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पहली बार तीनों सेनाओं की महिला टुकड़ी, झांकियों में भी नारी शक्ति; जानिए परेड में क्या कुछ रहा खास.

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समूचा राष्ट्र इस वर्ष 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों इस साल के समारोह के मुख्य अतिथि हैं। यह गणतंत्र दिवस हमारे लिए कई मायनों में खास है। इस बार झांकियों से लेकर परेड और थीम तक के केंद्र में महिलाएं हैं।

गणतंत्र दिवस का कार्यक्रम क्या है?
शुक्रवार को देश अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस वर्ष की थीम ‘विकसित भारत और भारत-लोकतंत्र की मातृका’ है। गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ हुई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने दिल्ली स्थित कर्तव्य पथ (पहले राजपथ कहा जाता था) पर ध्वजारोहण किया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुबह अमर जवान ज्योति पर श्रद्धांजलि दी।

इस समारोह के मुख्य आकर्षण यानी परेड का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच है। परेड का रुट विजय चौक से नेशनल स्टेडियम के बीच है जो पांच किमी है। मुख्य कार्यक्रम दिल्ली स्थित कर्त्तव्य पथ पर है।

समारोह में मेहमान कौन हैं?

फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि हैं। परेड में फ्रांस की 95 सदस्यीय मार्चिंग टीम और 33 सदस्यीय बैंड दल ने भी शिरकत किया। भारतीय वायु सेना के विमानों के साथ एक मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट (एमआरटीटी) विमान और फ्रांसीसी वायुसेना के दो राफेल लड़ाकू जेट ने भी फ्लाई-पास्ट में हिस्सा लिया।

इस साल परेड में शामिल होने के लिए लगभग 13 हजार विशेष मेहमान आमंत्रित हैं। ये वे लोग हैं जिन्होंने सरकार की करीब 30 अहम योजनाओं का लाभ उठाया है। इसके अलावा पेटेंट हासिल करने वाले विशेषज्ञों, इसरो की महिला वैज्ञानिकों, स्वतंत्रता सेनानियों, किसानों और आदिवासी समुदाय के लोगों को भी निमंत्रण मिला।
इस बार कितनी झाकियां निकलीं?

परेड में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियां दिखाई गईं। ये राज्य उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, मणिपुर, मध्य प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, लद्दाख, तमिलनाडु, गुजरात, मेघालय, झारखंड और तेलंगाना हैं।

इसके अलावा नौ केंद्र सरकार के नौ मंत्रालयों की झांकिया भी कर्तव्य पथ पर चलीं। दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के रंगशाला में इन्हें अंतिम रूप दिया गया था।

किस राज्य की झाकी में क्या विशेष?

इस गणतंत्र दिवस के मौके पर कर्तव्य पथ पर निकलने वाली परेड काफी हद तक महिला केंद्रित हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए तमाम राज्यों ने अपनी झाकियों को महिला आधारित थीम पर तैयार किया।

  • परेड में उत्तर प्रदेश की झांकी का अंदाज खास रहा। इस झांकी की थीम ‘अयोध्या: विकसित भारत-समृद्ध विरासत’ पर आधारित है। झांकी के अगले भाग में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा समारोह का प्रतीक दिखाई दिया, जो उनके बचपन के स्वरूप को प्रदर्शित करता है।
  • लद्दाख की झांकी में आइस हॉकी खिलाड़ियों को जगह दी गई है। वहीं महिला कलाकार यहां के पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति देते हुए दिखाई गई हैं। झांकी में कई महिलाएं पेराक पहने दिखाई दे रही हैं जो लद्दाख में परंपरागत रूप से महिलाओं के लिए एक शाही टोपी मानी जाती है।
  • हरियाणा की झांकी में राज्य सरकार की ‘मेरा परिवार मेरी पहचान’ योजना को स्थान मिला है। झांकी में हरियाणवी महिलाओं को डिजिटल उपकरण के साथ दिखाया गया है। इससे यह बताने की कोशिश की गई है कि कैसे डिजिटल इंडिया पहल ने महिलाओं को सिर्फ एक क्लिक के जरिए सरकार की योजनाओं तक पहुंच बनाई है।
  • राजस्थान की झांकी में यहां की संस्कृति के साथ-साथ महिला हस्तशिल्प उद्योगों के विकास का प्रदर्शन किया गया। झांकी में राजस्थान के प्रसिद्ध घूमर नृत्य की झलकी दिखी।
  • मध्य प्रदेश की झांकी में महिलाओं की आधुनिक सेवा क्षेत्र से लेकर लघु उद्योग और पारंपरिक क्षेत्रों तक में सक्रिय भागीदारी दिखाई गई है। झांकी में भारतीय वायु सेना में मध्य प्रदेश की पहली महिला फाइटर पायलट अवनी चतुर्वेदी भी दिखीं।
  • मणिपुर की झांकी में महिलाओं को कमल के तने के नाजुक रेशों से काम करते और पारंपरिक चरखे का इस्तेमाल करके धागा बनाते हुए दिखाया गया। झांकी में एक महिला को यहां की प्रसिद्ध लोकटक झील से कमल की डंठले इकट्ठा करते हुए दिखाया गया। झांकी में राज्य के पारम्परिक इमा बाजार को जगह मिली है। यह बाजार सदियों पुराना है और इसे पूरी तरह से महिलाएं चलाती हैं।
  • ओडिशा की झांकी में हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी दिखाई गई है।
  • छत्तीसगढ़ की झांकी में बस्तर से आने वाले आदिवासी समुदायों में महिला प्रधानता को प्रदर्शित किया गया।

OPS: पुरानी पेंशन बहाल होगी या जारी रहेगा NPS, जल्द ही 6 दिन में साफ होगी तस्वीर ?

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केंद्र सरकार, पुरानी पेंशन को लेकर बहुत जल्द अंतिम फैसला लेने जा रही है। जानकारों की मानें, तो छह दिन बाद ही यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि सरकारी कर्मी, पुरानी पेंशन के दायरे में आएंगे या एनपीएस ही जारी रहेगा। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार ने कर्मियों के साथ टकराव से बचने का रास्ता निकाल लिया है। एक फरवरी को लोकसभा में पेश होने वाले अंतरिम बजट में ओपीएस/एनपीएस को लेकर, सरकार अपनी स्थिति को स्पष्ट कर सकती है। ये तय है कि केंद्र सरकार, ओपीएस बहाली नहीं करेगी, लेकिन एनपीएस को ज्यादा से ज्यादा आकर्षक बनाने का मसौदा सामने आ सकता है। एनपीएस में जमा हो रहा कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, इसमें बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। साथ ही पुरानी पेंशन में जिस तरह से ‘गारंटीकृत’ शब्द, कर्मियों को एक भरोसा देता है, कुछ वैसा ही एनपीएस में भी जोड़ा जा सकता है। डीए/डीआर की दरों में बढ़ोतरी होने पर एनपीएस में उसका आंशिक फायदा, कर्मियों को कैसे मिले, इस पर कुछ नया देखने को मिल सकता है।

रिले हंगर स्ट्राइक’ के बाद भी सरकार मौन-

देश में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को लेकर सरकारी कर्मियों ने राष्ट्रव्यापी अनिश्चिकालीन हड़ताल करने की चेतावनी दी है। कर्मचारी संगठनों का धैर्य अब जवाब देता हुआ दिखाई पड़ रहा है। केंद्रीय कर्मचारी संगठनों ने आठ जनवरी से 11 जनवरी तक ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ की है। इसका मकसद, सरकार को चेताना था। नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) के संयोजक शिवगोपाल मिश्रा ने ‘रिले हंगर स्ट्राइक’ के अंतिम दिन सरकार को चेतावनी दे दी थी कि ओपीएस बहाली के लिए अब कोई धरना प्रदर्शन नहीं होगा। सरकार हमें, अनिश्चिकालीन हड़ताल करने के लिए मजबूर कर रही है। देश में अगर 1974 की रेल हड़ताल जैसा माहौल बना, तो उसके लिए केंद्र सरकार जिम्मेदार होगी। जल्द ही सभी कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई जाएगी। उस बैठक में देश भर में होने वाली अनिश्चितकालीन हड़ताल की तिथि तय होगी। हड़ताल की स्थिति में ट्रेनों व बसों का संचालन बंद हो जाएगा। केंद्र एवं राज्य सरकारों के दफ्तरों में कामकाज नहीं होगा।

देश में 1974 के दौरान हुई थी रेल हड़ताल-

1974 में जॉर्ज फर्नांडीस की अगुआई में रेल हड़ताल हुई थी। उस वक्त कहा गया था कि सरकार अगर कर्मचारियों की मांगों को पूरा करती, तो उस पर मुश्किल से दो सौ करोड़ रुपये खर्च होने थे, लेकिन सरकार को हड़ताल तोड़ने के लिए करीब दो हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े थे। इसके बाद रेल कर्मियों में असंतोष फैल गया था। वह हड़ताल 8 मई 1974 को प्रारंभ होकर 27 मई 1974 तक चली थी। इस दौरान रेलवे में सारा कामकाज ठप हो गया था। हजारों लोगों को जेल जाना पड़ा था। अनेक लोगों को नौकरियों से हाथ धोना पड़ा था। शिवगोपाल मिश्रा का कहना था, हमने सरकार के समक्ष कई बार आग्रह किया है कि पुरानी पेंशन लागू की जाए। सरकारी कर्मियों को बिना गारंटी वाली ‘एनपीएस’ योजना को खत्म करने और परिभाषित एवं गारंटी वाली ‘पुरानी पेंशन योजना’ की बहाली से कम कुछ भी मंजूर नहीं है। इसके लिए समय-समय पर ज्ञापन सौंपे गए हैं। कैबिनेट सचिव के साथ बैठक में यह मुद्दा उठाया गया है।

दिल्ली में सरकारी कर्मियों की कई रैलियां हो चुकी हैं। इनमें केंद्र और राज्यों के लाखों सरकारी कर्मियों ने हिस्सा लिया था। इतना कुछ होने पर भी केंद्र सरकार ने कर्मियों की इस मांग की तरफ कोई ध्यान नहीं दिया। केंद्र सरकार, अड़ियल रवैया अख्तियार कर रही है। कर्मियों को स्ट्राइक करने के लिए मजबूर कर रही है। मिश्रा ने कहा, कोविड में हमने 11 हजार गाड़ियां चलाई थीं। हमारे 3000 कर्मी शहीद हुए थे। हर साल चार सौ से अधिक रेल कर्मी मारे जा रहे हैं। क्या कोविड में कोई मंत्री/एमपी/एमएलए शहीद हुआ। अब धरना खत्म है, हम हड़ताल पर जाएंगे। सरकार को ध्यान रखना चाहिए कि 1974 की रेल हड़ताल के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इमरजेंसी लगाई थी। उसके बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ी थी। मौजूदा सरकार, ऐसी नौबत सरकार न लाए।

डस्टबीन है एनपीएस, मंजूर नहीं संशोधन-

नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु का कहना है, केंद्र सरकार एनपीएस में संशोधन करने जा रही है। हम ऐसे किसी भी संशोधन के लिए आंदोलन नहीं कर रहे हैं। कर्मियों को गारंटीकृत पुरानी पेंशन ही चाहिए। अगर कोई भी कर्मचारी नेता या संगठन, सरकार के एनपीएस में संशोधन प्रस्ताव पर सहमत होते हैं, तो ‘2004’ वाली गलतियां, ‘2024’ में भी दोहराई जाएंगी। एनपीएस एक डस्टबीन है। करोड़ों कर्मियों का दस फीसदी पैसा और सरकार का 14 फीसदी पैसा, डस्टबीन में जा रहा है। यह स्वीकार्य नहीं है। पुरानी पेंशन बहाली तक, कर्मियों का आंदोलन जारी रहेगा। वित्त मंत्रालय की कमेटी की रिपोर्ट का कोई मतलब नहीं है। यह रिपोर्ट पेश हो या न हो। इससे कर्मियों को कोई मतलब नहीं है। वजह, यह कमेटी ओपीएस लागू करने के लिए नहीं, बल्कि एनपीएस में सुधार के लिए गठित की गई थी।

अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए सहमति-

एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है, लोकसभा चुनाव से पहले ‘पुरानी पेंशन’ लागू नहीं होती है, तो भाजपा को उसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कर्मियों, पेंशनरों और उनके रिश्तेदारों को मिलाकर यह संख्या दस करोड़ के पार चली जाती है। चुनाव में बड़ा उलटफेर करने के लिए यह संख्या निर्णायक है। यही वजह है कि कर्मचारी संगठन, अब विभिन्न राजनीतिक दलों से संपर्क कर रहे हैं। अगर वे कर्मचारियों की मांग मान लेते हैं, तो दस करोड़ वोटों का समर्थन संबंधित राजनीतिक दल के पक्ष में जा सकता है। देश के दो बड़े कर्मचारी संगठन, रेलवे और रक्षा (सिविल) ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के लिए अपनी सहमति दे दी है। स्ट्राइक बैलेट में रेलवे के 11 लाख कर्मियों में से 96 फीसदी कर्मचारी ओपीएस लागू न करने की स्थिति में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए तैयार हैं। इसके अलावा रक्षा विभाग (सिविल) के चार लाख कर्मियों में से 97 फीसदी कर्मी, हड़ताल के पक्ष में है। केंद्र सरकार एनपीएस में ही ओपीएस जैसे कुछ प्रावधानों को शामिल कर सकती है। जैसे, रिटायरमेंट पर मिली बेसिक सेलरी का, एनपीएस में 40 से 45 फीसदी भुगतान बतौर पेंशन देने पर विचार हो रहा है। ऐसे किसी भी प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ये बातें केवल ‘ओपीएस’ से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

Uttarakhand: अब होमगार्डों के बच्चों को भी मिलेगी ‘हाईटेक कोचिंग’, अब मुफ्त में कर सकेंगे UPSC और UKPSC की तैयारी.

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अब होमगार्डों के बच्चों को यूपीएससी और यूकेपीएससी की कोचिंग के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा। प्रदेश में पहली बार होमगार्ड विभाग ऐसे बच्चों को तैयारी के लिए निशुल्क कोचिंग उपलब्ध कराएगा। इसके लिए कमांडेंट जनरल होमगार्ड आईजी केवल खुराना ने सूबे के होमगार्डों से बच्चों व अन्य अभिभावकों के नाम उपलब्ध कराने के लिए आवेदन मांगे हैं।

प्रदेश में पुलिस व्यवस्था में होमगार्डों का काफी हद तक योगदान रहता है। इनके बूते ही थानों और यातायात समेत अन्य व्यवस्थाएं चलती हैं लेकिन इस महंगाई के दौर में होमगार्डों के कई होनहार बच्चे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी से वंचित रह जाते हैं। अब ऐसा नहीं होगा। आईजी केवल खुराना ने देश में ही नहीं बल्कि प्रदेश में भी पहली बार होमगार्डों के बच्चों को निशुल्क कोचिंग दिलाए जाने की पहल शुरू की है।

विभाग होमगार्डों के होनहार बच्चों के लिए देहरादून मुख्यालय में कोचिंग सेंटर खोलने जा रहा है। इसमें सभी विषयों के विशेषज्ञ और विभागीय अधिकारी भी बच्चों को कोचिंग देंगे। कोचिंग के लिए बच्चों का एक मानक भी तय किया गया है। मानक के अनुसार जो बच्चे स्नातक कर रहे हैं या स्नातक की पढ़ाई पूरी कर चुके हैं। 

आवेदन दून मुख्यालय भेजे जाएंगे-

वह यूपीएससी और यूकेपीएससी परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं तो उन्हें कोचिंग दी जाएगी। इसके लिए आईजी केवल खुराना की ओर से सूबे के सभी जिला कमांडेंट को आदेश जारी किए गए हैं। आदेश में अपने-अपने जिले में तैनात इच्छुक होमगार्डों से बच्चों के नाम मांगे गए हैं। इसके बाद जिला मुख्यालय से आवेदन दून मुख्यालय भेजे जाएंगे।

आवेदन के हिसाब से दी जाएगी कोचिंग-

जो बच्चे संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (यूकेपीएससी) की तैयारी करना चाहते हैं। उनके आवेदनों की संख्या कितनी होगी। इस हिसाब से दून मुख्यालय में कोचिंग सेंटर तैयार किया जाएगा और विशेषज्ञों की तैनाती की जाएगी। माना जा रहा है कि फरवरी माह में कोचिंग शुरू हो जाएगी।

होमगार्डों के जो बच्चे या अन्य आश्रित यूपीएससी और यूकेपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं। उन्हें विभाग की ओर से निशुल्क कोचिंग दिलाई जाएगी। देहरादून में रहने वालों को कोचिंग सेंटर और अन्य जिलों में रहने वालों को दो-दो घंटे ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी। -केवल खुराना, कमांडेंट जनरल होमगार्ड, आईजी, देहरादून

Haridwar: 5 साल के बच्चे को हरकी पैड़ी लेकर पहुंचे परिजन, ब्रह्मकुंड पर गंगा में डुबोकर ले ली जान.

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हरिद्वार में बुधवार को सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां एक परिवार ने अपने ही पांच साल के बच्चे को हरकी पैड़ी पर गंगा में डुबोकर मार डाला। पुलिस ने फिलहाल बच्चे के शव को कब्जे में ले लिया है।  

पुलिस के अनुसार, घटना बुधवार दोपहर की है। एक परिवार बच्चे को लेकर हरकी पैड़ी पर आया। बच्चे की मां के अलावा अन्य परिजन भी साथ थे। उन्होंने बच्चे को ब्रह्मकुंड में ले जाकर डुबो दिया। इतना ही नहीं उसे लगातार डुबोते रहे। आस-पास के लोगों ने जब ये देखा वहां अफरा-तफरी मच गई। बच्चे को तुरंत बाहर निकाला गया।

सूचना मिलने पर नगर कोतवाली प्रभारी भावना कैंथोला, हरकी पैड़ी चौकी इंचार्ज संजीव चौहान टीम के साथ मौके पर पहुंचे। बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कोतवाली प्रभारी भावना कैंथोला ने बताया कि शव को कब्जे में ले लिया गया है। साथ में आए परिजनों को हिरासत में लेते हुए पूछताछ शुरू कर दी गई है। उनके बात के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।

भीड़ ने आरोपियों को पकड़ा-

घटना का पता लगते ही मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ वहां जुट गई। इस दौरान लोगों ने आरोपियों को पकड़ लिया और पीट दिया।

  Lok Sabha Chunav: ममता बनर्जी ने दिया INDIA गठबंधन को बड़ा झटका, बंगाल में अकेले चुनाव लड़ेगी तृणमूल।

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विपक्षी पार्टियों से मिलकर बने इंडिया गठबंधन को लोकसभा चुनाव से पहले बड़ा झटका दिया है। उन्होंने एलान किया है कि आम चुनाव में सीट साझा करने पर उनका किसी से संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकसभा चुनाव के लिए उनकी पार्टी अकेले उतरेगी। इसे राज्य में कांग्रेस और लेफ्ट के टीएमसी के साथ लाने की कोशिशों को बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

क्या बोलीं ममता बनर्जी? 

ममता ने कहा कि इंडिया गठबंधन ने मेरा कोई भी प्रस्ताव नहीं माना है। ऐसे में हमारी पार्टी अकेले ही चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि बंगाल में किसी भी पार्टी में तालमेल नहीं है। इतना ही नहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी की भारत जोड़ो न्याय यात्रा के लिए भी उन्हें अब तक न्योता नहीं भेजा गया है।

ममता ने कहा कि हम सेक्युलर पार्टी हैं और भाजपा को हराने के लिए हमें जो करना होगा हम करेंगे। हम इंडिया गठबंधन का हिस्सा हैं, इसके बावजूद भारत जोड़ो यात्रा निकालने को लेकर हमसे बात नहीं की गई। बंगाल से जुड़े किसी भी मामले में हमारा उनसे कोई संपर्क नहीं हुआ है। 
ममता ने एक दिन पहले ही कांग्रेस को दी थी नसीहत-

 
गौरतलब है कि बंगाल सीएम ने एक दिन पहले ही कांग्रेस को नसीहत दी थी। उन्होंने कहा था कि कांग्रेस लोकसभा की 300 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है, लेकिन उसे कुछ क्षेत्रों को पूरी तरह क्षेत्रीय दलों के लिए छोड़ देना चाहिए। पर कांग्रेस अपनी मनमानी पर अड़ी है। उन्होंने कहा कि कोई भी भाजपा का उतना सीधा मुकाबला नहीं करता, जितना वह करती हैं। उन्होंने साफ कहा था कि अगर इंडिया गठबंधन की पार्टियां उनका साथ नहीं देतीं तो टीएमसी सभी 42 लोकसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। 

गठबंधन पर माकपा का कब्जा मंजूर नहीं –

ममता ने कहा कि गठबंधन की बैठक में वह जब भी शामिल होती हैं तो पाती हैं माकपा विपक्षी एजेंडे को नियंत्रित करने का प्रयास कर रही है। यह मुझे स्वीकार नहीं है। मैं उनसे सहमत नहीं हो सकती जिनसे मैंने 34 साल तक संघर्ष किया।

उत्तराखंड-हिमाचल के पहाड़ों से बर्फ हो रही है गायब, हसीन वादियों में सात गुना बढ़ीं आग की घटनाएं.

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सर्दियों में बर्फ से ढकी रहने वाली हिमाचल की हसीन वादियों से बर्फ गायब है और वहां इन दिनों आग की लपटें और धुंआ दिखाई दे रहा है। यही हाल उत्तराखंड के पहाड़ों का भी है। पिछले तीन महीनों से हिमाचल में इस बार न ही तो बारिश हुई है और न ही बर्फबारी देखने को मिली है। जंगलों में नमी न होने से इस बार प्रदेश में वनाग्नि की घटनाओं में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिली है।

आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के सभी जिलों में आग की घटनाएं हुईं। पिछले तीन सप्ताह में किन्नौर, मनाली, कुल्लू, चंबा और शिमला जिला में आग की बड़ी घटनाओं में हजारों हैक्टेयर वन भूमि को नुकसान पहुंचा है और रिहायशी मकान भी आग की चपेट में आए हैं। भारतीय वन सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में देश में वनाग्नि की बड़ी घटनाओं में शीर्ष पांच राज्यों में हिमाचल पहले स्थान पर है। हिमाचल में पिछले एक सप्ताह में 36 बड़ी आग की घटनाएं देखने को मिली हैं। वर्ष 2022-23 में बड़ी आग की घटनाओं में शीर्ष में रहने वाले पांच राज्यों में हिमाचल 123 घटनाओं के साथ पहले स्थान पर था और उत्तराखंड दूसरे, आंध्र प्रदेश तीसरे और जम्मू एवं कश्मीर चौथे स्थान पर था। वहीं 2023-24 में फायर अलर्ट के मामलों में शीर्ष के पांच राज्यों में हिमाचल दूसरे स्थान पर और उत्तराखंड पहले स्थान पर है।

अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर माह में आग की कुल 369 घटनाएं हुईं। इनमें 275 वनाग्नि की घटनाएं थीं। इन घटनाओं में 10 करोड़ रुपए की संपत्ति का नुकसान हुआ। 1 से 12 जनवरी तक प्रदेश में 149 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं।

अभी तक सामान्य से 100 फीसदी कम बारिश हुई-


मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में जनवरी माह में अभी तक सामान्य से 100 फीसदी कम बारिश हुई है। वनाग्नि की दृष्टि से हिमाचल प्रदेश के 12 जिलों में से 8 जिले संवेदनशील माने जाते हैं। यहां का सबसे अधिक संवेदनशील समय अप्रैल के दूसरे सप्ताह से जून तक है, लेकिन इस बार आग की घटनाएं सर्दियों के दिनों में भी अधिक देखने को मिल रही हैं। इसकी मुख्य वजह बारिश और बर्फबारी न होने की वजह से जंगलों की नमी गायब हो गई है।

प्रदेश के चीड़ वन आग के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील-


अधिकृत आंकड़ों के अनुसार हिमाचल में 37,033 वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र है। इनमें से 15 प्रतिशत पर चीड़ वन हैं जो आग के लिए सबसे अधिक संवेदनशील होते हैं। प्रदेश में वन विभाग की कुल 2026 बीटें हैं, इनमें से 339 अति संवेदनशील श्रेणी में आती हैं। इसके अलावा 667 मघ्यम और 1020 बीटें कम संवेदनशील की श्रेणी में आती हैं।

मौसमी चुनौतियों से घिरे उत्तराखंड के पहाड़-


9 से 16 जनवरी के बीच उत्तराखंड में 600 से अधिक वनाग्नि के अलर्ट जारी किए जा चुके हैं। देशभर में सबसे ज्यादा फायर अलर्ट उत्तराखंड में आए। 400 से अधिक फायर अलर्ट के साथ हिमाचल प्रदेश दूसरे और तकरीबन 250 अलर्ट के साथ जम्मू-कश्मीर तीसरे स्थान पर है। अरुणाचल प्रदेश में भी 200 के आसपास अलर्ट जारी किए गए हैं। वनअधिकारियों के अनुसार बारिश न होने से सर्दियों में वनों में जगह-जगह आग लगने की सूचनाएं मिल रही हैं। वन विभाग भी इस समय कंट्रोल बर्निंग कर रहा है। मॉनसून के बाद बारिश न होने से जंगल में सूखी पत्तियों का ढेर जमा है जिससे गर्मियों में आग भड़क जाती है। इसलिए विभाग नियंत्रित आग के जरिये जंगल की सफाई करता है। इससे भी लोगों को धुआं दिख रहा है। ग्रामीणों को आग के प्रबंधन के लिए जागरूक किया जा रहा है। वे इस समय खेतों की सफाई या जंगल में आग लगाकर न छोड़ें।

उत्तराखंड में 1 से 16 जनवरी के बीच बारिश और बर्फबारी नहीं-


मौसम विभाग के अनुसार इस वर्ष 1 से 16 जनवरी के बीच उत्तराखंड में बारिश बर्फबारी देखने को नहीं मिली। नैनीताल में नाममात्र 0.8 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्यतः इस दौरान 14 मिमी. तक बारिश होती है। इसी तरह अल्मोड़ा, बागेश्वर में 15 मिमी से अधिक, चमोली में 20 मिमी और रुद्रप्रयाग उत्तरकाशी में इस समय तक 28 और 26 मिमी तक बारिश होनी चाहिए लेकिन चमोली, उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ समेत सभी पर्वतीय जिलों में सामान्य से 100 प्रतिशत कम यानी कोई बारिश नहीं हुई। दिसंबर-2023 भी तकरीबन सूखा गया। तीन हिमालयी राज्यों जम्मू कश्मीर और लद्दाख (-79), हिमाचल प्रदेश (-85) और उत्तराखंड (-75) में सामान्य से बेहद कम बारिश दर्ज हुई।

पिछले कुछ वर्षों में बारिश और बर्फवारी में लगातार कमी-


पिछले कुछ वर्षों में मॉनसून के बाद बारिश और बर्फबारी में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। नवंबर और दिसंबर में तकरीबन न के बराबर बारिश और बर्फबारी हुई। इससे पहले 2006, 2007, 2008 और 2009 में भी मानसून के बाद काफी कम बारिश हुई थी। तकरीबन 4 साल सूखी सर्दियां रहीं। मानसून के बाद सर्दियों की जलवायु में इस तरह केउतार-चढ़ाव लगातार देखने को मिल रहे हैं।

खेती, किसानी और पर्यटन सब कुछ प्रभावित हो रहा है-


जानकारों का कहना है कि बारिश न होने का असर खेती और बागवानी में भी दिखाई दे रहा है। सर्दियों में लगाए जाने वाले फलदार पौधों को पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। सेब, आडू, प्लम, खुबानी और कीवी समेत सभी फसलें प्रभावित हो रही हैं। बारिश पर निर्भर खेतों में अब तक गेहूं और जौ के बीज भी बाहर नहीं निकले हैं। बर्फबारी न होने के कारण पर्यटन व्यवसाय पर भी इसका खासा असर पड़ा है। पर्यटन व्यवसाय 20 प्रतिशत के आसपास भी नहीं पहुंच पाया।एक तरह से पूरा विंटर टूरिज्म ठप हो गया। बद्रीनाथ में बेहद हलकी बर्फ गिरी है। जलते जंगल से लेकर पेयजल संकट तक पहाड़ मौसमी चुनौतियों से घिरे हैं।

Ayodhya: सील हुई राम नगरी, बिना पास के नहीं मिलेगा प्रवेश, SPG ने कब्जे में लिया आयोजन स्थल.

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प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर रामनगरी सील हो चुकी है। सभी प्रवेश मार्गों पर सुरक्षा घेरा सख्त कर दिया गया है। यहां से बिना पास के किसी को भी प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। सुरक्षा एजेंसियों ने प्रधानमंत्री समेत अन्य अतिथियों के गुजरने वाले मार्ग पर बने मकानों का सत्यापन किया है। इनके छतों पर भी कार्यक्रम के दौरान सशस्त्र जवान मुस्तैद रहेंगे।

प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर रामनगरी का सुरक्षा घेरा सख्त किया गया है। शनिवार की रात से ही जिले समेत अयोध्या धाम की सीमाएं सील कर दी गई हैं। अयोध्या धाम को जाने वाले मार्गों उदया चौराहा, साकेत पेट्रोल पंप, रानोपाली, टेढ़ी बाजार, मोहबरा, बूथ नंबर चार, बालूघाट, नयाघाट, रेलवे स्टेशन आदि पर सुरक्षा व्यवस्था चुस्त रहेगी। यहां सिविल पुलिस के अलावा अर्ध सैनिक बलों के जवान भी तैनात किए गए हैं। किसी को भी यहां से वाहन लेकर अंदर प्रवेश करने की अनुमति नहीं होगी।

कार्यक्रम स्थल पर सिर्फ अतिथि, व्यवस्था से जुड़े लोग व सुरक्षाकर्मी ही रहेंगे। उदया चौराहा से लेकर लता मंगेश्कर चौक तक दोनों पटरियों पर बैरिकेडिंग की गई है। दुकानों को बंद करने के निर्देश तो नहीं हैं, लेकिन दुकानों के सामने भी बैरिकेडिंग की गई है, जिससे आवागमन बाधित रहेगा। गलियों से प्रवेश करने के मार्ग भी बंद कर दिए गए हैं। प्रत्येक 100 मीटर की दूरी पर सशस्त्र जवान तैनात किए गए हैं। साकेत महाविद्यालय से लेकर सरयू तट तक सड़क के दोनों तरफ बने मकानों में रहने वालों का सत्यापन किया गया है। बिना प्रशासन के अनुमति के यहां किसी को भी पनाह न देने के निर्देश हैं। ड्रोन कैमरों व अन्य तकनीक से इन मकानों में ठहरने वालों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। 

एसपीजी ने कब्जे में लिया कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा-

 
प्रधानमंत्री के आगमन से पूर्व एसपीजी का एक और दल अयोध्या पहुंच गया है। अधिकारियों के साथ बैठक करके उन्होंने कार्यक्रम स्थल की सुरक्षा व्यवस्था अपने कब्जे में ले ली है। पांच स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में शामिल सभी सुरक्षा एजेंसियों के जवानों की ब्रीफिंग करके दिशा-निर्देश दिए गए हैं। वीआईपी के ठहरने वाले स्थानों व होटलों पर भी सुरक्षा घेरा सख्त किया गया है। यहां भी किसी के आने-जाने व ठहरने को लेकर एजेंसियां सतर्क हैं। 

डायवर्जन प्लान जारी-  

रविवार से रामनगरी में प्रवेश वर्जित होगा। आवश्यक सेवाएं संचालित रहेंगी। सुरक्षा के मजबूत इंतजाम किए गए हैं। अयोध्या के लोग मेजबान हैं, इसलिए व्यवस्था में सहयोग करें। शहर में प्रवेश के लिए डायवर्जन प्लान जारी किया जाएगा।

16 साल से कम उम्र के बच्चों को कोचिंग पढ़ाने पर लगी रोक, आखिर सरकार ने क्यों लिया ये एक्शन, जानिए वजह।

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कोचिंग संस्थानों पर केंद्र सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है. अब कोई भी कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के छात्रों को अपने यहां नहीं पढ़ा सकते हैं. शिक्षा मंत्रालय द्वारा घोषित नए दिशानिर्देश के मुताबिक, देश के कोचिंग संस्थान 16 साल से कम उम्र के विद्यार्थियों को अपने यहां दाखिल नहीं कर सकेंगे और अच्छे नंबर या रैंक दिलाने की गारंटी जैसे भ्रामक वादे भी नहीं कर सकेंगे. माना जा रहा है कोचिंग संस्थानों को विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश एक कानूनी ढांचे की आवश्यकता को पूरा करने और बेतरतीब तरीके से निजी कोचिंग संस्थानों की बढ़ोतरी को रोकने के लिए हैं.

केंद्र सरकार के दिशा निर्देश में कहा गया, ‘कोई भी कोचिंग संस्थान स्नातक से कम योग्यता वाले शिक्षकों को नियुक्त नहीं करेगा. कोचिंग संस्थान विद्यार्थियों के नामांकन के लिए माता-पिता को भ्रामक वादे या रैंक या अच्छे अंक की गारंटी नहीं दे सकते. संस्थान 16 वर्ष से कम उम्र के छात्रों का नामांकन नहीं कर सकते. विद्यार्थियों का कोचिंग संस्थान में नामांकन माध्यमिक विद्यालय परीक्षा के बाद ही होना चाहिए.’

क्यों हुआ यह एक्शन-

अब सवाल उठता है कि आखिर सरकार ने कोचिंग संस्थानों पर यह एक्शन क्यों लिया है. बीते कुछ समय से कोटा में जिस तरह से बच्चों के आत्महत्या के मामले सामने आए हैं, उसने सरकार की चिंता बढ़ा दी थी. यही वजह है कि सरकार ने छात्रों के आत्महत्या के बढ़ते मामलों को देखते हुए यह एक्शन लिया है. इतना ही नहीं, शिक्षा मंत्रालय ने यह दिशा निर्देश विद्यार्थियों की आत्महत्या के बढ़ते मामलों, आग की घटनाओं, कोचिंग संस्थानों में सुविधाओं की कमी के साथ-साथ उनके द्वारा अपनाई जाने वाली शिक्षण पद्धतियों के बारे में सरकार को मिली शिकायतों के बाद तैयार किए हैं.

दिशानिर्देश में क्या-क्या है-

शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी दिशानिर्देश के मुताबिक, ‘कोचिंग संस्थान कोचिंग की गुणवत्ता या उसमें दी जाने वाली सुविधाओं या ऐसे कोचिंग संस्थान या उनके संस्थान में पढ़े छात्र द्वारा प्राप्त परिणाम के बारे में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी दावे को लेकर कोई भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित नहीं कर सकते हैं या प्रकाशित नहीं करवा सकते हैं या प्रकाशन में भाग नहीं ले सकते हैं.’ कोचिंग संस्थान किसी भी शिक्षक या ऐसे व्यक्ति की सेवाएं नहीं ले सकते, जो नैतिक कदाचार से जुड़े किसी भी अपराध के लिए दोषी ठहराया गया हो. कोई भी संस्थान तब तक पंजीकृत नहीं होगा जब तक कि उसके पास इन दिशानिर्देशों की आवश्यकता के अनुसार परामर्श प्रणाली न हो. दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों की एक वेबसाइट होगी जिसमें पढ़ाने वाले शिक्षकों (ट्यूटर) की योग्यता, पाठ्यक्रम/पाठ्य सामग्री, पूरा होने की अवधि, छात्रावास सुविधाएं और लिए जाने वाले शुल्क का अद्यतन विवरण होगा.’ नए दिशानिर्देशों के अनुसार, विद्यार्थियों पर कड़ी प्रतिस्पर्धा और शैक्षणिक दबाव के कारण कोचिंग संस्थानों को उन्हें तनाव से बचाने के लिए कदम उठाने चाहिए और उन पर अनावश्यक दबाव डाले बिना कक्षाएं संचालित करनी चाहिए.

फीस को लेकर भी गाइडलाइन-

दिशानिर्देश में कहा गया, ‘कोचिंग संस्थानों को संकट और तनावपूर्ण स्थितियों में छात्रों को निरंतर सहायता प्रदान करने के लिए तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए. सक्षम प्राधिकारी यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठा सकता है कि कोचिंग संस्थान द्वारा एक परामर्श प्रणाली विकसित की जाए जो छात्रों और अभिभावकों के लिए आसानी से उपलब्ध हो.’ दिशा निर्देश में विद्यार्थियों के मानसिक कल्याण को लेकर विस्तृत रूपरेखा पिछले साल कोटा में रिकॉर्ड संख्या में छात्रों की आत्महत्या करने की घटना के बाद आई है. दिशा निर्देश में कहा गया कि विभिन्न पाठ्यक्रमों का शुल्क पारदर्शी और तार्किक होना चाहिए और वसूले जाने वाले शुल्क की रसीद दी जानी चाहिए. इसमें साफ किया गया है कि अगर छात्र बीच में ही पाठ्यक्रम छोड़ता है तो उसकी बची हुई अवधि की फीस लौटाई जानी चाहिए.

राज्य सरकार को मिली जिम्मेदारी-

नीति को सशक्त बनाते हुए केंद्र ने सुझाव दिया है कि कोचिंग संस्थानों पर दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जाना चाहिए या अत्यधिक शुल्क वसूलने पर उनका पंजीकरण रद्द कर दिया जाना चाहिए. कोचिंग संस्थानों की उचित निगरानी के लिए सरकार ने दिशानिर्देश के प्रभावी होने के तीन महीने के भीतर नए और मौजूदा कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण करने का प्रस्ताव किया है. दिशानिर्देश के मुताबिक राज्य सरकार कोचिंग संस्थान की गतिविधियों की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे.

Bharat Jodo Nyay Yatra: असम के CM हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा बयान, राहुल गांधी होंगे गिरफ्तार!

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कांग्रेस नेता राहुल गांधी इन दिनों भारत जोड़ों न्याय यात्रा पर हैं। राहुल गांधी की यात्रा असम पहुंच चुकी है असम में यह यात्रा 17 जिलों से होकर गुजरेगी वहीं राहुल गांधी की न्याय यात्रा को लेकर राजनीति भी खूब हो रही है राहुल गांधी की यात्रा को लेकर बीजेपी लगातार हमलावर है।

असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा राहुल गांधी के न्याय यात्रा को लेकर बड़ा बयान दिए हैं। उन्होंने कहा है कि,  राहुल गांधी को शहर के अंदर प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी जाएगी,, अगर वह फिर भी जिद्द कर शहर में आते हैं तो उनके खिलाफ केस दर्ज होगी औऱ उनकी गिरफ्तारी होगी। 

राहुल गांधी की यात्रा नगालैंड से असम पहुंच चुकी है असम के शिवसागर जिले से शुरू होकर यह यात्रा राज्य के अन्य 17 जिलों से गुजरेगी इसी में गुवाहाटी शहर भी शामिल है जिसको लेकर राजनीतिक भूचाल आया है उन्होंने कहा कि, “हमने कहा है कि शहरों के अंदर से नहीं जाना है जो भी वैकल्पिक रास्ता मांगा जाएगा उसकी अनुमति दे दी जाएगी लेकिन अगर शहर के अंदर से जाने की जिद की जाएगी तो हम पुलिस की व्यवस्था नहीं करेंगे ”मैं केस दर्ज कर लूंगा और चुनाव के बाद गिरफ्तार करूंगा अभी कुछ नहीं करूंगा”।

और अब खबर आ रही है कि राहुल गांधी के खिलाफ असम पुलिस ने FIR भी दर्ज कर दी गयी है न्यूज एजेंसी पीटीआई ने पुलिस अधिकारी के हवाले से यह जानकारी दी है अधिकारी ने कहा, ”जोरहाट सदर पुलिस स्टेशन ने स्वत: संज्ञान लेते हुए यह एफआईआर यात्रा और उसके मुख्य आयोजक के खिलाफ दर्ज की है ” अधिकारी के अनुसार, एफआईआर में उल्लेख किया गया है कि यात्रा ने जिला प्रशासन के मानदंडों का पालन नहीं किया और सड़क सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन किया.

 

इस दौरान कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने  शिवसागर जिले में दावा किया कि देश में शायद सबसे भ्रष्ट सरकार और सबसे भ्रष्ट मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा इस राज्य में है.कुल मिलाकर बीजेपी और कांग्रेस आमने सामने आ चुके हैं ।  

Ram Mandir: 22 जनवरी को उत्तराखंड में सरकारी दफ्तरों में रहेगी आधे दिन की छुट्टी, जानिए कितने बजे खुलेंगे दफ्तर।

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अयोध्या में राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा समारोह को लेकर उत्तराखंड सरकार ने 22 जनवरी को सरकारी दफ्तरों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की है। इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। आदेश के बाद कर्मचारी नेताओं ने कहा कि सरकार द्वारा सरकारी कार्यों में आधा दिन का अवकाश किया गया है जो की औचित्यहीन है।

आदेश से नाखुश कर्मचारियों ने कहा कि क्या कर्मचारी शिक्षक पहले प्राण प्रतिष्ठा में भाग लेंगे और 2:30 बजे बाद अपने कार्यालय में आएंगे जोकि असंभव है। सरकार अवकाश पर पुनर्विचार करके 22 जनवरी 2024 को पूरे दिन का अवकाश घोषित करें।

पूरा देश इस समय राममय –

भाजपा के राष्ट्रीय सह-कोषाध्यक्ष व राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने भी मुख्यमंत्री से सार्वजनिक अवकाश घोषित करने का अनुरोध किया था। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक पत्र भी लिखा था।बंसल ने अपने पत्र में कहा कि 22 जनवरी को श्रीराम जन्मभूमि मंदिर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है। इसकी उत्तराखंड समेत पूरे विश्व में भव्य आयोजन की तैयारी चल रही है। पूरा देश इस समय राममय है। आस्था और विश्वास का यह महापर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है।

हर व्यक्ति 22 जनवरी का कार्यक्रम देखने को उत्सुक है। प्रत्येक रामभक्त इस प्राण प्रतिष्ठा समारोह का साक्षी बनना चाहता है। उत्तर प्रदेश, हरियाणा आदि प्रदेशों में 22 जनवरी को सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है, ताकि लोग धूमधाम से यह उत्सव मना सकें।