Category Archive : राष्ट्रीय खबर

विधानसभा उप चुनाव के लिए आज से नामांकन, 10 जुलाई को मतदान, 13 जुलाई को होगी मतगणना।

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राज्य में विधानसभा उप चुनाव के लिए आज से नामांकन शुरू होने जा रहे हैं। 21 जून तक प्रत्याशी नामांकन कर सकते हैं। चुनाव आयोग ने इसकी तैयारी पूरी कर ली है।

चुनाव आयोग के मुताबिक, शुक्रवार को बदरीनाथ और मंगलौर विधानसभा उप चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। इसके साथ ही नामांकन पत्रों की बिक्री, नामांकन भी शुरू हो जाएगा जो 21 जून तक चलेगा। 24 जून तक नामांकन पत्रों की जांच होगी। जो प्रत्याशी नाम वापस लेना चाहेंगे, उनके लिए नाम वापसी की अंतिम तिथि 26 जून तक होगी।

दोनों विधानसभा सीट पर 10 जुलाई को मतदान होगा और 13 जुलाई को मतगणना होगी। मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. बीवीआरसी पुरुषोत्तम ने बताया, विस उप चुनाव के लिए बदरीनाथ में 210 पोलिंग बूथ पर एक लाख दो हजार 145 मतदाता, 2,566 सर्विस मतदाता हैं। मंगलौर विधानसभा क्षेत्र में 132 पोलिंग बूथ और एक लाख 19 हजार 930 मतदाता व 255 सर्विस मतदाता होंगे।

Assembly Election : इस बार आम आदमी पार्टी लड़ेगी बिहार विधानसभा चुनाव; संजय सिंह ने दी जानकारी,

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अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी बिहार में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आप के राज्यसभा सांसद संजय कुमार सिंह ने स्पष्ट कहा है कि बिहार में हमारी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। आम आदमी पार्टी के चुनावी तैयारी शुरू कर दे। ताकि आगामी चुनाव के बाद अरविंद केजरीवाल द्वारा दिल्ली में दिए जा रहे गुड गवर्नेंस का लाभ बिहार को भी मिल सके।

राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को देंगे चुनौती-
बताया जा रहा है कि इंडी गठबंधन की सहयोगी पार्टियों में से एक आम आदमी पार्टी बिहार में भी गठबंधन धर्म का पालन करेगी। इंडी गठबंधन में सीट बंटवारे के फॉर्मूला तय होने के बाद ही आप अपनी सीटों का खुलासा करेगी। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल की पार्टी बिहार विधानसभा में उतरती है तो सीधे तौर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को ही टक्कर देगी। खास तौर पर केजरीवाल सीएम नीतीश कुमार की पार्टी और पीएम मोदी की नेतृत्व वाली भाजपा को चुनौती देंगे।

 

पिछले साल पटना आए थे केजरीवाल-
आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पिछले साल 22 जून को पटना आए थे। केजरीवाल को सीएम नीतीश कुमार ने न्योता दिया था। उस वक्त सीएम नीतीश कुमार इंडी गठबंधन के साथ थे। केजरीवाल भी इंडी गठबंधन की मीटिंग में शामिल होने आए थे। हालांकि, उस वक्त उन्होंने बिहार विधानसभा के बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं थी। केवल लोकसभा पर फोकस करने की बात कही। अब उनकी पार्टी के सांसद संजय सिंह के बयान ने सियासी गलियारे में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि, आम आदमी पार्टी इससे पहले भी बिहार विधानसभा चुनाव अपना भाग्य आजमा चुकी है। लेकिन, उसमें सफलता हाथ नहीं लगी थी।  

Rahul Gandhi: क्या राहुल गांधी बनेंगे नेता विपक्ष?

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कांग्रेस की वर्किंग कमेटी की बैठक शनिवार को दिल्ली में है। इस बैठक में पार्टी के सभी नवनिर्वाचित सांसद राहुल गांधी से नेता विपक्ष पद स्वीकार करने की मांग करेंगे। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि इससे राहुल गांधी लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने होंगे और वे उन मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठा सकेंगे, जिनके आधार पर पार्टी ने इन चुनावों में बेहतर सफलता हासिल की है। राहुल गांधी लगातार पांच साल तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमलावर रहेंगे, तो इससे आने वाले चुनाव में वे विपक्षी गठबंधन की तरफ से प्रधानमंत्री पद के स्वाभाविक दावेदार होंगे। इससे पार्टी को आगे के चुनावों में लाभ मिलेगा।


संविधान के अनुसार नेता विपक्ष आधिकारिक पद होता है। इसे कैबिनेट मंत्री के बराबर का दर्जा और उसे मिलने वाली सभी सुविधाएं हासिल होती हैं। नेता विपक्ष ईडी-सीबीआई के प्रमुख की नियुक्ति सहित कई महत्त्वपूर्ण समितियों में शामिल होता है। नेता विपक्ष बनने के बाद राहुल गांधी लोकसभा के पटल से लेकर संसद के बाहर तक मजबूती के साथ अपनी बात रख सकेंगे और महत्त्वपूर्ण मुद्दों को उठा सकेंगे।

उत्तर-दक्षिण भारत का पार्टी में संतुलन-
साथ ही राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने से पार्टी में उत्तर और दक्षिण भारत का संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी। अभी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और महासचिव केसी वेणुगोपाल दक्षिण से हैं, जबकि उत्तर भारत से पार्टी का कोई बड़ा नेता पार्टी के बड़े पद पर मौजूद नहीं है। दिग्विजय सिंह, आनंद शर्मा जैसे उत्तर भारत के नेता चुनाव हार गए हैं, तो अशोक गहलोत जैसे नेता चुनाव में उतरे ही नहीं थे। इससे उत्तर भारत का पार्टी में प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ गया है।

गांधी परिवार कांग्रेस में सबसे मजबूत हैं, लेकिन आधिकारिक तौर पर सोनिया गांधी या राहुल गांधी पार्टी के किसी आधिकारिक पद पर नहीं हैं, जबकि प्रियंका गांधी महासचिव हैं। चुनावों की दृष्टि से उत्तर भारत में पार्टी का मजबूत होना जरूरी है और इसको ध्यान में रखकर ही राहुल गांधी को नेता विपक्ष का पद स्वीकार करने का आग्रह किया जा रहा है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी से यह आग्रह किया जा रहा है कि वे रायबरेली की सीट भी अपने पास रखें। इससे भी पार्टी को उत्तर भारत में मजबूत करने में मदद मिलेगी। इसके पहले चर्चा थी कि राहुल गांधी रायबरेली की सीट छोड़ेंगे और प्रियंका गांधी इस सीट पर चुनाव लड़कर परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाएंगी।

गरीब, वंचित, बेरोजगारों की आवाज है राहुल गांधी- विश्व विजय सिंह-
उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता विश्व विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी इस समय देश की राजनीति में गरीबों, वंचितों, बेरोजगार युवाओं, आदिवासियों, अनुसूचित जातियों-जनजातियों और अल्पसंख्यकों की सबसे मजबूत आवाज बनकर उभरे हैं। कांग्रेस ने इन्हीं वर्गों के मुद्दों को उठाते हुए लोकसभा चुनाव लड़ा और सफलता हासिल की। ऐसे में यदि राहुल गांधी नेता विपक्ष की भूमिका में होंगे, तो वे संसद से लेकर सड़क तक सरकार पर लगातार इन वर्गों के लिए काम करने का दबाव बनाने में सफल होंगे। इससे कांग्रेस पार्टी को उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।

विश्व विजय सिंह ने कहा कि राहुल गांधी के नेता विपक्ष बनने से केवल कांग्रेस को ही लाभ नहीं मिलेगा। इंडिया गठबंधन के सभी सहयोगी दल कमोबेस इन्हीं वर्गों के मुद्दों पर चुनाव लड़ते रहे हैं। इसलिए यदि राहुल गांधी इन मुद्दों को उठाएंगे तो इससे गठबंधन के सभी सहयोगियों को भी लाभ होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि इस बार एनडीए के 293 सीटों के मुकाबले इंडिया गठबंधन 234 सीटों तक पहुंचने में सफल रहा है, जो कि बहुमत के बहुत करीब है। उन्होंने दावा किया कि इन वर्गों की आवाज उठाकर हम अगली बार केंद्र में सरकार बनाने में सफल रहेंगे।

 

 

 

PM Modi: NDA संसदीय दल की बैठक में पीएम मोदी ने कहा- ‘सरकार चलाने के लिए बहुमत आवश्यक और देश चलाने के लिए सर्वमत।

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल ने नरेंद्र मोदी को अपना नेता चुना। भाजपा के वरिष्ठ भाजपा नेता राजनाथ सिंह ने लोकसभा में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन और भाजपा के नेता के रूप में नरेंद्र मोदी के नाम का प्रस्ताव रखा। इसके बाद वरिष्ठ भाजपा नेता अमित शाह, नितिन गडकरी और राजद के साथी तेदेपा के चंद्रबाबू नायडू, जदयू के नीतीश कुमार, शिवसेना के एकनाथ शिंदे समेत अन्य नेताओं ने प्रस्ताव का समर्थन किया।

 

इस दौरान कार्यवाहक पीएम मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत करते हुए कहा कि जो साथ विजय होकर आए हैं, वो सभी अभिनंदन के अधिकारी हैं। जिन लाखों कार्यकर्ताओं ने दिन-रात परिश्रम किया है, उन लोगों ने न दिन देखा, न रात देखी। इतनी भयंकर गर्मी में हर दल के कार्यकर्ता ने जो पुरुषार्थ, परिश्रम किया है, मैं आज संविधान सदन से उन्हें सिर झुकाकर प्रणाम करता हूं। साथियों मेरा बहुत सौभाग्य है कि एनडीए के नेता के रूप में आप सब साथियों ने सर्वसम्मति से चुनकर मुझे नया दायित्व दिया है। इसके लिए मैं आपका बहुत-बहुत आभारी हूं।

 

सांसदों-सहयोगियों के लिए कहा, जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है-PM
उन्होंने कहा, ”व्यक्तिगत जीवन में मुझे जवाबदारी का एहसास करता हूं। 2019 में जब आप सभी ने मुझे नेता के रूप में चुना था, तब मैंने एक बात पर बल दिया था- विश्वास। आज जब आप मुझे फिर से एक बार ये दायित्व दे रहे हैं तो इसका मतलब है कि हमारे बीच विश्वास का सेतु बहुत मजबूत है। अटूट रिश्ता विश्वास के मजबूत धरातल पर है। ये पल भावुक करने वाला भी है। आप सबके प्रति जितना धन्यवाद करूं, उतना कम है।”

एनडीए के लिए कहा- महान लोकतंत्र की ताकत देखिए- PM
पीएम मोदी ने कहा, ”बहुत कम लोग इन बातों की चर्चा करते हैं, उन्हें शायद सूट नहीं करता होगा। इतने महान लोकतंत्र की ताकत देखिए। एनडीए को आज देश के 22 राज्यों में लोगों ने सरकार बनवाकर सेवा का मौका दिया है। हमारा गठबंधन सच्चे अर्थ में भारत की असली आत्मा, भारत की जड़ों में जो रचा-बसा है, उसका प्रतिबिंब है। हमारे देश में 10 ऐसे राज्य हैं, जहां आदिवासी बंधुओं की संख्या प्रभावी रूप से है, निर्णायक रूप से है। जहां आदिवासियों की आबादी ज्यादा है, ऐसे 10 राज्यों में से सात में एनडीए सेवा कर रहा है। हम सर्वधर्म समभाव वाले संविधान को समर्पित हैं। गोवा हो, पूर्वोत्तर हो, जहां बहुत बड़ी मात्रा में ईसाई भाई-बहन रहते हैं, उन राज्यों में भी एनडीए के रूप में हमें सेवा का अवसर मिला है।”

‘देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी’- PM
पीएम मोदी ने कहा, ”हिंदुस्तान के राजनीतिक इतिहास में और गठबंधन की राजनीति के इतिहास में चुनाव पूर्व गठबंधन इतना कभी मजबूत नहीं हुआ, जितना एनडीए हुआ है। यह गठबंधन की जीत है। हमने बहुमत हासिल किया है। मैं कई बार कह चुका हूं। सरकार चलाने के लिए बहुमत आवश्यक है, लोकतंत्र का वही एक सिद्धांत है। देश चलाने के लिए सर्वमत बहुत जरूरी होता है। मैं आज देशवासियों को विश्वास दिलाना चाहता हूं कि आपने जिस तरह बहुमत देकर सरकार चलाने का सौभाग्य दिया है, हम सभी का दायित्व है कि सर्वमत का सम्मान कर देश को आगे ले जाने की कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। एनडीए को करीब-करीब तीन दशक हो चुके हैं। आजादी के 75 साल में तीन दशक एनडीए का होना सामान्य घटना नहीं है। विविधता के बीच तीन दशक की यह यात्रा बहुत बड़ी मजबूती का संदेश देती है। आज गर्व के साथ कहता हूं कि एक समय संगठन के कार्यकर्ता के रूप में मैं इस गठबंधन का हिस्सा था और आज सदन में बैठकर आपके साथ काम करते-करते मेरा भी नाता इससे तीस सालों का हो गया है। मैं कह सकता हूं कि यह सबसे सफल गठबंधन है। पांच साल का कार्यकाल होता है, लेकिन इस गठबंधन ने तीस साल में से पांच-पांच साल के तीन कार्यकाल पूरे किए हैं और गठबंधन चौथे कार्यकाल में प्रवेश कर रहा है।”

नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह की तारीख में बदलाव? अब इस दिन मोदी तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की लेंगे शपथ।

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राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन यानी एनडीए को लोकसभा चुनाव में 293 सीटें मिली है। नरेंद्र मोदी को एनडीए का नेता चुना गया। सभी घटक दलों ने अपने समर्थन का पत्र सौंप दिया है। अब मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। हालांकि उनके शपथ ग्रहण समारोह की तारीख को लेकर अभी तक संशय बना हुआ है। बताया जा रहा है कि शपथ ग्रहण समारोह की तारीख में बदलाव कर दिया गया है। अब मोदी 9 जून को तीसरी बार भारत के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेंगे। शपथ ग्रहण समारोह को भव्य बनाने की तैयारियां तेजी से शुरू हो चुकी हैं।

राष्ट्रपति को सौंपा था त्यागपत्र-
मोदी ने शपथ ग्रहण समारोह से पहले बुधवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना त्यागपत्र सौंप दिया था। राष्ट्रपति ने नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रियों के त्यागपत्र को स्वीकार कर लिया और साथ ही नए सरकार के गठन तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहने का आग्रह किया।

21 नेताओं ने हस्ताक्षर करके मोदी को गठबंधन का नेता स्वीकार किया-


एक दिन पहले ही एनडीए ने सर्वसम्मति से नरेंद्र मोदी को अपना नेता मान लिया है। नई दिल्ली में बुधवार को हुई बैठक में एनडीए के 21 नेताओं ने एक पत्र पर हस्ताक्षर करके मोदी को अपना नेता स्वीकार किया। जिससे नरेंद्र मोदी के एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनने का रास्ता साफ हो गया है। बैठक में सभी नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को पिछले 10 सालों में उनके कार्यकाल और देश में विकास कार्यों के लिए उन्हें बधाई भी दी है।

भारत निर्वाचन आयोग ने मंगलवार को लोकसभा 2024 के चुनाव परिणाम का एलान किया  थे। इसमें भाजपा को सबसे ज्यादा 240 सीटें और इसके बाद दूसरे नंबर पर 99 सीटों के साथ कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार के चुनाव में भाजपा को 32 सीटों का नुकसान हुआ है। 2014 के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिली।

BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष की दौड़ में शिवराज सिंह चौहान भी शामिल, कांग्रेस ने कहा शिवराज PM पद के दावेदार होने चाहिए।

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लोकसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद भाजपा के नेतृत्व वाले NDA ने सरकार बनाने की कवायद तेज कर दी है। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान समेत सभी नवनिर्वाचित सांसदों को अब दिल्ली तलब किया गया है। इस बीच अटकलें लगाई जा रहे हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नई कैबिनेट में शिवराज चौहान को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है। जेपी नड्डा का कार्यकाल भी 30 जून को खत्म होने वाला है। इस वजह से शिवराज को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की अटकलें भी तेज हो गई हैं।

 

भले ही भाजपा को अपने दम पर बहुमत न मिला हो, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को स्पष्ट बहुमत मिल चुका है। इस वजह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तीसरी बार एनडीए सरकार बनने का रास्ता भी साफ हो गया है। सरकार बनाने की तैयारियों के बीच भाजपा ने अपने सभी नवनिर्वाचित सांसदों को दिल्ली तलब किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी दिल्ली के लिए रवाना होने वाले हैं। खबरें यह भी आ रही हैं कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और खजुराहो से सांसद वीडी शर्मा भी दिल्ली पहुंच रहे हैं। दिल्ली में शुक्रवार को भाजपा संसदीय दल की बैठक होनी है। इससे पहले भाजपा की गुरुवार को बैठक प्रस्तावित है। इसमें मध्य प्रदेश से चौहान, डॉ. यादव समेत बड़े नेता शामिल होने वाले हैं। मध्य प्रदेश की सभी 29 सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की है। 1984 के बाद पहला मौका है जब मध्य प्रदेश में किसी एक पार्टी ने लोकसभा की सभी सीटों पर जीत हासिल की है।

कांग्रेसियों की मांगः शिवराज को बनाया जाए पीएम-

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 8.21 लाख वोट से जीत दर्ज की है। वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जीत 1.52 लाख मतों से हुई है। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पर लिखा कि मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ज्यादा शिवराज सिंह चौहान छाए हुए है। शिवराज ओबीसी हैं, मोदी से आठ साल युवा हैं। खाटी संघी हैं। मोदी सिर्फ 1.5 लाख से चुनाव जीते, जबकि शिवराज 8.21 लाख से जीते हैं। दिल्ली का मौसम बदल रहा है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा ने भी लिखा कि शिवराज सिंह चौहान परिपक्व नेता हैं। विधानसभा चुनाव की जीत का भी कारण रहे थे। आरएसएस के प्रिय हैं। कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में 66 और लोकसभा चुनाव में 0 करने के मुख्य किरदार हैं। पूर्व सांसद उदित राज ने लिखा कि देशहित में राहुल गांधी जी या मल्लिकार्जुन खरगे जी को पीएम बनना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो पाता तो अखिलेश यादव या चंद्रबाबू नायडू या नीतीश कुमार को पीएम बनना चाहिए। भाजपा का पीएम नहीं होना चाहिए। अगर होता है तो नितिन गडकरी या शिवराज सिंह चौहान बनें।

शिवराज की संगठन या सत्ता में बड़ी भूमिका तय –

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान छठी बार विदिशा से लोकसभा का चुनाव जीते हैं। वह सात बार विधायक और प्रदेश के चार बार मुख्यमंत्री रहे हैं। मध्य प्रदेश में भाजपा को सभी 29 पर जीत मिली है। इसका एक कारण शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते शुरू हुई लाडली बहना को भी बताया जा रहा है।

नड्डा का कार्यकाल 30 जून तक –

जेपी नड्डा 2012 में राज्यसभा के सदस्य बने थे। 2014 में जब अमित शाह ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाला तो नड्डा को संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया था। 2019 में अमित शाह गृहमंत्री बने तो नड्डा को भाजपा का राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया। 2020 में उन्हें फुलटाइम अध्यक्ष चुना गया। वैसे, भाजपा में राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यकाल तीन साल का होता है और किसी भी अध्यक्ष को लगातार दो कार्यकाल ही मिल सकते हैं। नड्डा का कार्यकाल पहले ही खत्म हो चुका है। लोकसभा चुनावों को देखते हुए जून 2024 तक उनका कार्यकाल बढ़ाया गया था। इसका मतलब है कि जून के अंत से पहले ही भाजपा के नए अध्यक्ष का चुनाव हो जाएगा।

Uttarakahnd: सहस्त्रताल ट्रैक पर 22 सदस्यीय दल में से 9 ट्रैकर्स की मौत, 10 ट्रैकर्स सुरक्षित, द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन के बाद दूसरा बड़ा हादसा।

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उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक पर गए 22 सदस्यीय दल में से नौ ट्रैकर्स की मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित वापस लाया जा चुका है। वर्ष 2022 में हुए निम के द्रौपदी का डांडा हिमस्खलन हादसे के बाद यह दूसरा बड़ा हादसा है।

चार अक्तूबर 2022 को निम के इतिहास में वह तारीख है जिसने निम प्रबंधन को कभी न भूलने वाला गम दिया। हादसे में निम के 34 प्रशिक्षुओं का दल द्रौपदी का डांडा-2 चोटी आरोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आ गया था जिसमें कुल 27 लोगों की मौत हो गई थी। वहीं दो लोग अब भी लापता चल रहे हैं।

इनमें उत्तराखंड से नौसेना में नाविक विनय पंवार व हिमाचल निवासी लेफ्टिनेंट कर्नल दीपक वशिष्ट शामिल थे। हालांकि उस दौरान निम के साथ एसडीआरएफ की टीम ने दोनों लापता लोगों की खोजबीन के लिए माइनस 25 डिग्री तापमान में भी विशेष अभियान चलाया।

अब एक और हादसे के खबर उत्तरकाशी-टिहरी जनपद की सीमा पर करीब 14500 फीट की ऊंचाई पर स्थित सहस्त्रताल ट्रैक से आई।
कल मंगलवार को चार ट्रैकर की ठंड लगने से मौत हो गई। वहीं आज पांच ट्रैकर्स की और मौत हो गई। दस ट्रैकर्स को सुरक्षित लाया जा चुका है। मौसम खराब होने के कारण ट्रैकर्स रास्ता भटक गए थे। जिले की ट्रैकिंग एजेंसियों के माध्यम से जिला आपदा प्रबंधन को इसकी सूचना मिली। जिससे विभाग ने रेस्क्यू के लिए कार्रवाई शुरू कर दी है।
 29 मई को एक 22 सदस्यीय दल मल्ला-सिल्ला से कुश कुल्याण बुग्याल होते हुए सहस्त्रताल की ट्रैकिंग के लिए निकला था। दो जून को यह दल सहस्त्रताल के कोखली टॉप बेस कैंप पहुंचा।
तीन जून को वह सहस्त्रताल के लिए रवाना हुए। वहां अचानक मौसम खराब होने, घने कोहरे और बर्फबारी के बीच ट्रैकर फंस गतए। पूरी रात उन्हें ठंड में बितानी पड़ी। ट्रैकर्स में से किसी ने इसकी सूचना दल को ले जाने वाली गढ़वाल माउंटनेरिंग एवं ट्रैकिंग एजेंसी के मालिक को दी। बताया कि ठंड लगने से चार ट्रैकर की मौत हो गई है जबकि सात की तबीयत खराब है और 11 वहां फंसे हुए हैं।

Chardham Yatra 2024: चारधाम यात्रा में लगातार बढ़ रही है श्रद्वालुओं की भीड़, अब तक 15.67 लाख श्रद्धालु कर चुके है दर्शन। 

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Chardham Yatra 2024: आज से शुरू हुए ऑफलाइन पंजीकरण, एक दिन में 3000 लोगों को अनुमति।

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चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में काउंटर पर ऑफलाइन पंजीकरण आज एक जून से शुरू हो गए हैं। हरिद्वार में चार धाम यात्रा के पंजीकरण केंद्र पर 12 बजे से पहले ही स्लॉट खत्म होते ही सुबह से खड़े यात्रियों ने जमकर हंगामा कर दिया। हंगामा इस कदर बढ़ गया कि यात्रियों को समझाने के लिए पुलिस को मौके पर आना पड़ा।

धामों में भीड़ बढ़ने से प्रशासन ने 13 मई को ट्रांजिट कैंप में ऑफलाइन पंजीकरण पर रोक लगा दी थी। इसके बाद 15-16 मई को पंजीकरण पर रोक जारी रही। बाद में यह तिथि 19 मई फिर 31 मई तक बढ़ा दी गई। इससे तीर्थयात्रियों को ऋषिकेश स्थित ट्रांजिट कैंप में पंजीकरण के लिए 12-12 दिन इंतजार करना पड़ा। कई तीर्थयात्री अपने घरों को लौट गए थे।

23 मई से प्रशासन ने अस्थायी पंजीकरण की व्यवस्था की है। अस्थायी पंजीकरण का कोटा 1,000 से कई बार में बढ़ाकर वर्तमान में 4,500 है। शुक्रवार को भी तीर्थयात्रियों से अस्थायी पंजीकरण के फॉर्म जमा करवाए गए। उधर, चार धाम यात्रा प्रशासन के ओएसडी नरेंद्र सिंह क्वीरियाल ने बताया, शनिवार से ट्रांजिट कैंप में चारधाम की यात्रा पर जाने वाले तीर्थयात्रियों का काउंटर पर ऑफलाइन पंजीकरण किया जाएगा।

प्रदेश सरकार ने चारधाम यात्रा के लिए ऋषिकेश और हरिद्वार में ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन खोल दिए हैं। शनिवार से एक दिन में 3000 श्रद्धालुओं के ऑफलाइन पंजीकरण होंगे। सरकार ने यह निर्णय गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल के स्थलीय निरीक्षण के बाद लिया है।
शुरुआत में ऋषिकेश में 1000 और हरिद्वार में 500 श्रद्धालुओं के ऑफलाइन पंजीकरण किए गए। लेकिन धामों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने से सरकार को ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन पर रोक लगानी पड़ी। रोक की अवधि को 31 मई तक बढ़ाया गया। साथ ही गढ़वाल आयुक्त और आईजी गढ़वाल को निर्देश दिए गए कि वे वास्तविक स्थिति का निरीक्षण करने के बाद बताएं कि ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन खोले जाएं या नहीं।

Kedarnath: केदारनाथ धाम में अब VVIP और बुजुर्ग कर सकेंगे SUV की सवारी, चिनूक हेलीकॉप्टर से पहुंचा वाहन।

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