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Chamoli: 56 साल बाद सैनिक की पार्थिव देह पहुंचेगी गांव, बर्फ में था शव सुरक्षित, कई साल राह देखती रहीं पत्नी।

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चमोली जिले के थराली तहसील के गांव कोलपुड़ी के लापता सैनिक की पार्थिव देह 56 साल बाद अपने गांव पहुंचेगी। गांव के नारायण सिंह वर्ष 1968 में हिमाचल प्रदेश के रोहतांग दर्रे में वायुसेना के एएन-12 विमान दुर्घटनाग्रस्त होने पर लापता हो गए थे। 56 साल बाद जिन चार सैनिकों के अवशेष मिले हैं उनमें एक कोलपुड़ी गांव के नारायण सिंह का शव भी शामिल है।

कोलपुड़ी गांव के प्रधान और नारायण सिंह के भतीजे जयवीर सिंह ने बताया कि सोमवार को सेना के अधिकारियों ने सूचना दी उनकी पहचान हो जाने की सूचना दी। उन्होंने बताया कि जेब में मिले पर्स में एक कागज में नारायण सिंह ग्राम कोलपुड़ी और बसंती देवी नाम दर्ज था। साथ ही उनकी वर्दी के नेम प्लेट पर भी उनका नाम लिखा था।

 

सेना के अधिकारियों ने जयवीर सिंह को बताया कि बर्फ में शव सुरक्षित था, लेकिन बर्फ से बाहर निकालने के बाद शव गलने लगा है, जिससे उसे सुरक्षित किया जा रहा है। साथ ही उनका डीएनए सैंपल लिया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि रिकार्ड के अनुसार नारायण सिंह सेना के मेडिकल कोर में तैनात थे। उनका पार्थिव शरीर बृहस्पतिवार तक गांव पहुंचने की संभावना जताई जा रही है

42 साल राह देखते रहीं पत्नी-

पुरानी यादों में खोये जयवीर सिंह बोले कि माता बसंती देवी ने बताया था कि पति नारायण सिंह सेना में तैनात थे। वह साल में एक बार घर आते थे, अक्सर पत्रों से ही हाल पता लगता था। एक बार एक टेलीग्राम आया जिसमें अंग्रेजी में विमान के लापता होने और उसमें नारायण सिंह के लापता होने की बात लिखी थी। उसके बाद परिवारीजन इंतजार करते रहे लेकिन कोई खबर नहीं आई। मां जब तक जिंदा थी नारायण सिंह का इंतजार करती रहीं। वर्ष 2011 में बसंती देवी की मृत्यु हो गई।

सौम्य स्वभाव के थे नारायण सिंह-

नारायण सिंह के साथी रहे कोलपुड़ी के सूबेदार गोविंद सिंह, सूबेदार हीरा सिंह बिष्ट और भवान सिंह नेगी बताते हैं कि नारायण सिंह बहुत सौम्य स्वभाव के थे। बचपन से ही सेना के प्रति उनका जुनून था। 1965 के भारत-पाक युद्ध में भी उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वे एएमसी में नियुक्त थे।

उत्तराखंड में 6.55 लाख लोगों के घर लगाए जाएंगे स्मार्ट मीटर, अब फोन से कर सकेंगे रिचार्ज।

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र्जा निगम ने प्रदेश में बिजली के पुराने मीटरों को बदलकर स्मार्ट मीटर लगाने की कवायद प्रारंभ कर दी है। कुमाऊं में 6.55 लाख उपभोक्ताओं को नए मीटरों से जोड़ा जाना है। इसके लिए निगम ने अडानी समूह की कंपनी से अनुबंध किया है।

अनुबंध होने के बाद कंपनी ने उपभोक्ताओं के स्तर पर सर्वे शुरू कर दिया है। मैदानी में नगर व ग्रामीण दोनों इलाकों में स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे, जबकि पर्वतीय क्षेत्रों में सिर्फ नगर की परिधि में आने वाले घरों व प्रतिष्ठानों में मीटर बदले जाएंगे।   केंद्र सरकार की पुनर्निर्मित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाया जा रहा है।

मीटर बदलने का कार्य जारी-

अनुबंधित कंपनी के सर्किल प्रभारी हरीश तिवारी ने बताया कि पहले चरण में ऊर्जा निगम के सभी विद्युत उपकेंद्र को स्मार्ट मीटर के लिए विकसित किया जाना है। इसे लेकर सर्वे हो चुका है और हल्द्वानी क्षेत्र के कुछ उपकेंद्रों में नए स्मार्ट वितरण मीटर लगा दिए गए हैं। साथ ही कुमाऊं के अन्य उपकेंद्रों में भी मीटर बदलने का काम चरणबद्ध तरीके से हो रहा है।

वहीं, उपभोक्ता स्तर का सर्वे प्रारंभ कर दिया गया है। इसमें कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेकर्मी घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रहे हैं। एप्लिकेशन के माध्यम से सर्वे किया जा रहा है और पूरा रिकार्ड आनलाइन दर्ज कर रहे हैं। मंडल में 20 हजार सर्वे पूरा होने पर नए मीटर लगाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। इसमें सर्वे और मीटर लगाने का काम समानांतर चलेगा।

ऐसे काम करेगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर-

घरों में लगे बिजली के मीटर की प्रत्येक माह रीडिंग लेकर मीटर रीडर बिल प्रदान करता है। इसमें महीने में उपयोग की गई बिजली के अनुसार बिल प्राप्त होता है, जबकि स्मार्ट मीटर रिचार्ज आधारित होंगे। जिस तरह से मोबाइल फोन रिचार्ज करने पर संचालित होता है, ठीक उसी प्रकार बिजली के मीटर को भी रीचार्ज करना होगा। ऐसे में रिचार्ज के अनुसार ही बिजली आपूर्ति होगी।

अधिकारियों के अनुसार रिचार्ज खत्म होने के 48 घंटे के भीतर भुगतान करने का मौका मिलेगा। इस अवधि में सप्लाई चालू रहेगी।

मोबाइल एप से कर सकेंगे मीटर रीचार्ज-

स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता मोबाइल एप से बिजली खर्च के पल-पल का रिकार्ड देख पाएंगे। इसी से मीटर रिचार्ज भी कर पाएंगे। एप में रिचार्ज खत्म होने को लेकर अलर्ट भी मिलता रहेगा। अनुबंधित कंपनी एप तैयार कर रही है। गूगल प्ले स्टोर और एप स्टोर से इसे डाउनलोड कर पाएंगे।

उपभोक्ता सर्वे में यह पूछा जाएगा-

  • उपभोक्ता संख्या एवं वर्तमान मीटर संख्या
  • उपभोक्ता का मोबाइल नंबर
  • मीटर की वर्तमान रीडिंग
  • बिजली के पुराने बिल

मीटर में लगाया जाएगा एयरटेल का सिम-

स्मार्ट मीटर में मोबाइल की तरह ही सिम कार्ड लगाया जाएगा। मीटर लगा रही कंपनी ने कुमाऊं में निजी दूरसंचार कंपनी एयरटेल के साथ इसके लिए अनुबंध किया है। ऐसे में मंडल के सभी क्षेत्रों में संबंधित कंपनी को अपने नेटवर्क की सुविधा बेहतर तरीके से प्रदान करनी होगी।

सर्वे कर्मियों को बताएं सही मोबाइल नंबर-

स्मार्ट मीटर लगने के बाद उपभोक्ता मोबाइल नंबर काफी अहम हो जाएगा। मीटर रिचार्ज करने के साथ ही उपयोग का विवरण देखने के लिए भी मोबाइल नंबर से ही एप में लागिन करना होगा। ऐसे में घर में सर्वे करने आने वाले कर्मचारी को अपना सही मोबाइल नंबर बताएं। यदि पुराना नंबर या अन्य विवरण परिवर्तित कराना है तो सर्वे के दौरान ही कराया जा सकता है।

 

Uttarakhand: अल्मोड़ा के इस गांव में ग्रामीणों ने लगाया बोर्ड, अब बाहरी व्यक्ति को नहीं बेचेंगे जमीन ।

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प्रदेश में बीते कुछ दिनों से गढ़वाल मंडल के कुछ जिलों में गांवों में बाहरी व्यक्ति के प्रवेश और बाहरी लोगों को जमीन ना बेचने के बोर्ड लगाने का मामले सामने आए थे। ऐसा ही एक मामला अब कुमाऊं से भी सामने आया है। अल्मोड़ा जिले के सल्ट में कालीगाड़ के ग्रामीणों ने भी गांव के प्रवेश पर एक बोर्ड लगाया है। जिसमें लिखा है कि बाहरी व्यक्ति को कोई भी ग्रामीण जमीन नहीं बेचेगा और ना ही अपनी पहचान छिपाकर गांव में घूम सकता है।

अब अल्मोड़ा के इस गांव में भी ग्रामीणों ने लगाया बोर्ड-

प्रदेश में बाहरी व्यक्तियों को जमीन बा बेचने के लिए गांव में लगाए गए बीते कुछ दिनों से चर्चाओं के विषय बने हुए हैं। कुछ गावों में तो विशेष समुदाय के लोगों के आने पर बैन की बातें तक लिखी थी। इसी तरह से कुछ सल्ट के कालीगाड़ के ग्रामीणों ने भी किया है।

अंधाधुंध जमीनों की हो रही खरीद फरोख्त, गांव का माहौल बिगड़ने और प्राकृतिक संसाधनों को दोहन होने से गांव वाले परेशान हैं। जिस कारण उन्होंने गांव में जमीन की खरीद फरोख्त पर रोक लगा दी है। बकायदा इसके लिए गांव के प्रवेश पर एक बड़ा बोर्ड भी लगाया गया है।

पहचान छुपा कर गांव में प्रवेश पर भी बैन-

जहां एक ओर बाहरी व्यक्तियों द्वारा यहां जमीन खरीदने पर बैन लगा दिया गया है। तो वहीं दूसरी ओर पहचान छिपाकर भी कोई बाहरी व्यक्ति गांव में नहीं घूम सकता। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की बात भी बोर्ड पर लिखी गई है। इस बारे में जब ग्रामीणों से पूछा गया तो उनका कहना है कि अपनी प्राकृतिक और सांस्कृतिक धरोहरों को बचाने के लिए उन्हें ऐसा कदम उठाना पड़ा है।

सर्वसम्मति से लिया गया है फैसला-

गांव वालों का कहना है कि वो अपने ग्राम प्रधान के आदेश को मानते हैं। लेकिन इसके साथ ही ये फैसला पूरे गांव की सहमति से लिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सर्व सहमति से लिया गया ये फैसला गांव की भलाई के लिए ही है। इसके साख ही ये कदम उत्तराखंड की उत्तराखंड की संस्कृति को बचाने का भी एक प्रयास है।

 

Uttarakhand: घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को मिलेगी सब्सिडी, शासनादेश हुआ जारी।

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घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 16 सितम्बर 2024 को की गई घोषणा के क्रम में राज्य के घरेलू श्रेणी के विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी प्रदान करने के सम्बन्ध में शासनादेश जारी कर दिया गया है।

 

घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं को बड़ी राहत-

सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार उत्तराखण्ड राज्य में विद्युत उपभोक्ताओं को विद्युत टैरिफ में सब्सिडी निम्नानुसार प्रदान की जाएगी। हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) के घरेलू श्रेणी के ऐसे विद्युत उपभोक्ता जिनका मासिक विद्युत उपभोग 200 यूनिट तक है को लागू विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। हिम-आच्छादित क्षेत्र (Snow bound area) का निर्धारण प्रचलित नियमों के अनुसार सम्बन्धित क्षेत्र की समुद्र तल से ऊंचाई के आधार पर करते हुए ही योजना का लाभ प्रदान किया जायेगा।

सीएम धामी की घोषणा के 10 दिन के भीतर शासनादेश जारी-

अन्य क्षेत्रों के घरेलू श्रेणी के ऐसे उपभोक्ता जिनका अनुबन्धित विद्युत भार 1 किलोवाट तक तथा मासिक विद्युत उपभोग 100 यूनिट तक है, को विद्युत दरों (विद्युत कर सहित) में 50 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की जाएगी। ये सब्सिडी 01 सितम्बर, 2024 से की गई विद्युत खपत पर अनुमन्य होगी। बता दें कि सीएम धामी की घोषणा के 10 दिन के भीतर शासनादेश जारी कर दिए गए हैं।

जनता के हितों को ध्यान में रख सरकार कर रही काम-

राज्य सरकार जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए काम कर रही है। बिजली के बिल में सब्सिडी का निर्णय राज्य के आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्गीय परिवारों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से लिया गया है। इससे राज्य के नागरिकों पर वित्तीय बोझ कम होगा और ऊर्जा के उचित उपभोग को प्रोत्साहन मिलेगा। पर्वतीय हिमाच्छादित क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को विशेष रूप से राहत मिलेगी।

Rudraprayag Accident: बांसवाड़ा के पास सड़क हादसा… अनियंत्रित होकर खाई में गिरा मैक्स वाहन, चालक सहित 7 लोग थे सवार।

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रुद्रप्रयाग के बांसवाड़ा क्षेत्र में एक मैक्स वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया। वाहन में चालक सहित सात लोग सवार बताए जा रहे हैं। सवार सभी लोग स्थानीय थे।

गुरुवार सुबह जानकारी मिले कि एक वाहन बांसवाड़ा में दुर्घटनाग्रस्त होकर सड़क से 15 फीट नीचे गिर गया है। वाहन में चालक सहित सात लोग सवार थे। सभी को हल्की चोटें हैं। जिन्हें पीएचसी अगस्त्यमुनि में भर्ती किया गया है।

सात लोग घायल-

हादसे के दौरान वाहन में मैक्स चालक समेत सात लोग सवार थे. सभी लोगों को हल्की चोट आई है. जिन्हें इलाज के लिए पीएचसी अगस्त्यमुनि में भर्ती कराया गया है. बताया जा रहा है वाहन में सभी स्थानीय लोग सवार थे.

Kedarnath: सोनप्रयाग भूस्खलन क्षेत्र में मलबे से आज 4 शव निकाले गए, मृतकों की संख्या हुई 5, तीन घायल।

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सोनप्रयाग भूस्खलन क्षेत्र में आज मंगलवार को रेस्क्यू के दौरान मलबे में दबे चार शव और निकाले गए। मृतकों की संख्या अब पांच हो गई है। तीन घायल अस्पताल में भर्ती हैं।

सोमवार देर शाम केदारनाथ से लौट रहे आठ यात्री सोनप्रयाग में ऊर्जा निगम के पावर हाउस के समीप भूस्खलन जोन में पहाड़ी से गिर रहे पत्थर व मलबे में फंस गए। सूचना पर उप निरीक्षक आशीष डिमरी के नेतृत्व में एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान एक शव बरामद किया गया, जिसकी शिनाख्त गोपाल (50 ) पुत्र भक्तराम, मध्य प्रदेश के रूप में हुई है।

वहीं, जीवच तिवारी पुत्र रामचरित, मनप्रीत सिंह पुत्र कश्मीर सिंह और छगन लाल पुत्र भक्तरामन घायल हो गए, जिन्हें सोनप्रयाग पहुंचाया गया। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार ने बताया कि सोनप्रयाग बाजार से लगभग एक किमी आगे भूस्खलन जोन में पहाड़ी से पत्थर व मलबा गिरने से वह फंस गए थे। क्षेत्र में अन्य यात्रियों की होने की संभावना को देखते हुए खोजबीन की जा रही थी, जिसमें आज मंगलवार को तीन शव बरामद हुए।

उत्तराखंड में इन 11 विभागों में 4,400 पदों पर होगी भर्ती, जानिये कब से शुरू होगी भर्ती प्रक्रिया।

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प्रदेश में 11 सरकारी विभागों में खाली पदों पर बंपर नौकरियां निकलने वाली हैं। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग 15 सितंबर से 4,400 पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करेगा, जिसमें पुलिस, वन आरक्षी समेत इंटर और स्नातक स्तरीय पदों पर नौकरी के अवसर मिलेंगे।

 

इसके अलावा आयोग की ओर से आवेदन से लेकर परीक्षा और परिणाम जारी करने का शेड्यूल तैयार करने में जुटा है। प्रदेश सरकार ने अब तक कई विभागों में 16 हजार पद पर चयन प्रक्रिया पूरी कर युवाओं को नौकरी दी है, जो तीन साल के भीतर सबसे अधिक नौकरी देने का रिकॉर्ड है।

 

सीएम धामी चयनित युवाओं को नियुक्तिपत्र देकर सम्मानित किया। अब सरकार ने राज्य के 11 विभागों में खाली पदों पर 4,400 भर्ती करने का निर्णय लिया है। सीएम ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को विभागों से मिले खाली पदों के प्रस्ताव पर पारदर्शिता और समय सीमा के भीतर भर्ती करने के निर्देश दिए हैं।

 

आयोग के अध्यक्ष जीएस मर्तोलिया ने बताया, 11 विभागों से करीब 4,400 खाली पदों के अधियाचन मिले हैं। इन पदों की भर्ती की तैयारी पूरी कर ली गई है। इस माह के 15 सितंबर से आवेदन की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

इन पदों पर मिलेगी नौकरी-

पुलिस आरक्षी के 2,000, वन आरक्षी के 700, इंटर स्तरीय सींचपाल, कनिष्ठ सहायक, राजस्व सहायक, मेट, कार्य पर्यवेक्षक के 1,200, वैयक्तिक सहायक के 280, वैज्ञानिक सहायक के 50, स्नातक स्तरीय 50, सहायक विकास अधिकारी के 40, वाहन चालक 25, लाइब्रेरियन के 10, प्राथमिक शिक्षक एसटी के 15, आईटीआई के कई ट्रेड पर 35 पदों पर भर्ती।

प्रदेश में 4,400 पदों पर युवाओं को नौकरी मौका मिलने जा रही है। अब तक 16 हजार युवाओं को विभागों में नौकरी मिल चुकी है। सरकार ने राज्य में देश का सबसे सख्त नकलरोधी कानून बनाने के बाद प्रतिभावान युवाओं को अब चार-चार नौकरियों में चयन हो रहा है। पहले नकल माफिया की ओर से नौकरी का सौदा करने से एक ही परिवार के सदस्यों को चार-चार नौकरियां मिलती थी। हमने संकल्प लिया कि उत्तराखंड के हितों और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। -पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

Uttarakhand: बोटियों के लिए खुशखबरी….उच्च शिक्षा के लिए अब हर साल कुछ धनराशि देगी सरकार, जानिये किस योजना में होगा बदलाव.

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नंदा गौरा योजना के तहत बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए सरकार हर साल कुछ धनराशि देगी। इसके लिए नंदा गौरा योजना में बदलाव किया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभागीय अधिकारियों को इसके लिए एक महीने के भीतर विस्तृत रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

प्रदेश की दो देवियों नंदा और गौरा के नाम पर शुरू की गई नंदा गौरा योजना के तहत वर्तमान में सरकार बेटियों के जन्म पर 11,000 रुपये और उसके 12वीं पास करने पर 51,000 रुपये की धनराशि देती है, लेकिन सरकार अब इस योजना में बदलाव करने जा रही है।

 

उच्च शिक्षा में बढ़ेगा प्रतिभाग-
सरकार की मंशा है कि इस योजना को सुकन्या समृद्धि योजना से जोड़ते हुए हर साल पात्र बेटियों के खाते में कुछ धनराशि दी जाए। जो 10,000 या इससे अधिक हो सकती है। बेटियों को उच्च शिक्षा में प्रेरित करने के लिए यह धनराशि दी जाएगी, जिससे उनका उच्च शिक्षा में प्रतिभाग बढ़ेगा।

वहीं, हर साल दी जाने वाली इस धनराशि से बेटियों को उच्च शिक्षा के खर्च को वहन करने में सहायता मिलेगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने विभागीय अधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए हैं। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद नंदा गौरा योजना में जरूरी बदलाव के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।

प्रस्ताव तैयार किए जाने के दौरान यह देखा जा रहा कि योजना के तहत पात्र बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए हर साल तय धनराशि दी जाए या फिर अलग-अलग कोर्स के लिए अलग-अलग धनराशि दी जाए।

हर जिले में बनेंगे कामकाजी महिला छात्रावास-

प्रदेश के हर जिले में कामकाजी महिला छात्रावास का निर्माण किया जाएगा, जिसे पीपीपी मोड में संचालित करने का प्रस्ताव है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में भूमि की उपलब्धता और इसे पीपीपी मोड में चलाने के लिए रूपरेखा तैयार करने के निर्देश दिए हैं।

ये है नंदा गौरा योजना-

नंदा गौरा योजना राज्य लड़कियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई एक विशेष योजना है। दो देवियों नंदा और गौरा के नाम से शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि लड़कियों को बेहतर अवसर मिलें। इसका लक्ष्य गरीब परिवारों की लड़कियों की मदद करना है। इन लड़कियों को एक अच्छा जीवन जीने और अच्छी शिक्षा प्राप्त करने का अवसर देना है।

 

Uttarakhand: अब उत्तराखंड में महिलाओं को वाहन पर सरकार देगी 50 प्रतिशत सब्सिडी, यहां से शुरू होगी पहले चरण की शुरुआत।

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प्रदेश में आर्थिक रूप से कमजोर महिला-बालिकाओं के स्वरोजगार के लिए सरकार 50 फीसदी अनुदान (सब्सिडी) पर बाइक, स्कूटी, ऑटो और कार देगी। वहीं, शेष 50 फीसदी का ऋण दिया जाएगा। महिला सारथी योजना के तहत पहले चरण में देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जिले से योजना की शुरूआत होगी।

महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास विभाग के निदेशक प्रशांत आर्य के मुताबिक केंद्र सरकार की ओर से निर्भया फंड से इस योजना को वित्त पोषित किया जाएगा। परिवहन विभाग इस तरह की महिला-बालिकाओं को वाहन चलाने का मुफ्त प्रशिक्षण और लाइसेंस देगा।

पहले चरण के बाद योजना अन्य जिलों में होगी शुरू-

महिला सारथी योजना के तहत शुरूआत में चार जिलों में 200 महिलाओं को इस योजना से लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना को लेकर विभाग की तीन बैठकें हो चुकी हैं। दो जुलाई 2024 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई बैठक में भी इस मसले पर अधिकारियों ने जानकारी दी थी। पहले चरण के बाद योजना को अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा।

 

मुख्यमंत्री के विजन 2025 के लिए विभाग की ओर से इस नवाचारी योजना का प्रस्ताव है। योजना को केंद्र सरकार के निर्भया फंड से पोषित किया जाएगा। इससे जहां एक और महिला-किशोरियों में सुरक्षा का भाव पैदा होगा। वहीं, दूसरी ओर वे आर्थिक रूप से सशक्त होंगी। – आरती बलोदी, राज्य नोडल अधिकारी, केंद्र पोषित योजनाएं

उत्तराखंड में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, देहरादून-हरिद्वार समेत कई जिलों के डीएम बदले।

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उत्तराखंड में देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है। कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को सचिव सीएम की जिम्मेदारी भी दी गई है। हरिश्चंद्र सेमवाल नए आबकारी आयुक्त होंगे। झरना कमठान को महानिदेशक विद्यालयी शिक्षा का जिम्मा दिया है।

सोनिका के स्थान पर सविन बंसल को देहरादून का डीएम बनाया गया है। धीराज सिंह गर्ब्याल की जगह कर्मेंद्र सिंह को हरिद्वार का डीएम बनाया है। वहीं, पिथौरागढ़ की डीएम रीना जोशी की जगह विनोद गिरी गोस्वामी को जिम्मेदारी सौंपी है। बागेश्वर की डीएम अनुराधा पाल का तबादला अपर सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा पद पर किया गया है। उनकी जगह आशीष भटगई को भेजा गया है।

चमोली के डीएम हिमांशु खुराना का तबादला मुख्य कार्याधिकारी पीएमजीएसवाई व सचिव सेवा का अधिकार आयोग के पद पर किया है, उनकी जिम्मेदारी संदीप तिवारी को दी गई है। अल्मोड़ा के डीएम विनीत तोमर का तबादला एमडी प्रबंधन केएमवीएन के पद पर किया है, यहां आलोक कुमार पांडे को भेजा है। कुल 32 अफसरों को इधर से उधर किया गया है।