उत्तराखंड में बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं का स्वत: संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने शासन से कारणों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तलब की है। सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के सचिव संजय मित्तल ने मुख्य सचिव राधा रतूड़ी को पत्र भेजकर दुर्घटनाओं के सभी कारणों व दुर्घटना नियंत्रण को उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट 15 दिसंबर तक उपलब्ध कराने को कहा है।
कमेटी ने देहरादून के ओएनजीसी चौक पर इनोवा कार दुर्घटना में छह युवाओं की मृत्यु और अल्मोड़ा में बस दुर्घटना में 38 यात्रियों की मौत का संज्ञान लिया है। प्रदेश में वाहनों की बेलगाम गति, ओवरलोडिंग व प्रवर्तन एजेंसियों की चेकिंग में लापरवाही के कारण हो रही दुर्घटनाओं पर भी कमेटी ने चिंता जताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने शासन से मांगा जवाब-
जस्टिस अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी के सचिव संजय मित्तल के पत्र में कमेटी ने 11 नवंबर की देर रात दो बजे देहरादून में ओएनजीसी चौक पर हुई दुर्घटना का मुख्य कारण प्रवर्तन एजेंसियों की रात्रि चेकिंग में बरती गई लापरवाही को भी माना है। कमेटी ने चिंता जताते हुए यह जवाब मांगा है कि शासन की ओर से इस लापरवाही पर क्या कार्रवाई की गई।
बता दें कि, दुर्घटना वाली रात जाखन-मसूरी रोड से पार्टी कर लौट रहे सात युवाओं की बिना पंजीयन नंबर की इनोवा हाइक्रास कार बेलगाम गति से शहर में पुलिस के पांच बैरियर से गुजरती हुई 10 किमी दूर ओएनजीसी चौक तक पहुंच गई, लेकिन कहीं भी यह कार चेकिंग के लिए नहीं रोकी गई। एक बीएमडब्ल्यू कार को ओवरटेक करने के प्रयास में तकरीबन 180 किमी प्रतिघंटा की गति से दौड़ रही यह कार एक कंटेनर से टकराकर पेड़ में जा घुसी थी।
इस भयावह सड़क दुर्घटना में कार सवार दो युवाओं के सिर धड़ से अलग हो गए थे, जबकि शेष के शव भी क्षत-विक्षत स्थिति में सड़क पर बिखर गए थे। सभी युवा 20 से 24 वर्ष के थे और उनमें तीन युवतियां भी शामिल थीं। इस दुर्घटना में कार सवार एक युवक जीवित है, जिसका सिनर्जी अस्पताल में उपचार चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की कमेटी का पत्र मिलने के बाद मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने इस संबंध में सचिव परिवहन बृजेश संत को निर्धारित समय में विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के आदेश दिए हैं। वहीं, सुप्रीम कोर्ट कमेटी आन रोड सेफ्टी ने अल्मोड़ा के मार्चुला में हुई बस दुर्घटना पर भी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। गत चार नवंबर की सुबह ओवरलोड बस खाई में गिरने से 38 यात्रियों की मृत्यु हो गई थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुर्घटना के बाद दो एआरटीओ को निलंबित कर दिया था। बता दें कि, उपरोक्त दोनों दुर्घटनाओं में शासन स्तर पर पहले से जांच चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।
प्रदेश के सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पदों पर चयनित 70 से अधिक महिला अभ्यर्थियों का चयन रद्द होगा। उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा समेत अन्य राज्यों की इन महिला अभ्यर्थियों का विवाह उत्तराखंड में हुआ है।
शिक्षा निदेशालय ने आरक्षित वर्ग की इन महिला अभ्यर्थियों के मामले में शासन से दो महीने पहले दिशा-निर्देश मांगा था कि इन्हें नियुक्ति में आरक्षण का लाभ दिया जाए या नहीं। शासन के अधिकारियों के मुताबिक कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश के मुताबिक इन्हें आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
2906 पदों पर चल रही शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया-
प्रदेश में इन दिनों 2906 पदों पर शिक्षकों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है। शिक्षा निदेशालय के मुताबिक भर्ती में ऐसे द्विवर्षीय डीएलएड अभ्यर्थियों ने भी आवेदन किया। जिनका विवाह अन्य राज्य से उत्तराखंड में हुआ है।
इन अभ्यर्थियों की अन्य राज्य के आरक्षण एवं उत्तराखंड राज्य के आरक्षण की स्थिति समान है। शिक्षा निदेशालय ने 27 अगस्त 2024 को शासन को लिखे पत्र में कहा कि समान जाति के आधार पर अन्य राज्य के अभ्यर्थियों को उत्तराखंड राज्य में आरक्षण का लाभ दिया जाना है या नहीं इस संबंध में दिशा-निर्देश दिया जाए।
आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी-
शासन के अधिकारियों के मुताबिक शिक्षा निदेशालय से दिशा-निर्देश मांगे जाने के बाद शासन ने समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय विभाग से इस संबंध में सुझाव मांगा था। जिस पर कार्मिक विभाग के 10 अक्तूबर 2002 के शासनादेश का हवाला दिया गया कि उत्तराखंड राज्य के अलावा उत्तर प्रदेश एवं अन्य किसी राज्य का कोई व्यक्ति उत्तराखंड राज्य की राज्याधीन सेवाओं में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के लिए अनुमन्य आरक्षण का लाभ नहीं पा सकेगा।
इसके अलावा समाज कल्याण विभाग के 29 दिसंबर 2008 का वह शासनादेश जो डीएम देहरादून को संबोधित है। उसके बिंदु संख्या तीन में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 74 में संरक्षण केवल सेवा शर्तों के लिए है। ऐसे संरक्षण में ऐसे कर्मचारियों की संतान को अपने पैतृक राज्य के अलावा दूसरे राज्य में आरक्षण की कोई सुविधा नहीं मिलेगी न ही उन्हें दूसरे राज्य के लिए अनुसूचित जाति, जनजाति व अन्य पिछड़ा वर्ग का समझा जाएगा। उन्हें आरक्षण की सुविधा अपने पैतृक राज्य में ही मिलेगी।
नियुक्ति के लिए उत्तराखंड की बहुओं ने किया था आंदोलन-
नियुक्ति की मांग को लेकर उत्तराखंड की बहुओं ने पिछले दिनों शिक्षा निदेशालय में प्रदर्शन कर धरना दिया था। उनका कहना था कि उत्तराखंड में उनका विवाह हुआ है। उन्हें नौकरी में आरक्षण का लाभ देते हुए नियुक्ति दी जाए।
ये शिक्षक हो सकते हैं बर्खास्त-
शिक्षक भर्ती में कुछ ऐसे अभ्यर्थी भी शामिल हैं। जिसने अन्य राज्यों से डीएलएड के लिए स्थायी निवास की बाध्यता के बावजूद डीएलएड करने के बाद उत्तराखंड में नियुक्ति पा ली। जबकि नियुक्ति के लिए उत्तराखंड का स्थायी या मूल निवासी होना जरूरी है।
कुछ अभ्यर्थियों ने यूपी का जाति प्रमाण पत्र रद्द करवाने के बाद उत्तराखंड से जाति एवं निवास प्रमाण पत्र बनवाया है। उनके पति के आधार पर यह प्रमाण पत्र बना है। जिसे डीएम ने जारी किया है। इनके आरक्षण के मामले में समाज कल्याण, कार्मिक और न्याय से परामर्श शासन को मिल चुका है, लेकिन अभी निदेशालय को कोई निर्देश जारी नहीं हुआ। -आरएल आर्य, अपर निदेशक प्रारंभिक शिक्षा
खाद्य पदार्थों में थूकने की घटनाओं पर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री डा. धन सिंह रावत के निर्देशानुसार खाद्य संरक्षा विभाग ने भी इसे लेकर विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है।
इस तरह की घटनाओं में संलिप्त पाए जाने व्यक्ति पर अब 25 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक का जुर्माना लगाया जाएगा। खाद्य संरक्षा विभाग के आयुक्त डा. आर राजेश कुमार ने एसओपी को सख्ती से लागू करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं।
खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस लेना अनिवार्य-
खाद्य संरक्षा आयुक्त ने कहा हाल के दिनों में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जूस और अन्य खानपान की वस्तुओं में मानव अपशिष्ट व अन्य गंदगी मिलाने के प्रकरण सामने आए हैं। यह खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के प्राविधानों का स्पष्ट उल्लंघन है। कहा कि सभी खाद्य कारोबारियों को लाइसेंस लेना और उसकी शर्तों का पालन करना अनिवार्य है। साथ ही खाद्य पदार्थों में स्वच्छता व सफाई संबंधी अपेक्षाएं का अनुपालन करना भी अनिवार्य है।
नियमों का पालन न करने वाले खाद्य करोबारियों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के प्रावधानों के तहत दंडित किए जाने का प्राविधान है।
कहा कि आमजन को शुद्ध, स्वच्छ व सुरक्षित खाद्य पदार्थों की उपलब्धता सुनिश्चित कराए जाने के दृष्टिगत राज्य में संचालित होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैंटीन, फूड वेंडिंग एजेनंसीज, फूड स्टाल, स्ट्रीट फूड वेंडर्स आदि में खाद्य सुरक्षा व स्वच्छता के मानकों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराए जाने का नियम है। जिसके लिए विभागीय टीमें लगातार अभियान चलाकर छापेमारी कर रही हैं। खाद्य पदार्थों की सैंपलिंग भी की जा रही है। जांच में दोषी पाए जाने वाले खाद्य कारोबारियो पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
ढाबे, रेस्टोरेंट को बताना होगा मीट झटका या हलाल-
खाद्य पदार्थ बेचने वालों के लिए पहचान पत्र पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा राज्य में किसी भी रूप में मीट बेचने वालों के लिए हलाल या झटका का उल्लेख करने के भी निर्देश दिए गए हैं। मीट कारोबारियों, ढाबे, होटल एवं रेस्टोरेंट संचालकों को अपने यहां लिखना होगा कि मीट हलाल का है या फिट झटका। साथ ही उन्हें दुकान का लाइसेंस भी ग्राहकों को प्रदर्शित करना होगा। सीसीटीवी कैमरे भी अनिवार्य रूप से लगाने होंगे।
इसका करना होगा पालन-
भोजन बनाने और परोसने वाले कार्मिकों को अनिवार्य रूप से फेस मास्क/ ग्लव्स/हेड गियर का उपयोग करना होगा।
खाद्य पदार्थों को हैंडल करते समय धूमपान, थूकना और डेयरी उत्पादों को प्रयोग में लाए जाने व छूने से पूर्व नाक खुजाना, बालों में हाथ फेरना, शरीर के अंगों को खुजाना आदि पर नियंत्रण रखें। इसे खाद्य पदार्थों में बैक्टीरियल संक्रमण हो सकता है।
संक्रामक रोग से ग्रसित व्यक्तियों को खाद्य निर्माण/संग्रहण/वितरण स्थलों पर कदापि न रखा जाए।
खाद्य प्रतिष्ठान में कार्यरत कार्मिकों की सूची चिकित्सकीय प्रमाण-पत्र सहित उपलब्ध कराएं।
खाद्य प्रतिष्ठान में कार्यरत कार्मिकों को अनिवार्य रूप से फोटोयुक्त पहचान पत्र निर्गत किया जाए, जिसे कार्यस्थल पर अनिवार्य रूप से पहनना होगा।
खाद्य पदार्थ निर्माण, परोसने व विक्रय करने वाले कार्मिकों को कार्यस्थल पर थूकने और अन्य किसी भी प्रकार की गंदगी फैलाने पर प्रतिबंध।
खाद्य कारोबारी उत्पादन, कच्ची सामग्री का उपयोग और विक्रय का अलग-अलग दैनिक रिकार्ड रखेगा।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 13 अक्टूबर को उत्तराखंड के दौरे पर आ रहे हैं। उनका प्रस्तावित कार्यक्रम शासन को मिल गया है। इसे देखते हुए तैयारियां भी प्रारंभ कर दी गई हैं।
तमाम विभाग भी कसरत में जुटे-
माना जा रहा है कि वह देहरादून में पुलिस में लागू तीन नए कानूनों व साइबर अपराधों की चुनौतियों पर चर्चा के अलावा अन्य विभागों के साथ भी बैठक कर सकते हैं। इसे देखते हुए तमाम विभाग भी कसरत में जुटे हैं। गृह मंत्री शाह 13 अक्टूबर को सुबह जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचेंगे और फिर उत्तरकाशी जिले के हर्षिल के लिए रवाना होंगे।
अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों के बीच भी बिता सकते हैं समय-
वह हर्षिल में वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत संचालित योजनाओं की जानकारी लेंगे। साथ ही अर्द्ध सैनिक बलों के जवानों के बीच भी कुछ समय बिता सकते हैं। इसके बाद वह देहरादून में एफआरआइ में तीन नए कानून और साइबर अपराध की चुनौतियों पर अधिकारियों के साथ विमर्श करेंगे।
अन्य विभागों के साथ भी कर सकते हैं बैठकें-
माना जा रहा है कि अमित शाह अन्य विभागों के साथ भी बैठकें कर सकते हैं। इसे देखते हुए विभाग अपनी-अपनी तैयारियों में जुटे हैं। गृह मंत्री इसी दिन शाम को दिल्ली रवाना होंगे।
अभिनेता परेश रावल से महानिदेशक सूचना ने की मुलाकात-
प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता परेश रावल इन दिनों अपनी नई फिल्म पास्ट टेंस की शूटिंग के लिए देहरादून आए हुए हैं। इस फिल्म का निर्देश अनंत नारायण महादेवन कर रहे हैं। महानिदेशक सूचना और उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी बंशीधर तिवारी ने उनसे मुलाकात की। इस दौरान अभिनेता परेश रावल ने उत्तराखंड में लागू हुई नई फिल्म नीति की सराहना की।
देहरादून-मसूरी रोड पर फिल्म के सेट पर हुई मुलाकात के दौरान अभिनेता परेश रावल ने महानिदेशक सूचना को बताया कि उन्होंने अपनी दो बालीवुड फिल्मों की शूटिंग कुछ समय पहले ही उत्तराखंड में पूरी की है। इनके पोस्ट प्रोडक्शन का कार्य चल रह है। ये जल्द रिलीज होने वाली हैं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में सभी फिल्मों की शूटिंग की अनुमति की प्रक्रिया सरल होने के कारण उत्तराखंड बालीवुड और देश के अन्य राज्यों के लिए संपूर्ण फिल्म फ्रेंडली डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है।
महानिदेशक सूचना बंशीधर तिवारी ने बताया कि सरकार ने नई नीति में फिल्मों के लिए पहले से अधिक अनुदान राशि को शामिल किया है। ओटीटी प्लेटफार्म पर रिलीज होने वाली फिल्मों और वेब सीरीज को भी अनुदान के लिए शामिल किया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार सरकार फिल्म निर्माण से जुड़े प्रत्येक क्षेत्र में रोजगार की गतिविधियों को बढ़ावा देने के साथ ही पर्यटन को भी प्रोत्साहित कर रही है। फिल्म के बारे में बताया गया कि इस फिल्म में आदित्य रावल, आदिल हुसैन, शरीब हाशमी, तनिष्ठा चटर्जी, गगन देव, स्मिता तांबे, सतीश शर्मा व श्रद्धा भट्ट प्रमुख भूमिका में हैं। इस दौरान संयुक्त निदेशक सूचना डा नितिन उपाध्याय भी उपस्थित थे।
15 नवंबर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी एयरपोर्ट से प्रस्तावित हेलिकॉप्टर सेवा में बुजुर्ग और बच्चे भी आदि कैलाश और ओम पर्वत के दर्शन कर सकेंगे। इसके लिए कंपनी ने लगभग एक हफ्ते का सफल ट्रायल पूरा कर लिया है।
जौलीग्रांट हेलिपैड से बदरी-केदार दो धामों के लिए उड़ान भरने वाली हेली कंपनी रुद्राक्ष एविएशन 15 नवंबर से पिथौरागढ़ के नैनी सैनी हवाई अड्डे से भगवान शिव के निवास स्थान आदि कैलाश और ओम पर्वत के लिए हवाई दर्शन सेवा शुरू करने जा रही है। यात्रा में बुजुर्गों के अलावा बच्चे भी भगवान शिव के निवास स्थान के दर्शन कर सकेंगे।
हवाई यात्रा लगभग दो घंटे की होगी। नैनी सैनी एयरपोर्ट से एमआई 17 हेलिकॉप्टर सुबह करीब साढ़े आठ बजे 18 यात्रियों को लेकर उड़ान भरेगा और यह दिन में एक ही फेरा लगाएगा। हेलिकॉप्टर सेवा 15 नवंबर से फरवरी तक संचालित की जाएगी। हेलिकॉप्टर में यात्रा करने वाले सभी यात्रियों को ऑक्सीजन मास्क लगाना होगा।
साथ ही मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट देना अनिवार्य होगा। यात्रा की बुकिंग ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरह से होगी। फिलहाल संबंधित कंपनी ने पर्यटन विभाग और सरकार को यात्रा के संबंध में पूरा शेड्यूल बनाकर दे दिया है।
ऊपर से ही कराए जाएंगे दर्शन-
रुद्राक्ष एविएशन का हेलिकॉप्टर श्रद्धालुओं को दोनों पर्वतों के दर्शन ऊपर से ही कराएगा। ओम पर्वत की ऊंचाई करीब 5,590 मीटर और आदि कैलाश की ऊंचाई करीब 6,638 मीटर है। इस अति दुर्गम पहाड़ में कई मैगनेटिक फील्ड बताए जाते हैं, जिससे यहां चढ़ाई कर यात्रा को काफी कठिन माना जाता है।
आदि कैलाश और ओम पर्वत की यात्रा ऊपर से ही कराई जाएगी, जिसमें बुजुर्ग भी जा सकेंगे। सभी श्रद्धालुओं को मेडिकल फिटनेस देना होगा। यात्रा में करीब सवा दो घंटे का समय लगेगा।
प्रदेश में लगातार चल रही मांग के बीच मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने एलान किया है कि उनकी सरकार वृहद भू-कानून लाने जा रही है। अगले साल बजट सत्र में कानून का प्रस्ताव लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि 250 वर्ग मीटर आवासीय और 12.50 एकड़ अन्य भूमि के नियम तोड़ने वालों की भूमि जांच के बाद सरकार में निहित की जाएगी. उत्तराखंड में हिमाचल की तर्ज पर सशक्त भू कानून लागू करने की मांग तेजी से हो रही है। इसके लिए लगातार रैलियां और प्रदर्शन भी राजधानी देहरादून से लेकर पहाड़ों तक हो रहे हैं। लोग उत्तराखंड में जल्द से जल्द एक सशक्त भू-कानून लागू करने की मांग कर रहे हैं।
कब और क्यों उठी उत्तराखंड में भू-कानून की मांग ?
उत्तराखंड में सबसे पहले एनडी तिवारी सरकार में भू-कानून बना था। इस कानून में दो बार बदलाव किया गया। जिसके बाद से ही लोगों में आक्रोश है और इसी के साथ प्रदेश में एक सशक्त भू-कानून की मांग उठी। बता दें कि एनडी तिवारी सरकार में उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन और भूमि व्यवस्था सुधार अधिनियम, 1950 (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश 2001) अधिनियम की धारा-154 में संशोधन कर बाहरी प्रदेशों के व्यक्ति लिए नियम बनाया गया था। जिसके मुताबिक बाहरी प्रदेशों के लोग उत्तराखंड में 500 वर्ग मीटर कृषि योग्य भूमि खरीद सकते थे।
जबकि उद्योगों के लिए भी एनडी तिवारी सरकार में 12 एकड़ जमीन खरीदने का नियम तय हुआ था। लेकिन एनडी तिवारी सरकार में बनाए गए इस भू-कानून में साल 2007 में खंडूरी सरकार में बदलाव किया गया। जनरल बीसी खंडूरी की सरकार ने भू-कानून में संशोधन कर उसे और भी सख्त बना दिया। इसके तहत कृषि योग्य जमीन का दायरा 500 वर्ग मीटर से कम कर 250 वर्ग मीटर कर दिया गया था।
त्रिवेंद्र सरकार में भू-कानून में हुए थे बड़े बदलाव-
खंडूरी सरकार में बदलाव के बाद एक बार फिर से त्रिवेंद्र रावत सरकार में फिर से बड़े बदलाव किए गए। उत्तराखंड में पर्वतीय क्षेत्रों में भी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए ये बदलाव किए गए थे। इसमें 12 एकड़ उद्योगों की जमीन खरीदने को असीमित किया गया। त्रिवेंद्र सरकार में लागू हुए भू-कानून के बाद से लोगों में सबसे ज्यादा आक्रोश है। इसी के बाद से प्रदेश में एक सशक्त भू-कानून की मांग की जा रही है। अब ये मांग इतनी तेज हो गई है।
बता दें कि उत्तराखंड में वर्तमान समय में उद्योगों के लिए जहां असीमित जमीन खरीदने का प्रावधान है। तो वहीं कृषि योग्य भूमि पर 250 वर्ग मीटर जमीन बाहरी प्रदेशों के लोग खरीद सकते हैं। शहरी क्षेत्र में जो जमीन कृषि योग्य भूमि के अंतर्गत नहीं आती है वहां पर भी असीमित जमीन खरीदने का प्रावधान जानकार बताते हैं।
उत्तराखंड में भी हिमाचल जैसे भू-कानून की मांग-
उत्तराखंड में बीते कुछ सालों में भू-कानून की मांग तेज हो गई है। प्रदेश में लोग हिमाचल प्रदेश जैसा सख्त भू-कानून बनाने की मांग कर रहे हैं। बता दें कि हिमाचल प्रदेश में में जमीन खरीद का टेनेंसी एक्ट लागू है। इस एक्ट की धारा-118 के तहत हिमाचल प्रदेश में कोई भी गैर हिमाचली व्यक्ति जमीन नहीं खरीद सकता है। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की इजाजत के बाद ही कोई गैर हिमाचली यहां गैर कृषि जमीन खरीद सकते हैं। लेकिन जमीन खरीदने का मकसद भी बताना होगा।
उत्तराखंड उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश और भूमि व्यवस्था अधिनियम के तहत राज्य से बाहर का व्यक्ति बिना अनुमति के उत्तराखंड में 250 वर्गमीटर जमीन खरीद सकता है। लेकिन राज्य का स्थायी निवासी के लिए जमीन खरीदने की कोई सीमा नहीं है। वर्तमान में लागू भू-कानून उत्तराखंड वासियों पर लागू नहीं है। यह कानून केवल बाहरी राज्यों के लोगाें पर लागू है। उत्तराखंड के स्थायी निवासी कितनी भी जमीन खरीद सकते हैं।
घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 16 सितम्बर 2024 को की गई घोषणा के क्रम में राज्य के घरेलू श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी प्रदान करने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।
घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत-
सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी निम्नानुसार प्रदान की जाएगी। हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) के घरेलू श्रेणी के ऐसे विद्युत उपभोक्ता जिनका मासिक विद्युत उपभोग 200 यूनिट तक है को लागू विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) का निर्धारण प्रचलित नियमों के अनुसार सम्बन्धित क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई के आधार पर करते हुए ही योजना का लाभ प्रदान किया जायेगा।
सीएम धामी की घोषणा के 10 दिन के भीतर शासनादेश जारी-
अन्य क्षेत्रों के घरेलू श्रेणी के ऐसे उपभोक्ता जिनका अनुबन्धित विद्युत भार 1 किलोवाट तक तथा मासिक विद्युत उपभोग 100 यूनिट तक है, को विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। ये सब्सिडी 01 सितम्बर, 2024 से की गई विद्युत खपत पर अनुमन्य होगी। बता दें कि सीएम धामी की घोषणा के 10 दिन के भीतर शासनादेश जारी कर दिए गए हैं।
जनता के हितों को ध्यान में रख सरकार कर रही काम-
राज्य सरकार जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। बिजली के बिल में सब्सिडी का निर्णय राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे राज्य के नागरिकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और ऊर्जा के उचित उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्वतीय हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विशेष रूप से राहत मिलेगी।
प्रदेश में 11 सरकारी विभागों में खाली पदों पर बंपर नौकरियां निकलने वाली हैं। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग 15 सितंबर से 4,400 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसमें पुलिस, वन आरक्षी समेत इंटर और स्नातक स्तरीय पदों पर नौकरी के अवसर मिलेंगे।
इसके अलावा आयोग की ओर से आवेदन से लेकर परीक्षा और परिणाम जारी करने का शेड्यूल तैयार करने में जुटा है। प्रदेश सरकार ने अब तक कई विभागों में 16 हजार पद पर चयन प्रक्रिया पूरी कर युवाओं को नौकरी दी है, जो तीन साल के भीतर सबसे अधिक नौकरी देने का रिकॉर्ड है।
सीएम धामी चयनित युवाओं को नियुक्तिपत्र देकर सम्मानित किया। अब सरकार ने राज्य के 11 विभागों में खाली पदों पर 4,400 भर्ती करने का निर्णय लिया है। सीएम ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को विभागों से मिले खाली पदों के प्रस्ताव पर पारदर्शिता और समय सीमा के भीतर भर्ती करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया, 11 विभागों से करीब 4,400 खाली पदों के अधियाचन मिले हैं। इन पदों की भर्ती की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस माह के 15 सितंबर से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
इन पदों पर मिलेगी नौकरी-
पुलिस आरक्षी के 2,000, वन आरक्षी के 700, इंटर स्तरीय सींचपाल, कनिष्ठ सहायक, राजस्व सहायक, मेट, कार्य पर्यवेक्षक के 1,200, वैयक्तिक सहायक के 280, वैज्ञानिक सहायक के 50, स्नातक स्तरीय 50, सहायक विकास अधिकारी के 40, वाहन चालक 25, लाइब्रेरियन के 10, प्राथमिक शिक्षक एसटी के 15, आईटीआई के कई ट्रेड पर 35 पदों पर भर्ती।
प्रदेश में 4,400 पदों पर युवाओं को नौकरी मौका मिलने जा रही है। अब तक 16 हजार युवाओं को विभागों में नौकरी मिल चुकी है। सरकार ने राज्य में देश का सबसे सख्त नकलरोधी कानून बनाने के बाद प्रतिभावान युवाओं को अब चार-चार नौकरियों में चयन हो रहा है। पहले नकल माफिया की ओर से नौकरी का सौदा करने से एक ही परिवार के सदस्यों को चार-चार नौकरियां मिलती थी। हमने संकल्प लिया कि उत्तराखंड के हितों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री
प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर महिला-बालिकाओं के स्वरोजगार के लिए सरकार 50 फीसदी अनुदान (सब्सिडी) पर बाइक, स्कूटी, ऑटो और कार देगी। वहीं, शेष 50 फीसदी का ऋण दिया जाएगा। महिला सारथी योजना के तहत पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले से योजना की शुरूआत होगी।
महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक प्रशांत आर्य के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से निर्भया फंड से इस योजना को वित्त पोषित किया जाएगा। परिवहन विभाग इस तरह की महिला-बालिकाओं को वाहन चलाने का मुफ्त प्रशिक्षण और लाइसेंस देगा।
पहले चरण के बाद योजना अन्य जिलों में होगी शुरू-
महिला सारथी योजना के तहत शुरूआत में चार जिलों में 200 महिलाओं को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना को लेकर विभाग की तीन बैठकें हो चुकी हैं। दो जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस मसले पर अधिकारियों ने जानकारी दी थी। पहले चरण के बाद योजना को अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के विजन 2025 के लिए विभाग की ओर से इस नवाचारी योजना का प्रस्ताव है। योजना को केंद्र सरकार के निर्भया फंड से पोषित किया जाएगा। इससे जहां एक और महिला-किशोरियों में सुरक्षा का भाव पैदा होगा। वहीं, दूसरी ओर वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। – आरती बलोदी, राज्य नोडल अधिकारी, केंद्र पोषित योजनाएं
उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश का कहर जारी है. चमोली के पगनो गांव में बारिश ने कहर बरपाया हुआ है. गुरुवार देर रात को मूसलाधार बारिश के बाद मलबा आने से 4 मकान और 2 गौशाला क्षतिग्रस्त हो गए. ग्रामीण किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से बाहर निकल आए.
पगनो गांव में मलबा आने से चार मकान क्षतिग्रस्त-
गुरुवार की रात को पगनो गांव में मलबा आने से 2 गौशाला और 4 मकान क्षतिग्रस्त हो गए. किसी तरह ग्रामीण अपनी जान बचाकर इधर-उधर भागे. आपको बता दें कि लगातार पिछले तीन साल से पगनो गांव में भूस्खलन हो रहा है जिससे गांव के 53 परिवार खतरे के साए में जी रहें हैं. गांव के लोगों में दहशत का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि देर रात बारिश के बाद अचानक घरों में तेजी से मलबा आ घुसा.
दहशत में ग्रामीण-
ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के चलते लगातार मलबा गांव में आ रहा है जिसके कारण खेत और रास्ते मलबे से भरे हुए हैं. लोगों का कहना है कि रात को यदि बारिश होती है तो सभी लोग दहशत में आ जाते हैं.
इन जिलों में अलर्ट जारी-
मौसम निदेशक के अनुसार शुक्रवार को देहरादून, रुद्रप्रयाग, टिहरी गढ़वाल, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत और नैनीताल जिले में कहीं-कहीं गर्जन के साथ आकाशीय बिजली चमकने और बारिश के तीव्र दौर की संभावना है. मौसम वैज्ञानिकों ने इन जिलों के लिए बारिश का येलो अलर्ट जारी किया है. जबकि उत्तरकाशी, चमोली, अल्मोड़ा, ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार जिले में हल्की से मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है.