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Parliament Security Breach: लोकसभा की सुरक्षा में बड़ी चूक! विजिटर गैलरी से चैंबर में कूदे 2 लोग, बेंच पर चढ़ कर छिड़की गैस.

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Parliament Security Breach: संसद भवन की सुरक्षा में उस वक्त बड़ी चूक देखने को मिली है, एक ओर जहां 2 युवकों ने लोकसभा के अंदर सांसदों के बीच में विजिटर गैलरी से उस वक्त छलांग लगा दी जब सदन की कार्यवाही जारी थी। जब सुरक्षा घेरा तोड़कर लोकसभा में विजिटर गैलरी से 2 संदिग्ध कूद पड़े. बुधवार को संसद की कार्यवाही के दौरान 2 शख्स सुरक्षा घेरा तोड़कर जैसे ही लोकसभा में घुसे और बेंच पर चढ़कर कूदने लगे, तभी हड़कंप मच गया. आनन-फानन में सुरक्षाकर्मी दौड़े और दोनों आरोपियों को पकड़ लिया गया. संसद की सुरक्षा में चूक का मामला ऐसे वक्त में आया है, जब आज ही के दिन यानी 13 दिसंबर को संसद भवन पर आतंकी हमला हुआ था और 9 जवान शहीद हुए थे. बताया जा रहा है कि लोकसभा में घुसने के दौरान आरोपी शख्स ने स्प्रे भी किया है. उनके हाथ में टियर गैस कनस्तर  भी था. 


दरअसल, संसद में चल रहे शीतकालीन सत्र की कार्यवाही के दौरान बुधवार को विजिटर गैलरी से अचानक 2 युवक कूद गए और लोकसभा में सांसदों तक पहुंच गए. इतना ही नहीं, स्पीकर की ओर बेंच पर चढ़कर दौड़ने लगे. इसके चलते सदन में अफरा-तफरी मच गई. हालांकि, समय रहते सुरक्षाकर्मियों ने दोनों आरोपियों को पकड़ लिया. बताया जा रहा है कि इस दौरान युवकों ने स्प्रे का भी इस्तेमाल किया और युवकों ने नारेबाजी भी की. हालांकि, इस घटना के बाद लोकसभा की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया.

इस घटना ने एक बार फिर से 22 साल पुराने आतंकी घटना की याद ताजा कर दी है, जब पाकिस्तान के आतंकवादी संगठनों लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों ने 13 दिसंबर, 2001 को भारतीय संसद परिसर पर हमला किया था और गोलियों की तड़तड़ाहट से देश सहम उठा था. इस आतंकी हमले में दिल्ली पुलिस के कई जवान समेत नौ लोग शहीद हुए थे. हालांकि, सुरक्षाबलों ने पांचों आतंकवादियों को मार गिराया था.

बता दें कि कुछ दिन पहले खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू ने एक वीडियो जारी कर अपने खिलाफ एक असफल हत्या की साजिश के जवाब में 13 दिसंबर को नए संसद भवन पर हमला करने की धमकी दी थी. संसद में प्रवेश द्वार पर तीन स्तरीय सुरक्षा जांच की व्यवस्था है, जिसमें मेटल डिटेक्टर और हाथ से पकड़े जाने वाले मेटल डिटेक्टर से जांच शामिल हैं. संसद भवन के प्रवेश द्वार पर भी यही कवायद दोहराई जाती है. विभिन्न आगंतुक दीर्घाओं की ओर जाने वाले गलियारे पर भी सुरक्षा मौजूद है. इन स्थानों पर आगंतुकों को मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति नहीं है.

सामने आई आरोपियों की पहचान-
संसद की सुरक्षा में चूक को लेकर बुधवार को दो मामले सामने आए। एक मामले में सदन के बाहर दो लोगों ने तानाशाही नहीं चलेगी का नारा लगाते हुए प्रदर्शन शुरू किया। इनके प्रदर्शन शुरू करते ही पुलिस के जवानों ने हिरासत में ले लिया। इन दो प्रदर्शनकारियों में एक महिला भी थी। इनकी पहचान नीलम (42) निवासी हिसार के रूप में हुई है। वहीं दूसरे प्रदर्शनकारी की पहचान अनमोल शिंदे (25) निवासी लातूर, महाराष्ट्र के रूप में हुई है।
एजेंसियां कर रहीं पूछताछ-
ये चारों कब और कैसे दिल्ली पहुंचे इस बारे में अलग-अलग एजेंसी इनसे पूछताछ कर रही है। चारों के खिलाफ किन धाराओं में किस थाने में मुकदमा दर्ज किया जाए, इस पर फैसला भी जल्द लिया जाएगा। फिलहाल संसद भवन थाने के बाहर मीडियाकर्मियों का जमावड़ा होने के कारण मुख्य द्वार पर बैरिकेड लगाकर एंट्री बंद कर दी गई. लोकसभा के अंदर कलर क्रैकर लेकर पहुंचे शख्स का नाम सागर शर्मा बताया जा रहा है। हालांकि यह अभी पता नहीं चल सका है कि सागर कहां का रहने वाला है और किस उद्देश्य उसने इस घटना को अंजाम दिया। आशंका है कि चोरों लोग एक ही ग्रुप के हो सकते हैं। 

Rajasthan Politics- भाजपा समर्थकों का फूटा गुस्सा, राजस्थान में बगावत शुरू !

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एमपी  और छत्तीसगढ़ में बीजेपी ने टॉप तीन पदों में से दो OBC, SC या ST को दिए हैं. यह शायद पहला मौका है जब बीजेपी ने अपर कास्ट को ‘साइड’ करने में ज्यादा विचार नहीं किया. क्या ये बीजेपी के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होगा या इससे आने वाले समय में बड़ा नुकसान. ये तो आने वाला वक्त बताएगा लेकिन जिस तरह से राजस्थान के नए सीएम के नाम पर राजस्थान में भजन लाल पर मोहर लगी उसके बाद राजस्थान भाजपा में बगावत के सुर साफ़ दिखाई देने लगे हैं. ये खबर आपको शायद ही किसी भी मेन स्ट्रीम मीडिया ने नहीं दिखाई होगी राजस्थान भाजपा के कार्यकर्ता  भजन लाल की घोषणा के बाद सीधे मोदी को ही 2024 में जवाब देने की खुले कैमरे पर चेतावनी दे रहे हैं.

सबसे पहले बात नए मुख्यमंत्री की,, राजस्थान के नए सीएम बने भजनलाल शर्मा  के राजनीतिक करियर के साथ एक बड़ा दिलचस्प पहलू जुड़ा हुआ है. भजन लाल पहली बार विधायक बने हैं और पहली ही बार में उनकी लाटरी लग गयी है.

क्या आप जानते हैं कि इससे पहले भजन लाल बीजेपी से ही बगावत कर चुनाव लड़ चुके हैं. जी हाँ भजनलाल शर्मा ने अपना पहला चुनाव बीजेपी से बगावत कर भरतपुर की नदबई विधानसभा सीट से लड़ा था. भजनलाल शर्मा ने वो चुनाव सामाजिक न्याय मंच के बैनर तले लड़ा था लेकिन वे हार गए थे. उन्होंने पहला चुनाव 27 वर्ष की उम्र में लड़ा था. साल 2003 में भरतपुर के नदबई से बीजेपी से बगावत कर सामाजिक न्याय मंच पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था. तब भजन लाल शर्मा की जमानत जब्त हो गई थी. भरतपुर की नदबई सीट पर कुल मतदाता 95 हजार 018 थे. इसमें भजनलाल शर्मा को 5 हजार 969 वोट मिले थे. उन्होंने इस सीट से बीजेपी की जितेन्द्र सिंह और कांग्रेस के यशवंत सिंह को चुनौती दी थी. इस बार  भजन लाल शर्मा ने बीजेपी के चुनाव चिन्ह पर जयपुर के सांगानेर से चुनाव लड़ा और जीते. भजनलाल शर्मा राजस्थान के वो शख्स हैं जो पहली बार विधायक बनते ही सीधे सीएम बने हैं.

अब बात राजस्थान में शुरू हुए घमासान की,,,नए मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद राजस्थान में कई दिग्गज नेता नाराज दिखाई दे रहे हैं,,हालाँकि खुल कर कोई भी नहीं बोल रहा है,लेकिन पार्टी कार्यकर्ता खुल कर मोदी के इस फैसले के खिलाफ बोल रहे हैं और 2024 में जवाब देने की चेतावनी भी दे रहे हैं.

किरोड़ी लाल मीणा के  हाव भाव से साफ जाहिर है कि उनको हाईकमान का ये फैसला रास नहीं आया है,,,हालांकि वो कुछ भी ऐसा नहीं बोल रहे जिससे नाराजगी प्रकट हो लेकिन जिस तरह से जवाब दे रहे हैं उससे आप समझ ही सकते हैं कि इस फैसले से मीणा आहत हैं. अब जरा किरोड़ी लाल मीणा के समर्थकों को भी सुन लीजिए जो इस फैसले से बेहद आक्रोशित हैं और सीधे नरेंद्र मोदी को ही चुनौती दे रहे हैं.

तो देखा आपने किस तरह की तस्वीरें राजस्थान से आ रही हैं लेकिन मेन स्ट्रीम मीडिया आपको ये सब नहीं दिखायेगा,, अब जरा सीएम रेस में रहे बाबा बालकनाथ को भी सुन लीजिये कि वो किस तरह मीडिया पर ही अपनी खीज निकाल रहे हैं.

नए सीएम के ऐलान के साथ ही राजस्थान भाजपा की सबसे बड़ी नेता वसुंधरा की तस्वीरें सभी ने देखी ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये सारे नेता भजनलाल शर्मा के साथ कन्धे से कंधा मिलाकर 2024 में जीत दिलाने की भरसक कोशिश करेंगे। सबसे बड़ा सवाल यही कि क्या वसुंधरा, किरोड़ी लाल मीणा या कई अन्य बड़े आलाकमान के इस फैसले से नाराज हैं और अगर ऐसा है तो फिर आने वाले दिनों में राजस्थान की  राजनीति में कई मोड़ देखने को मिल सकते हैं.

राजस्थान में सरकार की तस्वीर साफ, भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए मुख्यमंत्री, दिया और बैरवा बनेंगे डिप्टी सीएम.

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राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया गया है। भजन लाल शर्मा के हाथों में अब राज्य की सत्ता की कमान होगी। भाजपा विधायक दल की बैठक में भजन लाल शर्मा के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लगाई गई। वे सांगानेर विधानसभा सीट से विधायक हैं। इनके नाम का प्रस्ताव पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने रखा। इसके साथ ही पार्टी ने तय किया है कि राजस्थान में दो डिप्टी सीएम भी होंगे। इसके लिए प्रेम चंद बैरवा और दीया कुमारी के नाम पर मुहर लगी है। स्पीकर के लिए वासुदेव देवनानी का नाम फाइनल किया गया है।

इससे पहले पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी। वसुंधरा ने चुनावी नजीतों के बाद पार्टी के कई विधायकों को डिनर पार्टी दी थी, जिसे दबाव की राजनीति के तौर पर देखा गया था। हालांकि, नड्डा से मुलाकात के बाद वसुंधरा के सुर बदले-बदले नजर आए थे और उन्होंने खुद को पार्टी का अनुशासित कार्यकर्ता बताया था।

 

 

विधायक दल की बैठक में चुना गया नेता 
इसके बाद पार्टी ने राज्य के लिए पर्यवेक्षकों की नियुक्ति कर दी थी। उन्हें राज्य में मुख्यमंत्री पद को लेकर जारी सस्पेंस पर विराम लगाने और विधायक दल का नेता चुनने के लिए सभी की सहमति बनाने का जिम्मा सौंपा गया था। इसके बाद मंगलवार को हुई विधायक दल की बैठक में भजन लाल शर्मा को चुना गया। 

विधायक बने सांसदों के इस्तीफे ने बढ़ा दी थी सरगर्मी 
इससे पहले राजस्थान के राजसमंद की सांसद दीया कुमारी, जयपुर के सांसद राज्यवर्धन सिंह राठौड़, राज्यसभा सदस्य किरोड़ी लाल मीणा और अलवर के सांसद बाबा बालक नाथ ने विधानसभा चुनाव जीतने के बाद इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद से अटकलें लगाई जाने लगी थीं कि पार्टी वसुंधरा के अलावा किसी दूसरे चेहरे पर दांव खेल सकती है। 

21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था 
भाजपा ने मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के विधानसभा चुनावों में कुल 21 सांसदों को उम्मीदवार बनाया था। इनमें से 12 ने जीत दर्ज की है। भाजपा ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में सात-सात, छत्तीसगढ़ में चार और तेलंगाना में तीन सांसदों को विधानसभा चुनाव के मैदान में उतारा था। 

मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ में चौंकाया 
इससे पहले भाजपा ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के तौर पर मोहन यादव के नाम पर मुहर लगाकर सभी चौंका दिया था। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट से विधायक हैं। यह भी तय किया गया कि मध्य प्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनके लिए जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला का चुना गया। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला रीवा से विधायक हैं। इसके अलावा स्पीकर पद के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का एलान किया गया था। 

वहीं, छत्तीसगढ़ में भाजपा ने विष्णुदेव साय को मुख्यमंत्री के लिए चुनकर सियासी गलियारे में हलचल मचा दी थी। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि राज्य में दो डिप्टी सीएम होंगे और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह स्पीकर हो सकते हैं।  

25 नवंबर को मतदान, तीन दिसंबर को आए थे नतीजे 
राजस्थान में करणपुर विधानसभा सीट को छोड़कर बाकी सभी 199 सीटों पर 25 नवंबर को चुनाव कराए गए थे।इसके नतीजे 3 दिसंबर को आए। राजस्थान विधानसभा चुनाव के सियासी घमासान में कांग्रेस को पछाड़ कर भाजपा ने 115 सीटें जीतीं। वहीं कांग्रेस को 69 सीटें ही मिल सकीं। इसके अलावा 15 सीटें अन्य के खाते में गईं।

Dhiraj Sahu: कांग्रेस नेता धीरज साहू के घर से भारी नगदी बरामद, करोड़ों कैश के बीच 5 लाख का पैकेट, इंस्पेक्टर तिवारी का नाम. 

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कांग्रेसी नेता और कारोबारी धीरज साहू के घर मिली अकूत संपत्ति इन दिनों सुर्खियों में हैं. आयकर विभाग ने उनके कई ठिकानों पर छापेमारी करके अरबों की नकदी बरामद की है. बताया जा रहा है कि पांच दिन तक चली छापेमारी के दौरान कुल 351 करोड़ रुपए जब्त किए गए है. छापेमारी की कार्रवाई ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड में स्थित साहू ग्रुप की कंपनियों में हुई है. इस दौरान एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी से 300 करोड़ रुपए मिले थे. इन पैसों को 176 बैग में भरकर रखा गया था. यहां से बरामद किए गए पैसों की गिनती के लिए 80 अफसरों की 9 टीमें लगाई गई थीं, जिन्होंने 24 घंटे की शिफ्ट में काम किया है.

जानकारी के मुताबिक, उड़ीसा के बलांगीर के सुदापाड़ा में शराब कंपनी के कार्यालय में एक लोहे के लॉकर को काटकर भारी नकदी बरामद की गई. इसमें एक पैकेट में अलग से पांच लाख रुपए रखे मिले. इस पैकेट के ऊपर ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ लिखा हुआ था. इसको देखकर आयकर अधिकारी भी हैरान रह गए. सबके जेहन में एक ही सवाल कौंध रहा था कि आखिर ये ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ कौन है, जिसके लिए अलग से पैसे रखे हैं. फिलहाल आयकर अधिकारी ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ की सच्चाई पता करने की कोशिश में हैं. आशंका जताई जा रही है कि यह शख्स पुलिस, उत्पाद शुल्क या आबकारी विभाग से जुड़ा कोई इंस्पेक्टर हो सकता है. हो सकता है कि काली कमाई को छिपाने के लिए उसे हर महीने पांच लाख रुपए दिए जाते हों. ‘इंस्पेक्टर तिवारी’ के रहस्य ने इस छापेमारी में नया ट्विस्ट ला दिया है.

ओडिशा से कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य संबलपुर के बड़ा बाजार स्थित मेसर्स बलदेव साहू एंड संस की शराब भट्ठी के दफ्तर से भी नोटों से भरे कई बैग जब्त किए गए. माना जा रहा है कि किसी भी एक मामले में आयकर विभाग की छापेमारी में बरामद यह सबसे बड़ी रकम है.बरामद नकदी में ज्यादातर 500 रुपए के हैं. 100 और 200 रुपए मूल्य के नोटों की भी काफी संख्या है. इससे पहले आयकर विभाग ने उसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी और बलदेव साहू इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के दफ्तरों से 10 से ज्यादा अलमारियों में रखे गए नोटों के बंडल बरामद किए.

कांग्रेस की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होने की वजह से उनके पुश्तैनी मकान को लोहरदगा का ‘व्हाइट हाउस’ भी कहा जाता है. इनके यहां फिल्म स्टार और क्रिकेटर भी आते रहते हैं. रांची से सांसद रहे शिव प्रसाद साहू को इंदिरा गांधी का काफी करीबी माना जाता था. देश के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी लोहरदगा मे इनके घर आ चुके हैं. राजेंद्र बाबू आजादी के पहले और आजादी के बाद उनके घर आए थे. ऐसा कहा जाता है कि साल 1947 में देश की आजादी के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए इनके पिता ने 47 लाख रुपए और 47 किलो सोना दान में दिया था. इनका परिवार मुख्य रुप से शराब के कारोबार से जुड़ा हुआ है.

साहू परिवार राजनीति और व्यापार दोनों में ही सक्रिय भूमिका निभा रहा है. इनका परिवार शुरू से ही कांग्रेस से जुड़ा रहा है. किसी जमाने में चुनाव प्रचार के दौरान देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी भी इनके यहां रुकती थीं. देश के पूर्व राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद भी धीरज साहू के घर आ चुके हैं.धीरज साहू के भाई के जमाने में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के टिकट से लेकर मंत्री पद तक के लिए इस परिवार से सिफारिश कराई जाती थी.चुनावी राजनीति और वित्तीय पोषण में साहू परिवार की अहम भूमिका हमेशा से रही है.

कांग्रेस को एक और बड़ा झटका, 50 विधायक बीजेपी में जाने को तैयार, कुमारस्वामी ने किया सनसनीखेज खुलासा.

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पांच राज्यों में चुनावी नतीजे आने के बाद जिस तरह कांग्रेस के लिए नतीजे निराश करने वाले रहे हैं उससे कहीं न कहीं कांग्रेस में चिंता बनी हुई है,इन नतीजों ने उनके 2024 के मिशन को भी झटका लगा है. लेकिन अब दक्षिण से भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगने की तैयारी है पांच राज्यों से पहले हुए चुनावों में कांग्रेस हिमाचल और कर्नाटक में जीत से काफी उत्साहित थी, लेकिन हाल ही में आये इन  चुनाव नतीजों ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है इन झटकों से कांग्रेस उबर पाती उससे पहले कांग्रेस को एक और बड़ा झटका लगने का दावा किया जा रहा है,,कहा जा रहा है कि जिस कर्नाटक जीत से कांग्रेस में उत्साह था वो कर्नाटक अब उनके हाथ से निकल सकता है क्योंकि यहां के 50 से 60 कांग्रेसी विधायक पार्टी का साथ छोड़ भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं. मतलब जो खेला महाराष्ट्र में हुआ वो अब कर्नाटक में होने जा रहा है.

जनता दल S  के नेता एचडी कुमारस्वामी के रविवार को एक चौंकाने वाला दावा सामने आया है। उनका कहना है कि कर्नाटक में कांग्रेस सरकार कभी भी गिर सकती है। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र द्वारा शुरू की गई कानूनी परेशानियों से बचने के लिए सत्तारूढ़ कांग्रेस के एक प्रभावशाली मंत्री भाजपा में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि मंत्री ‘50 से 60 विधायकों’ के साथ कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए वह भाजपा के नेताओं के साथ बातचीत कर रहे हैं।

जेडीएस नेता ने पत्रकारों से कहा कि कांग्रेस सरकार में सब कुछ ठीक नहीं है। उन्हें नहीं पता कि यह सरकार कब गिर जाएगी। एक मंत्री अपने खिलाफ दर्ज मामलों से बचने के लिए बेताब हैं। कुमारस्वामी ने कहा कि केंद्र ने उनके खिलाफ ऐसे मामले दर्ज किए हैं, जिनसे बच निकलने की कोई संभावना नहीं है। जब पत्रकारों ने नेता का नाम पूछा तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती। केवल प्रभावशाली लोग ही ऐसा कर सकते हैं।

जनता दल एस के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय महाराष्ट्र जैसा कुछ हो सकता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए, कुछ भी हो सकता है।कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे  ने कहा कि चुनाव के बाद कर्नाटक में जेडीएस का कोई अस्तित्व नहीं बचा है। अस्तित्व बचाने के लिए पार्टी संघर्ष कर रही है।जब कुमारस्वामी से नेता का नाम पूछा गया तो उन्होंने कहा कि छोटे नेताओं से ऐसे ‘निर्भीक’ कदम की उम्मीद नहीं की जा सकती उन्होंने कहा कि केवल ‘प्रभावशाली लोग’ ही ऐसा कर सकते हैं. जनता दल एस  के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कर्नाटक में किसी भी समय ‘महाराष्ट्र जैसा कुछ’ हो सकता है. उन्होंने कहा, ‘मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए कुछ भी हो सकता है.’

खरगे ने आगे कहा कि बीआरएस ने भाजपा के साथ गठबंधन किया। एक पार्टी के रूप में बने रहें इसे सुनिश्चित करने के लिए जो कर सकते हैं वह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद कांग्रेस का सफाया होने की बात भूल जाइए। चुनाव से पहले न तो जेडीएस और न ही भाजपा रहेगी।

कुल मिलाकर कर्नाटक में कांग्रेस के साथ खेला हो सकता है अगर कुमार स्वामी का दावा सही है तो फिर 2024 से पहले कांग्रेस को बड़ा झटका लग सकता है और दक्षिण में कमजोर पड़ती भाजपा के लिए ये बड़ा फायदा हो सकता है. कुमारस्वामी के दावे में कितना दम है ये तो आने वाले वक्त में पता चल जायेगा। लेकिन अगर ये दावा सही है तो कांग्रेस के लिए कर्नाटक में बड़ी चुनौती होगी अपने विधायकों को जोड़े रखने की क्योंकि जरा सी चूक और बीजेपी को मौका,, और कांग्रेस जानती है कि इस तरह के मौके बीजेपी को देना कितनी बड़ी भूल साबित हो सकती है.

भजन लाल शर्मा होंगे राजस्थान के नए सीएम, विधायक दल की बैठक में हुआ फैसला

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दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद सांगानेर से विधायक भजनलाल शर्मा का नाम राजस्थान के मुख्यमंत्री के लिए तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था, राजस्थान में नए सीएम को लेकर सस्पेंस अब खत्म हो गया है. सांगानेर सीट से विधायक बने भजनलाल शर्मा ही राजस्थान के नए मुख्यमंत्री होंगे. दिल्ली से आए पर्यवेक्षकों ने विधायक दल की बैठक के बाद भजनलाल शर्मा का नाम तय कर लिया है. भाजपा आलाकमान ने केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह, विनोद तावड़े और सरोज पांडेय को राजस्थान का पर्यवेक्षक बनाया था. आज दोपहर तीनों नेता जयपुर पहुंचे, विधायकों संग बैठक की. आज दोपहर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने वसुंधरा राजे से वन टू वन मीटिंग की थी. उधर, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी राजनाथ सिंह से फोन पर बात की थी.
बताते चलें कि राजस्थान का रण जीतने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही थी कि सीएम किसे चुना जाए. लेकिन सीएम पद की यह रेस अब थम गई है. इस रेस में कई नाम चल रहे थे. इस लिस्ट में सबसे पहला नाम वसुंधरा राजे का चल रहा था. वो पहले भी राजस्थान की कमान संभाल चुकी हैं. इसके अलावा राजस्थान में हिंदुत्व के पोस्टर बॉय बन गए बाबा बालकनाथ के नाम पर भी चर्चा थी वहीं गजेंद्र शेखावत, सीपी जोशी, दीया कुमारी और राजवर्धन राठौड़ जैसे नाम भी रेस में थे.

छात्र राजनीति से शुरुआत,मध्य प्रदेश के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव,मां सीता पर दिया था विवादित बयान,, पढ़ें मोहन की कहानी

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मप्र के नए मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम चौंकाने वाला रहा। इसके साथ ही मध्यप्रदेश का सीएम बनने की दौड़ से सभी नाम बाहर हो गए। अब मप्र की कमान मोहन यादव के हाथ में रहेगी। यानी प्रदेश में अब शिव का राज नहीं मोहन राज होगा। मोहन यादव ने अपने राजनीति सफर की शुरुआत छात्र जीवन से की थी। अब वे प्रदेश के सत्ता के शीर्ष पर विराजमान हो गए हैं।

 

छात्र राजनीति से करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. मोहन यादव को भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। अगले पांच साल के लिए डॉ. मोहन यादव को जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनके अलावा जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला प्रदेश के नए उपमुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभालेंगे। वहीं नरेंद्र सिंह तोमर को एमपी विधानसभा स्पीकर की जिम्मेदारी दी गई है। डॉ. मोहन यादव 2013 और 2018 के बाद 2023 में भी उज्जैन दक्षिण विधानसभा सीट पर चुनाव जीते हैं। डॉ. मोहन यादव का जन्म 25 मार्च 1965 को मध्य प्रदेश के उज्जैन में हुआ था। उनके पिता पूनमचंद यादव और माता लीलाबाई यादव हैं। उनकी पत्नी सीमा यादव हैं।

 

मोहन यादव की शिक्षा और करियर
डॉ. मोहन यादव माधव विज्ञान महाविद्यालय से पढ़ाई की। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उज्जैन के नगर मंत्री रहे हैं। 1982 में छात्र संघ के सह-सचिव चुने गए थे। भाजपा की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य और सिंहस्थ मध्य प्रदेश की केंद्रीय समिति के सदस्य रहे हैं। मध्य प्रदेश विकास प्राधिकरण केप्रमुख, पश्चिम रेलवे बोर्ड में सलाहकार समिति के सदस्य भी रहे हैं।

कांग्रेस के इन आरोपों का कर चुके हैं सामना
उज्जैन के मास्टर प्लान को लेकर कांग्रेस ने गंभीर आरोप लगाए थे। कहा था कि मोहन यादव ने अपने परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए मास्टर प्लान को गलत तरीके से पास कराया है। यादव ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। लोगों ने भी इनआरोपों को गंभीरता से नहीं लिया और मोहन यादव को ही दोबारा विधायक बनाकर भोपाल भेजा है।

इन मामलों में रहे चर्चा में
माता सीता को लेकर एक विवादित बयान भी चर्चा में रहा है। उन्होंने कहा था कि मर्यादा के कारण भगवा राम को सीता को छोड़ना पड़ा था। उन्होंने वन में बच्चों को जन्म दिया। कष्ट झेलकर भी राम की मंगलकामनना करती रहीं। आज के दौर में ये जीवन तलाक के बाद की जिंदगी जैसा है।

Madhya Pradesh CM: मोहन यादव होंगे मध्य प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री; सस्पेंस आखिरकार खत्म.

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मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री की कुर्सी कौन संभालेगा, इसे लेकर कई दिनों से जारी सस्पेंस आज खत्म हो गया। विधायक दल की बैठक में मोहन यादव के नाम पर सहमति बन गई है। मोहन यादव उज्जैन दक्षिण से विधायक हैं। मोहन यादव को संघ का करीबी बताया जाता है। यादव उज्जैन दक्षिण से सीट से 2013, 2018 और 2023 में चुनाव जीत चुके हैं।

जानकारी के मुताबिक शिवराज सिंह चौहान ने ही मोहन यादव के नाम का प्रस्ताव विधायक दल की बैठक में किया था। इस एलान के साथ ही सभी कयासों पर विराम लग गया है। अब सूबे की कमान मोहन यादव के हाथों में होगी। सूत्रों का कहना है कि मोहन यादव का नाम आरएसएस ने ही दिल्ली हाईकमान को प्रस्तावित किया था। इसके बाद इनके नाम पर सहमति बन गई। नाम की घोषणा से बाद सबसे पहले संघ ने ही यादव को बधाई दी। उन्होंने भरे समारोह में फोन उठा कर बधाई स्वीकार भी की।

मध्यप्रदेश में दो उपमुख्यमंत्री भी होंगे। इनमें जगदीश देवड़ा और राजेंद्र शुक्ला शामिल हैं। जगदीश देवड़ा मल्हारगढ़ और राजेंद्र शुक्ला  बिजावर से विधायक हैं। इसके अलावा स्पीकर पद के लिए नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का एलान किया गया है।

यादव का विवादों से भी रहा है नाता-

मोहन यादव शिवराज सिंह चौहान की सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री का पद संभाल चुके हैं। वह साल 2013 में पहली बार विधायक बन कर आए थे। मोहन यादव एबीवीपी और संघ से जुड़े हुए बताए जा रहे हैं। साल 1984 में मोहन यादव छात्र संघ के अध्यक्ष और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के नगर मंत्री चुने गए थे।

मध्यप्रदेश के नए सीएम मोहन यादव का विवादों से काफी पुराना नाता रहा है। साल 2020 में उपचुनाव के समय असंयमित भाषा के प्रयोग के कारण चुनाव आयोग ने उनपर एक दिन के लिए प्रचार करने पर प्रतिबंधित लगा दिया था।

Uttarakhand Investors Summit: डबल इंजन के ‘डबल’ प्रयास हर तरफ दिख रहे, पढ़ें प्रधानमंत्री मोदी के भाषण की ये बातें.

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उत्तराखंड में आज से दो दिवसीय वैश्विक निवेशक सम्मेलन का शुभारंभ हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्मेलन का शुभारंभ किया। सम्मेलन में देश-दुनिया के 5000 से अधिक निवेशक और प्रतिनिधि शामिल हुए हैं। राज्य में विभिन्न सेक्टर में निवेश के लिए अभी तक तीन लाख करोड़ रुपये के एमओयू हो चुके हैं। कई बड़े निवेश के लिए सम्मेलन में करार हो सकते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां आकर मन धन्य हो जाता है। कुछ वर्ष पहले जब मैं बाबा केदार के दर्शन को निकला था तो अचानक मेरे मुंह से निकला था कि 21वीं सदी का ये तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक है। मुझे खुशी है कि उस कथन को मैं लगातार पूरा होते देख रहा हूं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि मेरे तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया की टॉप थ्री इकॉनमी में आकर रहेगा। मोदी ने अगले आम चुनाव को लेकर भी ये इशारा किया।

पढ़ें प्रधानमंत्री के भाषण की बड़ी बातें-

 

  • पीएम मोदी ने कविता से भाषण की शुरुआत की। कहा- जहां अंजुली में गंगाजल हो, जहां हर एक मन बस निश्चल हो, जहां नारी में सच्चा बल हो उस देवभूमि का आशीर्वाद लिए मैं चलता जाता हूं। है भाग्य मेरा सौभाग्य मैं तुमको शीश नवाता हूं।
  • मैं देशवासियों को भरोसा दिलाता हूं कि मेरे तीसरे कार्यकाल में भारत दुनिया के टॉप थ्री इकॉनमी में आकर रहेगा। मोदी ने अगले आम चुनाव को लेकर भी ये इशारा किया।
  • मेक इन इंडिया की तरह वेड इन इंडिया भी चलाया जाए। आप कुछ निवेश करना पाओ या नहीं लेकिन अपने परिवार की एक डेस्टिनेशन वेडिंग अगले पांच साल में उत्तराखंड में करें। अगर पांच साल में पांच हजार डेस्टिनेशन वेडिंग भी उत्तराखंड में हुई तो ये एक नया क्षेत्र खड़ा हो जाएगा। देश के धन्ना सेठ इस बारे में सोचेंगे तो बड़ा बदलाव आएगा।
  • आप सभी बिजनेस की दुनिया के दिग्गज हैं। आप अपने काम का विश्लेषण करते हैं। आप सभी चुनौती का आकलन करके रणनीति बनाते हैं। ऐसा करने से हमें चारों तरफ एस्पिरेशन, होप, सेल्फ कॉन्फिडेंस दिखेगी। देश में पॉलिसी गवर्न सरकार दिखेगी।
  • भारत की मजबूती का फायदा उत्तराखंड समेत देश के हर राज्य को हो रहा है।उत्तराखंड इसलिए भी विशेष है क्योंकि यहां डबल इंजन सरकार है। डबल प्रयास चारों तरफ दिख रहे हैं। राज्य सरकार तेजी से यहां काम हो रहा है।
  • दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे से दूरी 2.5 घंटे की होने जा रही है।
  • ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल लाइन से रेल कनेक्टिविटी आसान होने जा रही है।
  • पहले की सरकारें सीमावर्ती इलाकों को कम से कम पहुंच वाली थी। डबल इंजन ने इस धारणा को बदला। हम सीमावर्ती गांवों को विकसित करने जा रहे हैं।
  • पीएम मोदी ने सरकार को हाउस ऑफ हिमालयाज की बधाई दी। कहा कि यहां के लोकल उत्पादों को विदेशी बाजार में स्थापित करने की पहल है। ये वोकल फ़ॉर लोकल और लोकल फ़ॉर ग्लोबल का कारक बनेगा।
  • विकसित भारत के निर्माण के लिए राष्ट्रीय चरित्र को सशक्त करना होगा। ऐसे काम करने होंगे जिससे हमारे स्टैंडर्ड दुनिया फॉलो करें।
  • विकसित भारत अस्थिरता नहीं बल्कि स्थिरता चाहता है।
  • हमारे देश में मिलेट से लेकर तमाम फूड्स हैं जो पोषक हैं। किसानों की मेहनत बेकार नहीं जानी चाहिए। भारत की कंपनियों के लिए ये अभूतपूर्व समय है। अगले कुछ वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी इकॉनमी बनने जा रहा है।
  • जिसमें दम हो, मैदान में आ जाएं, फायदा उठा लें। मैं गारंटी देता हूं कि जो बातें हम बताते हैं उन्हें पूरा कराने को हम खड़े भी रहते हैं।
  • मेरे जीवन के एक पहलू को बनाने में इस धरती का बड़ा योगदान है। अगर उसे कुछ लौटाने का अवसर मिलता है तो उसका आनंद भी कुछ और होता है।
    आइए इस पवित्र धरती में चल पड़िए। आपके काम में कभी कोई बाधा नहीं आएगी।

3 साल में 13 सरकार,मोदी की इस योजना ने बदला देश का चुनावी गणित !

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वर्ष 2020 में पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही थी। भारत सरकार भी इससे निपटने के लिए देश में लॉकडाउन लागू कर चुकी थी। आफत इस कदर बढ़ी कि गरीबों के सामने पेट भरने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) की शुरुआत की। इस योजना के तहत गरीबों को 5 किलो मुफ्त अनाज दिया जाता है। तीन साल पहले शुरू हुई ये योजना धीरे-धीरे मोदी सरकार का चेहरा बन गई। यही कारण रहा कि इस फ्री अनाज योजना के 8 चरण हो चुके हैं। अब नवें चरण के तहत प्रधानमंत्री ने इसे अगले पांच साल तक बढ़ाने का ऐलान कर दिया है।

केंद्र सरकार के इस फैसले के तमाम सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं। दरअसल जबसे ये योजना शुरू हुई है, तब तक आज यानि दिसंबर, 2023 तक कुल 23 राज्यों में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। इनमें से 13 राज्यों में भाजपा या तो सीधे या गठबंधन के सहयोगियों के दम पर सत्ता में आ चुकी है। इसमें गुजरात, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में सरकार में वापसी भी शामिल है। भाजपा गठबंधन असम, पुद्दुचेरी, गुजरात, गोआ, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय, नगालैंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान में सत्तारूढ़ हो चुका है।

देश में हर साल चुनाव दर चुनाव के बीच कैसे इस योजना को समय-समय पर बढ़ाया गया। इस पर भी नजर डाल लेते हैं। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना की शुरुआत अप्रैल से जून 2020 में हुई। फिर जुलाई से नवंबर 2020 तक के लिए इसे बढ़ाया गया। इसके बाद मई और जून 2021 में इस योजना का तीसरा चरण आया। फिर जुलाई से नवंबर 2021 तक योजना ने चौथा चरण, दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक पांचवा चरण, अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक छठा चरण, अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2022 तक सातवां चरण और जनवरी 2023 से दिसंबर 2023 तक आठवां चरण पूरा किया।

अब योजना को पांच साल तक बढ़ा दिया गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर लिखा, “देश के मेरे परिवारजनों में से कोई भी भूखा नहीं सोए, हमारी सरकार इसके लिए प्रतिबद्ध है। अपनी इसी भावना को ध्यान में रखते हुए हमने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना को अगले पांच वर्षों तक बढ़ा दिया है। यानि मेरे गरीब भाई-बहनों के लिए वर्ष 2028 तक मुफ्त राशन की व्यवस्था निरंतर जारी रहेगी। इसका फायदा करीब 81 करोड़ देशवासियों को मिलेगा। मुझे विश्वास है कि हमारा यह प्रयास उनके जीवन को अधिक से अधिक आसान और बेहतर बनाएगा।’’

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माना जाता है कि 2019 में मोदी सरकार की वापसी में महत्वाकांक्षी उज्जवला योजना का विशेष योगदान रहा। अब धीरे-धीरे फ्री राशन योजना अपना असर दिखाने लगी है। योजना के विस्तार को कहीं न कहीं लोकसभा चुनाव की रणनीति के तौर पर भी देखा जा रहा है। वैसे 2021 से ही चुनाव दर चुनाव बीजेपी को मिल रही सफलता के पीछे इसका विशेष योगदान माना जा रहा है। पिछले तीन सालों में बीजेपी की जीत का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उसने न सिर्फ यूपी, एमपी, गुजरात जैसे बड़े राज्यों में सत्ता बचाई है, बल्कि राजस्थान, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में उसने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया।

यही नहीं पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में जहां भाजपा का जनाधार काफी सिमटा हुआ था, वहां भी पार्टी अब वामदलों और कांग्रेस को पीछे छोड़कर प्रमुख विपक्षी दल बनकर उभरी है। इसी तरह बिहार चुनाव में भी बीजेपी का ग्राफ बढ़ गया।

बिहार में भाजपा का बढ़ा ग्राफ
2020 में बिहार और दिल्ली के विधानसभा चुनाव हुए। बिहार में बीजेपी ने पहले से बेहतर प्रदर्शन करते हुए 74 सीटें हासिल कीं। इस चुनाव में नीतीश कुमार की जदयू 43 सीट लेकर तीसरे पर खिसक गई। वहीं राजद 75 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी। दिल्ली विधानसभा चुनावों में भाजपा को उम्मीद के मुताबिक सफलता तो नहीं मिली। वह सिर्फ 8 सीटें ही जीत सकी।लेकिन इस बार उसने 2015 के मुकाबले अपने वोट प्रतिशत में काफी सुधार कर लिया। कुल 63 सीटें ऐसी रहीं, जहां बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ गया। इनमें 20 सीटों पर तो 10 फीसदी से ज्यादा का वोट शेयर बढ़ा। नजफगढ़ सीट पर तो वोट शेयर में 21.5 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। बहरहाल, दिल्ली में आम आदमी पार्टी 62 सीटें जीतकर एकतरफा विजेता बनी।

तमिलनाडु में पहली बार चार विधायक, पश्चिम बंगाल में प्रमुख विपक्षी दल
वर्ष 2021 में केंद्र ने फ्री अनाज योजना को दो बार बढ़ाया। पहला मई और जून 2021, फिर जुलाई से नवंबर 2021 तक। इसी साल असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में चुनाव हुए। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को बीजेपी चुनौती दे रही थी। हालांकि चुनाव परिणाम आए तो ममता बनर्जी ने आसानी से भाजपा को हरा दिया। लेकिन इस हार के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन चर्चा में रहा। दरअसल बीजेपी ने 2016 के विधानसभा चुनावों में बंगाल में सिर्फ 3 सीटें जीती थीं। उस दौरान उसका वोट प्रतिशत करीब 10 फीसदी था। लेकिन 2021 में ये वोट शेयर सीधे उछलकर 38.1 फीसदी पर पहुंच गया और बीजेपी ने 77 सीटें अपने नाम की। ये प्रदर्शन इसलिए और भी महत्वपूर्ण माना गया क्योंकि अभी तक बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने लेफ्ट और कांग्रेस के दल ही चुनौती देने वाले माने जाते थे। लेकिन बीजेपी ने इन्हें किनारे लगा दिया और प्रमुख विपक्षी दल बनकर उभरी।

असम में दमदार वापसी
असम के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की साख दांव पर लगी थी क्योंकि वह यहां सत्ता बनाए रखने की लड़ाई लड़ रही थी। आखिरकार बीजेपी सत्ता बचाने में कामयाब रही। चुनाव में बीजेपी ने 33.21 वोट शेयर के साथ 60 सीटें जीतीं। उसके सहयोगी दल असम गण परिषद ने 9, यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी ने 6 सीटें अपने नाम कीं। वहीं प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस 29.67 वोट शेयर के बावजूद 29 सीटें ही जीत सकी।

तमिलनाडु में पहली बार खिला कमल
इसी तरह तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भाजपा के 20 में से चार उम्मीदवार विजयी हुए। इस जीत ने पार्टी के 15 साल लंबे इंतजार को खत्म कर दिया। भाजपा की तरफ से राष्ट्रीय महिला शाखा की अध्यक्ष वनाथी श्रीनिवासन, जयललिता के निधन के बाद भाजपा में शामिल हुए अन्नाद्रमुक के पूर्व मंत्री नैनेर नागेंद्रन, सीएस सरस्वती और भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारी एमआर गांधी ने जीत हासिल की।

केरल में साफ मगर बढ़ गया वोट का ग्राफ
केरल विधानसभा चुनाव में भाजपा को एक भी सीट पर जीत नसीब नहीं हुई। लेकिन भाजपा के वोट शेयर में बढ़ोत्तरी दर्ज की गई। 2016 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 10.6 फीसदी वोट हासिल किए, वहीं 2021 में उसने 11.30 फीसदी वोट मिले। 2016 में भाजपा प्रत्याशी 6 विधानसभा सीटों पर दूसरे स्थान पर रहे थे, वहीं 2021 में 9 सीटों पर बीजेपी दूसरे नंबर पर रही।

पुद्दुचेरी में सरकार
इसी तरह पुद्दुचेरी विधानसभा चुनावों में भाजपा ने अपने सहयोगी ऑल इंडिया एनआर कांग्रेस के साथ आसानी से सरकार बना ली। बीजेपी को इस चुनाव में 6 सीटें मिलीं, जबकि एनआर कांग्रेस को 10 सीटें मिलीं। चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस को महज 2 सीटों से संतोष करना पड़ा। बता दें 33 सीटों वाली इस विधानसभा में 30 सीटों पर विधायक चुनाव के जरिए चुनकर आते हैं, वहीं बाकी की 3 सीटों पर केंद्र द्वारा नामित किए जाते हैं। 2016 में केंद्र सरकार ने इसके लिए बीजेपी के सदस्यों को ही नामित किया था।

इसके बाद आया वर्ष 2022, इससे पहले ही मोदी सरकार ने मुफ्त अनाज की स्कीम को दिसंबर 2021 से मार्च 2022 तक बढ़ा दिया था। इस साल दो बार और ये स्कीम बढ़ी, पहले अप्रैल 2022 से सितंबर 2022 तक फिर अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2022 तक। इस साल कुल 7 राज्यों उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, गोआ, मणिपुर और पंजाब के विधानसभा चुनाव हुए।

यूपी चुनाव में तो भाजपा ने सारे रिकॉर्ड ही तोड़ डाले। यहां भाजपा गठबंधन ने 403 में से कुल 274 सीटें जीतीं। योगी आदित्यनाथ 37 साल बाद यूपी में लगातार दूसरी बार बहुमत की सरकार बनाने वाले मुख्यमंत्री बन गए। सीधी लड़ाई में भाजपा को जहां 45 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले, वहीं सपा 36 प्रतिशत वोट हासिल करने के बावजूद काफी पीछे रह गई।

यूपी में बजा मुफ्त अनाज का डंका
इस चुनाव में मुफ्त अनाज स्कीम एक बड़ा मुद्दा बनी और बीजेपी ने पूर्वांचल से लेकर वेस्ट यूपी तक शानदार जीत हासिल की। चुनाव की शुरुआत उन जिलों से हुई, जहां जहां किसान आंदोलन का सर्वाधिक असर था। उस चरण की 58 सीटों में भाजपा को 46 सीटें मिली। तिकुनिया कांड के कारण चर्चा में आए लखीमपुर में विपक्षी दलों का का खाता तक नहीं खुला। दूसरा व सातवां चरण ही ऐसा रहा जहां सपा भाजपा को टक्कर देती दिखी। लेकिन पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी व सीएम के गृह जिले गोरखपुर में क्लीन स्वीप करने के साथ ही भाजपा ने नोएडा, गाजियाबाद, हापुड़, बुलंदशहर, शाहजहांपुर, पीलीभीत, हरदोई, गोंडा, कन्नौज, कुशीनगर, मिर्जापुर सहित कई जिलों में सारी सीटें अपने झोली में डाल लीं।

उत्तराखंड में वापसी
इसी तरह उत्तराखंड में भी भाजपा दोबारा सरकार बनाने में कामयाब रही। भले ही इसके सीएम पुष्कर सिंह धामी अपना चुनाव हार किए लेकिन 70 सीटों वाली विधानसभा में भाजपा के 47 विधायक पहुंच गए। 2016 तके 57 सीटें जीतने वाली भाजपा को 10 सीटों को नुकसान जरूर हुआ।

मणिपुर और गोआ में भी कमल
मणिपुर विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने 32 सीटें हासिल की और सरकार बना ली। उसने 2017 के विधानसभा चुनावों में 21सीटें ही हासिल की थी। वहीं उस चुनाव में 28 सीटें जीतने वाली कांग्रेस सिर्फ 5 सीटों पर सिमटकर रह गई। 40 विधानसभा सीटों वाले प्रदेश गोआ में भाजपा बेहतर प्रदर्शन् के किया और 2017 के मुकाबले 7 ज्यादा 20 सीटें जीतीं। कांग्रेस को चुनावों में 6 सीटों का नुकसान हुआ और वह 11 पर खड़ी रह गई।

हिमाचल और पंजाब में खराब प्रदर्शन
हालांकि भाजपा को हिमाचल प्रदेश में उम्मीद के अनुसार लाभ नहीं मिला। यहां की जनता से 1985 से कायम रिवाज को बनाए रखा। चुनाव में कांग्रेस 40 सीटें जीती, जबकि बीजेपी 25 पर सिमट गई। 2017 में बीजेपी ने 44 सीटें जीतकर बहुमत की सरकार बनाई थी और कांग्रेस सिर्फ 21 सीटों पर ही सिमटकर रह गई थी। इसी तरह पंजाब में भाजपा के मत प्रतिशत में हल्का सा इजाफा जरूर हुआ और वह 6.6 प्रतिशत हो गया लेकिन वह सिर्फ दो सीटें ही जीत सकी।

गुजरात में रिकॉर्डतोड़ प्रदर्शन

गुजरात विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने सारे रेकॉर्ड तोड़ दिए। बीजेपी ने यहां की 182 विधानसभा सीटों में से 156 सीटें अपने नाम कीं। यह गुजरात में किसी पार्टी का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन रहा। इससे पहले 1985 में माधव सिंह सोलंकी की अगुवाई में कांग्रेस ने 149 सीटें जीती थीं। कांग्रेस इस चुनाव में सिर्फ 17 सीटों पर सिमटकर रह गई।

इन जीतों के साथ में फ्री राशन स्कीम का कितना योगदान था, इसका अंदाजा केंद्र सरकार के इस फैसले से ही लगाया जा सकता है। अभी तक कुछ महीनों के लिए ही इस स्कीम को बढ़ाया जाता था लेकिन इस साल इसे जनवरी 2023 से सीधे दिसंबर 2023 तक के लिए बढ़ा दिया गया।

कर्नाटक में सत्ता से बाहर हुई भाजपा पर वोट शेयर बरकरार
हालांकि इस साल कर्नाटक विधानसभा चुनाव में भाजपा को भारी नुकसान हुआ और वह सत्ता से बाहर हो गई। 2018 में जहां भाजपा 104 सीटें जीतकर सरकार बनाने में सफल रही थी, वहीं इस बार वह सिर्फ 66 सीटें ही जीत सकी। कांग्रेस ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया और 80 सीटों से बढ़कर 135 सीटें अपने नाम की और सत्ता पर काबिज हुई। खास बात ये ही रही कि इस चुनाव में बीजेपी के वोट शेयर में कोई बदलाव नहीं हुआ। वह 36 प्रतिशत पर बनी रही। वहीं कांग्रेस 7 प्रतिशत ज्यादा 43 फीसदी वोट शेयर के साथ जीती। कई राजनीतिक विश्लेषकों ने ये जरूर कहा कि बीजेपी का ये वोट शेयर कर्नाटक के केवल दो क्षेत्रों पुराना मैसूर और बेंगलुरु से आया। जबकि 2018 के चुनावों में यह वोट शेयर कर जगह से था। दक्षिण कर्नाटक में बिना सीटें जीते जेडीएस के वोट शेयर में सेंधमारी की।

त्रिपुरा, नागालैंड और मेघालय में एनडीए सरकार
त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में बीजेपी गठबंधन को नुकसान जरूर हुआ लेकिन सत्ता उनके हाथ बनी रही। बीजेपी गठबंधन को इस चुनाव में 33 सीटें मिली, 2018 के मुकाबले यह 11 सीटें कम रही। तब अकेले बीजेपी को 36 सीटें मिली थीं और उसके सहयोगी दल आईपीएफटी को 8 सीटें मिली थीं। इसी तरह पिछली बार बीजेपी को 43 प्रतिशत से ज्यादा वोट मिले थे, इस बार उसे 39 प्रतिशत वोट मिले। इसी तरह नागालैंड और मेघायल में भी भाजपा गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब रहा।