Category Archive : राष्ट्रीय खबर

भारत-मालदीव में विवाद जारी, नई दिल्ली ने राजदूत को किया तलब, जानिए कहां से शुरू हुआ विवाद.

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India-Maldives Relations: भारत-मालदीव के बीच राजनयिक विवाद सोमवार (8 जनवरी) को भी जारी रहा. इस बीच मालदीव के राजदूत को भारत ने तलब किया. वहीं सोशल मीडिया पर इस समय लक्षद्वीप बनाम मालदीव की एक जंग छिड़ी हुई है। पीएम नरेंद्र मोदी की लक्षद्वीप की यात्रा के बाद ये बहस शुरू हुई है। पीएम की इस यात्रा से अटकलें लगाई कि मालदीव के पेंच कसने के लिए भारत अपने द्वीपों में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहा है। पीएम मोदी के दौरे के बाद से लक्षद्वीप गूगल सर्च इंजन पर सबसे ज्यादा सर्च किया जाने वाला कीवर्ड रहा है। शुक्रवार को, 50,000 से अधिक लोगों ने केंद्र शासित प्रदेश को गूगल पर देखा, इसकी वजह ये पीएम की पोस्ट भी रही, जिसमें उन्होंने इस जगह की आश्चर्यजनक सुंदरता और वहां के लोगों की गर्मजोशी के बारे में लिखा।
 
नरेंद्र मोदी के लक्षद्वीप दौरे के बाद सोशल मीडिया पर आग भड़काने का काम मालदीव की सत्ताधारी पार्टी के नेताओं के ट्वीट ने किया। इन ट्वीट में नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया गया तो भारतीयों को गंदा कहते हुए नस्लीय टिप्पणियां की गईं। इसमें जाहिर रमीज और मरियम शिउना खासतौर से अपने कमेंट के चलचते सोशल मीडिया पर भारतीयों के निशाने पर आए। इसी का नतीजा था कि सोशल मीडिया पर रविवार को बायकॉट मालदीव ट्रेंड करने लगा।
1. भारतीय विदेश मंत्रालय ने मालदीव के राजदूत को सोमवार को तलब किया. मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद की पीएम मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर कड़ी चिंता व्यक्त की. तीनों मंत्रियों को निलंबित किया जा चुका है.

2.  मालदीव की सरकार ने भारतीय उच्चायुक्त मुनु मुहावर को कहा कि उसके निलंबित किये जा चुके तीन उप मंत्रियों की पीएम मोदी के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयान सरकार के रुख को प्रदर्शित नहीं करते. द सन ऑनलाइन’ की रिपोर्ट के मुताबिक मालदीव के एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि बैठक में नसीर ने पड़ोसियों के लिए मालदीव का सतत समर्थन दोहराया. भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बताया कि विदेश मंत्रालय में डॉ अली नसीर मोहम्मद के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करने के लिए भारतीय उच्चायुक्त की बैठक पहले से तय थी.

3. पीएम मोदी पर मालदीव के मंत्रियों की टिप्पणी पर लक्षद्वीप के लोकसभा सांसद मोहम्मद फैजल ने कहा कि कुछ भी बोलने से पहले दो बार सोचें. फैजल ने पीटीआई से बात करते हुए कहा, ‘‘माननीय प्रधानमंत्री की लक्षद्वीप के पर्यटन को लेकर की गई टिप्पणी पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला था. मालदीव के उप मंत्रियों की गई टिप्पणी अवांछित और बेतुकी थीं. ’’

4.  मालशा शरीफ, मरियम शिउना और अब्दुल्ला महज़ूम माजिद ने पीएम मोदी के लक्षद्वीप की फोटो शेयर करने को लेकर टिप्पणी की थी. तीनों ने कहा था कि पीएम मोदी ऐसा लक्षद्वीप को मालदीव के वैकल्पिक पर्यटन स्थल के रूप में पेश करने की एक कोशिश करने के लिए कर रहे हैं.

5. भारत से विवाद के बीच मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू चीन की राजकीय यात्रा पर गए हैं. यहां मुइज्जू राष्ट्रपति शी चिनफिंग से द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. मोहम्मद मुइज्जू को चीन का करीबी माना जाता है.

6. कांग्रेस ने कहा कि मालदीव और चीन के रिश्ते भारत के लिए चिंता की बात है. कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, ” मालदीव हमेशा भारत को चीन के ऊपर तरजीह देता रहा है. अब, लेकिन मालदीव को चीन को प्राथमिकता दे रहा है.”

7. विवाद के बीच ईज़माईट्रिप ने मालदीव के लिए सभी फ्लाइट बुकिंग पर रोक लगा दी है.  ईज़माईट्रिप के सीईओ निशांत पिट्टी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, “लक्षद्वीप का पानी और बीच (समुद्र तट) मालद्वीव/सेशल्स जैसे ही अच्छे हैं. हम ईज़माईट्रिप पर इस बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल को बढ़ावा देने के लिए खास पेशकश लेकर आएंगे जहां हमारे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हाल में गए थे.”

8. टूर ऑपरेटरों के संगठन इंडियन एसोसिएशन ऑफ टूर ऑपरेटर्स (आईएटीओ) ने कहा कि मालदीव की यात्रा के लिए कोई नई पूछताछ की नहीं जा रही. आईएटीओ के अध्यक्ष राजीव मेहरा ने कहा, ”भारतीय पर्यटकों की ओर से मालदीव के लिए कोई नई पूछताछ नहीं आ रही है.”

9. मालदीव की यात्रा करने वालों में पूरी दुनिया में भारत के लोग सबसे ज्यादा है. मालदीव के पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक, 2023 में 2.03 लाख से अधिक भारतीयों ने मालदीव की यात्रा की.

10. पीएम मोदी लक्षद्वीप कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने के लिए हाल ही में गए थे. इसके बाद उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर फोटो शेयर कर बताया था कि उन्होंने यात्रा के दौरान स्नॉर्कलिंग का लुत्फ उठाया.  उन्होंने लिखा, ‘‘जो लोग रोमांचकारी अनुभव लेना चाहते हैं, लक्षद्वीप उनकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए.’’

BJP: विधानसभा के बाद अब लोकसभा चुनावों की तैयारी में है भाजपा, देशभर में महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज.

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आगामी लोकसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने महिलाओं को जोड़ने का अभियान तेज कर दिया है। भाजपा महिला मोर्चा ने मंगलवार को इस मुद्दे को लेकर मुख्यालय में एक बैठक की। इसमें भाजपा महामंत्री तरुण चुग, केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर और राष्ट्रीय सचिव विजया राहतकर शामिल हुए।

नए सदस्यों को जोड़ने का काम-
गौरतलब है, हाल के विधानसभा चुनावों में पार्टी को महिलाओं का अच्छा-खासा समर्थन मिला था। खासतौर पर मध्य प्रदेश में महिलाओं ने जिस तरह से बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया, उसके नतीजे भी देखने को मिले। यही वजह है कि अब पार्टी लोकसभा चुनाव में देश भर में महिलाओं को जोड़ने के अभियान पर विस्तारपूर्वक रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भाजपा महिला मोर्चा को देशभर में सेल्फ हेल्प ग्रुप के साथ संपर्क करने और अलग-अलग योजनाओं के जरिए नए सदस्यों को जोड़ने का काम दिया गया है।

पीएम भी होंगे शामिल-

 
बैठक में महिलाओं के स्व-सहायता समूहों को सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और कार्यक्रमों से अवगत कराने की रणनीति बनाई जा रही है। इसके बाद भाजपा महिला मोर्चा के एक बड़े कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल होंगे। 


छह जनवरी को हुई बैठक- 
इससे पहले, पार्टी सूत्रों ने शनिवार को बताया था कि छह जनवरी को भाजपा ने अपने सभी पार्टी मोर्चों की बैठक की थी और हाल में किए गए कार्यों की समीक्षा की। भाजपा महासचिव बीएल संतोष की अध्यक्षता में बैठक हुई थी। इस दौरान, वरिष्ठ नेतृत्व ने यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जनता तक पहुंचने का प्रयास किया जाएं। बैठक में सभी भाजपा मोर्चा के अध्यक्ष, मोर्चा प्रभारी, वरिष्ठ पदाधिकारी आदि उपस्थित थे। 

संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा- 
सूत्रों ने बताया था कि संगठन को पहले से अधिक मजबूत बनाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा बैठक में सभी मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों को निर्देश दिया गया था कि वे ज्यादा से ज्यादा सम्मेलन करें और अपनी जाति के लोगों से ज्यादा से ज्यादा संपर्क बनाएं। वहीं, गांवों का दौरा करने, सम्मेलन आयोजित करने, लाभार्थियों से संपर्क करने, सामुदायिक बैठकें आयोजित करने आदि पर चर्चा की गई थी।

Bilkis Bano: बिलकिस बानो मामले में सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों की सजा माफी पर लगाई रोक, राहुल गांधी बोले- न्याय की जीत.

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गुजरात सरकार द्वारा बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की सजा में छूट देने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया हैं। मामले में एक गवाह ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि बानो को वास्तव में आज न्याय मिला है। मैं इस मामले में गवाहों में से एक हूं। इन 11 दोषियों को महाराष्ट्र की एक अदालत ने सजा सुनाई थी। गुजरात सरकार का उन्हें रिहा करने का फैसला गलत था, इसलिए हमने इसे अदालत में चुनौती दी थी। फैसले के बाद दाहोद जिले के देवगढ़ बारिया में बिलकिस बानो के रिश्तेदारों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद खुशी जाहिर करते हुए जमकर आतिशबाजी की हैं।

वास्तव में आज मिला पूर्ण न्याय-अब्दुल रजाक-
देवगढ़ बारिया शहर के रहने वाले मामले के गवाहों में से एक अब्दुल रजाक मंसूरी ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि मुझे खुशी है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने दोषियों को आत्मसमर्पण करने के लिए कहा हैं। मुझे लगता है कि आज हमें न्याय मिला हैं। गौरतलब है कि गोधरा में 2002 में हुए सांप्रदायिक दंगों के दौरान बिलकिस बानो 21 साल की थीं औ पांच माह की गर्भवती भी थी। उस दौरान आरोपियों द्वारा उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। इस दौरान आरोपियों ने उनकी तीन साल की बेटी और परिवार के सात लोगों की हत्या कर दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पलटा गुजरात सरकार का फैसला-दरअसल, गुजरात सरकार ने 11 दोषियों को सजा में छूट देकर 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सजा में दी गई छूट को सोमवार को रद्द कर दिया और दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि गुजरात सरकार को छूट का आदेश पारित करने का अधिकार नहीं था।

राहुल गांधी बोले- फैसले ने बताया कौन देता है अपराधियों को पनाह-

इसी बीच, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने एक बार फिर दिखा दिया कि अपराधियों को पनाह कौन देता हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखते हुए राहुल गांधी ने कहा कि बिलकिस बानो का अथक संघर्ष अहंकारी भाजपा सरकार के खिलाफ न्याय की जीत का प्रतीक है। चुनावी लाभ के लिए न्याय की हत्या करने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए खतरनाक हैं।

Old Pension: पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर केंद्र और राज्य के कर्मचारियों ने देशभर में शुरू की रिले हंगर स्ट्राइक.

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केंद्र एवं राज्य सरकारों के कर्मचारी संगठन, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की तैयारी कर रहे हैं। इससे पहले सरकार को चेताने के लिए देशभर के सरकारी कर्मचारियों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ शुरू की है। ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिव गोपाल मिश्रा सहित कई एसोसिएशनों के पदाधिकारियों ने सोमवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर रिले हंगर स्ट्राइक में हिस्सा लिया। एआईपीईएफ और कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एंप्लाइज एंड वर्कर्स सहित विभिन्न फेडरेशन और एसोसिएशन इस हंगर स्ट्राइक में भाग ले रही हैं।

इन विभागों में हुआ था स्ट्राइक बैलेट-

सरकारी कर्मचारी, पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर विभिन्न चरणों में आंदोलन कर रहे हैं। इसी के तहत रामलीला मैदान में रैली और धरने प्रदर्शन हुए हैं। कर्मचारियों ने सरकार को चेताया है कि इस मुद्दे पर देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल हो सकती है। इस हड़ताल के लिए देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अपनी सहमति दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि जनवरी में हड़ताल की तिथि की घोषणा की जाएगी। इससे पहले देशभर के सरकार कर्मचारी, ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ पर बैठेंगे। यह स्ट्राइक सरकार को चेताने के लिए है।

जल्द शुरू हो सकती है अनिश्चितकालीन हड़ताल-

एनजेसीए के पदाधिकारियों का कहना है, सरकारी कार्यालयों और प्रतिष्ठानों में बहुत जल्द अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू हो सकती है। इस हड़ताल की स्थिति में रेल थम जाएंगी और रक्षा क्षेत्र के उद्योगों में कामकाज बंद हो जाएगा। इसके चलते केंद्र में ही नहीं, बल्कि विभिन्न राज्यों में भी सरकारी कामकाज प्रभावित होगा। केंद्र और राज्य सरकार के विभागों, संगठनों एवं प्रतिष्ठानों के सामने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक हो रही ‘रिले हंगर स्ट्राइक’, अनिश्चितकालीन हड़ताल का ही पहला चरण है। विभिन्न कर्मचारी संगठन, भूखे रह कर सरकार से ‘पुरानी पेंशन बहाली’ की मांग करेंगे। रिले हंगर स्ट्राइक में एक निर्धारित अवधि के बाद कर्मियों की दूसरी टोली, भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचेगी। कर्मचारी संगठनों की एक ही मांग है, गारंटीकृत पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली। केंद्र सरकार ने इस बाबत एक कमेटी का गठन किया है। हालांकि उसमें ओपीएस का कहीं भी जिक्र नहीं है। कमेटी, केवल एनपीएस में सुधार को लेकर अपनी रिपोर्ट देगी। पिछले संसद सत्र में लोकसभा सदस्य नव कुमार सरनीया, दीपक बैज और कृपाल बालाजी तुमाने द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया था कि ओपीएस बहाली को लेकर केंद्र सरकार के विचाराधीन कोई प्रस्ताव नहीं है।

गारंटी कृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी होगी-

शिव गोपाल मिश्रा के मुताबिक, ओपीएस पर केंद्र और सरकार के कर्मचारी लगातार अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने रामलीला मैदान में रैलियां की हैं। सरकार के समक्ष कई प्लेटफॉर्म के माध्यम से ओपीएस की मांग उठाई गई है। हमने सरकार को स्पष्ट तौर पर बता दिया है कि कर्मचारियों को ओपीएस के अलावा कुछ भी मंजूर नहीं है। सरकार को एनपीएस खत्म करना होगा और गारंटीकृत पुरानी पेंशन योजना बहाल करनी पड़ेगी। ओपीएस एक गैर राजनीतिक मुद्दा है। केंद्र या राज्यों में सरकार चाहे जिस भी दल की हो, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। ज्वाइंट फोरम में केंद्रीय संगठनों के अलावा राज्यों के भी 36 संगठन भी शामिल हैं।

चुनाव में बड़े उलटफेर का दावा-

ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के राष्ट्रीय संयोजक एवं स्टाफ साइड की राष्ट्रीय परिषद ‘जेसीएम’ के सचिव शिवगोपाल मिश्रा के मुताबिक, लोकसभा चुनाव से पहले पुरानी पेंशन लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है।

पीएफआरडीए में संशोधन के बिना ओपीएस संभव नहीं-

कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के महासचिव एसबी यादव ने कहा, केंद्र सरकार को पुरानी पेंशन योजना लागू करनी होगी। एनपीएस का पैसा, ‘पेंशन फंड एंड रेगुलेटरी अथारिटी’ (पीएफआरडीए) के पास जमा है। नई पेंशन योजना ‘एनपीएस’ के अंतर्गत केंद्रीय मद में जमा यह पैसा राज्यों को नहीं दिया जा सकता। वह पैसा केवल उन कर्मचारियों के पास जाएगा, जो इसका योगदान कर रहे हैं। ओपीएस लागू करने से पहले पीएफआरडीए में संशोधन करना पड़ेगा। कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने सरकार के समक्ष बड़े स्तर पर यह मांग उठाई है। इस बाबत नवंबर में रामलीला मैदान में कन्फेडरेशन ने एक विशाल रैली भी आयोजित की थी।

18 साल बाद रिटायर हुए कर्मी को मिली इतनी पेंशन-

शिव गोपाल मिश्रा का कहना है कि एनपीएस में कर्मियों जो पेंशन मिल रही है, उतनी तो बुढ़ापा पेंशन ही है। एनपीएस स्कीम में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते। एनपीएस में कर्मियों द्वारा हर माह अपने वेतन का दस फीसदी शेयर डालने के बाद भी उन्हें रिटायरमेंट पर मामूली सी पेंशन मिलती है।

Coronavirus Alert: देशभर में 24 घंटे में आए कोरोना के 761 नए मामले, 12 लोगों की हुई मौत.

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सक्रिय मामलों की संख्या में केरल पहले स्थान पर है। केरल में मौजूदा समय में 1,249 सक्रिय मामले है, वहीं कर्नाटक में 1,240, महाराष्ट्र में 914, तमिलनाडु में 190, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में 128 सक्रिय मामले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार भारत में शुक्रवार को कोविड-19 के 761 मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों के मुताबिक 12 नए मौत के मामले भी दर्ज किए गए हैं। शुक्रवार की सुबह आठ बजे के आंकड़ों के अनुसार देशभर में सक्रिय कोविड-19 मामले 4,423 से घटकर 4,334 हो गई है। 

सक्रिय मामलों की संख्या में केरल पहले स्थान पर है। केरल में मौजूदा समय में 1,249 सक्रिय मामले है, वहीं कर्नाटक में 1,240, महाराष्ट्र में 914, तमिलनाडु में 190, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश में 128 सक्रिय मामले हैं। मरने वाले 12 लोगों में पांच केरल से हैं। वहीं कर्नाटक में चार, महाराष्ट्र में दो और उत्तर प्रदेश में एक की मौत हो चुकी है। पांच दिसंबर तक दैनिक मामलों की संख्या दो अंकों में थी, लेकिन ठंड बढ़ने के बाद मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। 
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय रिकवरी दर 98.81 फीसदी पर पहुंच गई है। वेबसाइट के अनुसार देशभर में अब तक 220.67 करोड़ कोविड-19 की खुराक दी जा चुकी है। 

Arvind Kejriwal: दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल की गिरफ्तारी की आशंका, क्या अयोध्या के जश्न में बनेगा ऐसा संयोग.

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एक तरफ तो राम मंदिर को लेकर लोगों के बीच उत्साह का माहौल देखने को मिल रहा है तो वहीं दूसरी ओर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर लगातार संशय बढ़ता जा रहा है दिल्ली की नई शराब नीति के कथित घोटाले में दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी को लेकर संशय बढ़ता जा रहा है। भाजपा से जुड़े नेताओं और जांच एजेंसी के सूत्रों की मानें, तो अयोध्या में राम के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है।

वजह, उस वक्त दिल्ली सहित देश के दूसरे क्षेत्रों में राम मंदिर को लेकर उत्साह का माहौल रहेगा। खासतौर पर उत्तर भारत में भाजपा, इस कार्यक्रम को सियासत में फायदे के तौर पर देख रही है। यही वजह है कि भाजपा ने प्राण प्रतिष्ठा समारोह को देश विदेश तक पहुंचा दिया है। इसी दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल गिरफ्तार किए जा सकते हैं।

ED ने दिल्ली सीएम केजरीवाल को अब तक भेजे 3 समन- 

सूत्रों का कहना है कि राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान केजरीवाल की गिरफ्तारी संभव है। अभी तक केजरीवाल को ईडी ने तीन समन भेजे हैं। केजरीवाल, किसी भी समन पर जांच एजेंसी के समक्ष प्रस्तुत नहीं हुए हैं। अब ऐसी संभावना जताई जा रही है कि जांच एजेंसी, किसी भी वक्त केजरीवाल को गिरफ्तार कर सकती है। अगर अब केजरीवाल की गिरफ्तारी होती है, तो आम आदमी पार्टी, इसका बड़ा पॉलिटिकल माइलेज ले सकती है। खासतौर पर, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब व उत्तर प्रदेश में आप का बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है। इससे राम मंदिर का प्राण प्रतिष्ठा समारोह प्रभावित हो सकता है। राजनीतिक प्रदर्शन से रोड जाम जैसी स्थिति के पैदा होने के आसार हैं। ट्रेनों की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ भाजपा, देश एवं विदेश से लोगों को अयोध्या लाने की तैयारी कर रही है। ऐसे में केजरीवाल की गिरफ्तारी 22 जनवरी के आसपास संभव है।

गुरुवार को दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा, देश में खुलेआम गुंडागर्दी चल रही है। किसी को भी पकड़कर जेल डाल दो। बतौर केजरीवाल, मेरी सबसे बड़ी ताकत ईमानदारी है। ये झूठे केस लगाकर मेरी ईमानदारी पर चोट करना चाहते हैं। मेरे वकील ने बताया कि ये सभी समन गैरकानूनी हैं, ये गैरकानूनी क्यों हैं, इनका जवाब मैंने ईडी को दिया है। अगर ये सही समन भेजते हैं, तो मैं जांच में सहयोग करूंगा। पहले भी सीबीआई जांच में सहयोग दिया है। भाजपा का मकसद सही जांच करना नहीं है। इसके पीछे मुझे, लोकसभा चुनाव में प्रचार करने से रोकना है। अरविंद केजरीवाल लोकसभा चुनाव के मद्देनजर 6, 7 व 8 जनवरी को गुजरात दौरे पर रहेंगे। वे आप कार्यकर्ता सम्मलेन और जनसभा को संबोधित करेंगे। जेल में बंद आप विधायक चैतर बसावा से भी केजरीवाल से मिलने का कार्यक्रम है।

क्या कहा अरविंद केजरीवाल ने ? 
केजरीवाल ने कहा, ईडी के समन गैरकानूनी हैं। जो भी नेता भाजपा में शामिल नहीं होता, उसे ये लोग ‘भाजपा’ जेल में भेज देते हैं। मनीष सिसोदिया और संजय सिंह को भी इन्होंने इसलिए जेल में डाला है। अगर वे  भाजपा से हाथ मिला लेते, तो जेल से बाहर होते। जो भी व्यक्ति इनसे हाथ मिला लेता है, वह ईमानदार हो जाता है। देश में बहुत खतरनाक खेल चल रहा है। मेरे खून का हर कतरा देश के लिए है। अरविंद केजरीवाल ने कहा, आप लोग दो साल से शराब घोटाले का नाम सुन रहे हैं। जांच एजेंसियों को इस घोटाले में एक भी पैसा नहीं मिला है। वजह, ऐसा कोई घोटाला

Uttarakhand: गाड़ी का VIP नंबर लेने का बढ़ा क्रेज, जानिए कितने लाख में बिके ये नंबर 0001; 0009.

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वाहन की नंबर प्लेट यूनिक और फैंसी दिखाने के लिए हल्द्वानी के वाहन मालिक लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। दिसंबर महीने में 0001 नंबर लेने के लिए एक वाहन मालिक ने 3.38 लाख रुपये खर्च किए हैं। वहीं दो अन्य वाहन मालिकों ने पसंदीदा नंबर लेने के लिए एक लाख रुपये से अधिक खर्च किए हैं जबकि करीब 30 वाहन चालकों ने भी नीलामी से अपना पसंदीदा नंबर चुना है।

 

परिवहन विभाग के अंतर्गत आने वाले हल्द्वानी और रुद्रपुर में फैंसी नंबर लेने के मामले में नैनीताल जिले के वाहन मालिक नीलामी में जमकर रुपया लगा रहे हैं। दिसंबर में नैनीताल जिले में 26 वाहन मालिकों ने नीलामी से अपना पसंदीदा नंबर लिया है जबकि रुद्रपुर में 9 वाहन मालिकों ने फैंसी नंबर लिए हैं। 

दरअसल परिवहन विभाग महीने में दो बार 15 और 30 तारीख को फैंसी नंबरों की नीलामी करता है जिसके लिए शुरुआती 6 दिन नंबर के लिए आवेदन करने का समय दिया जाता है। इसके बाद नीलामी की जाती है। नीलामी में 0001 और 0786 नंबर का बेस प्राइस सबसे अधिक एक लाख रुपये तय है। हल्द्वानी में सबसे अधिक बोली 0001 नंबर के लिए 3.38 लाख रुपये के लिए लगी है जबकि 0009 नंबर 1.62 लाख रुपये और 1111 नंबर 1.05 लाख रुपये में बिका है। 
0007 नंबर के लिए वाहन मालिक ने 60 हजार रुपये खर्च किए हैं जबकि 32 हजार रुपये में एक, 26 हजार में चार, 25 हजार रुपये में 8 नंबर नीलाम हुए हैं। वहीं दूसरी ओर रुद्रपुर में सबसे महंगा नंबर 30 हजार रुपये में नीलाम हुआ है।

Uttarakhand: अब सड़क मार्ग से जुड़ेंगे हर छोटे-छोटे गांव, 250 से कम आबादी वाली बसावटों में पहुंचेगी गाड़ी.

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आने वाले दिनों में प्रदेश के ऐसे छोटे-छोटे गांव, जिनकी आबादी 250 से कम है, भी सड़क मार्ग से जुड़ सकेंगे। इसके लिए धामी सरकार की ओर से मुख्यमंत्री ग्राम संपर्क योजना शुरू की गई है। शासन सचिव ग्राम्य विकास विभाग राधिका झा की ओर से इसका शासनादेश जारी किया गया है।

प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली आबादी, जो पीएमजीएसवाई या किसी अन्य योजना में नहीं आने के कारण सड़क मार्ग से वंचित थी, उसके लिए सरकार यह योजना लेकर आई है। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, पर्यटन, आर्थिकी और सामाजिक सेवाओं को बढ़ावा देने के लिए योजना की शुरुआत की गई है।

योजना के तहत प्रत्येक जिले में सड़कों की वंचित गांवों, बसावटों के चयन के लिए जिलास्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। समिति वरियता के आधार पर गांवों का चयन करेगी। समिति में जिले के प्रभारी मंत्री अध्यक्ष, जिलाधिकारी सचिव, मुख्य विकास अधिकारी, अधिशासी अभियंता लोनिवि, अधिशासी अभियंता पीएमजीएसवाई सदस्य होंगे। इसके अलावा अधिशासी अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग संयोजक की भूमिका निभाएंगे। 
समिति की ओर से चयनित सड़कों का ब्योरा शासन को भेजा जाएगा। इसके बाद उपलब्ध बजट के अनुसार, सड़कों के निर्माण की डीपीआर बनाई जाएगी। योजना के तहत प्रथम चरण में प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति दी जाएगी। जबकि द्वितीय चरण में अधिक से अधिक कार्यों का वित्त पोषण नाबार्ड के तहत किया जाएगा। योजना के तहत सड़क बनाने वाले ठेकेदार अगले पांच वर्षों तक सड़कों का रखरखाव भी करेंगे।

जी20 सम्मेलन के दौरान हर 60 सेकेंड में हुए 16 लाख साइबर अटैक, देश में 1 दिन में रोजाना मिल रही हजारों कॉल

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देश में साइबर अपराधियों के हौंसले बुलंद हैं। वे रोजाना ही साइबर अटैक की कोई न कोई तकनीक इस्तेमाल करते रहते हैं। साइबर हमलों का शिकार केवल आम आदमी ही नहीं, बल्कि सरकारें और विभिन्न वित्तीय संस्थान भी बनते हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय में साइबर क्राइम से निपटने के लिए स्थापित किए गए ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) के सीईओ राजेश कुमार ने बुधवार को यह खुलासा किया है। 

सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि देश में रोजाना साइबर अपराध के चलते 50000 कॉल मिल रही हैं। एक लाख लोगों पर 129 शिकायतें दर्ज हो रही हैं। कुमार ने बताया, अगर एक घंटे के भीतर साइबर अपराध से जुड़ी शिकायत मिलती है तो पैसे के नुकसान से बचाव हो सकता है। साल 2023 में सेक्सटॉर्शन फ्रॉड के 19000 केस सामने आए हैं।

जानिए क्या कहा सीईओ ने – 
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ (आई4सी) के सीईओ राजेश कुमार ने बताया कि जी20 शिखर सम्मेलन के दौरान हर 60 सेकेंड में 16 लाख साइबर अटैक हुए थे। केंद्रीय एजेंसियों ने अपनी त्वरित कार्रवाई के जरिए साइबर अपराधियों को उनके मंसूबों में कामयाब नहीं होने दिया। अभी तक साइबर क्राइम को लेकर 46229 डिवाइस भी ब्लॉक किए गए हैं। पहले सिम कार्ड, वेबसाइट या ऐप को ही ब्लॉक किया जाता था।  

इस साल ‘भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र’ के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह रहेगी कि आई4सी के साथ देश के सभी सरकारी और गैर सरकारी बैंक जुड़ जाएंगे। इससे साइबर अपराध से निपटने में बड़ी मदद मिलेगी। केंद्रीय एजेंसियों और बैंकों के बीच समन्वय पुख्ता हो जाएगा। इसके माध्यम से समय रहते साइबर अपराध की घटना को काउंटर किया जा सकेगा।

मौजूदा समय में कुछ ही बैंक आई4सी के साथ जुड़े हैं। क्रिप्टों करेंसी के मामले में केंद्रीय गृह मंत्रालय की टीम विभिन्न राज्यों में जाकर, विभिन्न एजेंसियों को ट्रेनिंग दे रही है। साइबर अपराध के जरिए जो वित्तीय चपत लगती है, उसकी त्वरित भरपाई के लिए एक ठोस मेकेनिज्म पर काम हो रहा है। गुजरात में लोक अदालत और कर्नाटक में कोर्ट द्वारा इस दिशा में सराहनीय कार्य किया जा रहा है। अभी वित्तीय फ्रॉड के मामले में बैंक से जब नुकसान की भरपाई की मांग की जाती है या संबंधित पीड़ित की राशि वापस देने की बात होती है तो बैंक द्वारा अदालत का आदेश मांगा जाता है।  

इस प्रक्रिया में ज्यादा समय लगता है। इससे पीड़ित व्यक्ति की परेशानी बढ़ जाती है। इस समस्या का हल करने की दिशा में आई4सी द्वारा विशेष प्लानिंग की जा रही है। यह प्रक्रिया अंतिम चरण में है। कानूनी सलाह ली जा रही है। उम्मीद है कि कुछ माह के बाद नई व्यवस्था अमल में आ जाएगी। इसके बाद पीड़ित को अपनी राशि के लिए बैंकों के यहां चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे।  

साइबर को अंजाम देने में विदेशी लोगों का भी हाथ- 

राजेश कुमार के मुताबिक, साइबर अपराध की घटनाओं को अंजाम देने में विदेशी लोगों का भी बड़ा हाथ है। चीन व कंबोडिया सहित कई देशों में बैठे साइबर अपराधी, ऐसी घटनाओं के लिए जिम्मेदार होते हैं। साइबर अपराध की कुल घटनाओं में 40 से 50 प्रतिशत मामलों को विदेशों में बैठे गैंग अंजाम दे रहे हैं। इसके लिए संबंधित देशों की सरकारों के साथ बातचीत होती है। साइबर अपराध के चलते जो राशि ब्लॉक की गई है, वह 1127 करोड़ रुपये है। इसमें से लगभग 10 प्रतिशत रिक्वरी हुई है। बतौर राजेश कुमार, रिक्वरी का यह प्रतिशत लगातार बढ़ रहा है। देश में हर व्यक्ति को साइबर अपराध की शिकायत के लिए ‘1930’ हेल्पलाइन नंबर याद रखना चाहिए। इस नंबर के जरिए रोजाना 50000 कॉल दर्ज हो रही है। यानी इतनी बड़ी संख्या में लोग इस हेल्पलाइन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

साइबर अपराध के चलते 295461 सिम कार्ड ब्लॉक किए गए हैं। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) के तहत 2810 वेबसाइट ब्लॉक हुई हैं। 46229 आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए गए हैं। एनसीआरपी पर साइबर अपराध की शिकायतें लगातार बढ़ रही हैं। 2019 में 26049 शिकायतें मिली थीं। 2020 में 257777, 2021 में 452414, 2022 में 966790 और 2023 में 1556176 शिकायतें दर्ज हुई हैं। साल 2022 के मुकाबले 2023 में शिकायतों का ग्राफ 60.9 प्रतिशत बढ़ा है।

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हिट एंड रन कानून को लेकर देशभर के ट्रक ड्राइवरों की चल रही हड़ताल समाप्त हो गई। कानून में बदलाव पर विचार करने के साथ ही हड़ताल वापसी का फैसला लिया गया। हालांकि ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन और ड्राइवर संगठन ने हड़ताल तो वापस ले ली, लेकिन सरकार की अगली नीति का वह इंतजार कर रहे हैं। एसोसिएशन से जुड़े लोगों का मानना है कि केंद्र सरकार ने यह फैसला आने वाले लोकसभा चुनाव और राम मंदिर के शुभारंभ में कोई खलल न पड़े, इसलिए लिया है। फिलहाल संगठन का कहना है कि उन्होंने केंद्र सरकार के भरोसे पर ही हड़ताल वापसी की है।

36 घंटे तक चली देश के ट्रक, बस और अन्य वाहन चालकों की हड़ताल ने आम जनता को परेशान कर दिया। इस हड़ताल से न केवल दवाओं से लेकर पेट्रोल पंप पर ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई, वहीं सड़कों पर जाम से भी लोग बेहाल हो गए। ट्रक्स एंड गुड्स संगठन के पंकज शुक्ल कहते हैं कि वह सरकार के फैसले का स्वागत करते हैं। लेकिन उनका कहना है कि जब तक इस कानून में बदलाव नहीं होगा, तब तक उनका संगठन और उनके ड्राइवर इसे महज एक आश्वासन ही मानेंगे। पंकज कहते हैं कि संभव है कि केंद्र सरकार ने आने वाले लोकसभा चुनावों और 22 जनवरी को होने वाले राम मंदिर के भव्य शुभारंभ के चलते ही इस तरह का फैसला लिया हो। लेकिन ड्राइवरों और संगठन की हड़ताल का बड़ा असर हुआ है। केंद्र सरकार ने इस मामले में अपने पाँव पीछे खींचे हैं और कानून में बदलाव का भरोसा देकर उनके संगठन को अगली प्रक्रिया में शामिल करने की बात भी कही है।

ऑल इंडिया ड्राइवर संगठन के बिहार चैप्टर से जुड़े सोनू यादव का कहना है कि उनकी मांग यही है कि जुर्माना और सजा में कटौती हो। सोनू कहते हैं कि उनके संगठन के नेताओं ने केंद्र सरकार के साथ बैठक के बाद हड़ताल वापसी का फैसला लिया है। इस निर्देश पर देशभर के ड्राइवर ने काम भी शुरू कर दिया। सोनू मानते हैं कि सरकार ने आने वाले लोकसभा चुनाव और राम मंदिर के भव्य उद्घाटन में खलल ना पड़ने के चलते ही संभवत उनकी बात मानी है। ऑल इंडिया ड्राइवर संगठन के मुताबिक केंद्र सरकार ने जिस किसी भी वजह से उनके संगठन से बात कर कानून में बदलाव का भरोसा दिलाया है, वह सबसे महत्वपूर्ण है। फिलहाल अब इंतजार उस दिन का है, जिस दिन यह कानून बदल जाएगा।
दरअसल एक जनवरी से शुरू हुई ट्रक ड्राइवरों की हड़ताल से देश में लोगों के सामने परेशानियां खड़ी कर दी थीं। सबसे ज्यादा दिक्कत राजमार्गों पर ट्रक ड्राइवरों के जाम से लोगों को होनी शुरू हुई। उसके बाद रोजमर्रा के जरूरतों के सामान की आपूर्ति भी बाधित होनी शुरू हो गई थी। दवाओं से लेकर फलों, सब्जियों, पेट्रोल-डीजल, सीएनजी जैसी जरूरत की चीजें लोगों को नहीं मिल रही थीं। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश में जरूरत की चीजों की आपूर्ति धीमी होने लगी थी। हालात यह हो गए थे कि हड़ताल के नाम पर इन राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों में अचानक जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ने लगे। ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के पदाधिकारी नवीन अग्रवाल का कहना है कि सरकार को हड़ताल की गंभीरता का अंदाजा था। यही वजह रही कि गृह मंत्रालय के साथ उनके संगठन की सकारात्मक बातचीत शुरू हुई। संगठन से जुड़े पंकज शुक्ल कहते हैं कि उनकी ओर से सभी ड्राइवर संगठनों को हड़ताल वापसी के लिए कहा गया है। सभी लोग बीती रात से ही काम पर वापस लौट आए हैं।
ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस के मुताबिक केंद्र सरकार ने जो उनको आश्वासन दिया है, वह इस आधार पर हड़ताल वापस कर रहे हैं। लेकिन उनका कहना है कि अगर इस नए कानून को लागू करने में हिट एंड रन एक्ट में बदलाव नहीं हुआ, तो यह हड़ताल आगे भी हो सकती है। ट्रक ड्राइवर एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रभाकर मौर्य कहते हैं कि उनकी ओर से ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट कांग्रेस को यह सुझाव भी दिया गया कि बातचीत के दौरान उनके कुछ पहलू भी सामने रखे जाएं। वह कहते हैं कि जो प्रावधान सरकार ने हिट एंड रन कानून के लिए रखा है, अगर वह शराब पीकर वाहन चलाने वालों के लिए भी कर दें, तो एक आम सहमति बन सकती है। प्रभाकर कहते हैं कि शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कड़े नियम लागू किए जाने चाहिए।