कर रही है।
जैसे ही उन्होंने शिक्षा के मोर्चे पर सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का उल्लेख किया, कुछ विपक्षी सदस्यों को “एनईईटी” चिल्लाते हुए सुना गया।
उन्होंने कहा, “अगर किसी कारण से परीक्षाओं में बाधा आती है तो यह उचित नहीं है। सरकारी भर्तियों और परीक्षाओं में शुचिता, पारदर्शिता बहुत जरूरी है।”
उन्होंने कहा, “सरकार पेपर लीक की हालिया घटनाओं में निष्पक्ष जांच करने और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
राष्ट्रपति ने कहा कि पहले भी कुछ राज्यों में पेपर लीक की घटनाएं हुई थीं, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दलगत राजनीति से ऊपर उठने और राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत कदम उठाने की जरूरत है।
राष्ट्रपति ने कहा कि संसद ने पेपर लीक के खिलाफ भी एक मजबूत कानून बनाया है।
उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रक्रिया में सुधार लाने के लिए काम कर रही है।
उत्तराखंड के 6422 गांवों का डिजिटलाइजेशन करने के लिए जल्द ही इन्हें भारत नेट परियोजना के तहत ऑप्टिकल फाइबर आधारित कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। इसके लिए भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) भारत नेट उद्यमी (बीएनयू) के साथ मिलकर ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट उपलब्ध कराएगा।
योजना के तहत देशभर के ग्रामीण इलाकों में स्थानीय उद्यमियों की मदद से ऑप्टिकल फाइबर को घर-घर तक पहुंचाया जाएगा। इस संबंध में उत्तराखंड में बीएसएनएल के नवनियुक्त मुख्य महाप्रबंधक पीडी चिरानिया ने सोमवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। दर्शनलाल चौक स्थित बीएसनएल के कार्यालय में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया, योजना के लिए बीएसएनएल सिंगल प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के तौर पर काम करेगा।
लोगों को उद्यमी बनने का भी मौका मिलेगा-
इसके लिए यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (यूएसओ) की ओर से आर्थिक मदद की जाएगी। कहा, योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में सस्ती कीमतों पर गुणवत्तापूर्ण मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट उपलब्ध कराना है। इसके अलावा इस योजना से ग्रामीण इलाकों के लोगों को उद्यमी बनने का भी मौका मिलेगा। इससे प्राप्त होने वाले राजस्व का 50 फीसदी हिस्सा उद्यमी को दिया जाएगा। कहा, योजना भारत सरकार का बड़ा कार्यक्रम हैं, यह उत्तराखंड के गांवों का डिजिटलाइजेशन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी
626 इलाकों में लगेंगे 4 जी टावर-
बीएसएनएल राज्य सरकार के साथ मिलकर उत्तराखंड के उन 626 इलाकों में 4-जी के टावर लगाएगा जहां किसी भी कंपनी का कोई नेटवर्क नहीं है। मुख्य महाप्रबंधक पीडी चिरानिया ने कहा, इसका सीधा लाभ हमारे सुरक्षा जवानों को मिलेगा। कहा, उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति के चलते इन इलाकों में किसी भी कंपनी का नेटवर्क काम नहीं करता। जिसके चलते देश की रक्षा कर रहे जवानों के अलावा वहां के स्थानीय लोगों से भी संपर्क करना किसी बड़ी चुनौती से भी कम नहीं है। इससे निपटने के लिए के लिए सरकार के साथ मिलकर 4-जी टावर लगाए जाएंगे।
जलवायु परिवर्तन का असर पूरी दुनिया पर पड़ता दिखाई दे रहा है। कहीं गर्मी तो कहीं बारिश का तांडव देखा जा सकता है। भारत के कई हिस्सों में गर्मी से कोहराम मचा हुआ है। आए दिन लोगों के मरने की खबर आ रही है। तापमान ने तो सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। अब तक 50 डिग्री के पार जा चुका है। इस बीच अधिकारियों ने बताया कि इस बार गर्मी के मौसम में अबतक 40 हजार से अधिक हीटस्ट्रोक के मामले सामने आ चुके हैं। वहीं प्रचंड गर्मी ने पूरे देश में सौ से ज्यादा जीवन लील लिए। जबकि पूर्वोत्तर के कुछ हिस्से भारी बारिश से बाढ़ से जूझ रहे हैं।
अरबों लोग भीषण गर्मी से जूझ रहे-
वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव गतिविधियों की वजह से जलवायु पर खासा असर पड़ रहा है। इसकी वजह से एशिया भर में अरबों लोग भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। उत्तर भारत में तापमान लगभग 50 डिग्री सेल्सियस (122 डिग्री फ़ारेनहाइट) तक चला गया है। जो अब तक की सबसे लंबी गर्मी की लहरों में से एक है।
पक्षी आसमान से गिर रहे-
प्रचंड गर्मी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बेचारे पक्षी आसमान में उड़ने की बजाय धरती पर आकर गिर रहे हैं। अस्पतालों में गर्मी से प्रभावित रोगियों की संख्या बढ़ रही है। लोग जरूरी काम के लिए भी दोपहर में घर से बाहर नहीं जा पा रहे हैं। इन सब की वजह यह भी है कि इस बार मार्च में गर्मी की शुरुआत के बाद से हाल के हफ्तों में दिन और रात दोनों का तापमान चरम पर था।
वहीं, सबसे ज्यादा परेशानी देश की राजधानी दिल्ली में दर्ज की जा रही है। यहां लोगों को न तो पीने के लिए पर्याप्त पानी और न ही बिजली मिल रही हैं। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्रालय ने संघीय और राज्य संस्थानों को मरीजों का तुरंत इलाज करने का आदेश दिया है। जबकि दिल्ली के अस्पतालों को निर्देश दिया गया था कि वे अधिक बिस्तर उपलब्ध कराएं।
इतने लोगों की मौत-
स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि एक मार्च से 18 जून के बीच हीट स्ट्रोक के 40,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए और कम से कम 110 लोगों की मौत की पुष्टि हुई। इस दौरान उत्तर-पश्चिम और पूर्वी भारत में सामान्य से दोगुनी संख्या में गर्म हवाएं चलीं।
मौसम विभाग ने इस महीने के लिए भी सामान्य तापमान से अधिक रहने का अनुमान जताया है, क्योंकि अधिकारियों का कहना है कि असंतुलित वृद्धि के कारण भारतीय शहर हीट ट्रैप बन गए हैं।
राज्य में विधानसभा उप चुनाव के लिए आज से नामांकन शुरू होने जा रहे हैं। 21 जून तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है।
चुनाव आयोग के मुताबिक, शुक्रवार को बदरीनाथ और मंगलौर विधानसभा उप चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही नामांकन पत्रों की बिक्री, नामांकन भी शुरू हो जाएगा जो 21 जून तक चलेगा। 24 जून तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो प्रत्याशी नाम वापस लेना चाहेंगे, उनके लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि 26 जून तक होगी।
दोनों विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को मतदान होगा और 13 जुलाई को मतगणना होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया, विस उप चुनाव के लिए बदरीनाथ में 210 पोलिंग बूथ पर एक लाख दो हजार 145 मतदाता, 2,566 सर्विस मतदाता हैं। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में 132 पोलिंग बूथ और एक लाख 19 हजार 930 मतदाता व 255 सर्विस मतदाता होंगे।
अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी बिहार में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आप के राज्यसभा सांसद संजय कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि बिहार में हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी के चुनावी तैयारी शुरू कर दे। ताकि आगामी चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में दिए जा रहे गुड गवर्नेंस का लाभ बिहार को भी मिल सके।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को देंगे चुनौती- बताया जा रहा है कि इंडी गठबंधन की सहयोगी पार्टियों में से एक आम आदमी पार्टी बिहार में भी गठबंधन धर्म का पालन करेगी। इंडी गठबंधन में सीट बंटवारे के फॉर्मूला तय होने के बाद ही आप अपनी सीटों का खुलासा करेगी। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी बिहार विधानसभा में उतरती है तो सीधे तौर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को ही टक्कर देगी। खास तौर पर केजरीवाल सीएम नीतीश कुमार की पार्टी और पीएम मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा को चुनौती देंगे।
पिछले साल पटना आए थे केजरीवाल-
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले साल 22 जून को पटना आए थे। केजरीवाल को सीएम नीतीश कुमार ने न्योता दिया था। उस वक्त सीएम नीतीश कुमार इंडी गठबंधन के साथ थे। केजरीवाल भी इंडी गठबंधन की मीटिंग में शामिल होने आए थे। हालांकि, उस वक्त उन्होंने बिहार विधानसभा के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। केवल लोकसभा पर फोकस करने की बात कही। अब उनकी पार्टी के सांसद संजय सिंह के बयान ने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, आम आदमी पार्टी इससे पहले भी बिहार विधानसभा चुनाव अपना भाग्य आजमा चुकी है। लेकिन, उसमें सफलता हाथ नहीं लगी थी।
कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक शनिवार को दिल्ली में है। इस बैठक में पार्टी के सभी नवनिर्वाचित सांसद राहुल गांधी से नेता विपक्ष पद स्वीकार करने की मांग करेंगे। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इससे राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने होंगे और वे उन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठा सकेंगे, जिनके आधार पर पार्टी ने इन चुनावों में बेहतर सफलता हासिल की है। राहुल गांधी लगातार पांच साल तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रहेंगे, तो इससे आने वाले चुनाव में वे विपक्षी गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार होंगे। इससे पार्टी को आगे के चुनावों में लाभ मिलेगा।
संविधान के अनुसार नेता विपक्ष आधिकारिक पद होता है। इसे कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा और उसे मिलने वाली सभी सुविधाएं हासिल होती हैं। नेता विपक्ष ईडी-सीबीआई के प्रमुख की नियुक्ति सहित कई महत्त्वपूर्ण समितियों में शामिल होता है। नेता विपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी लोकसभा के पटल से लेकर संसद के बाहर तक मजबूती के साथ अपनी बात रख सकेंगे और महत्त्वपूर्ण मुद्दों को उठा सकेंगे।
उत्तर-दक्षिण भारत का पार्टी में संतुलन-
साथ ही राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने से पार्टी में उत्तर और दक्षिण भारत का संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। अभी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल दक्षिण से हैं, जबकि उत्तर भारत से पार्टी का कोई बड़ा नेता पार्टी के बड़े पद पर मौजूद नहीं है। दिग्विजय सिंह, आनंद शर्मा जैसे उत्तर भारत के नेता चुनाव हार गए हैं, तो अशोक गहलोत जैसे नेता चुनाव में उतरे ही नहीं थे। इससे उत्तर भारत का पार्टी में प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ गया है।
गांधी परिवार कांग्रेस में सबसे मजबूत हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर सोनिया गांधी या राहुल गांधी पार्टी के किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, जबकि प्रियंका गांधी महासचिव हैं। चुनावों की दृष्टि से उत्तर भारत में पार्टी का मजबूत होना जरूरी है और इसको ध्यान में रखकर ही राहुल गांधी को नेता विपक्ष का पद स्वीकार करने का आग्रह किया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी से यह आग्रह किया जा रहा है कि वे रायबरेली की सीट भी अपने पास रखें। इससे भी पार्टी को उत्तर भारत में मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके पहले चर्चा थी कि राहुल गांधी रायबरेली की सीट छोड़ेंगे और प्रियंका गांधी इस सीट पर चुनाव लड़कर परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाएंगी।
गरीब, वंचित, बेरोजगारों की आवाज है राहुल गांधी- विश्व विजय सिंह-
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्व विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी इस समय देश की राजनीति में गरीबों, वंचितों, बेरोजगार युवाओं, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों-जनजातियों और अल्पसंख्यकों की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। कांग्रेस ने इन्हीं वर्गों के मुद्दों को उठाते हुए लोकसभा चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की। ऐसे में यदि राहुल गांधी नेता विपक्ष की भूमिका में होंगे, तो वे संसद से लेकर सड़क तक सरकार पर लगातार इन वर्गों के लिए काम करने का दबाव बनाने में सफल होंगे। इससे कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
विश्व विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने से केवल कांग्रेस को ही लाभ नहीं मिलेगा। इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दल कमोबेस इन्हीं वर्गों के मुद्दों पर चुनाव लड़ते रहे हैं। इसलिए यदि राहुल गांधी इन मुद्दों को उठाएंगे तो इससे गठबंधन के सभी सहयोगियों को भी लाभ होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बार एनडीए के 293 सीटों के मुकाबले इंडिया गठबंधन 234 सीटों तक पहुंचने में सफल रहा है, जो कि बहुमत के बहुत करीब है। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों की आवाज उठाकर हम अगली बार केंद्र में सरकार बनाने में सफल रहेंगे।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल ने नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना। भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और भाजपा के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह, नितिन गडकरी और राजद के साथी तेदेपा के चंद्रबाबू नायडू, जदयू के नीतीश कुमार, शिवसेना के एकनाथ शिंदे समेत अन्य नेताओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया।
इस दौरान कार्यवाहक पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि जो साथ विजय होकर आए हैं, वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं। जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है, उन लोगों ने न दिन देखा, न रात देखी। इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ता ने जो पुरुषार्थ, परिश्रम किया है, मैं आज संविधान सदन से उन्हें सिर झुकाकर प्रणाम करता हूं। साथियों मेरा बहुत सौभाग्य है कि एनडीए के नेता के रूप में आप सब साथियों ने सर्वसम्मति से चुनकर मुझे नया दायित्व दिया है। इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।
सांसदों-सहयोगियों के लिए कहा, जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है-PM
उन्होंने कहा, ”व्यक्तिगत जीवन में मुझे जवाबदारी का एहसास करता हूं। 2019 में जब आप सभी ने मुझे नेता के रूप में चुना था, तब मैंने एक बात पर बल दिया था- विश्वास। आज जब आप मुझे फिर से एक बार ये दायित्व दे रहे हैं तो इसका मतलब है कि हमारे बीच विश्वास का सेतु बहुत मजबूत है। अटूट रिश्ता विश्वास के मजबूत धरातल पर है। ये पल भावुक करने वाला भी है। आप सबके प्रति जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है।”
एनडीए के लिए कहा- महान लोकतंत्र की ताकत देखिए- PM
पीएम मोदी ने कहा, ”बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं, उन्हें शायद सूट नहीं करता होगा। इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखिए। एनडीए को आज देश के 22 राज्यों में लोगों ने सरकार बनवाकर सेवा का मौका दिया है। हमारा गठबंधन सच्चे अर्थ में भारत की असली आत्मा, भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है, उसका प्रतिबिंब है। हमारे देश में 10 ऐसे राज्य हैं, जहां आदिवासी बंधुओं की संख्या प्रभावी रूप से है, निर्णायक रूप से है। जहां आदिवासियों की आबादी ज्यादा है, ऐसे 10 राज्यों में से सात में एनडीए सेवा कर रहा है। हम सर्वधर्म समभाव वाले संविधान को समर्पित हैं। गोवा हो, पूर्वोत्तर हो, जहां बहुत बड़ी मात्रा में ईसाई भाई-बहन रहते हैं, उन राज्यों में भी एनडीए के रूप में हमें सेवा का अवसर मिला है।”
‘देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी’- PM
पीएम मोदी ने कहा, ”हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में और गठबंधन की राजनीति के इतिहास में चुनाव पूर्व गठबंधन इतना कभी मजबूत नहीं हुआ, जितना एनडीए हुआ है। यह गठबंधन की जीत है। हमने बहुमत हासिल किया है। मैं कई बार कह चुका हूं। सरकार चलाने के लिए बहुमत आवश्यक है, लोकतंत्र का वही एक सिद्धांत है। देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी होता है। मैं आज देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने जिस तरह बहुमत देकर सरकार चलाने का सौभाग्य दिया है, हम सभी का दायित्व है कि सर्वमत का सम्मान कर देश को आगे ले जाने की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। एनडीए को करीब-करीब तीन दशक हो चुके हैं। आजादी के 75 साल में तीन दशक एनडीए का होना सामान्य घटना नहीं है। विविधता के बीच तीन दशक की यह यात्रा बहुत बड़ी मजबूती का संदेश देती है। आज गर्व के साथ कहता हूं कि एक समय संगठन के कार्यकर्ता के रूप में मैं इस गठबंधन का हिस्सा था और आज सदन में बैठकर आपके साथ काम करते-करते मेरा भी नाता इससे तीस सालों का हो गया है। मैं कह सकता हूं कि यह सबसे सफल गठबंधन है। पांच साल का कार्यकाल होता है, लेकिन इस गठबंधन ने तीस साल में से पांच-पांच साल के तीन कार्यकाल पूरे किए हैं और गठबंधन चौथे कार्यकाल में प्रवेश कर रहा है।”